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इमारत

ताजमहल

दिल्ली का लाल किला

फतेहपुर सीकरी

हुमायूँ का मकबरा

प्रमुख मुगलकालीन इमारतें

वास्तुकार

उत्कर्ष प्रकाश

उस्ताद ईसा खाँ एवं उस्ताद अहमद लाहौरी हमीद एवं अहमद बहाउद्दीन

मलिक मिर्जा ग्यास

आगरा का किला

उत्तर मुगल कालीन शासक

कासिम खाँ

बहादुरशाह 1707-1712 ई०

जहाँदार शाह 1712 1713 ई०

फर्रुखसियर 17131719 ई०

5 जून, 1674 ई. को छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ में वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक

करवाया।

छत्रपति शिवाजी महाराज को औरंगजेब ने मई, 1666 ई. में जयपुर भवन में कैद कर लिया, जहाँ से वे 16 अगस्त, 1666 ई. में भाग निकले।

3 अप्रैल, 1680 ई. को छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु हो गयी। महाराष्ट्र के प्रमुख संत

1.

2.

+

मुहम्मदशाह 17191748 ई०

+

अहमदशाह 1748 1754 ईο

+

आलमगीर-II 1754 1759 ई०

शाहआलम II 17591806 ई०

अकबर-II 1806 1837 ई०

बहादुरशाह जफर 1837 1857 ई०

3.

4.

5.

·

·

·

.

·

·

मराठा साम्राज्य

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज थे। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 6 अप्रैल, 1627 ई. में शिवनेर दुर्ग में हुआ था।

छत्रपति शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी भोंसले एवं माता का नाम जीजाबाई था।

शाहजी भोंसले की दूसरी पत्नी का नाम तुकाबाई मोहिते था। छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु कोंडदेव थे।

आध्यात्मिक क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के आचरण पर गुरु रामदास का प्रभाव था।

छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह साइबाई निम्बालकर से 1640

ई० में हुआ।

शाहजी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को पूना की जागीर प्रदान कर स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली।

अपने सैन्य अभियान के अन्तर्गत 1644 ई० में छत्रपति शिवाजी महाराज ने सर्वप्रथम बीजापुर के तोरण नामक पहाड़ी किले पर अधिकार किया।

1656 ई० में छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।

बीजापुर के सुल्तान ने अपने योग्य सेनापति अफजल खाँ को सितम्बर, 1665 ई. में छत्रपति शिवाजी महाराज को पराजित करने के लिए भेजा। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अफजल खाँ की हत्या कर दी।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने सूरत को 1664 ई. एवं 1679 ई. में लूटा।

पुरन्दर की संधि 1665 ई. में महाराजा जयसिंह एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के मध्य सम्पन्न हुई।

1672 ई. में छत्रपति शिवाजी महाराज ने पन्हाला दुर्ग को बीजापुर से छीना ।

ज्ञानदेव या ज्ञानेश्वर (1275-1296 ): महाराष्ट्र में भक्ति आदोलन के जनक, मराठी भाषा और साहित्य के संस्थापक, भगवद्गीता पर भावार्थदीपिका नामक वृहत टीका लिखी, जिसे सामान्य रूप से ज्ञानेश्वरी के नाम से जाना जाता है।

नामदेव (1270-1350): इनके अराध्य देव पांढरपुर के बिठोबा या विठ्ठल (विष्णु के रूप) थे। बिठोबा या विठ्ठल की उपासना को वरकरी संप्रदाय के नाम से जाना जाता है, जिसकी स्थापना नामदेव ने की थी।

एकनाथ (1533-1599): इन्होंने रामायण पर भावार्थ रामायण नामक टीका लिखी।

तुकाराम (1598-1650): इन्होंने भक्तिपरक कविताएँ लिखी जिन्हें अभंग कहा जाता है। ये अभंग भक्तिपरक काव्य के ज्योतिपुंज है। रामदास (1608-1681): महाराष्ट्र के अंतिम महान संत कवि । दशबोध इनकी रचनाओं और उपदेशों का संकलन है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था। अष्टप्रधान में पेशवा का पद सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं सम्मान का होता था।

पेशवा (प्रधानमंत्री) - राज्य का प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था की देख-रेख । सर-ए-नौबत (सेनापति) सैन्य प्रधान

-

अमात्य (राजस्व मंत्री) आय-व्यय का लेखा-जोखा वाकयानवीस

अध्यक्ष

-

सूचना, गुप्तचर एवं संधि-विग्रह के विभागों का

चिटनिस राजकीय पत्रों को पढ़कर उसकी भाषा-शैली को देखना । सुमन्त विदेश मंत्री

पंडित राव धार्मिक कार्यों के लिए तिथि का निर्धारण न्यायाधीश न्याय विभाग का प्रधान

छत्रपति शिवाजी महाराज ने दरबार में मराठी को भाषा के रूप में प्रयोग किया।

छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना तीन महत्त्वपूर्ण भागों में विभक्त थी- 1. पागा सेना: नियमित घुड़सवार सैनिक | 2. सिलहदार अस्थायी 3. पैदल पैदल सेना।

घुड़सवार

सैनिक।

छत्रपति शिवाजी महाराज की कर व्यवस्था मलिक अम्बर की कर- व्यवस्था पर आधारित थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने रस्सी द्वारा माप की व्यवस्था के स्थान पर काठी एवं मानक छड़ी के प्रयोग को

आरंभ किया।

छत्रपति शिवाजी महाराज के ���मय कुल उपज का 33% भाग राजस्व के रूप में वसूला जाता था जो बाद में बढ़कर 40% हो गया था। चौथ एवं सरदेशमुखी नामक कर छत्रपति शिवाजी महाराज के द्वारा

लगाया गया।

- किसी एक क्षेत्र को बरबाद न करने के बदले दी जाने वाली रकम को कहा गया है।

246

उत्कर्ष प्रकाशन

सरदेशमुखी इसके हक का दावा करके छत्रपति शिवाजी महाराज स्वयं को सर्वश्रेष्ठ देशमुख प्रस्तुत करना चाहते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी

·

.

·

छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्तराधिकारी शम्भाजी था। शम्भाजी ने उज्जैन के हिन्दी एवं संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान कवि कलश को अपना सलाहकार नियुक्त किया।

मार्च, 1689 ई. को मुगल सेनापति मखर्रब खाँ ने संगमेश्वर में छिपे हुए शम्भाजी एवं कवि कलश को गिरफ्तार कर लिया और उसकी हत्या कर दी।

शम्भाजी के बाद 1689 ई. में राजाराम का नए छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक किया गया।

राजाराम ने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया।

राजाराम मुगलों से संघर्ष करता हुआ 2 मार्च, 1700 ई. में मारा गया। राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी ताराबाई अपने 4 वर्षीय पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज II का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई।

साहू एवं ताराबाई के बीच 1707 ई. में खेड़ा का युद्ध हुआ, जिसमें साहू विजयी हुआ।

1713 ई. में साहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया।

बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद वर्ष 1720 ई. में बाजीराव प्रथम को पेशवा बनाया गया।

पालखेड़ा का युद्ध 7 मार्च, 1728 ई. बाजीराव प्रथम एवं निजामुलमुल्क के बीच हुआ जिसमें निजाम की हार हुई। निजाम के साथ मुंगी शिवगाँव की संधि हुई।

दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था, जिसने 29 मार्च, 1737 ई. को दिल्ली पर धावा बोला था। उस समय मुगल बादशाह मुहम्मदशाह दिल्ली छोड़ने के लिए तैयार हो गया था। बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से संबंध होने के कारण चर्चित रहा था।

1740 ई० में बाजीराव प्रथम की मृत्यु हो गयी।

बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव 1740 ई० में पेशवा बना।

1750 ई० में संगोला संधि के बाद पेशवा के हाथ में सारे अधिकार सुरक्षित हो गए।

बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता था। झलकी की संधि हैदराबाद के निजाम एवं बालाजी बाजीराव के मध्य हुई।

बालाजी बाजीराव के समय में ही पानीपत का तृतीय युद्ध (14 जन०, 1761) हुआ, जिसमें मराठों की हार हुई। इस हार को नहीं सह पाने के कारण बालाजी की मृत्यु 1761 में हो गयी।

माधवराव नारायण प्रथम 1761 ई० में पेशवा बना। इसने मराठों की खोयी हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया।

पेशवा माधवराव नारायण-II की अल्पायु के कारण मराठा राज्य की देख-रेख बारह भाई सभा नाम की 12 सदस्यों की एक परिषद् करती थी। इस परिषद् के दो महत्त्वपूर्ण सदस्य थे महादजी सिंधिया एवं नाना फड़नवीस

नाना फड़नवीस का मूल नाम बालाजी जनार्दन भानु था। अंग्रेज जेम्स ग्रांट डफ ने इन्हें मराठों का मैकियावेली कहा था।

अंतिम पेशवा राघोवा का पुत्र बाजीराव II था, जो अंग्रेजों की सहायता से पेशवा बना था।

मराठों के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था यह सहायक संधि स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था।

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध: 1775-82 ई० तक चला। इसके बाद 1776 ई० में पुरन्दर की संधि हुई। इसके तहत कम्पनी ने रघुनाथ राव के समर्थन को वापस लिया।

द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्धः 1803-05 ई० में हुआ। इसमें भोंसले (नागपुर) ने अंग्रेजों को चुनौती दी। इसके फलस्वरूप 7 सितम्बर, 1803 को देवगाँव की संधि हुई।

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्धः 1816-18 ई० में हुआ। इस युद्ध के बाद मराठा शक्ति और पेशवा के वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया गया। पेशवा बाजीराव II ने कोरेगाँव एवं अष्टी के युद्ध में हारने के बाद फरवरी, 1818 में मेल्कम के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया। अंग्रेजों ने पेशवा के पद को समाप्त कर बाजीराव II को कानपुर के निकट बिठूर में पेंशन पर जीने के लिए भेज दिया, जहाँ 1853 ई० में इसकी मृत्यु हो गयी।

अंग्रेज-मराठा संघर्ष के अन्तर्गत होने वाली प्रमुख संधियाँ

सूरत की संधि 1775 पुरन्दर की संधि 1776 बड़गाँव की संधि 1779 सालबाई की संधि 1782 बसीन की संधि 1802 देवगाँव की संधि 1803 सुर्जी अर्जुनगाँव की संधि 1803 राजापुर घाट की संधि 1804 नागपुर की संधि 1816 ग्वालियर की संधि 1817 पूना की संधि 1817

मंदसौर की संधि 1818

यूरोपीयन कम्पनियों का आगमन

भारत में यूरोपियन्स के आगमन का क्रम

कंपनी

आगमन

फैक्ट्री

स्थापना

.

माधवराव ने ईस्ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह आलम-II को पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठाया। मुगल बादशाह अब मराठों का पेंशनभोगी बन गया।

पुर्तगाली

1498.

कोचीन

1503 ई.

डच

1596 €

मछलीपट्टनम

1605 €

अंग्रेज

1608 €

मछलीपट्टनम

1611

पेशवा नारायण राव (1772-73) की हत्या उसके चाचा रघुनाथ राव

डेनमार्क

1616 ई.

तंजौर

1620 €

के द्वारा कर दी गई।

फ्रांसीसी

1664 €

सुरत

1668 €

: 247

पुर्तगालियों का आगमन :

उत्कर्ष प्रकाश

+ प्रथम यूरोपीय यात्री वास्को डि गामा समुद्री यात्रा के बाद अब्दुल

+

मनीक नामक गुजराती पथ प्रदर्शक की सहायता से 1498 ई. में कालीकट (भारत) के समुद्री तट पर उतरा।

वास्को-डि-गामा के बाद पुर्तगालियों ने भारत में कालीकट, गोवा, दमन, दीव एवं हुगली के बंदरगाहों पर अपनी व्यापारिक कोठियाँ स्थापित की।

पुर्तगालियों ने 1503 ई. में कोचीन (भारत) में अपने पहले दुर्ग की स्थापना की।

1505 ई. में फ्रांसिस्को द अल्मीडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय

बन कर आया।

अल्मीडा के बाद अल्फांसो डी अल्बुकर्क 1509 ई. में पुर्तगालियों का दूसरा वायसराय बनकर भारत आया उसने कोचीन को अपना मुख्यालय बनाया।

नोट- अल्फांसो डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

अल्बुकर्क के बाद नीनो-डी-कुन्हा अगला पुर्तगीज गवर्नर बनकर भारत आया । 1530 ई. में उसने अपना कार्यालय कोचीन से गोवा स्थानान्तरित किया और गोवा को पुर्तगाल राज्य की औपचारिक राजधानी बनाई।

भारत में गोधिक स्थापत्य कला का आगमन पुर्तगालियों के साथ हुआ पुर्तगालियों ने गोवा, दमन और दीव पर वर्ष 1961 तक शासन किया। गोवा में सर्वप्रथम प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना पुर्तगालियों द्वारा की गई थी। डचों का आगमन:

+

+

भारत में डच कम्पनी का उद्देश्य कालीमिर्च तथा मसालों के व्यापार पर एकाधिकार करना था।

1596 ई. में भारत में आने वाला प्रथम डच नागरिक कारनोलिस-ड- हस्तमान था।

मार्च, 1602 की एक राजकीय घोषणा के आधार पर 'यूनाइटेड ईस्ट इण्डिया कम्पनी ऑफ द नीदरलेण्ड' की स्थापना की गई।

डचों ने भारत में अपना पहला कारखाना 1605 ई. में मछलीपट्टनम में खोला।

भारत में डचों का मुख्यालय नागपट्टनम था।

मैं

डचों का भारत में अन्तिम रूप से पतन 1759 ई. में अंग्रेजों एवं डचों के मध्य हुए 'बेदारां के युद्ध' में हुआ। इस युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व कर्नल फोर्ड ने किया था।

भारत में सर्वप्रथम संयुक्त पूँजी कम्पनी डचों ने प्रारम्भ की थी।

डचों ने चिनसुरा में गुस्तावुस तथा कोच्चि में फोर्ट विलियम नामक किले का निर्माण करवाया था।

अंग्रेजों का आगमन:

+

+

इंग्लैण्ड की रानी एलिजाबेथ I के समय में 31 दिसम्बर, 1600 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना हुई जिसे महारानी एलिजाबेथ पूर्वी देशों से व्यापार करने के लिए चार्टर प्रदान किया।

1608 ई. में ब्रिटेन के सम्राट जेम्स प्रथम ने कैप्टन हॉकिन्स को मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में भेजा।

1611 ई. में दक्षिण-पूर्वी समुद्र तट पर सर्वप्रथम अंग्रेजों ने मछलीपट्टनम में व्यापारिक कोठी की स्थापना की।

1615 ई. में सम्राट जेम्स-1 ने सर टॉमस रो को अपना राजदूत बना कर जहाँगीर के पास भेजा।

1651 ई. में बंगाल में सर्वप्रथम अंग्रेजों ने व्यापारिक छूट प्राप्त की। राजकुमार शुजा की अनुमति से अंग्रेजों ने बंगाल में अपनी प्रथम कोठी 1651 ई. में हुगली में स्थापित की।

1661 ई. में इंग्लैण्ड के सम्राट चार्ल्स-II का विवाह पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन से हुआ तथा चार्ल्स को बम्बई दहेज के रूप में प्राप्त हुआ।

डेन लोगों का आगमन:

डेनमार्क की 'ईस्ट इण्डिया कम्पनी' की स्थापना 1616 ई. में हुई। इस कम्पनी ने 1620 ई. में कोबार (तमिलनाडु) तथा 1667 ई. में सेरामपुर में अपनी व्यापारिक फैक्ट्रियाँ स्थापित की। सेरामपुर इनका प्रमुख व्यापारिक केन्द्र था। 1845 ई. में डेन लोगों ने वाणिज्य कंपनी को अंग्रेजों को बेच दिया।

फ्रांसीसियों का आगमन

फ्रांसीसियों ने भारत में सबसे अन्त में प्रवेश किया। फ्रांस के सम्राट लुई 14 वें के मंत्री कोलबर्ट के सहयोग से 1664 ई. में भारत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना हुई।

भारत में फ्रांसीसियों की पहली कोठी सूरत में 1668 ई. में स्थापित की गई।

गोलकुण्डा रियासत के सुल्तान से अधिकार-पत्र प्राप्त करने के बाद फ्रांसीसियों ने अपनी दूसरी व्यापारिक कोठी की स्थापना 1669 ई. में मछलीपट्टनम में की थी।

1673 ई. में फ्रांसीसियों ने पांडिचेरी की नींव डाली। फ्रेंको मार्टिन पांडिचेरी का प्रथम गवर्नर बना था।

प्लासी का युद्ध (23 जून, 1757 )

बंगाल पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु क्लाइव ने नवाब के सेनापति मीर जाफर, जगत सेठ, राय दुर्लभ एवं अमीरचन्द के साथ मिलकर षड्यंत्र किया। जिसके तहत् मीर जाफर को नवाब बनाना तय किया

गया।

23 जून, 1757 को मुर्शिदाबाद के दक्षिण में प्लासी के मैदान में युद्ध लड़ा गया।

अंग्रेजों से बड़ी सेना के बावजूद नवाब को इस युद्ध से भागना पड़ा तथा बाद में मारा गया।

इस युद्ध के बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के सहयोग से मीर जाफर बंगाल के का नवाब बना। ईस्ट इंडिया कंपनी को अपदस्थ नवाब सिराजुद्दौला से कलकत्ता पर आक्रमण करने के मुआवजे स्वरूप 1.77 करोड़ रुपये भी मिले।

बक्सर का युद्ध (अक्टूबर, 1764)

मीर कासिम ने अवध के नवाब शुजाउदीला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय, जो अवध में रह रहा था, का समर्थन प्राप्त किया और शुजाउद्दौला के बहुत से अधिकारियों और अधीनस्थों को अपने पक्ष में कर लिया।

1764 ई. में बक्सर की लड़ाई में कंपनी की सेना के कमांडर हेक्टर मुनरो ने शुजाउदौला और मीर कासिम को बुरी तरह परास्त कर दिया। इस बीच मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने बनारस में कंपनी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

पूरा

बक्सर के युद्ध ने प्लासी के अधूरे कार्यों को किया वी. ए. स्मिथ के. के. दत्ता ने लिखा है 'प्लासी के युद्ध की अपेक्षा बक्सर का युद्ध

परिणामों की दृष्टि से अधिक निर्णायक था।'

बक्सर युद्ध के समय बंगाल का नवाब मीर जाफर था।

248

सहायक संधि-लॉर्ड वेलेजली

उत्कर्ष प्रकाश

अपने साम्राज्यवादी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लॉर्ड वेलेजली ने एक नीति अपनाई, जो 'सहायक संधि' कहलाई।

सहायक संधि स्वीकार करने वाले राज्य की आंतरिक शांति और

व्यवस्था बनाए रखने के लिए ब्रिटिश जनरल के नियंत्रण में एक ब्रिटिश सेना रखी जाती थी।

सहायक संधि स्वीकार करने वाले प्रमुख राज्य-

हैदराबाद- 1798 (प्रथम राज्य )

-

मैसूर-1799

अवध-1801

पेशवा-1802

डलहौजी की व्यपगत नीति (Doctrine of lapse) :-

+

लॉर्ड डलहौजी ने इस नीति के अंतर्गत भ्रष्टाचार या कुशासन का आरोप लगाकर राज्यों को हड़प लिया गया।

इसी नीति के अंतर्गत राज्य का स्वाभाविक या आनुवंशिक उत्तराधिकारी

न होने पर गोद निषेध द्वारा उन राज्यों को हड़प लिया गया।

इसमें यह भी प्रावधान किया गया कि दत्तक पुत्र को तभी उत्तराधिकारी माना जाएगा जब ब्रिटिश सरकार उसे मान्यता दे।

सर्वप्रथम डलहौजी ने 1848 ई.

लॉर्ड डलहौजी द्वारा विलय किए

में

सतारा को हड़पा था।

गए राज्य :-

राज्य

सतारा

संभलपुर (उड़ीसा)

वर्ष

1848

1849

1849

जैतपुर (बुंदेलखण्ड)

1850

बघाट

1852

1853

1854

उदयपुर

झाँसी

नागपुर

1856 में अवध रियासत को औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित कर दिया गया। (1856 ई. कुशासन के आधार पर)।

an

1857 की क्रान्ति

1857 तक भारत में ब्रिटिश शासन के सौ वर्ष पूरे हो गए। इस दौरान ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अनेक सैनिक व असैनिक विद्रोह हुए। यह विद्रोह पिछले 100 वर्षों के राजनीतिक, धार्मिक, सामजिक व आर्थिक कारणों से हुआ।

1857 की क्रांति के समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग थे। 1857 की क्रांति के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड पॉमर्स्टन थे।

1857 के विद्रोह के प्रमुख कारण

1. राजनीतिक एवं प्रशासनिक कारण

+

1857 की क्रांति के राजनीतिक कारणों में लॉर्ड वेलेजली की 'सहायक संधि' तथा लॉर्ड डलहौजी का व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of lapse) प्रमुख था।

रियासतों के विलय के अतिरिक्त पेशवा ( नाना साहब) की पेंशन रोके जाने का विषय भी असंतोष का कारण बना।

+

डलहौजी ने तंजौर तथा कर्नाटक के नवाबों की उपाधियाँ जब्त कर ली।

+

2. सामाजिक एवं धार्मिक कारण

1850 ई. में आए 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' द्वारा ईसाई धर्म को .में.

ग्रहण करने वाले को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिल गया। इससे हिंदू समाज में असंतोष की भावना फैल गई।

1813 ई. के चार्टर एक्ट में ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया गया।

1856 ई. में डलहौजी के समय प्रस्तुत विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लॉर्ड कैनिंग के शासन में पारित हुआ।

3. आर्थिक कारण

ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों यथा स्थायी बंदोबस्त, रैय्यतवाड़ी तथा महालवाड़ी व्यवस्था आदि के द्वारा किसानों का जमकर शोषण किया

गया।

व्यापारिक कंपनी ने अपनी समस्त नीतियों के मूल में आर्थिक लाभ को केंद्र में रखा।

4. सैन्य कारण

सैन्य सेवा में नस्लीय भेदभाव विद्यमान थे और योग्यता के बावजूद भारतीय सैनिक अधिकतम सूबेदार पद तक पहुँच सकते थे और साथ ही उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था।

लॉर्ड कैनिंग के समय 1856 में 'सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम पारित किया गया, जिसके द्वारा किसी भी समय किसी भी स्थान पर, समुद्र पार भी सैनिकों का जाना अंग्रेजी आदेश पर निर्भर हो गया। यह भारतीयों के सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ़ था । 1854 ई. में डाकघर अधिनियम लाया गया, जिसके द्वारा अब सैनिकों को भी पत्र पर स्टैंप लगाना अनिवार्य हो गया। यह सैनिकों के विशेषाधिकारों के हनन जैसा था।

5. तात्कालिक कारण

दिसंबर, 1856 में भारत सरकार ने पुरानी बन्दूक 'ब्राउन बेस' के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल्स' प्रयोग करने का निश्चय किया। इस नई राइफल से कारतूस के ऊपरी भाग को मुँह से काटना पड़ता था। बंगाल की सेना में यह बात फैल गई कि नई राइफल्स के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।

गाय हिन्दूओं के लिए पवित्र थी और मुसलमानों के लिए सूअर निषिद्ध था कारतूसों में चर्बी होने की जाँच की गई।

चर्बी लगे कारतूसों की घटना ने विद्रोह की चिनगारी सुलगा दी और उससे जो धमाका हुआ उसने भारत में अंग्रेजी राज्य की जड़ें हिला दी। 1857 के विद्रोह का प्रारंभ :-

+

249:

29 मार्च, 1857 को 34वीं रेजीमेंट, बैरकपुर के सैनिक मंगल पाण्डे ने चर्बी लगे कारतूस के प्रयोग का विरोध किया तथा विद्रोह की शुरुआत कर दी।

मंगल पाण्डे ने सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बॉग एवं सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन की गोली मारकर हत्या कर दी। 8 अप्रैल, 1857 को सैन्य अदालत के निर्णय के बाद मंगल पाण्डे को फाँसी की सज़ा दे दी गई, जो कि 1857 की क्रांति का प्रथम शहीद माना गया।

10 मई, 1857 को मेरठ छावनी में तैनात भारतीय सेना ने चर्बी युक्त कारतूस के प्रयोग से इनकार कर दिया एवं अपने अधिकारियों पर गोलियाँ चलाई और विद्रोह प्रारंभ कर दिया।

उत्कर्ष प्रकाश

1857 के विद्रोह का विस्तार 1. दिल्ली व मेरठ

• विद्रोह का आरंभ 10 मई, 1857 को मेरठ छावनी में हुआ। 20वीं टिव इंफैन्ट्री के सिपाहियों ने अपने अधिकारियों पर गोलियाँ चलाई और अपने साथियों को मुक्त करवा कर दिल्ली की ओर कूच किया तथा 11 मई को मेरठ के विद्रोही दिल्ली पहुँचे और 12 मई, 1857 को उन्होंने दिल्ली पर अधिकार कर लिया तथा मुगल बादशाह बहादुरशाह द्वितीय को पुनः भारत का सम्राट व क्रांति का नेता घोषित किया। दिल्ली में मुगल शासक बहादुरशाह द्वितीय को प्रतीकात्मक नेतृत्व दिया गया, किंतु वास्तविक नेतृत्व बख्त खाँ के पास था। इस संघर्ष को दबाने के लिए अंग्रेज अधिकारी जॉन निकोल्सन, हडसन व लॉरेंस को भेजा गया।

+

2.

बहादुरशाह द्वितीय की गिरफ्तारी हुमायूँ के मकबरे से हुई थी। इसकी सूचना जीनत महल ने दी थी।

बहादुरशाह द्वितीय को रंगून भेज दिया गया जहाँ 1862 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।

लखनऊ

जून, 1857 में विद्रोह का प्रारंभ बेगम हज़रत महल (महक परी) के नेतृत्व में हुआ।

उन्होंने अपने अल्पायु पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर दिया तथा अपना प्रशासन स्थापित किया।

अंत में कैंपबेल ने मार्च, 1858 में विद्रोह को दबा कर लखनऊ पर पुनः कब्जा कर लिया।

3. कानपुर

+

+

5 जून, 1857 को कानपुर अंग्रेजों के हाथ से निकल गया। यहाँ पर पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब (धोंदूपंत ) ने विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया।

इसमें उनकी सहायता तात्या टोपे ने की थी, जिनका वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था।

दिसंबर, 1857 में कैंपबेल व हेवलॉक ने कानपुर पर फिर से अधिकार कर लिया। नाना साहब अंत में नेपाल चले गए।

4. झाँसी

झाँसी में जून, 1857 में रानी लक्ष्मीबाई (महलपरी) के नेतृत्व में विद्रोह प्रारंभ हुआ।

झाँसी में ह्यूरोज की सेना से पराजित होकर वे ग्वालियर पहुँची । तात्या टोपे झाँसी की रानी से जाकर मिले। झाँसी की रानी सैनिक वेशभूषा में लड़ती हुई वीरगति को प्राप्त हुई।

तात्या टोपे ने अंग्रेजों को सर्वाधिक परेशान किया और सिंधिया की अस्वीकृति के बावजूद ग्वालियर की सेना व जनता का उन्हें सहयोग

मिला। अपने गुरिल्ला युद्धों द्वारा उन्होंने विद्रोह को एक नया आयाम दिया, किंतु बाद में उनके विश्वासघाती मित्र मानसिंह नरूका ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया और 1859 ई. में ग्वालियर में उन्हें फाँसी दे दी गई। 5. बिहार

जगदीशपुर में विद्रोह का नेतृत्व कुँवर सिंह ने किया। कुँवर सिंह की मृत्यु के बाद विद्रोह का नेतृत्व इनके भाई अमर सिंह ने किया। अंत में विलियम टेलर एवं विंसेंट आयर ने यहाँ विद्रोह को दबा दिया।

6. फैज़ाबाद

फैज़ाबाद में विद्रोह का नेतृत्व अहमदुल्लाह ने किया। जनरल रेनॉर्ड ने यहाँ के विद्रोह को दबाया।

अहमदुल्लाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध 'जिहाद' का नारा दिया था।

फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध फतवा जारी किया और जिहाद का नारा दिया। अंग्रेजों ने इनके ऊपर 50 हज़ार रुपये का इनाम घोषित किया था।

7. इलाहाबाद

इलाहाबाद में जून के प्रारंभ में विद्रोह हुआ, जिसकी कमान मौलवी लियाकत अली ने संभाली। अंत में जनरल नील ने यहाँ के विद्रोह को दबा दिया। विद्रोह के दौरान तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद को आपातकालीन मुख्यालय बनाया था।

8. बरेली

9.

बरेली में खान बहादुर खाँ ने विद्रोहियों का नेतृत्व किया और अपने आप को 'नवाब' घोषित किया। कैंपबेल ने यहाँ के विद्रोह को भी दबा दिया और खान बहादुर को फाँसी की सजा दी गई।

राजस्थान

राजस्थान में कोटा ब्रिटिश विरोधियों का प्रमुख केंद्र था। यहाँ जयदयाल और मेहराब खाँ ने विद्रोह को नेतृत्व प्रदान किया।

10. असम

असम में विद्रोह की शुरुआत मनीराम दत्त ने की तथा अंत में राजा के पोते कंदर्पेश्वर सिंह को राजा घोषित कर दिया। मनीराम को पकड़कर कलकत्ता में फाँसी दे दी गई।

11. उड़ीसा

उड़ीसा में संबलपुर के राजकुमार सुरेंद्रशाही व उज्ज्वलशाही विद्रोहियों के नेता बने। 1862 ई. में सुरेंद्र साई ने आत्मसमर्पण कर दिया। 1857 के विद्रोह के महत्त्वपूर्ण तथ्य

विद्रोह का परिणाम :-

+

+

+

स्वतंत्रता संग्राम की दृष्टि से भले ही यह विद्रोह असफल रहा हो परंतु इसके दूरगामी परिणाम काफी उपयोगी रहे।

1 नवंबर, 1858 को इलाहाबाद में आयोजित दरबार में लॉर्ड कैनिंग (1857 की क्रांति के समय गवर्नर जनरल) ने महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा को पढ़ा। उद्घोषणा में भारत में कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का शासन सीधे क्राउन के अधीन कर दिया गया। 1858 के अधिनियम के तहत् भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय कहा जाने लगा।

इस तरह लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने। 1857 के विद्रोह के बारे में इतिहासकारों के मत :-

“यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध था- एल.ई.आर. रीज यह राष्ट्रीय विद्रोह था, न कि सिपाही विद्रोह बेंजामिन डिजरेली 1857 का विद्रोह न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और यह न ही स्वतंत्रता संग्राम था आर. सी. मजूमदार

यह सभ्यता एवं बर्बरता का संघर्ष था टी. आर. होम्स

यह विद्रोह राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए लड़ा गया सुनियोजित स्वतंत्रता संग्राम था वी.डी. सावरकर

यह अंग्रेज़ों के विरुद्ध हिंदू व मुसलमानों का षड्यंत्र था। जेम्स आउट्रम व डब्ल्यू. टेलर

1857 के विद्रोह से संबंधित प्रमुख पुस्तकें एवं उनके लेखक :- द फर्स्ट वॉर ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस, 1857

द ग्रेट रिबेलियन

द सिपॉय म्यूटिनी एंड रिवॉल्ट ऑफ, 1857 द सिपॉय म्यूटिनी ऑफ, 1857' ए सोशल एनालिसिस

एटीन फिफ्टी सेवन (1857)

बी. डी. सावरकर अशोक मेहता

आर. सी. मजूमदार

एच.पी. चट्टोपाध्याय

एस. एन. सेन

250

उत्कर्ष प्रकाशन

1857 का विद्रोह संक्षेप में

मुंडा विद्रोह

बिहार

बिरसा मुंडा

1899-1900 €

विद्रोह कुचलने वाले

पाइक विद्रोह

उड़ीसा

जगबन्धु

1817-1825 ई.

केन्द्र

विद्रोही

अंग्रेज अधिकारी

नील आन्दोलन

बंगाल

दिगम्बर

1859-60 €

दिल्ली

बहादुरशाह II

निकोल्सन,

पावना विद्रोह

पावना

ईशानचन्द्र राय

1873-76₤

11-12 मई, 1857

कानपुर

बख्त खाँ

हडसन

(बंगाल)

एवं शंभुपाल

नाना साहब,

कॉलिन

कैम्पबेल,

दक्कन विद्रोह

महाराष्ट्र

1874-75 $

5 जून, 1857

तात्या टोपे

हेवलॉक

मालाबार

मोपला विद्रोह

लखनऊ / अवध

बेगम हजरत महल

कैम्पबेल,

हेवलॉक,

(केरल)

अली मुसलियार

1920-22

4 जून, 1857

आउट्रम

कूका आन्दोलन

पंजाब

भगत जवाहर

झा��सी, ग्वालियर

मल

रानी लक्ष्मी,

जनरल ह्यूरोज

रंपाओ का विद्रोह

आन्ध्र प्रदेश

4 जून, 1857

तात्या टोपे

सीमाराम राजू

1879-1922

जगदीशपुर

कुँवर सिंह

विलियम टेलर,

ताना भगत

आन्दोलन

बिहार

जतरा भगत

1914

12 जून, 1857

विंसेंट आयर

कम्पाराम सिंह

फैजाबाद

जून, मौलवी अहमद उल्लाह

जनरल रेनॉर्ड

तेभागा आन्दोलन

बंगाल

एवं भवन सिंह

1946

1857

तेलंगाना आन्दोलन

आन्ध्र प्रदेश

1946

इलाहाबाद

लियाकत अली

कर्नल नील

6 जून, 1857

बरेली जून, 1857

खान बहादुर खान (बख्त खाँ)

विंसेंट आयर, कैम्पबेल

goo

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध महत्त्वपूर्ण विद्रोह

ब्रह्म समाज

भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन

ब्रह्म समाज की स्थापना अगस्त, 1828 को कलकत्ता में राजा राममोहन राय द्वारा की गई थी।

राय को भारत में “पत्रकारिता का अग्रदूत / भाषायी प्रेस का प्रवर्तक" माना जाता है।

मुगल बादशाह अकबर द्वितीय ने राममोहन राय को 'राजा' की उपाधि प्रदान की थी।

केशवचन्द्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' का गठन किया तथा टैगोर का ब्रह्म समाज आदि ब्रह्म समाज' कहलाया ।

नोट- रा���ा राममोहन राय को आधुनिक भारत का पिता, अतीत व भविष्य के बीच का सेतु तथा भारत में पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। वेद समाज

केशवचन्द्र सेन के कहने पर श्री धरलू नायडू ने मद्रास में वेद समाज की स्थापना 1864 ई. में की थी।

इसे 'दक्षिण भारत का ब्रह्म समाज' कहते हैं।

प्रार्थना समाज

आन्दोलन (विद्रोह)

प्रभावित

संबंधित नेता,

क्षेत्र

नेतृत्व

बिहार,

केना सरकार,

समय 1760-1800

संन्यासी विद्रोह

बंगाल

दिर्जिनारायण

फकीर विद्रोह

बंगाल

मजनुनशाह एवं

1776-77 ई०

चिराग अली

आरो विद्रोह

बाकुड़ा

(बंगाल)

दुर्जन सिंह

1798 ई०

पॉलीगरों का विद्रोह

वीर० पी०

तमिलनाडु

1799-01 ई०

काट्टावाम्मान

वेलाटम्पी विद्रोह

ट्रावनकोर

मेलुथाम्पी

भील विद्रोह

पश्चिमी घाट

सेवाराम

1808-09 1825-31 ई०

+

रामोसी विद्रोह

पश्चिमी घाट

चित्तर सिंह

1822-29 ई०

पागलपंथी विद्रोह

असम

टीपू

1825-27 €

अहोम विद्रोह

असम

गोमधर कुँवर

1828 €.

बिहार,

वहावी आन्दोलन

1831.

उत्तरप्रदेश

तुतीमीर

छोटानागपुर

कोल आन्दोलन

(झारखंड)

गोमधर कुँवर

1831-32 €

खासी विद्रोह

असम

तीरत सिंह

1833 €.

शरीयातुल्ला टूटू

फरायजी आन्दोलन

बंगाल

1838-78 €

मियां

नील विद्रोह

बंगाल,

तिरुत सिंह

1833-62 €

बिहार

संथाल विद्रोह

बंगाल एवं

बिहार

सिद्धू-कान्हू

1855-56 €

251

सैय्यद अहमद

1867 ई. में बंबई में केशवचन्द्र सेन के सहयोग से आत्माराम पाण्डुरंग महाराष्ट्र में प्रार्थना समाज की स्थापना की।

संस्थापक महादेव गोविन्द रानाडे, आत्माराम पाण्डुरंग

नोट-महादेव गोविन्द रानाडे को पश्चिमी भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है।

इन्होंने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह तथा जातिवाद का समर्थन किया।

आर्य समाज

दयानन्द सरस्वती ने 1875 ई. को बंबई में आर्य समाज की स्थापना की। लाहौर में 1877 ई. में आर्य समाज के सिद्धांत पुनः सम्पादित किए

गए।

आर्य समाज मूर्तिपूजा, अवतारवाद, तीर्थयात्रा, पशुबलि, सामाजिक असमानता, जातिवाद, अस्पृश्यता, सतीप्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा आदि का विरोध करता है।

रामकृष्ण मिशन

उत्कर्ष प्रकाश

रामकृष्ण मिशन की स्थापना 5 मई, 1897 को कलकत्ता के समीप वेल्लूर में रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानन्द द्वारा की गई थी।

'विवेकानन्द' नाम खेतड़ी महाराजा अजीतसिंह ने दिया तथा वित्तीय सहायता देकर शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन (सितंबर, 1893) भेजा था।

नोट- सुभाषचन्द्र बोस ने विवेकानंद को आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता कहा है।

थियोसोफिकल सोसायटी

थियोसोफिकल समाज की स्थापना 1875 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क में रूसी महिला हेलन पेट्रोवना ब्लावत्सकी एवं अमेरिकन सैनिक अधिकारी एच. एस. अल्कॉट ने की।

1882 ई. में भारत में मद्रास के समीप अड्यार में इसका मुख्यालय स्थापित किया गया।

एनी बेसेन्ट वर्ष 1907 में थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्षा बनी थी। यंग बंगाल आंदोलन

यंग बंगाल आंदोलन के प्रवर्तक हेनरी विवियन डेरोजिओ थे। डेरोजिओ को आधुनिक भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कवि' कहा जाता है। ये फ्रांसीसी क्रान्ति से प्रभावित थे तथा स्वतंत्र चिन्तन व वैज्ञानिक तर्कशक्ति को बल देते थे।

अलीगढ़ आंदोलन

अलीगढ़ आंदोलन के प्रवर्तक सर सैय्यद अहमद खाँ थे।

इन्होंने 1857 ई. के बाद अंग्रेजों के मन में मुसलमानों के प्रति उत्पन्न अविश्वास को कम करने का प्रयास किया था।

मार्च, 1925 में गाँधीजी की मध्यस्थता से त्रावणकोर की महारानी से मंदिर में प्रवेश के बारे में आंदोलनकारियों से समझौता हुआ।

विधवा पुनर्विवाह

ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के प्रयासों से लॉर्ड कैनिंग के समय पारित हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 की धारा-15 के तहत् विधवा विवाह को कानूनी मान्यता मिली थी।

दिसम्बर, 1856 को कलकत्ता में पहला कानूनी हिन्दू पुनर्विवाह अधिनियम सम्पन्न हुआ था।

डी. के. कर्वे ने 1899 ई. में पूना में विधवा आश्रम की स्थापना की थी। बाल विवाह

1872 ई. में केशवचन्द्र सेन के प्रयासों से सिविल मैरिज एक्ट पारित किया गया।

वर्ष 1930 में हरविलास शारदा के प्रयासों से शारदा एक्ट लागू किया गया जिसके तहत् लड़के एवं लड़की के विवाह की आयु क्रमश: 18 एवं 14 वर्ष तय की गई।

सती प्रथा

लॉर्ड विलियम बैंटिक के समय में 1829 ई. में सती प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया गया।

प्रारंभ में इसे बंगाल में लागू किया गया। इस अधिनियम को पारित कराने में राजा राममोहन राय की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

दास प्रथा

गवर्नर जनरल लॉर्ड एलनबरो ने 1843 ई. में भारत में दास प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया।

1833 के अधिनियम में निर्देश था कि दास प्रथा को समाप्त कर दिया

इन्होंने कुरान की वैज्ञानिक दृष्टि से व्याख्या की तथा बाइबिल पर टीका लिखी थी।

जाए।

प्रमुख सामाजिक व धार्मिक संगठन

सर सैय्यद अहमद खाँ द्वारा स्थापित संस्थाएँ-

स्थापना

संगठन

स्थान

संस्थापक

1. साइन्टिफिक सोसायटी (1864 ई.)

वर्ष

2. मुस्लिम एंग्लो-ओरिएण्टल स्कूल अलीगढ़ (1875 ई.)

इंडियन रिफॉर्म

1870 €

कलकत्ता

केशवचन्द्र सेन

अहमदिया आंदोलन

एसोसिएशन

1889 ई. को गुरुदासपुर (पंजाब) के कादिया नामक स्थान पर मिर्जा गुलाम अहमद द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी।

इंडियन नेशनल

महादेव गोविन्द

सोशल कॉन्फ्रेंस

1887 €

महाराष्ट्र

मिर्जा गुलाम अहमद ने स्वयं को मुहम्मद साहब एवं कृष्ण का अवतार घोषित कर दिया। इनकी पुस्तक 'बहरीन ए अहमदिया' थी।

सेवा सदन सोसायटी

1908

सत्यशोधक समाज

+

• उन्होंने दलित जाति के लड़के-लड़कियों के लिए स्कूल खोले थे। सिख धर्म सुधार आंदोलन

इसकी स्थापना निम्न जातियों के कल्याण के लिए 1873 ई. में ज्योतिबा फुले ने महाराष्ट्र में की थी।

आर्य समाज

1875 €

बम्बई

रानाडे बहरामजी

मालाबारी, दयाराम गिडुमल स्वामी दयानन्द

सरस्वती

राजा राममोहन

ब्रह्म समाज

1828 €

बंगाल

राय

• पश्चिमी तर्कसंगत विचारों का प्रभाव सिख अनुयायियों पर भी पड़ा।

आदि ब्रह्म समाज

1866 €

कलकत्ता

देवेन्द्रनाथ टैगोर

इससे पूर्व में सिख धर्म में सुधार हेतु बाबा दयाल दास द्वारा 'निरंकारी 'आंदोलन' चलाया गया।

ब्रह्म समाज ऑफ

इंडिया

1866 €

कलकत्ता

केशवचन्द्र सेन

बाबा राम सिंह द्वारा 'नामधारी आंदोलन' चलाया गया।

राजा राममोहन

वायकोम सत्याग्रह

आत्मीय सभा

1815 €

बंगाल

वायकोम सत्याग्रह एक प्रकार का गाँधीवादी आंदोलन था।

यह आंदोलन ब्राह्मणवाद के विरुद्ध तथा मंदिर प्रवेश को लेकर चलाया गया था।

प्रार्थना समाज

1867 ई.

महाराष्ट्र

राय

आत्माराम

पांडुरंग, रानाडे

वेदान्त सोसायटी

1896 €

न्यूयॉर्क

स्वामी विवेकानन्द

श्री नारायण धर्म परिपालन योगम संगठन ने श्री नारायण गुरु के नेतृत्व में मंदिर में निम्न वर्ग के प्रवेश का समर्थन किया।

रामकृष्ण मिशन

1897 $

कलकत्ता

तत्त्वबोधिनी सभा

1839 ई.

बंगाल

स्वामी विवेकानन्द

देवेन्द्रनाथ टैगोर

252

थियोसोफिकल सोसायटी

1875 ई.

न्यूयॉर्क

शारदा सदन

1889 ई.

महाराष्ट्र

डेक्कन एजुकेशन

सोसायटी

1884 €

पूना

रानाडे, आगरकर

सत्यशोधक समाज

1873 ई.

महाराष्ट्र

ज्योतिबा फुले

वेद समाज

1864 €

मद्रास

के. श्री धरलू

नायडू

मद्रास हिन्दू समिति

1904

मद्रास

एनी बेसेन्ट

अहमदिया

कादियान

1889 €

आन्दोलन

(पंजाब)

गुलाम अहमद

2.

सर्वेण्ट्स ऑफ

1905

इंडिया सोसायटी

महाराष्ट्र

गोपाल कृष्ण गोखले,

साइंटिफिक

1864 ई. अलीगढ़

सोसायटी

सैयद अहमद खाँ

अलीगढ़ एंग्लो-

1875 €

ओरियंटल कॉलेज

अलीगढ़

विधवा आश्रम संघ

1867 ई.

पूना

रानाडे, कर्वे हेनरी विवियन

यंग बंगाल आन्दोलन

1831 ई.

बंगाल

डेरोजियो

धर्म सभा

1830 ई.

बंगाल

राधाकान्त देव

सत्य महिमा धर्म

1860

सेवा समिति

1914

इलाहाबाद

मुकुन्द दास हृदयनाथ कुंजरू

उत्कर्ष प्रकाशन

कर्नल आल्कॉट,

मेडम ब्लावत्सकी रमाबाई

सर सैय्यद अहमद खाँ महादेव गोविन्द

1858 ई. के अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल को वायसराय कहा जाने लगा और अब उसकी नियुक्ति में ब्रिटेन के क्राउन, ब्रिटिश सरकार और भारत के राज्य सचिव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

+ यह व्यवस्था भारत के स्वतंत्र होने तक कायम रही। बंगाल के गवर्नर

1. रॉबर्ट क्लाइव (175760, 176567 ई.)

3.

रॉबर्ट क्लाइव को 1757 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया तथा बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना की। इसने कंपनी के कर्मचारियों द्वारा उपहार लेने पर रोक लगा दी तथा 'सोसायटी फॉर ट्रेड' की स्थापना की।

हॉलवेल (1760 ई.) - हॉलवेल क्लाइव का स्थानापन्न गवर्नर बना। वेंसिटार्ट (1760 1765 ई.) इसके समय में प्रसिद्ध बक्सर का युद्ध हुआ, जिसमें कंपनी की सेना ने नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को पराजित किया गया था।

4. वेरेलस्ट (17671769 ई.) क्लाइव के बाद वेरेलस्ट को बंगाल का गवर्नर बनाया गया।

5. जॉन कर्टियर (1769 1772 ई.) इसके समय 1770 ई. में बंगाल में आधुनिक भारत का प्रथम अकाल पड़ा था।

बंगाल के गवर्नर जनरल

1773 ई. के रेग्यूलेटिंग एक्ट के अनुसार बंगाल के गवर्नर को अब गवर्नर जनरल कहा जाने लगा।

1. वॉरेन हेस्टिंग्स (17721785 ई.)

+

नामधारी आन्दोलन

1875 ई.

पंजाब

पूना सार्वजनिक

रामसिंह महादेव गोविन्द

1867 €

पूना

सभा

दीनबन्धु

1884 €.

सार्वजनिक सभा

महाराष्ट्र

समाज सुधार कानून

कानून

वर्ष

गवर्नर जनरल / वायसराय

1.

कन्या वध निषेध कानून

1795 €

सर जॉन शोर

2.

सती प्रथा निषेध कानून

1829

विलियम बैंटिक

3. हिन्दू विधवा पुनर्विवाह

1856 ई.

लॉर्ड कैनिंग

अधिनियम

4.

सम्मति आयु अधिनियम

1891 ई.

लॉर्ड लेंसडाउन

5.

शारदा कानून

1930

लॉर्ड इरविन

रानाडे ज्योतिबा फुले

ब्रिटिश गवर्नर जनरल एवं वायसराय

गवर्नर जनरल ब्रिटिश भारत का एक सर्वोच्च अधिकारी होता था। यह पद केवल अंग्रेज़ों के लिए आरक्षित था।

1858 ई. तक गवर्नर जनरल को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों द्वारा चयनित किया जाता था और वह उन्हीं के प्रति उत्तरदायी होता था।

1780 ई. में भारत का पहला समाचार पत्र 'द बंगाल गजट' का प्रकाशन जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा किया गया।

2. लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786 1793 ई.)

लॉर्ड कॉर्नवालिस को भारतीय सिविल सेवा का जनक माना जाता है। एकमात्र गवर्नर जनरल है जिसकी समाधि भारत के गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।

उसने न्यायिक क्षेत्र में शक्ति के पृथक्करण का सिद्धांत दिया तथा कॉर्नवालिस संहिता की स्थापना की।

कॉर्नवालिस ने बिहार, बंगाल, उड़ीसा आदि क्षेत्रों में भू-राजस्व की स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (1793 ई.) को लागू किया।

नोट-दो बार बंगाल का गवर्नर जनरल बनने वाला यह एकमात्र व्यक्ति था। 3. सर जॉन शोर (1793 1798 ई.)

इस समय 1793 ई. का चार्टर एक्ट पारित हुआ। इसने देशी राज्यों में अहस्तक्षेप की नीति अपनाई ।

4. लॉर्ड वेलेजली (17981805 ई.)

लॉर्ड वेलेजली को भारत में सहायक संधि का जनक माना जाता है। इसी के समय में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की

गई।

वह स्वयं को बंगाल का शेर कहता था।

वॉरेन हेस्टिंग्स ने बंगाल में स्थापित द्वैध शासन को समाप्त कर दिया। इसके शासनकाल में 1773 ई. के रेग्यूलेटिंग एक्ट के तहत कलकत्ता के में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना 1774 ई. में की गई। इसने 1781 ई. में कलकत्ता में प्रथम मदरसा की स्थापना की। इसके संरक्षण में सर विलियम जोंस ने 1784 ई. में 'एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल' की स्थापना की।

253

5.

उत्कर्ष प्रकाशन

सर जॉर्ज बालों (1805 1807 ई.)- इसी के समय 1806 ई. में वेल्लोर में सिपाही विद्रोह हुआ।

6. लॉर्ड मिंटो प्रथम (1807 1813 ई.)

इसके कार्यकाल में 1813 ई. का चार्टर एक्ट पारित हुआ।

महाराजा रणजीत सिंह के साथ प्रसिद्ध 'अमृतसर की संधि' (1809 ई.) हुई।

7. लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813 1823 ई.)

+

+

इसके समय अंग्रेज़ों एवं गोरखों के बीच सुगौली की संधि (1816 ई.) द्वारा आंग्ल-नेपाल युद्ध समाप्त हुआ।

इसी के समय 1822 ई. में बंगाल में काश्तकारी अधिनियम को लागू किया गया।

8. लॉर्ड एमहर्स्ट (1823 1828 ई.)

इसके समय में प्रथम आंग्ल- वर्मा युद्ध (1824-26 ई.) हुआ और 1826 ई. के मध्य दोनों के बीच यांडबू (यांदवू) की संधि हुई। 1824 ई. में बैरकपुर की छावनी में विद्रोह इसके शासनकाल में हुआ। 9. लॉर्ड विलियम बैंटिक (182833 ई.)

बंगाल का अंतिम गवर्नर जनरल था।

इन्होंने राजा राममोहन राय के सहयोग से 1829 ई. में सती प्रथा को समाप्त किया। इस प्रथा के खिलाफ कानून बना कर 1829 ई. में सती प्रथा को अवैध घोषित कर दिया गया।

1833 ई. के चार्टर एक्ट के तहत् बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया। चूंकि इस समय लॉर्ड विलियम बेंटिक बंगाल का गवर्नर जनरल था अतः बैंटिक ही भारत का प्रथम गवर्नर जनरल कहलाया।

लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया। सभी न्यायालयों में फारसी के स्थान पर स्थानीय भाषाओं के प्रयोग की अनुमति दी गई तथा भारतीयों को भी उत्तरदायी पदों पर नियुक्त किया

गया।

10. चार्ल्स मेटकॉफ (1835 1836 ई.) चार्ल्स मेटकॉफ ने समाचार- पत्रों से प्रतिबंध हटा दिया, जिसके कारण इसे 'समाचार पत्रों का मुक्तिदाता' कहा जाता है।

11. लॉर्ड ऑकलैंड (1836 कलकत्ता तक की ग्रांड ट्रंक

1842 ई.) - इसने 1839 ई. में दिल्ली से रोड की मरम्मत करवाई।

12. लॉर्ड एलनबरो (1842 1844 ई.)

इसी के कार्यकाल में भारत में पहली बार 1853 को बंबई से थाणे के बीच (34 किमी.) रेल चलाई गई, इसलिए लॉर्ड डलहोजी को भारत में रेल यातायात का जनक माना जाता है।

1853 ई. में कलकत्ता से आगरा के बीच पहली बार बिजली से संचालित तार सेवा की शुरुआत हुई।

शिक्षा संबंधी सुधारों में 1854 ई. में वुड डिस्पेच नीति लागू की गई, जिसके तहत् प्रत्येक प्रदेश में एक शिक्षा निदेशक की नियुक्ति हुई। शिमला को अंग्रेजी साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई। 'आधुनिक भारत' के निर्माता के रूप में जाना जाता है।

15. लॉर्ड कैनिंग (185658 ई.)

लॉर्ड कैनिंग 1856 से 1858 ई. तक भारत का गवर्नर जनरल था। इसी के समय में 1857 ई. का विद्रोह हुआ। वह भारत का अंतिम

गवर्नर जनरल तथा प्रथम वायसराय था।

इसी के समय में 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ।

भारत के वायसराय

मई, 1857 के विद्रोह के पश्चात् भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर शासन का अधिकार ब्रिटिश क्राउन को दे दिया गया।

1858 ई. में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत् गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय कहा जाने लगा।

लॉर्ड कैनिंग इस समय भारत का गवर्नर जनरल था, इसलिए भारत का प्रथम वायसराय कहलाया।

1. लॉर्ड कैनिंग (185862 ई.)

भारतीय दंड संहिता (1860 ई.) तथा फौजदारी विधि संहिता का निर्माण इसी के समय में हुआ।

1858 ई. का एक्ट भी इसी के समय में लागू हुआ, जिसमें महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित किया गया।

1861 ई. का भारतीय परिषद् अधिनियम एवं भार��ीय उच्च न्यायालय अधिनियम के तहत् कलकत्ता, बंबई तथा मद्रास में एक-एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।

2. लॉर्ड एल्गिन प्रथम (186263 ई.)

3.

इसने अगस्त, 1843 में सिंध का अंग्रेजी राज्य में विलय कर लिया।

इसमें चार्ल्स नेपियर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसने 'कुशल अकर्मण्यता की नीति का पालन किया।

इसके शासनकाल में रविवार को अवकाश शुरू हुआ।

लॉर्ड हॉर्डिंग के समय में प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46 ई.) हुआ एवं लाहौर पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।

13. लॉर्ड हॉर्डिंग प्रथम (1844 1848 ई.)

14. लॉर्ड डलहोजी (1848 1856 ई.)

+ लॉर्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धांत के तहत् भारत के कई देशी राज्यों- सतारा (1848 ई.), जैतपुर व संभलपुर (1849 ई.), उदयपुर (1852 ई.), झाँसी (1853 ई.), नागपुर (1854 ई.) को ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल कर लिया।

लॉर्ड डलहौजी ने 1856 ई. में अवध के नवाब वाजिद अली शाह पर कुशासन का आरोप लगाकर अवध को अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला लिया।

इसके समय में वहाबी आंदोलन का दमन किया गया।

इसकी मृत्यु 1863 ई. में पंजाब में हुई थी।

सर जॉन लॉरेंस (1863-69 ई.)

इसके कार्यकाल में 1866 ई. में उड़ीसा, 1868-69 ई. में राजपूताना तथा बुंदेलखंड में भीषण अकाल पड़ा।

वायसराय ने हेनरी कैंपबेल के नेतृत्व में एक अकाल आयोग का गठन किया।

4. लॉर्ड मेयो (1869-72 ई.)

+

भारत में वित्तीय विकेंद्रीकरण का जनक लॉर्ड मेयो को माना जाता है। 1872 ई. में भारत में प्रथम जनगणना इसी के समय हुई।

5. लॉर्ड नॉर्थब्रुक (187276 ई.)

इसके समय 1872 ई. में नेटिव मैरिज एक्ट पारित हुआ, जिसके तहत् अंतर्जातीय विवाह को मान्यता दी गई।

1875 ई. में प्रिंस ऑफ वेल्स का भारत आगमन हुआ।

6. लॉर्ड लिटन (187680 ई.)

इसने रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता (1878 ई.) में एक अकाल आयोग का गठन किया।

इसने भारतीय नागरिक सेवा में शामिल होने हेतु भारतीयों की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दिया।

254

उत्कर्ष प्रकाशन

इसी समय अलीगढ़ में एक मुस्लिम एंग्लो प्राच्य महाविद्यालय की स्थापना की गई।

14. लॉर्ड चेम्सफोर्ड ( 1916 21 )

+

लॉर्ड लिटन ने 1878 ई. में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित कर प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया।

7. लॉर्ड रिपन (188084 ई.)

रिपन के समय 1881 ई. में सर्वप्रथम नियमित जनगणना करवाई गई। रिपन ने सर्वप्रथम समाचार पत्रों की स्वतंत्रता को बहाल करते हुए 1882 ई. में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को समाप्त किया।

सिविल सेवा में प्रवेश हेतु आयु को 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया। स्थानीय स्वशासन की शुरुआत लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में ही 1882 ई. में हुई थी।

8. लॉर्ड डफरिन (188488 ई.)

+

इसके कार्यकाल में ही 1885 ई. में ए. ओ. ह्यूम के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई।

1885 ई. में बंगाल कृषक अधिनियम, अवध कृषक अधिनियम तथा पंजाब कृषक अधिनियम पारित किए गए।

9. लॉर्ड लेंसडाउन (188894)

+

+

इसके समय में भारत और अफगानिस्तान के मध्य सीमा रेखा ( डूरंड रेखा) का निर्धारण हुआ।

इसके समय वर्ष 1893 में 'मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल डिफेंस एसोसिएशन' की स्थापना हुई।

10. लॉर्ड एल्गिन द्वितीय (189499)

+ "भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी", यह कथन लॉर्ड एल्गिन द्वितीय

+

का है।

इसने लॉयल कमीशन के नाम से अकाल आयोग का गठन किया। 11. लॉर्ड कर्जन (1899 1905)

1902 में सर टॉमस रैले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग का गठन किया गया।

1904 में भारतीय विश्वविद्यालय सुधार अधिनियम पास किया गया। कर्जन के समय में ही 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल का विभाजन प्रभावी हुआ, जिसे बंगाल में शोक दिवस के रूप में मनाया गया। 12. लॉर्ड मिंटो द्वितीय (190510)

• इसके समय (वर्ष 1907) में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ ।

+

वर्ष 1909 में 'मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम पारित किया गया, जिसके माध्यम से मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई।

आगा खाँ द्वारा वर्ष 1906 में 'मुस्लिम लीग' की स्थापना ढाका में की गई।

13. लॉर्ड हॉर्डिंग द्वितीय (191016)

इसके समय में 12 दिसंबर, 1911 को ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम का भारत आगमन हुआ।

वर्ष 1911 में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई एवं वर्ष 1912 में दिल्ली को राजधानी बनाया

गया।

वर्ष 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई।

+

+

वर्ष 1916 में पूना में प्रथम महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इन्हीं के कार्यकाल में अप्रैल, 1919 में रॉलेट एक्ट को लागू किया गया। वर्ष 1919 में 'मॉ���्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार' अधिनियम पारित हुआ, जिसके तहत प्रांतों में द्वैध शासन की स्थापना की गई।

15. लॉर्ड रीडिंग (192126)

लॉर्ड रीडिंग के समय में ही 1 नवंबर, 1921 को 'प्रिंस ऑफ वेल्स' का भारत आगमन हुआ तथा इस दिन संपूर्ण भारत में हड़ताल का आयोजन किया गया।

इसने वर्ष 1922 से आई.सी.एस. की परीक्षा इलाहाबाद एवं लंदन दोनों जगह कराने का निर्णय लिया।

16. लॉर्ड इरविन (192631 ई.)

इसके समय में ही साइमन कमीशन का भारत आगमन हुआ। शारदा एक्ट वर्ष 1929 में पारित हुआ, जिसमें लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 14 एवं लड़कों की 18 वर्ष कर दी गई।

17. लॉर्ड विलिंगटन (193136)

इस समय में वर्ष 1935 का अधिनियम पारित किया गया, जिसके तहत् बर्मा को भारत से अलग किया गया।

18. लॉर्ड लिनलिथगो (1936 44 )

इसके समय में द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) की शुरुआत हुई। वर्ष 1940 का अगस्त प्रस्ताव इसी के समय में लाया गया (8 अगस्त, 1940)

मार्च, 1942 में क्रिप्स मिशन का भारत आगमन ।

भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत इनके कार्यकाल में वर्ष 1942 में हुई थी।

19. लॉर्ड वेवेल (194447)

+

इसके समय में राजनीतिक समाधान के लिए शिमला सम्मेलन (वर्ष 1945 ) का आयोजन किया गया तथा कैबिनेट मिशन का भारत आगमन हुआ।

वर्ष 1946 में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

इसके समय में शाही नौसैनिकों का विद्रोह हुआ (फरवरी, 1946) 20. लॉर्ड माउंटबेटन (1947-48)

+ ब्रिटिश भारत का अंतिम एवं स्वतंत्र भारत का प्रथम वायसराय था इसके शासनकाल में ही भारत स्वतंत्र हुआ एवं भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र राष्ट्रों की घोषणा की गई।

नोट- स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय वायसराय चक्रवर्ती राजगोपालाचारी थे।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

कांग्रेस से पूर्व राजनीतिक संगठन

1. बंगाल जमींदार सभा (1838 ई.)

प्रसन्न कुमार ठाकुर द्वारिकानाथ टैगोर, राधाकान्त देव इसके संस्थापक सदस्य थे।

यह आधुनिक भारत की पहली सार्वजनिक एवं राजनीतिक संस्था थी।

2. बंगाल ब्रिटिश एसोसिएशन (1843 ई.)

वर्ष 1916 में मदन मोहन मालवीय द्वारा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।

1843 ई. द्वारिकानाथ टैगोर द्वारा स्थापित की गई थी। जॉर्ज थॉमसन ने इसकी अध्यक्षता की थी।

255

उत्कर्ष प्रकाश

3

ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन (1851 ई.)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्त्वपूर्ण वार्षिक अधिवेशन

बंगाल जमींदार सभा तथा बंगाल ब्��िटिश एसोसिएशन का विलय कर 1851 ई. में इसकी स्थापना की गई।

वर्ष

स्थल

अध्यक्ष

प्रमुख घटनाएँ

1. राधाकान्त देव (अध्यक्ष) 2. देवेन्द्रनाथ टैगोर (महासचिव)

4. ईस्ट इण्डिया एसोसिएशन (1866 ई.)

दादाभाई

1886

कलकत्ता

नेशनल एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय हो

नौरोजी

1866 ई. लंदन में दादाभाई नौरोजी द्वारा स्थापित की गई थी।

बदरुद्दीन

1887

मद्रास

5. पूना सार्वजनिक सभा (1870 ई.)

तैय्यबजी

+

अप्रैल, 1870 में जस्टिस महादेव गोविंद रानाडे द्वारा स्थापित की गई थी।

6

इण्डिया लीग (1875 ई.)

1888 इलाहाबाद

जॉर्ज यूले

+

1875 ई. में शिशिर कुमार घोष द्वारा स्थापना की गई थी।

7. इण्डिया एसोसिएशन (1876 ई.)

+

1876 ई. में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस द्वारा इसकी स्थापना की गई थी।

8. मद्रास महाजन सभा (1884 ई.)

