एपिसोड 107: प्राचीन गर्भगृह और सृष्टि-कु...
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एपिसोड 107: प्राचीन गर्भगृह और सृष्टि-कु...
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एपिसोड 107: प्राचीन गर्भगृह और सृष्टि-कुंड का रहस्य
हमने लास्ट एपिसोड में सुना कि .....
युग और उसकी टीम एक अंधी खाई में कूद गए थे।
कमांडर सूर्य और युग ने मिलकर सबको सुरक्षित नीचे उतारा था।
वे ओरोन ग्रह के एक बेहद प्राचीन खंडहर में पहुँचे थे।
सामने एक विशाल काले धातु का दरवाजा मौजूद था।
दरवाजे के ताले का सांचा कमांडर सूर्य के हथौड़े के आकार का था।
गुरु ने डार्क लहर को रोककर टीम को कुछ पलों की मोहलत दी थी।
युग ने अपनी भूरी ऊर्जा से कमांडर सूर्य को दरवाजे तक धकेला था।
कमांडर ने अपना हथौड़ा सांचे में ठोककर दरवाजा आधा खोल दिया था।
तभी मृत्यु-देवता और डार्क परछाईं उनके ठीक सामने आ गिरे थे।
मृत्यु-देवता की डार्क तलवार कमांडर सूर्य की गर्दन तक पहुँच चुकी थी।
अब आगे इस कहानी में.....
शून्य-आयाम स्तर की वह विशाल डार्क तलवार हवा को चीरती हुई नीचे आई।
कमांडर सूर्य के पास उस खौफनाक वार से बचने का कोई समय नहीं था।
उनकी गर्दन और उस मौत के बीच सिर्फ कुछ इंच का ही फासला बचा था।
युग, रुद्र और कियान चाहकर भी उस गति को नहीं पकड़ सकते थे।
कमांडर सूर्य ने अपनी आँखें नहीं मूंदीं, बल्कि अपने हथौड़े को देखा।
उनका पीला हथौड़ा अभी भी उस काले धातु के सांचे में फँसा हुआ था।
कमांडर सूर्य (मन में): स्वर्ण-गुरुत्व आकर्षण
उन्होंने अपनी पीली ऊर्जा का खिंचाव अपने ही हथौड़े पर केंद्रित कर दिया।
हथौड़े के भारी गुरुत्वाकर्षण ने उनके शरीर को एक झटके में आगे खींच लिया।
वे किसी चुंबक की तरह सीधे उस भारी दरवाजे से जा टकराए।
मृत्यु-देवता की डार्क तलवार उनकी गर्दन के ठीक पीछे से सनसनाती हुई निकल गई।
लेकिन शून्य-आयाम स्तर की उस डार्क तलवार का दबाव बहुत भयानक था।
तलवार की डार्क हवा ने कमांडर सूर्य की पीठ का मजबूत कवच चीर कर रख दिया।
उनके मुँह से खून की एक बड़ी धार निकली और वे दरवाजे की चौखट पर गिर पड़े।
मृत्यु-देवता ने अपनी क्रूर आँखों से घायल कमांडर को घूरा।
उसने तुरंत अपनी तलवार को वापस घुमाया ताकि वह दूसरा वार कर सके।
डार्क परछाईं की जहरीली जंजीरें भी दरवाजे की तरफ साँप की तरह रेंगने लगीं।
लेकिन तभी उस आधे खुले हुए दरवाजे के अंदर से एक भयंकर रोशनी फूटी।
वह कोई साधारण रोशनी नहीं थी, वह ओरोन ग्रह की सबसे प्राचीन ऊर्जा थी।
वह रोशनी इतनी तीव्र थी कि उसने खंडहर के डार्क दबाव को पल भर में धो दिया।
रोशनी के उस प्राचीन झटके से मृत्यु-देवता की आँखें चौंधिया गईं।
डार्क परछाईं की जंजीरें उस रोशनी को छूते ही जलकर राख होने लगीं।
वे दोनों शून्य-आयाम स्तर के दैत्य भी उस पवित्र रोशनी के सामने पीछे हटने को मजबूर हो गए।
यही वह एकमात्र पल था जिसका फायदा टीम उठा सकती थी।
रुद्र ने बिना एक पल गंवाए घायल गुरु को अपने कंधे पर उठा लिया।
कियान ने अपनी हरी वायु से रुद्र को दरवाजे की तरफ धकेल दिया।
कियान (मन में): पवन-तीव्र चक्र
हवा के तेज धक्के से रुद्र और गुरु उस आधे खुले दरवाजे के अंदर खिसक गए।
युग ने अपनी हल्की भूरी ऊर्जा को पैरों में समेटा और दरवाजे की तरफ छलांग लगा दी।
उसका बायां कंधा अभी भी डार्क जहर के कारण दर्द से सुन्न पड़ा था।
जैसे ही युग दरवाजे के अंदर पहुँचा, उसने कमांडर सूर्य का कॉलर मजबूती से पकड़ लिया।
कमांडर सूर्य की पीठ खून से लथपथ थी और उनकी साँसें भारी चल रही थीं।
कमांडर ने अपनी आखिरी ताकत लगाकर अपना पीला हथौड़ा सांचे से बाहर खींच लिया।
हथौड़ा बाहर निकलते ही वह विशाल काला दरवाजा तेजी से बंद होने लगा।
बाहर मृत्यु-देवता की आँखें वापस खुल चुकी थीं और उसका गुस्सा आसमान छू रहा था।
मृत्यु-देवता (दहाड़ते हुए): "तुम इस ओरोन की कब्र से बाहर नहीं निकल पाओगे!"