गया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष |

जॉर्ज यूले प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष बने इस अधिवेशन में पहली बार लाला लाजपत राय ने हिंदी में भाषण दिया। इंग्लैंड में कांग्रेस के दृष्टिकोण का प्रचार करने के लिए एक

प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया गया।

विलियम

1889

बंबई

वेडरबर्न

इसकी स्थापना 1884 ई. में की गई थी।

9. बम्बई प्रेसीडेन्सी एसोसिएशन

इसकी स्थापना 1885 ई. में की गई थी।

+

संस्थापक एम.वी. राघवाचारी, जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर, आनन्द चारलू

संस्थापक फिरोजशाह मेहता, के. टी. तैलंग, बदरुद्दीन तैय्यबजी

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर, 1885 को सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी ए.ओ. ह्यूम ने की थी।

दादाभाई नौरोजी के कहने पर इसका नाम इण्डियन नेशनल कांग्रेस

कलकत्ता विश्वविद्यालय की

1890 कलकत्ता

फिरोज़शाह मेहता

पहली महिला स्नातक

1896 कलकत्ता

1905 बनारस

रहमतुल्लाह एम. सयानी गोपाल कृष्ण

कादंबिनी गांगुली ने कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित किया। पहली बार 'वन्देमातरम्' गाया

गया।

बंग-भंग की आलोचना।

गोखले

रखा गया।

दादाभाई नौरोजी ने 'स्वराज'

इसका पहला अधिवेशन पूना में होना था परन्तु वहाँ प्लेग फैल जाने के कारण बम्बई में हुआ।

1906 कलकत्ता

दादाभाई

नौरोजी

(स्वशासन) शब्द का कांग्रेस के

मंच से प्रथम बार प्रयोग किया।

कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन

रासबिहारी

कांग्रेस का प्रथम विभाजन

1907

सूरत

28 दिसंबर, 1885 को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बम्बई में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने की थी।

घोष पं. विशन

1911 कलकत्ता

• प्रथम अधिवेशन में 72 सदस्यों ने भाग लिया था।

कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की माँगें

नारायणधर

सैनिक खर्च में कटौती की जाए।

1915

बंबई

सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा

(नरम दल एवं गरम दल के बीच) पहली बार 'जन गण मन' गाया गया।

लॉर्ड विलिंगटन ने भाग लिया (इस समय यह बंबई का गवर्नर

था)

नरम दल एवं गरम दल का समझौता।

केन्द्र और प्रांतों में विधान परिषदों का विस्तार किया जाए। उच्च सरकारी नौकरियों में भारतीयों को भी पूरा अवसर दिया जाए। भारतीय प्रशासन की जाँच हेतु एक रॉयल कमीशन की नियुक्ति उदारवादी नेताओं ने अपनी माँगें मनवाने के लिए दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में ब्रिटेन में 1887 में भारतीय सुधार समिति की स्थापना की गई। कांग्रेस के बारे में मत :-

• बंकिम चंद्र चटर्जी "कांग्रेस के लोग पदों के भूखे हैं।"

सर सैय्यद अहमद खाँ "कांग्रेस आंदोलन न तो लोगों द्वारा प्रेरित था और न ही उनके द्वारा सोचा या योजनाबद्ध किया गया था।" अश्विनी कुमार दत्त "कांग्रेस सम्मेलन तीन दिन का तमाशा है।" डफरिन "वह जनता के उस अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जिसकी संख्या सूक्ष्म है।"

1917 कलकत्ता

1920

नागपुर

एनी बेसेंट सी. विजय राघवाचार्य

समझौता |

कांग्रेस और मुस्लिम लीग में

अंबिकाचरण

1916

लखनऊ

मजूमदार

तिलक ने

"स्वराज मेरा

जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं इसे | लेकर रहुँगा" नारा दिया।

प्रथम महिला अध्यक्ष कांग्रेस ने पहली बार देशी रियासतों के प्रति नीति घोषित

की।

-

कर्ज़न "कांग्रेस अपनी मौत की घड़ियाँ गिन रही है, भारत में रहते हुए मेरी एक सबसे बड़ी इच्छा है कि में उसे शांतिपूर्वक मरने में मदद कर सकूँ।"

1920

विशेष अधिवेशन कलकत्ता

असहयोग आंदोलन की

लाला लाजपतराय

स्वीकृति हेतु ।

एकमात्र कांग्रेस अधिवेशन

-

बाल गंगाधर तिलक “यदि वर्ष में हम एक बार मेंढक की तरह टर्राए तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।"

1924

बेलगाँव

महात्मा गाँधी जिसकी अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की।

256:

उत्कर्ष प्रकाशन

सरोजिनी

प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष

1925

कानपुर

नायडू

+

1927

मद्रास

एम.ए. अंसारी

गई।

पूर्ण स्वाधीनता की माँग की

साइमन कमीशन के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित

पूर्ण स्वराज की माँग

यह चरण 'उग्रवाद या नव राष्ट्रवाद' का चरण कहलाता है।

इस आंदोलन के प्रमुख नेता-

1. लाला लाजपत राय

2. बाल गंगाधर तिलक

3. विपिन चन्द्रपाल

4. अरविन्द घोष

राष्ट्रीय आन्दोलन का तीसरा चरण ( 1919 1947)

गाँधीजी से विवाद हो जाने के

1939

त्रिपुरी

सुभाष चंद्र

कारण सुभाष चंद्र बोस ने

अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे

बोस

दिया। तत्पश्चात् डॉ. राजेन्द्र

प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया।

1940

मौलाना अबुल

1929

लाहौर

जवाहरलाल

नेहरू

सविनय अवज्ञा आंदोलन

प्रारम्भ करने की अनुमति।

लेखक

सरदार वल्लभ

मूल अधिकार का प्रस्ताव

अरविन्द घोष

1931

कराची

भाई पटेल

गाँधी-इरविन समझौते का

बालगंगाधर तिलक

जवाहरलाल

1936

लखनऊ

नेहरू

अनुमोदन जवाहरलाल 'समाजवाद' को भारत की समस्याओं को हल करने की कुंजी बताया।

महात्मा गाँधी

नेहरू ने

सुभाषचन्द्र बोस

समाचार पत्र

1937

फैज़पुर

जवाहरलाल नेहरू

1938

हरिपुरा

सुभाष चंद्र

बोस

प्रथम अधिवेशन जो गाँव में हुआ।

राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू बने।

लगातार 6 वर्ष तक कांग्रेस के

लेखक बाल गंगाधर तिलक चन्द्रपाल

लाला लाजपत राय ब्रह्मबान्धव उपाध्याय अरविन्द घोष

भवानी मंदिर

गीता रहस्य, आर्कटिक होम ऑफ द वेदाज

हिन्द स्वराज (1909)

द इंडियन स्ट्रगल (आत्मकथा)

बारीन्द्र कुमार घोष व भूपेन्द्र

समाचार पत्र

केसरी (मराठी), मराठा (अंग्रेजी)

न्यू इंडिया पंजाबी

संध्या

वन्देमातरम्

युगान्तर

भारत माता

सर्कुलर-ए-आजादी फ्री हिन्दुस्तान

कॉमन वील (साप्ताहिक)

न्यू इंडिया (दैनिक)

किताबें

पुस्तक

नाथ दत्त अजीत सिंह

रामनाथ पुरी

तारकनाथदास

एनी बेसेंट

रामगढ़

कलाम आज़ाद

अध्यक्ष पद पर रहे। (1940-45)

कृष्ण कुमार मित्र

1946 मेरठ

जयपुर

1948

(राज.)

सीतारमैया

आचार्य जे.बी.

कृपलानी डॉ. पट्��ाभि

स्वतंत्रता के बाद प्रथम

अधिवेशन हुआ।

● भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

राष्ट्रीय आंदोलन का प्रथम चरण (1885-1905)

कांग्रेस के इस चरण को उदारवादी चरण के नाम से भी जाना जाता है।

आज़ादी के समय अध्यक्ष थे।

इस आंदोलन के प्रमुख नेता-

1. दादाभाई नौरोजी

6. गोपाल कृष्ण गोखले

2. फिरोजशाह मेहता

7. बदरुद्दीन तैयबजी

3. आर. सी. दत्त

8. डब्ल्यू. सी. बनर्जी

4. एस. एन. बनर्जी

9. मदन मोहन मालवीय

5. रास बिहारी घोष

राष्ट्रीय आंदोलन का द्वितीय चरण (1905-1913)

इस काल को राष्ट्रीय आंदोलन के उदय का काल माना जाता है। इसी समय स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई।

257

सुरेन्द्र नाथ बनर्जी

अश्विनीदत्त कुमार महात्मा गाँधी मुहम्मद अली जिन्ना महात्मा गाँधी

बंगाल विभाजन

संजीवनी

बंगाली

स्वदेशी

द इण्डियन ओपिनियन (1903)

कॉमरेड

हरिजन

19 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा हुई।

7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आन्दोलन की

घोषणा व बहिष्कार प्रस्ताव पारित हुआ।

16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल विभाजन लागू हुआ। इसे 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया।

रवीन्द्र नाथ टैगोर के कहने पर हिन्दू व मुस्लिमों ने एक-दूसरे को राखियाँ बाँधी ।

टैगोर का 'आमार सोनार बांग्ला' व बंकिम चन्द्र चटर्जी का 'वन्दे मातरम्' लोकप्रिय गीत बन गए।

ब्रह्म समाज की पत्रिका संजीवनी में सबसे पहले विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव कृष्ण कुमार मित्र ने दिया।

कांग्रेस के बनारस अधिवेशन (1905) में स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन का अनुमोदन किया गया।

स्वदेशी आन्दोलन के विस्तार को लेकर कांग्रेस के नरम दल व गरम दल में गतिरोध उत्पन्न हुआ।

उत्कर्ष प्रकाशन

नरमपंथी जहाँ आन्दोलन को बंगाल तक व विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक ही सीमित रखना चाहते थे, वहीं गरमपंथी इसे देश के विभिन्न भागों में तथा विदेशी वस्तुओं के साथ-साथ विदेशी संस्थाओं व विदेशी पर्दों के बहिष्कार तक फैलाना चाहते थे।

देश के अन्य भागों में स्वदेशी आन्दोलन के नेता

f

-

बाल गंगाधर तिलक

लाला लाजपत राय व अजीत सिंह चिदम्बरम पिल्लै

महाराष्ट्र

पंजाब

-

मद्रास

आन्ध्र प्रदेश

हरि सर्वोत्तम राव

दिल्ली

सैय्यद हैदर रजा

कलकत्ता अधिवेशन 1906

+

गरमपंथी तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहते थे परन्तु नरमपंथियों ने दादाभाई नौरोजी को लन्दन से बुलाकर अध्यक्ष बना दिया।

इस सम्मेलन में चार प्रस्ताव पारित किए गए-

1. स्वशासन 2. स्वदेशी 3 विदेशी बहिष्कार 4. राष्ट्रीय शिक्षा

इसी अधिवेशन में सर्वप्रथम कांग्रेस के मंच से दादा भाई नौरोजी ने स्वराज की माँग की।

मुस्लिम लीग की स्थापना 1906

1 अक्टूबर, 1906 को एक मुस्लिम प्रतिनिधिमण्डल सर आगा खाँ के नेतृत्व में वायसराय लॉर्ड मिण्टो से शिमला में मिला।

+

मिण्टो ने मुस्लिम संगठन बनाने का परामर्श दिया।

30 दिसंबर, 1906 को ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की गई।

मुस्लिम लीग के संस्थापक ढाका के नवाब सलीम उल्लाह खान थे। इसके प्रथम अध्यक्ष वकार-उल-मुल्क मुस्ताक हुसैन थे।

इसका स्थायी अध्यक्ष 1908 में 'आगा खाँ को बनाया गया।

वर्ष 1908 के अमृतसर अधिवेशन में मुस्लिमों के लिए पृथक् निर्वाचन मण्डल की माँग की जो 1909 के मार्ले-मिण्टो सुधारों द्वारा प्रदान किया गया।

कांग्रेस का सूरत अधिवेशन 1907

यह सम्मेलन पहले नागपुर में होना था परन्तु तिलक के अध्यक्ष न बन पाने के कारण इसे सूरत स्थानान्तरित किया गया। गरमपंथी लाला लाजपतराय को अध्यक्ष बनाना चाहते थे परन्तु नरमपंथियों ने रासबिहारी घोष को अध्यक्ष बनाया।

मार्ले मिण्टो सुधार अधिनियम 1909

लॉर्ड मार्ले भारत सचिव

लॉर्ड मिण्टो II गवर्नर जनरल

मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई।

1909 के सुधारों का उद्देश्य कांग्रेस के उदारवादी नेताओं को खुश करना व राष्ट्रवाद का दमन करना था।

दिल्ली दरबार 1911

दिसम्बर, 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम व उसकी रानी मेरी भारत आए।

उस समय गवर्नर जनरल लॉर्ड हॉर्डिंग II थे।

इनके स्वागत में गेटवे ऑफ इण्डिया बनाया गया।

दो महत्त्वपूर्ण घोषणाएँ-

1. बंगाल विभाजन रद्द किया गया।

2.

राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरण ।

258

राजधानी का दिल्ली विधिवत् स्थानान्तरण अप्रैल, 1912 में हुआ। इसी समय वायसराय लॉर्ड हॉर्डिंग के जुलूस पर दिल्ली के चाँदनी चौक में रासबिहारी बोस के नेतृत्व में बम फेंका गया। इन पर दिल्ली षड्यंत्र मुकदमा चलाकर फाँसी दे दी गई।

बंगाल विभाजन के रद्द होने के बाद उड़ीसा और बिहार को बंगाल से अलग कर दिया गया।

असम को पुनः 1874 की स्थिति में लाया गया, अब असम में सिलहट भी शामिल था।

कामागाटामारू प्रकरण 1914

+

कामागाटामारू जापानी जहाज था जिसे बाबा गुरदित सिंह ने किराये पर लिया था।

यह जलयान यात्रियों के साथ 26 सितम्बर 1914 को हुगली पहुँचा। कामागाटामारू प्रकरण कनाडा में भारतीयों के प्रवेश के बारे में विवाद था। कनाडा ने ऐसे भारतीयों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जो सीधे भारत से नहीं आते थे।

कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन 1916

अध्यक्ष अम्बिका चरण मजूमदार

तिलक व एनी बेसेंट के प्रयासों से कांग्रेस के नरम दल व गरम दल में समझौता तथा विलय हुआ।

तिलक व जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता हुआ।

इसके तहत् कांग्रेस ने लीग के पृथक् निर्वाचन व लीग ने कांग्रेस के स्वराज को समर्थन दे दिया।

होमरूल आन्दोलन- 1916

यह आन्दोलन आयरलैण्ड से प्रेरित था।

इसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहते हुए संवैधानिक तरीके से स्वशासन को प्राप्त करना था।

तिलक ने 28 अप्रैल, 1916 को 'बेलगाँव' में होमरूल लीग की स्थापना की।

एनी बेसेंट ने सितम्बर, 1916 में अड्यार (मद्रास) में होमरूल लीग की स्थापना की। इसका सचिव जॉर्ज अरूंडेल को बनाया गया। होमरूल लीग के सर्वाधिक कार्यालय मद्रास में थे। गोखले द्वारा स्थापित संस्था 'सर्वेण्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी' के सदस्यों को मुस्लिम लीग में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

एनी बेसेन्ट कलकत्ता (1917) अधिवेशन की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी। मॉण्टेग्यू घोषणा- 1917

20 अगस्त, 1917 को भारत सचिव मॉण्टेग्यू ने एक घोषणा के अनुसार भारत में "उत्तरदायी शासन की स्थापना" को लक्ष्य बताया। चम्पारण सत्याग्रह 1917

+

राजकुमार शुक्ल के कहने पर गाँधीजी चम्पारण गए व तिनकठिया प्रथा के विरुद्ध सत्याग्रह प्रारम्भ किया।

तिनकठिया प्रथा किसानों को 3 / 20 भूमि पर नील की खेती करना अनिवार्य था।

आन्दोलन में गाँधीजी के सहायक राजेन्द्र प्रसाद, मजरूल उल-हक,

जे. बी. कृपलानी, नरहरि पारिख, महादेव देसाई ।

आन्दोलन की सफलता पर टैगोर ने गाँधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी। अहमदाबाद मिल मजदूर आन्दोलन 1918

मिल मजदूरों व मालिकों में 'प्लेग बोनस' को लेकर विवाद छिड़ा। मार्च, 1918 को गाँधीजी आमरण अनशन पर बैठे।

उत्कर्ष प्रकाशन

मिल मालिक अम्बालाल साराभाई गाँधीजी के दोस्त थे तथा इनकी बहन 'अनुसूइया बेन' गाँधीजी की सहयोगी थी।

+

अंत में मजदूरों को 35% बोनस दिया गया।

खेड़ा किसान आन्दोलन 1918

• गाँधीजी ने अकाल के कारण खराब फसल पर भू-राजस्व के खिलाफ

आन्दोलन चलाया।

सर्वेण्ट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी के सदस्यों विट्ठल भाई पटेल व गाँधीजी ने पूरी जाँच पड़ताल के बाद किसानों को मालगुजारी देने के लिए मना कर दिया।

गाँधीजी के सहायक इन्दुलाल याग्निक, शंकरलाल बैंकर, वल्लभ भाई पटेल, महादेव देसाई ।

नोट- खेड़ा किसान आंदोलन को हार्डीमन ने भारत का प्रथम वास्तविक किसान सत्याग्रह कहा है।

रॉलेट एक्ट कानून के विरुद्ध सत्याग्रह आन्दोलन 1919

रॉलेट एक्ट सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में 'सेडिशन समिति' का गठन हुआ।

समिति की संस्तुतियों के आधार पर फरवरी, 1919 में दो विधेयक पारित किए गए। इन दोनों विधेयकों को रॉलेट एक्ट या 'आतंकवादी अपराध अधिनियम' कहा जाता है।

बिना अपील, बिना वकील, बिना दलील का कानून रॉलेट एक्ट को भारतीयों ने 'काला कानून' की संज्ञा दी है।

गाँधीजी ने इसके विरोध में बॉम्बे में सत्याग्रह सभा की स्थापना की।

6 अप्रैल, 1919 को अखिल भारतीय हड़ताल ( प्रथम हड़ताल ) का आयोजन किया गया।

सरकार ने 'मार्शल लॉ लगाकर प्रशासन आर. डायर नामक अधिकारी को सौंप दिया।

जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड-1919

+

पंजाब में रॉलेट एक्ट का विरोध करने वाले दो स्थानीय कांग्रेसी नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को 9 अप्रैल, 1919 को गिरफ्तार किया गया, जिसके विरोध में 10 अप्रैल को रैली निकाली गई जिस पर गोलीबारी में कुछ आंदोलनकारी मारे गए।

13 अप्रैल, 1919 को बैशाखी के दिन इस गिरफ्तारी व गोलीबारी के विरोध में अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक सार्वजनिक सभा बुलाई गई।

सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल आर. डायर ने बिना पूर्व सूचना तथा चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी।

हत्याकाण्ड की जाँच के लिए हण्टर कमेटी का गठन किया गया। हण्टर कमेटी ने डायर को निर्दोष करार दिया।

कांग्रेस ने हत्याकाण्ड की जाँच के लिए मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया।

हत्याकाण्ड के विरोध में टैगोर ने 'सर' की उपाधि त्याग दी तथा शंकरन

नायर ने गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् से इस्तीफा दे दिया। नोट- हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने डायर को ब्रिटिश साम्राज्य का शेर कहा तथा 'Sword of honor' भेंट की।

खिलाफत आन्दोलन 1919 1920

• प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन व तुर्की के बीच सम्पन्न 'सेब्रेस की सन्धि' द्वारा तुर्की के सुल्तान (खलीफा) के अधिकार छिन गए व तुर्की साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया।

मुहम्मद अली व शौकत अली के नेतृत्व में खलीफा से न्यायोचित व्यवहार करने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय मुसलमानों का आन्दोलन था।

सितम्बर, 1919 में 'अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी का गठन किया गया।

17 अक्टूबर, 1919 को खिलाफत दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। भारत परिषद् अधिनियम 1919

+

मॉण्टेग्यू (भारत सचिव) - चेम्सफोर्ड (गवर्नर जनरल)

इस अधिनियम के तहत प्रांतों में द्वैध शासन प्रारम्भ किया गया था। असहयोग आन्दोलन 1920

+

+

+

असहयोग आन्दोलन का प्रारम्भ 1 अगस्त, 1920 को हुआ। सितम्बर, 1920 के कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में गाँधीजी ने असहयोग का प्रस्ताव पेश किया।

असहयोग आन्दोलन के प्रस्ताव के लेखक स्वयं महात्मा गाँधी थे। चितरंजनदास ने असहयोग आन्दोलन के प्रस्ताव का विरोध किया था। दिसम्बर, 1920 में नागपुर (सी. विजय राघवाचार्य) के नियमित अधिवेशन में सी. आर. दास ने ही प्रस्ताव रखा, जिसका कांग्रेस द्वारा अनुमोदन कर लिया गया।

आन्दोलन चलाने के लिए तिलक स्वराज फंड की स्थापना की गई। गाँधीजी ने आश्वासन दिया कि असहयोग के तरीके को अपनाते हुए यदि इन कार्यक्रमों पर पूरी तरह अमल हुआ तो एक वर्ष के भीतर ही आजादी मिल जाएगी।

इस आन्दोलन में गाँधीजी ने केसर-ए-हिन्द की उपाधि व जुलु व बोअर पदक त्याग दिए तथा जमनालाल बजाज ने रायबहादुर की उपाधि त्याग दी।

वर्ष 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स' के भारत आगमन पर उनका बहिष्कार किया गया।

दिसम्बर, 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में इस अहिंसक आन्दोलन को और तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

असहयोग आन्दोलन कई जगह हिंसक भी हो गया था।

5 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा (जिला-गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) नामक स्थान पर उग्र भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिसमें एक थानेदार व 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई।

उग्र भीड़ का नेतृत्व भगवान अहीर नामक व्यक्ति ने किया। गाँधीजी ने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली से हुई बैठक में असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया।

स्वराज पार्टी 1923

1.

2.

जनवरी, 1923 को इलाहाबाद में सी. आर. दास, मोतीलाल नेहरू, विट्ठलभाई पटेल, मद�� मोहन मालवीय, जयकर के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की। इसमें सी. आर. दास अध्यक्ष तथा मोतीलाल नेहरू सचिव बने।

स्वराज पार्टी के उद्देश्य-

शीघ्रातिशीघ्र डोमिनियन स्टेट्स का दर्जा प्राप्त करना । सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करना।

साइमन कमीशन 1927-28

सर जॉन साइमन की अध्यक्षता वाले इस आयोग में 1 भी भारतीय सदस्य नहीं था अत: इसे श्वेत कमीशन भी कहा जाता है।

3 फरवरी, 1928 को आयोग के भारत आगमन पर उसका पूर्ण बहिष्कार किया गया, काले झण्डे व 'साइमन वापस जाओ' के नारे लगाए गए।

259

उत्कर्ष प्रकाशन

लाहौर में ऐसे ही एक विरोध के दौरान पुलिस की लाठी से लाला लाजपतराय की 3 अक्टूबर, 1928 को मृत्यु हो गई।

नोट :- साइमन कमीशन का बहिष्कार नहीं करने वाले दल- 1. जस्टिस पार्टी 2. पंजाब यूनियनिस्ट पार्टी

नोट :- पब्लिक सेफ्टी बिल पास होने के विरोध में 8 अप्रैल, 1929 को बटुकेश्वर दत्त तथा भगत सिंह ने दिल्ली में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में खाली कोचों पर बम फेंका था।

नेहरू रिपोर्ट 1928

साइमन कमीशन के बहिष्कार के बाद भारत सचिव लॉर्ड बिरकेनहेड ने भारतीयों के सामने चुनौती रखी कि वे ऐसे संविधान का निर्माण कर ब्रिटिश संसद के समक्ष रखे जिसे सभी दलों का समर्थन प्राप्त हो।

कांग्रेस ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए 28 फरवरी, 1928 को दिल्ली में सर्वदलीय सम्मेलन बुलाया जिसकी अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने की।

सदस्य - सर अली इमाम, एम.एम. अणे, तेज बहादुर सप्रू, मंगल सिंह, जी. आर. प्रधान, शोएब कुरेशी, सुभाषचन्द्र बोस, एन. एम. जोशी।

नेहरू रिपोर्ट में 'डोमिनियन स्टेट्स' को पहला लक्ष्य घोषित किया

गया।

नेहरू रिपोर्ट को अगस्त, 1928 में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन में अन्तिम रूप दिया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ. अन्सारी ने की थी। लाहौर अधिवेशन 1929

अध्यक्ष- जवाहर लाल नेहरू

इसमें पूर्ण स्वराज को कांग्रेस का उद्देश्य घोषित किया गया।

31 दिसम्बर, 1929 को स्वाधीनता का नया नया स्वीकृत तिरंगा झंडा लहराया गया।

पेशावर में चन्द्रसिंह गढ़वाली ने आन्दोलनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया।

नागालैण्ड में जदोनांग के नेतृत्व में जियालरंग आन्दोलन चला। जदोनांग की 13 वर्षीय बहन गाइडेन्ल्यू ने तिरंगा फहराया।

धरासना में सरोजिनी नायडू, इमाम साहब व मणिलाल के नेतृत्व में आन्दोलन किया।

इस आन्दोलन में भारतीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आन्दोलन के दौरान लड़कों की 'वानर सेना' व लड़कियों की 'माजेरी सेना' बनाई गई।

गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च, 1931

इसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है।

• तेज बहादुर सप्रू व जयकर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

शर्ते

:-

1. समुद्र के किनारे बसने वाले लोगों को नमक बनाने व उसे एकत्र करने की छूट [ दी जाए।

2. हिंसात्मक कार्यों में लिप्त अभियुक्तों के अलावा सभी राजनीतिक बन्दियों को रिहा किया जाए।

3. अफीम, शराब व विदेशी वस्त्रों की दुकान पर शान्तिपूर्ण धरने की अनुमति ।

गाँधीजी ने कांग्रेस की ओर से निम्नलिखित शर्ते स्वीकार कर ली-

1.

सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया जाएगा।

2.

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस भाग लेगी।

3.

नमक कानून उन्मूलन की माँग व बहिष्कार की माँग को वापस ले लिया जाएगा।

कराची अधिवेशन मार्च, 1931

+

26 जनवरी, 1930 को "प्रथम स्वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाया

गया था।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निर्णय लिया व इसके कार्यक्रम के लिए गाँधीजी को अधिकृत किया।

+

गाँधीजी का 11 सूत्री माँग पत्र 1930

+

31 जनवरी, 1930 गाँधीजी ने इरविन (गवर्नर जनरल) व रैम्जे मैकडोनाल्ड के सामने 11 सूत्री प्रस्ताव रखा। जिनमें प्रमुख

1.

नमक कर समाप्त किया जाए।

2.

सैनिक व्यय में 50% की कमी हो ।

3. राजनीतिक बन्दियों को रिहा किया जाए।

4. विदेशी कपड़े पर विशेष आयात कर लगाया जाए।

5.

भू राजस्व 1/2 किया जाए।

6. भारतीयों को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने का अधिकार दिया जाए। सविनय अवज्ञा आन्दोलन 1930

+

12 मार्च, 1930 को गाँधीजी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 अनुयायियों के साथ 24 दिन में 322 कि.मी. दूर दांडी की ओर प्रस्थान किया।

6 अप्रैल, 1930 को दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा। नोट:- सुभाष चन्द्र बोस ने दाण्डी मार्च की तुलना नेपोलियन के 'पेरिस मार्च' व मुसोलिनी के 'रोम मार्च' से की।

+

+

राजगोपालाचारी ने 'त्रिचलापल्ली से वेदारण्यम' तक की यात्रा की। के. केलप्पन व टी. के. माधवन ने कालीकट से पयान्नूर तक की यात्रा की। खान अब्दुल गफ्फार खान ने उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में खुदाई खिदमतगार (लाल कुर्ती दल) की स्थापना की।

260

मार्च, 1931 में सरदार वल्लभ भाई पटेल की अध्यक्षता में हुआ। गाँधी-इरविन समझौते का कांग्रेस ने अनुमोदन किया। राजनीतिक घोषणा के तहत् 'मौलिक अधिकार व कर्तव्य' शीर्षक प्रस्ताव भी स्वीकार किया गया।

नौजवान भारत सभा के कार्यकर्ताओं ने ���ाँधीजी को काले झण्डे दिखाए क्योंकि गाँधीजी भगतसिंह को माफी नहीं दिलवा पाए। नोट- गाँधी-इरविन समझौते में भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु की रिहाई के बारे में कुछ बातचीत नहीं हुई थी तथा 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को फाँसी दी।

गोलमेज सम्मेलन 1930 1931 1932

प्रथम गोलमेज सम्मेलन- नवम्बर, 1930 से जनवरी, 1931 तक चला।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 7 सितम्बर, 1931 से 1 दिसंबर, 1931

तक चला।

·

द्वितीय सम्मेलन जिसमें कांग्रेस ने भाग लिया।

कांग्रेस की तरफ से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गाँधीजी ने भाग लिया।

गाँधीजी 'राजपूताना' नामक जहाज से इंग्लैण्ड पहुँचे।

मदन मोहन मालवीय व एनी बेसेंट ने व्यक्तिगत रूप स्वयं के खर्चे पर से भाग लिया।

इस सम्मेलन में अम्बेडकर ने दलितों के लिए पृथक् निर्वाचन की माँग की।

तृतीय गोलमेज सम्मेलन- नवंबर, 1932 से दिसंबर, 1932 तक चला। इस सम्मेलन में भी कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।

उत्कर्ष प्रकाशन

भीमराव अम्बेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था। तीनों गोलमेज सम्मेलनों में इंग्लैण्ड का प्रधानमंत्री जेम्स एजे मैकडोनाल्ड था।

नोट:- 23 मार्च, 1931 को सुखदेव, राजगुरु तथा भगतसिंह को फाँसी दे दी गई। मई, 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की पुनरावृत्ति (1932-1934)

लोगों में उत्साह की कमी देखकर गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया।

लॉर्ड विलिंगटन (गवर्नर जनरल) ने कांग्रेस को गैर कानूनी घोषित कर प्रतिबन्ध लगा दिया।

गाँधीजी सक्रिय राजनीति से अलग हो गए।

साम्प्रदायिक पंचाट - 1932

+

+

ब्रिटिश प्रधानमंत्री 'रैम्जे मैकडोनाल्ड' ने 16 अगस्त, 1932 को साम्प्रदायिक निर्णय प्रस्तुत किया।

मुसलमान, सिखों एवं भारतीय ईसाइयों के साथ हरिजनों के लिए भी हिन्दुओं से अलग निर्वाचन तथा प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई। पूना समझौता 24 सितंबर, 1932

+

साम्प्रदायिक निर्णय के समय गाँधीजी यरवदा जेल में थे।

गाँधीजी ने साम्प्रदायिक निर्णय के विरुद्ध 20 सितंबर, 1932 को जेल में ही आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया।

मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से पूना में गाँधी व अम्बेडकर के बीच समझौता हुआ।

अम्बेडकर ने समझौते के अन्तर्गत हरिजनों के लिए पृथक् प्रतिनिधित्व की माँग को वापस ले लिया तथा संयुक्त निर्वाचन के सिद्धान्त को स्वीकार किया गया।

इस समझौते के बाद गाँधीजी ने खुद को पूरी तरह हरिजनों की सेवा में समर्पित कर दिया। 1932 में गाँधीजी ने 'अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग' की स्थापना की।

भारत सरकार अधिनियम 1935

+

साइमन कमीशन, नेहरू समिति व तीनों गोलमेज सम्मेलनों के प्रस्तावों के आधार पर यह अधिनियम पारित किया गया।

यह बिना प्रस्तावना का व्यापक अधिनियम था जो भारतीय संविधान का आधार बना, लगभग 2/3 अनुच्छेद इसी से लिए गए हैं। 1935 के अधिनियम के प्रावधान:-

+ ब्रिटिश, भारत व देशी रियासतों को मिलाकर एक अखिल भारतीय संघ बनाने का प्रावधान था।

गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में 3 सदस्य गवर्नर जनरल द्वारा नियुक्त किए जाने थे और 10 सदस्य जन प्रतिनिधियों में से नियुक्त किए जाने थे।

गवर्नर जनरल को वीटो व अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया गया।

विषयों को तीन सूचियों में विभक्त किया गया

1. संघ सूची (59)

2. राज्य सूची (54)

3. समवर्ती सूची (36)

सिन्ध, उड़ीसा व उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त तीन नए राज्य बनाए गए। बर्मा को भारत से अलग किया गया।

केन्द्रीय बैंक की स्थापना का प्रावधान रखा गया।

11 में से 6 प्रान्तों में द्विसदनीय व्यवस्था लागू की गई। बिहार, बंगाल, असम, संयुक्त प्रान्त, बम्बई एवं मद्रास

प्रान्तों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रान्तीय स्वायत्तता दी गई। भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत् भारतीयों को प्रान्तीय शासन का अधिकार मिला, परिणामस्वरूप वर्ष 1937 में प्रान्तीय विधानसभाओं के चुनाव हुए।

अगस्त प्रस्ताव 1940

1.

3.

8 अगस्त, 1940 को युद्ध में भारतीयों का समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने अगस्त प्रस्ताव पेश किया- वायसराय की सलाहकार काउंसिल के विस्तार के साथ ही कार्यकारिणी में भारतीय प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना।

2. युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दिया जाएगा। युद्ध के बाद संविधान निर्माण हेतु भारतीयों को आमंत्रित किया जाएगा। नोट : कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव को ठुकराते हुए 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' आन्दोलन प्रारम्भ किया था।

व्यक्तिगत सत्याग्रह (दिल्ली चलो आन्दोलन ) - 1940

17 अक्टूबर, 1940 को ब्रिटिश निर्णय के विरुद्ध गाँधीजी ने कुछ चुने हुए व्यक्तियों के साथ सीमित पैमाने पर सत्याग्रह चलाया। जिसमें प्रथम सत्याग्राही विनोबा भावे व द्वितीय सत्याग्राही जवाहर लाल नेहरू थे। सत्याग्रह को सीमित इसलिए रखा गया कि देश में व्यापक उथल-पुथल न हो और ब्रिटेन के युद्ध प्रयासों में बाधा न पड़े।

क्रिप्स प्रस्ताव 1942

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल पर दबाव डाला कि वह भारतीयों के युद्ध में सहयोग के लिए बातचीत करें। भारतीय समर्थन पाने के उद्देश्य से कैबिनेट मंत्री स्टेफर्ड क्रिप्स 22 मार्च, 1942 को भारत आया।

इसके प्रमुख प्रावधान:-

1. युद्ध के बाद भारत को विदेश नीति निर्धारण के सभी अधिकारों से सम्पन्न डोमिनियन स्टेट का दर्जा दिया जाएगा।

2.

3.

नोट :-

युद्ध के बाद सभी प्रान्तीय विधानमण्डलों के निम्न सदन के सदस्यों के द्वारा संविधान सभा का निर्वाचन किया जाएगा।

अल्पसंख्यकों के हितों के लिए एक पृथक् समझौता किया जाएगा।

* गाँधीजी ने क्रिप्स प्रस्ताव को Post Dated Cheque कहा। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने क्रिप्स प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। भारत छोड़ो आन्दोलन (अगस्त क्रान्ति) - 1942

+

द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा था । वस्तुओं की कमी व बढ़ती कीमतों ने भारतीय जनता के असंतोष को और गहरा कर दिया।

14 जुलाई, 1942 को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति ने 'अंग्रेजों भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया।

गाँधीजी ने कांग्रेस को अपने प्रस्ताव को स्वीकार न किए जाने की स्थिति में चुनौती देते हुए कहा कि 'मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दूँगा।'

8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में एक ऐतिहासिक सभा में महात्मा गाँधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया तथा आंदोलन की शुरुआत की।

9 अगस्त की सुबह 'ऑपरेशन जीरो ऑवर' के तहत कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए।

261

उत्कर्ष प्रकाशन

गाँधीजी को पूना 'के आगा खाँ महल में व अन्य नेताओं को अहमदनगर

के किले में रखा गया और कांग्रेस को अवैधानिक संस्था घोषित कर दिया गया।

स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान यह पहला ऐसा आन्दोलन था जो नेतृत्व विहीनता के बावजूद उत्कर्ष तक पहुँचा।

भारत छोड़ो आन्दोलन के समय स्थापित सरकारें-

दिसम्बर, 1942- सितम्बर, 1944

स्थान

नेता

अवधि

बलिया (उत्तरप्रदेश) सर्वप्रथम स्थापित तामलुक की जातीय

चित्तू पांडे

एक सप्ताह ( अगस्त, 1942)

सतीश सामंत

सरकार (मिदनापुर-

बंगाल)

सतारा

की

वाई. बी. वहाण

समानान्तर सरकार

तथा नाना पाटिल

कोरापुट (उड़ीसा)

लक्ष्मण नायक

1943 से 1945 तक

( सबसे लम्बे समय तक )

6 मई, 1944 को गाँधीजी को जेल से रिहा किया गया। सरदार पटेल ने भारत छोड़ो आन्दोलन को 'अद्वितीय आन्दोलन'

कहा।

उषा मेहता ने मुंबई में भूमिगत रेडियो स्टेशन की स्थापना की। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी फॉर्मूला 1944

+

जुलाई, 1944 को चक्रवर्ती राजगोपालाचारी द्वारा गाँधीजी की स्वीकृति से कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बी�� देश की साम्प्रदायिक समस्या सुलझाने के उद्देश्य से प्रस्तुत योजना

देश विभाजन की स्थिति में रक्षा, यातायात व संचार को साझा रखकर भारत व पाकिस्तान मिलकर संघ बनाए।

राजगोपालाचारी प्रथम कांग्रेसी थे जिन्होंने पाकिस्तान की माँग का समर्थन किया।

जिन्ना ने इस फॉर्मूले को पूरी तरह से नकार दिया।

वेवेल योजना 1945

+

मार्च, 1945 में वायसराय लॉर्ड वेवेल इंग्लैण्ड गए तथा ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल एवं भारत मन्त्री एमरी से भारत के बारे में सलाह- मशविरा किया।

14 जून, 1945 को उन्होंने भारत आकर वेवेल योजना प्रस्तुत की। वायसराय की कार्यकारी परिषद् में सभी दलों को प्रतिनिधित्व देते हुए वायसराय व मुख्य सेनापति को छोड़कर सभी पद भारतीयों को दिए जाएँगे।

शिमला सम्मेलन 1945

+

+

24 जून, 1945 को प्रारम्भ 14 जुलाई, 1945 तक 21 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व अबुल कलाम आजाद ने किया। मुस्लिम लीग के अड़ियल रवैये के कारण सम्मेलन असफल रहा। अबुल कलाम आजाद ने शिमला सम्मेलन को भारतीय इतिहास में "जल विभाजन" की संज्ञा दी है।

शाही नो सेना विद्रोह 1946

18 फरवरी, 1946 को 'एन. एस. तलवार' नामक जहाज के कर्मचारियों ने ब्रिटिश सरकार के सामने खराब खाना मिलने की शिकायत की।

ब्रिटिश अधिकारियों का जवाब था- "भिखमंगों को चुनने की छूट नहीं दी जा सकती" ।

इसके खिलाफ नाविकों ने विद्रोह कर दिया, बॉम्बे से प्रारम्भ होकर यह आंदोलन कराची तक फैल गया।

जिसे

कर्मचारियों की एक माँग यह भी थी कि नाविक 'बी. सी. दत्त', ' जहाज पर अंग्रेजों भारत छोड़ो लिखने के लिए गिरफ्तार किया गया था, को रिहा किया जाए।

जिन्ना व पटेल के समझाने पर सैनिकों ने समर्पण कर दिया। कैबिनेट मिशन 1946

+

प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने तत्कालीन ज्वलन्त समस्या पर विचार- विमर्श के लिए कैबिनेट मिशन' भारत भेजा।

3 सदस्यीय आयोग था- पैट्रिक लॉरेन्स, स्टेफर्ड क्रिप्स एवं ए. वी. एलेक्जेण्डर |

24 मार्च, 1946 को दिल्ली पहुँचा व 16 मई, 1946 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

एक भारतीय संघ स्थापित होगा जो विदेश, रक्षा व संचार की व्यवस्था करेगा। अन्य विषयों पर राज्यों को स्वतन्त्रता होगी।

केन्द्रीय विधानमण्डल में धार्मिक मुद्दे पर अधिनियम पारित करने से पहले दोनों सम्प्रदायों के प्रतिनिधियों से पृथक्-पृथक् सहमति ली जाएगी।

संविधान सभा का गठन प्रान्तीय विधानसभा के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होगा।

पाकिस्तान की माँग को अस्वीकार कर दिया गया।

अन्तरिम सरकार का गठन किया जाएगा।

जुलाई, 1946 में कैबिनेट मिशन के आधार पर संविधान सभा के 296 सदस्यों के चुनाव हुए। कि

लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार कर दिया व 16 अगस्त, 1946

को प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस के रूप में मनाया।

पूरे देश में साम्प्रदायिक दंगे हो गए।

2 सितंबर, 1946 को नेहरूजी की अध्यक्षता में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

एटली घोषणा- 20 फरवरी, 1947

ब्रिटिश प्रधानमन्त्री एटली ने घोषणा की।

1. ब्रिटिश सरकार जून, 1948 तक भारतीयों को सत्ता सौंप देगी।

2. माउंटबेटन को वायसराय बनाकर भारत भेजा जाएगा।

माउण्टबेटन योजना 1947

+ मार्च, 1947 में माउण्टबेटन भारत आया।

3 जून, 1947 को माउण्टबेटन योजना प्रस्तुत की।

1.

भारत को दो भागों, भारत व पाकिस्तान में बाँट दिया जाएगा।

2. बंगाल, पंजाब विधानमण्डलों के अधिवेशन दो भागों में किए जाएँगे। असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह करवाया जाएगा।

3.

4. पंजाब, बंगाल, असम के लिए सीमा रेडक्लिफ आयोग का गठन किया

जाएगा।

5. देशी रियासतों से ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त कर उन्हें भारत या पाक में मिलने की पूर्ण स्वतन्त्रता होगी।

भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम 1947 (18 जुलाई, 1947)

1. 15 अगस्त, 1947 को भारत व पाक दो डोमिनियन राज्य अस्तित्व में आ जाएँगे।

2.

भारत व पाकिस्तान के पास राष्ट्रमण्डल से अलग होने का पूर्ण अधिकार होगा।

262

4.

उत्कर्ष प्रकाशन

3. दोनों डोमिनियन स्टेट अपनी-अपनी संविधान सभा का गठन करेंगे व

दोनों के लिए अलग-अलग गवर्नर जनरल होगा।

नया संविधान बनने तक संविधान सभा ही 1935 के अधिनियम के अनुसार विधानमण्डल के रूप में कार्य करेगी।

1757-63 €

-

5. विभाजन के प्रश्न पर पटेल ने कहा कि "यदि कांग्रेस विभाजन स्वीकार न करती तो एक पाकिस्तान के स्थान पर कई पाकिस्तान बनते।"

23 जून, 1757 ई.

1761 €

कर्नाटक का तृतीय युद्ध

अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के मध्य

- 1763 ई. पेरिस की सन्धि

| प्लासी का युद्ध - अंग्रेजों ने सिराजुद्दौला को पराजित किया।

पानीपत का तृतीय युद्ध- अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को पराजित किया।

ann

1764 €.

बक्सर का युद्ध

1765 €

इलाहाबाद की सन्धि

1773 €.

रेग्युलेटिंग एक्ट

इतिहास की महत्त्वपूर्ण दिनांक व तिथियाँ

1774 ई.

कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना (प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे ) ।

सर विलियम जोन्स द्वारा एशियाटिक सोसायटी की

2300 ई.पू. -

1784 €

सिन्धु घाटी सभ्यता का कालक्रम

स्थापना

1750 ई.पू.

वेलेजली की सहायक सन्धि

वैदिक सभ्यता-

1500 ई.पू. -

1798 €.

600 ई.पू.

1. ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई. पू.)

(प्रथम हैदराबाद के साथ)

2. उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई. पू.)

1799 €

चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध

563 ई.पू.

गौतम बुद्ध का जन्म

(वेलेजली व टीपू सुल्तान के मध्य)

540 ई.पू.

महावीर स्वामी (24वें तीर्थंकर) का जन्म

1800 €

फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना

326 ई.पू.

भारत पर सिकन्दर का आक्रमण

Bank of Bangal की स्थापना

322 ई.पू.-

मौर्य साम्राज्य

1806 ई.

185 ई.पू.

सिंध पर पहला अरब आक्रमण

712

भारतीय इतिहास में पहली बार जौहर का उल्लेख

मिलता है।

1809 €

महमूद गजनवी द्वारा गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पर

वर्ष 1921 में इस बैंक की तीन शाखाएँ बनाई बैंक ऑफ बंगाल + बैंक ऑफ मद्रास + बैंक ऑफ बॉम्बे । इन तीनों का विलय इम्पीरियल बैंक में हुआ तथा यही बैंक बाद में 1955 में 'स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया' बना। अमृतसर की सन्धि (रणजीत सिंह व चार्ल्स मेटकॉफ के मध्य)

1025 €.

आक्रमण

1813 ई.

1191 ई.

तराईन का पहला युद्ध- पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने

ईसाई धर्म प्रचारकों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति मिली।

मुहम्मद गौरी को हराया।

1828 ₤

1192 €

तराईन का द्वितीय युद्ध मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज

| कलकत्ता में 'ब्रह्म समाज' की स्थापना ( राजा राम मोहन रॉय द्वारा)

चौहान तृतीयको

1829 $

| सती प्रथा का अन्त ( विलियम बैंटिक द्वारा)

1336 €.

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना

1833 €.

पुर्तगाल के वास्को डी गामा' ने भारत के समुद्री मार्ग

| बंगाल के गवर्नर जनरल को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया (पहला विलियम बैंटिक)

1498 €.

की खोज की।

1843 €.

पानीपत का प्रथम युद्ध - बाबर ने इब्राहिम लोदी को

1526

हराकर मुगल साम्राज्य की स्थापना की

1853 €.

1527 ई.

खानवा का युद्ध - बाबर ने राणा सांगा को हराया

1540 €.

| कन्नौज का युद्ध - शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया

1854 €.

1556 $

पानीपत का द्वितीय युद्ध अकबर ने हेमू को हराया

1571 ई.

1856 ई.

अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी की स्थापना

दास प्रथा का अन्त

पहली रेल लाइन (बॉम्बे-ठाणे के मध्य) लॉर्ड डलहौजी के समय

वुड डिस्पेच (गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी) को "भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' कहा जाता है विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (ईश्वरचन्द्र विद्यासागर द्वारा)

1576 $

हल्दीघाटी का युद्ध अकबर व महाराणा प्रताप के

मध्य अनिर्णायक युद्ध हुआ।

1857 ई.

क्रान्ति 8 अप्रैल, 1857 को मंगल पाण्डे को फाँसी (बैरकपुर छावनी

1739 €.

नादिरशाह का दिल्ली पर आक्रमण

कर्नाटक का प्रथम युद्ध

1746-48 €

- 1748 एक्स ला शौपल की सन्धि ।

- अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के मध्य

बनाया गया (Ist वायसराय लॉर्ड कैनिंग)

1749-54 €

कर्नाटक का द्वितीय युद्ध

-

- 1755- पाण्डिचेरी की सन्धि

अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के मध्य

1858 €

- 10 मई, 1857 को मेरठ से क्रान्ति की शुरुआत भारत सरकार अधिनियम-

इस एक्ट से गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय

इस अधिनियम द्वारा ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त करके महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित किया।

263

1861 ई.

भारत सरकार अधिनियम-

उत्कर्ष प्रकाशन

इस अधिनियम द्वारा 1862 ई. में तीन उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई-

1. कलकत्ता उच्च न्यायालय

2. बॉम्बे उच्च न्यायालय

3. मद्रास उच्च न्यायालय

वर्ष 1913

वर्ष 1914

9 जनवरी, 1915

1872 ई.

भारत की पहली जनगणना वायसराय लॉर्ड मेयो

मई, 1915

1875 €.

आर्य समाज की स्थापना दयानन्द सरस्वती द्वारा बम्बई में

वर्ष 1916

| इण्डियन एसोसिएशन की स्थापना- सुरेन्द्रनाथ

वर्ष 1917

1876 €

बनर्जी द्वारा कलकत्ता में

वर्ष 1918

1878 €.

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट

(देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम)

वर्ष 1918

1881.

पहली नियमित जनगणना- वायसराय लॉर्ड रिपन

1882 €.

स्थानीय स्वशासन की शुरुआत

(वायसराय लॉर्ड रिपन)

वर्ष 1919

इल्बर्ट बिल विवाद वायसराय लॉर्ड रिपन

1883 ई.

28 दिसम्बर, 1885 ई.

इस बिल में भारतीय मजिस्ट्रेटों को यूरोपीय मजिस्ट्रेटों के समान अधिकार दिलाने के लिए तैयार विधेयक इस विवाद को 'सफेद विद्रोह' कहा गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना वायसराय- लॉर्ड डफरिन

13 अप्रैल, 1919

1 अगस्त, 1920

5 फरवरी, 1922

1896 €.

कांग्रेस की स्थापना एलन ऑक्टोवियन ह्यूम ने की। कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में वन्दे मातरम् गीत को पहली बार गाया गया।

मार्च, 1923

वर्ष 1924

1897 ई.

स्वामी विवेकानन्द द्वारा रामकृष्ण मिशन की स्थापना मुख्यालय वेल्लूर (कलकत्ता)

दिसम्बर, 1924

अभिनव भारत की स्थापना विनायक दामोदर

9 अगस्त, 1925

काकोरी ट्रेन काण्ड

वर्ष 1904

वर्ष 1905

सावरकर द्वारा नासिक में (वायसराय लॉर्ड कर्जन) 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार (स्वदेशी आन्दोलन)

दिसम्बर, 1925

वर्ष 1926

16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल विभाजन

मुस्लिम लीग की स्थापना, ढाका में आगा खाँ व

वर्ष 1927

वर्ष 1906

सलीमुल्ला खाँद्वारा

वर्ष 1928

मुख्यालय लखनऊ में

पहली बार स्वराज की माँग कलकत्ता अधिवेशन में

वर्ष 1928

वर्ष 1906

दादा भाई नौरोजी द्वारा रखी (4 प्रस्ताव स्वदेशी,

स्वशासन, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा ) ।

सूरत अधिवेशन (अध्यक्षता रासबिहारी घोष )

वर्ष 1928

वर्ष 1907

कांग्रेस का विभाजन

मार्ले-मिण्टो सुधार अधिनियम-

8 अप्रैल, 1929

वर्ष 1909

इस अधिनियम में मुसलमानों को पृथक् सांप्रदायिक निर्वाचन दिया गया।

वर्ष 1911

दिल्ली दरबार (ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम की भारत यात्रा) इस दरबार में बंगाल विभाजन को रद्द किया गया। इसी दरबार में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली बनाने की अनु��ति स्वीकृत हुई।

दिसम्बर, 1929

वर्ष 1930

कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार जन गण मन गाया गया।

(12 नवम्बर, 1930-13 जनवरी, 1931 तक)

अप्रैल, 1912

कलकत्ता के स्थान पर दिल्ली को भारत की राजधानी

वर्ष 1930

बनाया।

इस अधिवेशन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।

264

सेन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल व सोहनसिंह भावना द्वारा 'गदर पार्टी' की स्थापना। कामागाटामारू प्रकरण (बज बज प्रकरण) - कामागाटामारू प्रकरण कनाडा में भारतीयों के प्रवेश के बारे में विवाद था।

गाँधीजी का दक्षिण अफ्रीका से आगमन गाँधीजी द्वारा साबरमती आश्रम की स्थापना । तिलक व एनी बिसेंट द्वारा होमरूल लीग की स्थापना । लखनऊ अधिवेशन (अध्यक्ष-अम्बिकाचरण मजूमदार) चम्पारण सत्याग्रह

खेडा सत्याग्रह (गुजरात)- इस सत्याग्रह को हार्डीमन ने भारत का पहला वास्तविक किसान सत्याग्रह कहा है।

अहमदाबाद मिल मजदूर आन्दोलन

रॉलेट एक्ट (अध्यक्ष सिडनी रॉलेट ) - इस एक्ट को बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून

कहा गया।

माण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड

असहयोग आन्दोलन की शुरुआत।

इसी दिन बाल गंगाधर तिलक का देहांत हुआ। गोरखपुर (U.P.) में चौरी-चौरा काण्ड

चितरंजन दास (अध्यक्ष) व मोतीलाल नेहरू (सचिव) द्वारा इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना । हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना कानपुर में

एकमात्र बेलगाँव अधिवेशन में गांधीजी द्वारा अध्यक्षता की गई।

कानपुर अधिवेशन प्रथम भारतीय महिला

अध्यक्ष सरोजिनी नायडू

नौजवान भारत सभा की स्थापना भगतसिंह, छबील दास, यशपाल द्वारा लाहौर में।

साइमन कमीशन

साइमन कमीशन भारत आया। इसके विरोध में लाठी लगने से लाला लाजपत राय की मृत्यु।

नेहरू रिपोर्ट मोतीलाल नेहरू (अध्यक्ष)

- इस रिपोर्ट में सात सदस्य थे।

हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की स्थापना चन्द्रशेखर आजाद द्वारा दिल्ली फिरोजशाह के कोटला मैदान में

भगतसिंह व बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय विधान मण्डल में बम फेंका। यही पहली बार इन्कलाब जिन्दाबाद का नारा दिया।

लाहौर अधिवेशन (अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरू) नेहरू जी द्वारा पूर्ण स्वराज' की माँग

सविनय अवज्ञा आन्दोलन-

दांडी मार्च 12 मार्च 6 अप्रैल, 1930 (78 अनुयायी)

पहला गोलमेज सम्मेलन

अध्यक्षता रैम्जे मैकडोनाल्ड

गाँधी-इरविन समझोता (दिल्ली समझोता)

उत्कर्ष प्रकाशन

भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को लाहोर सेंट्रल जेल

कराची अधिवेशन (अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई

5 मार्च, 1931

23 मार्च, 1931

में फाँसी दे दी गई।

मार्च, 1931

वर्ष 1931

16 अगस्त, 1932

पटेल)

दूसरा गोलमेज सम्मेलन

(7 सितम्बर, 19311 दिसम्बर, 1931 तक)

इसमें गाँधीजी ने भाग लिया।

साम्प्रदायिक पंचाट (कम्युनल अवॉर्ड)

- रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा जारी ।

दलित व मुसलमानों को पृथक् निर्वाचन

- यरवदा जेल (पुणे) में गाँधीजी का अनशन ।

पूना पैक्ट गाँधीजी व भीमराव अम्बेडकर के मध्य 26 सितम्बर, 1932 इस पैक्ट के अनुसार पृथक् निर्वाचन व्यवस्था समाप्त कर दी।

सितम्बर, 1932

वर्ष 1932

वर्ष 1935

वर्ष 1935

वर्ष 1936

वर्ष 1937

वर्ष 1938

1939 1939-1945

वर्ष 1940

वर्ष 1942

9 अगस्त, 1942

नवम्बर, 1943

14 जून, 1945

नवम्बर, 1945

गाँधीजी द्वारा 'हरिजन सेवक संघ' की स्थापना | तीसरा गोलमेज सम्मेलन

(17 नवम्बर, 1932-24 दिसम्बर, 1932 तक) इस सम्मेलन में कॉंग्रेस ने भाग नहीं लिया।

तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले व्यक्ति भीमराव अम्बेडकर थे।

भारत सरकार अधिनियम- इस अधिनियम द्वारा केन्द्र में द्वैध शासन लागू किया गया। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की स्थापना ।

अखिल भारतीय किसान सभा का पहला सम्मेलन (अध्यक्षता स्वामी सहजानन्द) प्रान्तीय चुनाव

हरिपुरा अधिवेशन (अध्यक्षता सुभाष चन्द्र बोस ) | त्रिपुरी अधिवेशन- अध्यक्ष पद को लेकर विवाद द्वितीय विश्व युद्ध

अगस्त प्रस्ताव (वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो) मुस्लिम लीग का लाहौर अधिवेशन

क्रिप्स मिशन- इस मिशन में कहा गया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा।

भारत छोड़ो आन्दोलन। (गाँधी का 'करो या मरो' का नारा । )

जापानी सेना अण्डमान और निकोबार द्वीप को जीतकर आजाद हिन्द फौज को सौंप दिया सुभाष चन्द्र बोस ने इनका नाम शहीद व स्वराज द्वीप रखा। व���वेल योजना वैवेल प्रस्तावों पर विचार करने के लिए शिमला सम्मेलन का आयोजन किया गया।

आजाद हिन्द फौज मुकदमा (लाल किले का मुकदमा ) वकील भूलाभाई देसाई, जवाहरलाल नेहरू, तेजबहादुर सप्त, आसफ अली इत्यादि । शाही नौसेना विद्रोह

कैबिनेट मिशन भारत आया।

कैबिनेट मिशन के विरोध में मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस मनाया।

फरवरी, 1946

23 मार्च 1946

16 अगस्त, 1946

9 दिसम्बर 1946

संविधान सभा की पहली बैठक

इस दिन को मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने भारतीय इतिहास का काला दिवस बताया।

20 फरवरी, 1947

3 जून, 1947

14-15 अगस्त,

1947

26 जनवरी, 1950

| एटली घोषणा- इस घोषणा में कहा गया कि अंग्रेज 30 जून, 1948 तक भारतवासियों को सत्ता सौंप देंगे। माउंट बेटन योजना / डिकी बर्ड प्लान इस योजना में दो राष्ट्र बनाने की बात हुई भारत व पाकिस्तान

14 अगस्त, 1947 पाकिस्तान को आजादी मिली। पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना ।

15 अगस्त, 1947 भारत को आजादी मिली। भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन

भारत के अंतिम व एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी |

भारत का संविधान लागू हुआ।

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अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु

प्रमुख वचन एवं नारे

करो या मरो, अंग्रेजों भारत छोड़ो तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा दिल्ली चलो जय हिन्द

मेरे सिर पर लाठी का एक एक प्रहार, अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगा

साइमन कमीशन वापस जाओ

जय जवान, जय किसान सम्पूर्ण क्रांति

वेदों की ओर लौटो विजयी विश्व तिरंगा प्यारा इन्कलाब जिन्दाबाद साम्राज्यवाद का नाश हो

जय जगत

वन्दे मातरम्

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जन-गण-मन अधिनायक जय है पूर्ण स्वराज्य, आराम हराम है। मुसलमान मूर्ख थे, जो उन्होंने सुरक्षा की माँग की और हिन्दू उनसे भी मूर्ख थे, जो उन्होंने उस माँग को ठुकरा दिया।

नाम

महात्मा गाँधी सुभाषचन्द्र बोस सुभाष चन्द्र बोस सुभाष चन्द्र बोस

लाला लाजपत राय

लाला लाजपत राय लाल बहादुर शास्त्री

जयप्रकाश नारायण दयानन्द सरस्वती श्याम लाल गुप्ता पार्षद

भगत सिंह भगत सिंह विनोबा भावे बंकिमचन्द्र चटर्जी

इकबाल बाल गंगाधर तिलक राम प्रसाद बिस्मिल रवीन्द्र नाथ ठाकुर जवाहरलाल नेहरू

अबुल कलाम आजाद

राजवंश मौर्य वंश शिशुनाग वंश नंद वंश

संस्थापक

चन्द्रगुप्त

राजधानी पाटलिपुत्र

शिशुनाग

वैशाली

महापद्मनंद

पाटलिपुत्र

265

शुंग वंश

हर्यक वंश

पुष्यमित्र शुंग बिम्बिसार

पाटलिपुत्र

राजगृह

1.

सातवाहन

सिमुक

प्रतिष्ठान

कण्व वंश

वासुदेव

पाटलिपुत्र

कुषाण वंश

कुजुल कडफिसस

पुरुषपुर

गुप्त वंश

श्रीगुप्त

पाटलिपुत्र

हुण वंश

तोरमाण

स्यालकोट

वर्धन वंश

पुष्यभूति

थानेश्वर

2.

पांड्य वंश

नेडियोन

मदुरे

चोल वंश

विजयालय

तंजीर

पल्लव वंश

सिंह वर्मन चतुर्थ

काँचीपुरम

उत्कर्ष प्रकाशन

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को किस विद्वान ने "एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानी" कहा है?

(a) चार्ल्स मैसन

(b) स्टुअर्ट पिग्गट

(c) अलेक्जेण्डर कनिंघम

(d) दशरथ शर्मा

विश्व का प्राचीनतम ज्ञात बंदरगाह (गोदीबाड़ा) प्राप्त हुआ है- (a) धौलावीरा

(b) सुत्कागेंडोर (c) जूनीकुरन

राष्ट्रकूट वंश

दन्तिदुर्ग

मान्यखेत

(d) लोथल

चालुक्य वंश

तैलप-11

3.

मान्यखेत / कल्याणी

(कल्याणी)

मनुष्य के साथ कुत्ता दफनाने का साक्ष्य किस सैन्धव स्थल से प्राप्त हुए हैं?

चालुक्य (बादामी) चालुक्य (वेंगी)

जयसिंह प्रथम

वातापी

विष्णुवर्धन

वेंगी

होयसल वंश

विष्णुवर्धन

द्वार समुद्र

यादव यश

भिल्लभ-V

देवगिरि

कदम्ब वंश

मयूर शर्मन

वनवासी

4.

काकतीय वंश

बीटा प्रथम

अमकोण्ड

गंग वंश

ब्रजहस्त पंचम

कुवलाल व

(a) रोपड़

(b) रंगपुर (c) बनवाली

(d) चन्द्रदड़ो

निम्नलिखित में से सिन्धु घाटी सभ्यता का कौन-सा नगर तीन खण्डों में विभाजित था?

(a) लोथल

तलकाड

पाल वंश

गोपाल

मुंगेर

(b) कालीबंगा

(c) चन्हूदड़ो

सेन वंश

सामंत सेन

लखनौती

वर्मन वंश (कामरूप)

ज्योतिष

5.

गुर्जर प्रतिहार

नागभट्ट प्रथम

कन्नौज

गहड़वाल वंश

चन्द्रदेव

कन्नौज

(d) धौलावीरा

निम्नलिखित में से कोन सा हड़प्पा स्थल रंगोई नदी के किनारे

स्थित है?

(a) बनवाली

चौहान वंश

वासुदेव

अजमेर

(b) रोपड़

परमार वंश

उपेन्द्र

धारा नगरी

चंदेल वंश

नन्नुक

खजुराहो

सोलंकी वंश

मूलराज

अन्हिलवाड़

6.

कलचुरी वंश

कोकल्ल

त्रिपुरी

गुलाम वंश

कुतुबुद्दीन ऐबक

दिल्ली

सालव वंश

नरसिंह

विजयनगर

(c) रंगपुर (d) राखीगढ़ी

हड़प्पा पुरास्थल के उत्खनन के समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का महानिदेशक कौन था?

(a) अलेक्जेण्डर कनिंघम

(b) मार्टीमर व्हीलर

तुगलक वंश

गयासुद्दीन तुगलक

दिल्ली

(c) जॉन मार्शल

सैय्यद वंश

खिज्र खाँ

दिल्ली

(d) चार्ल्स मैसन

लोदी वंश

बहलोल लोदी

दिल्ली

7.

असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

संगम वंश

हरिहर एवं बुक्का

विजयनगर

स्थल

नदी

खिलजी वंश तुलुव वंश

जलालुद्दीन खिलजी

दिल्ली

(a) मोहनजोदड़ो

-

सिन्धु

वीर नरसिंह

विजयनगर

(b) लोथल

भोगवा

आरवीडू वंश

बहमनी वंश

तिरुमल हसन गंगु

पेनुकोंडा

(c) कालीबंगा

सतलज

गुलबर्गा (बीदर)

आदिलशाही वंश

आदिलशाह

बीजापुर

8.

निजामशाही

मलिक अहमद

मुगल वंश

भोंसले वंश

बाबर छत्रपति शिवाजी

अहमदनगर दिल्ली / आगरा

रायगढ़

महाराज

266

(d) चन्हूदड़ो

सिन्धु घाटी सभ्यता का जलवायु परिवर्तन से पतन का विचार

देने वाले पुरातत्वविद है-

(a) अमलानन्द घोष

(b) माधो स्वरूप वत्स

(c) एस. आर. राव (d) मॉर्टीमर व्हीलर

सिन्धु

उत्कर्ष प्रकाशन

याज्ञवल्वय एवं गार्गी का दार्शनिक संवाद किस उपनिषद् में

वर्णित है-

(a) छांदोग्य

(b) वृहदारण्यक

(c) श्वेताश्वेतर

(d) कौषीतिकी

निम्नलिखित में से कौन-सा वेद गद्य व पद्य में वर्णित है?

18.

(a) ऋग्वेद

(b) यजुर्वेद

(c) सामवेद

9.

जॉन मार्शल ने किसको 'तत्कालीन विश्व का आश्चर्य जनक

17.

निर्माण' की संज्ञा दी है?

(a) गोदीबाड़ा

(b) सभागार

(c) विशाल अनागार

(d) विशाल स्नानागार

10.

निम्नलिखित में से कौन सा युग्म असुमेलित है?

स्थल

(a) लोथल

(b) चन्हूदड़ो

(c) रंगपुर

(d) सुत्कागेंडोर

खोजकर्ता

एस. आर. राव

एन. जी.

मजूमदार

यज्ञदत्त शर्मा

-

आरेल स्टाइन

11.

सिन्धु घाटी सभ्यता के किस पुरास्थल से क्रमश: वक्राकार ईंटें

व अलंकृत ईंटें प्राप्त हुई है?

(a) कालीबंगा व चन्हूदड़ो

(b) चन्हूदड़ो व कालीबंगा

(c) कालीबंगा व लोथल

(d) हड़प्पा व कालीबंगा

12.

सिंधु घाटी सभ्यता के किस पुरास्थल से 'R-37' कब्रिस्तान का

प्रमाण मिला है?

(a) हड़प्पा से

(d) अथर्ववेद

निम्नलिखित में से कौन-सा वर्ण द्विज के अन्तर्गत शामिल

19.

नहीं था?

(a) ब्राह्मण

(b) क्षत्रिय

20.

(c) वैश्य

(d) शुद्र

ऋग्वैदिक कालीन दशराज्ञ युद्ध किस नदी के तट पर लड़ा

गया था?

(a) परुष्णी

(b) अस्किनी

(c) वितस्ता

(d) विपाशा

21.

(b) मोहनजोदड़ो से

(c) सुत्कागेंडोर से

(d) लोथल से

13.

सिन्धु घाटी सभ्यता से प्राप्त ईंटों का अनुपात है?

(a) 2 : 4:6

(b) 1:3:5

(c) 1:4:2

(d) 4: 2:1

14.

(a) ऋग्वेद

(b) यजुर्वेद

(c) सामवेद

(d) अथर्ववेद

15.

वैदिक सभ्यता में किस नदी को नदीतमा, देवितमे व अम्बितमे कहा गया है?

सभा व समिति को किसमें प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है?

22.

तिब्बत को आर्यों का मूल निवास स्थान किस विद्वान ने माना था?

(a) बालगंगाधर तिलक

(b) दयानंद सरस्वती

(c) मैक्स मूलर

(d) एल. डी. कल्ला

निम्नलिखित देवताओं में से पृथ्वी श्रेणी का देवता नहीं है-

(a) सोम

(c) सरस्वती

(b) अग्नि

(d) उषा

23. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-

(a) सिन्धु

(b) सरस्वती

(c) सतलज

(d) गण्डक

16.

ऋग्वैदिक काल में आजीवन अविवाहित रहने वाली स्त्री को

कहा जाता था-

24.

(a) ब्रह्मचारिणी

सूची-I (जैन तीर्थंकर)

सूची-II (प्रतीक)

A. ऋषभदेव

1. शंख

B. अरिष्टनेमि

2. वृषभ

C. पार्श्वनाथ

3. सर्प

D. महावीर स्वामी

4. सिंह

कूट:

(a) A-1 B-2

C-3

D-4

(b) A-4 B-3

(c) A-2 B-4 C-3 D-1

(d) A-2 B-1 C-3 D-4

C-2 D-1

महावीर स्वामी ने पाँचवाँ महाव्रत जोड़ा, वह कौन - सा था ?

(a) अहिंसा

(b) गविष्टी

(c) अमाजू (d) सद्योवधू

(b) ब्रह्मचर्य

(c) अस्तेय

(d) अपरिग्रह

:: 267::

25.

जेन त्रिरत्नों में कौन शामिल नहीं है?

(a) सम्यक् दर्शन

(b) सम्यक् ज्ञान

उत्कर्ष प्रकाश

33.

भगवान कृष्ण का प्रथम उल्लेख किस उपनिषद में मिलता है? (a) ऐतरेयापनिषद्

(b) तैत्तिरीय उपनिषद्

(c) कठोपनिषद्

(d) छान्दोग्य उपनिषद्

(c) सम्यक् व्यायाम

(d) सम्यक् आचरण

26.

महात्मा बुद्ध की किस घटना को महाभिनिष्क्रमण नाम से जाना

34.

मेगस्थनीज ने कृष्ण को किस नाम से उल्लिखित किया है?

जाता है?

(a) डायोनिसस

(a) मृत्यु

(b) सेन्ड्रोकोटस

(b) गृहत्याग

(c) हेराक्लीज

(c) प्रथम उपदेश

(d) जन्म

35.

27. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे

दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-

(d) एन्ड्रोकोटस

इस्लाम धर्म का संस्थापक किसे माना जाता है?

(a) अब्दुला

(b) हजरत अली

(c) पैगम्बर मोहम्मद साहब

(d) हजरत अबु बकर

सूची-I

सूची-II

(बौद्ध संगीति)

(स्थान)

A. प्रथम बौद्ध संगीति

36.

ईसा मसीह को 33 ई. में सूली पर किसने चढ़ाया था?

1. कुण्डलवन

B. द्वितीय बौद्ध संगीति

(a) रोमन गवर्नर पोंटियस

2. राजगृह

(b) जोसेफ

C. तृतीय बौद्ध संगीति

3. वैशाली

(c) जरथुस्ट्र

(d) एंडूस

D. चतुर्थ बौद्ध संगीति

37.

4. पाटलिपुत्र

निम्न में से ईसाई धर्म का त्रितत्व नहीं है-

(a) ईश्वर-पिता

कूट:

(b) ईश्वर भक्ति

(a) A-1 B-2 C-3

D-4

(c) ईश्वर-पुत्र

(b) A-2 B-3 C-4

D-1

(d) ईश्वर-पवित्र आत्मा

(c) A-4 B-2

C-1 D-3

D-4

(d) A-2 B-3 C-1

किस बौद्ध ग्रन्थ में संघ की स्थापना तथा संघ के नियमों की

38.

सूची-I को सूची-II से

सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे

दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-

28.

विवेचना की गई हैं?

सूची-I ( महाजनपद)

A. अंग

सूची-II (राजधानी)

1. मथुरा

(a) सुतपिटक

(b) विनयपिटक

B. गांधार

C. शूरसेन

(c) अभिधम्मपिटक

D. मगध

2. गिरिव्रज

3. तक्षशिला 4. चम्पा

(d) प्रतीत्यसमुत्पाद

कूट:

29.

बोध धर्म में संघ प्रवेश को क्या कहा जाता था?

(a) A-1 B-2

C-3

D-4

(a) उपसम्पदा

(b) A-3 B-4

C-2

D-1

(b) प्रवज्या

(c) उपोसथ

(d) प्रवारण

39.

30.

भागवत् गीता व विष्णु पुराण में किस जैन तीर्थंकर का उल्लेख

(c) A-4 B-3 C-1 D-2

(d) A-4 B-3 C-2D-1

किस शासक ने सोन तथा गंगा नदियों के संगम पर पाटलिपुत्र नगर की स्थापना की थी?

मिलता है?

(a) सुमतिनाथ

(b) ऋषभदेव

(c) पद्मप्रभु

(d) चन्द्रप्रभु

31.

लिंग पूजा का सर्वप्रथम उल्लेख किसमें मिलता है?

(a) वायु पुराण

(b) मत्स्य पुराण

(a) बिम्बिसार

(c) अजातशत्रु

40.

(a) महापद्मनंद

(b) शिशुनाग

(c) बिम्बिसार

(d) घनानंद

41.

(b) उदायिन

(d) कालाशोक

नंद वंश का संस्थापक कौन था?

(c) विष्णु पुराण

(d) गरुड़ पुराण

32.

वामन पुराण के अनुसार निम्न में से शेव सम्प्रदाय की शाखा

नहीं है-

(b) मिलिन्दपन्हों

(a) पाशुपत

(b) कापालिक

(c) नाथ सम्प्रदाय

(d) कालामुख

सोलह महाजनपदों का उल्लेख किस ग्रन्थ में मिलता है?

(a) अंगुत्तर निकाय

(c) भगवतीसूत्र (d) a व c दोनों में

268

के राजा की चिकित्सा के लिए भेजा था ?

उत्कर्ष प्रकाशन

42.

मगध सम्राट बिम्बिसार ने अपने

राजवेध जीवक को किस राज्य

51.

में

(b) अवन्ति

(d) वत्स

सोलह महाजनपदों में एकमात्र महाजनपद जो दक्षिण भारत में

(a) काशी

(c) मगध

43.

स्थित था-

(a) पांचाल

(c) कम्बोज

44.

(b) अवन्ति

(d) अश्मक

महाजनपद काल को भारतीय इतिहास में किसकी संज्ञा दी

जाती

है?

(a) प्रथम नगरीकरण

कालाशोक को पुराणों में क्या कहा जाता है?

(b) हड़प्पा सभ्यता

(c) द्वितीय नगरीकरण

(d) सिन्धु घाटी सभ्यता

45.

(a) कुणिक

(b) अग्रमीज

(c) काकवर्ण

(d) महापद्मनन्द

(a) अजातशत्रु

(b) अग्रमीज

(c) उग्रसेन

(d) वैदेहीपुत्र

47.

निम्नलिखित में से किस ग्रन्थ मे चन्द्रगुप्त मौर्य को वृषल

(कुलहीन) कहा गया है?

(a) अर्थशास्त्र

46. यूनानी इतिहासकारों ने घनानन्द को क्या नाम दिया?

(b) मुद्राराक्षस

(c) राजतरंगिणी

(d) इण्डिका

48.

मौर्य शासक सम्राट अशोक के किस शिलालेख में कलिंग युद्ध

की जानकारी मिलती है?

(a) पाँचवाँ शिलालेख

(b) आठवाँ शिलालेख

(c) बारहवाँ शिलालेख

(d) तेरहवाँ शिलालेख

49.

प्रांत

A. उत्तरापथ

मौर्यकालीन प्रान्त एवं उनकी राजधानियों को सुमेलित कीजिए-

B. दक्षिणापथ

राजधानी 1. तक्षशिला

2. सुवर्णगिरि

52.

53.

54.

55.

56.

57.

58.

सम्राट अशोक को किस अभिलेख में बुधशाक्य कहा गया है? (a) भाबू अभिलेख (b) नेट्टर अभिलेख (c) उदेगोलम अभिलेख

(d) मास्की अभिलेख

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार करने हेतु श्रीलंका में किन

बौद्ध भिक्षुओं को भेजा था?

(a) महाधर्मरक्षित

(b) सोन व उत्तरा

(c) महेन्द्र व संघमित्रा

(d) मझान्तिक व मज्झिम

अशोक के अभिलेखों में सर्वप्रथम टी. फेन्थेलर ने किस अभिलेख की खोज की थी?

(a) दिल्ली मेरठ लेख

(b) दिल्ली टोपरा लेख

(c) प्रयाग कौशाम्बी

(d) लौरिया नन्दनगढ़

बिन्दुसार ने उज्जयिनी (उज्जैन) का राज्यपाल किसे नियुक्त

किया था?

(a) सुसीम

(c) धर्मरक्षित

(b) अशोक

(d) दशरथ

अशोक के किस लघु स्तम्भ लेख को 'रानी का लेख' भी कहा जाता है?

(a) रुम्मिनदेई स्तम्भलेख

(b) कौशाम्बी स्तम्भलेख

(c) निगाली सागर स्तम्भलेख

(d) सारनाथ स्तम्भलेख

मौर्य प्रशासन में राजकीय दस्तावेजों को सुरक्षित करने वाला अधिकारी कौन था?

(a) दौवारिक

(c) प्रशास्ता

(b) आटविक

(d) नागरिक

अशोक के शासन के 13वें वर्ष में धम्म महामात्रों की नियुक्ति का

उल्लेख किस शिलालेख में है?

(a) तीसरा शिलालेख

(b) ग्यारहवाँ शिलालेख

(c) दूसरा शिलालेख

C. अवन्ति

3. उज्जैन

D. कलिंग

(a) A-2 B-1

4. तोसलि

C-3 D-4

(b) A-2 B-4 C-3 D-1

(c) A-1 B-2 C-3 D-4

(d) A-2 B-1 C-4 D-3

50. बिन्दुसार को जैन ग्रन्थों में किस नाम से जाना गया है-

(a) सिंहसेन

(c) भद्रसार

(b) अमित्रचेट्स

(d) अमित्रघात

59.

269:

(d) पाँचवाँ शिलालेख

मौर्यकाल में मुद्राओं को जाँचने वाला अधिकारी कहलाता था- (a) रूपदर्शक

(b) लक्षणाध्यक्ष

(c) कुप्याध्यक्ष

(d) पण्याध्यक्ष

सातवाहन वंश का संस्थापक कौन था?

(a) वासुदेव

(b) पुष्यमित्र

(c) कुजुल कडफिसस

(d) सिमुक

60.

उत्कर्ष प्रकाशन

गौतम बुद्ध की प्रथम मूर्ति का निर्माण किस शैली में हुआ था?

(a) गान्धार शैली

(b) द्रविड़ शैली

(c) मधुरा शैली

(d) नागर शैली

61.

निम्नलिखित में से समुद्रगुप्त की 'प्रयाग प्रशस्ति' का लेखक

कौन था?

(a) कालिदास

(b) हरिषेण (d) बाणभट्ट

(c) राजशेखर

गुप्त साम्राज्य में किस शासक को 'लिच्छवी दौहित्र' कहा गया है?

62.

(a) श्रीगुप्त

(b) चन्द्रगुप्त द्वितीय

(c) कुमारगुप्त

69. गुप्तकालीन मन्दिरों में कौन-सा पंचायतन शैली का प्राचीनतम

70.

71.

उदाहरण है?

(a) एरण का विष्णु मन्दिर

(b) देवगढ़ का दशावतार मन्दिर

(c) नचना कुठार का पार्वती मन्दिर

(d) भूमरा का शिव मन्दिर

गुप्त काल में सेना का मुख्य सेनापति होता था-

(a) महाबलाधिकृत

(b) अमात्य

(c) दण्डपाशिक

(d) दण्डनायक

गुप्तकाल में ब्राह्मणों को दी जाने वाली कर मुक्त भूमि किस नाम

से जानी जाती थी?

63.

(d) समुद्रगुप्त

अजंता की किस गुफा में महात्मा बुद्ध के महाभिनिष्क्रमण का

अंकन दिखाई पड़ता है?

(a) गुफा संख्या 13

(b) गुफा संख्या 16

(c) गुफा संख्या 17

(d) गुफा संख्या 29

64.

समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त राजाओं के खिलाफ कौन-सी नीति

अपनाई थी?

(a) प्रसभोद्धरण नीति

(b) ग्रहणमोक्षानुग्रह नीति

(c) परिचारीकृत नीति

(d) आज्ञाकरण, प्रणामागम

65.

गुप्तकालीन तिगवां गाँव, जबलपुर का मन्दिर किस देवता को

समर्पित है?

(a) शिव

(c) पार्वती

(b) विष्णु (d) गणेश

(a) अग्रहारिक

(b) प्रतिहार

(c) अग्रहार

(d) सार्थवाह

72.

कल्याणी के चालुक्य वंश की स्थापना किसने की थी?

(a) कीर्तिवर्मन प्रथम

(b) तैलप द्वितीय

(c) मूलराज प्रथम

(d) कुब्ज विष्णुवर्धन

मिताक्षरा नामक ग्रन्थ की रचना किसने की थी?

73.

(a) विज्ञानेश्वर

(b) हरिषेण

(c) शुद्रक

74.

66. सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण किस गुप्त शासक के शासनकाल

में

हुआ था?

(a) कुमारगुप्त प्रथम

(b) स्कंदगुप्त

(c) भानुगुप्त

(d) कालिदास

काँची के कैलाशनाथ मन्दिर का निर्माण किस पल्लव शासक ने करवाया था?

(a) नंदिवर्मन प्रथम

(b) नंदिवर्मन द्वितीय

(c) नरसिंह वर्मन प्रथम

(d) नरसिंह वर्मन द्वितीय

(d) चन्द्रगुप्त द्वितीय

75.

67.

नालन्दा बौद्ध विहार की स्थापना किस गुप्त शासक के काल में

तंजीर का प्रसिद्ध राजराजेश्वर (वृहदेश्वर) मन्दिर का निर्माण किस चोल शासक ने करवाया था?

हुई थी?

(a) चन्द्रगुप्त द्वितीय

(b) कुमारगुप्त द्वितीय

(c) स्कन्दगुप्त

(d) कुमारगुप्त प्रथम

68.

निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म है-

76.

पुस्तक

लेखक

(a) मुद्राराक्षस

विशाखदत्त

(b) चन्द्रव्याकरण

चन्द्रगौमिन

(c) मालविकाग्निमित्र

अमरसिंह

(d) कुमारसंभव

कालिदास

(a) राजराज प्रथम

(b) राजेन्द्र प्रथम

(c) राजेन्द्र द्वितीय

(d) वीर राजेन्द्र

चोल राजवंश में किस शासक ने सर्वप्रथम सोने के सिक्के

चलाए थे?

(a) राजेन्द्र प्रथम

(b) उत्तम चोल

(c) परांतक प्रथम (d) वीर राजेन्द्र

270

77.

उत्कर्ष प्रकाशन

नीचे दिए गए दिल्ली सल्तनत के राजवंशों को उनके कालानुक्रम 84.

में व्यवस्थित कीजिए-

1. तुगलक

2. सैय्यद

निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

पुस्तक

(a) हम्मीर महाकाव्य

(b) ललित विग्रहराज

(c) पृथ्वीराज रासो

लेखक

नयनचन्द्र सूरी सोमदेव

चन्दबरदाई

3. गुलाम 4. लोदी 5. खिलजी

(a) 3, 2, 1, 4, 5

(b) 3, 4, 2, 1, 5

85.

(d) गीत गोविन्द

कल्हण

दिल्ली में स्थित सिकन्दर लोदी के मकबरे का निर्माता कौन था?

(a) सिकन्दर लोदी

(b) इब्राहिम लोदी

(c) महमूद लोदी

(c) 1, 3, 4, 2, 5

(d) 3, 5, 1, 2, 4

86.

(d) हुसैन शाह

विजयनगर साम्राज्य का प्रथम राजवंश कौन-सा था ?

78.

दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने 'लौह एवं रक्त' की नीति

(a) सालुव वंश

अपनाई थी?

(b) संगम वंश

(a) इल्तुतमिश

(c) तुलुव वंश

(b) सिकन्दर लोदी

(d) अरविडू वंश

(c) जलालुद्दीन खिजली

87.

संगम वंश की स्थापना किसने की थी?

(d) बलबन

(a) कृष्णदवेराय

79.

किस शासक के बचपन का नाम 'अली गुरशास्प' था?

(b) देवराय द्वितीय

(a) अलाउद्दीन खिलजी

(c) हरिहर प्रथम

(b) जलालुद्दीन खिलजी

88.

(c) मुबारक शाह खिलजी

(d) हरिहर व बुक्का

विजयनगर साम्राज्य के शासक देवराय प्रथम के समय कौन-सा

विदेशी यात्री भारत आया था?

(d) नासिरुद्दीन खुशरव

(a) निकोलो कोण्टी

80.

निम्नलिखित में से कौन-सा शासक फारसी भाषा में 'गुलरुखी'

(b) अब्दुर्रज्जाक

नाम से कविताएँ लिखता था?

(c) बारबोसा

(a) फिरोज तुगलक

(d) डोमिंग पायस

(b) इब्राहिम लोदी

89.

'आमुक्तमाल्यद' की रचना किसने की थी?

(c) बलबन

(a) देवराय प्रथम

(d) सिकन्दर लोदी

(b) वीर नरसिंह

81.

प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने किस शासक के बारे

(c) कृष्णदेवराय

में कहा था कि दिल्ली अभी बहुत दूर है ' ?

(d) विरुपाक्ष द्वितीय

(a) गयासुद्दीन तुगलक

90.

तुलुव वंश का संस्थापक कौन था?

(b) मुहम्मद बिन तुगलक

(a) सालुव नरसिंह

(c) फिरोजशाह तुगलक

(b) वीर नरसिंह

(d) नासिरुद्दीन महमूद तुगलक

(c) मल्लिकार्जुन

82.

दिल्ली सल्तनत के काल में सुल्तान बनने वाला एकमात्र

91.

भारतीय मुसलमान कौन था?

(a) मुबारक शाह खिलजी

(d) नरसिंह इम्माडी

शंकराचार्य निम्न में से किस मत के प्रवर्तक थे?

(a) विशिष्टाद्वैतवाद

(b) द्वैतवाद

(b) नासिरुद्दीन खुशरव शाह

(c) शुद्धाद्वैतवाद

(c) मुहम्मद शाह

(d) इब्राहिम लोदी

92.

83.

अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कब किया?

(d) अद्वैतवाद

निम्नलिखित में से 'पद्मावती' व 'सुरसरी' किस भक्ति संत की

शिष्याएँ था?

(a) 1301 ई.

(a) रामानुज

(b) 1305 ई.

(c) 1303 ई.

(d) 1308 ई.

(b) निम्बार्क

(c) रामानंद (d) कबीर

:: 271::

93.

94.

उत्कर्ष प्रकाशन

निम्नलिखित में से किस भक्ति संत ने अपने उपदेश संस्कृत के स्थान पर हिन्दी भाषा में दिए?

(a) रामानुज (b) कबीर

(c) रामानन्द (d) रैदास

निम्नलिखित में से किस सूफी संत ने अपने जीवनकाल में दिल्ली के सात सुल्तानों का शासनकाल देखा था?

(a) शेख मुइनुद्दीन चिश्ती

102. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म असुमेलित है? (a) जजिया कर की समाप्ति - 1564

(b) तीर्थयात्रा कर की समाप्ति - 1571 (c) मजहर की घोषणा 1579

(d) दहसाला प्रणाली लागू- 1580

103. गिरि सुमेल का युद्ध कब व किनके मध्य हुआ था?

(a) 1544 ई.

शेरशाह सूरी व मालदेव

(b) 1544 ई.

शेरशाह सूरी व अकबर

(c) 1544 ई.

शेरशाह सूरी व हुमायूँ

मालदेव व अकबर

(b) शेख सलीम चिश्ती

(c) निजामुद्दीन औलिया

(d) शेख हमीमुद्दीन नागौरी

95. 'सुबोधिनी' तथा 'सिद्धान्त रहस्य' किस संत की रचनाएँ हैं?

96.

(a) सूरदास

(b) वल्लभाचार्य

(c) दादूदयाल

(d) गुरुनानक

ब्रह्म सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन थे?

(a) निम्बार्काचार्य

(b) रामानुजाचार्य

(c) वल्लभाचार्य

(d) मध्वाचार्य

97. सूफी संतों के उपदेशों के संकलन को किस नाम से जाना जाता है?

(a) मकतुबात

(b) विलायत

(c) मलफूजात (d) काजी

98.

गुरु रैदास को 'संतों का संत' किसने कहा था?

99.

(a) दादूदयाल

(b) सूरदास (c) रामानन्द (d) कबीरदास

'अष्टछाप कवि मण्डली' की स्थापना किसने की थी?

(a) गुरुनानक

(b) विट्ठलनाथ

(c) वल्लभाचार्य

(d) चैतन्य महाप्रभु

100. भारत में सुहरावर्दी सिलसिले को लोकप्रिय बनाने वाले सूफी

संत थे-

(a) बाकी बिल्लाह

(b) अब्दुल कादिर जिलानी

(c) बदरुद्दीन समरकन्दी

(d) जलालुद्दीन तबरीजी

101. शेख अहमद सरहिन्दी किस सिलसिले से संबंधित थे?

(a) चिश्ती सिलसिला

(b) सुहरावर्दी सिलसिला

(c) नक्शबंदी सिलसिला

(d) कादिरी सिलसिला

272

(d) 1544 ई.

104. 'दीन-ए-इलाही' अकबर की मूर्खता का प्रतीक था, उसकी बुद्धिमानी का नहीं' उपर्युक्त कथन किसने कहा था?

(a) लेनपूल (b) हॉकिन्स

(c) पीटर मुण्डी

(d) विन्सेन्ट स्मिथ

105. भारत में सर्वप्रथम चाँदी का रुपया चलाने वाला शासक कौन था? (a) शेरशाह सूरी (b) जहाँगीर

(c) हुमायूँ (d) अकबर

106. अकबर द्वारा राणा प्रताप के पास भेजे गए शिष्टमण्डल का सही

क्रम है-

(a) मानसिंह, जलाल खाँ, भगवन्तदास, टोडरमल (b) जलाल खाँ, भगवन्तदास, मानसिंह, टोडरमल

(c) जलाल खाँ, मानसिंह, टोडरमल, भगवन्तदास

(d) जलाल खाँ, मानसिंह, भगवन्तदास, टोडरमल

107. पानीपत का द्वितीय युद्ध कब हुआ था?

(a) 1539 ई.

(b) 1545 ई. (c) 1556

(d) 1561 ई.

108. निम्नलिखित में से कोन सा युग्म असुमेलित है?

(a) परगने का सर्वोच्च प्रशासक- अमलगुजार

(b) परगने में राजस्व वसूल करने वाला अधिकारी आमिल

(c) परगने का मुख्य खजांची फौजदार

(d) परगने का लिपिक कारकून

109. 'जिन्दापीर' तथा 'शाही दरवेश' किस मुगल शासक को कहा

गया है?

(a) अकबर (b) जहाँगीर (c) शाहजहाँ (d) औरंगजेब

110 यूरोपियन व्यापारिक कम्पनियों के भारत आगमन का सही कालक्रम है-

(a) पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, अंग्रेज (b) पुर्तगाली, अंग्रेज, डच, फ्रांसीसी (c) पुर्तगाली, फ्रांसीसी, अंग्रेज, डच (d) पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, फ्रांसीसी

उत्कर्ष प्रकाशन

111. लॉर्ड डलहोजी द्वारा व्यपगत नीति (Doctrine of Lapse) के तहत विलय किए गए राज्यों को उनके वर्ष से मिलान कर सही कूट का चयन कीजिए-

सूची-I ( राज्य )

A. सतारा

सूची-II (वर्ष)

1. 1848

119. हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम किस वायसराय के समय

पारित हुआ था?

(a) विलियम बैंटिक

(b) लॉर्ड कैनिंग

(c) लॉर्ड मेयो

B. संभलपुर

2. 1852

C. उदयपुर

3. 1849

D. नागपुर

4. 1854

कूट:-

(a) A-1 B-2 C-3

D-4

(b) A-3 B-1

C-2 D-4

C-2 D-4

(c) A-1 B-3

(d) A-1 B-3 C-4 D-2

112. निम्नलिखित में से कौन-सा (स्थान विद्रोही नेता ) युग्म सही

सुमेलित नहीं है?

(a) कानपुर- नाना साहब

(b) जगदीशपुर- तात्या टोपे

(c) लखनऊ- बेगम हजरत महल

(d) फैजाबाद- मौलवी अहमद उल्लाह

113. 1857 का विद्रोह न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और यह न ही स्वतंत्रता संग्राम था' उपर्युक्त कथन किसने कहा?

(a) टी. आर. होम्स

(b) वी.डी. सावरकर

(c) आर.सी. मजूमदार

(d) बेंजामिन डिजरेली

114. 'द ग्रेट रिबेलियन' किसकी पुस्तक है?

(a) एस. एन. सेन

(b) अशोक मेहता

(c) वी. डी. सावरकर

(d) आर. सी. मजूमदार

115. 1857 की क्रांति 10 मई, 1857 को किस छावनी से प्रारंभ हुई?

(a) मेरठ

(c) बरेली

(b) नसीराबाद

(d) झाँसी

116. आर्य समाज की स्थापना कब व कहाँ हुई?

(a) लाहौर, 1875

(b) लखनऊ, 1875

(c) बम्बई, 1875

(d) कलकत्ता, 1875

117. भारत सेवक मण्डल' (सर्वेण्ट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी) की

स्थापना किसने की थी?

(a) गोपाल कृष्ण गोखले

(c) बाल गंगाधर तिलक

(b) महात्मा गाँधी

(d) महादेव गोविन्द रानाडे

118 आदि ब्रह्म समाज की स्थापना किसने की थी?

(a) देवेन्द्रनाथ टैगोर

(b) केशवचन्द्र सेन

(c) ज्योतिबाफुले

(d) स्वामी विवेकानन्द

(d) लॉर्ड डलहौजी

120. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

संगठन

(a) मद्रास हिन्दू समिति

(b) धर्म सभा

(c) तत्त्वबोधिनी सभा

(d) शारदा सदन

121. निम्नलिखित में से किस

संस्थापक

एनी बेसेन्ट राधाकान्त देव

स्वामी विवेकानन्द रमाबाई

राज्य को कुशासन के आधार पर

डलहौजी ने ब्रिटिश साम्राज्य में सम्मिलित किया?

(a) सतारा

(b) झाँसी

(c) अवध

(d) नागपुर

122. वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम किस वर्ष में पारित किया गया था?

(a) 1890

(b) 1877

(c) 1887

(d) 1878

123. बंगाल में भू-राजस्व स्थायी बंदोबस्त किसने लागू किया था?

(a) लॉर्ड वेलेजली

(b) लॉर्ड हेस्टिंग्स (c) लॉर्ड कॉर्नवालिस

(d) विलियम बैंटिक

124. भारत की प्रथम जनगणना किस वायसराय के शासनकाल में

हुई थी? (a) लॉर्ड रिपन

(b) लॉर्ड लिटन (c) लॉर्ड डफरिन (d) लॉर्ड मेयो

125. ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के समय भारत का वायसराय कौन था?

(a) लॉर्ड कर्जन

(b) हॉर्डिंग द्वितीय (c) लॉर्ड चेम्सफोर्ड

(d) लॉर्ड इरविन

126. वर्ष 1919 का मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम किस वायसराय के समय पारित किया गया था?

(a) लॉर्ड चेम्सफोर्ड

(b) लॉर्ड मिंटो

(c) लॉर्ड हॉर्डिंग द्वितीय

(d) लॉर्ड रीडिंग

273

उत्कर्ष प्रकाशन

127. "भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी" उपर्युक्त कथन किसका है?

(a) लॉर्ड कर्जन

(b) लॉर्ड नॉर्थब्रुक

(c) लॉर्ड एल्गिन द्वितीय

(d) लॉर्ड रीडिंग

128. सुरेन्द्रनाथ बनर्जी व आनंद मोहन बोस द्वारा इण्डियन

एसोसिएशन की स्थापना कब की गई थी?

(a) 1866 ई.

(b) 1870 ई.

(c) 1876 ई.

(d) 1884 ई.

129. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्षा कौन थी?

(a) एनी बेसेन्ट

(b) कादम्बिनी गांगुली

(c) सुचेता कृपलानी (d) सरोजिनी नायडू

130 कांग्रेस के एकमात्र किस अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गाँधी

द्वारा की गई थी?

(a) बेलगाँव

135. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

समाचार-पत्र

(a) कॉमन वील

(b) संध्या

(c) मराठा

(d) द इण्डियन ओपिनियन -

सम्पादनकर्ता एनी बेसेन्ट

ब्रह्मबान्धव उपाध्याय

बाल गंगाधर तिलक

अरविन्द घोष

136. महात्मा गाँधी के निम्नलिखित सत्याग्रह आन्दोलनों का सही

कालानुक्रम क्या है?

1. रॉलेक्ट एक्ट सत्याग्रह

2. खेड़ा सत्याग्रह

3. चम्पारण सत्याग्रह

4. अहमदाबाद मिल मजदूर सत्याग्रह

(a) 1, 2, 4, 3

(b) 3, 1, 2, 4 (c) 3, 2, 4, 1 (d) 2, 4, 3, 1

137. भारतीय स्वतंत्रता के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री कौन थे?

(a) क्लीमेंट एटली

(b) लॉर्ड माउंट बेटन (c) चर्चिल

(d) लॉर्ड वेवेल

138. ब्रिटिश भारत में शाही नौ सेना विद्रोह कब हुआ?

(b) फैजपुर

(c) बम्बई

(d) लखनऊ

131. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

कांग्रेस अधिवेशन वर्ष

(a) 1886

(b) 1887

(c) 1888

(d) 1889

अध्यक्षता

दादाभाई नौरोजी

फिरोजशाह मेहता

जॉर्ज यूले

विलियम वेडरबर्न

132. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में मौलिक अधिकार

और आर्थिक नीति को पारित किया गया था?

(a) कानपुर अधिवेशन 1925

(b) लाहौर अधिवेशन 1929

(c) कराची अधिवेशन- 1931

(d) लखनऊ अधिवेशन 1936

133. बंगाल विभाजन के विरोध स्वरूप बंगाल में राखी दिवस / शोक दिवस के रूप में कब मनाया गया?

(a) 28 सितम्बर, 1905

(b) 19 जुलाई, 1905

(c) 16 अक्टूबर, 1905

(d) 9 अगस्त, 1905

134. गाँधीजी ने 'हिन्द स्वराज' पुस्तक कब लिखी थी?

(a) वर्ष 1914 में

(b) वर्ष 1906 में

(c) वर्ष 1909 में (d) वर्ष 1915 में

(a) वर्ष 1944

(b) वर्ष 1946

(c) वर्ष 1947

(d) वर्ष 1948

139. वर्ष 1931 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन की

अध्यक्षता किसने की थी?

(a) जवाहरलाल नेहरू

(b) सुभाष चन्द्र बोस

(c) जे. बी. कृपलानी

(d) सरदार वल्लभ पटेल

140. कामागाटामारू घटना कब घटित हुई थी?

(a) वर्ष 1914

(b) वर्ष 1913

(c) वर्ष 1916

(d) वर्ष 1915

141 क्रिप्स प्रस्ताव को 'पोस्ट डेटेड चेक' किसने कहा था?

(a) राजेन्द्र प्रसाद ने

(b) जवाहर लाल नेहरू ने

(c) महात्मा गाँधी ने

(d) भीमराव अम्बेडकर ने

142 1025 ई. में सोमनाथ मन्दिर पर किसने आक्रमण किया था?

(a) मुहम्मद-बिन-कासिम

(b) मुहम्मद गौरी

(c) महमूद गजनवी

(d) मुहम्मद-बिन-तुगलक

143. तराइन का प्रथम युद्ध कब हुआ था?

(a) 1193 ई.

(c) 1194 ई.

274

(b) 1191 ई.

(d) 1192 ई.

उत्कर्ष प्रकाशन

144. 1784 ई. में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना किसने की थी ?

उत्तरमाला

(a) चार्ल्स मेटकॉफ

1. [b]

2. [d]

3. [a]

4.[d]

5.[a]

(b) विलियम बैंटिक

6. [C]

7. [c]

8. [a]

9. [d]

10. [C]

(c) विलियम जोन्स

11.[b]

12.[a]

13. [d]

14.[d]

15.[b]

(d) वॉरेन हेस्टिंग्स

16. [C]

17. [b]

18.[b]

19. [d]

20.[a]

145. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत अधिवेशन (1907) की

21.[b]

22. [d]

23. [d]

24.[b]

25.[c]

अध्यक्षता किसने की थी?

26.[b]

27. [b]

28. [b]

29.[a]

30. [b]

(a) दादा भाई नौरोजी

31. [b]

32. [C]

33.[d]

34. [C]

35.[c]

(b) फिरोजशाह मेहता

36. [a]

37.[b]

38.[c]

39. [b]

40. [a]

(c) लाला लाजपत राय

41. [d]

42. [b]

43. [d]

44.[C]

45. [C]

(d) रासबिहारी घोष

46. [b]

47. [b]

48.[d]

49. [C]

50. [a]

146. किस अधिनियम के तहत् मुसलमानों को

पृथक्

सांप्रदायिक

51.[d]

52.[c]

53. [a]

54. [b]

55. [b]

निर्वाचन का अधिकार दिया गया था?

56. [C]

57.[d]

58. [a]

59. [d]

60.[C]

(a) 1919 का अधिनियम

61. [b]

62. [d]

63.[c]

64.[a]

65.[b]

(b) 1909 का अधिनियम

66. [b]

67.[d]

68. [C]

69.[b]

70.[a]

(c) 1935 का अधिनियम

71. [C]

72. [b]

73.[a]

74. [d]

75.[a]

(d) 1861 का अधिनियम

76.[b]

77.[d]

78.[d]

79.[a]

80. [d]

147. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

81. [a]

82. [b]

83. [C]

84. [d]

85. [b]

चयन कीजिए-

86.[b]

87. [d]

88. [a]

89.[C]

90. [b]

सूची-I

सूची-II

91.[d]

92. [C]

93.[C]

94. [c]

95.[b]

A. जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड

1. 1930

96. [d]

97. [C]

98. [d]

99. [b]

100. [d]

B. सविनय अवज्ञा आन्दोलन

2. 1935

101.[C]

102.[b]

103. [a]

104.[d]

105.[a]

C. बैंक ऑफ इण्डिया की स्थापना

3. 1919

106. [d]

107. [C]

108. [a]

109. [d]

110.[d]

D. काकोरी ट्रेन डकैती

4. 1925

111.[C]

112.[b]

113. [C]

114.[b]

115. [a]

कूट:-

116. [C]

117.[a]

118.[a]

119.

[b]

120.[c]

(a) A-1, B-3, C-4, D-2

121. [C]

122.(d]

123. [cl

124. [d]

125.[b]

(b) A-2, B-1, C-3, D-4

126.[a]

127.[C]

128. [C]

129.[d]

130.[a]

(c) A-4, B-2, C-3, D-1

131. [b]

132. [c]

133.[C]

134. [C]

135. [d]

136. [C]

137.[a]

(d) A-3, B-1, C-2, D-4

138. [b]

139. [d]

140. [a]

148. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में सर्वप्रथम 'राष्ट्रीय

141.[C]

142. [C]

143. [b]

144.[C]

145. [d]

गीत' गाया गया था?

146. [b]

147.[d]

148. [a]

149. [d]

150. [b]

(a) कलकत्ता 1896

(b) बनारस 1905

(c) chechell-1911

(d) लखनऊ 1916

149 वर्ष 1904 में अभिनव भारत की स्थापना किसने की थी?

(a) अरविन्द घोष

(b) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी

(c) विपिनचन्द्र पाल

(d) विनायक दामोदर सावरकर

150. ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त करके महारानी

विक्टोरिया को किस अधिनियम द्वारा भारत की सम्राज्ञी घोषित

किया गया?

(a) अधिनियम 1833

(b) अधिनियम 1858

(c) अधिनियम 1861 (d) अधिनियम 1892

275

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code स्कैन करें-

भौतिक विज्ञान

भौतिक विज्ञान प्राकृतिक विज्ञान की एक वृहद् शाखा है।

इसके अंतर्गत भौतिक जगत में घटित होने वाली विभिन्न भौतिक परिघटनाओं (Physical phenomenon) के सन्दर्भ में अध्ययन किया जाता है।

भौतिक विज्ञान अर्थात् फिजिक्स शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से ग्रीक भाषा के फ्यूसिस (Phusis) शब्द से हुई है, जिसका तात्पर्य है प्रकृति (Nature) अथवा प्राकृतिक पदार्थ (Natural things)

भौतिक विज्ञान के अंतर्गत प्रकृति में व्याप्त द्रव्य (Matter), ऊर्जा (Energy) तथा उनकी पारस्परिक अंत: क्रियाओं (interactions) का अध्ययन किया जाता है।

लम्बाई के प्रमुख मात्रक -

1.

2.

3.

4.

6.

1 फर्मी (Fm) = 10-15m

1 पिकोमीटर (Pm) = 10-12m

1 एंग्स्ट्रॉम (A) 10-10m

1 नैनोमीटर (nm) 10 m

1 सेंटीमीटर (cm) = 10m

ii.

S.I. पद्धति अनुसार मूल मात्रक सात प्रकार के होते हैं- मूल राशि

लम्बाई (Length)

द्रव्यमान (Mass)

समय ( Time ) विद्युत धारा (Electric) ऊष्मागतिक ताप (Thermodynamic Temperature) ज्योति तीव्रता (Luminous Intensity)

पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance)

व्युत्पन्न मात्रक :-

मूल मात्रक मीटर

संकेत

m

किलोग्राम

Kg

सेकण्ड

S

एम्पीयर A

K

केल्विन

कँडेला

cd

मोल

mol

मूल मात्रकों के अतिरिक्त अन्य सभी भौतिक राशियों के मात्रकों को

मूल मात्रकों के संयोजन द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। इन मात्रकों को व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं।

भौतिक राशि

सूत्र

मात्रक

7.

1 किलोमीटर (km) = 103m

8.

9.

घनत्व

द्रव्यमान

1.

2.

3.

4.

5.

6.

1 मील = 1.6 km = 1609 मीटर

1 टैरामीटर (Tm) 1012 मीटर

=

10. 1 प्रकाश वर्ष 9.46×1015 मी

मापक उपकरण (Measurement Equipments)

अल्टीमीटर उड़ते हुए विमान की ऊँचाई ज्ञात करने हेतु । डायनेमोमीटर - इंजन द्वारा उत्पन्न की गई शक्ति मापक यंत्र ।

स्कूगेज महीन तारों का व्यास ज्ञात करने हेतु ।

-

अमीटर - विद्युत धारा की तीव्रता ज्ञात करने हेतु । हाइग्रोमीटर वायुमण्डलीय आर्द्रता ज्ञात करने हेतु ।

-

बैरोमीटर वायुमण्डलीय दाब ज्ञात करने हेतु।

(Density)

किग्रा मी.

आयतन

वेग

विस्थापन

(Velocity)

मीटर सेकण्ड 1

समय

त्वरण

वेग

(Acceleration)

मीटर सेकण्ड

समय

बल (Force) ard (Work)

द्रव्यमान त्वरण

किग्रा मी. से. या न्यूटन

बल विस्थापन

शक्ति

कार्य

(Power)

न्यूटन मीटर या जूल

जूल सेकण्डया वाट

समय

7.

ग्रेवोमीटर गुरुत्वीयत्वरण ज्ञात करने हेतु।

8.

पायरोमीटर उच्च ताप युक्त पिण्ड का ताप

दाब (Pressure)

9.

फोनोमीटर ध्वनि की तीव्रता मापने हेतु

बल क्षेत्रफल

न्यूटन मीटर या पास्कल

10.

स्फिग्मोमैनोमीटर धमनियों में रुधिर के दाब को मापने का उपकरण

11. स्फेरोमीटर किसी सतह की वक्रता मापने का यंत्र ।

Note:-

12.

पॉलीग्राफ अपराधियों के कथनों की जाँच हेतु।

13. लेक्टोमीटर दूध की शुद्धता मापने हेतु ।

भौतिक राशियाँ एवं मात्रक

भौतिक राशियाँ

वे राशियाँ जिनको मापा जा सके, भौतिक राशियाँ कहलाती हैं।

भौतिक राशियों के प्रकार :-

मात्रक तथा मापन के आधार पर :-

किसी भी भौतिक राशि के मापन के लिए मात्रक प्रयोग में लिए जाते हैं। मात्रक दो प्रकार के होते हैं-

A.

i. मूल मात्रक :-

+

मूल राशियों को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त मात्रकों को मूल मात्रक कहते हैं।

B. दिशा एवं परिमाण के आधार पर दिशा व परिमाण के आधार पर राशियाँ दो प्रकार की होती हैं-

i.

अदिश राशि (Scalar Quantity) : वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश राशियाँ कहलाती हैं उदाहरण दूरी, चाल, समय, ऊर्जा, शक्ति, विद्युत धारा, आवेश आदि ।

ii. सदिश राशि (Vector Quantity):- वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण- विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, विद्युत क्षेत्र, बल-आघूर्ण आदि ।

1.

SI पद्धति में सात मूल मात्रकों के अतिरिक्त दो पूरक मात्रक भी हैं। दो समतलीय कोण समतलीय कोण का मात्रक रेडियन है। जिसका प्रतीक rad है।

ii.

घन कोण घनकोण का मात्रक स्टेरेडियन है जिसका प्रतीक Sr है। ये दोनों ही विमाहीन राशियाँ हैं।

276

उत्कर्ष प्रकाशन

मात्रक पद्धतियाँ

विशिष्ट ऊर्जा,

जूल प्रति

मूल मात्रकों और व्युत्पन्न मात्रकों के सम्पूर्ण समुच्चय को मात्रकों की प्रणाली या पद्धति कहते हैं।

गुप्त ऊष्मा

किलोग्राम

J/kg या jkg

m's-2

MKS पद्धति

उद्भासन (Exposure)

कूलॉम प्रति

C/kg या Ckg-t

KgsA

लम्बाई द्रव्यमान

मीटर (m)

(X-तथा Y -

किलोग्राम

ग्रेप्रति सेकंड

Gy/s या Gys-1

m2s-3

किलोग्राम (kg)

किरण)

समय

सेकण्ड (5)

विद्युत फलक्स

कूलॉम प्रति वर्ग

CGS पद्ध

घनत्व

मीटर

लम्बाई

सेंटीमीटर (cm)

परावैद्युतांक

फैरड प्रति मीटर

C/m2 या Cm F/mFm-

m22s A |kgrims stA2

द्रव्यमान

विशिष्ट

ग्राम (gm)

ओम मीटर

समय

सेकण्ड (s)

प्रतिरोध

Qm

Kgm's A

FPS पद्धति :- इसे ब्रिटिश पद्धति भी कहते हैं।

| विद्युत आवेश कूलॉम प्रति घन

C / m" या Cm

m3s A

लम्बाई

फुट (foot)

घनत्व

मीटर

द्रव्यमान

पाउण्ड (pound)

मोलर ऊर्जा

जूल प्रति मोल

J/mol IJmol-1

kg mise

समय

सेकण्ड (second)

mol-1

SI पद्धति

मोलर एंट्रॉपी,

SI : 'सिस्टम इंटरनेशनल डि यूनिट्स'

मोलर ऊष्मा

जूल प्रति मोल

केल्विन

|J/mol Kया | mol- 1K-1

kg m❜s K-1

यह मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति है।

धारिता

mol-1

यह पद्धति MKS पद्धति का परिवर्तित रूप है।

वर्तमान में इसी पद्धति का प्रयोग किया जाता है।

पृष्ठ विभव

जूल प्रति

j/kg या]kg-1;

किलोग्राम

Nm/kg या Nm

m2 5-2

kg-1

विशेष नाम वाले SI मात्रकों के पदों में व्यक्त SI व्युत्पन्न मात्रक

संपीड्यता

प्रति पास्कल

Par1

Karms2

SI मात्रक

प्रत्यास्थता

भौतिक राशि

नाम

प्रतीक

आवेग

न्यूटन सेकंड

Ns

SI मूल मात्रकों के पदों में व्युत्पन्न मात्रक kgemst

गुणांक चुंबकशीलता

न्यूटन प्रति वर्गमीटर हेनरी प्रति मीटर

N/m2 4 N m2

Kgmst

H/mया Hm

kg m s2A-2

दाब प्रवणता

द्विध्रुव आघूर्ण

कूलॉम मीटर

Cm

mAs

चुंबकीय

आघूर्ण

जूल प्रति टेस्ला

दाब ऊर्जा

पास्कल प्रति मीटर पास्कल धन

Pa/m या Nma

kg m222

JT-1

mA

कोणीय आवेग

न्यूटन मीटर

युग्म, बल

पृष्ठ ऊर्जा

विकिरण तीव्रता विद्युत क्षेत्र

सेकंड जूल प्रति

वर्गमीटर वॉट प्रति स्टेरेडियन

Nm s

kg m2 5-1

आघूर्ण

मीटर न्यूटन मीटर

Pam या Nm

kg m/s2

Nm

kgmt st

J/m2 या m-2:

kg s

पायसल अथवा पास्कल सेकंड

N / m या Nm

गतिक श्यानता

PI या Pas या Ns

अथवा न्यूटन

m-2

kgms-1

W/sr या Wsrt

kg mis31

सेकंड प्रति वर्ग

वोल्ट प्रति मीटर

तीव्रता

V/m TV m21

ऊष्मा धारिता,

एंट्रॉपी

जूल प्रति केल्विन

J/K

kg m s3A-1 kg m/s2 K-1

पृष्ठ तनाव

मीटर न्यूटन प्रति मीटर

N/mया Nm

kgst

विशेष नाम वाले SI व्युत्पन्न मात्रक

विशिष्ट ऊष्मा,

जूल प्रति

विशिष्ट एंट्रॉपी

किलोग्राम

J/kgK TJ kg11 K11

m2 s2 K-1

भौतिक राशि

SI मात्रक अन्य मात्रकों

SI मूल मात्रकों के

नाम

केल्विन

प्रतीक

कोणीय संवेग,

प्लांक नियतांक

जूल सेकंड

अवशोषित

kg m2 5-1

शक्ति घनत्व,

मात्रा, अवशोषित

ग्रे

Gy

के पदों में व्युत्पन्न मात्रक

पदों में व्युत्पन्न

मात्रक

j/kg या kg m/s या mast

किरणीत मान,

फ्लक्स घनत्व

ऊष्मीय चालकता

ऊर्जा घनत्व

ऊष्मीय

वॉट प्रति वर्ग मीटर

मात्रा सूचकांक

W/m2

kgst

सक्रियता

(रेडियो

वॉट प्रति मीटर केल्विन जूल प्रति धन मीटर

W/mK या Wm 1K-1 J/m' या ma

kg m s3 K-1

न्यूक्लाइड / रेडियोएक्टिव

बेकेरल

Bq

5-1

स्रोत की

Kgmist

बल

न्यूटन

N

kgm / s 2 या kg

mse

277

उत्कर्ष प्रकाशन

खगोलीय इकाई (AU) एक खगोलीय इकाई पृथ्वी व सूर्य के मध्य

प्रेरकत्व

हेनरी

H

Wb / A या Wb A-1

kgm / s A2 या kg m's A

विशिष्ट आयतन

कार्य, ऊर्जा,

ऊष्मा की

जूल

-

N m

मात्रा

विद्युत आवेश

कूलॉम

C

kgm / s या kg m2 s-2

As

घन मीटर प्रति किलोग्राम किलोग्राम मीटर प्रति

m/kg या mkg-1

संवेग जड़त्व आघूर्ण

सेकंड

kgm / s या kgmst

किलोग्राम वर्गमीटर

Kg m2

रेखीय

/ क्षेत्रीय

विद्युत प्रतिरोध

ओम

Ω

V/A या VA-1

kgm2/s3A2

(पृष्ठीय ) / आयतन

प्रति केल्विन

K-1

kg m2s-3A-2

प्रसरणीयता

धारिता

फैरड

F

C/V या CV-1

A2s/kgm या

दूरी के मात्रक :-

A's kg'm2

1.

शक्ति,

विकिरण

वॉट

W

J/s या st

kgm / s या kg miss

फ्लक्स

2.

विद्युत चालकता चुंबकीय

सीमेन्स

S

AN

SA2/kgm* या kg mess A2

वेबर Wb

अभिवाह चुंबकीय क्षेत्र,

Vs या (I / A या JA-1)

kgm / s A या

3.

kg m2 s2A-1

चुंबकीय

अभिवाह

टेस्ला

T

Wb/m2 या Wb m2

kg/s-A या kgst 2A-1

घनत्व,

चुंबकीय प्रेरण

विद्युत विभव,

विभवान्तर,

वोल्ट

W/A या WA-

विद्युतवाहक

V

1

Kgm / s A या kg m's 3A-1

बल

ज्योति फ्लक्स, दीप्त

ल्यूमैन

Im

-

cd/sr या cd srt

शक्ति

प्रदीप्त घनत्व

Im/m2 या lm

लक्स Ix

m

दाब, प्रतिबल

पास्कल

Pa

N/m2 या N m-2

cd/sr m2 ut cd m22 sr-1 kgmts या kg/sm

आवृत्ति

हर्ज

Hz

5-1

SI मूल मात्रकों के पदों में व्यक्त कुछ SI व्युत्पन्न मात्रक

भौतिक राशि

औसत दूरी को दर्शाती है।

1AU = 1.4x10 m

प्रकाश वर्ष एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी ।

1LY = 9.46 x 1015m

पारसेक यह दूरी का सबसे बड़ा मात्रक है।

1 पारसेक

3.08 x 1016m

इसका प्रयोग खगोलीय पिण्डों के मध्य दूरी को मापने में किया जाता है।

goo

गति, गति के नियम एवं गति के प्रकार

जब किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन हो तो उसे गति कहते हैं।

प्रत्येक वस्तु की गति किसी अन्य वस्तु के सापेक्ष ही देखी जाती है। दूरी एवं विस्थापन:-

दूरी (Distance) तय किए गए पथ की कुल लम्बाई दूरी कहलाती है। दूरी अदिश राशि है।

गतिशील वस्तु द्वारा तय की गई दूरी सदैव धनात्मक (+ve) होती है।

दूरी का मात्रक मीटर होता है।

विस्थापन (Displacement) प्रारंभिक एवं अंतिम बिन्दु के बीच की सीधी दूरी विस्थापन कहलाती है। विस्थापन सदिश राशि है। विस्थापन का मान धनात्मक, ऋणात्मक तथा शून्य हो सकता है।

SI मात्रक

नाम

प्रतीक

दूरी व विस्थापन के मध्य संबंध:

क्षेत्रफल

आयतन

विस्थापन का भी मात्रक मीटर होता है। दूरी ≥ विस्थापन

वर्गमीटर

m2

चाल व वेग :

घनमीटर

m3

चाल, वेग

मीटर प्रति सेकंड

m/s या mst

चाल (Speed)

वेग (Velocity)

कोणीय वेग

रेडियन प्रति सेकंड

त्वरण कोणीय त्वरण

मीटर प्रतिवर्ग सेकंड

तरंग संख्या घनत्व, द्रव्यमान घनत्व

रेडियन प्रतिवर्ग सेकंड प्रति मीटर

rad/s या radst m/st या mst rad/s' या radst m-1

विद्युत धारा घनत्व

किलोग्राम प्रति घनमीटर एम्पीयर प्रति वर्गमीटर

चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता, चुंबकीय तीव्रता, चुंबकीय आघूर्ण घनत्व सांद्रता (पदार्थ की मात्रा की

एम्पीयर प्रति मीटर

kg/m3 kg m-3 A /m' या Am 2 A / m या Amt

त्वरण (a):-

मोल प्रति घनमीटर

mol/m' या molm

इकाई समय में तय की गई दूरी चाल इकाई समय में तय किया गया

कहलाती है। चाल दूरी

समय

यह अदिश राशि है।

गतिशील वस्तु की चाल सदैव धनात्मक होती है। इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड होता है। चाल एवं वेग के मध्य

विस्थापन वेग कहलाता है।

वेग -

विस्थापन

समय

यह सदिश राशि है

वेग का मान धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य होता है।

इसका मात्रक मीटर/सेकण्ड होता है। संबंध :- चाल ≥ वेग

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर या इकाई समय में वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर उसमें उत्पन��न त्वरण के बराबर होता है।

त्वरण एक सदिश राशि है।

278

उत्कर्ष प्रकाशन

त्वरण का मात्रक मीटर/सेकण्ड अथवा मीटर सेकण्ड २ होता है। त्वरण की विमा [MILIT2] होती है।

वेग

त्वरण (Accelaration)

समय

गति के समीकरण:-

जब कोई वस्तु सीधी रेखा में एक समान त्वरण से चलती है, तो एक निश्चित समयान्तराल में उसके वेग, गति के दौरान त्वरण व उसके द्वारा तय की गई दूरी के संबंध को गति के समीकरणों द्वारा स्पष्ट किया जाता है।

पारिभाषिक शब्दावली-

U= प्रारंभिक वेग V = अंतिम वेग, समय, S विस्थापन

a = त्वरण

1. Vu+at

2. S = ut+

at2

2

3. V = u+2as

नोट:- nवें सेकंड में तय की गई दूरी S = u+

महत्त्वपूर्ण तथ्य

+(2n-1)

यदि वस्तु विरामावस्था से गति करना प्रारंभ करती है, तो u=0 होगा। ब्रेक लगाने / टक्कर के बाद वस्तु रुक जाती है, तो V=0 होगा। ऊर्ध्वाधर दिशा में गति के समय त्वरण गुरुत्वीय त्वरण (g) होता है।

यदि वस्तु ऊपर की ओर गति करे तो गुरुत्वीय त्वरण ऋणात्मक (-ve) होगा।

यदि वस्तु नीचे की ओर गति करे तो गुरुत्वीय त्वरण धनात्मक (+ve) होगा ।

न्यूटन के गति के नियम

I.

आइजक न्यूटन ने अपनी पुस्तक 'प्रिंसिपिया' में गति के 3 नियमों को

बताया था।

1. गति का प्रथम नियम

II. गति का द्वितीय नियम

III. गति का तृतीय नियम

गति का प्रथम नियम:-

गति के प्रथम नियम के अनुसार प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिति में परिवर्तन का विरोध करती है अर्थात् वस्तुएँ अपनी स्थिति में ही बने रहना चाहती हैं। जड़त्व के गुण के कारण ही वस्तुएँ अपनी स्थिति में परिवर्तन का विरोध करती हैं, अत: इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं। जड़त्व के बारे में सर्वप्रथम गैलीलियो ने बताया।

जड़त्व का गुण द्रव्यमान से सम्बद्ध होता है अर्थात् जड़त्व द्रव्यमान के समानुपाती होता है। (जड़त्व ० द्रव्यमान )

जड़त्व तीन ���्रकार के होते हैं-

1. स्थिर अवस्था का जड़त्व इस नियम के अनुसार 'स्थिर वस्तु अपनी स्थिरावस्था में बनी रहना चाहती है' जैसे घोड़े के अचानक दौड़ने पर घुड़सवार का पीछे गिर जाना।

2. गतिशीलता का जड़त्व:- इस नियम के अनुसार गतिशील वस्तु अपनी गतिज अवस्था बनाए रखना चाहती है; जैसे- तेज गति से चलती बस में अचानक ब्रेक लगने पर यात्रियों का आगे की ओर झुकना।

3. दिशा का जड़त्व इस नियम के अनुसार 'वस्तुएँ किसी निश्चित दिशा में ही गति को बनाए रखती है; जैसे- तेज गति से चलती बस को अचानक मोड़ने पर बस का पलट जाना।

II गति का द्वितीय नियम:- संवेग (P):-

+

किसी वस्तु के द्रव्यमान (M) एवं वेग (V) का गुणनफल उस वस्तु के

संवेग को दर्शाता है।

P = MxV

संवेग एक सदिश राशि है।

संवेग की विमा [MILIT] होती है।

संवेग का मात्रक किग्रा मीटर होता है।

सेकण्ड

इस नियम के अनुसार वस्तु पर आरोपित बल उसके संवेग में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है अर्थात् कोई वस्तु किसी बल के प्रभाव में गति करे तो वस्तु पर आरोपित बल उसके द्रव्यमान एवं त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

न्यूटन के द्वितीय नियमानुसार

बल (F) ox संवेग परिवर्तन की दर

ΔΡ

AT

F=k dp (P=mv)

dt

d(mxv)

F=ma

dt

. (k = 1)

न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के कुछ व्यावहारिक उदाहरण-

1. क्रिकेट में बॉल को कैच करते समय खिलाड़ी द्वारा अपने हाथों को बॉल की गति की दिशा में पीछे ले जाना ।

2. ठोस धरातल की तुलना में रेत में गिरने पर कम चोट का अनुभव होना।

III. गति का तृतीय नियम:-

जब कोई एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर उतने ही परिमाण का विपरीत दिशा में बल लगाती है। इस नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया की विपरीत दिशा में उतने ही परिमाण की विपरीत प्रतिक्रिया भी होती है।

गति के तृतीय नियम के व्यावहारिक उदाहरण-

1. रॉकेट प्रक्षेपण के समय तेज गति से गैसें बाहर निकलने पर रॉकेट पर विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल लगने से रॉकेट ऊपर की ओर गति करता है।

2. पृथ्वी पर चलते समय हम पृथ्वी को पैरों से पीछे धकेलने की कोशिश करते हैं लेकिन पृथ्वी द्वारा लगाए गए प्रतिक्रिया बल से हम आगे की ओर बढ़ पाते हैं।

3. एक तैराक अपने हाथों द्वारा पानी को पीछे की ओर धकेलता है,

जिससे वह तैराक पानी में आसानी से तैरने लगता है।

नोट:- रॉकेट प्रक्षेपण रेखीय संवेग संरक्षण पर तथा न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर आधारित होता है।

गति के प्रकार

I.

एक विमीय गति [One Dimensional Motion ] -जब वस्तु किसी एक ही अक्ष ( Axis) में गति कर पाए तो ऐसी गति एक विमीय गति कहलाती है।

उदाहरण-

पतले धागे पर चींटी की गति ।

पतली एवं सीधी सड़क पर कार की गति ।

279

लिफ़्ट की गति ।

उत्कर्ष प्रकाशन

II. द्वि-विमीय गति (Two Dimensional Motion ) - जब वस्तु की गति दो अक्षों के अनुदिश हो तो वस्तु की गति द्विविमीय कहलाती है।

उदाहरण-

घुमावदार (Curved) सड़क पर वाहन की गति । प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion) तोप से गोला या बन्दूक से गोली की गति । भाला फेंक एवं गोला फेंक में इनकी गति ।

III. त्रिविमीय गति (Three Dimensional Motion ) - जब किसी वस्तु की गति तीनों अक्ष (X, Y व Z) के अनुदिश हो तो इसे त्रिविमीय गति कहते हैं। उदाहरण-

उड़ते हुए पक्षी या कीट (Insect) की गति ।

आकाश में उड़ते वायुयान की गति ।

पतंग (Kite) की गति।

गैसीय अणुओं की गति

IV. सरल रेखीय गति (Linear Motion ) - सरल रेखीय गति में वस्तु एक सीधी रेखा (Straight Line) के अनुदिश गति करती है। उदाहरण-

सीधी सड़क पर कार की गति, मुक्त रूप से गिरती वस्तु । सरल रेखीय एक विमीय गति का ही उदाहरण है।

V. वृत्तीय गति (Circular Motion) :-

जब वस्तु की गति के दौरान उस पर लगने वाला बल उसके वेग (Velocity) की दिशा के लंबवत् (Perpendicular) हो तो उसकी गति वृत्तीय गति (Circular Motion) होती है।

वृत्ताकार पथ पर गति करती हुई वस्तु पर अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) लगता है, जिसकी दिशा इस वृत्ताकार पथ के केन्द्र की ओर होती है।

VI. आवर्त गति (Periodic Motion ) - जब कोई वस्तु अपनी गति के दौरान अपने पथ (Path) को निश्चित समय के बाद दोहराती है तो वस्तु की यह गति आवर्त गति कहलाती हैं।

उदाहरण-

सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति ।

वृत्तीय पथ पर नियत चाल से गति करते हुए कण । घड़ी की घण्टे वाली सूई का घूर्णन

V. सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion ) - जब कोई वस्तु किसी माध्य अवस्था (Mean Position) के आस-पास गति करते हुए निश्चित समय अंतराल में अपने पथ को दोहराती है तो ऐसी गति सरल आवर्त गति S. H.M. कहलाती है। उदाहरण-

घड़ी के पेंडुलम की गति ।

'U' आकार की नली में भरे हुए जल की गति।

झूले की गति ।

SHM करते पेंडुलम का आवर्तकाल:-

T = 27

g

L

पेंडुलम की लंबाई

9

गुरुत्वीय त्वरण

रेखीय सरल आवर्त गति में प्रत्यानयन बल का मान माध्य स्थिति से वस्तु

के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है।

Fx-x

IF = -kx (k = बल नियतांक, k = - 2 )

न्यूटन

MLT-2

विमा

मीटर

-- [MT21

सरल आवर्त गति के घटक:-

-

1. आयाम (Amplitude) SH.M. करते कण / पेंडुलम का अपनी माध्य अवस्था (Equilibrium) से अधिकतम विस्थापन (Displacement) उसका आयाम कहलाता है।

ii. आवर्तकाल (Time period) S.H.M. करते कण / पेंडुलम को एक चक्कर / दोलन पूरा करने में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है।

आवृत्ति [Frequency ]

प्रति सेकण्ड लगाए गए दोलन / चक्करों की संख्या SHM करती वस्तु की आवृत्ति कहलाती है तथा ये आवर्तकाल का व्युत्क्रम ( ) होती है।

आवृत्ति (n) -

आवृत्ति (n) का 27 गुना वस्तु की कोणीय आवृत्ति (1) कहलाती है।

अर्थात्

कोणीय आवृत्ति (a) = 2rn 22

बल (Force)

बल वह भौतिक राशि (Physical Quantity) है जो किसी वस्तु (Object) की स्थिति में परिवर्तन कर दे या परिवर्तन को प्रेरित (Induce) करें।

बल एक सदिश राशि (Vector Quantity) है। गति के दूसरे नियम से बल (F)

बल के मात्रक न्यूटन, Kg x

द्रव्यमान (m) x त्वरण (a)

meter

Second

C.G.S. पद्धति में डाईन, 1 न्यूटन 105 डाइन

विमा - MLT-2

जब कोई बल किसी वस्तु पर लगता है

जिस वस्तु पर बल लग रहा है इन दोनों

पर बल मुख्यतया दो प्रकार के होते हैं-

में

तो बल लगाने वाली वस्तु तथा

-

संपर्क (Contact) के आधार

संपर्क बल (Contact Force ) घर्षण बल (Friction) असंपर्क बल (Non contact force) गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force)

-

घर्षण बल (Friction Force)

दो स्पर्श करती हुई सतहों के मध्य लगने वाला बल जो उनकी आपेक्षिक गति का विरोध करता है 'घर्षण बल' कहलाता है।

घर्षण बल एक स्पर्शी बल है।

घर्षण बल हमेशा गति के विपरीत लगता है अर्थात् घर्षण बल गति का विरोध करता है।

घर्षण बल का मान पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। खुरदरी सतह पर घर्षण बल का मान सर्वाधिक होता है।

चिकनी सतह पर घर्षण बल का मान न्यूनतम होता है।

दो ठोस सतहों के मध्य घर्षण बल का मान सर्वाधिक होता है जबकि ठोस द्रव सतहों के मध्य घर्षण बल का मान इससे कम होता है।

: 280

+

i.

उत्कर्ष प्रकाशन

ठोस - गैस सतहों के मध्य घर्षण बल का मान बहुत कम होता है। घर्षण बल मुख्यतः दो प्रकार का होता है-

स्थैतिक घर्षण बल स्थिर सतहों के मध्य लगने वाला घर्षण बल स्थैतिक घर्षण बल कहलाता है। स्थैतिक घर्षण बल का मान सर्वाधिक

होता है; जैसे- टेबल पर रखी पुस्तक एवं टेबल के मध्य लगने वाला घर्षण बल ।

सीमान्त घर्षण-

+

स्थैतिक घर्षण का वह अधिकतम मान जहाँ तक वस्तु गति नहीं करती, सीमान्त घर्षण कहलाता है।

सम्पर्क में रखी किन्हीं दो वस्तुओं के बीच सीमान्त घर्षण का परिमाण उनके बीच अभिलम्ब प्रतिक्रिया बल के अनुक्रमानुपाती होता है।

Foc R अथवा FR (us सीमांत घर्षण गुणांक)

ii. गतिक घर्षण बल गतिशील सतहों के मध्य लगने वाला घर्षण बल गतिक घर्षण बल कहलाता है।

इसे

a.

Fv=uR

पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है-

(Avगतिक घर्षण गुणांक)

लोटनिक घर्षण बल जब कोई वस्तु किसी सतह पर लुढ़कती हुई गति करती है तो दोनों के मध्य लगने वाला घर्षण बल लोटनिक घर्षण बल कहलाता है; जैसे फर्श एवं फर्श पर लुढ़कती हुई गेंद के मध्य लगने वाला घर्षण बल चलती हुई गाड़ी के पहियों एवं सड़क के मध्य लगने वाला घर्षण बल । b. सर्प घर्षण बल- जब कोई वस्तु किसी सतह पर रेंगते हुए / सरकते हुए गति करती है तो दोनों के मध्य लगने वाला घर्षण बल 'सर्पी घर्षण बल' कहलाता है; जैसे- रेंगते हुए सर्प एवं सतह के मध्य लगने वाला घर्षण बल, बिना पहियों वाली गाड़ी को खींचते समय सतह एवं गाड़ी के मध्य लगने वाला घर्षण बल । नोट- सर्पी घर्षण लोटनिक घर्षण

घर्षण बल के लाभ-

घर्षण बल व्यक्ति को सीधा खड़ा रखने में सहायक है।

घर्षण बल चलने में सहायक है।

+

+

घर्षण बल के कारण ही चॉक से बोर्ड पर लिखा जा सकता है।

घर्षण बल के कारण ही दीवार में कील लगाई जा सकती है। घर्षण बल के कारण ही ईंटों की चुनाई कर दीवार बनाई जा सकती है। घर्षण बल के कारण ही गाड़ियों के टायर खुरदरे बनाए जाते हैं।

घर्षण बल के कारण ही माचिस से तीली जलाई जा सकती है। घर्षण के कारण ही आग का आविष्कार हुआ।

घर्षण बल की हानि��ाँ -

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियमानुसार दो पिंडों के मध्य लगने वाला आकर्षण बल पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है।

Focm.ma

..(1)

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियमानुसार दो पिंडों के मध्य लगने वाला आकर्षण बल पिंडों के केंद्रों के मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

Fo

..(2)

समीकरण 1 व 2 से

m.m

Foc

Gm,m,

F=

इस बल की दिशा दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है। G= समानुपाती नियतांक, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक कहते हैं। SI पद्धति में G का मान 6.6710 Nm/kg

विमीय सूत्र[ML'T']

G का मान कणों के मध्य उपस्थित माध्यम, कणों की प्रकृति व आकार पर निर्भर नहीं करता है।

प्रयोगशाला में G की गणना केवेन्डिश ने की थी।

गुरुत्वाकर्षण बल की विशेषताएँ-

(i)

(ii)

यह पिंडों के मध्य उपस्थित माध्यम पर निर्भर नहीं करता है। यह एक केंद्रीय बल है।

(ii) यह बल सदैव आकर्षण प्रकृति का होता है।

(iv) यह दुर्बल प्रकृति का बल है।

(v)

यह एक संरक्षी बल है अर्थात् इसके द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता है।

(vi) यह न्यूटन गति के क्रिया-प्रतिक्रिया नियम का पालन करता है। गुरुत्वीय त्वरण-

पृथ्वी द्वारा किसी पिंड पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण खिंचाव गुरुत्व कहलाता है।

गुरुत्वाकर्षण के कारण गुरुत्वीय बल के प्रभाव में पिंड की गति में उत्पन्न त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है।

g

GM

g=

R

घर्षण बल के कारण मशीनों के कलपूर्जी (Parts) में घिसावट होती है। घर्षण बल के कारण मशीनों में ऊष्मा उत्पन्न होती है जिससे ईंधन की व्यर्थ खपत होती है।

घर्षण कम करने के उपाय

सतहों की पॉलिश करके

स्नेहक के द्वारा

बॉल-बियरिंग अथवा रोलर बियरिंग प्रयुक्त करके

गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitation Force)

न्यूटन का गुरुत्वीय सार्वत्रिक नियम

गुरुत्वाकर्षण बल वह बल है, जिसके द्वारा कोई पिण्ड (कण या वस्तु) ब्रह्माण्ड के अन्य पिण्डों को आकर्षित करता है। यह एक सार्वभौमिक बल है।

इसे से प्रदर्शित करते हैं।

यह एक सदिश राशि है।

इसका मान परिवर्तनशील होता है।

g का मान स्थिति, द्रव्यमान, त्रिज्या, दूरी, स्थान, घूर्णन गहराई व ऊँचाई

के साथ परिवर्तित होता है।

अंतरिक्ष में g का मान शून्य होता है।

g का SI मात्रक मीटर / सेकण्ड

g

की विमा: [M°L'T2]

पलायन वेग (Escape Velocity)

पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी पिण्ड को पृथ्वी तल से ऊपर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और पृथ्वी पर कभी वापस नहीं लौटता है।

V=

= √2gR

281

+

पृथ्वी के लिए पलायन वेग ग्रहों की गति संबंधी केपलर के

11.2 km / sec नियम -

उत्कर्ष प्रकाश

केपलर ने खगोलीय प्रेक्षणों के आधार पर सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति के तीन नियम प्रतिपादित किए-

I.