उसने अपनी डार्क तलवार को बंद होते हुए दरवाजे की दरार में घुसाने की कोशिश की।
लेकिन वह प्राचीन दरवाजा एक भयंकर गड़गड़ाहट के साथ पूरी तरह बंद हो गया।
धातु के टकराने की भारी गूँज उस नई जगह में दूर तक फैल गई।
दरवाजा बंद होते ही बाहर का सारा शोर, दबाव और मौत का खौफ एकदम शांत हो गया।
टीम अब एक बिल्कुल नई और अज नबी जगह पर खड़ी थी।
यहाँ की हवा में एक अजीब सी शांति और शुद्धता थी, जिसमें डार्क ऊर्जा का कोई नामोनिशान नहीं था।
यह एक बेहद विशाल और गोलाकार कक्ष था, जो किसी सफेद संगमरमर से बना लग रहा था।
कक्ष की छत इतनी ऊँची थी कि वह अंधेरे में गायब हो रही थी।
चारों तरफ सफेद और हल्की नीली रोशनी वाले प्राचीन क्रिस्टल लगे हुए थे।
रुद्र ने गुरु को धीरे से उस सफेद फर्श पर लिटा दिया।
कमांडर सूर्य भी घुटनों के बल गिर पड़े और उनके हथौड़े ने जमीन पर भारी आवाज की।
उनकी पीठ का घाव बहुत गहरा था और उसमें से लगातार खून बह रहा था।
कियान ने तुरंत अपनी वर्दी का एक हिस्सा फाड़कर उनके घाव पर कसकर बाँध दिया।
युग ने अपनी साँसों को काबू किया और उस शांत कक्ष को ध्यान से देखने लगा।
उसकी सूक्ष्म-दृष्टि स्तर की मानसिक तरंगें चारों तरफ फैलने लगीं।
कक्ष के बिल्कुल बीचों-बीच एक बहुत बड़ा और प्राचीन चबूतरा बना हुआ था।
चबूतरे के ऊपर एक पारदर्शी और चमकता हुआ स्फटिक हवा में तैर रहा था।
उस स्फटिक के अंदर कोई बहुत ही रहस्यमयी और प्राचीन ऊर्जा कैद थी।
जैसे ही युग ने उस स्फटिक की तरफ अपने कदम बढ़ाए, उसके हृदय-कुंड की ऊर्जा भड़कने लगी।
उसकी हल्की भूरी ऊर्जा बिना किसी नियंत्रण के उसके शरीर से बाहर छलकने लगी।
वह भूरी आभा उस तैरते हुए स्फटिक की तरफ किसी चुंबक की तरह खिंच रही थी।
तभी उस शांत कक्ष में एक बहुत ही पुरानी और गूँजती हुई आवाज सुनाई दी।
वह आवाज किसी इंसान की नहीं, बल्कि खुद उस कक्ष की दीवारों से आ रही थी।
आवाज (गूँजते हुए): "हजारों साल बाद... ओरोन का एक वारिस इस पवित्र गर्भगृह में लौट आया है।"
गुरु ने अपनी कमजोर आँखें खोलीं और उस चमकते हुए चबूतरे की तरफ देखा।
गुरु (काँपती हुई आवाज में): "युग... यह कोई आम खंडहर नहीं है।"
"यह ओरोन ग्रह का पहला और सबसे प्राचीन ऊर्जा-स्रोत है... 'सृष्टि-कुंड'!"
मृत्यु-देवता और डार्क परछाईं दरवाजे के बाहर लगातार भयंकर वार कर रहे थे।
हर प्रहार के साथ वह अजेय काला दरवाजा हल्का-हल्का काँप रहा था।
शून्य-आयाम स्तर के उन दैत्यों के लिए यह दरवाजा हमेशा के लिए बंद नहीं रह सकता था।
उन्हें कुछ ही समय में इस प्राचीन दरवाजे को तोड़ने का रास्ता मिल ही जाएगा।
युग के पास इस रहस्य को समझने और अपनी टीम को बचाने के लिए बहुत कम समय था।
अब क्या करेगा युग जब बाहर मृत्यु-देवता मौत बनकर खड़ा है और सामने ओरोन ग्रह का सबसे प्राचीन रहस्य 'सृष्टि-कुंड' मौजूद है? जानने के लिए सुनते रहिये महासंग्राम !
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