प्रथम नियम (कक्षा का नियम) सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घ वृत्ताकार कक्षाओं में परिक्रमण करते हैं तथा सूर्य कक्षाओं के एक फोकस पर होता है।

II. द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम) किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समयान्तरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है अर्थात् ग्रह की क्षेत्रीय चाल नियत रहती है। III. तृतीय नियम (परिक्रमण काल का नियम)- किसी भी ग्रह का सूर्य के परित: परिक्रमणकाल (एक पूरा चक्कर लगाने का समय) का वर्ग, उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्द्ध-दीर्घ अक्ष की तृतीय घात (धन) के अनुक्रमानुपाती होती है। T2oc as

नोट- भू-स्थायी उपग्रह का परिक्रमण काल 24 घण्टे का होता है।

दाब (Pressure)

किसी एकांक क्षेत्रफल पर लम्बवत् लगने वाला बल 'दाब' कहलाता है।

बल

दाब =

क्षेत्रफल

मात्रक =

न्यूटन मीटर'

= पास्कल

लगने वाले बल का मान बढ़ने पर दाब का मान भी बढ़ जाता है। दैनिक जीवन में दाब के उपयोग-

कील का आगे का सिरा नुकीला बनाया जाता है, क्योंकि क्षेत्रफल का मान कम होने से दाब का मान बढ़ जाता है जिससे कील दीवार में आसानी से धँस जाती है।

कीचड़ में फँसे व्यक्ति को लेट जाने की सलाह दी जाती है क्योंकि

क्षेत्रफल का मान बढ़ने से दाब का मान कम हो जाता है एवं व्यक्ति के कीचड़ में धँसने की दर कम हो जाती है।

गाड़ियों के टायर चौड़े बनाए जाते हैं क्योंकि क्षेत्रफल का मान बढ़ने से दाब का मान कम हो जाता है एवं गाड़ी धँसती नहीं है।

बैग की पट्टियाँ चौड़ी रखी जाती है क्योंकि क्षेत्रफल बढ़ने से दाब का मान कम हो जाता है।

अँगुली के नाखून की तुलना में ऑलपिन से गुब्बारा फोड़ना आसान होता है क्योंकि क्षेत्रफल का मान कम होने से दाब का मान बढ़ जाता है।

वायुमण्डलीय दाब -

पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाने पर वायुमण्डलीय दाब का मान कम होता जाता है जिसके कारण-

i) पहाड़ों पर खाना देरी से पकता है।

ii) वायुयान में बैठे यात्री की जेब में रखे फाउण्टेन पेन से स्याही रिस जाती है।

द्रव में दाब-

+

द्रव में गहराई बढ़ने के साथ-साथ दाब का मान भी बढ़ता जाता है। इसी कारण बाँध की दीवारें नीचे से चौड़ी बनाई जाती हैं।

द्रव में समान गहराई (क्षैतिज तल) में स्थित सभी बिंदुओं पर दाब का मान समान रहता है।

द्रव में स्थित बिंदु पर सभी दिशाओं में दाब का मान समान रहता है। पास्कल का नियम-

पास्कल का नियम द्रव में दाब से संबंधित है।

पास्कल के नियमानुसार-

+

+

किसी पात्र में बंद द्रव के किसी भाग में बाह्य बल लगाया जाता है तो वह द्रव के सभी भागों में समान रूप से संचरित होता है।

हाइड्रॉलिक प्रेस, हाइड्रॉलिक ब्रेक, हाइड्रॉलिक लिफ्ट आदि पास्कल

नियम पर आधारित होते हैं।

क्वथनांक एवं गलनांक पर दाब का प्रभाव-

मात्रक

वायु द्वारा डाला गया दाब, वायुमण्डलीय दाब कहलाता है। वायुमण्डलीय दाब का मात्रक 'बार' है।

बैरोमीटर की सहायता से वायुमण्डलीय दाब मापा जाता है।

+

बैरोमीटर में पारा / मर्करी भरा होता है।

बैरोमीटर की सहायता से मौसम संबंधी भविष्यवाणी भी की जाती है। 1 बार 105 न्यूटन / मीटर

+

बैरोमीटर का पाठ्यांक जब अचानक नीचे आता है तो आँधी / तूफान की भविष्यवाणी की जाती है। बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे नीचे आता है तो वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे ऊपर जाता है तो मौसम साफ रहने की भविष्यवाणी की जाती है।

+

दाब बढ़ाने पर द्रवों का क्वथनांक बढ़ जाता है।

जिन पदार्थों का आयतन ताप बढ़ने पर बढ़ता है, उनका गलनांक भी दाब बढ़ने से बढ़ता है, जैसे मोम, घी आदि ।

जिन पदार्थों का आयतन ताप बढ़ने पर घटता है, उनका गलनांक भी दाब बढ़ने पर घटता है; जैसे बर्फ

goo

कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति

कार्य

बल एवं बल के प्रभाव में होने वाले विस्थापन का गुणनफल कार्य कहलाता है।

w= F.d

किया गया कार्य बल विस्थापन cose

6 बल व विस्थापन के मध्य कोण

6 = 90° ⇒ cos90° = 0

6 = 0° = cos0° = 1

यह एक अदिश राशि है।

जूल, कैलोरी, अर्ग (ऊर्जा के ही मात्रक) कार्य का मात्रक न्यूटन मीटर

मात्रक = किग्रा. x

विमा:- [M'L2T2]

1J = 107 apf

मीटर'

सेकण्ड '

नोट- व्यक्ति किसी सामान / वस्तु को लेकर स्थिर खड़ा है तो किया गया कार्य शून्य (क्योंकि d = 0) होगा।

282:

ऊर्जा [Energy]

"कार्य करने की क्षमता ही ऊर्जा / Energy कहलाती है।"

मात्रक:- जूल, कैलोरी, अर्ग (C.G.S.)

1 कैलोरी

4.2 जूल

1 जूल

1 कैलोरी

4.2

+

ऊर्जा एक अदिश राशि है।

उत्कर्ष प्रकाशन

सेल अथवा बैटरी का निरावेशन रासायनिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण है।

सेल/बैटरी का निरावेशन (Discharging)

रासायनिक ऊर्जा

विद्युत ऊर्जा

दहन

(Combustion)

'ऊष्मा ऊर्जा

सेल / बैटरी का आवेशन

(Charging)

Note :- कार्य तथा ऊर्जा के मात्रक तथा विमाएँ एकसमान होते हैं। ऊर्जा के प्रकार (Types of Energy]

1. सौर ऊर्जा / Solar Energy:-

पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा व अंतिम स्रोत सूर्य है जो सौर ऊर्जा के रूप में हमें ऊर्जा प्रदान करता है।

सोलर पैनल अथवा सेल सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदलती है।

सौर ऊर्जा

सोलर पैनल / सेल

→ विद्युत ऊर्जा

2. द्रव्यमान-ऊर्जा / Mass Energy:-

6.

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)

→ रासायनिक ऊर्जा

7.

प्रत्येक वस्तु में उसके द्रव्यमान के कारण पाई जाने वाली ऊर्जा द्रव्यमान ऊर्जा कहलाती है।

आइंस्टीन ने ऊर्जा-द्रव्यमान संबंध को निम्नलिखित समीकरण द्वारा समझाया:-

m = वस्तु का द्रव्यमान

E = mc2

C = निर्वात में प्रकाश की चाल (3x10° मी / से.)

3. नाभिकीय ऊर्जा / Nuclear Energy:-

दो छोटे नाभिकों से एक बड़े नाभिक का निर्माण ( नाभिकीय संलयन / Nuclear fusion) या एक बड़े नाभिक के टूटने से छोटे नाभिकों का निर्माण (नाभिकीय विखंडन / Nuclear fission) होने पर अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है, जिसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। परमाणु बिजलीघर अथवा नाभिकीय संयंत्र नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

नाभिकीय ऊर्जा =

8.

परमाणु बिजलीघर नाभिकीय संयंत्र

• विद्युत ऊर्जा

9.

4. ध्वनि ऊर्जा / Sound Energy:-

+

ध्वनि (sound) किसी भी माध्यम में यांत्रिक तरंगों के रूप में गति करती है, इन तरंगों में पाई जाने वाली ऊर्जा ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy) कहलाती है।

माइक अथवा माइक्रोफोन ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

प्रकाश ऊर्जा / light Energy:-

प्रकाश (दृश्य / visible) विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electro magnetic waves) के रूप में गति करता है तथा इन तरंगों में पाई जाने वाली ऊर्जा ही प्रकाश ऊर्जा कहलाती है।

फोटो सेल प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।

बल्ब अथवा ट्यूब लाइट विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में बदलते हैं- फोटो सेल विद्युत ऊर्जा बल्ब, ट्यूबलाईट, LED

प्रकाश ऊर्जा

विद्युत ऊर्जा / Electric Energy:-

किसी धारावाही चालक तार के आस-पास विद्युत क्षेत्र पाया जाता है, जिसमें रखी चालक वस्तु पर बल लगाता है, ऐसा विद्युत ऊर्जा / Electric Energy के कारण होता है।

यांत्रिक ऊर्जा [Mechanical Energy] - यांत्रिक ऊर्जा 2 प्रकार की होती हैं :-

i.

.

गतिज ऊर्जा / Kinetic Energy:-

वस्तु की गति के कारण इसमें पाई जाने वाली ऊर्जा, गतिज ऊर्जा कहलाती है।

गतिज ऊर्जा/K.E. = -mv2

ii. स्थितिज ऊर्जा / Potential Energy:-

.

वस्तु की स्थिति तथा अभिविन्यास में परिवर्तन के कारण उत्पन्न ऊर्जा को, स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

Fafaur 3f/P.E.= mgh

ऊष्मा ऊर्जा / heat Energy:-

पदार्थों में घर्षण होने या उनका दहन होने पर ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है। तापीय बिजलीघर ऊष्मा ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

उदा. इलेक्ट्रिक प्रेस, छड़ अथवा गीजर

ध्वनि ऊर्जा

माइक / माइक्रोफोन

स्पीकर

5. रासायनिक ऊर्जा / Chemical Energy:-

विद्युत ऊर्जा

टक्कर के दौरान

तापीय बिजलीघर

ऊष्मा ऊर्जा

विद्युत ऊर्जा

यांत्रिक ऊर्जा

इलेक्ट्रिक प्रेस, छड़, गीजर,

इलेक्ट्रिक केतली हीटर

1.

पारंपरिक / परंपरागत स्रोत लंबे समय से बिना किसी विशेष तकनीक के प्रयोग में लाए जा रहे हैं।

पदार्थों के रासायनिक गुणधर्मों के कारण उनमें पाई जाने वाली ऊर्जा ऊर्जा के स्रोत | Sources of Energy] रासायनिक ऊर्जा कहलाती है।

दहन में रासायनिक ऊर्जा का रूपांतरण ऊष्मा ऊर्जा में होता है। सेल अथवा बैटरी का आवेशन विद्युत ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण है।

जैसे:- जीवाश्म ईंधन (fossil fuel), तापीय ऊर्जा, जल- faga(Hydro-Electricity)

283.

A. जीवाश्म ईंधन / fossil fuel:-

.

पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला, खनिज आदि।

.

विश्व में सबसे ज्यादा ऊर्जा की आपूर्ति इसी से होती है।

उत्कर्ष प्रकाश

शक्ति [Power]

किसी वस्तु / मशीन के कार्य करने की दर या इकाई समय (1 सेकण्ड )

में किया गया कार्य ही शक्ति (Power) कहलाता है।

इनके भण्डार/ Reservoir सीमित हैं।

.

यह अत्यधिक प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।

+

शक्ति (P) =

+

शक्ति का मात्रक = जूल/सेकण्ड वॉट

+

शक्ति का अन्य मात्रक किलोवॉट, मेगावॉट, अश्व शक्ति (H.P) है।

नोट:-

B. तापीय ईंधन / Thermal fuel पदार्थों के दहन से मुक्त ऊष्मीय ऊर्जा से इंजन चलाकर विद्युत उत्पादन कर ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। जल-विद्युत/Hydro-Electricity:-

C.

बड़े बाँधों से जब गिरते हुए जल से टरबाइन में गति होती है तो विद्युत का उत्पादन होता है, इस रूप में जल विद्युत ऊर्जा का स्रोत है।

बड़े बाँधों का निर्माण पारिस्थितिकी दृष्टिकोण से

उपयुक्त नहीं

होता, जल विद्युत के लिए बड़ी नदियों, ढाल युक्त क्षेत्रों का होना भी आवश्यक है।

परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के साथ तकनीक का प्रयोग कर पवन चक्की एवं गोबर गैस संयंत्रों का विकास किया गया है।

पवन चक्की में बहती हुई पवन की ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।

* गोबर गैस में लगभग 75% मीथेन गैस (CH4) पाई जाती है। (धुआँ रहित ज्वाला।)

2. गैर परंपरागत / वैकल्पिक स्रोत विशेष तकनीकी का प्रयोग कर विकसित किए गए साधन।

जैसे:- सौर ऊर्जा, समुद्री ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा स्रोत, पवन ऊर्जा

A. सौर ऊर्जा :-

.

सिलिकॉन, जर्मेनियम जैसे अर्द्धचालकों से निर्मित सोलर सेल / पैनल के द्वारा सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

यह स्वच्छ एवं नवीकरणीय (Renewable) स्रोत है।

खुला आकाश, तेज धूप इसके लिए अनिवार्य है।

इसकी प्रारंभिक लागत ज्यादा होती है।

B. समुद्री ऊर्जा-

. तेज गति से उत्पन्न लहरों से टरबाइन चलाकर, ज्वार भाटे के समय उत्पन्न लहरों से विद्युत उत्पादन किया जाता है।

C. भू-तापीय ऊर्जा (Geo-thermal Energy)-

पृथ्वी के भू-गर्भ में स्थित लावा के जमावों से निकलने वाली ऊष्मा ऊर्जा से टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है।

D. परमाण्वीय ऊर्जा :-

नाभिक विखण्डन आधारित परमाणु संयंत्र ( Nuclear Reactors) में परमाण्वीय ऊर्जा की सहायता से विद्युत उत्पादन किया जाता है।

ऊष्मा

(1 HP = 746 az) 1 HP = 746 watt

शक्ति एक अदिश राशि है।

विमा (Dimension):-

w Fxd

शक्ति =

t t

[MLT2]×[L'] [T]

= [M'L2T3]

ऊष्मा एवं ताप

यह एक प्रकार की ऊर्जा ही है जो वस्तु के ठण्डे या गर्म होने के बारे में बताती है।

यदि किसी वस्तु को ऊष्मा दी जाती है तो सामान्यतया इसके तापमान में वृद्धि होती है तथा वस्तु से ऊष्मा निकाल दी जाए तो इसके तापमान में कमी आती है, केवल अवस्था परिवर्तन को छोड़कर। वस्तु का गर्म या ठण्डा होना ऊष्मा की मात्रा को बताता है परंतु वस्तु कितनी गर्म है या कितनी ठण्डी है यह केवल तापमान से ही पता चलता है। ऊष्मा का प्रवाह हमेशा अधिक तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर तब तक होता रहता है जब तक कि दोनों के तापमान समान न हो जाए अर्थात् ऐसी अवस्था 'तापीय साम्यावस्था' कहलाती है। ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है जिसका स्थानान्तरण दो (अथवा अधिक) निकायों के बीच अथवा किसी निकाय तथा उसके परिवेश के बीच ताप में अन्तर के कारण होता है।

ताप की अवधारणा

+

कोई वस्तु कितनी गर्म है अथवा कितनी ठण्डी है। यह वस्तु के तापमान से ज्ञात होता है।

ताप एक अदिश राशि है।

इसका मात्रक केल्विन, डिग्री सेल्सियस, फॉरेनहाइट, रयूमर होता है। | पैमाना इस पैमाने पर जल अंतर का क्वथनांक

इस पैमाने पर जल

का हिमांक

डिग्री सेल्सियस केल्विन फॉरेनहाइट

O°C

100°C

100

273.15 K

373.15 K

100

यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न करता है।

रयूमर

32°F ᎤᎡ

212°F

180

80°R

80

ऊर्जा संरक्षण / Energy Conservation:-

संपूर्ण ब्रह्माण्ड की कुल ऊर्जा नियत बनी रहती है।

ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है न ही नष्ट की जा सकती है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में स्थानान्तरित कर सकते हैं।

°C

°C 0_K-273_ °F-32 °R 0 100 80

K-273 °F-32 °R

=

=

100

180

=

3

5

9

4

284

उत्कर्ष प्रकाशन

(OK) तापमान को परम शून्य ताप कहते हैं जो कि प्रायोगिक रूप से गुप्त ऊष्मा :- संभव नहीं है।

ऊष्मा निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है :-

1.

द्रव्यमान:-

किसी पदार्थ को दी गई ऊर्जा, पदार्थ के द्रव्यमान पर निर्भर करती है।

यदि पदार्थ का द्रव्यमान अधिक होता है तो उसे अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है।

अवस्था परिवर्तन (ठोस से द्रव एवं द्रव से गैस) के समय पदार्थ को दी गई ऊष्मा इसके तापमान में तो परिवर्तन नहीं करती लेकिन यह ऊष्मा अवस्था परिवर्तन में खर्च हो जाती है, इसे ही गुप्त ऊष्मा कहते हैं। * द्रव अर्थात् गलन के दौरान गुप्त ऊष्मा । → गैस अर्थात् वाष्पन के दौरान गुप्त ऊष्मा ।

ठोस

द्रव

ऊष्म

ऊष्मा

गलन की गुप्त ऊष्मा :-

यदि पदार्थ का द्रव्यमान कम होता है तो उसे कम ऊष्मा की आवश्यकता

+

1

होती है; जैसे- 1 किग्रा जल को गर्म करने के लिए दी गई ऊष्मा, किग्रा. जल को दी गई ऊष्मा से अधिक होती है।

2

2.

+

किसी पदार्थ के तापमान को बढ़ाना अथवा घटाना, ऊष्मा पर निर्भर करता है।

+

तापान्तर:-

यदि किसी पदार्थ का तापमान बढ़ाना है तो उसे अधिक ऊष्मा प्रदान करनी पड़ेगी तथा किसी पदार्थ का तापमान घटाना है तो उसे कम ऊष्मा देनी पड़ेगी।

3. पदार्थ की प्रकृतिः-

+

किसी पदार्थ को दी गई ऊष्मा, पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है; उदाहरण- जैसे m द्रव्यमान वाले जल को Q ऊष्मा देने पर उसके तापमान में वृद्धि कम होती है, इसी प्रकार m द्रव्यमान वाले दूध को Q ऊष्मा देने पर उसके तापमान में वृद्धि अधिक होगी।

किसी पदार्थ को दी गई ऊष्मा AQ = mxsxd0

यहाँ m पदार्थ का द्रव्यमान है।

do तापान्तर है।

5 यहाँ विशिष्ट ऊष्मा है।

1 ग्राम जल का तापमान 1°C तक बढ़ाने के लिए दी गई ऊष्मा 1 कैलोरी ऊष्मा कहलाती है।

ऊष्मा का मात्रक

जूल, कैलोरी तथा अर्ग ऊष्मा के मात्रक होते हैं।

=

1 BTU (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) 252 कैलोरी

विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) :-

AQ = mxsxde

पदार्थ के गलनांक पर एकांक द्रव्यमान को ठोस से द्रव में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा उसकी गलन की गुप्त ऊष्मा' कहलाती है।

=

बर्फ के लिए गलन की गुप्त ऊष्मा 80 Kcal/kg 80cal/g वाष्पन की गुप्त ऊष्मा :-

द्रव के क्वथनांक पर एकांक द्रव को पूर्णतया वाष्प में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा उसकी वाष्पन की गुप्त ऊष्मा कहलाती है।

जल के लिए वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 536 Cal/g

= 540 Call g (लगभग)

गुप्त ऊष्मा :-

+

गुप्त ऊष्मा (L) =

ऊष्मा

द्रव्यमान

कैलोरी

+

इसका मात्रक = ग्राम

इसकी विमा [L2T-2] होती है।

मिश्रण का तापमान :-

+ जब दो अलग-अलग पदार्थ A तथा B आपस में मिलाए जाते हैं, जिनका

तापमान अलग हो तो बने मिश्रण का तापमान 6 होता है।

AQ = mxsxd0

मिश्रण का तापमान

Ө =

MASAA +m Sh MASA + mg Sa

यहाँ mA = A पदार्थ का द्रव्यमान

SA = A पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा

m

AQ

S =

mx de

+

1 ग्राम पदार्थ का तापमान 1°C तक बढ़ाने के लिए दी गई ऊष्मा उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहलाती है।

इसका मात्रक

कैलोरी ग्राम x डिग्री सेन्टीग्रेड

होता है।

जल की विशिष्ट ऊष्मा

जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है।

एक ग्राम जल को गर्म करने के लिए 1 कैलोरी ऊष्मा की आवश्यकता होती है उसी प्रकार एक लीटर जल को गर्म करने के लिए 1000 कैलोरी अथवा 4,200 जूल की आवश्यकता होती है।

1 कैलोरी

=

1,000 कैलोरी

ग्राम * डिग्री सेन्टीग्रेड

किलोग्राम

डिग्री सेन्टीग्रेड

विशिष्ट ऊ���्मा तापान्तर के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

BA = A पदार्थ का तापमान है। इसी प्रकार,

यहाँ ma = B पदार्थ का द्रव्यमान

Sg B पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा 6g = B पदार्थ का तापमान है। ऊष्मीय प्रसार :-

जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है तो पदार्थ के परमाणु ऊष्मा अवशोषित कर कम्पन करने लगते हैं, जिससे दो परमाणुओं के बीच की अंतर परमाण्विक दूरी बढ़ने लगती है, जिससे पदार्थ के आयतन में भी वृद्धि होती है इसे ही ऊष्मीय प्रसार ( Thermal Expansion) कहते हैं।

उदाहरण-

4.200 जूल किलोग्राम x केल्विन

+

जल की विशिष्ट ऊष्मा के कारण ही इसका उपयोग रेडिएटर तथा रबड़

की गर्म पानी की बोतल में किया जाता है।

बर्फ की विशिष्ट ऊष्मा 0.5 कैलोरी / ग्राम डिग्री सेन्टीग्रेड होती है। वाष्प की विशिष्ट ऊष्मा 0.47 कैलोरी / ग्राम डिग्री सेन्टीग्रेड होती है।

285

+

रेल की पटरियाँ बिछाते समय उनके बीच कुछ जगह रखी जाती है। बिजली के पोल पर तार बाँधते समय उन्हें कुछ ढीला रखा जाता है। काँच के पात्र में अत्यधिक गर्म द्रव को डालने पर काँच टूट जाता है। ठोसों में रेखीय प्रसार (Linear Expansion), क्षेत्रीय प्रसार (Area Expansion) तथा आयतन प्रसार (Volume Expansion) तीनों देखे जाते हैं जबकि द्रवों व गैसों में केवल आयतन प्रसार होता है।

द्रवों में ऊष्मीय प्रसार

द्रवों में केवल आयतन प्रसार होता है।

उत्कर्ष प्रकाश

किसी द्रव को पात्र में गर्म करने पर द्रव का स्तर पहले घटता है फिर बढ़ता है।

जल का असामान्य प्रसार :-

0 डिग्री सेन्टीग्रेड से 4 डिग्री सेन्टीग्रेड के मध्य जल को गर्म करने पर आयतन में कमी आती है एवं घनत्व में वृद्धि होती है।

4 डिग्री सेन्टीग्रेड ताप के बाद जल सामान्य व्यवहार करता है जिसमें आयतन में वृद्धि एवं घनत्व में कमी हो जाती है।

जल के इस असामान्य प्रसार के कारण ही बर्फ जल में तैरती है। ठण्डे प्रदेशों में झीलों की सतह पर बर्फ जम जाने के बावजूद भी अन्दर तरल अवस्था में जल होता है तथा जलीय जीव जीवित रह पाते हैं।

गैसों में केवल आयतन प्रसार पाया जाता है।

ठोस, द्रव एवं गैस में से सर्वाधिक प्रसार गैसों में ही होता है तथा गैसों में होने वाले प्रसार को ही वास्तविक प्रसार कहते हैं।

ऊष्मा संचरण :-

माध्यम में या माध्यम की अनुपस्थिति में ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रवाह, ऊष्मा संचरण कहलाता है।

यह तीन विधियों से होता है-

1.

चालन :-

+

इस विधि में माध्यम के कण गति किए बिना ही ऊष्मा का स्थानांतरण करते हैं।

ठोसों में केवल चालन के द्वारा ही ऊष्मा स्थानांतरण होती है। चालन ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में संभव होता है। मर्करी में ऊष्मा स्थानांतरण चालन के द्वारा होता है।

चालन के दौरान माध्यम का तापमान भी बढ़ जाता है।

द्रव एवं गैस में भी चालन संभव है यदि इसमें ऊष्मा संचरण ऊपर से नीचे की तरफ हो।

स्थायी अवस्था में, ऊष्मा प्रवाह की दर H तापांतर (Tc - To) तथा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A के अनुक्रमानुपाती और छड़ की लम्बाई के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

|H = KA

L

यहाँ आनुपातिकता स्थिरांक K को पदार्थ की

ऊष्मा चालकता कहते हैं।

+

किसी पदार्थ के लिए K का मान जितना अधिक होता है उतनी ही शीघ्रता से वह ऊष्मा का चालन करता है।

ऊष्मीय चालकता गुणांक (K)-

यह पदार्थ की ऊष्मीय चालन क्षमता का मापन करता है।

वे पदार्थ जिनसे ऊष्मा का चालन शीघ्रता से होता है, ऊष्मा के चालक (Thermal Conductor) कहलाते हैं। इसके लिए ऊष्मीय चालकता गुणांक का मान बहुत ज्यादा होता है। उदाहरण- चाँदी, पीतल, धातुएँ, जल आदि ।

वे पदार्थ जिनसे ऊष्मा का प्रवाह बहुत कम होता है, ऊष्मा के कुचालक (thermal Insulator) कहलाते हैं। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाए जाते तथा ऊष्मीय चालकता गुणांक का मान भी कम होता है; उदाहरण- काँच, वायु, बर्फ तथा अधातुएँ। (अच्छे कुचालकों के लिए K का मान शून्य होता है।) एस्बेस्टॉस तथा एबोनाइट ऐसे पदार्थ हैं जिनसे ऊष्मा का प्रवाह बिल्कुल भी नहीं होता है, ये ऊष्मारोधी कहलाते हैं।

286

मानव शरीर ऊष्मा का दुर्बल चालक होता है। ऊष्मीय चालकता के कुछ क्रम:-

Korनयम

Kale Kpe Khe Kete Kenfen KungKau

2. संवहन [ Convection] संवहन द्रव एवं गैसों में होता है।

गर्म द्रव या गैसें हल्की होने के कारण ऊपर की ओर गति करती

हैं अर्थात् इस विधि में माध्यम के कण स्वयं गति करते हैं। संवहन में माध्यम के कणों की गति के लिए गुरुत्वीय प्रभाव भी सहायक होता है।

उदाहरण- पवनों की गति, पात्र में जल का गर्म होना, रोशनदान या वेंटिलेटर का कमरे की दीवारों में ऊपर की ओर बनाया जाना। 3. विकिरण :-

+

+

विकिरण के द्वारा माध्यम तथा माध्यम की अनुपस्थिति दोनों में ऊष्मीय स्थानांतरण संभव है।

ऊष्मीय विकिरणों के गुण प्रकाश जैसे ही होते हैं। उदाहरण- सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का स्थानांतरण विकिरण के रूप में, माइक्रोवेव ओवन में भोजन का गर्म होना।

ये ऊष्मीय विकिरण प्रकाश के समान ही परावर्तन, अपवर्तन, व्यतीकरण, ध्रुवण आदि गुण दर्शाते हैं।

अवस्था परिवर्तन

ऊष्मा अवशोषित कर या उत्सर्जित करके पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है।

ठोस पदार्थ के अणुओं में गतिज ऊर्जा न्यूनतम जबकि गैस के अणुओं में गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।

पदार्थ जब ऊष्मा अवशोषित करता है तो इसके अणु गतिशील होने लगते हैं।

गलन एवं हिमन [Melting and Freezing]

+

��ब पदार्थ की ठोस अवस्था द्रव अवस्था में रूपांतरित होती है तो उसे गलन कहते हैं तथा जिस निश्चित तापमान पर गलन की क्रिया होती है, गलनांक बिन्दु कहलाता है।

जब पदार्थ द्रव अवस्था से ठोस अवस्था में परिवर्तित होता है, तो इसे हिमन कहते हैं।

जिस तापमान पर हिमन क्रिया होती है, उसे हिमांक बिन्दु कहते हैं। ऐसे ठोस पदार्थ जो द्रव में बदलने पर आयतन में प्रसार दर्शाते हैं उनका गलनांक दाब बढ़ाने पर बढ़ जाता है; उदाहरण- मोम |

ऐसे ठोस जो द्रव में बदलने पर आयतन में कमी दर्शाते हैं इनका गलनांक (Melting point) दाब बढ़ाने पर कम हो जाता है; जैसे बर्फ अर्थात् बाह्य दाब बढ़ाने पर बर्फ का गलनांक घट जाएगा व बर्फ आसानी से पिघलने लगती है।

क्वथन एवं संघनन [Boiling and Condensation]

जब पदार्थ की द्रव अवस्था गैस में बदलने लगती है तो इसे क्वथन कहते हैं तथा जिस निश्चित तापमान पर यह क्रिया होती है, उसे क्वथनांक बिन्दु कहते हैं।

जब पदार्थ की गैसीय अवस्था द्रव अवस्था में परिवर्तित होती है, उसे संघनन कहते हैं तथा जिस तापमान पर गैस पुनः द्रव में बदलती है, उसे द्रवांक या द्रवणांक बिन्दु कहते हैं। उदाहरण- गर्म संतृप्त वायु ठण्डी होने पर संघनन के द्वारा बादल बनाती है।

बाह्य दाब बढ़ाने पर क्वथनांक बढ़ जाता है; उदाहरण- प्रेशर कुकर ।

वाष्पीकरण [Vaporization]

उत्कर्ष प्रकाश

• जब क्वथनांक बिन्दु से कम तापमान पर द्रव गर्म होकर गैस में बदलने लगे तो इसे वाष्पीकरण कहते हैं।

तापीय साम्यावस्था दो वस्तुओं या किसी वस्तु व वातावरण के तापमानों में अंतर होने पर ऊष्मा का प्रवाह गर्म वस्तु से ठण्डी वस्तु की

और तब तक होता रहता है जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापमान समान न हो जाए इसे ही तापीय साम्यावस्था कहा जाता है।

ऊर्ध्वपातन [Sublimation]

जब कोई ठोस, द्रव में बदले बिना सीधे ही वाष्प में परिवर्तित हो जाता है तो यह घटना ऊर्ध्वपातन कहलाती है।

उदा. नौसादर, कपूर

किरचॉफ का नियम (kirchhoff's law):-

+

वह वस्तु जो ऊष्मा की अच्छी अवशोषक होती है वह ऊष्मा की अच्छी उत्सर्जक भी होती है। उदाहरण भैंस को गर्मी में ज्यादा गर्मी लगती है एवं सर्दी में ज्यादा ठण्ड लगती है।

रोटी बनाने के लिए तवे काले बनाए जाते हैं।

घनत्व (Density):-

भौतिकी में किसी पदार्थ के इकाई आयतन में निहित द्रव्यमान को उस पदार्थ का घनत्व कहते हैं। इसे p या d से निरूपित करते हैं।

घनत्व (d) =

द्रव्यमान (m)

आयतन (v)

घनत्व की इकाई किग्रा प्रति घन मीटर होती है।

आपेक्षिक घनत्व एक शुद्ध संख्या है। इसका कोई मात्रक नहीं होता है।

आपेक्षिक घनत्व

वस्तु का घनत्व

4°C पर पानी का घनत्व

जल का सर्वाधिक घनत्व 4°C ताप पर निर्भर होता है।

केशिकत्व [Capillary Action ]

+

केशिका नली काँच की एक पारदर्शी नलिका होती है जिसका व्यास बहुत कम होता है।

केशिका नली में द्रव के ऊपर चढ़ने एवं नीचे उतरने की घटना 'केशिकत्व' कहलाती है।

वह द्रव जो काँच को गीला कर देता है वह केशिका नली में ऊपर चढ़ता है; जैसे पानी

जो द्रव काँच को गीला नहीं करता है वह केशिका नली में नीचे उतरता है; जैसे पारा

केशिकत्व की घटना केशिका नली की त्रिज्या पर निर्भर करती है। जूरिन का नियम-

इस नियम के अनुसार केशिकत्व की घटना में दिए गए द्रव व ठोस के लिए किसी विशेष स्थान पर 1 / अर्थात् त्रिज्या कम होने पर द्रव, केशनली में अधिक ऊपर जाएगा व त्रिज्या अधिक होने पर द्रव केशनली में कम ऊँचाई तक जाएगा।

अर्थात् यह नियम केशिकत्व से संबंधित है।

केशिकत्व की घटना ससंजक बल के कारण होती है। केशिकत्व के उदाहरण-

1. लालटेन, दीपक में तेल, केरोसीन का ऊपर चढ़ना।

2. तौलिये का एक किनारा पानी में डूबाकर रखने से कुछ समय में पूरे तौलिये का गिला हो जाना।

3. कागज / अखबार पर गिरी स्याही की बूँद का फैल जाना।

4 वर्षा होने पर किसान द्वारा खेत की जुताई करना ।

5. पेड़-पौधों में पानी, खाद आदि का जड़ों से पत्तियों तक पहुँचना । श्यानता (Viscosity)-

तरल पदार्थ की दो क्रमागत परतों के मध्य लगने वाला बल जो आपेक्षिक गति का विरोध करता है, 'श्यान बल' कहलाता है तथा पदार्थों का यह गुण 'श्यानता' कहलाता है।

श्यानता केवल द्रव एवं गैसों का गुण होता है।

गैसों को गर्म करने से उनकी श्यानता बढ़ती है।

जल का न्यूनतम आयतन 4°C ताप पर निर्भर होता है।

पृष्ठ तनाव (Surface Tension)-

ठोस की श्यानता शून्य होती है।

द्रव की स्वतंत्र सतह कम से कम क्षेत्रफल प्राप्त करने का प्रयास करती है जिससे वह हमेशा तनाव में रहती है, इसे ही 'पृष्ठ तनाव' कहते हैं।

+

द्रव की श्यानता सर्वाधिक होती है।

एक आदर्श तरल की श्यानता शून्य होती है।

+

गैस की श्यानता न्यूनतम होती है।

पृष्ठ तनाव की घटना ससंजक बल के कारण उत्पन्न होती है।

+

द्रव को गर्म करने से उसकी श्यानता कम होती है।

पृष्ठ तनाव एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।

बल

पृष्ठ तनाव

लंबाई

पृष्ठ तनाव का मात्रक =

न्यूटन

मीटर

+

ताप बढ़ाने से पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।

पृष्ठ तनाव के उदाहरण-

1. बरसात की बूँद का गोल होना।

2. गर्म सूप का स्वादिष्ट लगना ।

3. पृष्ठ तनाव के कारण ही बहुत पतली सूई को पानी पर तैराया जा सकता है।

4. फव्वारों से ठंडक लगना।

5. साबुन के बुलबुले का सामान्य पानी के बुलबुले से बड़ा बनना।

6. शेविंग ब्रश को पानी से निकालने पर उसके रोएँ का चिपकना ।

7. पानी में केरोसीन के छिड़काव से मच्छर के लार्वा का नष्ट होना।

8. कपूर के टुकड़े का पानी की सतह पर उछलना ।

9. साबुन / अपमार्जक की सहायता से कपड़ों का आसानी से साफ होना।

श्यानता का मात्रक पॉइज है।

श्यानता के उदाहरण-

1. फर्श पर बहते हुए पानी का रुक जाना।

2. बाल्टी / गिलास में पानी को हिलाकर छोड़ने के पश्चात् श्यानता के कारण ही पानी रुक जाता है।

3. पानी की श्यानता गैसों से अधिक होती है इसलिए पानी में चलना हवा की तुलना में मुश्किल होता है।

000

तरंग एवं ध्वनि

तरंग (Wave)

ये एक प्रकार का विक्षोभ है जो किसी निकाय/ माध्यम की साम्यावस्था में विचलन उत्पन्न कर देती है।

287,

उत्कर्ष प्रकाशन

तरंग अपनी गति के दौरान ऊर्जा व संवेग का भी वहन करती है।

जब तरंग किसी माध्यम में गति करती है तो माध्यम के कण अपनी माध्य अवस्था के इर्द-गिर्द कम्पन करते हैं, हालांकि इनमें स्थायी विस्थापन नहीं होता है।

किसी एक माध्यम में तरंग की चाल नियत बनी रहती है।

तरंग संचरण के लिए माध्यम प्रत्यास्थ (Elastic) हो तथा इसमें जड़त्व (Inertia) होना चाहिए।

माध्यम का घनत्व एक समान होना चाहिए।

माध्यम के कणों में घर्षण (Fraction) कम होना चाहिए।

+

+

+

तरंगों का वर्गीकरण :-

I.

माध्यम की आवश्यकता के आधार पर -

A. यांत्रिक तरंगें [Mechanical Waves] - ये केवल किसी माध्यम में ही उत्पन्न की जा सकती है; जैसे ध्वनि तरंगें । B. विद्युत चुम्बकीय तरंगें [Electro magnetic Waves]- इन तरंगों के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है; जैसे- ���क्स-रे, प्रकाश, UV Rays आदि।

II तरंग गति व माध्यम के कणों के कम्पन के आधार पर - A. अनुप्रस्थ तरंगें [Transverse Waves] माध्यम के कणों में कम्पन व तरंग की गति एक-दूसरे के लम्बवत् (Perpendicular) होती है ये तरंगें ठोस माध्यम में तथा द्रवों की सतह पर उत्पन्न होती हैं; उदाहरण- रस्सी में उत्पन्न तरंगें, जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें।

B. अनुदैर्ध्य तरंगें [longitudinal waves] माध्यम के कणों में कम्पन व तरंग की गति एक-दूसरे के अनुदिश होती है। ये तरंगें ठोस, द्रव व गैस तीनों माध्यम से उत्पन्न होती हैं; उदाहरण- वायु में ध्वनि तरंगें ऑर्गन पाइप इत्यादि

नोट- वायु / गैस में उत्पन्न ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जबकि ठोस द्रवों में ये ध्वनि तरंगें अनुप्रस्थ व अनुदैर्ध्य दोनों हो सकती हैं।

III. ऊर्जा संचरण के आधार पर

-

A. प्रगामी तरंगें ये तरंग माध्यम में एक नियत वेग से आगे बढ़ती है। ये तरंगें माध्यम में ऊर्जा संचरित करती हैं; जैसे ध्वनि और प्रकाश तरंगें।

B. अप्रगामी तरंगें यह तरंगें माध्यम में दो सीमाओं के मध्य नियत

रहती हैं। इन तरंगों के द्वारा ऊर्जा का संचरण नहीं होता है; उदाहरण:- डोरी में तरंग, ऑर्गन पाइप में तरंग |

तरंगों के आधारभूत घटक :-

I.

आयाम [Amplitude]

• तरंग गति के दौरान माध्य अवस्था से माध्यम के कणों का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है।

• यदि ध्वनि का आयाम अधिक है तो ऐसी ध्वनि की तीव्रता (Intensity) भी अधिक होगी तथा ये दूर तक सुनाई देगी।

II आवृत्ति (Frenquency ]

• किसी बिंदु से प्रति सेकण्ड गुजरने वाली तरंगों की संख्या, तरंग की आवृत्ति कहलाती है।

• जिस ध्वनि तरंग की आवृत्ति ज्यादा होती है वह ध्वनि तरंग उतनी ही तीक्ष्ण (Sharp) होती है।

III. तरंग लम्बाई (Wave length]

• तरंगदैर्ध्य का SI मात्रक मीटर होता है।

nc

n = c 2

आवृत्ति = प्रकाश का ग ध्वनि

ये एक प्रकार की यांत्रिक तरंगें हैं जो किसी माध्यम से ही गति कर सकती हैं, निर्वात में नहीं।

तरंग आवृत्ति के आधार पर ध्वनि तरंगें 3 प्रकार की होती हैं-

I.

श्रव्य तरंगें [Audible Waves]

इनकी आवृत्ति 20 Hz से 20,000 Hz तक होती है।

मनुष्य का कान केवल इन्हीं तरंगों को सुन पाता है।

II. अपश्रव्य तरंगें [Infrasonic Waves]

.

.

इनकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है।

अपश्रव्य तरंगें भूकंप की मुख्य प्रघाती तरंगों से पहले उत्पन्न होती हैं।

कुछ कीट, कुत्ते आदि इन तरंगों का अनुभव कर सकते हैं। III. पराश्रव्य तरंग [Ultrasonic Waves]

.

.

.

इनकी आवृत्ति 20000 Hz से अधिक होती है।

इन तरंगों का प्रयोग गर्भस्थ शिशु की जाँच करने में किया जाता है। इन तरंगों का प्रयोग कीटों / मच्छरों आदि को भगाने या मारने में किया जाता है।

औद्योगिक इकाइयों में चिमनी में जमा हुए कार्बन को हटाने में इनका प्रयोग किया जाता है।

अँधेरे में उड़ते समय चमगादड़ इन्हीं तरंगों का उत्पादन करता है तथा परावर्तित किरणों की सहायता से रास्ते में अवरोध का पता लगाता है।

पनडुब्बी (Submarine) के मार्ग में उपस्थित अवरोध या किसी अन्य पनडुब्बी की स्थिति व उसकी गति आदि की जानकारी के लिए SONAR (Sound Navigation and Ranging) का प्रयोग करते हैं, ये पराश्रव्य तरंगें उत्पन्न करता है।

ध्वनि के अभिलक्षण / गुण :-

I.

तीव्रता [Intensity]

यह ध्वनि तरंग का वह गुण है जिससे यह पता चलता है कि ध्वनि कितनी तेज़ है।

ऐसी ध्वनि जिसकी तीव्रता अधिक हो वह ज्यादा दूर तक सुनाई देती है। बड़े आकार के स्रोतों से उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता भी अधिक होती है; जैसे- शेर की दहाड़ की तीव्रता अधिक होती है तथा मच्छर से उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता कम होती है।

तीव्रता का व्यावहारिक मात्रक डेसीबल (dB) होता है।

1dB= 1B (बेल)

10

सामान्य बातचीत में ध्वनि की तीव्रता 30 से 60dB होती है।

85dB से अधिक तीव्रता की ध्वनि शोर (Noise) होती है।

II पिच / तारत्व / तीक्ष्णता:-

ध्वनि का वह गुण जो ध्वनि के मोटा या पतला होने के बारे में बताता है। ऐसी ध्वनि जिसकी आवृत्ति अधिक हो वह ध्वनि पतली, अधिक तीक्ष्ण व उच्च तारत्व वाली होती है।

.

आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज होता है।

+

• किसी एक तरंग की लम्बाई, तरंग आवृत्ति के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

इसे 2 से प्रदर्शित करते हैं।

स्त्रियों की ध्वनि पुरुषों की तुलना में अधिक तारत्व वाली होती है।

288

मच्छर की ध्वनि का तारत्व शेर की दहाड़ से ज्यादा होता है।

में

III. गुणवत्ता [Quality]

+

उत्कर्ष प्रकाश

ये ध्वनि की तीव्रता व तीक्ष्णता के मिश्रित प्रभाव से बना गुण है जिसकी सहायता से हम ध्वनि की पहचान करते हैं।

नोट :-

+

मनुष्य को सुनाई देने के लिए ध्वनि तरंग की निम्नतम तीव्रता को 'देहली तीव्रता' कहते हैं।

मनुष्य के लिए देहली तीव्रता 0 डेसीबल होती है।

WHO के अनुसार 85 डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि 'शोर' कहलाती है।

माध्यम में ध्वनि का संचरण उसके प्रत्यास्थता, घनत्व, ताप आदि पर भी निर्भर करता है।

ध्वनि पर माध्यम का प्रभाव जिस माध्यम की प्रत्यास्थता अधिक होगी, उस ध्वनि का वेग भी अधिक होगा। यही कारण है कि ठोस माध्यम में ध्वनि का वेग अधिकतम व गैसों में न्यूनतम होता है। Vate Vor Vite

ध्वनि पर तापमान का प्रभाव तापमान बढ़ने के साथ ध्वनि की चाल भी बढ़ती है।

(i) ध्वनि का वेग ताप के वर्ग मूल के समानुपाती होता है। vaVT

(ii) t°C ताप पर ध्वनि का वेग

Note:

Ve = [Vo + 0.61t°C] m/s

न्यूटन ने वायु में ध्वनि के संचरण को 'समतापीय प्रक्रम' माना लेकिन लाप्लास ने न्यूटन के कथन में संशोधन किया और बताया कि वायु में ध्वनि का संचरण 'रूद्धोष्म प्रक्रम' होता है।

ध्वनि पर दाब का प्रभाव यदि तापमान नियत रहे तो दाब में परिवर्तन से ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

ध्वनि पर घनत्व का प्रभाव-माध्यम का घनत्व बढ़ने पर ध्वनि की चाल कम हो जाती है। बारिश होने के बाद जब वायुमण्डल में आर्द्रता बढ़ती है तो घनत्व में कमी आती है जिससे ध्वनि की चाल बढ़ जाती है इसलिए बारिश के मौसम में दूर की ध्वनि भी सुनाई देती है।

1

'घनत्व

1

ध्वनि पर गैस के अणुभार का प्रभाव भारी गैसों में ध्वनि की चाल कम होती है जबकि हल्की गैसों में ध्वनि की चाल अधिक होती है।

Vorft OC

1

गैस का अणुभार

ध्वनि तरंगों का परावर्तन एवं प्रतिध्वनि :-

+ प्रकाश के समान ध्वनि में भी परावर्तन की क्रिया होती है हालाँकि ध्वनि तरंगों का परावर्तन बड़े आकार के ठोस अवरोधकों जैसे बड़े आकार के पहाड़ों में स्पष्ट रूप में होता है।

+

जब किसी अवरोधक से परावर्तित ध्वनि हमें पुन: सुनाई देती है तो इसे प्रतिध्वनि कहते हैं।

मनुष्य के कर्ण व मस्तिष्क पर ध्वनि का प्रभाव 1 सेकण्ड तक रहता

है, इस दौरान समान प्रकृति की ध्वनि उत्पन्न की जाए तो दोनों ध्वनियों को अलग-अलग नहीं सुन पाते हैं।

यदि मनुष्य प्रतिध्वनि को स्पष्ट सुनना चाहे तो परावर्तक पृष्ठ उसमें कम से कम 17 मीटर (लगभग) की दूरी पर होना चाहिए।

ध्वनि का बहुल परावर्तन :-

• जब ध्वनि तरंगें परावर्तक पृष्ठ से बार-बार परावर्तित होती हैं तो परिणामी ध्वनि तरंग की तीव्रता बहुत ज्यादा हो जाती है जिससे ध्वनि तेज सुनाई देती है ये ध्वनि के बहुल परावर्तन के कारण होता है; उदाहरण- शहनाई, स्टेथोस्कोप ।

अनुरणन काल [Reverberation Period]

किसी कक्ष में प्रतिध्वनि जितने समय गूँजती है, अनुरणन काल कहलाता है।

अच्छे ऑडिटोरियम में अनुरणन काल बहुत कम होता है।

ध्वनि प्रदूषण

मैक संख्यास्तु की पाल

=

ध्वनि की चाल

वर्ष 1987 में भारत सरकार ने वायु प्रदूषण अधिनियम में संशोधन किया तथा 'तेज ध्वनि / शोर' (80 dB / डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि) को भी प्रदूषण के रूप में वर्गीकृत किया गया तथा इसे अधिनियम के अंतर्गत 'ध्वनि प्रदूषण' के रूप में परिभाषित किया।

वर्ष 2000 में 'ध्वनि प्रदूषण अधिनियम पारित किया गया। ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण हेतु सरकार ने आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक क्षेत्रों तथा औद्योगिक क्षेत्रों का वर्गीकरण करते हुए अधिकतम ध्वनि स्तर का निर्धारण किया है।

किसी वस्तु से उत्पन्न होने वाली सामान्य आवाज़ को ध्वनि कहा जाता है जब ध्वनि की तीव्रता अधिक हो तथा सुनने वाले के लिए रुचिकर न हो, तो उसे शोर कहा जाता है; जैसे उद्योगों का शोर, पत्थरों को काटना, तेज़ चिल्लाना, वाहनों का शोर आदि।

यदि मनुष्य तीव्र ध्वनि (85 डेसीबल) के संपर्क में लगातार रहे तो मनुष्य के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव देखे जाते हैं; जैसे- श्रवण क्षमता में कमी, मानसिक अवसादन, चिड़चिड़ापन आदि ।

समुद्री ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव समुद्री व्हेल पर पड़ता है। के कान 20 Hz से 20000 Hz तक सुन सकते हैं, इसे मनुष्य मनुष्य का श्रव्य परास कहते हैं।

ध्वनि प्रदूषण का निस्तारण या नियंत्रण :-

1. कारखानों में होने वाले शोर को नियंत्रित किया जाना चाहिए तथा उद्योग और कारखानों की अवस्थिति शहर से बाहर होनी चाहिए। 2. हवाई अड्डे भी शहर से दूर होने चाहिए।

3. ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सघन वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

4. लाउडस्पीकरों तथा जनरेटरों के प्रयोग बन्द किए जाने चाहिए। 5. ध्वनि प्रदूषण के प्रति जनचेतना उत्पन्न की जानी चाहिए। 6. 'ग्रीन मफलर' अर्थात् राजमार्गों के दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण। इससे भी ध्वनि प्रदूषण कम होता है।

7. औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों को ध्वनि प्रदूषण से बचाने हेतु कर्ण पट्ट्, Ear muffs का प्रयोग करना चाहिए।

8. वे कार्यस्थल जहाँ अधिक ध्वनि उत्पन्न होती हो वहाँ की दीवारों का निर्माण ध्वनि अवशोषक पदार्थों द्वारा करना चाहिए।

डॉप्लर प्रभाव (Doppler's Effect) -

जब स्रोत एवं स्रोत के मध्य सापेक्षिक गति होती है तो बदली हुई। आवृत्ति (Frequency) की ध्वनी सुनाई देने की घटना, डॉप्लर प्रभाव कहलाती है।

जब स्रोत एवं स्रोता के मध्य दूरी बढ़ती जाती है तो कम आवृत्ति की ध्वनि सुनाई देती है जबकि स्रोत एवं स्रोता के मध्य दूरी कम होने पर अधिक आवृति की ध्वनि सुनाई देती है।

289

+

उत्कर्ष प्रकाशन

नोट :- डॉप्लर प्रभाव के कारण प्लेटफॉर्म पर खड़े व्यक्ति को पास आते इंजन की बढ़ती हुई आवृत्ति की ध्वनि सुनाई देती है।

ध्वनि का व्यतिकरण (Interference of sound):

जब समान आवृत्ति की दो तरंगें किसी माध्यम में एक ही दिशा में गमन करती हैं, तो उनके अध्यारोपण के कारण किसी बिन्दु पर ध्वनि की तीव्रता अधिकतम एवं किसी अन्य बिन्दु पर तीव्रता न्यूनतम प्राप्त होती है इस घटना को ध्वनि का व्यतिकरण कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है

1.

2.

संपोषी व्यतिकरण (Construetive interference)- जब दो ध्वनि तरंगें माध्यम में किसी बिन्दु पर समान कला में अध्यारोपित होती है तो उस बिंदु पर ध्वनि की तीव्रता अधिकतम हो जाती है, जिसे संपोषी व्यतिकरण कहा जाता है। विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)- जब दो ध्वनि तरंगें माध्यम में किसी बिंदु पर विपरीत कला में अध्यारोपित होती है, तो उस बिंदु पर ध्वनि की तीव्रता निम्नतम (न्यूनतम) हो जाती है, जिसे विनाशी व्यतिकरण कहा जाता है।

विद्युत धारा

विद्युतधारा आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।

-

-

स्थिर विद्युत घर्षण से प्राप्त विद्युत को घर्षण विद्युत या स्थिर विद्युत कहा जाता है।

विभवान्तर:-

एकांक आवेश को विद्युत क्षेत्र में एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किया गया कार्य विभवान्तर कहलाता है। किया गया (w) (4)

विभवान्तर =

इसका मात्रक जूल / कूलॉम या वोल्ट होता है। 1 atez = जून

विद्युत धारिता:-

कूलप

किसी चालक को आवेश देने पर उसके विभव में एकांक वृद्धि होती है, उस आवेश को ही उस चालक की धारिता कहते हैं।

q आवेश देने से चालक की वोल्टता v में वृद्धि होती है, तो इसकी धारिता (c) होगी।

4 c=

V

विद्युत धारिता का मात्रक 'फैरड' है।

चालक की धारिता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है-

i) चालक के पृष्ठ क्षेत्रफल पर

ii) चालक के चारों ओर के माध्यम पर।

iii) आस-पास में अन्य चालकों की उपस्थिति पर

ओम का नियम:-

स्थिर तापमान पर, चालक के सिरों के मध्य विभवान्तर, प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के समानुपाती होता है। V* I याV=RI

R यहाँ प्रतिरोध नियतांक है।

स्थिर वैद्युतिकी भौतिकी विज्ञान की एक शाखा है, जिसमें किसी वस्तु प्रतिरोध:- पर स्थित स्थिर आवेशों का अध्ययन किया जाता है।

किसी चालक के अनुप्रस्थ काट में इकाई समय में आवेश प्रवाह की दर को धारा-1 से व्यक्त किया जाता है।

1=

विद्युत आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है।

1 इलेक्ट्रॉन 1.6x10-19C

विद्युत धारा का मात्रक एम्पीयर (A) होता है।

परिपथ की विद्युत धारा मापने के लिए अमीटर का उपयोग करते हैं एवं इसे सदा परिपथ में श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं।

चालक का वह गुण जो प्रवाहित होने वाली धारा का विरोध करे, प्रतिरोध कहलाता है।

प्रतिरोध का कारण, चालक में गतिशील इलेक्ट्रॉन अपने मार्ग में आने वाले इलेक्ट्रॉनों, परमाणुओं एवं आयनों से निरन्तर टकराते रहते हैं, जिसके फलस्वरूप प्रतिरोध होता है।

प्रतिरोध =

विभवान्तर V धारा 1

प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है, जिसका स��केत ( 52 ) है।

प्रतिरोध की निर्भरता :-

+

परिपथ में विद्युत धारा धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर प्रवाहित होती है। यदि किसी परिपथ में धारा का प्रवाह सदैव एक ही दिशा में होता रहता है, तो हम इसे दिष्ट धारा (Direct Current) कहते हैं। यदि धारा का प्रवाह एकांतर क्रम में समानान्तर रूप से आगे और पीछे होता हो, तो ऐसी धारा को प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current- A. C) कहते हैं।

लंबाई पर तार की लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।

अनुप्रस्थ काट

Rel

(i)

अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल या मोटाई बढ़ने पर प्रतिरोध का मान घटता है।

R

(ii)

समीकरण (i) व (ii) से :-

1

Roc

A

R=PA

290

विशिष्ट प्रतिरोध:-

+

+

उत्कर्ष प्रकाश

इसे विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं विशिष्ट प्रतिरोध वह मान है, जहाँ प्रतिरोध का मान स्थिर कर दिया जाता हैं।

यदि तार की लंबाई 1 मीटर व क्षेत्रफल 1m' हो तो प्रतिरोध का मान विशिष्ट प्रतिरोध के तुल्य होगा।

R=P

नोट- घरों में मोटे तारों का उपयोग किया जाता है क्योंकि मोटे तार प्रतिरोध कम करते हैं, जिससे धारा आसानी से प्रवाहित हो सके। प्रतिरोधों का संयोजन :-

1. श्रेणीक्रम-

तीन चालक तार लेते हैं जिनके प्रतिरोध क्रमश: R1 R2 एवं R3 है और प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं।

विद्युत धारा का मान सभी प्रतिरोधों में समान, लेकिन विभवांतर का मान अलग-अलग होता है।

+

तीनों प्रतिरोधों का कुल विभवान्तर VV+V2+V3 [V=IR] IR = IR1 + IR2 + IR3

IR = 1 [R + R2 + Rs]

R = R1 R2+ Ra

श्रेणीक्रम संयोजन

2.

फ्यूज तार, अमीटर, सेल तथा स्विच श्रेणीक्रम में जोड़े जाते हैं। आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है।

नोट:- श्रेणीक्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध का मान सबसे अधिकतम होता है, जो प्रतिरोध से भी अधिकतम प्राप्त होता है।

समान्तर क्रम या पार्श्व क्रम-

तीन चालक तार लेते हैं जिनके प्रतिरोध क्रमश: R1 R2 एवं R3 है और प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में संयोजित करते हैं।

विद्युत धारा का मान अलग-अलग परंतु विभवांतर का मान समान होता है।

V V V V

परिपथ में कुल धारा (1)=== +

V

=V

R

11 1

+

R R1 R2 R3

1 1 1 1

-+- = ==+

Ra Ra Ra

2

R

R1 R2

Ra

R

291

समांतर क्रम संयोजन

वोल्टमीटर तथा घरों के परिपथ समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं, क्योंकि समान्तर क्रम में जोड़ने से प्रतिरोध का मान न्यूनतम होता है, जिससे विद्युत धारा का प्रवाह आसानी से होता है।

वोल्ट मापने के लिए प्रतिरोध (R) का मान उच्च होना चाहिए, क्योंकि प्रतिरोध का मान उच्च होने से दो बिन्दुओं के विभव में अंतर होगा। नोट:- समांतर क्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध का मान सबसे न्यूनतम होता है, जो प्रतिरोध से भी न्यूनतम प्राप्त होता है। घरेलू वायरिंग में

नोट :

܀

लाल रंग का तार Live wire या phase विद्युन्मय तार कहलाता है, जिसे फ्यूज या स्विच से जोड़ते हैं।

काले रंग का तार उदासीन तार कहलाता है, जो कि मीटर में जोड़ा जाता है।

हरा तार अर्थ / भूसंपर्कित होता है।

श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोध तारों का तुल्य प्रतिरोध उनके प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है। यदि R1 R2 Rn प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़े जाए तो तुल्य प्रतिरोध RR + R2 + R3 + ......

+ Rn होगा।

यदि R1 R2.

Rn प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में जोड़ दिया

1 1 1

R

जाए तो

=

+

R1 R2

1

.+

Rn

फ्यूज तार या MCB हमेशा श्रेणी क्रम में जोड़ी जाती है। रोड लाइट्स समांतर क्रम में जोड़ी जाती हैं।

घरों में 220-240 v बिजली आती है, जिसकी आवृत्ति 50 Hz होती है।

विद्युत सेल (बैटरी) :-

सेल का आविष्कार 'एलसेण्ड्रो वोल्टा' ने किया। प्राथमिक सेल :-

+ ये सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं। प्राथमिक सेल चार्ज नहीं किए जा सकते हैं, अतः ये अनुत्क्रमणीय होते हैं; उदाहरण- प्राथमिक क्षारीय सेल, शुष्क सेल, लेक्लांशी सेल, वोल्टा सेल आदि।

वोल्टीय सेल :- इसमें ताँबे के छड़ को एनोड तथा जस्ते की छड़ को कैथोड कहते हैं। यह दोनों छड़ें सल्फ्यूरिक अम्ल में डूबी हुई रहती हैं।

लेक्लांशी सेल :- इसमें एनोड के लिए कार्बन की छड़ तथा कैथोड के लिए जस्ते की छड़ होती है तथा यह दोनों छड़ें अमोनियम क्लोराइड के संतृप्त विलयन में रखी हुई होती हैं।

शुष्क सेल: कार्बन की छड़ एनोड का कार्य जबकि स्वयं जस्ते का बर्तन कैथोड का कार्य करता है। इसमें मैंगनीज डाईऑक्साइड, अमोनियम क्लोराइड, कार्बन आदि का मिश्रण भरा होता है।

द्वितीयक सेल :-

द्वितीयक सेल विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में तथा रासायनिक ऊर्जा को पुनः विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।

द्वितीयक सेल चार्ज किए जा सकते हैं, ये उत्क्रमणीय होते हैं। उदाहरण- सीसा संचायक सेल या लौह निकल सेल ।

उत्कर्ष प्रकाशन

सीसा संचायक सेल में लिधार्ज या लेड ऑक्साइड (PbO) तथा सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4 ) का प्रयोग करते हैं।

इन सेलों में कैथोड के रूप में Pb का उपयोग व एनोड के रूप में (PbO) लैड ऑक्साइड का प्रयोग करते हैं।

विद्युत शक्ति / सामर्थ्य (Electric Power ) :-

विद्युत परिपथ में ऊर्जा के क्षय होने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक वॉट है, इसके अन्य बड़े मात्रक किलोवॉट व मेगावॉट

होते हैं।

विद्युत खर्च :-

+

+

विद्युत शक्ति (P)= धारा (I) x विभवान्तर (V) वॉट एम्पीयर x वोल्ट

किलोवॉट घंटा अथवा 1 यूनिट विद्युत ऊर्जा की वह मात्रा है, जो किसी परिपथ में 1 घंटे में व्यय होती है।

यूनिट या किलोवॉट घण्टा (K.W.H)-

वाट x समय (घण्टों में)

1000

1 K.W.H = 3.6 x 105 जूल 1 Horse Power = 746 az

प्रत्यावर्ती धारा व दिष्टधारा में अन्तर -

AC प्रत्यावर्ती धारा

(Alternating Current) समय के साथ दिशा बदलती है।

ट्रांसफॉर्मर में काम आती है। बैटरी चार्ज नहीं कर सकते हैं। इसकी आवृत्ति छोटी होती है, क्योंकि ये दिशा बदल सकती है। 50Hz होती है।

DC दिष्टधारा

(Direct current) समय के साथ दिशा नहीं बदलती एक समान रहती है।

ट्रांसफॉर्मर में काम नहीं आती है। बैटरी चार्ज कर सकते हैं। इसकी आवृत्ति 'शून्य हर्ट्ज' होती

है ।

B. अस्थायी चुम्बकः-

+

इस प्रका�� की चुम्बक, चुम्बकीय गुण तब ही प्रदर्शित करती है जब तक उस पर कोई बाह्य बल कार्य करता है। जैसे ही इस बाह्य बल को हटा दिया जाए तो चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाते हैं। यह म्यूमेंटल की बनी होती है।

चुम्बक द्वारा लौह इस्पात आदि धातुओं को अपनी ओर आकर्षित करने के गुण को चुम्बकत्व कहा जाता है।

|

चुम्बक के चुम्बकीय गुणों को नष्ट करने के सही तरीके :- अत्यधिक ताप देकर चुम्बकीय गुणों को नष्ट किया जा सकता है। • चुम्बक को पीटकर भी चुम्बकीय गुणों को नष्ट किया जा सकता है।

* लम्बे समय तक चुम्बक को खुला छोड़ने पर भी चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाते हैं।

चुम्बक के ध्रुव-

चुम्बक में दो ध्रुव पाए जाते हैं-

1. उत्तरी ध्रुव या धनात्मक ध्रुव

2. दक्षिणी ध्रुव या ऋणात्मक ध्रुव

चुम्बक के समान ध्रुवों के मध्य प्रतिकर्षण होता है तथा विपरीत ध्रुवों के मध्य आकर्षण होता है।

चुम्बक के ध्रुवों को पृथक नहीं किया जा सकता है।

विपरीत ध्रुवों के मध्य आकर्षण

goo

चुम्बकत्व

यह एक ऐसा पदार्थ है, जो लोहा, कोबाल्ट, निकल या उनके यौगिकों को आकर्षित करता है, चुम्बक कहलाता है। स्वतंत्रता पूर्वक किसी धागे से लटकाने पर ये उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित होती है। चुम्बक सदेव द्विध्रुव के रूप में अस्तित्व रखती है तथा एकल ध्रुव का अस्तित्व संभव नहीं है।

चुम्बक के प्रकार

1. प्राकृतिक चुम्बक

• मैग्नीशिया में ऐसे पत्थर की खोज हुई जो Ni, Co तथा Fe को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिसका नाम चुम्बक (Magnet) रखा गया। उदाहरण- Fe3O4

• प्राकृतिक चुम्बक का उपयोग दैनिक जीवन में नहीं होता है।

II. कृत्रिम चुम्बक

A. स्थायी चुम्बक:-

+

इस चुम्बक में लम्बे समय तक चुम्बकीय गुण पाए जाते हैं।

इसके चुम्बकीय गुणों को आसानी से नष्ट नहीं किया जा सकता है।

इसका उपयोग दैनिक जीवन में नहीं होता है।

चुम्बकीय पदार्थ :-

समान ध्रुवों के मध्य प्रतिकर्षण

किसी तत्त्व या पदार्थ में चुम्बकीय गुण उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन के चक्रण या घूर्णन गति के कारण होता है।

चुम्बकीय पदार्थों को तीन पदार्थों में विभाजित किया गया- (फैराडे के अनुसार)

A. अनुचुम्बकीय पदार्थ:-

+

इन्हें जब बाहरी चुम्बक क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में चुम्बकित हो जाते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक एवं कम होती है।

ये दुर्बल चुम्बकत्व का गुण दर्शाते हैं।

ताप बढ़ाने पर इन पदार्थों का चुम्बकत्व घटता है; उदाहरण- Na

Al, Mn, आदि।

: 292

उत्कर्ष प्रकाश

B. लोह चुम्बकीय पदार्थ:-

.

ये स्वयं चुम्बकत्व का गुण दर्शाते हैं बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की

उपस्थिति में प्रबल चुम्बकत्व इनमें उत्पन्न होता है, लौह चुम्बकीय

पदार्थ कहलाते हैं।

इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक एवं अधिक होती है।

ये पदार्थ क्यूरी नियम का पालन करते हैं।

इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप बढ़ाने पर कम तथा ताप घटाने पर अधिक हो जाती है; उदाहरण Fe, Co Ni, मैग्नेटाइट आदि । C. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ:-

वे पदार्थ, जो बाहरी क्षेत्र में स्वयं को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् व्यवस्थित करते हैं तथा इनमें चुम्बकत्व नहीं पाया जाता है, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति कम तथा ऋणात्मक होती है अर्थात्

इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर निर्भर नहीं करती है। उदाहरण- Zn, Cu, Ag, Au, NaCl आदि।

क्यूरीताप:-

वह ताप जिसके नीचे पदार्थ लौह चुम्बकीय तथा जिसके ऊपर अनुचुम्बकीय होता है पदार्थ का क्यूरीताप कहलाता है।

लौह के लिए = 770°C निकल 358°C

नोट:-

* पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण पृथ्वी के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, उसे भू-चुम्बकत्व कहते हैं।

+

ऑरस्टेड ने सर्वप्रथम बताया कि धारावाही चालक तार के आस- पास चुम्बकीय क्षेत्र पाया जाता है।

* फैराडे ने बताया कि चुम्बकीय क्षेत्र में रखी कुण्डली में गति होने से इस कुण्डली में धारा प्रवाहित होने लगती है।

* चुम्बकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर या टेस्ला मीटर तथा CGS मात्रक मैक्सवेल होता है। 1 वेबर 10 मैक्सवेल

चुम्बकीय बल रेखाएँ :-

+

किसी चुम्बक के चारों तरफ वह क्षेत्र जहाँ काल्पनिक रेखाएँ चुम्बकीय

क्षेत्र को दर्शाती हैं, वे चुम्बकीय बल रेखाएँ कहलाती हैं। चुम्बकीय बल रेखाएँ काल्पनिक होती हैं।

चुम्बकीय बल रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं।

चुम्बक के अंदर चुम्बकीय बल रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की तरफ गमन करती हैं।

चुम्बक के बाहर की तरफ चुम्बकीय बल रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की तरफ गमन करती हैं।

दो चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती, क्योंकि कटाव बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जाती हैं, जो कि संभव नहीं है।

पृथ्वी के दो ध्रुव होते हैं- उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव ।

चुम्बकीय क्षेत्र :-

+

चुम्बक

के चारों ओर का वह क्षेत्र, जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।

चुम्बकीय क्षेत्र सदिश राशि है।

चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला तथा C.GS. मात्रक गॉउस होता है। F=qVB Sine

q आवेश

V

वेग

B चुम्बकीय क्षेत्र

=

e = V तथा B के मध्य का कोण

यदि sine का मान 90° हो तो चुम्बकीय क्षेत्र का मान अधिकतम होगा (Fmax = qVB)

चुम्बकीय फ्लक्स (4 ) :-

+

समान चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या चुम्बकीय फ्लक्स कहलाती है।

चुम्बकीय फ्लक्स चुम्बकीय क्षेत्र क्षेत्रफल

=

4 = BA

⚫ = BA cose

यदि का मान 0 हो तो चुम्बकीय फ्लक्स का मान अधिकतम होगा। max = BA

यदि का मान 90 हो तो चुम्बकीय फ्लक्स का मान न्यूनतम होगा।

0

चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक :-

+

= 0

min

चुम्बक फ्लक्स का SI या MKS मात्रक वेबर होता है। चुम्बकीय फ्लक्स का CGS मात्रक मैक्सवेल होता है।

चुम्बकीय फ्लक्स प्रेरित धारा (1) के समानुपाती होता है। φαι

$ = LI

=

चुम्बकीय फ्लक्स

L प्रेरकत्व

1 = प्रेरित धारा

प्रेरकत्व (L) = गतिमान आवेश वाली कुण्डली को किसी अन्य कुण्डली के पास ले जाएँ तथा धारा में परिवर्तन करने पर दूसरी कुण्डली में स्वत: धारा उत्पन्न हो जाती है, जिसे प्रेरित धारा कहा जाता है। बैटरी के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर प्रेरित विभवान्तर कहलाता है तथा इस घटना को प्रेरण कहा जाता है तथा इस क्रिया को प्रेरकत्व कहा जाता है। इसका मात्रक हेनरी है।

फ्लेमिंग के नियम :-

वाम हस्त (Left hand) नियम :- इस नियम के अनुसार, अँगूठा प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा को बताता है, तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को तथा मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को बताता है। दक्षिण हस्त (Right hand) नियम: ये नियम प्रेरण के दौरान लागू होता है। इस नियम के अनुसार, अँगूठा प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा, तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को बताता है तथा मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को बताती है।

293

उत्कर्ष प्रकाशन

दक्षिण पेंच का नियम:- दक्षिणावर्त पेंच नियम के अनुसार यदि दक्षिणावर्त पेंच को इस प्रकार घुमाया जाए कि पेंच धारा की दिशा में आगे बढ़े, तो पेंच को घुमाने की दिशा, चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करेगी। विद्युत चुम्बकीय प्रेरण

फैराडे के नियम :-

फैराडे का प्रथम नियम:- जब किसी धारावाही चालक में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है तथा बैटरी के सिरों पर प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होगा।

फैराडे का दूसरा नियमः प्रेरित विद्युत वाहक बल चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।

E = (=LI)

E= d (LI)

dt E=L di

विद्युत धारा के प्रभाव:-

A. विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव:-

किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर चालक के चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है, जिसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।

इसे ऑरस्टेड ने प्रस्तुत किया था।

चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक टेस्ला व गॉउस होता है।

चालक या कुण्डली तथा चुंबक के बीच सापेक्ष गति के कारण चालक में विद्युत धारा का प्रवाह होना, विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहलाता है। विद्युत चुंबकीय प्रेरण को फैराडे ने प्रस्तुत किया।

विद्युत चुंबकीय प्रेरण में प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ व बाएँ हाथ के नियमानुसार दी जाती है, जिसके अनुसार-

तर्जनी- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा

मध्यमा विद्युत धारा की दिशा

अंगूठा प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा को बतलाएगा।

नोट :

चुम्बकीय क्षेत्र

प्रेरित विदुरवाक ल

(EMF)

विद्युतधारा

विद्युत रा

+

* माइक्रोफोन विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है। * लाउडस्पीकर माइक्रोफोन द्वारा प्रेषित विद्युत तरंगों को पुनः ध्वनि तरंगों में परिवर्तित किया जाता है।

* विद्युत मोटर चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा किसी चालक में उत्पन्न गति के सिद्धान्त पर कार्य करती है। विद्युत मोटर द्वारा विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है।

विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव:-

चालक तार से धारा प्रवाहित होने पर प्रतिरोध के कारण तार गर्म हो जाता है (आवेशों के आपस में टकराव के कारण ) ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न होता है।

ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित उपकरण:-

+

विद्युत हीटर, विद्युत प्रेस, बल्ब, ट्यूब लाइट आदि।

हीटर का तार नाइक्रोम का बना होता है, जिसका उच्च प्रतिरोध व उच्च गलनांक होता है।

विद्युत प्रेस में अभ्रक काम में ली जाती है, अभ्रक विद्युत का कुचालक होता है, परंतु ऊष्मा का सुचालक है।

ट्यूबलाइट / फ्लोरोसेन्ट लाइट / CFL (Compact Fluorescent lamp)- इसमें अक्रिय गैस ऑर्गन को कुछ पारे के साथ भरते हैं, दोनो��� सिरों पर बेरियम ऑक्साइड के तंतु लगे होते हैं।

ट्यूबलाइट की दीवारों पर प्रतिदीप्त पदार्थ का लेप चढ़ा होता है, जब विद्युत धारा इनमें बहती है तो इलेक्ट्रॉन ट्यूबलाइट में भरी गैस को आयनित कर देते हैं।

विद्युत उत्सर्जन से पराबैंगनी किरणें उत्पन्न होती हैं, जो कि प्रदीप्तिशील पदार्थ पर पड़ती है, तो वह चमक उठता है।

बल्ब में टंगस्टन का फिलामेण्ट लगा होता है, जिसका प्रतिरोध उच्च व गलनांक भी उच्च होता है।

विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव :-

शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है परंतु जब इसमें धातु के लवण, अम्ल या क्षार मिला दिए जाते हैं, तो ये विद्युत का सुचालक हो जाता है, ऐसे घोल में विद्युत धारा गुजर सकती है, विद्युत अपघट्य कहलाता है। जब इस घोल में विद्युतधारा प्रवाहित की जाती है तो विलयन का धनात्मक व ऋणात्मक आयनों में अपघटन हो जाता है, इस घटना को विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।

विद्युत धारा के प्रवेश के लिए एनोड (+) व बाहर निकलने के लिए कैथोड (-) लगे होते हैं।

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के अनुप्रयोग

विद्युत लेपन या कलई करना :-

इस प्रक्रिया में किसी धातु की पतली परत दूसरी धातु पर चढ़ाई जाती है। जिस धातु पर परत चढ़ानी है, उसे कैथोड तथा जिस धातु की परत चढ़ानी है उसे एनोड बना दिया जाता है।

दोनों इलेक्ट्रॉड्स को रासायनिक अपघट्य में डूबा दिया जाता है एवं विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे धातु एनोड से कैथोड पर चढ़ जाती है।

धातुओं का शुद्धीकरण:-

अशुद्ध धातु से एनोड व शुद्ध धातु से कैथोड बनाया जाता है।

अशुद्ध धातु का घोल विद्युत अपघटन के रूप में प्रयुक्त करते हैं तथा जैसे ही विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होने लगती है।

ट्रांसफॉर्मर :-

ट्रांसफॉर्मर की खोज माइकल फैराडे ने की थी।

ट्रांसफॉर्मर ऐसा उपकरण है जो प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति को परिवर्तित किए बिना उसे बढ़ा अथवा घटा सकता है।

ट्रांसफॉर्मर का उपयोग दिष्ट धारा उपकरण में किया जाता है। उदाहरण- बैटरी चार्जर आदि । ट्रांसफॉर्मर की सहायता से प्रत्यावर्ती धारा को लम्बी दूरी तक प्रवाहित कर सकते हैं।

ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करते हैं।

ट्रांसफॉर्मर (अन्योन्य प्रेरण), माइक्रोफोन, लाउडस्पीकर, विद्युत घंटी, विद्युत क्रेन, कृत्रिम पेसमेकर आदि विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करते हैं।

294

ट्रांसफॉर्मर दो प्रकार के होते हैं-

उत्कर्ष प्रकाश

1. उच्चायी ट्रांसफॉर्मर (Step up Transformer):-

2.

.

ये कम वोल्टेज को अधिक में बदलता है।

द्वितीयक कुंडली में घेरों की संख्या प्राथमिक कुंडली की तुलना में अधिक होती है।

अपचयी ट्रांसफॉर्मर (Step down Transformer):- ये अधिक वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदलने का कार्य करता है। इसमें प्राथमिक कुंडली में घेरों की संख्या अधिक होती है, जबकि द्वितीयक कुंडली में घेरों की संख्या कम होती है।

ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती धारा पर काम करते हैं। विद्युत मोटर :-

+

विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा किसी चालक में गति उत्पन्न की जा सकती है।

विद्युत मोटर में तार की एक कुण्डली होती है, जो आयताकार होती है, यह कुण्डली किसी आर्मेचर पर लिपटी रहती है। आर्मेचर चुम्बक के ध्रुवों के बीच धूरी पर घूर्णन करने के लिए स्वतंत्र होती है। कुण्डली में धारा प्रवाहित करने पर चुम्बकीय क्षेत्र कुण्डली की विपरीत भुजाओं को ऊपर तथा नीचे की ओर धकेल देती है इससे कुण्डली दक्षिणावर्त घूम जाती है लेकिन दिक् परिवर्तक ध्रुवता में कुण्डली के आधे घूर्णन के बाद परिवर्तन आ जाता है।

इस परिवर्तन के कारण अब भुजाओं पर लगने वाला बल उल्टा हो जाता है। इस प्रकार लगातार घूर्णन होते रहने से विद्युत मोटर गतिशील रहती है।

विद्युत जनरेटर :-

+

डायनेमो या जनरेटर एक ऐसा यंत्र है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है जब तारों की एक कुण्डली को स्थायी चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो उसमें प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है, यह बाह्य परिपथ प्रत्यावर्ती धारा में भेजता है।

प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर के सर्पी वलयों के स्थान पर विभक्त वलय प्रयुक्त किए जाएँ तो प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर, दिष्ट धारा जनरेटर में बदल जाता है यह बाह्य परिपथ में दिष्ट धारा भेजता है।

aan

प्रकाश

प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है, जो हमें वस्तुओं को देखने में मदद करता है। प्रकाश एक प्रकार की विकिरण ऊर्जा है, जो अन्य ऊर्जाओं की तरह नजर नहीं आती। अतः हम केवल उन वस्तुओं को ही देख पाते हैं, जिन पर प्रकाश ऊर्जा पड़ती है।

प्रकाश की प्रकृति के बारे में सर्वप्रथम 'डेकार्ट' ने बताया कि 'प्रकाश छोटी-छोटी द्रव्यमान विहीन कणिकाओं से मिलकर बना होता है'। डेकार्ट के बाद 'न्यूटन' ने भी प्रकाश को द्रव्यमान विहीन कणिकाओं से मिलकर बना माना तथा इसे सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे 'प्रकाश का कणिका सिद्धांत (Particle theory of light)' कहा गया। यंग तथा हाइगेन्स जैसे वैज्ञानिकों ने माना कि प्रकाश तरंगों के रूप में पाया जाता है, इसे प्रकाश का तरंग सिद्धांत (Wave theory of light) कहा गया।

वैज्ञानिक डी ब्रोगली ने प्रकाश के द्वैत सिद्धान्त को प्रस्तुत किया जिसके अनुसार प्रकाश कण व तरंग दोनों प्रकार से व्यवहार करता है। वर्तमान में प्रकाश के इस कण तरंग द्वैतवाद को क्वांटम यांत्रिकी में तरंग पैकेट (Wave-packet) द्वारा निरूपित किया जाता है।

प्रकाश का तरंग के रूप में

व्यवहार

1. परावर्तन

प्रकाश का कण के रूप में

व्यवहार

1.

प्रकाश विद्युत प्रभाव

3.

2. अपवर्तन ध्रुवण

2.

कॉम्पटन प्रभाव

3. रमन प्रभाव

4. व्यतिकरण

5. विवर्तन

प्रकाश तरंगों के गुण :-

+

+

प्रकाश की चाल निर्वात में सर्वाधिक 3x108 m/s होती है। विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भी अलग-अलग होती है। जिस माध्यम में प्रकाश की चाल अधिक हो, विरल माध्यम कहलाता है जबकि जिस माध्यम में प्रकाश की चाल कम ��ो, सघन माध्यम कहलाता है।

प्रकाश की चाल माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है।

जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होगा उसमें प्रकाश की चाल उतनी ही कम होती है।

प्रकाश सीधी रेखा में ही गमन करता है, जब तक कि उसके मार्ग में कोई अवरोधक न आए।

प्रकाश की चाल का सही क्रम

निर्वात गैस द्वय ठोस

दृश्य श्वेत प्रकाश किरण 7 घटक रंगों से मिलकर बनी होती है। [VIBGYOR] = बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल । किसी वस्तु को देखने के लिए 2 शर्तें पूरी होना आवश्यक है - (i) प्रकाश की उपस्थिति

(ii) प्रकाश तरंगों का वस्तु से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचना । प्रकाश का परावर्तन :-

आपतित किरण

अभिलम्ब

परावर्तित किरण

ziizr

परावर्तक

पृष्ठ

प्रकाश का परावर्तन

21=2

जब कोई प्रकाश किरण किसी माध्यम में गति करते हुए अपारदर्शक अवरोध (परावर्तक पृष्ठ) से टकराती है तो टकराने के बाद वह प्रकाश किरण उसी माध्यम में लौट जाती है, इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

माध्यम में परिवर्तन न होने से परावर्तन के बाद प्रकाश की चाल अपरिवर्तित रहती है।

नोट:-समतल दर्पण प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तक होता है। परावर्तन के नियम

+

i.

ii.

295)

प्रकाश का परावर्तन दो नियमों पर आधारित होता है-

आपतित प्रकाश किरण, अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण (r) तीनों एक ही तल में पाए जाते हैं।

आपतन कोण (Zi) एवं परावर्तन कोण (Zr) का मान सदैव बराबर होता है।

उत्कर्ष प्रकाशन

Zi=Zr

नोट : परावर्तित किरण की आवृत्ति एवं चाल अपरिवर्तित रहती है। प्रकाश के परावर्तन के प्रकार (Type of Reflection of light]

प्रकाश का परावर्तन दो प्रकार का होता है-

1. नियमित परावर्तन

2. विसरित परावर्तन

1. नियमित परावर्तन ( Regular Reflection)-

.

नियमित परावर्तन

समतल परावर्तक पृष्ठ से परावर्तन के बाद परावर्तित प्रकाश किरणें समान दिशा में ही गति करती है।

परावर्तित प्रकाश किरणें समान दिशा में ही गति करती हैं। 2. विसरित परावर्तन (Diffused Reflection)-

.

खुरदरे पृष्ठ से परावर्तन के बाद परावर्तित प्रकाश किरणें अलग-अलग दिशाओं में विसरित अथवा फैल जाती हैं।

अधिकांशतः हम वस्तुओं को विसरित परावर्तन के कारण ही देख पाते हैं। नोट:- सामान्यतः काँच अथवा पारदर्शी पदार्थ के पीछे वाले भाग पर परावर्तक आवरण (चाँदी) की परत लगाकर उन्हें दर्पण या परावर्तक पृष्ठ की तरह उपयोग में लिया जाता है।

दर्पण

जब किसी काँच की पट्टिका पर परावर्तक पदार्थ जैसे चाँदी अथवा निकल की पॉलिश कर दी जाती है तो वह दर्पण बन जाता है। दर्पण दो प्रकार के होते हैं-

1. समतल दर्पण

II. गोलीय दर्पण

समतल दर्पण [ Plane Mirror]

जब समतल काँच की प्लेट के किसी एक पृष्ठ पर परावर्तक पॉलिश कर

देते हैं तो उसे समतल दर्पण कहते हैं।

समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का निर्माण -

अभिलम्ब

B.

समतल काँच की पट्टिका की एक सतह पर सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) का लेपन करके इसे समतल दर्पण में बदला जा सकता है।

समतल दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब सीधा, आभासी एवं वस्तु के बराबर होता है।

समतल दर्पण में बने प्रतिबिम्ब में बिम्ब का बायाँ भाग, प्रतिबिम्ब का दायाँ भाग तथा बिम्ब का दायाँ भाग प्रतिबिम्ब का बायाँ भाग होगा। समतल दर्पण से वस्तु जितनी दूरी पर होती है, दर्पण में प्रतिबिम्ब भी उतनी ही दूरी पर बनता है।

समतल दर्पण में अपना पूरा प्रतिबिम्ब देखने हेतु समतल दर्पण की न्यूनतम ऊँचाई, व्यक्ति की लम्बाई की आधी होनी चाहिए। सामने रखे दर्पण में पीठ के पीछे की ओर दीवार को पूरा दर्पण की न्यूनतम लम्बाई दीवार की एक तिहाई ( 3 ) होनी चाहिए।

देखने हेतु

यदि दो समतल दर्पण किसी कोण पर रखे हों तो उनके मध्य स्थिति वस्तु के एक से अधिक प्रतिबिम्ब बनते हैं, जिसकी संख्या दर्पणों के बीच कोण पर निर्भर करती है।

यदि वस्तु समतल दर्पण की ओर 11 वेग से गति करे तो प्रतिबिम्ब भी दर्पण के सापेक्ष 11 वेग से गति करता है, लेकिन वस्तु के सापेक्ष प्रतिबिम्ब का वेग 211 होता है।

समतल दर्पण के लिए वक्रता त्रिज्या (R) तथा फोकस दूरी का मान ० होता है।

समतल दर्पण के लिए आवर्धन क्षमता का मान +1 होता है।

पनडुब्बियों में प्रयुक्त किए जाने वाले पेरिस्कोप में दो समतल दर्पणों का प्रयोग किया जाता है जो कि तल के सापेक्ष एक समान कोण बनाते हुए समानान्तर स्थित होते हैं।

पेरिस्कोप परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है।

झुके हुए दो समतल दर्पणों द्वारा बने प्रतिबिम्ब-जब दो समतल दर्पण एक-दूसरे से 8 कोण पर झुके हो तो उनके मध्य रखी हुई वस्तु के बनने वाले प्रतिबिम्बों की संख्या-

नोट:-

(i) जब प्रतिबिम्बों की संख्या (n) का मान विषम हो तो -

n =

360° 6

(ii) जब प्रतिबिम्बों की संख्या (n) का मान सम हो तो

360°

n =

-1

6

यदि दो समतल दर्पणों को एक-दूसरे के समान्तर रख दिया जाए तो अनन्त प्रतिबिंब प्राप्त होते हैं।

360

*

प्रतिबिंबों की संख्या =

1

Ө

360

+

0

296

-1=0-1= प्रतिबिंब

गोलीय दर्पण (Spherical Mirror)

जब काँच के खोखले गोले के किसी भाग के एक पृष्ठ पर परावर्तक पॉलिश कर देते हैं तो उसे गोलीय दर्पण कहते हैं।

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं-

अवतल दर्पण -

ऐसे दर्पण जिनके परावर्तक पृष्ठ अन्दर की ओर वक्रित होते हैं, अवतल दर्पण कहलाते हैं। इस दर्पण के पश्च (उभरे) भाग पर परावर्तक रजत (चाँदी) आवरण का लेपन किया जाता है।

मुख्य अक्ष

समांतर प्रकाश किरणें

उत्कर्ष प्रकाश

P ध्रुव

C वक्रता केन्द्र

मुख्य फोकस

फोकस पर

अवतल दर्पण

Ma

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना अवतल दर्पण द्वारा बिंब की विभिन्न स्थितियों के लिए बने प्रतिबिंब

प्रतिबिंब की

प्रतिबिंब का

बिंब की स्थिति

स्थिति

फोकस F पर

आकार अत्यधिक

प्रतिबिंब की प्रकृति

.

वास्तविक

अनंत पर वक्रता केन्द्र (c) तथा अनन्त के बीच वक्रता केन्द्र (C)

बिंदु साइज फोकस (F) तथा C के बीच वक्रता केन्द्र (C)

छोटा

पर

पर

समान आकार

वक्रता केन्द्र (C) तथा फोकस (F) के बीच

वक्रता केन्द्र (c) व अनन्त के बीच

तथा उल्टा वास्तविक

तथा उल्टा वास्तविक तथा उल्टा वास्तविक

ध्रुव (P) तथा फोकस (F) के बीच

अवतल दर्पण के उपयोग-

शेविंग दर्पण में

दंत विशेषज्ञों तथा नाक-कान गला रोग विशेषज्ञों द्वारा प्रयुक्त सौर भट्टी में

टॉर्च, सर्चलाइट तथा वाहनों के हैडलाइट्स में

सेटेलाइट डिश एंटीना में

परावर्तक टेलीस्कोप में

उत्तल दर्पण

ऐसे गोलीय पृष्ठ जिनका बाहरी भाग दर्पण के परावर्तक पृष्ठ की तरह उपयोग में लिया जाता है उन्हें उत्तल दर्पण कहते हैं। इसके लिए वक्र पृष्ठ के अन्दर की सतह पर परावर्तक आवरण लगाने के बाद वहाँ रंग कर दिया जाता है ताकि बाहरी उत्तल तल से ही परावर्तन हो ।

बड़ा अत्यधिक

तथा उल्टा वास्तविक

F पर

अनंत पर

बड़ा

तथा उल्टा

ध्रुव (P) तथा फोकस (F) के बीच

आभासी

दर्पण के पीछे

बड़ा

तथा सीधा

मुख्य अक्ष

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का किरण आरेख बिंब की स्थिति

किरण आरेख

अनंत पर

उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का किरण आरेख :-

बिंब की स्थिति

प्रतिबिंब की स्थिति फोकस बिन्दु पर

प्रतिबिंब का

(दर्पण के पीछे)

P तथा F के बीच

छोटा

दर्पण के पीछे

आकार

अत्यधिक छोटा बिंदु के आकार का

प्रतिबिंब की प्रकृति आभासी तथा सीधा

आभासी तथा सीधा

बिंब की स्थिति

किरण आरेख

वक्रता केन्द्र (C) तथा अनन्त के बीच

अनन्त पर

अनन्त तथा

दर्पण के ध्रुव P के बीच

वक्रता केन्द्र (c) पर

वक्रता केन्द्र (c) तथा फ��कस

(F) के बीच

297

अनंत पर

B

अनन्त तथा दर्पण के ध्रुव P के बीच

उत्तल दर्पण के उपयोग -

·

+

M

वाहनों के पश्च दृश्य दर्पणों (Side View Mirrors) में

स्ट्रीट लैप्स (Street lamps) में

ATM के दर्पण में

पहाड़ी क्षेत्रों में घुमावदार सड़कों के मोड़ पर

उत्कर्ष प्रकाश

नोट:- गोलीय दर्पण में वक्रता त्रिज्या का मान फोकस दूरी के मान

का दुगुना होता है R = 2f

दर्पण सूत्र (Mirror Formula) - एक गोलीय दर्पण में - (i) ध्रुव से बिम्ब की दूरी कहलाती है।

(ii) ध्रुव से प्रतिबिम्ब की दूरी

(iii) ध्रुव से फोकस की दूरी दर्पण सूत्र = 1.1.1

vu f

आवर्धनता (Magnification]

कहलाती है।

कहलाती है।

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई एवं बिम्ब की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धनता कहा जाता है। सामान्यत: इसे m से दर्शाया जाता है।

1.

अपवर्तन के नियम :-

आपतन कोण (i), अभिलम्ब (n) तथा अपवर्तन कोण (r) तीनों एक ही तल में होते हैं।

2. स्नेल का नियम sini

sinr

(अपवर्तनांक) अर्थात् आपतन कोण की

ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात किन्हीं दो माध्यमों के लिए एक नियतांक होता है, जिसे दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं।

अपवर्तनांक (A)

माध्यम का अपवर्तनांक इसकी सघनता को दर्शाता है, जिस माध्यम का अपवर्तनांक अधिक होता है, वह माध्यम उतना ही सघन होता है तथा ऐसे माध्यमों में प्रकाश की चाल भी कम होती है।

1

प्रकाश की चाल

सघन माध्यम में प्रकाश की चाल कम व विरल माध्यम में प्रकाश की चाल अधिक होती है।

अपवर्तनांक का क्रम -

(काँच) (जल) (वायु)

अपवर्तनांक की निर्भरता :-

अपवर्तनांक (Refractive Index) माध्यम की प्रकृति, घनत्व तापमान एवं प्रकाश के रंग (तरंगदैर्ध्य ) पर भी नि���्भर करता है। बैंगनी रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है व लाल रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक सबसे कम होता है।

पदार्थ

अपवर्तनांक

दर्पण द्वारा किसी बिम्ब को आवर्धित करने की क्षमता ही आवर्धनता कहलाती हैं।

हीरा

2.42

क्राउन काँच

1.52

यदि बिम्ब की ऊँचाई ho हो एवं प्रतिबिम्ब की ऊँचाई h] हो तो गोलीय दर्पण से उत्पन्न आवर्धनता-

m=

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई बिम्ब की ऊँचाई

प्रकाश का अपवर्तन :-

आपतित किरण

=

अभिलम्ब

ग्लिसरीन

1.47

तारपीन

1.47

केरोसिन

1.44

V

पानी

1.33

ho

U

वायु

1.0003

निर्वात

1

दैनिक जीवन में अपवर्तन :-

i.

तारों का टिमटिमाते हुए प्रतीत होना।

ii.

जल में आधी डूबी हुई वस्तु का मुड़ा हुआ दिखाई देना।

iii.

पानी से भरी बाल्टी के पेंदे का ऊपर उठा हुआ दिखाई देना।

iv.

लेंस से अपवर्तन की घटना

V.

अपवर्तन का चित्र

+

अपवर्तित किरण

जब कोई प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह किरण अपने मूल पथ से विचलित हो जाती है, जिसे अपवर्तन कहा जाता है।

जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो अभिलम्ब से दूर हट जाती है तथा विरल से सघन माध्यम में प्रवेश करने पर ये अभिलम्ब की ओर झुक जाती है।

अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश का वेग भी अलग-अलग होता है, इसके कारण ही हमें अपवर्तन की परिघटना प्रतीत होती है।

पानी से भरे काँच के ग्लास में रखा नीबू पार्श्व से देखने पर अपने वास्तविक आकार से बड़ा दिखाई पड़ता है।

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन :-

जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तथा आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक हो, तो वह प्रकाश किरण पुन: उसी सघन माध्यम में लौट जाती है, जिसे प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।

हवा

जल

पूर्ण आन्तरिक परावर्तित किरण

298

i.

ii.

पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक दो शर्तें:-

उत्कर्ष प्रकाश

प्रकाश का सघन से विरल माध्यम में प्रवेश करना (सघन विरल ) आपतन कोण (i) का मान क्रांतिक कोण (C) से अधिक (i c)

उदाहरण-

हीरे का चमकना ।

गर्म प्रदेशों में गर्मी के मौसम में सड़क पर जल का आभास होना (मृग मरीचिका कहा जाता है)

किसी काँच में दरार पड़ने पर दरार का अधिक चमकदार दिखाई देना। प्रकाशिक तन्तु में।

नोट:-

* किसी सघन माध्यम में वह विशेष आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो, क्रांतिक कोण कहलाता है।

* सघन माध्यम का अपवर्तनांक ज्यादा होने पर क्रांतिक कोण का मान कम होता है।

प्रकाशिक तन्तु (Optical Fibers)

Cladding

Core

पूर्ण आंतरिक परावर्तन

1.

+

लेंस (Lens)

वह पारदर्शी माध्यम जिसकी कम से कम एक सतह वक्रित हो, लेंस कहलाता है।

लेंस दो प्रकार के होते हैं-

1. उत्तल लेंस (Convex lens )

2. अवतल लेंस (Concave lens )

उत्तल लेंस (Convex lens ) :-

वह लेंस जो बाहर की ओर उभरे दो गोलीय पृष्ठों से घिरा हो, उत्तल लेंस कहलाता है।

यह किनारों की अपेक्षा बीच में मोटा होता है।

यह प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है, अत: इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं।

—F1

��ोकस बिन्दु

F2

फोकस तल

फोकस दूरी

उत्तल लेंस

चिकित्सा, प्रकाशीय सिग्नल के संचरण, विद्युत सिग्नलों को भेजने व

उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।

उत्तल लेंस की शक्ति (p) भी धनात्मक होती है।

i.

प्राप्त करने में प्रकाशिक तंतु का उपयोग किया जाता है। प्रकाशिक तन्तु पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित है। प्रकाशिक तन्तु का आविष्कार नरिन्दर कपानी ने किया था। प्रकाशिक तंतु के उदाहरण

जल में पड़ी हुई परखनली चमकीली दिखाई देना ।

ii. काँच में आई दरारें चमकना ।

iii. कालिख से पुते हुए गोले का जल में चमकना ।

उत्तल लेंस का उपयोग दूर दृष्टि दोष के निवारण में किया जाता है।

उत्तल लेंस द्वारा बने प्रतिबिंब की प्रकृति स्थिति तथा आपेक्षिक आकार-

बिंब की

स्थिति

प्रतिबिंब की स्थिति

प्रतिबिंब का

प्रतिबिंब की

आपेक्षिक साइज

प्रकृति

फोकस Fa

अत्यधिक छोटा

वास्तविक तथा

अनंत पर

पर

iv.

CCTV तथा चिकित्सा उद्योग में

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण :-

(बिन्दु आकार)

उल्टा

2F व अनन्त

के बीच

F2 तथा 2F2 के बीच

वास्तविक तथा

छोटा

बिंब के समान

उल्टा वास्तविक तथा

2F, पर

2F2 पर

आकार का

लाल

श्वेत प्रकाश

F1 तथा 2F के 25 व अनन्त बीच के बीच

उल्टा वास्तविक तथा

बिम्ब से बड़ा

उल्टा

असीमित रूप से

बैंगनी

बड़ा अथवा

वास्तविक तथा

फोकस F पर

अनंत पर

B

एक काँच के प्रिज्म द्वारा क्षेत प्रकाश का विक्षेपण

जब श्वेत प्रकाश किरण को प्रिज्म से गुजारा जाता है तो ये श्वेत प्रकाश किरण अपने 7 घटक रंगों में विभक्त हो जाती है, जिसे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं।

अत्यधिक आवृद्धित

उल्टा

फोकस F तथा

लेंस के उसी

आभासी तथा

प्रकाशिक केन्द्र

तरफ (बिंब

बिंद से बड़ा

सीधा

'o' के बीच

की ओर)

7 घटक रंग VIBGYOR (नीचे से ऊपर की ओर रंगों का क्रम ) लाल रंग की तरंगदैर्ध्य तथा वेग सर्वाधिक होता है।

बिम्ब की स्थिति

किरण आरेख

ARAv

बैंगनी रंग के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य तथा वेग सबसे कम होती है। प्रकाश के अलग-अलग रंगों के लिए माध्यम का अपवर्तनांक भी अलग- अलग होता है इसी कारण से हमें वर्ण विक्षेपण की परिघटना दिखाई देती है।

अनंत पर

299

2F व अनन्त के बीच

2F1 पर

उत्कर्ष प्रकाशन

अनंत तथा लेंस

के प्रकाशिक

फोकस F तथा प्रकाशिक

बिंब से छोटा

केन्द्र '0' के बीच

केन्द्र '0' के

आभासी तथा सीधा

बीच

अवतल लेंस द्वारा बनने वाले किरण आरेख -

बिम्ब की स्थिति

अनंत पर

किरण आरेख

2.

F1 तथा 2F1 के बीच

फोकस F पर

फोकस F1 तथा प्रकाशिक

केन्द्र '0' के बीच

अवतल लेंस (Concave lens ) :- फोकस तल

फोक्से बिन्दु

फोकस दूरी

वह लेंस जो अन्दर की ओर वक्रित दो गोलीय पृष्ठों से घिरा हो, अवतल लेंस कहलाता है।

यह किनारों की अपेक्षा बीच में पतला होता है।

यह प्रकाश किरणों को अपसारित करता है, अत: इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं।

अवतल लेंस के लिए फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। अवतल लेंस के लिए शक्ति (P) भी ऋणात्मक होती है।

अवतल लेंस से बनने वाला प्रतिबिम्ब सदैव आभासी, सीधा व छोटा होता है।

अवतल लेंस के लिए आवर्धन (m) का मान +1 से कम होता है।

अवतल लेंस का उपयोग निकट दृष्टि दोष (Myopia) के निवारण में किया जाता है।

अवतल लेंस से प्रतिबिम्ब-

अवतल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब की प्रकृति, स्थिति तथा आकार

बिंब की स्थिति

प्रतिबिंब की स्थिति

प्रतिबिंब का

आपेक्षिक

प्रतिबिंब की प्रकृति

साइज अत्यधिक छोटा

अनंत पर

फोकस F1 पर

बिन्दु आकार

आभासी तथा सीधा

अनंत तथा लेंस के प्रकाश केंद्र '0' के बीच

लेंस सूत्र (Lens Formula) :-

+

300

गोलीय दर्पण की तरह ही लेंस में भी बिम्ब दूरी u, प्रतिबिम्ब दूरी v एवं फोकस दूरी में एक सम्बन्ध होता है जिसे निम्नलिखित सूत्र से प्रदर्शित किया जाता है।

1

=

1 1 fvu

नोट- उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक ली जाती है एवं अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक ली जाती है।

आर्वधनता (Magnification) :-

किसी लेंस द्वारा बिम्ब को आवर्द्धित करने की क्षमता को आवर्धनता कहते हैं। लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धनता को प्रतिबिम्ब की ऊँचाई (hi) व बिम्ब की ऊँचाई (ho) के अनुपात के रूप में दर्शाते हैं।

m"

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई h

नोट :

बिम्ब की ऊँचा��

-

• आवर्धनता को प्रतिबिम्ब दूरी व बिम्ब दूरी के अनुपात से भी दर्शाया जाता है।

m=

h V ho

• वास्तविक व उल्टे प्रतिबिम्ब का आवर्धनता ऋणात्मक होगा जबकि आभासी व सीधे प्रतिबिम्ब के लिए आवर्धन धनात्मक होगा।

लेंस की शक्ति / क्षमता :-

लेंस की शक्ति / क्षमता, फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है अर्थात्

P=

1

100

f (m) f (cm में)

इसका मात्रक डायोप्टर / 1 /(मी) / (सेमी) होता है।

मीटर

उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।

1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता 1 डायोप्टर होती है। दृष्टिदोष एवं निवारण :-

एक सामान्यतः मनुष्य न्यूनतम 25 सेमी. से अधिकतम दूरी 00 दूरी पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देख पाता है।

उत्कर्ष प्रकाश

मनुष्य के नेत्र में द्विउत्तल लेंस (Bi Convex lens) पाया जाता है, जिससे नेत्र के रेटिना पर वस्तु का वास्तविक एवं उल्टा प्रतिबिम्ब बनता है।

मस्तिष्क की सहायता से वस्तुएँ हमें सीधी दिखाई देती हैं।

सबसे स्पष्ट प्रतिबिम्ब रेटिना के पीत बिन्दु (Yellow Spot) पर बनता है। यदि सामान्य दृष्टि सीमा (25 cm से अनंत) में मनुष्य किसी वस्तु को स्पष्ट न देख पाए तो इसे नेत्र दोष कहते हैं जो इस प्रकार हैं- A. दूर दृष्टि दोष

.

[Hypermetropia/Long Sightedness]

इसमें वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना से दूर / पीछे बनता है, जिसमें निकट बिन्दु दूर चला जाता है, अतः पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देती हैं।

इसमें फोकस दूरी बढ़ने पर लेंस की शक्ति कम हो जाती है।

इसके निवारण के लिए उत्तल लेंस से बने चश्मे का प्रयोग किया जाता है।

B. निकट दृष्टि दोष [Myopia / Short Sightedness] इसमें वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना से पहले बनता है।

.

.

.

C.

.

इस दोष में दूर बिन्दु निकट आ जाता है, जिससे दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखती हैं।

इसमें फोकस दूरी घटने पर लेंस की शक्ति बढ़ जाती है।

इसके निवारण के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है। जरा दूरदर्शिता [Press biopia ]

उम्र बढ़ने के साथ-साथ नेत्र लेंस धीरे-धीरे चपटा होता है, जिससे निकट बिन्दु दूर चला जाता है एवं दूर बिन्दु पास आ जाता है, ऐसी स्थिति में निकट व दूर की वस्तुएँ दोनों ही स्पष्ट नहीं दिखाई देती हैं।

इसके निवारण हेतु उत्तल एवं अवतल लेंस के संयोजन से बने चश्मे का प्रयोग करते हैं, जिसे द्विफोकसी लेंस (Bifocal lens ) कहते हैं।

द्विफोकसी लेंस में उत्तल लेंस नीचे की ओर पढ़ने के लिए तथा ऊपर अवतल लेंस दूर देखने हेतु लगाते हैं।

E. अबिन्दुकता [Astigmation]

.

.

नेत्र गोलक एक समान रूप से गोल न होने के कारण वस्तुएँ क्षैतिज या ऊध्वार्धर तलों में अथवा दोनों ही तल में विकृत दिखाई देती हैं।

इसके निवारण हेतु बेलनाकार लेंस (Cylindrical lens) का प्रयोग किया जाता है।

F. मोतियाबिन्द [Cataract)

.

नेत्र लेंस उम्र के साथ कम पारदर्शी होने लगता है, जिससे व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है।

इसके निवारण हेतु लेंस का प्रत्यारोपण किया जाता है।

G. वर्णान्धता [ Color blindness ]

.

ये आनुवंशिक रोग है। इसमें x- गुणसूत्र पर विकृत जीन होने के कारण व्यक्ति रंगों में (लाल व हरे रंग ) विभेद नहीं कर पाता है। इसका उपचार संभव नहीं है।

इन्द्रधनुष (Rainbow) :-

वर्षा के बाद अनुकूल परिस्थितियों में आकाश में बनने वाली सात रंगों

की चन्द्राकार आकृति को इन्द्रधनुष कहते हैं।

301

जब सूर्य का प्रकाश प्रेक्षक की पीठ के पीछे की दिशा से आ रहा हो तथा जल की बूँदें आँखों के सामने वायु में हो तब पूर्ण आंतरिक परावर्तन, वर्ण विक्षेपण तथा अपवर्तन की परिघटनाएँ होने से सामने की ओर इन्द्रधनुष एक साथ दिखाई देते हैं।

1.

.

.

प्राथमिक इन्द्रधनुषः-

दो बार अपवर्तन तथा 1 बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के फलस्वरूप प्राथमिक इन्द्रधनुष बनता है।

इसमें लाल रंग बाह्य किनारे पर तथा बैंगनी रंग आन्तरिक किनारे पर होता है।

2. द्वितीयक इन्द्रधनुषः-

.

दो बार अपवर्तन तथा दो बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के फलस्वरूप द्वितीयक इन्द्रधनुष का निर्माण होता है।

इसमें अन्दर की तरफ लाल तथा बाहरी चाप की तरफ बैंगनी रंग दिखाई देता है।

ये प्राथमिक इन्द्रधनुष के ऊपर / बाहर की ओर बनता है। प्रकाश का प्रकीर्णन :-

नीले प्रकाश के प्रकीर्ण होने से सूर्य का रक्तान प्रतीत होना

क्षितिज के निकट सूर्य

प्रेक्षक

सूर्य लगभग उर्ध्वस्थ

नीले प्रकाश का कम प्रकीर्णन

जब प्रकाश किसी सघन माध्यम से गुजरता है तो माध्यम के कण प्रकाश को अवशोषित कर अलग-अलग दिशाओं में फैला देते हैं, जिसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

रैले ने बताया कि प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता (प्रकीर्णन की मात्रा ) प्रकाश की तरंगदैर्���्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात्- प्रकीर्णन की मात्रा a

प्रकाश का प्रकीर्णन तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है।

बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है, अतः इसका प्रकीर्णन सर्वाधिक होता है।

लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे ज्यादा होती है, अत: इसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है।

प्रकाश के प्रकीर्णन के उदाहरण :-

सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय आकाश का लाल-नारंगी दिखाई देना ।

दिन के समय आकाश का नीला दिखाई देना।

समुद्र के पानी का नीला दिखाई देना।

खतरे के निशान लाल रंग के बनाना।

नोट- वैज्ञानिक सी. वी. रमन तथा उनके सहयोगियों द्वारा वर्ष 1920

में अणुओं के द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन का गहन अध्ययन किया

गया।

प्रकाशीय रंग-

A. प्राथमिक रंग लाल, हरा व नीला

हाइड्रोजन समस्थानिक-

उत्कर्ष प्रकाशन

B. द्वितीयक रंग प्राथमिक रंगों के मिश्रण से बने रंग द्वितीयक रंग

कहलाते हैं।

(1) हरा+लाल पीला

(2) नीला+लाल मैजेन्टा

(3) नीला+हरा

मोरपंखी नीला

C. पूरक रंग दो रंग जो आपस में मिलकर श्वेत प्रकाश उत्पन्न करते हैं,

पूरक रंग कहलाते हैं।

उदाहरण-

+

H

1H2

H

न्यूट्रॉन 0

1

2

प्रोटॉन

1

1

1

कार्बन समस्थानिक-

6C12

6C13

6C14

न्यूट्रॉन प्रोटॉन 6

6

7

8

6

6

समभारिक-

(1) लाल+मैजेन्टा

सफेद

(2) हरा+मेजेन्टा सफेद

(3) नीला+पीला-सफेद

नोट- जब नीले तथा पीले रंग को मिश्रित किया जाता है, तो वह दूधिया हरा रंग बनाते हैं।

+

goo

नाभिकीय भौतिकी एवं रेडियो एक्टिविटी

किसी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन कण उपस्थित होते हैं। प्रोटॉन की प्रकृति धनावेशित होती है, जबकि न्यूट्रॉन की प्रकृति उदासीन होती है, इसी कारण नाभिक को धनावेशित माना जाता है।

परमाणु में नाभिक धनावेशित होता है जिसके चारों तरफ ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन घूमता है।

नाभिक के भीतर उपस्थित न्यूट्रॉन व प्रोटॉन के योग को न्यूक्लिऑन कहते हैं।

किसी परमाणु में न्यूक्लियॉन संख्या उसकी द्रव्यमान संख्या A होती है। तत्त्व का प्रतीक :-

A- द्रव्यमान संख्या

Z परमाणु क्रमांक / परमाणु संख्या

द्रव्यमान संख्या (Mass Number) :-

किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या (P) व न्यूट्रॉनों

की संख्या (n) का योग, द्रव्यमान संख्या कहलाती है।

द्रव्यमान संख्या (A) = n+ P

परमाणु क्रमांक (Z) :-

तत्त्व

प्रतीक

परमाणु

न्यूट्रॉन की

क्रमांक

संख्या

द्रव्यमान संख्या

कार्बन

6C12

6

6

12

हाइड्रोजन

1

0

1

सोडियम 11 Na2B

11

12

23

HT

समस्थानिक (Isotops) :-

+

एक ही तत्त्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती हैं, परन्तु परमाणु भार अलग-अलग होता है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है

अलग-अलग परमाणु संख्या वाले तत्त्व जिनका द्रव्यमान संख्या समान होती है लेकिन परमाणु संख्या असमान होती हैं।

उदा. Ar and Ca

जब कोई नाभिक अस्थायी होता है तो वह अधिक स्थायी नाभिक का निर्माण करने के लिए नाभिकीय संलयन एवं नाभिकीय विखण्डन जैसी क्रियाएँ दर्शाता है।

नाभिकीय विखण्डन (Nuclear Fission]

जब कोई अस्थायी रेडियोसक्रिय नाभिक दो या दो से अधिक छोटे-छोटे नाभिकों में टूटता है तो इसे नाभिकीय विखण्डन कहते हैं। नाभिकीय विखण्डन के दौरान अत्यधिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है, साथ ही तीव्रगामी न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं।

ऑटोहॉन व स्ट्रॉसमैन ने नाभिकीय विखण्डन के बारें में सर्वप्रथम

बताया।

जब यूरेनियम 235 पर न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तब निम्नलिखित अभिक्रिया प्राप्त होती है-

235

92

U+\n→U #Ba+Kr+n

इस विखण्डन से लगभग 200 Mev ऊर्जा प्राप्त या 0.8 Mev प्रति न्यूक्लियॉन ऊर्जा मुक्त होती है।

जब नाभिकीय विखण्डन होता है तो विखण्डन में उत्पन्न 3 न्यूट्रॉन पुनः विखण्डन क्रिया करते हैं इस प्रकार सतत चलने वाली क्रिया श्रृंखला अभिक्रिया' कहलाती है।

नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया का अनुप्रयोग परमाणु भट्टी / नाभिकीय

संयंत्र में करते हैं।

एनरिको फर्मी ने सर्वप्रथम नाभिकीय विखण्डन की सहायता से न्यूक्लियर रिएक्टर का निर्माण किया।

परमाणु भट्टी / परमाणु संयंत्र [Nuclear Reactor]

नाभिकीय विखण्डन की क्रिया पर आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर ऐसा संयंत्र है जिसमें नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के द्वारा नाभिकीय विखण्डन किया जाता है।

न्यूक्लियर रिएक्टर की संरचना में विभिन्न भाग दिखाई देते हैं। ईंधन [Fuel]

यूरेनियम-235, यूरेनियम-238, प्लूटोनियम-239, प्लूटोनियम - 240, प्लूटोनियम-241 आदि का प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। मंदक [Moderator)

ये न्यूट्रॉनों की गति को मंद कर देते हैं, जिसमें तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की संख्या कम हो जाने से विखण्डन क्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है। एक अच्छा मंदक वह होता है जिसका परमाणु भार कम हो, जो न्यूट्रॉन को अवशोषित किए बिना उनका वेग कम कर दें।

ग्रेफाइट एवं भारी जल (D2O) को मंदक के रूप में प्रयुक्त करते हैं।

302

नियंत्रक छड़ें [Controlling rods ]

उत्कर्ष प्रकाश

नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉन्स को अवशोषित करने में प्रयुक्त होती है। ये कैडमियम (cd) की बनी होती है।

शीतलक :-

शीतलक के रूप में भारी जल / D2O या द्रवित नाइट्रोजन, CO2 व O2 का प्रयोग करते हैं।

ये विखण्डन के दौरान उत्पन्न ऊष्मा को अवशोषित करते हैं।

परिरक्षक आवरण :-

ये सीमेन्ट, कंकरीट आदि से बना मोटा आवरण है, जो नाभिकीय विकिरणों से संयंत्र में कार्यरत श्रमिकों को बचाता है।

नोट:-

• संवर्द्धित यूरेनियम (Enriched Uranium):- जब यूरे���ियम में 235 की मात्रा को बढ़ाया जाता है तो ऐसा यूरेनियम 'संवर्द्धित यूरेनियम' कहलाता है।

• U235 ज्यादा विखण्डनीय होता है अर्थात् आसानी से विखण्डित होता | है तथा ये अधिक ऊर्जा देता है। इसे तीव्र अथवा मंद गति के न्यूट्रॉन दोनों ही विखण्डित कर सकते हैं।

नाभिकीय संलयन [Nuclear Fusion]

जब दो हल्के नाभिक आपस में जुड़ कर किसी भारी नाभिक का निर्माण करते हैं तो इसे नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहते हैं। संलयित होने वाले छोटे नाभिकों का कुल द्रव्यमान संलयन के बाद बने भारी नाभिक के द्रव्यमान से कम होता है, द्रव्यमान में ये कमी या क्षति ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।

नाभिकीय संलयन अत्यन्त उच्च तापमान (10° केल्विन) तथा उच्च दाब (10 atm) पर संभव हो पाता है। ऐसी परिस्थितियाँ प्राकृतिक रूप से सूर्य व तारों की सतह पर होती है जहाँ नाभिकीय संलयन की क्रिया होती रहती है।

+

ii) B-क्षय जिसमें इलेक्ट्रॉन अथवा पोजिट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।

iii) क्षय जिसमें उच्च ऊर्जा के फोटॉन उत्सर्जित होते हैं।

7

क्यूरी दंपती ने रेडियम की खोज कर इसके रेडियोधर्मी गुणों के बारे में बताया।

परमाणु क्रमांक 82 से अधिक परमाणु क्रमांक वाले तत्त्व रेडियोसक्रियता दर्शाते हैं, उदाहरण यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, नेपच्यूनियम, पोलोनियम आदि ।

हल्के नाभिकों पर तेज गति के न्यूट्रॉन टकराने पर वे रेडियो सक्रियता दर्शाते हैं इसे कृत्रिम रेडियोसक्रियता कहते हैं।

रेडियो सक्रियता के मात्रक :-

+

1 बेकुरल 1 विघटन / सेकण्ड

1 रदरफोर्ड = 106 विघटन / सेकण्ड

=

1 क्यूरी 3.7x1010 विघटन / सेकण्ड

अर्द्ध आयु (Half life) :-

+

वह समय जिसमें सक्रिय नाभिकों की संख्या प्रारम्भिक मान की आधी रह जाती है, अर्द्ध आयु कहलाती है।

रेडियोएक्टिव समस्थानिकों का अनेक क्षेत्रों में योगदान :-

1.

+

चिकित्सा के क्षेत्र में

रक्त की जाँच के लिए क्रोमियम 51

रक्त परिसंचरण की जाँच के लिए सोडियम 24

मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने के लिए रेडियो पारा 203 चर्म रोगों के लिए फॉस्फोरस 31

कैंसर के लिए कोबाल्ट 60

गल-ग्रंथि की खराबी की जाँच के लिए रेडियो आयोडीन 131

+

2.

पुरातत्त्व के क्षेत्र में

पुरातत्त्व वस्तुओं की आयु ज्ञात करने में C-14

पृथ्वी की आयु ज्ञात करने में सीसे के समस्थानिक

हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन पर आधारित होता है, जबकि परमाणु 3. कृषि के क्षेत्र में बम नाभिकीय विखण्डन पर आधारित होते हैं।

नोट:- हाइड्रोजन बम के आविष्कारक एडवर्ड टेलर थे। परमाणु बम के आविष्कारक ओपेनहाइमर थे।

प्रोटोन प्रोटोन चक्र अभिक्रिया

¥H+¥H→¥H+B* +Vo

ZH+¥H⇒He+y

He+He →He+¥H+¥H

आलुओं को कीड़ों से बचाने के लिए = Co-60 कृत्रिम वर्षा कराने में = AgI

000

प्रमुख खोज एवं आविष्कारक

क्र.सं.

आविष्कार

आविष्कारक

4¥H

He+2B* + 2x + 26.73Mev

नाभिकीय विखण्डन (Nuclear

1.

ओटोहेन व स्ट्रासमैन

fission)

रेडियो सक्रियता / रेडियो धर्मिता [Radioactivity]

2.

परमाणु बम (Atom bomb)

रॉबर्ट ओपेनहाइमर

+

भारी नाभिकों से स्वत: ही रेडियोधर्मी विकिरणों (ap तथा विकिरण) का उत्सर्जन रेडियो सक्रियता कहलाता है।

3.

क्वान्टम सिद्धान्त

मैक्स प्लांक

4.

रमन प्रभाव (Raman Effect )

सी.वी. रमन

+

सन् 1896 में हेनरी बेकुरल ने यूरेनियम के नमूने से रेडियो सक्रियता की खोज की।

परमाण्विक संरचना (Atomic-

5.

नील्स बोहर व रदरफोर्ड

Structure )

रेडियोएक्टिवता एक नाभिकीय परिघटना है जिसमें अस्थायी नाभिक

रेडियोएक्टिवता

6.

क्षति होता है। इसे रेडियोएक्टिव क्षय कहते हैं।

(Radioactivity)

हेनरी बेकुरेल

प्रकृति में तीन प्रकार के रेडियोएक्टिव क्षय होते हैं-

कृत्रिम रेडियोएक्टिवता एवं रेडियम

7.

पियरे व मैडम क्यूरी

i) aa -क्षय - जिसमें हीलियम नाभिक (He) उत्सर्जित होते हैं।

(Radium)

303

उत्कर्ष प्रकाशन

विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (E.M.

8.

माइकल फैराडे

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Induction)

1.

ज्योति तीव्रता का मात्रक होता है-

9.

उत्प्लावकता (तैरने के नियम

आर्कीमिडीज

(a) कैंडेला

(b) रेडियन

10.

नाभिकीय रिएक्टर (परमाणु संयंत्र )

एनरिको फर्मी

(c) एम्पीयर

(d) मोल

11.

विद्युत अपघटन के नियम

फैराडे

2.

तापमान का SI मात्रक है-

12.

विद्युत बेटरी

अलेसान्ड्रो वोल्टा

(a) फॉरेनहाइट

(b) केल्विन

13.

पोजिट्रॉन (Positron)

एण्डरसन

(c) पास्कल

(d) सेल्सियस

14.

मेसॉन (Meson)

H. युकावा

3.

संवेग का SI मात्रक है-

15.

पैराशूट (parachute)

ए. जी. गार्नरिन

(a) kgms1

(b) kgm2s-2

16.

डायोड वॉल्व (Diode Value)

JA. फ्लेमिंग

(c) kgms

(d) kgma

17.

ट्रायोड-वॉल्व (Triode Value)

L.D. फोरेस्ट

4.

दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई कौन-सी है?

18.

क्रोनोमीटर

जॉन हैरिसन

(a) प्रकाश वर्ष

(b) खगोलीय इकाई

19.

थर्मामीटर (Thermometer)

फॉरेनहाइट

(c) किलोमीटर

(d) पारसेक

20.

टेलीविजन (दूरदर्शन)

जे.एल. बेयर्ड

5.

22222

21.

प्रिंटिंग प्रेस (Printing Press)

जे. गुटेनबर्ग

22.

भाप (स्टीम) का इंजन

जेम्सवाट

'क्यूरी' किसकी इकाई का नाम है?

(a) रेडियोएक्टिव धर्मिता (रेडियो एक्टिविटी)

(b) ताप

23.

टेलीफोन (Telephone)

ग्राहा-बेल

(c) ऊष्मा

24.

| टेलीग्राफ

मोर्स

(d) ऊर्जा

25.

रेडियो (Radio)

6.

मापन की ब्रिटिश प्रणाली कोन-सी होती है?

मार्कोनी

26.

विद्युत पंखा (Electric Fan)

(a) MKS

(b) FPS

व्हीलर

27.

रिवॉल्वर (Revolver )

सैम्यूल कोल्ट

(c) CGS

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

7.

28.

जेट इंजन (Jet engine)

फ्रैंक-हिटले

पेंडुलम घड़ी (Pendulum

(a) दाब

29.

सी. हाइजेन्स

(c) ऊर्जा

Watch)

8.

अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति में पास्कल किसका मात्रक है?

जब लिफ्ट ऊपर की ओर त्वरित गति करे तो लिफ्ट में बैठे मनुष्य

(b) कार्य

(d) शक्ति

30.

मोटर साइकिल

जी. डेमलर (कार्बुरेटर)

को भार प्रतीत होगा-

31.

गणक मशीन (कैल्कुलेटर)

ब्लेज पास्कल

32.

डायनेमो (Dynamo)

माइकल फैराडे

(a) बढ़ा हुआ

33.

क्रेस्कोग्राफ

जे.सी. बोस

9.

34.

विद्युत बल्ब (Electric Bulb )

थॉमस एल्बा एडीसन

35.

फाउण्टेन पेन (Fountain Pen)

वाटर-मैन

धर्मस-फ्लास्क (Thermus-

36.

डेवार

Flasc )

37.

बैरोमीटर

टोरीसेली

38.

वायुयान (Aeroplane)

राइट ब्रदर्स (राइट-बंधु)

10.

39.

कम्प्यूटर (Computer)

चार्ल्स बैबेज

40.

इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर

जे.पी. एकर्ट

41.

लेजर किरणें ( LASER)

थियोडोर मैमेन

अतिचालकता (Super

42.

कैमरलिंघ ओन्स

conductivity)

11.

43.

मोबाइल (Mobile )

44.

दूरबीन (Telescope)

डॉ. मार्टिन कूपर गैलीलियो

45.

रेफ्रिजरेटर

46.

लिफ्ट

हैरीसन एवं कैटलीन एफ.जी. ओटिस

(c) समान

बन्दूक से गोली निकलने के पश्चात् कंधे का पीछे की ओर जाना,

गति के किस नियम की पुष्टि करता है?

(a) जड़त्व का नियम

(b) संवेग संरक्षण का नियम

(c) क्रिया प्रतिक्रिया का नियम

(d) उपर्युक्त सभी

लोलक घड़ियाँ गर्मियों में सुस्त हो जाती हैं, इसका मुख्य कारण है-

(a) गर्मियों में दिन लंबे होते हैं।

(b) कुंडली में घर्षण होता है।

(c) लोलक की लंबाई बढ़ जाती है।

(d) लोलक के भार में परिवर्तन हो जाता है।

न्यूटन के गति का प्रथम नियम संबंधित है -

(a) क्रिया प्रतिक्रिया

(c) संवेग परिवर्तन

12. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों तरफ किस प्रकार की गति करते हैं?

(b) घटा हुआ

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(b) जड़त्व

(d) बल आघूर्ण

(a) सरल रेखीय गति

47.

हार्ट लंग मशीन

डेनिश मेलरोज

(c) वृत्ताकार गति

(b) दोलनी गति

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

48.

लेंस कैमरा

13.

49.

स्पेक्ट्रम दर्शी

बुन्सेन

सरल आवर्त गति करते पेंडुलम के माध्य अवस्था पर वेग का मान होता है-

50.

मुद्रण कला

गुटेनबर्ग

(a) अधिकतम

(c) शून्य

(b) न्यूनतम

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

304

उत्कर्ष प्रकाशन

14.

आवेग (impulse) का सूत्र है-

27.

(a) बल x समय अन्तराल

(b) बल x त्वरण

(c) बल x विस्थापन

(d) द्रव्यमान

वेग

15.

सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक का मान कितना होता है?

(a) 6.67x10-11 N.m2/kg2

(b) 6.67x10-10 Nm2/kg2

पवन ऊर्जा में ऊर्जा के किस रूप का विद्युत ऊर्जा में परिवर्तन

होता है?

(a) स्थितिज ऊर्जा

(b) गतिज ऊर्जा

(c) रासायनिक ऊर्जा

(d) सौर ऊर्जा

28.

एक अश्व शक्ति (Horse

Power) बराबर होती है-

(a) 1000 वॉट

(b) 500 वॉट

(c) 6.670×10° Nm2/kg2

(c) 600 वॉट

(d) 746 वॉट

(d) 6.67x10-12 Nm2/kg2

29.

एक कैलोरी में कितने जूल होते हैं?

16.

1 न्यूटन कितने डाइन के बराबर होता है?

(a) 4 जूल

(b) 4.2 जूल

(a) 105

(b) 103

(c) 4.5 जूल

(d) 4.8 जूल

(c) 1010

(d) 108

17.

बल को गति का कोन सा नियम परिभाषित करता है?

(a) गति का दूसरा नियम

(b) केप्लर नियम

(c) आवोग्रादो नियम

(d) आर्किमिडीज का नियम

(a) चार्ल्स न्यूटन

(c) आइजक न्यूटन

(b) चार्ल्स बेबेज

(d) जॉन एडम्स

19.

18. गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत किसने दिया?

किसी वस्तु का द्रव्यमान 5 किग्रा. है तो वस्तु का भार होगा-

(a) 100N

(c) 20N

(b) SON

(d) 200N

20. पृथ्वी का पलायन वेग का मान कितना होता है?

मानव शरीर का फॉरिनहाइट में तापमान कितना होता है?

सेल्सियस तथा फॉरेनहाइट थर्मामीटर एक समान पाठ्यांक

दर्शाएंगे-

(a) 40°C पर

(c) 32°C पर

(d) 100°C पर

32. सूर्य में ऊर्जा का उत्पादन निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया के

फलस्वरूप होता है?

(a) हाइड्रोजन का संलयन

30.

(a) 37°F

(c) 98.6°F

(b) 310°F

(d) 29.6°F

31.

(b) 0°C पर

(b) नाभिकीय विखंडन

(c) गैसों का दहन

(d) हीलियम का संलयन

33.

25°C को केल्विन पैमाने में बदलिए-

(a) 12.1 km/sec

(b) 11.2m/sec

(a) 298K

(b) 273K

(c) 11.2 km/sec

(d) 11.2 km/h

(c) 289K

(d) 237K

21.

एक कुली 120 न्यूटन भार के एक बक्से को 2 मीटर की ऊँचाई तक उठाता है। उसके द्वारा किया गया कार्य कितना है?

34.

किसी ऊष्मागतिक प्रक्रम में

इस प्रकार परिवर्तन हो कि आयतन

नियत रहे तो इस प्रक्रम को

क्या कहते हैं?

(a) 60 जूल

(b) 120 जूल

(a) समतापीय प्रक्रम

(b) समआयतनिक प्रक्रम

(c) 240 जूल

(d) 180 जूल

(c) समदाबीय प्रक्रम

(d) उपर्युक्त सभी

22.

वृत्ताकार पथ में किए गए कार्य का मान होता है-

35.

एक कंपन में लगा समय क्या कहलाता है?

(a) ऋणात्मक

(b) धनात्मक

(a) आयाम

(b) आवर्तकाल

(c) शून्य

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(c) तरंगदैर्ध्य

(d) आवृत्ति

23.

1 अर्ग का मान होता है-

36.

(a) 107 जूल

(b) 105 जूल

(c) 107 जूल

(d) 4.2 जूल

श्रव्य ध्वनि की आवृत्ति कितनी होती है?

(a) 20 Hz से कम

(b) 20 Hz से 20 हजार Hz के मध्य

24.

कार्य करने की दर क्या कहलाती है?

(c) 20 हजार Hz से ज्यादा

(a) ऊर्जा

(b) वेग

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(c) शक्ति

(d) बल

37.

'सोनार' का पूर्ण रूप है-

25.

आइंस्टीन ने ऊर्जा एवं द्रव्यमान को किस समीकरण के माध्यम

(a) साउंड नेविगेशन एंड रेजिंग

से बताया?

(a) E = mc2

(c) E = = mv2

Im

26.

गतिज ऊर्जा का व्यंजक (सूत्र) होता है-

(a) 1⁄2 me

(c) mgh

(b) सिस्टम ऑफ नेविगेशन एंड रिसर्च

(b) E = mv2

(c) सिस्टम इन नेवी एंड इन रिसीवर

(d) Enc 2

(d) साउंड नेविगेशन इन एयरक्राफ्ट रेंज

38.

(a) अवरक्त किरण

1

(b) mv2

(c) दृश्य किरण

39.

(a) आवृत्ति

(d) mv

(c) प्रत्यास्थता

305

सी.टी. स्केन में किस किरण का उपयोग किया जाता है?

एक आवर्तकाल में तरंग द्वारा तय की गई दूरी कहलाती है-

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(b) अल्ट्रासोनिक किरण

(d) एक्स-किरण

(b) तरंगदैर्ध्य

उत्कर्ष प्रकाश

40.

अपने ��ड़ान पथ में अवरोधकों की पहचान करने के लिए चमगादड़ 51. निम्नलिखित तंरणों में से कौन सी एक का उपयोग करते हैं?

चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक होता है-

(a) टेस्ला

(b) न्यूटन

(a) अवश्रव्य तरंगें

(b) पराश्रव्य तरंगें

(c) गॉउस

(d) डाइन

(c) रेडियो तरंगें

(d) सूक्ष्म तरंगें

52.

फैराडे ने विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से संबंधित कितने नियम दिए?

41.

श्रेणीक्रम संयोजन के भिन्न-भिन्न प्रतिरोधों में विद्युतधारा का

(a) 1

(b) 2

मान होता है-

(c) 3

(d) 4

(a) समान

53.

(b) अलग-अलग

(a) N से 5 की ओर

(c) निर्धारित नहीं किया जा सकता

(c) कोई दिशा नहीं

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

54.

42.

यदि प्रतिरोध को दुगुना कर दिया जाए तो विद्युत धारा पर क्या

प्रभाव पड़ता है?

(a) दुगुनी हो जाएगी।

(b) आधी हो जाएगी।

(b) अनन्त पर

(c) चार गुनी हो जाएगी।

(d) आठ गुनी हो जाएगी।

43.

हमारे घरों में जो विद्युत की सप्लाई की जाती है वह कितने वॉल्ट

तथा हर्ट्ज (Hz) पर होती है?

55.

(a) 220V तथा 50Hz

(b) 200V तथा 25Hz

(c) 300V तथा 50Hz

(d) 500V तथा 60Hz

44. विद्युत मोटर किस सिद्धान्त पर आधारित है?

चुम्बक के बाहर चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा होती है-

(d) a व b दोनों

जब कोई वस्तु अवतल दर्पण में फोकस बिन्दु पर स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा-

(a) फोकस बिन्दु पर

(c) वक्रता केन्द्र पर

(d) फोकस दूरी व वक्रता केन्द्र के मध्य

आँखों की वक्रता (Cornea ) की सममिति में कमी होने पर कौन-सा दोष उत्पन्न होता है?

(a) अबिन्दुकता (Astigmatism)

(b) जरा दृष्टि दोष (presbyopia)

(c) निकट दृष्टि दोष (short sightedness)

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

खतरों के संकेत किस प्राकृतिक परिघटना के कारण लाल रंग

के बनाये जाते हैं?

(b) S से N की ओर

(a) पारस्परिक प्रेरण

56.

(b) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण

(c) ऊष्मीय प्रभाव

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(a) अपवर्तन

(b) प्रकीर्णन

45.

एक घंटे के समय में 10A के धाराप्रवाह से स्थानान्तरित होने

(c) परावर्तन

(d) विवर्तन

वाले विद्युत आवेश की मात्रा क्या है?

57.

यदि दो दर्पणों के बीच का कोण 60° हो तो बनने वाले प्रतिबिंबों

की संख्या कितनी होगी?

(a) 6.4 x 104 C

(b) 2.4 x 104 C

(c) 10 x 10 C

(a) 6

(d) 3.6 x 10 C

(b) 4

46. क्यूरी ताप वह ताप है, जिस पर कोई चुम्बक-

(c) 5

(d) 8

58.

(a) चुम्बकीय गुण प्राप्त करता है।

प्रकाश की चाल का क्रम बताइए-

(b) चुम्बक अत्यधिक मात्रा में चुम्बकीय गुणों को प्राप्त करता है।

(a) गैस द्रव निर्वात ठोस

(c) चुम्बकीय गुण खो देता है।

(b) ठोस निर्वात गैस द्रव

(d) उपर्युक्त सभी

(c) निर्वात गैस द्रव ठोस

47. पृथ्वी पर चुम्बकीय बल रेखाएँ गमन करती है-

(d) ���्रव गैस ठोस निर्वात

(a) उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की तरफ

59.

मृग मरीचिका के दिखाई देने का कारण है-

(c) a व b दोनों

(b) दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की तरफ

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

48. गॉउस, टेस्ला किस भौतिक राशि के मात्रक हैं?

(a) प्रकाश का परावर्तन

(b) प्रकाश का अपवर्तन

(c) प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

वाहनों के पार्श्व/पश्च दृश्य देखने के लिए कौन-से दर्पण का प्रयोग

किया जाता है?

(a) विद्युत धारा

(b) ज्योति तीव्रता

60.

(c) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता

(d) चुम्बकीय क्षेत्र

49. चुम्बकीय फलक्स को मापने

के लिए कौन-सी इकाई प्रयोग में

(a) अवतल दर्पण

ली जाती है?

(c) समतल दर्पण

(b) उत्तल दर्पण

(d) द्वि उत्तल दर्पण

(a) ओम

(b) वेबर

61.

मोतियाबिंद के उपचार में प्रयुक्त लेंस है-

(c) एम्पीयर

(d) वोल्ट

(a) बेलनाकार लेंस

50.

प्रेरकत्व का मात्रक क्या है?

(b) उत्तल लेंस

(a) केल्विन

(b) ल्यूमैन

(c) हेनरी

(d) कैण्डेला

(c) अवतल लेंस

(d) इंट्रा ओकुलर लेंस

306

द्वारा

में

62. लेन्स की क्षमता होती है- (a) फोकस दूरी के समानुपाती (b) फोकस दूरी के व्युत्क्रम

(c) वक्रता त्रिज्या के व्युत्क्रम

(d) वक्रता त्रिज्या के समानुपाती

उत्कर्ष प्रकाश

73.

फैक्स प्रणाली का आविष्कार किया गया था।

(a) अलेक्जेंडर बेल, 1843

(b) गुग्लिल्मो मार्कोनी, 1903 (c) थॉमस एडिसन, 1895

(d) जॉन लोगी बेयर्ड, 1925

रिवॉल्वर (Revolver) के खोजकर्ता है-

63.

हमें वास्तविक सूर्योदय से कुछ मिनट पूर्व ही सूर्य दिखाई देने का

कारण है-

74.

(a) प्रकाश का प्रकीर्णन

(a) सैमुअल कोल्ट

(b) प्रकाश का विवर्तन

(c) जे. पार्किन्स

64.

(c) प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन

(d) प्रकाश का अपवर्तन

सामान्य मानव नेत्र के लिए दूर बिन्दु होगा-

(a) 25 सेमी. पर

(b) 50 सेमी. पर

(b) फ्रैंक-हिटले

(d) डेवार

75. एडिसन ने किसका आविष्कार किया?

(a) मोटरकार

(c) वाष्प टरबाइन

76. कैल्कुलेटर के खोजकर्ता-

(a) पास्कल

(c) एडिसन

(b) ग्रामोफोन

(d) टेपरिकॉर्डर

(b) गैलीलियो

(d) युन्सेन

टेलीफोन का आविष्कार किसने किया?

(c) 25 सेमी. और अनन्त के बीच में

(d) अनन्त पर

77.

65.

सर्वप्रथम नाभिकीय विखण्डन की सहायता से न्यूक्लियर

(a) थॉमस एल्वा एडिसन

रिएक्टर का निर्माण किसने किया?

(b) अलेक्जेंडर विलियम

(a) एनरिको फर्मी

(c) एकरमैन

(b) ओटोहेन व स्ट्रॉसमैन

(d) ग्राहम बेल

(c) हेनरी बेकुरल

Answer Key

(d) क्यूरी दंपति

1. [a]

2. [b]

3. [a]

4. [d]

5. [a]

66.

नाभिकीय रिएक्टर में न्यूट्रॉन को अवशोषित करने वाला तत्त्व है-

6. [b]

7. (a)

8. [a]

9. (c)

10. [C]

(a) सीसा

(b) यूरेनियम

11. [b]

12. [c]

13. [a]

14. [a]

15. [a]

(c) जस्ता

(d) कैडमियम

16. (a)

17. (al

18. (c)

19. [b]

20. [c)

67. हाइड्रोजन बम आधारित होता है-

21. [c]

22. (c)

23. [C]

24. [C]

25. [a]

(a) नाभिकीय संलयन

26. (b)

27. (b)

28. [d)

29. [b]

30. (c)

(b) नाभिकीय विखण्डन

31. [a]

32. [a]

33. (a)

34. [b]

35. [b]

(c) a व b दोनों

36. [b]

37. [a]

38. [d]

39. [b]

40. [b]

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

41. (a)

42. [b]

43. [a]

44. [b]

45. [d]

68.

नाभिकीय रिएक्टर में मंदक के रूप में किसका उपयोग किया

46. [c]

47. [b]

48. (d)

49. [b]

50. [C]

जाता है?

51. [a]

52.

[b]

53. (a)

54. [b]

55. (a)

(a) साधारण जल

(b) भारी जल (D2O)

56. [b]

57. [c]

58. [C]

59. [C]

60. [b]

(c) द्रव अमोनिया

(d) द्रव हाइड्रोजन

61. [d]

62. [b]

63. [d]

64. [d)]

65. (a)

66. (d)

67. (a)

68. [b]

69. [a]

70. [b]

69.

रेडियोसक्रियता की खोज किसने की?

(a) हेनरी बेक्वेरेल

(b) क्यूरी दंपती

71. [d]

72. (d)

73. [a]

74. (a)

75. [b]

76. (a)

77. [d]

(c) एनरिको फर्मी

(d) ओटोहेन

70.

जाते हैं-

एक रेडियोधर्मी तत्त्व जिसके भारत वर्ष में बड़े भण्डार पाए

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code स्केन करें-

(a) यूरेनियम

(b) थोरियम

(c) रेडियम

(d) प्लूटोनियम

71.

लेजर किरणों (LASER) के आविष्कारक हैं-

(a) गैलीलियो

(b) थिमोनियर एवं इलियास

(c) टोरीसेली

(d) थियोडोर मैमेन

72. आधुनिक कंप्यूटर के जनक के रूप में कोन जाने जाते हैं?

(a) चार्ल्स बेबेज

(c) जॉन वॉन न्यूमैन

(b) हॉवर्ड ऐकेन

goo

(d) एलन ट्यूरिंग

307

.

.

सामान्य परिचय

रसायन विज्ञान

कैमेस्ट्री शब्द की उत्पत्ति मिस्र के कीमिया शब्द से हुई, जिसका अर्थ काला रंग होता है।

विज्ञान की वह शाखा, जिसके अन्तर्गत पदार्थों की रासायनिक संरचना (Structure), संघटन (Composition), गुणधर्मों (Properties) तथा परस्पर रासायनिक अभिक्रियाओं और उनके परिणामों का अध्ययन किया जाता है।

भारतीयों को हड़प्पाकाल से ही रसायन विज्ञान एवं रसायन प्रौद्योगिकी का ज्ञान था, उदाहरण के तौर पर हड़प्पावासी धातुकर्म तकनीकी के उपयोग में सिद्धहस्त थे। हड़प्पावासियों को सोना, चाँदी, ताँबा, टिन आदि धातुओं का ज्ञान था।

भारतीय वैदिक साहित्य में धातु, धातुकर्म, द्रव्यों का दहन, औषधियों आदि से संबंधित रासायनिक तथ्यों का उल्लेख मिलता है।

5वीं शताब्दी के भारतीय वैज्ञानिकों, यथा- कणाद (परमाणुवाद के जनक), नागार्जुन (रस विज्ञान के जनक), सुश्रुत (शल्य चिकित्सा के जनक) आदि का रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान है। यूरोप में रसायन विज्ञान का प्रारम्भ 12वीं शताब्दी में थियोफिलस से हुआ। जिसके बाद 15वीं- 16 शताब्दी में पैरासेलम ने औषधि रसायन के क्षेत्र में काम किया।

18वीं शताब्दी के फ्रांसीसी रसायनशास्त्री एन्टोनी लेवोशियर को आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक माना जाता है। लेवोशियर ने 1778 ई. में ऑक्सीजन तथा 1783 ई. में हाइड्रोजन

.

की पहचान की तथा उनका नामकरण किया।

कार्बनिक रसायन के जनक बर्जिलियस को माना जाता है।

भारतीय रसायन के जनक प्रफुल्ल चन्द रॉय को माना जाता है।

रसायन विज्ञान में संबंधित प्रमुख आविष्कार

-

-

-

Na

Sodium

Natrium

K

Potassium

Kalium

Cu

Copper

Cuprum

Au

Gold

Aurum

Fe

Iron

Ferrum

Pb

Lead

Hg

Mercury

Plumbum Hydragyrum

पदार्थ

वह संरचना जिसमें भार हो तथा वह स्थान घेरती है, पदार्थ कहलाती है। पदार्थों के अभिलक्षण

प्रत्येक पदार्थ का स्वयं का एक आयतन, द्रव्यमान एवं घनत्व होता है। प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। ये छोटे-छोटे कण पदार्थ के अवयवी कण (अणु या परमाणु) होते हैं।

इन अवयवी कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल पाया जाता है। पदार्थ का वर्गीकरण

रासायनिक आधार पर

I.

शुद्ध पदार्थ शुद्ध पदार्थ को दो भागों में विभाजित किया गया है- i. तत्त्व-

+

ऐसा पदार्थ जिसमें सभी कण समान हों अर्थात् एक ही प्रकार के कणों के समूह से बने होते हैं, तत्त्व कहलाते हैं; उदाहरण- हाइड्रोजन, हीलियम, लीथियम आदि ।

आधुनिक आवर्त सारणी में 118 तत्त्वों को स्थान दिया गया है। तत्त्व धातु, अधातु एवं उपधातु किसी भी रूप में हो सकते हैं। A. धातु

+

1.

इलेक्ट्रॉन जे. जे. थॉमसन

2.

प्रोटॉन गोल्डस्टीन

3.

न्यूट्रॉन जेम्स चैडविक

4.

परमाणु स���द्धांत जॉन डॉल्टन

5.

परमाणु क्रमांक मोजले

6.

आधुनिक आवर्त सारणी मोजले

7.

.

8.

नाभिक रदरफॉर्ड

9.

इलेक्ट्रॉन आवेश मिलिकेन

10.

अष्टक नियम न्यूलैण्डस

समस्थानिक सॉडी

-

11. रेडियो सक्रियता हेनरी बेकुरल

12. कृत्रिम रेडियो सक्रियता जूलियट

तत्त्वों के लेटिन नाम -

लैटिन भाषा Wolfram

प्रतीक

तत्त्व

W

Tungsten

Sn

Tin

Stannum

Sb

Antimony

Stibium

Ag

Silver

Argentum

308

+

ऐसे तत्त्व जो इलेक्ट्रॉन को त्याग कर धनायन का निर्माण करते हैं, धातु कहलाते हैं।

धातु में विशेष चमक होती है जो मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण पाई जाती है।

धातु में तन्यता का गुण पाया जाता है।

धातुएँ ताप और विद्युत की सुचालक होती हैं।

अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ साधारण ताप पर जल से अभिक्रिया करती हैं।

B. अधातु तत्त्व

+

वे तत्त्व जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं तथा ऋणायन बनाते

हैं, अधातु कहलाते हैं।

अधातु विद्युतऋणी तत्त्व होते हैं।

सामान्यतः अधातुओं में चमक नहीं होती है।

इनमें तन्यता का गुण नहीं पाया जाता है।

यह आघातवर्धनीय नहीं होती है।

अधातुएँ अधिकतर कुचालक प्रवृत्ति की होती हैं।

अधातुओं की अवस्थाएँ

+

उत्कर्ष प्रकाश

आयोडीन, फॉस्फोरस, सल्फर आदि ठोस अवस्था में पाए

जाते हैं।

ब्रोमीन द्रव अवस्था में पाया जाता है।

हाइड्रोजन, क्लोरीन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा अक्रिय गैसें गैस अवस्था में पाई जाती हैं।

उपधातु अवस्था

+

ii. यौगिक

+

वे तत्त्व जिनके गुण धातु तथा अधातु के मध्य होते हैं, उपधातु कहलाते हैं; उदाहरण- बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si). जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक ( As), एंटीमनी ( Sb ), टेल्यूरियम (Te), पोलोनियम (Po) आदि ।

दो या दो से अधिक तत्त्वों को निश्चित अनुपात में मिलाने से यौगिक बनते हैं; जेसे जल / H2O (हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन को 2:1 में मिलाने से जल बनता है।)

यौगिकों को पुनः दो भागों में बाँटा जा सकता है-

A. कार्बनिक यौगिक

+

ऐसे यौगिक जिनमें कार्बन अनिवार्यतः होता है, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं; जैसे-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा । B. अकार्बनिक यौगिक

ऐसे यौगिक जिनमें कार्बन नहीं पाया जाता है, अकार्बनिक यौगिक कहलाते हैं; जैसे- NaCl, Na2CO3

II मिश्रण जब दो या दो से अधिक पदार्थ परस्पर मिलाए जाएँ एवं उनके मध्य कोई रासायनिक क्रिया न हो तो उसे मिश्रण कहते हैं। मिश्रण पदार्थ को दो भागों में विभक्त किया गया है-

i.

समांगी मिश्रण

ऐसा मिश्रण जिसमें पदार्थ पूरी तरह परस्पर घुल जाते हैं एवं अन्त में एक ही प्रावस्था प्राप्त होती है, समांगी मिश्रण कहलाते

हैं; उदाहरण- जल तथा शक्कर का मिश्रण एवं जल तथा नमक का मिश्रण आदि ।

समांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं-

मिश्रण घटक पदार्थों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर

उन्हें पृथक् करने के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं-

1.

+

2.

+

क्रिस्टलीकरण / रवाकरण

किसी विलयन [Solution] को ठण्डा करने पर विलयन में उपस्थित पदार्थों का क्रिस्टल के रूप में बदल जाना क्रिस्टलीकरण कहलाता है।

इस विधि द्वारा अकार्बनिक क्रिस्टल पदार्थों को मिश्रण से पृथक् कर लेते हैं।

शक्कर व नमक को एथिल एल्कोहॉल में घोलकर 75° सेन्टीग्रेड पर गर्म करके मिश्रण से पृथक् कर लिया जाता है। आसवन [Distillation]

किसी द्रव मिश्रण / विलयन के घटक पदार्थों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर हो तो घटकों को आसवन द्वारा पृथक् किया जा सकता है।

कम क्वथनांक वाले पदार्थ जल्दी वाष्पित हो जाते हैं जिन्हें संघनन द्वारा ठण्डा कर शुद्ध अवस्था में प्राप्त कर लेते हैं। आसुत जल (Distill Water) को इसी विधि से तैयार करते हैं। 3. प्रभाजी आसवन [Fractional Distillation]

+

+

4.

5.

ऐसा मिश्रण जिसके घटक पदार्थों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर न हो उन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् कर लेते हैं।

कच्चे तेल का शुद्धीकरण प्रभाजी आसवन द्वारा करते हैं जिसमें अलग-अलग कोष्ठों में अलग-अलग तापमानों पर गैसें ईथर, केरोसीन, बेंजीन, डीजल, पेट्रोल, ग्रीस, ऑयल, मोम आदि प्राप्त होते हैं।

भाप आसवन [Steam Distillation]

ऐसे पदार्थ जो जल में अघुलनशील हो तथा गर्म करने पर जल्दी वाष्पित होने लगे तथा अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाए उन्हें इस विधि द्वारा पृथक् किया जाता है; उदाहरण- एसीटोन, एल्डिहाइड, मेथिल एल्कोहॉल आदि ।

वर्णलेखिकी

यदि मिश्रण के घटक पदार्थों का अधिशोषण अलग-अलग हो तो उन्हें वर्णलेखिकी के द्वारा मिश्रण से पृथक् कर लेते हैं; जैसे- अलग-अलग रंगों के मिश्रण अथवा स्याही से विभिन्न रंगों को पृथक् करना।

1. जल तथा एल्कोहॉल

2. अक्रिय गैसों का मिश्रण

3. मिश्र धातु

जैसे- पीतल, काँसा, गनमेटल इत्यादि ।

6.

निस्पंदन :-

ii. विषमांगी मिश्रण

ऐसा मिश्रण जिसमें घटक परस्पर पूर्ण मिश्रित (विलेय) नहीं होते

हैं अर्थात् पदार्थों की अलग-अलग प्रावस्था दिखाई देती है,

विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं।

उदाहरण-

1. जल तथा मिट्टी का मिश्रण

2. रेत तथा सल्फर का मिश्रण

3. रेत तथा लोहे के बुरादे का मिश्रण

4. दाल चावल

5. तेल तथा जल का मिश्रण

मिश्रण के पृथक्करण की विधियाँ

मिश्रण के घटक अवयव मिश्रण में भी अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं

अत: इन्हें विभिन्न पृथक्करण / शुद्धीकरण विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है।

+

विलयन में अघुलनशील बड़े आकार की अशुद्धियों को फिल्टर मेम्ब्रेन द्वारा पृथक् किया जाता है।

सामान्य रूप से जल को छानना व भूमिगत जल का शुद्धीकरण इसी विधि द्वारा किया जाता है।

नोट:- मिश्रण में से लोह या चुम्बकीय पदार्थों को चुम्बकीय पृथक्करण द्वारा अलग कर लेते हैं।

अवसादन, इसके अंतर्गत जल में उपस्थित अशुद्धियों को फिटकरी (Alum) की सहायता से तली में अवसादित कर पृथक् कर लेते हैं।

भौतिक अवस्था के आधार

पदार्थ के कणों में उपस्थित अन्तराण्विक आकर्षण बल के आधार पर पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं-

वैज्ञानिक प्रयोगों एवं खोजों के आधार पर पदार्थ की दो और अवस्थाएँ खोजी गई हैं- 1. प्लाज्मा, 2. बोस-आइन्स्टीन कन्डन्सेट (B.E.C.)

309

अत: पदार्थ की कुल 5 अवस्थाएँ ज्ञात हैं-

I.

ठोस अवस्था:-

+

उत्कर्ष प्रकाश

वैज्ञानिक प्रयोगों एवं खोजों के आधार पर-

प्लाज्मा

I.

+

प्लाज्मा की खोज विलियम क्रुक्स ने की।

यह पदार्थ की सबसे व्यवस्थित अवस्था है। ठोस अवस्था में पदार्थ के अवयवी कणों के मध्य प्रबल अन्तराण्विक आकर्षण बल पाया जाता है जिसके कारण ठोस कण अत्यधिक नजदीक होते हैं एवं एक निश्चित ज्यामिति बनाते हैं।

ठोस का आकार आयतन एवं घनत्व निश्चित होते हैं। ठोस पदार्थ असम्पीड्य होते हैं।

ठोस की अवस्था ताप के कारण परिवर्तित होती है किन्तु दाब के कारण ठोस अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है इसलिए ठोस असम्पीड्य होते हैं; उदाहरण बर्फ को ताप देने पर वह जल में परिवर्तित हो जाता है।

ठोस सामान्यतया कठोर होते हैं।

ठोस में बहने का गुण नहीं पाया जाता है (अपवाद अक्रिस्टलीय ठोस जैसे काँच में बहने का गुण विद्यमान होता है, यह सामान्यतया धीरे-धीरे बहते हैं इस कारण इन्हें अतिशीतित द्रव अथवा आभासी ठोस कहा जाता है।)

ठोस में उच्च अन्तराण्विक आकर्षण बल के कारण इनका गलनांक उच्च होता है। उदाहरण पत्थर, बर्फ, पेन, चॉक, चीनी आदि।

ठोस का वर्गीकरण ज्यामिति के आधार पर ठोस दो प्रकार के होते हैं-

1.

क्रिस्टलीय ठोस ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना निश्चित होती है, क्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं; उदाहरण- नमक, हीरा, बर्फ, ग्रेफाइट

2. अक्रिस्टलीय ठोस ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना अनिश्चित होती है, अक्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं; उदाहरण- कोयला, काँच, रबड़, प्लास्टिक आदि ।

II. द्रव अवस्था-

पदार्थ की वह अवस्था जिसमें तरलता का गुण होता है, द्रव अवस्था कहलाती है।

+

द्रव अवस्था के गुण

द्रव पदार्थों का आकार अनिश्चित होता है। यह पात्र पर निर्भर करता है।

द्रव पदार्थ का आयतन निश्चित होता है।

द्रव पदार्थ में अवयवी कणों के मध्य आकर्षण बल कम

होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं।

द्रव असम्पीड्य होते हैं।

द्रव में बहने का गुण पाया जाता है।

III. गैसीय अवस्था

गैसीय अवस्था में पदार्थ के कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल का मान कम होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं। गैसीय पदार्थ का आकार अनिश्चित होता है। गैसीय पदार्थ का ���यतन अनिश्चित होता है। उदाहरण- वायु, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।

गैसें गर्म करने पर ठोस और द्रव की अपेक्षा अधिक फैलती हैं। क्योंकि इनमें द्रव और ठोस की अपेक्षा अन्तराण्विक बल दुर्बल होता है।

310

+

+

+

प्लाज्मा का नामकरण इरविन लेग्यूमर ने किया था।

प्लाज्मा लैटिन भाषा के शब्द प्लाज्मिक से लिया गया है जिसका अर्थ है- चमकता हुआ।

प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था है।

यह ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली अवस्था है। यह अवस्था आयनिक अवस्था होती है अर्थात् पदार्थ की एकमात्र अवस्था जिसमें आयन तथा इलेक्ट्रॉन परस्पर स्वतंत्र रहते हैं। प्लाज्मा पदार्थ की एकमात्र अवस्था है जिसमें पूर्ण रूप से विद्युत का चालन होता है।

रेडियो तरंगों के लिए प्लाज्मा उत्तरदायी है।

उच्च ताप के कारण तारों पर भी प्लाज्मा अवस्था पाई जाती है।

नियॉन बल्ब तथा CFL में प्लाज्मा का उपयोग किया जाता है। II. बोस-आइन्स्टीन कन्डेन्सेट (B.E.C.)

+

+

+

+

यह पदार्थ की 5वीं अवस्था है।

इसका नाम भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस एवं अल्बर्ट आइन्स्टीन के सम्मान में रखा गया।

यदि किसी गैस को परम शून्य ताप, अति उच्च दाब पर गर्म एवं उच्च वोल्टता प्रदान की जाती है तो प्राप्त अवस्था B.E.C. होती है। आइंस्टीन की द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण के आधार पर यह अवस्था प्राप्त होती है।

वर्ष 2001 में एरिक कर्नेल, उल्फगैंग केटरले एवं कार्ल.ई.वैमेन ने सर्वप्रथम B.E.C. अवस्था बनाई। इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पदार्थों में अवस्था परिवर्तन

ताप व दाब के आधार पर पदार्थों में अवस्था परिवर्तन संभव है। गलन, हिमन, वाष्पन, संघनन, ऊर्ध्वपातन एवं निक्षेपण अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाएँ हैं।

द्रव

हिमन

संघनन

/ गलन

वाष्पन

उर्ध्वपातन

ठोस

निक्षेपण

गैस

गलन (Melting) - किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का द्रव अवस्था में बदलना, गलन कहलाता है; उदाहरण बर्फ का पानी में परिवर्तन। हिमन (Freezing) - किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का ठोस अवस्था में परिवर्तन, हिमन कहलाता है; उदाहरण पानी का बर्फ बनना। वाष्पन (Evaporation) - किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, वाष्पन कहलाता है; उदाहरण जल का वाष्प

बनना।

संघनन (Condensation) :- किसी पदार्थ की गैसीय अवस्था का द्रव अवस्था में परिवर्तन होना, संघनन कहलाता है; उदाहरण- जलवाष्प का जल में परिवर्तित होना।

+

उत्कर्ष प्रकाशन

निक्षेपण (Deposition ) - किसी गैसीय अवस्था का सीधा ठोस अवस्था में परिवर्तन होना, निक्षेपण कहलाता है; उदाहरण- कार्बन डाईऑक्साइड गैस का ठोस कार्बन डाईऑक्साइड (शुष्क बर्फ) में बदलना।

ऊर्ध्वपातन (Sublimation ) - किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, ऊर्ध्वपातन कहलाता है; उदाहरण- कपूर, नौसादर, आयोडीन आदि।

पदार्थ के गुण

1. भौतिक गुण पदार्थ के आकार, आयतन घनत्व एवं द्रव्यमान को पदार्थ के भौतिक गुणों में सम्मिलित किया जाता है।

2. रासायनिक गुण - पदार्थ के अणुसूत्र, रासायनिक क्रियाएँ, अम्लता, क्षारकता इत्यादि को पदार्थ के रासायनिक गुणों में सम्मिलित किया गया है।

000

परमाणु की संरचना

महर्षि कणाद के अनुसार प्रत्येक पदार्थ सरल एवं अपरिवर्तनीय कणों से बना है, ये कण परमाणु हैं।

+

+

परमाणु [Atom] जो कि ग्रीक भाषा के शब्द Atomio तथा लैटिन भाषा के शब्द Atomos से बना है जिसका अर्थ है अविभाज्य कण । डॉल्टन के अनुसार प्रत्येक पदार्थ अविभाज्य कणों से बना है ये अविभाज्य कण परमाणु हैं।

डॉल्टन का परमाणुवाद

प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे अविभाज्य कणों से बना होता है, ये अविभाज्य कण परमाणु कहलाते हैं।

एक ही तत्त्व के समस्त परमाणु गुणों में समान होते हैं; जैसे- रंग, आकार, रासायनिक क्रिया, द्रव्यमान आदि।

भिन्न-भिन्न तत्त्वों के परमाणुओं के गुण भिन्न-भिन्न होते हैं। जब दो या अधिक परमाणु परस्पर संयोग करते हैं तो अणु अथवा यौगिक का निर्माण होता है।

परमाणु को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।

परमाणु के अवपरमाण्विक कण

+

परमाणु में मुख्य रूप से तीन अवपरमाण्विक कण पाए जाते हैं- इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन, न्यूट्रॉन

इन मूल तत्त्वों के अतिरिक्त अन्य अवपरमाण्विक कण पॉजिट्रॉन, न्यूट्रिनो एंटीन्यूट्रिनो, मेसॉन इत्यादि पाए जाते हैं।

1. इलेक्ट्रॉन:-

इलेक्ट्रॉन के खोजकर्ता जे. जे. थॉमसन (टॉमसन) हैं। ये ऋणावेशित प्रकृति के कण हैं।

इन पर आवेश का मान - 1.6 x 10-19 कूलॉम होता है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 x 1031 Kg या 9.1 x 10-28 g होता है।

II. प्रोटोन:-

प्रोटोन के खोजकर्ता गोल्डस्टीन हैं।

इसकी प्रकृति धनावेशित होती है।

इसके आवेश का मान + 1.61019 कूलॉम होता है। प्रोटोन का द्रव्यमान 1.67262 x 10-27 kg होता है।

311

III. न्यूट्रॉन

+

न्यूट्रॉन के खोजकर्ता जेम्स चैडविक हैं।

+

न्यूट्रॉन उदासीन प्रकृति का कण है।

+

इसके आवेश का मान शून्य होता है।

न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.67493 10-27 Kg होता है।

परमाणु के अन्य परमाण्विक कण:-

1. पॉजिट्रॉन

इसकी प्रकृति धनात्मक होती है।

+

इसकी खोज एण्डरसन ने की थी।

+

इसकी प्रकृति धनावेशित है।

इसका आवेश एवं द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के समान होता है किन्तु

पॉजिट्रॉन को एंटीइलेक्ट्रॉन भी कहते हैं।

II. एंटीप्रोटोन

+

इसके खोजकर्ता सेगरे हैं।

+

एक ऋणावेशित कण है।

+ इसका आवेश व द्रव्यमान प्रोटॉन के समान होता है।

III. मेसॉन

+ इसकी खोज युकावा ने की थी।

+

यह धनावेशित, ऋणावेशित या उदासीन प्रकृति का होता है।

इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग 200 गुणा होता है।

IV. न्यूट्रिनो एवं एंटीन्यूट्रिनो

+

इनकी खोज पोलिंग ने की थी।

ये कण उदासीन होते हैं।

इनका द्रव्यमान नगण्य होता है किन्तु निश्चित नहीं होता है।

परमाणु क्रमांक

+

किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की संख्या, परमाणु क्रमांक कहलाती है।

इसे Z से प्रदर्शित करते हैं।

वैद्युतउदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन की संख्या समान होती है। परमाणु क्रमांक प्रोटॉन की संख्या या इलेक्ट्रॉनों की संख्या

उदाहरण- सोडियम के नाभिक में प्रोटॉन की संख्या 11 होती है अतः इसका परमाणु क्रमांक 11 है।

द्रव्यमान संख्या या परमाणु द्रव्यमान

किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की संख्या एवं न्यूट्रॉनों की संख्या का योग, द्रव्यमान संख्या कहलाता है।

द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या द्रव्यमान संख्या को A से दर्शाते हैं।

A=Z+n

न्यूट्रॉनों की संख्या (n) = A - Z

परमाणु का संकेतन

परमाणु को X से, परमाणु क्रमांक को Z से तथा परमाणु द्रव्यमान को A से निरूपित किया जाता है।

परमाणु का प्रतीकात्मक रूप =

समस्थानिक

2x

ऐसे तत्त्व जिनके परमाणु क्रमांक तो समान हो परन्तु द्रव्यमान संख्या भिन्न- भिन्न हो, समस्थानिक कहलाते हैं।

उदाहरण हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं-

प्रोटियम (H), ड्यूटीरियम (, H), ट्राइटियम (H)

समभारिक

उत्कर्ष प्रकाश

समान द्रव्यमान एवं भिन्न-भिन्न परमाणु क्रमांक वाले परमाणु,

समभारिक कहलाते हैं।

उदाहरण-

40

18

Ar तथा Ca आपस में समभारिक हैं।

समइलेक्ट्रॉनिक

40 20

ऐसे स्पीशीज जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान हो, समइलेक्ट्रॉनिक

कहलाते हैं।

11-110

Mg2+e= 12-2=10

Na' मेंe

All में 13-3 =

10

+

थॉमसन का परमाणु मॉडल

उपर्युक्त तत्त्व आपस में समइलेक्ट्रॉनिक हैं।

सर्वप्रथम दिया गया परमाणु मॉडल थॉमसन का परमाणु मॉडल था, इसे प्लम-पुडिंग या रेजिन पुडिंग मॉडल के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस मॉडल को तरबूज मॉडल कहते हैं। जिसके अन्तर्गत परमाणु धनावेशित गोला है जिसमें समान रूप से ऋणावेश

वितरित रहते हैं अर्थात् परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन होता है।

थॉमसन के मॉडल की कमियाँ

• यह मॉडल रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।

+

रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग की व्याख्या नहीं कर सका।

रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग:-

• इसे एल्फा प्रकीर्णन प्रयोग भी कहा जाता है।

+

रदरफोर्ड के सहयोगी गीगर तथा मार्सडेन थे। स्वर्ण पत्र की मोटाई 10-7 मीटर थी।

रदरफोर्ड ने स्वर्ण पत्र को ही चुना क्योंकि सोने की आघातवर्धनीयता अधिक होती है अर्थात् सोने की पतली शीट बनाई जा सकती है। उसने एल्फा कण के रूप में हीलियम का उपयोग किया क्योंकि हीलियम सबसे हल्की उत्कृष्ट गैस है।

रदरफोर्ड के प्रेक्षण:-

अधिकांश एल्फा कण सोने की पत्ती से विक्षेपित हुए बिना निकल गए। कुछ एल्फा कण कोण से विचलित हुए।

लगभग 20000 कणों में से एक एल्फा कण पुनः अपने पथ पर लौट आता है।

० कणों का प्रोत

लेड प्लेट फोटोग्राफी प्लेट एल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के निष्कर्ष

सोने की पत्नी

अधिकांश एल्फा कण सीधे निकल गए क्योंकि परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।

कुछ कणों का विक्षेपण प्रतिकर्षण के कारण हुआ अर्थात् परमाणु संपूर्ण धावेश संकेन्द्रित होता है। इस संपूर्ण धनावेश वाले भाग को नाभिक कहते हैं।

इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों तरफ वृत्ताकार पथ में चक्कर लगाते हैं, इन वृत्ताकार पथों को कक्षा या कक्षक कहा जाता है।

रदरफोर्ड मॉडल की कमियाँ

यह परमाणु मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका, क्योंकि मैक्सवेल की तरंग समीकरण से यदि इलेक्ट्रॉन सर्पिल पथ में गति करता है तो ऊर्जा क्षय के आधार पर अंत में इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जाएगा एवं परमाणु नष्ट हो जाएगा।

रदरफोर्ड का मॉडल रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका। बोहर का परमाणु मॉडल

i.

ii.

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में संशोधन करके बोहर ने परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।

बोहर के परमाणु मॉडल के विकास में 2 महत्त्वपूर्ण बिंदु-

विद्युत चुम्बकीय विकिरण का व्यवहार द्वैत प्रकृति का होता है अर्थात् विद्युत चुम्बकीय तरंग की प्रकृति कणीय एवं तरंग दोनों प्रकार की होती है।

परमाणु में इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा स्तर क्वांटीकृत होता है। विद्युत चुम्बकीय विकिरण की तरंग प्रकृति

जेम्स मैक्सवेल ने सर्वप्रथम आवेशित पिण्डों के मध्य अन्योन्य क्रियाएँ करवाई एवं स्थूल स्तर पर विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों की व्याख्या की। जब विद्युत आवेशित कर्णों की त्वरित गति कराते हैं तो एकांतरित विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होते हैं यह क्षेत्र तरंगीय रूप में होते हैं, इन्हें ही विद्युत चुम्बकीय विकिरण कहते हैं।

प्रकाश भी विकिरण के रूप में होता है किंतु पूर्व में न्यूटन ने प्रकाश की कणीय प्रकृति बताई, न्यूटन ने बताया कि प्रकाश, कणों के रूप में संचरित होता है इन कणों को क्वाण्टा या फोटॉन कहते हैं। सर्वप्रथम मैक्सवेल ने प्रकाश की तरंग प्रकृति बताई अर्थात् प्रकाश तरंगों का दोलायमान विद्युत एवं चुम्बकीय तरंगों से संबंधित हैं। विद्युत चुम्बकीय तरंग जटिल प्रकृति की होती है। विद्युत चुम्बकीय विकिरणों के गुण

+

दोलायमान आवेशित कणों द्वारा उत्पन्न विद्युत विकिरण एवं चुम्बकीय विकिरण परस्पर लम्बवत् होती है तथा इनके संचरण की दिशा भी लम्बवत् होती है।

इन्हें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात् ये निर्वात में भी गति कर सकती है।

विद्युत चुम्बकीय तरंगें भिन्न-भिन्न प्रकृति की होती हैं इनकी आवृत्ति एवं तरंगदैर्ध्य भी अलग-अलग होते हैं।

● विद्युत चुम्बकीय तरंग आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य, विकिरण की चाल, तरंग संख्या एवं आयाम दर्शाते हैं।

प्लांक का क्वाण्टम सिद्धान्त

परमाणु या अणु ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन विविक्त रूप में करते हैं, सतत रूप में नहीं करते हैं।

विकिरण की क्वाण्टम ऊर्जा उसकी आवृत्ति के समानुपाती होती है।

Εαν

E=hv

h = प्लांक स्थिरांक इसका मान 6.626 × 1034 Js होता है। क्वाण्टम, विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में उत्सर्जित या अवशोषित न्यूनतम ऊर्जा होती है।

312

विद्युत चुम्बकीय विकिरण की द्वैत प्रकृति

किसी सूक्ष्म कण की ऊर्जा EhD.

उत्कर्ष प्रकाश

कणीय प्रकृति के आइंस्टीन के द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण से

E=mc2.

.. (ii)

समीकरण 1 व 2 से

hD = mc2

v = [

h = mc2 λ

h

= mc

2

Ap=mAv Ax.m Av≥

4 x 2.

h

4x

h

4rmav

Av=

h 4mx.m

कणीय प्रकृति में चाल को v से दर्शाया जाता है-

h

C = V

= mv

(p = mv)

h

=p

h p=

p

कणीय प्रकृति

2 तरंगीय प्रकृति

वर्ष 1920 में डी ब्रोग्ली ने बताया कि द्रव्य भी प्रकाश के समान द्वैत प्रकृति दर्शाता है।

डी ब्रोग्ली सिद्धान्त

जब द्रव्य द्वैत प्रकृति दर्शाता है इसका अर्थ है कि द्रव्य के सूक्ष्म कण; जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि की कणीय एवं तरंगीय दोनों प्रकार की प्रकृति होती है।

द्रव्य के छोटे-छोटे कण तरंग के रूप में बहते हैं तथा तरंग का तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

Aa1

P

2=h P

h - प्लांक स्थिरांक

(p = mv)

A = h

mv

यहाँ hav को नियत करने पर,

Aa m

अर्थात् अधिक द्रव्यमान वाले कणों पर तरंग गुण लागू नहीं होता।

हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धान्त

बोहर का परमाणु मॉडल

+

परमाणु का सम्पूर्ण धनावेश उसके नाभिक में केन्द्रित होता है। बोहर के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर स्थाई वृत्ताकार पथ में चक्कर लगाते हैं। इन पर्थो की ऊर्जा निश्चित एवं भिन्न-भिन्न होती है। इन स्थाई वृत्ताकार पर्थो को ऊर्जा स्तर या कक्षा अथवा कोश कहा जाता है।

इन ऊर्जा स्रोतों को K, L, M, N या 1, 2, 3, 4 से दर्शाते हैं। जैसे-जैसे नाभिक से दूर जाते हैं, वैसे-वैसे कक्षा की ऊर्जा में वृद्धि होती है अर्थात् सबसे कम ऊर्जा प्रथम कक्षा K की होती है। जब निम्न ऊर्जा स्तर में उपस्थित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का अवशोषण करता है वह उच्च ऊर्जा स्तर में चला जाता है।

जब उच्च ऊर्जा स्तर में उपस्थित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन करता है। तो वह निम्न ऊर्जा स्तर में चला जाता है।

बोहर ने प्रत्येक कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या निश्चित की थी उसके अनुसार प्रत्येक कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n' होती है; जैसे- n=3 में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2 ( 3 ) अर्थात् 18 होती है। बोहर के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में चक्कर लगाता है जिनका कोणीय संवेग - का पूर्ण गुणज हो।

कोणीय संवेग, mvr=

h

2.r

nh

2r

m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान

=

V इलेक्ट्रॉन का वेग

=

कक्षा की त्रिज्या

h - प्लांक स्थिरांक n कक्षा की संख्या

बोहर के परमाणु मॉडल की कमियाँ

किसी निश्चित क्षण पर किसी कण के लिए स्थिति एवं संवेग का यथार्थ नोट:- मापन संभव नहीं है।

यदि स्थिति में अनिश्चितता Ax

संवेग में अनिश्चितता = Ap

h

AxAp≥

A x तथा Ap का गुणनफल प्लांक स्थिरांक की कोटि का होता है।

बोहर का परमाणु मॉडल एक से अधिक इलेक्ट्रॉनयुक्त स्पीशीज पर लागू नहीं होता है।

स्पेक्ट्रमी रेखाओं की सूक्ष्म संरचना में उपस्थित दिक् रेखाओं की व्याख्या नहीं कर सका।

जीमान प्रभाव और स्टार्क प���रभाव की भी व्याख्या नहीं कर सका। बोहर अपने परमाणु मॉडल के द्वारा परमाणुओं के रासायनिक बंधन से निर्मित अणुओं के निर्माण की व्याख्या नहीं कर सका।

जीमान प्रभाव:- चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन, जीमान प्रभाव कहलाता है।

० स्टार्क प्रभाव: विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन, स्टार्क प्रभाव कहलाता है।

क्वाण्टम संख्याएँ

313

उत्कर्ष प्रकाश

+

चक्रण कोणीय संवेग -

√5(5+1)

2x

चक्रण क्वाण्टम संख्या के दो मान

तथा

1 होते हैं।

2

1

दक्षिणावर्त चक्रण +

तथा वामावर्त चक्रण

होते हैं।

2

किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉन की स्थिति, कक्षक का आकार, कक्षक की ऊर्जा कक्षक का अभिविन्यास, कक्षक की स्थिति तथा चक्रण दर्शाने वाली आवश्यक संख्याएँ क्वाण्टम संख्याएँ कहलाती हैं। क्वाण्टम संख्याएँ चार प्रकार की होती हैं-

I.

मुख्य क्वाण्टम संख्या [n]

+

इस संख्या को बोहर ने बताया था।

यह संख्या कोश या कक्ष या कक्षक को दर्शाती है एवं कक्षक का आकार और कक्षक की ऊर्जा को भी दर्शाती है।

मुख्य क्वाण्टम संख्या का मान 1 से प्रारंभ होकर किसी भी पूर्णांक तक हो सकता है।

मुख्य क्वाण्टम संख्या को n से दर्शाते हैं।

n का मान बढ़ने पर कक्षकों की संख्या बढ़ती है।

किसी कोश में कक्षकों की संख्या = n

मुख्य क्वाण्टम संख्या का मान बढ़ने पर परमाणु का आकार बढ़ता है क्योंकि कोशों की संख्या बढ़ती है।

परमाणु का आकार बढ़ने पर या नाभिक से दूर जाने पर ऊर्जा

का मान बढ़ता है तथा परमाणु का स्थायित्व घटता है।

II. द्विगंशी क्वाण्टम संख्या [I] -

इस संख्या के बारे में सोमरफील्ड ने बताया।

यह संख्या उपकोश को दर्शाती है तथा बहुइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज की ऊर्जा को भी दर्शाती है।

यह संख्या कक्षक के त्रिविमीय आकृति को दर्शाती है। द्विगंशी क्वाण्टम संख्या को से दर्शाते हैं।

| का मान 0.......... (n-1) होता है।

| का मान न तो n के बराबर होता है न ही n से बड़ा होता है। इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कक्षक कोणीय संवेग पर निर्भर करती है। कक्षक कोणीय संवेग, द्विगंशी क्वाण्टम संख्या पर निर्भर करता है।

कक्षक कोणीय संवेग =

h

√(1+1)

2.r

5 कक्षक के लिए कक्षक

क्योंकि s के लिए = 0

कोणीय संवेग का मान शून्य होता है

III. चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या (m)

+

इस संख्या के बारे में लेण्डे ने बताया ।

यह संख्या किसी उपकोश से संबंधित कक्षकों की संख्या का निर्धारण करती है।

यह संख्या कक्षक के त्रिविम अभिविन्यास को दर्शाती है। अभिविन्यास:- जब परमाणु को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो गतिशील इलेक्ट्रॉनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र एवं बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के मध्य अन्योन्य क्रिया से परमाणु में उपस्थित उपकोश अनेक भागों में विभाजित हो जाते हैं, इसे अभिविन्यास कहा जाता है।

IV. चक्रण क्वाण्टम संख्या (s)

+

इस संख्या के बारे में उलहेनबैक तथा गाउटश्मिट ने बताया । यह संख्या इलेक्ट्रॉन के चक्रण को बताती है।

नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार चक्रण करते हैं। जैसे विभिन्न ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्रण करते हैं। चक्रण क्वाण्टम संख्या को 5 से दर्शाते हैं।

314

कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने का नियम

कक्षकों की ऊर्जा एवं स्थायित्व का ध्यान रखते हुए, कक्षकों में इलेक्ट्रॉन

भरने के लिए कई नियम दिए गए-

आफबी (आफबाऊ) का नियम

+

I.

ऑफबाऊ एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरना या कक्षकों का निर्माण करना।

विभिन्न परमाणुओं के विभिन्न कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों को कक्षकों की बढ़ती ऊर्जा क्रम में व्यवस्थित करते हैं या परमाणु में भिन्न-भिन्न कक्षकों को उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करते हैं।

(45)

(40)

(40)

(41

(56)

(50)

(54)

(Gr

कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने का क्रम

पाउली का अपवर्जन का नियम

किसी परमाणु में उपस्थित दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वाण्टम संख्याएँ समान नहीं होती हैं अथवा एक कक्षक में अधिकतम विपरीत चक्रण वाले दो इलेक्ट्रॉन, प्रथम इलेक्ट्रॉन के लिए चक्रण

1

क्वाण्टम संख्या + तथा द्वितीय के लिए है।

यदि इस कक्षक के लिए n 3 हों तो के मान 0, 1, 2 तथा m के मान -2, 1, 0, +1, +2 होंगे।

पाउली के अपवर्जन के नियमानुसार उपकोश में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन, p में 6, d मे��� 10 एवं f में 14 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

II. हुण्ड की अधिकतम बहुलकता का नियम

उत्कर्ष

हुण्ड के नियमानुसार, किसी भी कक्षक में इलेक्ट्रॉन का युग्मन तब तक नहीं हो सकता जब तक कि उपकोश के प्रत्येक कक्षक में समान चक्रण वाला एक-एक इलेक्ट्रॉन न भर जाए। उदाहरण- ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 होता है।

1s 1

152252 2po

2s

2p

1

हुण्ड का नियम s उपकोश पर लागू नहीं होता क्योंकि 5 उपकोश में एक ही कक्षक है।

III. (n+l) का नियम

इस नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉन पहले उस कक्षक में प्रवेश करता है जिसमें (n+l) का मान कम हो या इलेक्ट्रॉन को कक्षकों में भरने का क्रम (n+l) के बढ़ते क्रम में होता है।

उदाहरण-

n=3

I=1

_n+l=3+1

n+l = 4

तथा

n=3

1=2

n+l = 5

अत: यहाँ इलेक्ट्रॉन पहले n+ 1 = 4 में भरे जाएँगे।

यदि = 4 एवं

3 हो तो n+ 7 होगा, यदि n 5 एवं = 2 हो तो भी n+l 7 होगा। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन पहले उस कक्षक में प्रवेश करेगा जहाँ n का मान कम हो। IV. अर्द्धपूरित एवं पूर्णपूरित कक्षकों के स्थायित्व का नियम

अर्द्धपूरित कक्षक (p3, ds, f7 विन्यास) एवं पूर्णपूरित (ps, dog, f14 विन्यास) कक्षक अन्य कक्षकों की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं इसी कारण क्रोमियम का विन्यास 24Cr का विन्यास 1s 2 2522p6 3st 3p° 452 3d' न होकर 1st 252 2p63523p6 4513ds होता है।

स्थायित्व को बनाए रखने के लिए समान ऊर्जा वाले कक्षक से इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण हो जाता है।

आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

धनायन का विन्यास लिखने के लिए पहले उदासीन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखते हैं फिर धनावेश के बराबर इलेक्ट्रॉन निकाल देते हैं। उदाहरण- 13Al3*=1s22s22p6350 3p0

इसी प्रकार ऋणायन का विन्यास लिखने के लिए पहले उदासीन तत्त्व का विन्यास लिखते हैं तत्पश्चात् ऋणावेश के समान और इलेक्ट्रॉन भर देते हैं। उदाहरण- CI=1s22s22p63s2 3po

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का महत्त्व

+

तत्त्वों के रासायनिक व्यवहार जैसे परमाणुओं से अणु या यौगिक के निर्माण की व्याख्या संभव होती है।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्त्व के धात्विक व अधात्विक गुणों की व्याख्या संभव है।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्त्वों की क्रियाशीलता की व्याख्या संभव है।

2.

अणु

अणु दो या दो से अधिक परमाणुओं का समूह होता है, जो आपस में रासायनिक बंध द्वारा जुड़े होते हैं। अणु किसी तत्त्व अथवा यौगिक का वह सूक्ष्मतम कण है, जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है। अणुओं को दो भागों में बाँटा जा सकता है- 1. तत्त्वों के अणु 2. यौगिकों के

अणु

1. तत्त्वों के अणु :- किसी तत्त्व के अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं द्वारा संरचित होते हैं। ऑर्गन (Ar ), हीलियम (He) इत्यादि । जैसे- अनेक तत्त्वों के अणु उसी तत्त्व के केवल एक परमाणु द्वारा निर्मित होते हैं।

यौगिकों के अणु - भिन्न-भिन्न तत्त्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में परस्पर जुड़कर यौगिकों के अणु निर्मित करते हैं। उदाहरण: H2O परमाणुकता - किसी अणु की संरचना में प्रयुक्त होने वाले परमाणुओं की संख्या को उस अणु की परमाणुकता कहते हैं। उदाहरण ऑक्सीजन अणु दो ऑक्सीजन परमाणु से बनता है, इसलिए इसे द्वि-परमाणुक अणु कहते हैं।

आयन :-

आयन एक आवेशित परमाणु अथवा परमाणुओं का एक ऐसा समूह होता है जिस पर नेट आवेश विद्यमान होता है। यह ऋण आवेश या धन आवेश होता है। ऋण आवेशित आयन ऋणायन (anion) तथा धनावेशित आयन को धनायन (Cation) कहते हैं।

उदाहरण: धनावेशित आयन Na, K, Ca+2, Al3 आदि ऋणावेशित आयन CI, S3, OH आदि।

आवर्त सारणी

+

000

आवर्त सारणी

तत्त्वों को उनके गुणों के आधार वैज्ञानिक तकनीकी द्वारा व्यवस्थित करने पर सारणी प्राप्त होती है, जिसे आवर्त सारणी कहते हैं। वर्तमान आवर्त सारणी में 118 तत्त्वों को सम्मिलित किया गया है। डॉबेराइनर का त्रिक नियम (1817)

जब तत्त्वों को उनके गुणों के आधार पर तीन-तीन के समूहों में रखा जाता है, तो इसे त्रिक कहते हैं तथा इसी त्रिक में पहले एवं तीसरे परमाणु के परमाणु भारों का औसत दूसरे परमाणु के परमाणु भार के लगभग बराबर होता है, इसे डॉबेराइनर का त्रिक नियम कहते हैं। न्यूलैण्ड का अष्टक नियम (1865 )

इस नियम के अनुसार यदि तत्त्वों को उनके परमाणु भारों के वृद्धि क्रम में व्यवस्थित किया जाये तो प्रथम तत्त्व के गुण आठवें तत्त्व से ठीक उसी प्रकार मिलते हैं।

अक्रिय गैसों की खोज होने के पश्चात् यह नियम विफल हो गया। न्यूलैण्ड का नियम परमाणु क्रमांक 20 (Ca) तक लागू होता है। मेण्डेलीफ का आवर्ती नियम (1869)

: 315:

मेण्डेलीफ के अनुसार तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्तीफलन होते हैं अर्थात् यदि तत्त्वों को उनके परमाणु भारों के वृद्धि क्रम में व्यवस्थित किया जाये तो एक निश्चित अन्तराल के पश्चात् समान गुण वाले तत्त्व की पुनरावृति होती है।

उत्कर्ष प्रकाशन

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में 7 आवर्त तथा 8 वर्ग (group) होते हैं। 7 वर्गों को दो उपवर्गों A तथा B में विभक्त किया गया जबकि 8 वें वर्ग को अविभाजित रखा गया।

मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की कमियाँ

.

.

हाइड्रोजन का स्थान निश्चित नहीं था। इसके IA वर्ग में क्षारीय धातुओं के साथ तो कभी IV A वर्ग में कार्बन के साथ रखा गया। समस्थानिकों की स्थिति को आवर्त सारणी में कोई निश्चित स्थान नहीं था।

आवर्ती नियम का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया; जैसे:- पोटेशियम (K) का परमाणु भार ऑर्गन (Ar ) से कम होता है, फिर भी पोटेशियम को ऑर्गन के बाद रखा गया।

लेन्थेनॉईड तथा एक्टिनॉइड की स्थिति आवर्त सारणी निश्चित नही थी। इन्हें आवर्त सारणी के नीचे पृथक् रूप से रखा गया। आधुनिक आवर्त सारणी मोजले (1913)-

आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक पर आधारित हैं जिसकी खोज हेनरी मोजले ने की तथा एक नियम दिया जिसे मोज़ले का आवर्ती नियम कहते हैं।

इस नियम के अनुसार, तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्तीफलन होते हैं अर्थात् यदि तत्त्वों को उनके परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम में व्यवस्थित किया जाये तो निश्चित अन्तराल के पश्चात् समान गुण वाले तत्त्व की पुनरावृत्ति होती है।

3-Block Elements

आधुनिक आवर्त सारणी में 7 आवर्त तथा 18 वर्ग बनाये गये हैं 18 वें वर्ग को शून्य समूह भी कहते हैं।

आवर्त सारणी में तत्त्वों का वर्गीकरण:-

I.

+

II.

+

आवर्त सारणी में चार प्रकार के तत्त्व होते हैं-

S- खण्ड के तत्त्व

वे तत्त्व जिसमें अन्तिम इलेक्ट्रॉन कक्षक में भरा जाता है, 5- खण्ड के तत्त्व कहलाते हैं।

इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns / ns' होता हैं।

हाइड्रोजन को छोड़कर 5 खण्ड के सभी तत्त्व धातु होते है।

IA वर्ग के तत्त्वों को क्षारीय धातु तत्त्व जबकि IIA वर्ग के तत्त्वों को क्षारीय मृदा धातु कहते हैं। इसमें कुल 14 तत्त्व होते हैं।

प्रथम वर्ग द्वितीय वर्ग

क्षारीय धातु

क्षारीय मृदा धातु

S- खण्ड में Cs तथा Fr रेडियो एक्टिव तत्त्व होते हैं।

Cs का उपयोग प्रकाश विद्युत सेल के निर्माण में किया जाता है। p खण्ड के तत्त्व

वे तत्त्व जिसमें आने वाला अन्तिम इलेक्ट्रॉन p कक्षक में भरा जाता है,

p खण्ड के तत्त्व कहलाते हैं। वर्तमान में 36 तत्त्व हैं।

इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns np 16 होता हैं।

इस खण्ड में तीनों प्रकार के तत्त्व (धातु अधातु तथा उपधातु) को सम्मिलित किया गया हैं।

Extended or Long Form of the Periodic Table

Metals

Group

IA (1)

Period 1

H IA

Non Metals

1

10

Hydrogen (2)

Metalloids

3

4

2

Be

d-Block Elements

6.940 90122

-p-Block Elements.

0

(18)

2

IIIB IVB VB VIB VIIB He (13) (14) (15) (16) (17) Hum

5

4.0000

10

10.811 12.011 14.007 15.900 18.008 20.100 Carton Nogen Oxygen Fluonne

Liam Bryum

11 12

13 14 15 16

17 18

3

Na Mg IIIA IVA VA VIA VIIA

IIB

22.000 24.305

Sour (3)

(4)

(5)

(6) (7)

← VIII → IB (8) (9) (10) (11) (12) Son Phospo Sulphur Channe Argon

25.962 28.086 30.974 32.000 35.453 30.948

4

K Ca Sc Ti

Cr

Mn

Fe

Co Ni Cu Zn

Ga Ge As

37 38 39

5

40

Rb

Sr

30.000 40.078 44.956 47.067 50.941 51.906 64.938 Potinsium Calcium Scandum Titanium Vanadium Chrominum Manganese 40 41 42 43 Zr Nb Mo Tc

Iron 44

Ru Rh

85.400

07.02

100 91.224

Rubidium Stront

58.095 63.546 6539 Cobolt Nickall Copper Zinc Galium 45 46 Pd 101.07 102.91 106.42 Ruthenium Rhodum Paadum

62.723

Ag

6

Cs

55 56 57 72 73 74 75 Ba La Hf Ta W Re Os

76 77 78 79 Ir Pt Au

Se Br Kr 72.61 74.922 78.06 79.904 83.80 enim Arsenic Selenium Bromine 47 48 49 50 51 52 53 Cd In Sn Sb Te 1077 112.41 114.82 110.71 Cadmium Indum Tin 80 81 82 Hg TI Pb

54 Xe 121.76 127.60 126.00 131.20 Antimony Tellurium Iodine 83 84 85 Bi Po At

Xenon 86

Rn

192.22

195.00

196.97

20098 210 210 Bismuth Polonium Astatine

222

Radon

132.91 137.30 13001 178.49 100.95 183.84 106.21 190.23

200.0 204.30 207.2 Indium Platinum Gold Mercury Thaum

109 110 111 112 The symbols for elements 104 109 used in this table are Mt Uun Uuu Uub those proposed by the American Chemical Society and

Barum Lanthanum Hatrium Tantalum Tungsten Rhenium Cum 88 89 104 105 106 107 108 Ra Ac** Rf Db Sg Bh Hs 262 264 272 277 Francium Radium Actiuerford Dubrium Sorgun Rahnu Hassumentum munnium Unni Unubium

87

7

Fr

227

223

226

201

200

200

208

110-112 proposed by IUPAC

f-Block Elemtns

6 "Lanthanide Series

140.12 140.91 144.24 Cerium

145

150 36 151.90

157 25 158.53

90

91

93

94 95

7

** Actinide Series

168 63 173.07 174.DT Gadium Terbum Dyspro- Holmium Erbur The Yerbum Lutetium 96 97 98 99 100 101 Np Pu Am Cm Bk Cf Es Fm Md

1625016493

167.25

231.04 23003 237 244 247 251 Protactinium Uranium Neptunium Plutonium Americum Curum Barklium Caltonium

243

247

252

257

258

102 103 No Lr

282

IUPAC designations of groups of elements are given in brackets

316

+

उत्कर्ष प्रकाशन

आवर्त सारणी में वर्ग-13 से वर्ग-17 तथा शून्य वर्ग (18) को P खण्ड के तत्त्व कहते हैं।

18 वें वर्ग के तत्त्वों को अक्रिय गैसे कहते हैं क्योंकि इनका अष्टक पूर्ण होता हैं। इनको (नोबल गैस / उत्कृष्ट गैस / अक्रिय गैस / शून्य वर्ग) भी कहा जाता है।

17 वें वर्ग के तत्त्वों को हैलोजन कहते हैं, क्योंकि ये लवण का निर्माण करते हैं। (हैलोजन लवण बनाने वाले)

16 वें वर्ग के तत्त्वों को चालकोजन कहते हैं, क्योंकि ये तत्त्व अयस्कों का निर्माण करते हैं। (चालकोजन अयस्क बनाने वाले)

15 वें वर्ग को नाइट्रोजन परिवार (निकोजन्स ) कहा जाता है।

III d खण्ड के तत्त्व

+

वे तत्त्व जिनमें आने वाला अन्तिम e d कक्षक में भरा जाता है, d खण्ड के तत्त्व कहते हैं।

इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1) d1-10 nst-2 होता हैं।

d - खण्ड के सभी तत्त्व धातु तत्त्व होते हैं। इन्हें संक्रमण तत्त्व भी कहते हैं क्योंकि इनका बाह्यतम कोश (d- उपकोश) अपूर्ण होता है, परन्तु Zn, Cd, Hg को संक्रमण तत्त्व नहीं कहते हैं क्योंकि उनका d- उपकोश पूर्ण पूरित होता हैं।

d खण्ड के तत्त्वों को चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है, जिन्हें संक्रमण श्रेणियाँ कहते हैं। इसमें 40 तत्त्व है जो सभी धातुएँ हैं।

Vf खण्ड के तत्त्व

+

वे तत्त्व जिनमें आने वाला अन्तिम ef कक्षक में भरा जाता है / खण्ड के तत्त्व कहलाते हैं। इसमें कुल 28 तत्त्व हैं जिन्हें आंतरिक संक्रमण तत्त्व कहते हैं।

+

इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-2)/14 (n-1) d02ns 2 होता हैं। f खण्ड के सभी तत्त्व धातु होते हैं इन्हें आन्तरिक संक्रमण तत्त्व भी कहते हैं।

f खण्ड के तत्त्वों को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया:-

(i) 4f श्रेणी लैन्थेनॉइड Las7 (Cess Lu71)

(ii) 5f श्रेणी

=

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)

एक्टिनॉइड Aca (The Lr103 ( अनियमित

यूरेनियम - 92 (92U) के बाद आने वाले तत्त्वों को परायूरेनियम तत्त्व कहते हैं इन्हें संश्लेषित तत्त्व भी कहते हैं क्योंकि इनका निर्माण प्रयोगशाला में किया जाता हैं।

एक्टिनॉइड में सभी तत्त्व रेडियोधर्मी (Radio Active) होते हैं।

तत्त्वों के गुणों में आवर्तिता-

आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन, आवर्तिता कहलाती हैं।

A. परमाण्विक आकार / त्रिज्या

B.

+

किसी विलगित (Single) परमाणु के नाभिक तथा बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन के मध्य की दूरी, परमाण्विक त्रिज्या कहलाती हैं। विलगित परमाणु का मिलना अत्यधिक कठिन होता हैं। इसलिए परमाण्विक त्रिज्या का निरपेक्ष मान ज्ञात नहीं किया जा सकता हैं। आयनन ऊर्जा / ऐन्थेल्पी

किसी उदासीन, विलगित तथा गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रान को पृथक् करने के लिए आवश्यक ऊर्जा, आयनन ऊर्जा कहलाती हैं।

आयनन ऊर्जा ऊष्माशोषी होते हैं तथा इसके द्वारा परमाणु धनायन में बदल जाता है।

317

C.

+

+

+

किसी परमाणु की तीन क्रमागत आयनन ऊर्जाओं में तृतीय आयनन ऊर्जा अधिकतम होती है क्योंकि परमाणु से धनायन बनने पर परमाणु का आकार छोटा हो जाता है जिससे नाभिक एवं इलेक्ट्रॉन के मध्य आकर्षण बढ़ जाता हैं।

i.

आयनन ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक

परमाणवीय आकार:- परमाणवीय आकार बढ़ने पर आयनन ऊर्जा घटती हैं अतः आवर्त में बाएँ से दाएँ परमाणवीय आकार घटने पर आयनन ऊर्जा बढ़ती हैं जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर आकार बढ़ने के साथ आयनन ऊर्जा घटती हैं। अतः He की आयनन ऊर्जा सर्वाधिक जबकि Cs की आयनन ऊर्जा न्यूनतम होती हैं।

ii. प्रभावी नाभिकीय आवेश: Zort बढ़ने पर परमाणु का आकार घटता हैं जिससे आयनन ऊर्जा बढ़ती हैं। आवर्त में बाएँ से दाएँ Zurr बढ़ने से आयनन ऊर्जा भी बढ़ती हैं।

iii. परीक्षण प्रभाव: परीक्षण प्रभाव बढ़ने पर परमाणु की आयनन ऊर्जा घटती हैं व परमाणु का आकार बढ़ता हैं।

iv. कक्षकों की भेदन क्षमता:- कक्षक की भेदन क्षमता p कक्षक से अधिक होती हैं। अत: कक्षक नाभिक के समीप होने के कारण उसकी आयनन ऊर्जा उच्च होती हैं। spd /

v. अर्द्धपूरित तथा पूर्णपूरित कक्षकों का स्थायित्व :- अर्द्धपूरित तथा पूर्णपूरित इलेक्ट्रॉन विन्यास अन्य इलेक्ट्रॉन विन्यास से अधिक स्थायी होते हैं। अत: इनकी आयनन ऊर्जा उच्च होती हैं। इलेक्ट्रॉन-लब्धि ऊर्जा-

किसी उदासीन, विलगित तथा गैसीय परमाणु के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन को जोड़ने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा कहलाती हैं। जब परमाणु में इलेक्ट्रॉन जुड़ता है, तो ऊष्मा मुक्त होती है, अत: यह एक उष्माक्षेपी प्रक्रम है।

तत्त्व की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा ऋणात्मक होती है, परंतु द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा (EGE) का मान धनात्मक होता है, क्योंकि ऋणावेशित आयन में e जोड़ने पर प्रतिकर्षण होता है, जिसे जोड़ने के लिए ऊर्जा दी जाती है।

आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ चलने पर परमाणवीय आकार घटने के साथ e लब्धि ऊर्जा बढ़ती है जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर परमाणवीय आकार बढ़ने के साथ EGE घटती हैं।

अक्रिय गैसों का e विन्यास पूर्णपूरित स्थायी होने के कारण इनकी लब्धि ऊर्जा का मान धनात्मक होता है।

आवर्त सारणी में सर्वाधिक EGE क्लोरीन (CI) की होती है जबकि सबसे कम EGE अक्रिय गैसों की होती है।

IInd A वर्ग के तत्त्वों की EGE का मान धनात्मक होता है, क्योंकि अक्रिय गैसों के समान इनमें भी कक्षक पूर्णपूरित होता है। फ्लोरिन (F) तथा क्लोरीन (CI) में क्लोरीन की e लब्धि ऊर्जा का F से अधिक होता है क्योंकि F का छोटा आकार होने के कारण आने वाले e पर नाभिक के आकर्षण बल से अधिक आंतरिक इलेक्ट्रॉनों का प्रतिकर्षण लगता है। जिससे e आसानी से नहीं जुड़ता है।

D. विद्युत ऋणता:-

सह संयोजक बंध से बंधित दो परमाणुओं द्वारा बंध के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को, विद्युत ऋणता कहते हैं। विद्युत ऋणता सर्वप्रथम Polling ने दी। आवर्त सारणी में सर्वाधिक विद्युत ऋणी तत्त्व फ्लोरिन (F) जबकि सबसे कम विद्युत ऋणी तत्त्व Cs ( सिजियम) होता है। आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ चलने पर विद्युत ऋणता बढ़ती है जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर विद्युत ऋणता घटती है।

विद्युत ऋणता को प्रभावित करने वाले कारक-

उत्कर्ष प्रकाश

1

1.

आकार

E.N.

2.

प्रभावी नाभिकीय आवेश CE.N.

1

of

3. परिरक्षण प्रभाव

4. पूर्णपूरित इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

5.

आयनिक लक्षण

६. संयोजकता:-

विद्युत ऋणता

किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस परमाणु की संयोजकता कहलाती हैं किसी परमाणु के चारों ओर बंध बनाने की क्षमता को उस परमाणु की संयोजकता कहते हैं; जैसे- क्षारीय धातु तत्त्वों तथा क्षारीय मृदा धातु तत्त्वों की संयोजकता क्रमश: एक तथा दो होती हैं।

पदार्थों के व्यापारिक नाम और रासायनिक सूत्र

एल्कोहॉल धोने का सोडा

इथाइल एल्कोहॉल

सोडियम कार्बोनेट

बेकिंग सोडा

सोडियम बाइकार्बोनेट

कास्टिक सोडा

सोडियम हाइड्रॉक्साइड

फिटकरी

लाल दवा

पोटेशियम एल्युमिनियम एल्फेट पोटेशियम परमैग्नेट

C2H2OH

Na2CO3.10H2O NaHCO3 NaOH K2SO4Al2

(SO4)3.24H2O

KMnO4

विरंजक चूर्ण

ब्लीचिंग पाउडर

CaOCl2

जिप्सम

कैल्सियम सल्फेट

CaSO4.2H2O

goo

कैल्सियम सल्फेट

प्लास्टर ऑफ पेरिस

हेमीहाइड्रेट

CaSO4 1/2H2O

धातु :-

चूने का पत्थर

कैल्सियम कार्बोनेट

CaCO3

बिना बुझा हुआ चूना

कैल्सियम ऑक्साइड

CaO

चूने का पानी

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड

नौसादर

अमोनियम क्लोराइड

Ca(OH) 2 NH.CI

लाफिंग गैस (हास्य

गैस) गैलेना

नाइट्रस ऑक्साइड

N2O

+

लेड सल्फाइड

Pbs

साधारण नमक

नमक का अम्ल शोरा शोरे का अम्ल

सान्द्र नाइट्रिक अम्ल

सोडियम क्लोराइड

NaCl

+

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

HCI

पोटेशियम नाइट्रेट

KNO3

नाइट्रिक अम्ल

HNO3

अम्ल राज

सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक

अम्ल

HNO3 + 3HCI

धातु अधातु एवं मिश्रधातु

ऐसे तत्त्व जो इलेक्ट्रॉन को त्याग कर धनायन का निर्माण करते हैं, धातु कहलाते हैं।

धातुएँ आघातवर्धनीय होती हैं अर्थात् इनको पीटकर चादर (परत) के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य होते हैं।

धातु में विशेष चमक होती है जो मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण पाई जाती है। धातु में तन्यता का गुण पाया जाता है।

धातुएँ ताप और विद्युत की सुचालक होती हैं।

धातुएँ विभिन्न प्रकार के अधातुओं जैसे ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, क्लोरीन, सल्फर आदि से प्रतिक्रिया कर यौगिक का निर्माण करती हैं। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ साधारण ताप पर जल से अभिक्रिया करती हैं।

धातुएँ अम्लों एवं क्षारों से भी अभिक्रिया करती हैं।

धातुएँ :-

1. मैग्नीशियम:-

+

मैग्नीशियम सल्फेट के रूप में, मैग्नीशियम झरने में तथा मैग्नीशियम

क्लोराइड के रूप में समुद्री जल में पाया जाता है।

क्लोरोफिल में मैग्नीशियम उपस्थित होता है।

मैग्नीशियम चाँदी की तरह उजली एवं चमकीली धातु होती है।

यह मुलायम धातु होती है।

तनु अम्लों के साथ यह प्रतिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाती है। यह क्षार से अभिक्रिया नहीं क��ती है तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ यह मैग्नीशियम नाइट्रेट एवं अमोनियम नाइट्रेट बनाती है।

मैग्नीशियम फ्लैश लाइट के रिबन बनाने, फोटोग्राफी तथा आतिशबाजी में काम आता है।

मैग्नीशियम ऑक्साइड को मैग्नीशिया कहा जाता है। यह प्रतिदीप्तिशील प्रकाश उत्पन्न करता है।

मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड को 'मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (Mg (OH)2) कहा जाता है।

इसका उपयोग पेट की अम्लीयता को दूर करने में किया जाता है। 2. सोडियम:-

सोडियम एक अत्यन्त क्रियाशील तत्त्व होने के कारण मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है।

जल गैस

शुष्क बर्फ

कार्बन मोनोक्साइड और हाइड्रोजन गैस का

मिश्रण ठोस कार्बन डाई ऑक्साइड

CO+Ha

CO2

हरा कसीस

फेरस सल्फेट

नीला कसीस

कॉपर सल्फेट

FeSO4 . 7HO CuSO4.5H2O

सफेद कसीस ब्लैक जिंक

जिंक सल्फेट

ZnSO4 . 7HO

जिंक सल्फाइट

ZnS

क्विक सिल्वर

मरकरी (पारा)

Hg

कैलोमल

मर्क्यूरस क्लोराइड

Hg2Cl2

भारी जल

ड्यूटीरियम ऑक्साइड

DO

सिलिकन

सिलिका

SiO2

डाइऑक्साइड

कार्बन मोनोक्साइड

प्रोड्यूसर गैस

और नाइट्रोजन गैस का

CO+N22

मिश्रण

मार्श गैस

मीथेन

CHA

कार्बोलिक अम्ल

फिनॉल

C&H2OH

318

+

+

+

उत्कर्ष प्रकाशन

संयुक्त अवस्था में यह नाइट्रेट, कार्बोनिट एवं सल्फेट के रूप में पाया जाता है। सोडियम चाँदी के समान सफेद तथा मुलायम धातु होती है। इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

साधारण ताप पर शुष्क हवा और शुष्क ऑक्सीजन का सोडियम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आर्द्र हवा में सोडियम की सतह मलिन पड़ जाती है क्योंकि उस पर सोडियम ऑक्साइड की सतह जम जाती है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाई ऑक्साइड से सहयोग कर सोडियम कार्बोनेट बनाता है। इसी कारण सोडियम को केरोसिन में डूबोकर रखा जाता है।

सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) को कास्टिक सोडा कहा जाता है। सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) को वॉशिंग सोडा कहा जाता है।

सोडियम बाई कार्बोनेट (NaHCO3) को खाने वाला सोडा या बेकिंग सोडा कहा जाता है।

सोडियम क्लोराइड (NaCl) को साधारण नमक कहा जाता है। 3. एल्युमिनियम:-

प्रकृति में एल्युमिनियम स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाया जाता है परन्तु इसके यौगिक काफी मात्रा में मिलते हैं।

+

7.

+

8.

यह बॉक्साइट, कोरन्डम, फेल्सपार तथा क्रायोलाइट के रूप में मिलता हैं। बॉक्साइट, एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क है।

एल्युमिनियम चाँदी के समान चमकीली धातु है।

एल्युमिनियम तथा इसकी मिश्र धातु वायुयान, मोटर आदि बनाने में प्रयुक्त की जाती है।

यह घरेलू बर्तन बनाने में भी प्रयुक्त की जाती है।

+

इसके तार विद्युत संचालन में प्रयुक्त होते हैं।

पोटाश एलम (फिटकरी) एक द्विक लवण है।

इसका उपयोग रक्त प्रवाह को रोकने, कागज एवं चमड़ा उद्योग में किया जाता हैं।

4. कैल्सियम :-

+

+

+

कैल्सियम प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है।

यह कार्बोनेट, सल्फेट तथा सिलिकेट के रूप में पाया जाता हैं।

कैल्सियम हड्डियों, अण्डे के छिलके एवं मोलस्का समुदाय के प्राणियों का मुख्य अवयव होता है।

कैल्सियम अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। कैल्सियम ऑक्साइड को क्विक लाइम कहा जाता है।

• कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड को बुझा हुआ चूना कहते हैं।

+

कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड को विरंजक चूर्ण कहा जाता है। कैल्सियम सल्फेट को जिप्सम कहा जाता है।

अर्द्धजलयोजित कैल्सियम सल्फेट को सामान्यत: 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' कहा जाता है।

5. मँगनीज:-

+

+

इसका निष्कर्षण मुख्यत: पाइरोलूसाइट नामक अयस्क से किया जाता है। पोटेशियम परमैग्नेट को लाल दवा के नाम से जाना जाता है। मैगनीज डाईऑक्साइड शुष्क सेलों में उपयोग में लिए जाते हैं। 6. ताँबा :-

प्रकृति में यह मुक्त एवं संयुक्त अवस्था में पाया जाता है। संयुक्त अवस्था में यह सल्फाइड ऑक्साइड एवं कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाया जाता है। ताँबे का निष्कर्षण कॉपर पायराइट्स अयस्क से किया जाता है।

+

आर्द्र हवा के कारण कॉपर का रंग हरा हो जाता है।

ताँबे का उपयोग विद्युत तार एवं विद्युत उपकरण के निर्माण में किया जाता है।

विद्युत मुद्रण तथा विद्युत लेपन में भी ताँबे का उपयोग किया जाता है। रोल्ड गोल्ड, ताँबे की एक मिश्र धातु है जिसका उपयोग सस्ते आभूषणों के निर्माण में होता है।

लोहा :-

लोहा एक संक्रमण धातु है। हरी सब्जियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

यह रक्त में हीमोग्लोबिन में उपस्थित होता है।

लोहा साधारण ताप पर शुष्क हवा से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता परंतु आर्द्र हवा के सम्पर्क में आने पर इस पर जंग लग जाता है।

लोहे पर यह जंग हवा की नमी और ऑक्सीजन के कारण लगता है। लोहे पर जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है।

फेरस सल्फेट को 'हरा कसीस' कहा जाता है।

चाँदी [Ag]

में

चाँदी प्रकृति में मुक्त एवं संयुक्त दोनों अवस्थाओं में पाई जाती है। चाँदी धातु का निष्कर्षण मुख्यतः अर्जेण्टाइट अयस्क से किया जाता है।

सिल्वर क्लोराइड को हॉर्न सिल्वर कहा जाता है। इसका उपयोग फोटोक्रोमेटिक काँच बनाने में होता है।

सिल्वर ब्रोमाइड का उपयोग फोटोग्राफी में होता है।

सिल्वर आयोडाइड का उपयोग कृत्रिम वर्षा कराने में होता है।

सिल्वर नाइट्रेट इसे लूनर कास्टिक भी कहते हैं। इसका उपयोग निशान लगाने वाली स्याही बनाने में किया जाता है।

9. सोना [ Au]

प्रकृति में सोना मुक्त अवस्था और संयुक्त अवस्था दोनों में पाया जाता है। सोने का निष्कर्षण मुख्यतः केलावेराइट और सिल्वेनाइट अयस्क से किया जाता है।

स्वर्ण की शुद्धता कैरेट में व्यक्त की जाती है।

100% शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है।

रोल्ड गोल्ड को सोने का कृत्रिम रूप कहा जाता है यह 90% Cu तथा 10% Al का मिश्रण होता है।

आयरन पायराइट्स को

'झूठा सोना या बेवकूफों का सोना भी कहते ���ैं। धातुओं के कुछ गुण इस प्रकार हैं-

धातुएँ ठोस अवस्था में होती हैं (मर्करी कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में होती है।)

ऑसमियम (Os) धातु का घनत्व सर्वाधिक होता है।

धातु अम्ल, जैसे- HCI, H2SO4 के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन

गैस विस्थापित करते हैं (Ag, Au, Pt) अम्लों से क्रिया नहीं करते हैं। HNO3 (नाइट्रिक अम्ल) धातुओं के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस विस्थापित नहीं करता है।

लीथियम को मोम में रखा जाता है।

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ऑक्साइड बनाते हैं। एल्युमिनियम तथा जिंक की सतह पर ऑक्साइड परत बन जाती है। जिसे एनोडीकरण कहते हैं, उदाहरण फेरस, कॉपर, एल्युमिनियम, सोडियम, पोटेशियम, लीथियम, अर्जेन्टम, ओरम, मर्करी, जिंक, कैल्सियम, मैग्नीशियम, टंगस्टन ।

मानव द्वारा सर्वप्रथम उपयोग में ली गयी धातु ताँबा थी। मानव द्वारा सर्वाधिक उपयोग में ली जाने वाली धातु लोहा है ।

319

पृथ्वी पर सर्वाधिक पाई जाने वाली धातु एल्युमिनियम है। टाइटेनियम को भविष्य की धातु कहा जाता है। घरेलू बल्ब का तंतु टंगस्टन का बना होता है। सबसे हल्की धातु लीथियम होती है।

धातु एल्युमिनियम

ताँबा

लोहा

मैंगनीज

टिन

निकल जिंक

पारा

कैल्सियम

उत्कर्ष प्रकाश

मुख्य अयस्क बॉक्साइड, डायस्पोर, कोरंडम कॉपर पायराइट्स

हेमेटाइट, मैग्नेटाइट

पाइरोलूसाइट

कैसिटेराइट

पैरडाइट

जिंक ब्लेन्ड, कैलामिन

गैलेना, जैमसोनाइट

सिनेबार लाइमस्टोन

अधातु तत्त्व:-

वे तत्त्व जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं तथा ऋणायन बनाते हैं, अधातु

अधातुओं में सामान्यतः चमक नहीं होती है।

कहलाते हैं।

अधातु विद्युतऋणी तत्त्व होते हैं।

इनमें तन्यता का गुण नहीं पाया जाता है।

यह आघातवर्धनीय नहीं होते हैं।

अधातुओं की अवस्थाएँ:-

ब्रोमीन द्रव अवस्था में पाया जाता है।

अधातुएँ अधिकतर कुचालक प्रवृत्ति की होती हैं।

आयोडीन, फॉस्फोरस, सल्फर आदि ठोस अवस्था में पाए जाते हैं।

हाइड्रोजन, क्लोरीन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा अक्रिय गैसें गैसीय अवस्था में पाई जाती हैं।

उपधातु अवस्था:-

वे तत्त्व जिनके गुण धातु तथा अधातु के मध्य होते हैं, उपधातु कहलाते हैं; जैसे- बोरोन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, टेलुरियम आदि ।

मिश्र धातु-

दो या अधिक धातुओं या एक या अधिक धातु एवं एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहा जाता है।

1.जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) आयरन (Fe) + क्रोमियम (Cr)

+ निकल (Ni)

2. फ्यूज तार सीसा (Pb) + टिन (Sn)

गन मेटल (Gun Metal)

टाँका (Solder)

नाइक्रोम (Nichrome)

बेल मेटल (Bell

Metal) रोल्ड-गोल्ड

(Rolled Gold)

क्रोम स्टील (Chrome

Steel)

इस्पात (Stainless Steel)

ate (Bronze)

(मानव द्वारा निर्मित

प्रथम मिश्र धातु)

मैग्नेलियम

(Magnalium)

ड्यूरालुमिन (Duralumin)

टंगस्टन स्टील

(Tungsten Steel)

जर्मन सिल्वर

(German Silver)

ताँबा (88%) टिन (8-10%) जिंक (2 4%)

मूर्तियाँ, दाँतेदार गियर बटन

आदि के निर्माण में।

टिन ( 50-60%) लेड धातुओं को जोड़ने में।

(40-50%) निकेल (55-60%) + क्रोमियम (20%) + आयरन (20-25%)

ताँबा (80%) टिन (20%) atar (90%)+

एल्युमिनियम (10%) क्रोमियम (2-3%) +

आयरन (95% ) कार्बन (0.5%) मँगनीज (0.5-1%) क्रोमियम (15-20%) + निकेल (8-10%) साधारण इस्पात

ताँबा (88%) टिन (12%) एल्युमिनियम (95. 96%) मैग्नीशियम (2%) आयरन (2.3%) एल्युमिनियम (95%)

मैंगनीज ( 0.5%) + मैग्नीशियम (0.5%) कॉपर (4%)

टंगस्टन आयरन + कार्बन कॉपर (50%) + जिंक (35%) निकेल (15%)

इलेक्ट्रिक हीटर एवं इलेक्ट्रिक

आयरन का तार

घण्टे बर्तन एवं मूर्तियों के निर्माण में

सोने जैसे दिखने वाले

आभूषणों के निर्माण में। घरेलू बर्तन, शल्यक्रिया के उपकरण, ब्लेड आदि के निर्माण में ।

घरेलू बर्तन, शल्यक्रिया के उपकरण, ब्लेड आदि के निर्माण में

मूर्तियाँ, सिक्के, बर्तन के निर्माण में

धातु के दर्पण, वैज्ञानिक यंत्रों के निर्माण में।

प्रेशर कुकर, वायुयान का ढाँचा बनाने में।

रॉकेट इंजन के नोजल तथा तीव्र गति से काटने वाले उपकरण बनाने में।

हीटिंग क्वायल्स ( Heating Coils) में, बर्तन, नल आदि के निर्माण में

सिक्के, बर्तन, आभूषण एवं पेन्ट निर्माण में।

एल्युमिनियम ब्रॉन्ज (Aluminium

कॉपर (90%) + एल्युमिनियम (10%)

Bronze)

नोट :

1.

सबसे हल्का तत्त्व / गैस / अधातु - (हाइड्रोजन)

3. घण्टी / घण्टा धातु (Bell Metal)- कॉपर (Cu) + टिन (Sn)

2.

सबसे भारी धातु / तत्त्व- ओसमीयम Os / इरीडियम (Ir )

4. रेल की पटरियाँ आयरन (Fe) + मैंगनीज (Mn)

3.

सबसे हल्की धातु / कम घनत्व वाली धातु लिथियम (Li)

5. रोल्ड गोल्ड Cu+ Al

4.

कठोर धातु- प्लेटिनम (Pt)

नोट:- रोल्ड गोल्ड में गोल्ड नहीं होता है।

मिश्रधातु

(Alloy)

6. बुलेट प्रूफ जैकेट कैवलार से बनाते हैं।

7. मूर्खों का सोना (Fools gold )- आयरन पायराइट (FeS2) मिश्र धातुएँ एवं उनके उपयोग

संघटन

(Composition)

5.

उत्कृष्ट धातु (Noble Metal) Gold (Au), प्लेटिनम (Pt)

6.

एक मात्र द्रव अधातु (Non Metal)- ब्रोमीन (Br)

7.

द्रव धातु (Liquid Metal) पारा / Hg (कमरे के ताप (25°C/298

k) पर द्रव)

उपयोग (Uses)

8.

भविष्य की धातु टाइटेनियम (Ti)

ताँबा (70%) जिंक

पीतल (Brass)

डच मेटल (Dutch Metal)

जस्ता (15-20%)

बैन्ड बाजा घण्टियों, बर्तन,

9.

Stranger gas जीनॉन (Xe)

(30%)

मूर्तियों के निर्माण में

10.

Quick Silver Hg / पारा / मर्करी

atan (80-85%)+

धातु की पतली चादर अथवा

11.

आशा धातु (Hope Metal)- यूरेनियम (U)

सोने जैसी पतली परत के निर्माण में

320

12. भय धातु (Fear Metal) - Pu / प्लूटोनियम

अम्ल (Acid):-

उत्कर्ष प्रकाश

अम्ल, क्षार एवं लवण

• एसिड शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द acidus से हुई है, जिसका अर्थ है 'खट्टा' अत: अम्ल वे पदार्थ हैं जिनका स्वाद खट्टा होता है। उदाहरण: HCI, HNO3 तथा H2SO4 आदि अम्ल हैं।

विशेषताएँ :-

+

अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।

अम्ल के pH का मान 7 से कम होता है।

अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।

अम्लों का जलीय विलयन विद्युत का सुचालक होता है।

अम्ल-क्षार के साथ क्रिया करके लवण एवं जल बनाते हैं, इसे 'उदासीनीकरण' कहा जाता है।

अम्ल, धातुओं के साथ क्रिया करके लवण एवं H2 गैस बनाते हैं। ऑरहेनियस के अनुसार अम्ल वे पदार्थ होते हैं, जो जलीय विलयन में H' आयन प्रदान करते हैं।

जैसे HCI HCF HNO3 H' + NO

ब्रॉन्स्टेड एवं लॉरी वे पदार्थ जो प्रोटोन प्रदान करते हैं, अम्ल कहलाते हैं। अम्लों के प्रकार (Types of Acid)

विलयन में अम्ल

स्त्रोत के H2 एवं 02 H' आयन त्यागने आधार पर के आधार पर के आधार पर की उपस्थिति के आधार पर कार्बनिक अकार्बनिक ऑक्सी हाइड्रा प्रबल दुर्बल अम्ल अम्ल अम्ल अम्ल सांन्द्र तंनु

i.

अम्ल अम्ल

1. स्रोत के आधार पर अम्लों के दो प्रकार होते हैं- कार्बनिक अम्ल वे अम्ल जिनमें कार्बन (C) अनिवार्यत: होता है, कार्बनिक अम्ल कहलाते हैं। ये अम्ल प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं, जैसे जंतुओं या वनस्पति से इन्हें प्राप्त

ii.

किया जाता है।

जैसे-

अम्ल

| सीट्रिक अम्ल (C6H8O7) एस्कॉर्बिक अम्ल (CaH8O6) टार्टरिक अम्ल (CaH6Os) फॉर्मिक अम्ल (HCOOH)

एसीटिक अम्ल (CH3COOH) ऑक्जेलिक अम्ल (C2H2O4)

स्रोत नीबू, संतरा

आँवला, अमरूद

अंगूर, इमली

चींटी / मधुमक्खी

के डंक में सिरका

पालक, टमाटर

अकार्बनिक अम्ल वे अम्ल जिनमें कार्बन नहीं पाया जाता है, उन्हें अकार्बनिक अम्ल कहा जाता है। अकार्बनिक अम्लों को 'खनिज अम्ल' भी कहा जाता है।

जैसे-

321

हाइड्रोक्लोरिक

उपयोग

PVC, एक्वारेजिया तथा

प्रयोगशाला में अभिकर्मक

अम्ल

अणुसूत्र

अम्ल

HCI (प्रबल अम्ल)

के रूप में

HNO3

एक्वारेजिया,

नाइट्रिक अम्ल

(शोरे का

अम्ल)

H2SO4

सल्फ्यूरिक

अम्ल

( ऑयल ऑफ विट्रॉल)

उर्वरकों,

विस्फोटकों, स्टेनलेस स्टील के अम्लोपचार में नाइट्रोल्युलोस के उत्पादन में, अपमार्जक उद्योग में, सीसा संचायक बैटरियों में तथा पेट्रोलियम के शोधन में

2. H2 एवं O2 के आधार पर अम्ल दो प्रकार के होते हैं- ऑक्सी अम्ल-वे अम्ल जिनमें ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन दोनों पाए जाते हैं, 'ऑक्सी अम्ल' कहलाते हैं।

3.

4.

i.

जैसे-

a. H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल)

b. HNO3 (नाइट्रिक अम्ल)

ii. हाइड्रा अम्ल वे अम्ल जिनमें हाइड्रोजन पाई जाती है, ऑक्सीजन नहीं पाई जाती है, 'हाइड्रा अम्ल' कहलाते हैं। जैसे HCI (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)

H+ आयन त्यागने के आधार पर अम्लों के दो प्रकार होते हैं-

i.

प्रबल अम्ल वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्णत: आयनित हो जाते हैं, प्रबल अम्ल कहलाते हैं। इनकी H' आयन त्यागने की प्रवृत्ति उच्च होती है। जैसे HCI HNO 3

ii. दुर्बल अम्ल वे अम्ल जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते हैं, दुर्बल अम्ल कहलाते हैं इनकी H' आयन त्यागने की प्रवृत्ति निम्न होती है सभी कार्बनिक अम्ल, दुर्बल अम्ल होते हैं। जैसे-

1. फॉर्मिक अम्ल (HCOOH)

2. टार्टरिक अम्ल (CaH606)

3. एस्कॉर्बिक अम्ल ( CHO6)

4. एसीटिक अम्ल (CH.COOH)

विलयन में अम्ल की उपस्थिति के आधार पर अम्ल दो प्रकार के होते हैं-

-

i. सान्द्र अम्ल ऐसा अम्लीय विलयन जिसमें अम्ल की मात्रा विलायक से अपेक्षाकृत अधिक होती है, 'सान्द्र अम्ल' कहलाता है।

ii. तनु अम्ल- ऐसा अम्लीय विलयन जिसमें अम्ल की मात्रा विलायक से अपेक्षाकृत कम होती है, 'तनु अम्ल' कहलाता है।

अम्ल-राज [Aqua Ragia ]

अम्ल-राज को 'रॉयल वॉटर' भी कहा जाता है।

अम्ल-राज का रंग पीला नारंगी होता है।

अम्ल-राज का उपयोग सोना, चाँदी, प्लेटिनम आदि उत्कृष्ट धातुओं को गलाने के लिए किया जाता है।

सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) तथा सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO3) को क्रमश: 3:1 में मिलाने से बना मिश्रण, 'अम्ल-राज' कहलाता है।

+

अम्लों के गुण [ Properties of Acids ]

अम्ल धातु से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देते हैं।

अम्ल धातु लवण हाइड्रोजन गैस

उत्कर्ष प्रकाश

अम्ल सभी धातु कार्बोनेट तथा धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनाते हैं। | धातु कार्बोनेट / धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट अम्ल लवण + कार्बन डाईऑक्साइड जल

अम्ल और क्षारक की परस्पर अभिक्रिया के परिणामस्वरूप लवण तथा जल प्राप्त होते हैं। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया (neutralisation reaction) कहते हैं।

क्षारक

+

अम्ल क्षारक → लवण जल

HCI (aq) + NaOH (aq) → NaCl(aq) + H2O

-

अम्ल, धात्विक ऑक्साइड्स के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं।

धातु ऑक्साइड + अम्ल लवण जल

क्षारक और अम्ल की अभिक्रिया के समान धात्विक ऑक्साइड अम्लों से अभिक्रिया करके लवण और जल देते हैं अतः धात्विक ऑक्साइड को क्षारकीय ऑक्साइड भी कहते हैं।

अम्ल जल में घोले जाने पर H' (aq) (हाइड्रोजन आयन) या H3O (aq) (हाइड्रोनियम आयन) देते हैं।

उदाहरण HCI H2O HO (aq) + CF (aq) विलयन में H (aq) आयनों के कारण ही पदार्थ की प्रकृति अम्लीय होती है। जल की अनुपस्थिति में अम्ल के अणुओं में से H' आयनों को पृथक् करना सम्भव नहीं है अर्थात् H' आयन अकेले प्राप्त नहीं हो सकते हैं, ये जल के अणुओं से संयुक्त होने के पश्चात् ही मिलते हैं।

H' + H2O→ H3O*

कार्बोक्सिलिक अम्ल, एल्कोहॉल से अभिक्रिया करके मीठी गन्धयुक्त यौगिक एस्टर बनाते हैं। यह अभिक्रिया एस्टरीकरण (Estrification) कहलाती है। कार्बोक्सिलिक अम्ल + एल्कोहॉल एस्टर जल

क्षारक को भस्म भी कहा जाता है।

वे क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार कहलाते हैं।

सभी क्षार, क्षारक होते हैं लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते हैं।

ऑरहेनियस के अनुसार

-

वे पदार्थ जो जलीय विलयन में

हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) देते हैं, 'क्षार' कहलाते हैं।

जैसे NaOH NaOH

ब्रॉन्स्टेड एवं लोरी के अनुसार वे पदार्थ जो प्रोटॉन ग्रहण करते हैं,

क्षार कहलाते हैं।

क्षार के गुण / विशेषताएँ :-

क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं।

क्षार का pH 7 से अधिक होता है।

-

1.

2.

3.

प्रबल क्षार वे क्षार जो जलीय विलयन में पूर्णत: आयनित हो जाते हैं, प्रबल क्षार कहलाते हैं।

जैसे NaOH (कास्टिक सोडा), KOH (कास्टिक पोटाश )

दुर्बल क्षार वे क्षार जो जलीय विलयन में आंशिक आयनित होते हैं, दुर्बल क्षार कहलाते हैं।

जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड Mg (OH) 2 / मिल्क ऑफ मैग्नीशिया सान्द्र क्षार ऐसा क्षारीय विलयन जिसमें क्षार की मात्रा विलायक से अपेक्षाकृत अधिक होती है, सान्द्र क्षार कहलाता है।

-

4. तनु क्षार ऐसा क्षारीय विलयन जिसमें क्षार की मात्रा विलायक से अपेक्षाकृत कम होती है, 'तनु क्षार' कहलाता है।

क्षारकों के गुणधर्म [Properties of Bases].

क्षारक धातु से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस के उत्सर्जन के साथ लवण का निर्माण करते हैं।

NaOH + Zn Na2ZnO2 (सोडियम जिंकेट) + H21 यद्यपि सभी क्षार धातुओं के साथ इस प्रकार की अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं। क्षारकों की अम्लों के साथ अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है। जिसके फलस्वरूप संगत लवण तथा जल बनते हैं। क्षारक अधात्विक ऑक्साइड्स से अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं।

क्षारक + अधात्विक ऑक्साइड लवण जल

क्योंकि यह अभिक्रिया अम्ल और क्षारक के मध्य अभिक्रिया जैसी है अतः हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अधात्विक ऑक्साइड्स की प्रकृति अम्लीय होती है।

क्षारक जल में घोले जाने पर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) उत्पन्न करते हैं। NaOH(s) Na (aq) + OH(aq)

सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते हैं जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं; उदाहरण NaOH, KOH, Ca(OH)2, NHOH, आदि । अतः सभी क्षार क्षारक हैं लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते हैं। तेल और गंधक क्षार में घुल जाते हैं। क्षार; जैसे जिंक, एल्युमिनियम, टिन, आदि के ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड अम्ल के साथ-साथ गर्म सान्द्र NaOH और KOH के विलयनों में भी घुल जाते हैं, अतः ये उभयधर्मी (amphoteric) कहलाते हैं।

प्रबल क्षार; जैसे NaOH, KOH आदि अपने जलीय विलयन तथा गलित अवस्था में विद्युत के अच्छे चालक हैं क्योंकि इन अवस्थाओं में ये शीघ्रता से आयन उपलब्ध करवाते हैं।

क्षारकों के प्रमुख उदाहरण :-

1. कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH) 2 / ] ( चूना पानी / बुझा हुआ चूना)- इसका उपयोग चमड़े पर बाल साफ करने, सफेदी करने, मृदा की अम्लीयता की समस्या को दूर करने में, जल के मृदुकरण में, विरंजक पाउडर के निर्माण में किया जाता हैं।

2. कैल्सियम ऑक्साइड [CaO] इसका उप��ोग औषधि निर्माण, सीमेंट निर्माण में किया जाता है।

+

क्षार, लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।

क्षार छूने पर साबुन जैसे चिकने होते हैं।

क्षार, विद्युत के चालक होते हैं।

क्षार के प्रकार :-

के प्रकार (Types of Base)

V

प्रबल क्षार दुर्बल क्षार सांद्र क्षार तनु क्षार

3.

मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [ Mg (OH) 2 ] इसका उपयोग पेट की अम्लीयता को दूर करने में किया जाता है।

4.

सोडियम हाइड्रॉक्साइड [NaOH ] इसका उपयोग कपड़े धोने के

साबुन बनाने में, कागज बनाने में, पेट्रोलियम के शोधन में किया जाता हैं।

5.

पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड [KOH)] इसका उपयोग नहाने के साबुन

बनाने में, शैम्पू तथा शेविंग क्रीम के निर्माण में किया जाता हैं।

322

उत्कर्ष प्रकाशन

6. मैग्नीशियम ऑक्साइड [MgO] इसका उपयोग औषधि निर्माण में,

भट्टी में अग्निसह ईंटों के निर्माण में रबड़ के रूप में किया जाता हैं।

लवण [Salt ]

अम्ल की क्षार के साथ क्रिया से लवण एवं जल बनता है, इसे 'उदासीनीकरण' कहा जाता है।

लवण सामान्यतः ठोस होते हैं।

+

लवण विद्युत के चालक होते हैं।

लवणों के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।

लवर्णों के प्रकार (Types of Salts]

I.

सामान्य लवण: यदि एक सामान्य लवण प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षारक की अभिक्रिया से प्राप्त किया जाता है तो प्राप्त लवण उदासीन लवण कहलाता है क्योंकि इसके जलीय विलयन का लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उदाहरण NaCl, Na2SO4. KNO3 FeSO4 K2SO4 आदि ।

II. अम्लीय लवण: यदि एक सामान्य लवण प्रबल अम्ल तथा दुर्बल क्षारक की अभिक्रिया से प्राप्त होता है तो प्राप्त लवण अम्लीय होता है। क्योंकि इसका जलीय विलयन नीले लिटमस को लाल कर देता है। उदाहरण NaHCO3, NaHSO4, NaH2PO4 आदि।

III. क्षारीय लवण: यदि एक सामान्य लवण दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षारक से प्राप्त किया जाता है तो यह लवण क्षारीय कहलाता है क्योंकि इसका जलीय विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है।

-

उदाहरण Na2CO3, CH3COONa, Na2B4O7. 10H2O, Mg (OH) Cl, Zn (OH)CI आदि।

IV. द्विक लवण एक द्विक लवण दो लवण का एक मिश्रण है जो पानी में विघटित होने पर धातु आयनों के दो प्रकार देता है। उदाहरण मोहर लवण (FeSO4 (NH4)2 SO4. 6H2O), पोटाश एलम [K2SO4. Al2(SO4)3 24H2O) आदि ये लवण सूत्र में उपस्थित सभी आयनों (अवयवों) का परीक्षण देते हैं।

कुछ सामान्य लवण के उपयोग [Uses of Some Common Salts]

लवण

विशेष क्रिस्टल अशुद्धियों की उपस्थिति के

टूटी हड्डियों को जोड़ने व प्लास्टर

आंशिक रूप से इसमें

से क्रिस्टल जल को हटाकर प्लास्टर

CaSO4.

के रूप में,

जिप्सम

2H2O

खिलौने बनाने,

ऑफ पेरिस प्राप्त

दीवारों को

किया जाता है।

चिकना बनाने में

विद्युत लेपन में,

इसे नीला थोथा भी

कॉपर को शुद्ध

कहते हैं।

कॉपर

CuSO4

करने में रंगाई-

सल्फेट

SHO

छपाई में तथा

कीटाणुनाशी के रूप में

जल को शुद्ध

इसे सामान्य भाषा में

करने में, खून

फिटकरी भी कहते

K2SO4.

बहने से रोकने में

हैं।

Al2

पोटाश एलम

रंगाई में रंग बन्धक

(SO4)3

के रूप में, चमड़ा

24H2O

उद्योग में तथा

औषधि निर्माण में

इसे सॉल्ट पीटर भी

उर्वरक के रूप

पोटेशियम नाइट्रेट

में, काँच उद्योग

कहा जाता है।

KNO3

में, पाउडर तथा

आतिश बनाने में

pH स्केल [pH Scale]

pH मूल्य किसी पदार्थ की अम्लीयता और क्षारीयता की माप है। pH स्केल वह स्केल है, जो किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

1

|. pH =-log[H+]=log;

अथवा log

[H3O+]

क्योंकि H' सामान्य H3O (हाइड्रोनियम आयन) के रूप में रहता है। pH स्केल के बारे में 'सोरेन्सन' ने बताया, इसके अनुसार यदि उदासीन विलयन का pH 7

अणुसूत्र

उपयोग विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, सोडियम

सोडियम क्लोराइड

कारण ये प्राकृतिक

NaCl

हाइड्रॉक्साइड के

रूप से भूरे रंग का

निर्माण में

प्रयुक्त

दिखाई देता है। इसे

होने वाला कच्चा

चट्टानी नमक भी

अम्लीय विलयन का pH 7

पदार्थ है।

कहते हैं।

क्षारीय विलयन का pH 7

काँच, साबुन एवं

कागज उद्योग में,

इसे धावन का सोडा(Washing

BH=0 अम्लीय pH=7 क्षारीय pH =14 उदासीन

जल की स्थायी

Soda) भी कहते हैं।

सोडियम

Na2CO3.

कठोरता हटाने में,

pH = 3.5 तक प्रबल अम्ल (Strong Acid)

कार्बोनेट

10H2O

अपमार्जकों के

pH = 3.5 से अधिक व 7 से कम

दुर्बल अम्ल (Weak Acid)

+

pH 7 से ज्यादा दुर्बल क्षार

निर्माण में, कपड़ों

pH 10.5 से ज्यादा प्रबल क्षार

शुष्क धुलाई में

(drycleaning)

बेकिंग पाउडर

इसे

बेकिंग

+

बनाने में, सोडा

सोडा / मीठा

सोडा

सोडियम- बाइकार्बोनेट

NaHCO3 | अम्ल अग्निशामक भी कहते हैं।

में, प्रतिअम्ल के

रूप में

PH 7 से pH 0 की ओर जाने पर अम्लीयता का मान बढ़ता जाता है। pH 7 से 14 को जाने पर क्षारीयता का मान बढ़ता जाता है।

अम्ल तथा क्षारक की शक्ति विलयन (जल) में क्रमश: H' आयन तथा OH- आयन की संख्या पर निर्भर करती है। अधिक संख्या में H" आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं जबकि कम H' आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

323

कुछ सामान्य पदार्थों के pH मान

[pH of Some Common Substances]

उत्कर्ष प्रकाश

PH 0-1

बेटरी अम्ल

PH 1.2-2

जठर अम्ल

pH 2.2-3.4

नीबू का रस, सिरका

अम्लीय

pH 3.2-3.9

सन्तरे का रस, सोडा, कुछ दाँतों को साफ

करने वाले विलयन, वाइन

pH 4.0-4.4

टमाटर का रस, बीयर

pH 4.5-5.5

काली कॉफी

उदासीन

_pH 6.46.6 PH7

लार, गाय का दूध

शुद्ध जल

PH 7.3-7.5

मानव मूत्र, मानव रक्त

समुद्री जल, pH उदासीन करने वाले दन्त

pH 8

विलयन

क्षारीय

pH 9.2

बेकिंग सोडा सोडा पेय

PH 10

प्रति अम्ल

pH 11

दाँतों के उपचार में प्रयुक्त विलयन

PH 12.5

साबुन वाला पानी

PH 14

सोडियम हाइड्रॉक्साइड

मानव रक्त में, विभिन्न द्रव्यों में 'बफर पदार्थ' पाए जाते हैं, जो pH में परिवर्तन को रोकते हैं। जैसे HCO ु आयन।

वर्षा जल का pH जब 5.5 या इससे कम हो जाता है, तो इसे 'अम्लीय वर्षा' कहा जाता है। अम्लीय वर्षा से मृदा का pH प्रभावित होता है। में अम्लीयता के उपचार हेतु कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग मृदा किया जाता है।

सूचक [Indicators ]

सूचक रंग में परिवर्तन के द्वारा विलयन के pH में परिवर्तन को दर्शाते हैं। अतः सूचकों का प्रयोग किसी विलयन की प्रकृति अम्लीय क्षारीय अथवा उदासीन है ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

अम्ल-क्षार सूचक [Acid Base Indicators ]

+

ये दुर्बल कार्बनिक अम्ल या फिर दुर्बल कार्बनिक क्षारक होते हैं। उदाहरण- फीनॉल्फ्थलीन एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है तथा मेथिल ऑरेंज एक दुर्बल कार्बनिक क्षारक है। विभिन्न माध्यमों में सूचकों के रंग:-

दैनिक जीवन में pH का महत्त्व :-

+

+

मानव के पाचन तंत्र के भाग आमाशय (Stomach) में जठर रस (Gastric Juice) का स्रावण होता है, इसमें HCI (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता ,जिसके कारण ये प्रबल अम्लीय प्रकृति दर्शाता है। अत: आमाशय में भोजन के पाचन का माध्यम अम्लीय होता है। कभी-कभी जठर रस का स्रवण अधिक होने से अम्लीयता (Acidity) की समस्या होती है, जिसे 'मिल्क ऑफ मैग्नीशिया' / Mg (OH) 2 से दूर कर सकते हैं क्योंकि Mg (OH)2 क्षार है तथा ये अम्ल के साथ उदासीनीकरण (Neutralisation) की क्रिया द्वारा लवण (Salt) व जल का निर्माण करता है।

यदि दूध को बिना गर्म किए लंबे समय तक रखा जाए तो दूध में उपस्थित बैक्टीरिया अम्लों (Acid) का निर्माण कर इसे खट्टा कर देते हैं। अत: दुग्ध उत्पादक इस दूध में कुछ मात्रा में 'बेकिंग सोडा' / NaHCO3 मिला देते हैं जो इस अम्ल को उदासीन कर दूध का pH बढ़ा देते हैं, जिससे दूध खट्टा नहीं होता है। हालांकि ये बेकिंग सोडा मिलाने से दूध से दही का बनना भी विलंबित (Delayed) हो जाता है।

मुख-गुहा (Oral Cavity) में दाँतों के बीच फँसे भोज्य पदार्थों का अपघटन बैक्टीरिया द्वारा किया जाता है तथा ये बैक्टीरिया अम्ल उत्पादित कर लार की pH में कमी लाते हैं तथा कम pH पर जीवाण्वीय क्रिया (Bacterial Action) में वृद्धि होती है तथा दाँतों का क्षय (Decay of Teeth) बढ़ने लगता है।

जब कोई कीट ( मधुमक्खी / चींटी / ततैया ) हमें डंक मारते हैं तो अधिकांशतया इनके डंक में प्रबल अम्लीय पदार्थ पाए जाते हैं जो कि काटे गए स्थान पर जलन उत्पन्न करते हैं। अत: इसे उदासीन करने हेतु इस पर बेकिंग सोडा या चूने पत्थर का जलीय विलयन लगाने से pH पुनः सामान्य हो जाती है व जलन आराम मिलता है।

मानव रक्त का pH लगभग 7.4 लेकिन जब रक्त में CO2 की मात्रा बढ़ने लगे तो ये pH कम होने लगता है। ऐसे में ऑक्सीहीमोग्लोबिन वियोजित होकर ऑक्सीजन (O2) मुक्त करता है जिससे ऊतकों (Tissues) को पुन: O2 मिलने लगती है।

क्षारीय

PH

सूचक

माध्यम

परास

में रंग

अम्लीय माध्यम में रंग

लिटमस

5.5-7.5

नीला

लाल

मेथिल ऑरेंज

3.1-4.5

पीला

लाल

फीनॉफ्थलीन

8.0-9.8

गुलाबी

रंगहीन

बफर विलयन [Buffer Solution]

ऐसे विलयन, जिनका pH तनु करने अथवा अम्ल या क्षारक की थोड़ी- सी मात्रा मिलाने के बाद भी अपरिवर्तित रहती है, 'बफर विलयन' कहलाते हैं।

बफर विलयन के प्रकार [Types of Buffer Solution] यह दो प्रकार के होते हैं-

i.

अम्लीय बफर एसीटिक अम्ल व सोडियम एसीटेट का मिश्रण, हाइड्रोजन सायनाइड व पोटेशियम सायनाइड का मिश्रण तथा बोरिक अम्ल और बोरेक्स का मिश्रण अम्लीय बफर के उदाहरण हैं। ii. क्षारीय बफर किसी दुर्बल क्षारक तथा इसके प्रबल अम्ल के साथ लवण का समान मात्रा में मिश्रण क्षारीय बफर कहलाता है। अमोनियम हाड्रॉक्साइड तथा अमोनियम नाइट्रेट का मिश्रण भी क्षारीय बफर का उदाहरण है।

goo

भौतिक एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ

भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

+

वस्तुओं या पदार्थों में होने वाले परिवर्तन सामान्यतया दो प्रकार के होते हैं-

1.

भौतिक परिवर्तन [Physical Changes ] - ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ के केवल भौतिक गुणों (भौतिक अवस्था- ठोस / द्रव / गैस, आकार / आकृति, क्षेत्रफल, आयतन घनत्व, द्रव्यमान, लम्बाई / चौड़ाई / ऊँचाई, ताप, दाब, पृष्ठीय क्षेत्रफल आदि) में परिवर्तन होता है, रासायनिक गुण अपरिवर्तित रहते हैं, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।

324

i.

भौतिक परिवर्तन की विशेषताएँ-

ii.

उत्कर्ष प्रकाश

भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के भौतिक गुणों; जैसे रंग, आकार, अवस्था, ताप आदि में परिवर्तन होता है।

भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के रासायनिक गुण अपरिवर्तित रहते हैं। iii. भौतिक परिवर्तन में नए पदार्थों का निर्माण नहीं होता है।

iv. भौतिक परिवर्तन अस्थायी होता है।

V.

भौतिक परिवर्तन उत्क्रमणीय (Reversible) होते हैं।

2. रासायनिक परिवर्तन [ Chemical Changes ] - ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक गुणों के साथ-साथ रासायनिक गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है 'रासायनिक परिवर्तन' कहलाता है। रासायनिक परिवर्तन की विशेषताएँ-

(i) पदार्थ के भौतिक गुणों के साथ-साथ रासायनिक गुण भी बदल जाते हैं।

(ii) रासायनिक परिवर्तन से नए पदार्थों का निर्माण होता है।

(iii) रासायनिक परिवर्तन स्थायी होते हैं।

(iv) रासायनिक परिवर्तन अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होते हैं।

भौतिक परिवर्तन

(Physical Changes)

के उदाहरण

कागज के टुकड़े करना

शक्कर, नमक का पानी में घुलना

संघनन, आसवन, ऊर्ध्वपातन, गलन,

हिमन, क्वथनांक

विद्युत बल्ब का जलना

सोने, लोहे, काँच, मोम आदि का पिघलना

काँच का टूटना

लोहे का चुम्बक में बदलना एल्युमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पतला पत्र (फॉइल) बनाना

पानी की अवस्था परिवर्तन करना जैसे

(Chemical Changes )

नोट-

• मोमबत्ती के जलते समय रासायनिक परिवर्तन होता है, जिससे CO2 मुक्त होती है तथा ठोस मोम द्रव अवस्था में आ जाता है अर्थात् मोमबत्ती का जलना, भौतिक एवं रासायनिक दोनों परिवर्तनों का उदाहरण हैं।

रासायनिक परिवर्तन में नये पदार्थ के निर्माण के अतिरिक्त अन्य परिवर्तन भी हो सकते हैं-

ऊष्मा का उत्सर्जन अवशोषण

बुलबुलों के रूप में गैस का उत्सर्जन (सिरके में बेकिंग सोडा मिलाने पर)

• गंध में परिवर्तन (किण्वन)

ओजोन का अपघटन (20) 302 )

रासायनिक अभिक्रिया:-

किसी भी पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होने पर मूल पदार्थ के रासायनिक गुणों एवं संघटन में परिवर्तन हो जाता है अर्थात् पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होना रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है। रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार:-

1.

रासायनिक परिवर्तन

के उदाहरण

किसी पदार्थ का दहन

(कोयला, पेट्रोल, डीजल, केरोसीन,

2.

लकड़ी, कागज आदि।)

लोहे पर जंग लगना

दूध से दही बनना, दूध का फटना

सब्जी का पकना, फलों का

3.

पकना

श्वसन क्रिया

पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण

4.

भोज्य पदार्थों का पंचना

चाँदी का काला पड़ना

जल से बर्फ, बर्फ से पानी पानी से वायु में मैग्नीशियम (Mg) तार

वाष्प, वाष्प से पानी आदि

का जलना

प्रिज्म से गुजरने पर श्वेत प्रकाश का अम्लीकृत जल का वैद्युत

सात रंगों में विभक्त होना

आयोडीन का उदात्तीकरण

क्रिस्टलीकरण

अपघटन

कार्बन डाई ऑक्साइड को चूने के

पानी से

गुजारना

काटने के पश्चात् सेब (Apple)

का भूरे रंग में बदलना

हाथों पर मेहंदी रचना

किण्वन (Fermentation) के उदाहरण-

+

अंगूर से शराब का निर्माण

पनीर / ब्रेड का निर्माण

गोबर गैस (Bio Gas) का निर्माण

संयुग्मन अभिक्रिया: ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर / संयोग करके एक ही उत्पाद का निर्माण करते हैं। जैसे C(s) + O2 (g)

CO219) विस्थापन अभिक्रियाएँ ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिनमें एक अभिकारक में उपस्थित परमाणु एवं परमाणु का समूह दूसरे परमाणु या परमाणु के समूह द्वारा विस्थापित हो जाते हैं अर्थात् इसमें अधिक क्रियाशील तत्त्व कम क्रियाशील तत्त्वों को विस्थापित करता है। जैसे Zn + CuSO4 ZnSO4 + Cu

द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ : ऐसी अभिक्रिया जिसमें दोनों अभिकारकों के परमाणु या अणु आपस में विस्थापित हो जाते हैं तथा नये यौगिक का निर्माण होता है।

जैसे - BaC2 + Na2SO4 BaSO4 + + 2NaCl अपघटन अभिक्रिया: ऐसी अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक अपघटित होकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाते हैं, अपघटनीय अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

A

जैसे- CaCO3 i. विद्युत अपघटन

CaO+CO2

-

इसमें किसी यौगिक की गलित / द्रवित

अवस्था में विद्युत धारा प्रवाह करने पर अपघटित हो जाता है।

जैसे- 2NaCl (aq.)

ii. ऊष्मीय अपघटन

अपघटित हो जाता है।

जैसे 2KNO3 ताप

विद्युतधारा → 2NaCl21

इसमें यौगिक को ऊष्मा देने पर वह

_2KNO2 + O2

iii. प्रकाशीय अपघटन इस प्रकार के अपघटन में यौगिक प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त कर छोटे-छोटे उत्पादों में टूट जाता है। जैसे- 201 प्रकाश 302

5.

i.

मंद एवं तीव्र अभिक्रिया :-

तीव्र : वे अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों को मिलाने पर अत्यन्त तेजी से सम्पन्न होती है, ये आयनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। अभिकारकों की 1⁄2 आधी मात्रा को उत्पाद में बदलने में लगा समय अर्द्धआयुकाल कहलाता है।

325

उत्कर्ष प्रकाशन

ii.

ii. मंद :- ये अभिक्रियाएँ धीमे होती हैं, जिनको पूर्ण होने / सम्पन्न

होने में कुछ वर्षों, घण्टों, मिनटों का समय लगता है; जैसे:- लोहे पर जंग लगना।

उत्क्रमणीय- अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ:-

6.

i.

7.

अनुत्क्रमणीय

ऐसी अभिक्रिया केवल एक ही दिशा में सम्पन्न होती है तथा इनके उत्पाद से पुनः अभिकारक नहीं बनता है।

C+O2 → CO2

ii. उत्क्रमणीय यह दोनों दिशाओं में चलती है। ऐसी अभिक्रिया जिसमें अभिकारक अभिक्रिया करके उत्पाद बनाते हैं उसी समय उत्पाद भी अभिक्रिया करके अभिकारकों का निर्माण करते हैं, उत्क्रमणीय अभिक्रिया कहलाती है।

उदासीनीकरण अभिक्रिया :-

जब अम्ल एवं क्षार मिलकर अभिक्रिया करके लवण तथा जल का निर्माण करते हैं, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। HCl+NaOH

आम्ल

क्षार

NaCI+HO

नमक

जल

ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रियाएँ

8.

I.

ऑक्सीकरण - वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें O2 का संयोजन, H2 का निष्कासन, विद्युत धनी तत्त्वों का निष्कासन तथा इलेक्ट्रॉनों का त्याग किया जाता हो 'ऑक्सीकरण' कहलाती है।

ऑक्सीकरण अंक (Oxidation Number ) - तत्त्व पर उपस्थित आवेश |

अपचयन विद्युतऋणी तत्त्वों का हटना-

2FeCl3+H2 → 2FeCl2+2HCI

इलेक्ट्रॉन के आदान-प्रदान के आधार पर :-

i.

ii.

ऑक्सीकरण इनमें तत्त्व, परमाणु आयन / अणु इलेक्ट्रॉन त्याग करते हैं।

जैसे Na

Na' + e

Fe2" Fe + e*

2CI → Cb+2e

अपचयन- इनमें तत्त्व, परमाणु आयन / अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं।

जैसे Cl+e Cr

Mg2+ + 2e → Mg

9. रेडॉक्स अभिक्रिया वह अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण एवं अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं 'रेडॉक्स अभिक्रिया' कहलाती है। रेडॉक्स अभिक्रिया सामान्यतः ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) होती है।

उदासीनीकरण व जल अपघटन (Hydrolysis) अभिक्रियाएँ, रेडॉक्स अभिक्रिया नहीं होती हैं।

जैसे-

नोट-

+

-ऑक्सीकरण-

Zn +

Cuso

-अपचयन-

ZnSO, Cu

-

उदासीन परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या

शून्य

II. अपचयन वह अभिक्रिया जिसमें H2 का संयोजन, O2 का निष्कासन, विद्युत धनी तत्त्वों का संयोजन तथा इलेक्ट्रोनों को ग्रहण किया जाता हो, 'अपचयन' कहलाती है।

ऑक्सीजन के संयोग एवं वियोजन के आधार पर :- i. ऑक्सीकरण ऑक्सीजन का योग

2MgO22MgO

ii. अपचयन ऑक्सीजन की कमी-

2ZnO2Zn + O2

हाइड्रोजन के संयोग / वियोजन के आधार पर :-

i.

ऑक्सीकरण हाइड्रोजन का निष्कासन-

H2S+O2 SO2 + 2H2

ii. अपचयन हाइड्रोजन का योग-

H2+Cl22HCI

विद्युतधनी तत्त्वों के संयोग / वियोजन के आधार पर :-

-

i. ऑक्सीकरण धनविद्युती तत्त्वों का निष्कासन-

2KI+Cl2 → 2KCI+12

H2S+Cl2 → 2HCI+S

ii. अपचयन धनविद्युती तत्त्वों का योग-

-

Cl2+MgMgCl2

विद्युतऋणी तत्त्वों का संयोग / वियोजन के आधार पर :-

i.

ऑक्सीकरण विद्युतऋणी तत्त्वों का संयोग-

Mg+Cl2MgCl2

ऑक्सीकारक -

वह तत्त्व जिसका अपचयन होता है 'ऑक्सीकारक' कहलाता है। ऑक्सीकारक इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करता है।

अपचायक-

-

वह तत्त्व जिसका ऑक्सीकरण होता है 'अपचायक' कहलाता है। अपचायक - इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।

संक्षारण (Corrosion) :- अवांछनीय रासायनिक परिवर्तन उदाहरण-

चाँदी के बर्तनों पर काली परत का जमना (सल्फाइड के निर्माण के कारण)

ताँबे के बर्तनों पर हरी परत का जमना (CuCO3. Cu (OH)2) कॉपर कार्बोनिट कॉपर हाइड्रॉक्साइड के निर्माण के कारण

लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron) :-

जंग (Rust) - Fe2O3. XH2O (हाइड्रेटेड फैरिक ऑक्साइड) जंग लगने की प्रक्रिया समुद्री जल में जल्दी होती है।

जंग लगने की शर्त O2, जल / नमी की उपस्थिति आवश्यक है। जंग लगना रासायनिक परिवर्तन, Fe का ऑक्सीकरण, जंग लगने पर लोहे का भार बढ़ता है।

जंग लगने से बचाने के लिए पेन्ट करते हैं। लोहे पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है, जिसे जस्तीकरण / गैल्वेनीकरण कहते हैं। जंग लगने से बचाने के लिए एनोडीकरण या मिश्रधातु का निर्माण किया जाता है। उत्प्रेरक :-

परिभाषा ऐसे रासायनिक पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बदल देते हैं और स्वयं द्रव्यमान व संघटन के रूप में अपरिवर्तित रहते हैं, उत्प्रेरक कहलाते हैं तथा इस क्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं।

326

उत्कर्ष प्रकाश

खोजकर्ता बर्जीलियस (1853 में खोज की थी

|2KCIO 3- 600-2

उत्प्रेरक के अनुप्रयोग

प्रयोग

उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में

• 2KCI + 302

उत्प्रेरक (Catalyst)

(Uses)

2KCIO,

उत्प्रेरक MnO2 338°C

→ 2KCI + 302

लौह चूर्ण

हेबर (Haber's) की प्रक्रिया द्वारा अमोनिया के उत्पादन में

नोट- MNO2 अभिक्रिया में भाग नहीं लेता है तथा द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।

उत्प्रेरक के प्रकार

प्लेटिनम चूर्ण

Contact Process द्वारा सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में

नाइट्रोजन चूर्ण

1.

धनात्मक उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाने वाले पदार्थ धनात्मक उत्प्रेरक कहलाते हैं।

निकल

2.

अतः उत्प्रेरक की उपस्थिति से रासायनिक अभिक्रिया की क्रियाविधि परिवर्तित हो जाती है जिससे सक्रियण ऊर्जा का मान कम हो जाता है। ऋणात्मक उत्प्रेरक- रासायनिक अभिक्रिया के वेग को कम कर देने वाले उत्प्रेरक को ऋणात्मक उत्प्रेरक कहते हैं।

गर्म एल्यूमिना

क्यूप्रिक क्लोराइड

पेप्सिन एंजाइम

लेड चैंबर प्रक्रिया द्वारा सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में

वनस्पति तेलों से कृत्रिम घी के उत्पादन में ईथर से शराब बनाने की प्रक्रिया

डीकेन प्रक्रिया के द्वारा क्लोरीन गैस के उत्पादन में।

पेट में प्रोटीन को पेप्टाइड में अपघटित करने के लिए।

उदाहरण-2H2O2

→2H2O+02

हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन ग्लिसरॉल की उपस्थिति में कम हो जाता है।

इरेप्सिन एंजाइम

आँत में प्रोटीन को अमीनो एसिड में अपघटित करने के लिए।

टायलिन एंजाइम

नोट- ऋणात्मक उत्प्रेरक को मंदक या निरोधक भी कहते हैं।

मानव लार में स्टार्च को माल्टोज में परिवर्तित करने के लिए।

उदाहरण- पेट्रोल अपस्फोटन कम करने के लिए इसमें [TEL] टेट्रा एथिल लेड मिलाते हैं।

जाइमेज एंजाइम

ग्लूकोज़ से एथिल एल्कोहॉल शराब के परिवर्तन में।

3. स्वतः उत्प्रेरक जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में बनने वाला उत्पाद स्वयं ही उस अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित करता है तो उसे स्वतः उत्प्रेरक कहते हैं।

डायस्टेस एंजाइम

स्टार्च से माल्टोज के परिवर्तन में

माइकोडर्मी एसिटी

चुकन्दर से सिरका परिवर्तन में

इन्वर्टेज एंजाइम

उदाहरण- एस्टर के जल अपघटन की दर प्रारम्भ में कम होती है, परन्तु कुछ समय पश्चात् अपघटन की दर तीव्र हो जाती है, क्योंकि अभिक्रिया में उत्पन्न CH COOH द्वारा जनित H' आयन उत्प्रेरक का कार्य करता है।

लैक्टोज

लाइपेज

एमाइलेज

ट्रिप्सिन

रेनिन

4. प्रेरित उत्प्रेरक- यदि किसी अभिक्रिया का वेग उसके साथ होने वाली दूसरी अभिक्रिया के प्रेरण से तीव्र हो जाता है तो इसे प्रेरित उत्प्रेरक कहते हैं।

उत्प्रेरण :-

• उत्प्रेरण के मुख्यतः दो प्रकार:-

1. समांगी उत्प्रेरण-जब क्रियाकारक क्रियाफल तथा उत्प्रेरक तीनों समान प्रावस्था में हों तो इसे समांगी उत्प्रेरण अभिक्रिया कहते हैं।

NOK)

उदाहरण- 2SO (g) +0. (g)

→ 25O, (g)

2. विषमांगी उत्प्रेरण - यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया में क्रियाकारक क्रियाफल एवं उत्प्रेरक की भौतिक अवस्था अलग-अलग होती है, तो इसे विषमांगी उत्प्रेरण अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण- अमोनिया की हैबर विधि

Fe(s)

|N2(g)+3H,(g)- → 2NH, (g)

उदाहरण तेलों का हाइड्रोजनीकरण

वनस्पति तेल (l) + H2(8)-

Ni(s)

→ वनस्पति घी (s)

327

रेडियोएक्टिव :-

गन्ना से फ्रक्टोज और ग्लूकोज़ परिवर्तन में दूध से लैक्टिक एसिड के उत्पादन में

वसा को वसीय अम्ल व ग्लिसरॉल में तोड़ता है।

कार्बोहाइड्रेट को डाई सेकेरॉइड में बदलता है। प्रो��ीन को पेप्टोन में बदलता है।

दूध के केसीन का पाचन करता है।

000

रेडियोएक्टिव पदार्थ

रेडियोधर्मिता वह प्रक्रिया होती है जिसमें एक अस्थिर परमाणु अपने नाभिक से आयनकारी विकिरण के रूप में ऊर्जा निकालता है। ऐसे पदार्थ जो स्वयं ही ऐसी ऊर्जा निकालते हैं। रेडियोधर्मी या रेडियोएक्टिव कहलाते हैं।

नाभिक का स्थायित्व :-

हल्के तत्त्वों में न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन का अनुपात (n/p) बढ़ने पर स्थायित्व में कमी आती है।

भारी तत्त्वों में न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन का अनुपात (n/p) बढ़ने पर स्थायित्व में वृद्धि होती है।

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज्यादा होने पर नाभिक का स्थायित्व अधिक होता है।

उत्कर्ष प्रकाशन

जब कोई नाभिक अस्थायी होता है तो वह अधिक स्थायी नाभिक का निर्माण करने के लिए नाभिकीय संलयन एवं नाभिकीय विखण्डन जैसी क्रियाएँ दर्शाता है।

नाभिकीय विखण्डन (Nuclear Fission) :-

जब कोई अस्थायी रेडियोसक्रिय नाभिक दो या दो से अधिक छोटे- छोटे नाभिकों में टूटता है तो इसे नाभिकीय विखण्डन कहते हैं। नाभिकीय विखण्डन के दौरान अत्यधिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है, साथ ही तीव्रगामी न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं।

ऑटोहॉन व स्ट्रॉसमैन ने नाभिकीय विखण्डन के बारे में सर्वप्रथम बताया।

यूरेनियम 235 पर न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है।

इस विखण्डन से लगभग 200 Mev ऊर्जा प्राप्त या 0.8 Mev प्रति न्यूक्लियॉन ऊर्जा मुक्त होती है।

जब नाभिकीय विखण्डन होता है तो विखण्डन में उत्पन्न 3 न्यूट्रॉन पुनः विखण्डन क्रिया करते हैं। इस प्रकार सतत चलने वाली क्रिया 'श्रृंखला अभिक्रिया' कहलाती है।

नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया का अनुप्रयोग परमाणु भट्टी / नाभिकीय संयंत्र में करते हैं।

+

U-235 ज्यादा विखण्डनीय होता है अर्थात् आसानी से विखण्डित होता है तथा ये अधिक ऊर्जा देता है। इसे तीव्र अथवा मंद गति के न्यूट्रॉन दोनों ही विखण्डित कर सकते हैं।

प्राकृतिक यूरेनियम में इसकी मात्रा 0.7 प्रतिशत होती है।

U238 कम विखण्डनीय होता है अर्थात् आसानी से विखण्डित नहीं होता तथा ये ऊर्जा भी कम देता है, इसे विखण्डित करने के पश्चात् तीव्र न्यूट्रॉन भी मंद हो जाता है। इस कारण ये श्रृंखला बनाने के योग्य नहीं होता है।

प्राकृतिक यूरेनियम में इसकी मात्रा 99.3 प्रतिशत होती है।

प्राकृतिक यूरेनियम से U-235 को पृथक् किया जाता है तत्पश्चात् इसका उपयोग किया जाता है।

यूरेनियम का आकार क्रांतिक आकार से अधिक आकार का रखना आवश्यक होता है, जिससे कि श्रृंखला अभिक्रिया चलती रहे। नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) :-

एनरिको फर्मी ने सर्वप्रथम नाभिकीय विखण्डन की सहायता से • न्यूक्लियर रिएक्टर का निर्माण किया।

परमाणु भट्टी / परमाणु संयंत्र ( Nuclear Reactor ) :-

नाभिकीय विखण्डन की क्रिया पर आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर ऐसा संयंत्र है जिसमें नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के द्वारा नाभिकीय विखण्डन किया जाता है।

न्यूक्लियर रिएक्टर की संरचना में विभिन्न भाग दिखाई देते हैं।

ईंधन (Fuel) :-

• यूरेनियम - 235, यूरेनियम- 238, प्लूटोनियम- 239, प्लूटोनियम- 240, प्लूटोनियम-241 आदि का प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं।

मंदक (Moderator) :-

ये न्यूट्रॉनों की गति को मंद कर देते हैं, जिसमें तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की संख्या कम हो जाने से विखण्डन क्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है।

एक अच्छा मंदक वह होता है जिसका परमाणु भार कम हो, जो न्यूट्रॉन को अवशोषित किए बिना उनका वेग कम कर दें।

ग्रेफाइट एवं भारी जल (D2O) को मंदक के रूप में प्रयुक्त करते हैं।

नियंत्रक छड़ें (Controlling rods) :-

नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉन्स को अवशोषित करने में प्रयुक्त होती हैं।

• ये कैडमियम (Cd) की बनी होती हैं।

शीतलक :-

+

शीतलक के रूप में भारी जल / D2O या द्रवित नाइट्रोजन, CO2 व O2 का प्रयोग करते हैं।

ये विखण्डन के दौरान उत्पन्न ऊष्मा को अवशोषित करते हैं।

परिरक्षक आवरण :-

ये सीमेन्ट, कंकरीट आदि से बना मोटा आवरण है जो नाभिकीय विकिरणों से संयंत्र में कार्यरत श्रमिकों को बचाता है।

संवर्द्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) :-

जब यूरेनियम में U-235 की मात्रा को बढ़ाया जाता है तो ऐसा यूरेनियम 'संवर्द्धित यूरेनियम' कहलाता है।

+

जब दो हल्के नाभिक आपस में जुड़कर किसी भारी नाभिक का निर्माण करते हैं तो इसे नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहते हैं। संलयित होने वाले छोटे नाभिकों का कुल द्रव्यमान संलयन के बाद बने भारी नाभिक के द्रव्यमान से कम होता है, द्रव्यमान में ये कमी या क्षति ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।

नाभिकीय संलयन अत्यन्त उच्च तापमान ( 108 केल्विन) तथा उच्च दाब (106 atm) पर संभव हो पाता है। ऐसी परिस्थितियाँ प्राकृतिक रूप से सूर्य व तारों की सतह पर होती है जहाँ नाभिकीय संलयन की क्रिया होती रहती है।

हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन पर आधारित होता है जबकि परमाणु

बम नाभिकीय विखण्डन पर आधारित होता हैं। हाइड्रोजन बम के आविष्कारक एडवर्ड टेलर थे।

परमाणु बम के आविष्कारक ओपेनहाइमर थे।

नाभिकीय संलयन के दौरान अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती हैं तथा विखण्डन की क्रिया को नियंत्रित करना संभव नहीं है; जैसे- दो ड्यूटीरियम उच्च ताप तथा उच्च दाब पर संलयित होकर हीलियम के नाभिक तथा न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं, साथ ही 3.17 Mev ऊर्जा मुक्त होती है।

इसी प्रकार दो ड्यूटीरियम उच्च ताप व उच्च दाब पर संलयित होकर ट्राइटियम के नाभिक तथा प्रोटियम का निर्माण करते हैं साथ ही साथ 4.07 Mev ऊर्जा मुक्त होती है।

एक ड्यूटीरियम तथा एक ट्राइटियम संलयित होकर एक ही हीलियम के नाभिक का तथा एक न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं साथ ही 17.59 Mev ऊर्जा मुक्त होती है।

रेडियो सक्रियता / रेडियो धर्मिता (Radioactivity) :-

328:

भारी नाभिकों से स्वत: ही रेडियोधर्मी विकिरणों का उत्सर्जन रेडियो सक्रियता कहलाता है।

अस्थायी नाभिक रेडियोधर्मिता का गुण दर्शाते हैं।

1896 ई. में हेनरी बेकुरल ने यूरेनियम के नमूने से रेडियो सक्रियता की खोज की।

क्यूरी दंपती ने रेडियम की खोज कर इसके रेडियोधर्मी गुणों के बारे में

बताया।

परमाणु क्रमांक 82 से अधिक परमाणु क्रमांक वाले तत्त्व रेडियो सक्रियता दर्शाते हैं, उदाहरण यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, नेपच्यूनियम, पोलोनियम आदि ।

हल्के नाभिकों पर तेज गति के न्यूट्रॉन टकराने पर वे रेडियो सक्रियता दर्शाते हैं इसे कृत्रिम रेडियो सक्रियता कहते हैं।

रेडियो सक्रियता के मात्रक :-

1 बैकुरल 1 विघटन / सेकण्ड

1 रदरफोर्ड = 10° विघटन / सेकण्ड

1 क्यूरी 3.7 x 101° विघटन / सेकण्ड

अर्द्ध आयु (Half life) :-

उत्कर्ष प्रकाश

वह समय जिसमें सक्रिय नाभिकों की संख्या आधी रह जाती है, अर्द्ध आयु कहलाती है।

N No.

रेडियम की अर्द्ध आयु 1600 वर्ष होती है।

पोलोनियम की अर्द्ध आयु 10 सेकण्ड होती है।

रेडियोसक्रिय समस्थानिकों के उपयोग :-

चिकित्सा के क्षेत्र में :-

वर्तमान में कार्बनिक यौगिक हजारों की संख्या में पाए जाते हैं इतनी संख्या में कार्बनिक यौगिक पाए जाने के दो मुख्य कारण हैं-

1.

कार्बन की चतुःसंयोजकता कार्बन में चार संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। अत: अष्टक पूरा करने के लिए कार्बन अन्य तत्त्वों के साथ चार इलेक्ट्रॉन को साझा कर सहसंयोजी यौगिक (Covalent compounds) बनाता है।

2. श्रृंखलन - कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर लम्बी श्रृंखलाएँ बनाते हैं जिससे विभिन्न कार्बनिक यौगिकों का निर्माण होता है।

कार्बन के अपररूप :

कार्बन के विभिन्न रूप जिनके रासायनिक गुणों में समानता किन्तु भौतिक गुणों में अंतर होता है, कार्बन के अपररूप कहलाते हैं। कार्बन के अपररूप दो प्रकार के होते हैं-

आयोडीन 131 का उपयोग थायरॉइड कैन्सर के उपचार में किया जाता है।

+

फॉस्फोरस 31 का उपयोग त्वचा संबंधी रोगों में किया जाता है।

1.

कोबाल्ट-60 का उपयोग रक्त कैन्सर में किया जाता है।

#:

पुरातत्त्व में :-

C-14 कार्बन डेटिंग पद्धति में (जीवाश्मों की आयु निर्धारण में)

K-40 का उपयोग अंतरिक्ष पिण्डों की आयु ज्ञात करने में किया जाता है। हीरा :-

कृषि में :-

कोबाल्ट-60, फॉस्फोरस 31 तथा AgI का उपयोग किया जाता है।

000

● कार्बन एवं उसके यौगिक, ईंधन

कार्बन एवं इसके यौगिक :

कार्बन अधातु है, इसका प्रतीक 'C' है।

कार्बन भूपर्पटी में खनिजों के रूप में 0.02% तथा वायुमण्डल में CO2 के रूप में 0.03% उपस्थित है।

नोट:- सभी सजीवों-पौधों एवं जन्तुओं का शरीर कार्बन यौगिकों

का बना होता है।

कार्बन आवर्त सारणी में संख्या 6 पर स्थित तत्त्व है।

कार्बन में प्रोटोन, इलेक्ट्रॉन तथा न्यूट्रॉन की संख्या 6 होती हैं।

कार्बन चतुःसंयोजी तत्त्व होता है।

इसमें श्रृंखलन का गुण पाया जाता है।

कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 होता है इलेक्ट्रॉनिक विन्यास Cs=K-

2 L-4 एवं द्रव्यमान संख्या 12 (6C12) होती है।

कार्बनिक यौगिक :

+

कार्बन एवं कार्बन के साथ अन्य तत्त्वों से मिलकर बने यौगिक, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं।

बर्जिलियस के जैव शक्ति सिद्धान्त के अनुसार, कार्बनिक पदार्थों का निर्माण केवल जीवित जीवों के शरीर में ही होता है।

होलर (Wholer) ने सर्वप्रथम प्रयोगशाला में अमोनियम सायनेट (NH4CNO) को गर्म कर कार्बनिक पदार्थ यूरिया का संश्लेषण किया। यह प्रथम संश्लेषित कार्बनिक यौगिक था, जो कि पुनः व्यवस्थापन प्रक्रिया से बना ।

गर्म

NH,CNO NH, -C-NH,

O

329

+

2.

क्रिस्टलीय कार्बन के क्रिस्टलीय रूप के उदाहरण हैं- हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन ।

अक्रिस्टलीय कार्बन के अक्रिस्टलीय रूप के उदाहरण हैं- कोयला, चारकोल, कोक तथा काजल |

हीरा कार्बन का क्रिस्टलीय अपररूप है।

शुद्ध हीरा पारदर्शक एवं रंगहीन होता है किन्तु अशुद्धियों की उपस्थिति के कारण यह भिन्न-भिन्न रंगों का होता है।

हीरा काँच को आसानी से काट देता है एवं पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण चमकता है।

यह ताप और विद्युत का कुचालक होता है।

ग्रेफाइट :-

ग्रेफाइट कार्बन का एक उपयोगी क्रिस्टलीय अपररूप है। ग्रेफाइट की संरचना जालक सतह के रूप में होती है।

दुर्बल वॉन्डरवॉल बंध

ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है क्योंकि इसमें एक मुक्त इलेक्ट्रॉन पाया जाता है।

ग्रेफाइट का उपयोग पेंसिल में किया जाता है एवं ग्रेफाइट चूर्ण ���ा उपयोग मशीनों में शुष्क स्नेहक के रूप में किया जाता है।

फुलरीन :

यह कार्बन का नवीनतम खोजा गया अपररूप है।

• स्मेली, क्रोटो व कर्ल इन तीन वैज्ञानिकों ने फुलरीन की खोज की।

उत्कर्ष प्रकाश

Nomenclature of Organozinc Compounds :- (नामकरण) 1. एल्केन (C-C) (पैराफिन्स ]

ये खुली श्रृंखला वाले, संतृप्त कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल बंध (Single bond) पाया जाता है। इसका सामान्य सूत्र CaHan+2 होता है; जैसे प्रोपेन (C3Hs), ब्यूटेन (CH10) 1

फुलरीन की संरचना

इसमें कार्बन के कम से कम 60 परमाणु आपस में बंध बनाते हुए फुटबॉल जैसी पिंजरेनुमा संरचना बनाते हैं। इसे C-60 भी कहते हैं। फुटबॉल जैसी संरचना के कारण इसे बकीबॉल भी कहते हैं।

बकमिन्स्टर फुलर

के नाम के आधार पर इसे फुलरीन कहा गया है।

ग्रेफाइट को निष्क्रिय गैसों की उपस्थिति में इलेक्ट्रिक आर्क द्वारा गर्म करने पर फुलरीन का निर्माण ।

इसमें कार्बन SP2 संकरित होता है।

हाइड्रोकार्बन [Hydrocarbon ]

• कार्बन (C) तथा हाइड्रोजन (H) से निर्मित यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

+

उदाहरण- CH4 (मीथेन), C2Hs (एथेन), C2H4, C2H2 हाइड्रोकार्बन का वर्गीकरण [Classification of Hydro Carbon ]

Hydrocarbon

A. विवृत्त श्रृंखला युक्त (Noncyclic) (ऐलिफटिक)

B. संवृत्त श्रृंखला युक्त (cyclic) (वलय युक्त)

संतृप्त हाइड्रोकार्बन

C-C के मध्य Single bond

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

Ex- मीथेन, प्रोपेन, एथेन

एल्कीन

C-C के मध्य double bond

Ex- एथीन, प्रोपीन, ब्यूटीन

एल्काइन

CC के मध्य Triple bond | Ex- एसिटीलीन प्रोपाइन

Cyclic Hydrocarbon

एलिसाइक्लिक

इनको जलाने पर ये बिना धुएँ की ज्वाला के साथ जलते हैं। उदाहरण साइक्लोहेक्सेन

ऐरोमेटिक ↓

इनको जलाने पर ये काले धुएँ के साथ जलते हैं। उदाहरण- बेंजीन

330

II.

1C = मेथ

6C हैक्स

2C = ऐथ

7C = हेप्ट

3C प्रोप

8C = ऑक्ट

4C = ब्यूट

9C = नॉन

SC = पेण्ट

10C = डेक

मीथेन (CH4) एल्केन श्रेणी का प्रथम यौगिक है। यह दलदले स्थानों से प्राकृतिक रूप से निकलती है अत: इसे 'मार्श गैस' कहा जाता है। प्राकृतिक गैस में लगभग 85 प्रतिशत मीथेन होती है।

LPG (Liquified Petroleum Gas) में मुख्य रूप से प्रोपेन एवं ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होता है।

एल्किन [ ऑलिफिन्स]

यह असंतृप्त कार्बनिक यौगिक है जिनमें कार्बन परमाणु के मध्य द्विबंध (CC) पाया जाता है।

इसका सामान्य सूत्र CaHzn होता है।

इसका प्रथम यौगिक CH4 एथीन या एथाइलिन होता है जो कि फलों को पकाने में प्रयुक्त किया जाता है।

III. एल्काइन:-

यह असंतृप्त कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिबंध पाया जाता है; उदाहरण प्रोपाइन (C3H4), एसीटिलीन अथवा एथाइन (CH2)

इसका सामान्य सूत्र CaHana] होता है।

बंद श्रृंखला वाले कार्बनिक यौगिक:-

इन कार्बनिक यौगिकों में कार्बन श्रृंखला के सिरे के परमाणु आपस में जुड़कर वलय संरचना का निर्माण करते हैं।

यदि वलय में कार्बन एवं हाइड्रोजन परमाणु के अलावा अन्य तत्त्व; जैसे- N, O, S आदि हों तो इन्हें विषमचक्रीय कार्बनिक यौगिक कहते हैं।

थायोफीन

फ्यूरेन

N पिरीडीन

यदि वलय संरचना में केवल कार्बन व हाइड्रोजन के परमाणु ही हों तो

1

इन्हें समचक्रीय कार्बनिक यौगिक कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं- 1. एलिसाइक्लिक:-

• उदाहरण-साइक्लो ब्यूटेन (CaHs) तथा साइक्लो हेक्सेन (C6H12)

HH

H-C-C — H

H-C-C-H

H H

साइक्लो ब्यूटेन

उत्कर्ष प्रकाश

दैनिक जीवन में हमारे आस-पास की वस्तुओं, सजीवों तथा हमारे शरीर में भी विभिन्न प्रकार के परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

ईंधन (Fuel) -

वे पदार्थ जो जलने पर ऊष्मा एवं प्रकाश प्रदान करे, 'ईंधन' कहलाते हैं। ईंधन ठोस, द्रव या गैस अवस्था में हो सकता हैं।

अच्छे ईंधन की विशेषताएँ-

ईंधन का ऊष्मीय मान उच्च होना चाहिए।

+

ईंधन आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।

ईंधन सस्ता होना चाहिए।

2. एरोमेटिक :-

ईंधन का परिवहन आसानी से होना चाहिए।

ईंधन में अवाष्पशील अशुद्धियाँ न्यूनतम होनी चाहिए।

ईंधन के जलने पर जहरीली गैसों का उत्सर्जन कम होना चाहिए। ईंधन में आर्द्रता नहीं होनी चाहिए।

ईंधन के प्रकार

H H

H

H

H

H

+

H

-H

H

H

H H

साइक्लो हेक्सेन

ये यौगिक विशेष गंध वाले कार्बनिक यौगिक होते हैं जो अनुनाद (Resonance) जैसी विशेषताएँ दर्शाते हैं; उदाहरण- बेन्जीन, फिनॉल, टॉलूईन आदि।

बेंजीन:-

H-C

H

c

अवस्था के आधार पर ईंधन के प्रकार-

i. ठोस ईंधन-वे ईंधन जो ठोस अवस्था में पाए जाते हैं, ठोस ईंधन कहलाते हैं। इनके दहन पर जहरीली गैसें अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में उत्सर्जित होती हैं; जैसे लकड़ी, कोयला ।

ii. द्रव ईंधन-ये द्रव अवस्था में पाए जाते हैं। इनका ऊष्मीय मान उच्च होता है; जैसे-पेट्रोल, डीजल, केरोसीन ।

iii. गैस ईंधन ये गैसों के रूप में उपलब्ध होते हैं 'गैस ईंधन' ठोस ईंधन एवं द्रव ईंधन की तुलना में अच्छा माना जाता है; जैसे- गोबर गैस, प्राकृतिक गैस, भाप अंगार गैस ।

कोयला

C-H

or

H-C CH

H

बेंजीन

CH,

यह एक जीवाश्म ईंधन है। इससे मृत वनस्पति में जीवश्मीकरण हुआ था। इस अवशेष में कार्बनीकरण की प्रक्रिया से कोयला प्राप्त हुआ। कोयले में मुक्त कार्बन, कार्बन के यौगिक, लोहा, सल्फर, नाइट्रोजन आदि उपस्थित होते हैं।

में

कोयला ठोस ईंधन का प्रकार है।

कोयले के निर्माण की प्रक्रिया 'कार्बनीकरण' कहलाती है।

कोयले का निर्माण कार्बोनिफेरस काल में हुआ।

कोयला परतदार चट्टानों में पाया जाता है।

कार्बन की मात्रा एवं जलवाष्प की मात्रा के आधार पर कोयले को चार भागों में बाँटा जा सकता हैं-

I.

+

+

टॉलूईन

बेंजीन को सभी ऐरोमैटिक यौगिकों का जन्मदाता कहा जाता है।

+

+

इसका उपयोग अन्य ऐरोमैटिक यौगिकों के निर्माण में तेल, वसा, रबड़ तथा अन्य पदार्थों के विलायक के रूप में तथा ऊनी कपड़ों की शुष्क धुलाई में किया जाता हैं।

+

बेंजीन और पेट्रोल के मिश्रण का उपयोग मोटरकारों में ईंधन के रूप में किया जाता हैं।

+

टॉलूईन:-

• इसे सर्वप्रथम टॉलू बॉलसम नामक एक रेजिन के शुष्क आसवन द्वारा प्राप्त किया गया। इसका उपयोग TNT विस्फोटक, प्रतिहिमीभूत के रूप में, विलायक के रूप में, क्लोरामीन-टी नामक दवा बनाने में, कृत्रिम मधुरक सैकरीन के निर्माण में तथा शुष्क धुलाई में किया जाता है।

एन्थ्रासाइट

-

यह सर्वोत्तम क्वालिटी का कोयला है।

एन्थ्रासाइट में कार्बन की मात्रा सर्वाधिक ( 80% से अधिक ) होती है।

एन्थ्रासाइट जलने पर धुआँ एवं राख न्यूनतम देता है।

एन्थ्रासाइट जलने पर सर्वाधिक ऊष्मा / ऊर्जा प्रदान करता है।

यह सर्वाधिक चमकीला कोयला है।

एन्थ्रासाइट में न्यूनतम आर्द्रता होती है।

एन्थ्रासाइट सबसे कठोर कोयला है।

एन्थ्रासाइट सबसे पुराना एवं सबसे कम पाया जाने वाला कोयला है।

II. बिटुमिनस

+

+

331

इस कोयले में कार्बन की मात्रा लगभग 70-80% होती है। एन्थ्रासाइट के पश्चात् बिटुमिनस अच्छी क्वालिटी का कोयला माना जाता है।

भारत में इस कोयले के भण्डार अधिक हैं।

+

+

उत्कर्ष प्रकाशन

इस कोयले में आर्द्रता की मात्रा एन्थ्रासाइट कोयले से अधिक होती है।

यह कोयला जलने पर राख एवं धुआँ, एन्थ्रासाइट कोयले से अधिक देता है।

यह कोयला लिग्नाइट एवं पीट कोयले से अच्छा माना गया है। III. लिग्नाइट -

लिग्नाइट में कार्बन की मात्रा लगभग 60-70% होती है। लिग्नाइट कोयले को भूरा कोयला भी कहा जाता है। पीट की तुलना में यह कोयला अच्छा होता है, लेकिन एन्थ्रासाइट एवं बिटुमिनस से निम्न क्वालिटी का होता है।

राजस्थान में लिग्नाइट कोयला अधिक मिलता है।

यह कोयला जलने पर पीट से कम, जबकि एन्थ्रासाइट तथा बिटुमिनस से अधिक धुआँ एवं राख देता है।

IV. पीट-

पीट कोयले में कार्बन की मात्रा न्यूनतम (लगभग 50-60% या 50% से कम) होती है।

यह सबसे निम्न क्वालिटी का कोयला है।

इसमें सर्वाधिक आर्द्रता होती है।

पीट कोयला जलने पर धुआँ एवं राख सर्वाधिक देता है।

यह कोयला जलने पर न्यूनतम ऊष्मा / ऊर्जा प्रदान करता है। Note :- कोयले की क्वालिटी का क्रम एन्थ्रासाइट बिटुमिनस लिग्नाइट पीट

कोयले का सर्वाधिक उपयोग तापीय ऊर्जा संयंत्रों में किया जाता है। पेट्रोलियम पदार्थों का पृथक्करण 'प्रभाजी आसवन विधि द्वारा किया जाता है।

विश्व में पेट्रोलियम पदार्थों का सर्वप्रथम उत्खनन USA में किया गया। भारत में पेट्रोलियम पदार्थों का सर्वप्रथम उत्खनन असम में किया गया। राजस्थान के बाड़मेर में लगने वाली रिफाइनरी भारत की पहली BS- VI] रिफाइनरी है।

ईंधन के दहन से उत्पन्न ऊष्मा जब पूर्ण रूप से कार्य में नहीं बदल पाती है, तो धात्विक ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे 'अपस्फटन' कहा जाता है। अपस्फटन रोकने हेतु ईंधन में मिलाया जाने वाला पदार्थ 'अपस्फटनरोधी' कहलाता है।

LPG को 'रसोई गैस' तथा 'कुकिंग गैस' भी कहा जाता है। नोट :-

+ समुद्री चट्टानों से बुलबुलों के रूप में निकलने वाली मीथेन गैस 'क्लेथरेट' कहलाती है।

+

दलदली क्षेत्रों से बुलबुलों के रूप में निकलने वाली मीथेन गैस 'मार्श गैस' कहलाती है।

गोबर गैस-

+

गोबर, पत्तियाँ, घास-फूस आदि को O2 की अनुपस्थिति में सड़ा- गलाकर, गोबर गैस तैयार की जाती हैं।

गोबर गैस का मुख्य घटक मीथेन गैस है। कोल गैस (Coal Gas) -

+

कोल गैस को कोयले के 'भंजन आसवन' विधि द्वारा बनाया जाता है। कोल गैस का मुख्य घटक हाइड्रोजन गैस है।

हाइड्रोजन गैस के अतिरिक्त मीथेन, CO, CO2 आदि गैसें भी होती हैं। भाप अंगार गैस-

+

इसे जल गैस (Water Gas) भी कहा जाता है।

इसका मुख्य घटक हाइड्रोजन गैस है।

हाइड्रोजन के अतिरिक्त कार्बन मोनोक्साइड गैस (CO), कार्बन डाई- ऑक्साइड गैस (CO2) भी होती है।

इसे 900°C से 1000°C ताप पर जलते हुए कोयले के ऊपर से वाष्प को प्रवाहित करके प्राप्त किया जाता है।

इसका उपयोग हाइड्रोजन तथा एल्कोहॉल के निर्माण में अपचायक के रूप में किया जाता है।

उत्पादक गैस (प्रोड्यूसर गैस) -

+

इसे काँच निर्माण में काम में लिया जाता है।

इसे 'वायु अंगार गैस' तथा 'प्रोड्यूसर गैस' भी कहा जाता है।

इसका मुख्य घटक 'नाइट्रोजन गैस' है।

नाइट्रोजन के अतिरिक्त कार्बन मोनोक्साइड (CO) तथा CO2 भी इसके घटक होते हैं।

इसका निर्माण लाल तप्त कोयले से किया जाता है।

कुछ महत्त्वपूर्ण गैसें

1.

वैल्डिंग में काम आने वाली गैस 02 एसिटीलीन

ट्रेटा एथिल लेड (TEL) एक अच्छा अपस्फटनरोधी माना जाता है। गैसीय ईंधन सबसे अच्छे माने गए हैं जिनका ऊष्मीय मान सर्वाधिक होता है।

2.

भोपाल गैस त्रासदी Methyl Iso Cyanate का रिसाव (MTC)

3.

बेहोशी उत्पन्न करने वाली गैस क्लोरोफॉर्म (CHCI3), ईथर, हास्य गैस

किसी 1 ग्राम ईंधन के दहन से उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा उसका 'ऊष्मीय मान' कहलाता है।

4.

कोल गैस (Coal Gas) (CO+H2+CH4)

5.

जल गैस (Water Gas) / भाप अंगार गैस (CO+H2)

CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस)

6.

उत्पादक गैस/निर्माता गैस (Producer Gas) (CO+N2)

CNG का मुख्य घटक मीथेन गैस (CH4) है।

7.

गोबर गैस (Bio Gas) CH4+ CO2

CNG का प्रयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है।

8.

• CNG अपेक्षाकृत कम प्रदूषणकारी ईंधन माना गया है।

LPG (द्रवित पेट्रोलियम गैस)

• LPG के मुख्य घटक ब्यूटेन एवं प्रोपेन हैं।

ये गैसें गंधहीन तथा अत्यधिक ज्वलनशील होती हैं।

LPG सिलेण्डरों में रिसाव का पता लगाने हेतु एथिल मर्केप्टेन (2-H5 - SH) या थायो एथेनॉल मिलाते हैं एथिल मर्केप्टेन एवं प्रबल दुर्गन्धनीय पदार्थ है।

मीथेन गैस (CH4)

प्राकृतिक गैस, धान के खेतों से निकलने वाली गैस, सेप्टिक टैंक से निकलने वाली गैस, जुगाली करने वाले जन्तुओं से निकलने वाली गैस, कोयले के खानों (Coal mines) से निकलने वाली गैस, मृत जैवभार (Land fill Biomas) के अपघटन से निकलने वाली गैस, दलदली क्षेत्रों से निकलने वाली गैस ।

332

उत्कर्ष प्रकाशन

बहुलक, साबुन एवं अपमार्जक

बहुलक [Polymer]

सहसंयोजी बंध (Covalent Bond) के द्वारा जब सरल एकलक इकाइयाँ या अणु आपस में पुनरावृत्ति करते हुए जुड़ते हैं तो ऐसी संरचनाएँ बहुलक कहलाती हैं।

एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर बहुलकों का निर्माण करती हैं, यह क्रिया बहुलकीकरण (Polymerization) कहलाती है।

बहुलक का वर्गीकरण

स्रोत के आधार पर

आण्विक बल के आधार पर

• प्राकृतिक बहुलक -अर्द्ध संश्लेषित बहुलक -संश्लेषित बहुलक

- इलास्ट्रोमर

-

- रेशे

धर्मोप्लास्टिक

- थर्मोसेटिंग प्लास्टिक

संरचना के आधार पर

रैखिक बहुलक

- शाखित बहुलक

- क्रॉस लिंक्ड पॉलिमर

रेशों अथवा बहुलकों का वर्गीकरण:- 1. उत्पत्ति / स्रोत के आधार पर :-

बहुलीकरण के आधार पर

-योगात्मक बहुलक - संघनन बहुलक

A. प्राकृतिक रेशे / बहुलक [Natural Polymers] - यह प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले बहुलक होते हैं, जैसे- सेल्यूलॉज, प्रोटीन, एंज़ाइम्स, हीमोग्लोबिन, स्टार्च, सिल्क, ऊन, प्राकृतिक रबड़ आदि ।

B. अर्द्धसंश्लेषित रेशे (Semi- Synthetic Fibres ] - यह प्राकृतिक रेशों के साथ विभिन्न रसायनों के प्रयोग से निर्मित बहुलक होता है; जैसे- नाइट्रोसेल्यूलॉज, सेल्यूलॉज एसीटेट, रेयॉन आदि।

C. संश्लेषित रेशे / बहुलक (Synthetic Fibres ] - यह मानव निर्मित रेशे / बहुलक होते हैं; जैसे- PVC, 'नायलॉन 66, टेफ्लॉन, पॉलिएथायलिन, टेरीलीन, संश्लेषित रबड़, पॉलीस्टीरीन आदि ।

II. संरचना के आधार पर :-

A. रेखीय बहुलक [Linear Polymers] इनमें एकलक इकाइयाँ सीधी रेखीय संरचना दर्शाती हैं तथा यह एक विमीय होते हैं। इनके गलनांक, तनन सामर्थ्य तथा घनत्व उच्च होते हैं।

नोट- सभी रेशे रेखीय बहुलक होते हैं, जैसे सेलुलोस, सिल्क, नायलॉन, टेरीलीन, पॉलीएस्टर आदि ।

B. शाखित बहुलक [Branched Polymers ]- यह द्विविमीय (Two Dimensional) बहुलक होते हैं जिनमें सीधी श्रृंखला से कुछ शाखाएँ भी जुड़ी होती है; जैसे- ग्लाइकोजन, ऐमिलोपेक्टिन इनके गलनांक, तनन सामर्थ्य, घनत्व कम होते हैं।

333

C. जटिल बहुलक [Cross Linked Polymers] - यह त्रिविमीय तथा जटिल संरचना वाले बहुलक होते हैं; जैसे- बेकेलाइट, मेलामाईन, फॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन आदि इसे ताप दृढ़ बहुलक भी कहते हैं।

III. आण्विक बल के आधार पर :-

बहुलकों का निर्माण उनके विशिष्ट भौतिक एवं रासायनिक गुणों के लिए किया जाता है।

इन बहुलकों की एकलक (Monomers) इकाइयाँ आपस में सहसंयोजी बंध (Covalent Bonds) द्वारा जुड़ी रहती हैं। इन रासायनिक बंधों के अलावा बहुलकों के अणुओं के बीच बंध भी इनके भौतिक गुणों में वृद्धि करते हैं।

कुछ

भौतिक

हाइड्रोजन बंध, वॉण्डर-वॉल बंध तथा द्विध्रुव- द्विध्रुव अन्तः क्रिया (Dipole Dipole Interaction) के कारण इनके भौतिक गुणों में परिवर्तन देखा जाता है।

आण्विक बल के आधार पर बहुलक के प्रकार :-

A. इलास्टोमर्स [Elastomers ]

इन बहुलकों में दुर्बल आण्विक बलों के प्रभाव में एकलक इकाइयाँ इस प्रकार जुड़ी रहती हैं कि इन्हें इलास्टिक की तरह खींचा जा सकता है तथा क्रॉस-लिंकिंग के कारण यह पुन: अपने प्रारम्भिक आकार में आ जाते हैं; जैसे प्राकृतिक रबड़, ब्यूना-S ब्यूना - N, वल्कनीकृत रबड़ ।

B. रेशेदार बहुलक [Fibrous Polymer]

+

इनमें प्रबल अंतरआण्विक बल, जैसे H-बंध, द्विध्रुव- द्विध्रुव अन्तःक्रिया के कारण यह बहुलक उच्च गलनांक, उच्च तनन सामर्थ्य दर्शाते हैं; जैसे- 'नायलॉन 6, पॉलीएस्टर (टेरीलीन / डेक्क्रॉन), पॉलीएक्रिलोनाईट्राइल आदि ।

यह रेखीय बहुलक (Linear Polymer) के रूप में रेशेदार (Fibrous) संरचना दर्शाते हैं।

C. धर्मोप्लास्टिक [Thermoplastics]

+

+

यह ताप सुनम्य बहुलक है क्योंकि एक बार किसी आकार में ढालने के बाद इन्हें गर्म करके पिघलाया जा सकता है तथा किसी नए आकार में ढाल सकते हैं।

-

इनमें रेशों से दुर्बल तथा इलास्टोमर्स से प्रबल अंतरआण्विक बल पाए जाते हैं; जैसे PVC (पॉलिविनायल क्लोराइड), पॉलिएथायलीन, टेफ्लॉन, पॉलीथीन, नायलॉन 6 तथा नायलॉन- 66 आदि।

D. धर्मोसेटिंग प्लास्टिक [Thermosetting Plastic )

इन त्रिविमीय बहुलकों को ताप दृढ़ बहुलक भी कहते हैं, क्योंकि एक बार किसी निश्चित आकृति में ढाल देने के बाद इन्हें गर्म करके पिघलाया नहीं जा सकता; जैसे बैकेलाइट, टेरीलीन, यूरिया- फॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन, मेलामाइन फार्मेल्डिहाइड, रेज़िन आदि।

नोट :- प्लास्टिकारक [Plastcizers ]

+

थर्मोप्लास्टिक बहुलकों को नरम बनाने, उनके प्लास्टिक गुणों में वृद्धि करने हेतु उनमें प्लास्टिकारक पदार्थ मिलाए जाते हैं; जैसे-n- ब्यूटिल पैलेट, ऑक्टिल थैलेट, एल्केन सल्फोनिल क्लोराइड, क़पूर (Comphor), ग्लिसरॉल आदि ।

IV. बहुलीकरण के आधार पर

उत्कर्ष प्रकाश

A. योगात्मक बहुलीकरण इस प्रक्रम में सरल अणु एक-दूसरे के

B.

साथ मिलकर बहुलक बनाते हैं; उदाहरण-

एकलक

बहुलक

13 ब्यूटाडाइन

पॉलीब्यूटाडाईन

2-मेथिल- 1,3- ब्यूटाडाईन

या आइसोप्रीन

पॉली आइसोप्रीन

2- क्लोरो 13 ब्यूटाडाईन

पॉलीक्लोरोप्रीन (नियोप्रीन)

या क्लोरोप्रीन

संघनन बहुलीकरण-

जब सरल एकलक इकाइयों के संयोजन के फलस्वरूप छोटे अणुः जैसे H2O, NH3 आदि निकलते हैं तो प्रक्रम को संघनन बहुलीकरण कहते हैं।

संघनन बहुलीकरण को स्टेप ग्रोथ बहुलीकरण के रूप में जाना जाता है।

संघनन बहुलीकरण के लिए एकलक इकाई में कम से कम दो क्रियात्मक समूह हो सकते हैं (क्रियात्मक समूह समान या भिन्न) जैसे-

0

0

संघनन अभिक्रियां

nHO-R-OH+nHO-C-R'-C-OH

o

-O-R-O-C-R-C-

रबड़ [Rubber]

+(n-1)H2O

• रबड़ इलास्टोमर श्रेणी का बहुलक है, जो बाह्य दबाव के प्रभाव में विकृति दर्शाता है तथा अपने इलास्टिक गुण के कारण पुन: प्रारंभिक अवस्था प्राप्त कर लेता है।

वल्कनीकरण [Vulcanisation]

+

इसके बारे में 'चार्ल्स गुडईयर' ने बताया।

प्राकृतिक रबर को सल्फर से उपचारित करने पर इसके तनन सामर्थ्य, भौतिक गुणों में वृद्धि होती है, ऐसा कठोर एवं ज्यादा क्षमता वाला रबर वल्कनीकृत रबड़ कहलाता है।

वल्कनीकृत रबड़ का प्रयोग टायर बनाने, रबड़ बैण्ड, कन्वेयर बेल्ट आदि में किया जाता है जबकि प्राकृतिक रबड़ का उपयोग जूते के सोल बनाने, जलरोधी कपड़े बनाने एवं गोल्फ बॉल के निर्माण में भी करते हैं। 2. संश्लेषित रबड़ [Synthetic Rubber]

A. Buna रबर :-

+

+

यह ब्यूटा-1, 3-डाईइन का समबहुलक (Homopolymers) होता है।

यह ज़िगलर-नाटा अभिकर्मक की उपस्थिति में Buna रबर का निर्माण करता है।

यह प्राकृतिक रबड़ के समान गुण दर्शाता है।

B. नीयोप्रीन:-

+

+

इसे 'डाईप्रीन' भी कहते हैं। इसका निर्माण क्लोरोप्रीन में बहुलकीकरण (Polymerisation) से होता है।

CI

12- C - CH-CH2-

'n

यह प्रथम संश्लेषित रबर था जिसका उत्पादन बड़े स्तर पर किया गया।

यह ऑक्सीकरण व कार्बनिक पदार्थों की क्रियाओं से प्रतिरोधकता दर्शाने के कारण ऑटोमोबाइल पार्ट्स, रेफ्रीजरेटर पार्ट्स तथा कार्बनिक पदार्थों, ईंधन आदि के भण्डारण में प्रयुक्त होते हैं।

C. थायोकॉल :-

+

+

रबड़ हमें प्राकृतिक रूप से रबड़ वृक्ष से प्राप्त होते हैं जो कि अत्यधिक नरम व इलास्टिक होता है।

कृत्रिम / संश्लेषित रबर को बहुलकीकरण द्वारा बनाते हैं; जैसे-

SBR / ब्यूना- रबड़, ब्यूना- रबड़, थायोकॉल आदि ।

D.

+

रबड़ निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :-

A. प्राकृतिक रबड़ :-

+

रबर के वृक्ष से गाढ़े, चिपचिपे लगभग अर्द्ध ठोस के रूप में प्राकृतिक रबड़ प्राप्त होता है जो कि लेटेक्स के समान मृदु / Soft एवं लचीला होता है। सूखने पर कठोर लेकिन लचीला बना रहता है।

प्राकृतिक रबड़ को सामान्य सूत्र (CsHs) के रूप में दर्शाते हैं। जब इसका भंजक आसवन / Destructive Distillation करते हैं तो हमें आइसोप्रीन / Isoprene प्राप्त होता है अर्थात् यह आइसोप्रीन ही रबड़ का एकलक / Monomer है।

CH3

CH3

n

C=C-CH-CH2

CH 2 - C- CH-CH2-

बहुलकीकरण

आइसोप्रीन (एकलक)

प्राकृतिक रबर (बहुलक)

E.

+

समबहुलक

यह इथाइलीन ग्लाइकॉल तथा H2C-OH

H2C-OH

सोडियम पॉलिसल्फाइड (Na-S-S-Na) का सहबहुलक (Copolymers) होता है। यह हॉज पाइप, गैस्केट निर्माण तथा ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

Buna-S रबर :-

यह स्टायरीन तथा ब्यूटा 1, 3-डाईइन का सहबहुलक है।

इसका प्रयोग टायर निर्माण एवं यांत्रिक कार्यों में प्रयुक्त दृढ़ रबर के रूप में किया जाता है।

Buna N रबर :-

यह 1, 3 ब्यूटाडाईइन एवं एक्रिलोनाईट्राइल का सहबहुलक है। यह अत्यधिक कठोर एवं कार्बनिक पदार्थों के प्रति अक्रियाशील होने के कारण इसका उपयोग पेट्रोल आदि पदार्थों के भंडारण हेतु ईंधन टैंक निर्माण में किया जाता है।

एक ही प्रकार के एकलक अणुओं से बना बहुलक समबहुलक कहलाता है।

समबहुलकों के उदाहरण :-

1. पॉलिएथाइलीन:-

+

यह एथाइलीन (H2C=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है। इसका उपयोग बैग्स, इंसुलेटर वायर, पॉलिथीन, खिलौने आदि के निर्माण में किया जाता हैं।

334

2. पॉलिविनायल क्लोराइड [PVC ]

उत्कर्ष प्रकाश

+

यह विनायल क्लोराइड (H2C- CH-CI) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग बैग्स, पर्स, कृत्रिम लेदर, हॉज पाइप, तारों की कोटिंग तथा बरसाती कोट बनाने में किया जाता हैं।

3. पॉलिस्टायरीन [Polystyrine ]

+

यह स्टायरीन (C&Hs-CH=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग दृढ़ प्लास्टिक कैबिनेट, पाइप, खिलौने तथा कंघे आदि के निर्माण में किया जाता है।

4. पॉलिएक्रिलो नाइट्राईल (PAN / Orlon]

यह एक्रिलो नाइट्राईल (H2C = CH-CN) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग ऑरलोन रेशे से कृत्रिम ऊन के रूप में कंबल बनाने व कपड़ों के निर्माण में किया जाता हैं।

5. टेफ्लॉन [ पॉलिटेट्रा फ़्लोरो इथायलीन]

यह टेट्रा फ़्लोरो इधायलीन (CF2=CF2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग गैस्केट इंसुलेटर्स तथा नॉन-स्टिक बर्तनों के अंदर की जाने वाली कोटिंग के रूप में किया जाता है।

6. ब्यूना रबर [ Buna Rubber]

+

यह 1, 3-ब्यूटा डाईइन (H2C = CH-CHCH2 ) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग टायर, हॉज पाइप आदि के निर्माण में किया जाता हैं। 7. पॉलिविनायल एसीसेट:-

यह विनायल एसीटेट (H2C=CHOOCCH3) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग लेटेक्स पेंट (Paint) के निर्माण में किया जाता है। बहुलक निर्माण के दौरान आपस में जुड़ने वाली एकलक इकाइयाँ अलग-अलग हों तो बनने वाले बहुलक 'सहबहुलक' (Copolymers) कहलाते हैं।

सहबहुलक के उदाहरण :-

बहुलक निर्माण के दौरान आपस में जुड़ने वाली एकलक इकाइयाँ एक समान हो तो ऐसे बहुलक बहुलक कहलाते हैं। 1. स्टायरीन ब्यूटाडाईईन रबड़ / संश्लेषित रबड़

यह स्टायरीन (CaHs-CH-CH2) तथा 1, 3- ब्यूटाडाईईन (CH2=CH-CH=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है। इसका उपयोग हल्के टायर बनाने, मशीनों में रोटेटिंग बेल्ट, हॉज पाइप आदि के निर्माण में किया जाता हैं।

2. डेक्रॉन /टेरीलीन :-

यह इथायलिन ग्लायकॉल (HO CH2-CH2- OH) तथा डाई मेथिल टरराम्पैलेट (CH3OOC (CH4) COOCH3) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

+ इसका उपयोग रेशों व मैग्नेटिक रिकॉर्डिंग स्ट्रिप के निर्माण में किया जाता है।

3.

ग्लिप्टल :-

यह एथिलीन ग्लाइकॉल (HO CH-CH2OH)

तथा थैलिक अम्ल (C6H4)

COOH

COOH

नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

4.

+

इसका उपयोग पेंट एवं वॉर्निश के निर्माण में किया जाता है। नायलॉन 66 :-

यह हैक्सा मेथिलीन डाई एमीन (H2N (CH2)6-NH2) तथा एडिपिक अम्ल (HOOC (CH2)4- COOH) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग टायर, फाइबर, रस्सियों, कपड़े आदि के निर्माण में किया जाता है।

5. बैकेलाइट:-

+

यह फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) तथा फीनॉल (C6H5OH) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग इंसुलेटर पदार्थ के रूप में, इलेक्ट्रिक स्विच निर्माण, कठोर प्लास्टिक के रूप में किया जाता है।

6. मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन (मेलामाइन) :-

+

+

यह फार्मेल्डिहाइड (HCHO ) तथा मेलामाइन नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।

इसका उपयोग मेलामाइन क्रॉकरी के रूप में बर्तन निर्माण में किया जाता है।

7. पॉलियूरिथेन :-

यह इथायलीन ग्लायकॉल (HO-CH2-CH2-OH) तथा इथायलीन डाई आइसोसायनेट (O=C=N-HC=CH- N=C=O) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है। इसका उपयोग रेशा निर्माण, इंसुलेटर, पेंट आदि बनाने में किया जाता हैं।

साबुन [Soap]

+

साबुन बनाने की प्रक्रिया 'साबुनीकरण' कहलाती है।

साबुन उच्च वसीय अम्लों के सोडियम एवं पोटेशियम लवण होते हैं। पॉमिटिक अम्ल, ऑलिक अम्ल आदि उच्च वसीय अम्लों के उदाहरण हैं। साबुन बनाने की प्रक्रिया के दौरान सहउत्पाद के रूप में 'ग्लिसरॉल' प्राप्त होता है। अभिक्रिया-

CH2OOC C17H35

CH2-OH

CHOOC C17H35+ 3NaOH→3C17H3COONa+CH-OH

CHOOC Citis

स्टिऐरिक अम्ल

(साबुन)

CH2-OH ग्लिसरॉल

जब उच्च वसीय अम्लों की क्रिया कास्टिक सोडा या कास्टिक पोटाश से कराई जाती है तो साबुन का निर्माण होता है।

उच्च वसीय अम्ल + कास्टिक सोडा / कास्टिक पोटाश साबुन ग्लिसरॉल साबुन का जलीय विलयन क्षारीय होता है।

साबुन के प्रकार-

A.

कठोर साबुन [Hard Soap]-

जब उच्च वसीय अम्लों की क्रिया कास्टिक सोडा ( सोडियम हाइड्रॉक्साइड) से कराई जाती है तो बनने वाला साबुन 'कठोर साबुन' कहलाता है।

कठोर साबुन का प्रयोग कपड़े धोने में किया जाता है।

उच्च वसीय अम्ल+कास्टिक सोडा (NaOH) = कठोर साबुन ग्लिसरॉल साबुन की सबसे बड़ी कमी यह है कि साबुन कठोर जल में झाग नहीं

देता है।

: 335

B. मृदु साबुन [Soft Soap]

उत्कर्ष प्रकाश

जब उच्च वसीय अम्लों की क्रिया 'कास्टिक पोटाश' (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) से कराई जाती है तो बनने वाला साबुन 'मृदु साबुन' कहलाता है।

उच्च वसीय अम्ल + कास्टिक पोटाश (KOH) = मृदु साबुन ग्लिसरॉल मृदु साबुन का प्रयोग नहाने के साबुन के रूप में किया जाता है। | साबुन एवं अपमार्जक

+

साबुन को पारदर्शी बनाने के लिए उसमें एल्कोहॉल / ग्लिसरीन मिलाया जाता है।

दाढ़ी बनाने वाले साबुन में ग्लिसरॉल तथा रोजिन नामक गोंद मिलाया जाता है।

ग्लिसरॉल जल्दी सूखने से बचाता है जबकि रोजिन झाग बनाने में सहायक होता है।

अच्छे साबुन की विशेषताएँ / गुण-

(i) साबुन में मुक्त क्षार नहीं होने चाहिए अन्यथा साबुन त्वचा को नुकसान पहुँचा सकता है।

(ii) साबुन में 10% से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।

(ii) साबुन में कीटाणुनाशक भी उपस्थित होने चाहिए।

(iv) प्रयोग के दौरान साबुन टूटना नहीं चाहिए।

(v) साबुन एल्कोहॉल में विलेय होना चाहिए। (vi) साबुन मुलायम एवं चिकना होना चाहिए। (vii) साबुन पर्याप्त मात्रा में झाग देना चाहिए।

नोट-तरल साबुन पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) से बनाया जाता है। अपमार्जक [Detergent]

+

अपमार्जक का आविष्कार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में हुआ। अपमार्जक को 'साबुन रहित साबुन' भी कहा जाता है।

साबुन की सबसे बड़ी कमी होती है कि साबुन कठोर जल के साथ झाग नहीं देते हैं। साबुन की इसी कमी को दूर करने के लिए अपमार्जक बनाए गए अर्थात् अपमार्जक कठोर जल में भी झाग देते हैं।

हाइड्रोकार्बन्स की सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ क्रिया से अपमार्जक बनाए जाते हैं।

अपमार्जक जैव अनिम्नीकृत होते हैं अर्थात् ये आसानी से अपघटित नहीं होते हैं और जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।

अपमार्जक में झाग देने हेतु फॉस्फेट एवं नाइट्रेट का प्रयोग किया जाता है।

राजस्थान में रिफाइनरी लगने से अपमार्जक उद्योग तेजी से विकसित होगा। साबुन एवं अपमार्जक में अंतर-

क्र.सं.

साबुन

(i)

साबुन जैव निम्नीकृत होते हैं

साबुन कम प्रदूषण करते हैं।

(ii)

(iii)

(iv)

(^)

साबुन कठोर जल में झाग नहीं देते हैं।

साबुन में नमी अपेक्षाकृत कम होती है।

साबुन का जलीय विलयन क्षारीय होने के कारण मुलायम रेशों के लिए हानिकारक होता है।

अपमार्जक

अपमार्जक जैव अनिम्नीकृत होते हैं।

अपमार्जक अधिक प्रदूषण करते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी झाग देते हैं।

अपमार्जक में नमी अपेक्षाकृत अधिक होती है। अपमार्जक का जलीय विलयन उदासीन होने के कारण मुलायम रेशों के लिए हानिकारक नहीं होता है।

336

(vi)

साबुन बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में वसा / तेल का प्रयोग किया जाता है।

अपमार्जक बनाने हेतु कच्चे माल के रूप में पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।

की

अपमार्जक हाइड्रोकार्बन्स सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ क्रिया से

साबुन, उच्च वसीय अम्लों की

कॉस्टिक सोडा/कॉस्टिक

(vii)

पोटाश के साथ क्रिया से बनाए जाते हैं।

बनाए जाते हैं।

साबुन एवं अपमार्जक की सहायता से कप���़ों की धुलाई-

पानी में साबुन एवं अपमार्जक मिलाने से पानी का पृष्ठ तनाव

कम हो जाता है।

पानी का पृष्ठ तनाव कम होने से कपड़े आसानी से साफ हो जाते हैं अर्थात् कपड़ों से मैल को आसानी

से

छुड़ाया जा सकता है।

साबुन / अपमार्जक

मिसेल

बनाकर कपड़ों को साफ करते हैं।

On

Ow

विरोधी

हाइड्रोकार्बन पूंज

वरिल सं

साबुन / अपमार्जक मैल के चारों ओर मिसेल संरचना बनाते हैं। मिसेल के मुख्यतः दो सिरे होते हैं-

+

(i) शीर्ष

(ii) पूँछ

मिसेल का शीर्ष भाग ऋणावेशित होता है तथा जल स्नेही होता है। मिसेल की पूँछ धनात्मक सिरा होता है तथा जलरोधी सिरा होता है। साबुन / अपमार्जक से कपड़े धोते समय मिसेल का जलरोधी सिरा मैल की तरफ रहता है जबकि जल स्नेही सिरा बाहर की ओर अर्थात् जल की तरफ रहता है।

इस प्रकार मैल के चारों ओर मिसेल का निर्माण हो जाता है।

मैल जल में अघुलनशील जबकि हाइड्रोकार्बन में घुलनशील होता है। मिसेल का हाइड्रोकार्बन वाला भाग अर्थात् पूँछ मेल की तरफ रहने से मैल हाइड्रोकार्बन में आसानी से घुल जाता है तथा यह मैल मिसेल के जलस्नेही भाग से पानी में चला जाता है तथा कपड़े साफ हो जाते हैं। Important Question's

1. साबुन बनाने की प्रक्रिया साबुनीकरण

2. साबुन रहित साबुन कहा जाता है डिटर्जेन्ट

3. साबुन बनाने के दौरान बना सहउत्पाद होता है- ग्लिसरॉल 4. साबुन का जलीय विलयन होता है- क्षारीय प्रकृति

5. डिटर्जेन्ट का जलीय विलयन होता है- उदासीन 6. साबुन होते हैं जैव-निम्नीकृत

7. अपमार्जक होते हैं जैव-अनिम्नीकृत

8. अपमार्जक में झाग हेतु मिलाए जाते हैं- फॉस्फेट, नाइट्रेट

9. शेविंग के साबुन में झाग हेतु क्या मिलाया जाता है- रोजिन

10. पानी में साबुन / अपमार्जक मिलाने से पानी का पृष्ठ तनाव ( Surface Tension) हो जाता है- कम

000

दैनिक जीवन में रसायन

रसायनों का उपयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किया जाता है, यहाँ तक की सारी जैविक क्रियाओं का संचालन भी रसायनों द्वारा होता है। साबुन, अपमार्जक, सुन्दर सुन्दर वस्त्र, घरेलू उपभोग के अनेकों सामान रासायनिक पदार्थ ही हैं।

उत्कर्ष प्रकाशन

भवन निर्माण में सीमेन्ट, विद्युत उपकरण, उपग्रह, मोटर वाहन से लेकर कृषि के क्षेत्र तक रसायनों का प्रयोग होता है।

NaHCO3 को खाद्य पदार्थों में मिलाकर गर्म करने पर यह बुलबुलों के रूप में बाहर निकल जाता है।

Na2CO3 (सोडियम कार्बोनेट) के विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करके NaHCO3 बनाया जाता है।

औषधियों, खट्टे-मीठे पदार्थ, खाद्य पदार्थों के परिरक्षक में रसायनों का उपयोग होता हैं।

NaCl का उपयोग करके बेकिंग सोडा बनाया जाता है।

+

दैनिक जीवन में उपयोगी यौगिक-

1. सोडियम क्लोराइड (NaCl)

इसे साधारण नमक भी कहते हैं। यह प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार का लवण होता है तथा इसके pH का मान 7 होता है।

NaCl को व्यापारिक तौर पर समुद्र के जल या खानों को सूखा कर प्राप्त किया जाता है।

NaCl श्वेत ठोस पदार्थ है जो जल में अत्यधिक विलेय है।

NaCl का गलनांक उच्च (1081K) होता है अतः यह जल में आयनित हो जाता है।

उपयोग-

i. इसका उपयोग साधारण नमक के रूप में भोजन में किया जाता है। खाद्य परिरक्षण में

ii.

iii. हिम मिश्रण बनाया जाता है।

iv. NaOH, Na2CO3, NaHCO3 विरंजक चूर्ण बनाने में। 2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH):-

+

इसे कास्टिक सोडा भी कहते हैं।

औद्योगिक स्तर पर NaOH का उत्पादन NaCl के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।

+

Na2CO3 + CO2 + H2O2NaHCO3

बेकिंग सोडा श्वेत क्रिस्टलीय ठोस है तथा यह जल में अल्प विलेय है।

जल में इसका विलयन क्षारीय होता है, इसे गर्म करने पर CO2 गैस निकलती है।

2NaHCO3 → Na2CO3+H2O+CO2

उपयोग

i.

खाद्य पदार्थों में बेकिंग पाउडर के रूप में।

ii.

सोडा वॉटर तथा सोडायुक्त शीतल पेय बनाने में

iii.

पेट की अम्लता को दूर करने में।

iv.

मंद पूर्तिरोधी के रूप में।

V.

अग्निशामक यंत्रों में।

vi.

प्रयोगशाला अभिकर्मक में

5.

धावन सोडा (Na2CO3.10H2O):-

इसे कपड़े धोने का सोडा भी कहते हैं, इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट है।

यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस है तथा जल में विलय है इसका जलीय ���िलयन क्षारीय होता है।

इसे गर्म करने पर क्रिस्टलन जल त्यागकर सोडा ऐश बनाता है।

Na2CO3 + 10H2O Na2CO3 10H2O

+

_2NaCl(aq) + 2H2O2NaOH (aq) Cla (g) + H2(g) NaOH श्वेत चिकना पदार्थ है तथा इनका गलनांक 591k है। NaOH भी जल में विलय हो जाता है इसके क्रिस्टल प्रसंबंध है।

उपयोग

NaOH एक प्रबल क्षार है। अतः यह एक प्रबल विद्युत अपघटय भी है।

i.

धुलाई व सफाई में

NaOH का उपयोग-

ii.

कास्टिक सोडा, बेकिंग पाउडर, काँच, साबुन, बोरेक्स के निर्माण में ।

i. इसका उपयोग साबुन, कागज तथा सिल्क उद्योग में किया जाता है।

iii.

कागज व पेन्ट तथा वस्त्र उद्योग में

ii. बॉक्साइट के धातुकर्म में।

iv.

प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में।

iii. पेट्रोलियम के शोधन में।

6.

प्लास्टर ऑफ पेरिस-

iv.

वसा व तेलों के निर्माण में।

V.

प्रयोगशाला अभिकर्मक में।

3. विरंजक चूर्ण CaOCI2 (कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड)

CaOCl2 को शुष्क बुझे हुए चूने पर Cl1⁄2 गैस प्रवाहित करके प्राप्त किया

जाता है।

Ca(OH)2 + Cl2

CaOC2+H2O

विरंजक चूर्ण पीला तीक्ष्ण गंध वाला ठोस पदार्थ है जो कि ठंडे जल में

विलेय है।

उपयोग

i.

वस्त्र उद्योग में विरंजक के रूप में

ii.

कागज उद्योग में विरंजक के रूप में

iii. पेयजल को शुद्ध करने में

(CaSO4.2H2O)

इसका रासायनिक नाम कैल्सियम सल्फेट का अर्द्ध हाइड्रेट है। सर्वप्रथम प्लास्टर ऑफ पेरिस को फ्रांस की राजधानी पेरिस में जिप्सम को गर्म करके बनाया था।

2CaSO4.2H2O2CaSO4. H2O + H 2

3 но

2

यह श्वेत ठोस चिकना पदार्थ है।

इसमें जल मिलाने पर यह 15-20 मिनट में जमकर ठोस और कठोर हो जाता है।

उपयोग

i.

भवन निर्माण में।

iv. रोगाणुनाशक एवं ऑक्सीकारक के रूप में

ii.

दंतचिकित्सा में।

4.

बेकिंग सोडा (NaHCO3)

iii.

मूर्तियाँ आदि सजावटी सामानों को बनाने में।

+

इसे खाने का सोडा एवं मीठा सोडा भी कहते हैं तथा इसका रासायनिक

iv.

अग्निसह पदार्थ के रूप में।

नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट होता है।

: 337

पर्यावरण रसायन

उत्कर्ष प्रकाश

पर्यावरण जीवों की क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करने वाली समस्त भौतिक अथवा अजैविक तथा जैविक परिस्थितियों का योग है। वायु, जल, मृदा, जीव-जंतु आदि सभी सम्मिलित रूप से पर्यावरण की रचना करते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण:-

·

.

पर्यावरण प्रदूषण हमारे परिवेश में अवाँछनीय परिवर्तन जो पौधों, जंतुओं तथा मनुष्यों पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं, का परिणाम है। वह पदार्थ, जो प्रदूषण उत्पन्न करता है, प्रदूषक कहलाता है। प्रदूषक ठोस, द्रव अथवा गैसीय पदार्थ हो सकता है, जो प्राकृतिक घटनाओं के कारण उत्पन्न होता है।

प्रदूषक को निम्नीकृत किया जा सकता है।

इसके विपरीत कुछ प्रदूषक जो धीरे-धीरे निम्नीकृत होते हैं, कई दशकों तक पर्यावरण में अपरिवर्तित रूप में बने रहते हैं।

उदाहरण-डाइक्लोरोडाइफिनाइल ट्राइक्लोरो एथेन (DDT), प्लास्टिक निर्मित अनेक पदार्थ, भारी धातुएँ, अनेक रसायन तथा नाभिकीय अपशिष्ट आदि यदि एक बार पर्यावरण में निर्गमित हो जाते हैं, तो इन्हें पृथक् करना कठिन होता है। ये प्रदूषक प्राकृतिक विधियों द्वारा निम्नीकृत नहीं होते हैं तथा जीवित प्राणियों के लिए हानिकारक होते हैं। पृथ्वी पर ताप वृद्धि एवं हरितगृह प्रभाव :-

सौर ऊर्जा का 75% भाग पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे इसके ताप में वृद्धि होती है। ऊष्मा का कुछ भाग वायुमंडल में उपस्थित गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, क्लोरोफ्लोरो कार्बन, यौगिकों तथा जलवाष्प) द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है, जिससे वायुमंडल के ताप में वृद्धि होती है। यही भूमंडलीय ताप वृद्धि का कारण है।

कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त अन्य हरितगृह गैसें मीथेन जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड क्लोरोफ्लोरोकार्बन तथा ओजोन हैं। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जब वनस्पतियों को जलाया, पचाया अथवा सड़ाया जाता है, तब मीथेन उत्पन्न होती है कोयले की खानों, दलदली क्षेत्रों तथा जीवाश्म ईंधनों द्वारा अधिक मात्रा में मीथेन उत्पन्न होती है।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन मनुष्य द्वारा निर्मित रसायन है, जो वायुप्रशीतक आदि में काम आता है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन भी ओजोन परत को हानि पहुँचा रहे हैं। नाइट्रस ऑक्साइड वातावरण में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है, परंतु पिछले कुछ वर्षों में जीवाश्म ईंधन एवं उर्वरकों के अधिक प्रयोग से इसकी मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यदि इसी प्रकार तापवृद्धि का क्रम बना रहा तो ध्रुवों पर स्थित हिमनदों के पिघलने की दर अधिक होगी, जिससे समुद्र के जल स्तर में वृद्धि के फलस्वरूप पृथ्वी के निचले स्थानों में जल भर जाएगा। भूमंडलीय तापवृद्धि के कारण बहुत से संक्रामक रोगों, जैसे- मलेरिया, पीत ज्वर, निद्रा रोग, डेंगू आदि में वृद्धि होती है।

अम्ल वर्षा

जब वर्षा का pH 5.6 से कम हो जाता है, तो इसे अम्लवर्षा (Acid rain) कहते हैं। 'अम्लवर्षा' में वायुमंडल से पृथ्वी सतह पर अम्ल निक्षेपित हो जाता है। अम्लीय प्रकृति के नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड वायुमंडल में ठोस कर्णों के साथ हवा में बहकर या तो ठोस रूप में अथवा जल में द्रव रूप में कुहासे से या हिम की भाँति निक्षेपित होते हैं।

जीवाश्म ईंधन; जैसे कोयला, शक्ति संयंत्रों, भट्टियों तथा मोटर इंजनों में डीजल और पेट्रोल, जिसमें सल्फर तथा नाइट्रोजन पदार्थ होते हैं, इनके दहन पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO) उत्पन्न होती हैं। SO तथा NO, ऑक्सीकरण के पश्चात् जल के साथ अभिक्रिया करके अम्लवर्षा में प्रमुख योगदान देते हैं क्योंकि प्रदूषित वायु में सामान्यतः कणिकीय द्रव्य उपस्थित होते हैं, जो ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित ( Inspired) करते हैं।

इसमें अमोनियम लवणों का भी निर्माण होता है, जो वायुमंडलीय

(पेरोसॉल के सूक्ष्म कण) के रूप में दृश्यमान होते हैं। वर्षा की बूँदों में के ऑक्साइड तथा अमोनियम लवणों के ऐरोसॉल कम के फलस्वरूप नम विशेषण (Wet deposition) होता है।

ठोस तथा द्रव भूमि-सी द्वारा SO, सीधे अवशोषित (Absorbed) हो जाते हैं। इस प्रकार शुष्क निक्षेपण (Dry deposition) होता है। ओजोन परत विघटन (क्षरण) :-

·

पृथ्वी से 60 किमी. ऊपर समताप मंडल में ओजोन (O3) का कवच स्थित है, जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों (UV rays) को अवशोषित कर मनुष्य को अनेक रोगों से बचाता है। फ्रेऑन (Freon) सबसे अधिक घातक क्लोरोफ्लोरो कार्बन है, जिसका प्रयोग रेफ्रिजरेटर, एअर कंडीशनर, गद्देदार सीट या सोफों में काम आने वाली फॉम तथा ऐरोमॉल स्प्रे में होता है। ये CFC, UV किरणों से विघटित होकर क्लोरीन आयन बनाते हैं, जो O3 से क्रिया करके ओजोन को नष्ट करता है। धूम्र कोहरा :-

1.

2.

धूम्र कोहरा (Smog) शब्द 'धूम्र' एवं कोहरे से मिलकर बना है। धूम्र कोहरे दो प्रकार के होते हैं

सामान्य धूम्र कोहरा (Classical smog): धूम्र, कोहरे एवं सल्फर डाइऑक्साइड का मिश्रण है रासायनिक रूप से यह एक अपचायक मिश्रण है। अतः इसे अपचायक धूम्र कोहरा (Reduce smog) भी कहते हैं।

प्रकाश रासायनिक धूम्र (Photochemical smog): कोहरा जो उष्ण, शुष्क एवं साफ धूपमयी जलवायु में होता है। स्वचालित वाहनों तथा कारखानों से निकलने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइडों तथा हाइड्रोकार्बनों पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरे की रासायनिक प्रकृति ऑक्सीकारक है।

चूंकि इसमें ऑक्सीकारक अभिकर्मकों की सांद्रता उच्च रहती है, अतः इसे ऑक्सीकारक धूम्र कोहरा (Oxidising amog) कहते हैं। प्रकाश रासायनिक धूम्र के सामान्य घटक ओजोन, नाइट्रिक ऑक्साइड, ऐकोलीन, फॉर्मेल्डिहाइड एवं परॉक्सीएसीटिल नाइट्रेट (PAN) हैं। प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरे के कारण भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।

ओजोन एवं नाइट्रिक ऑक्साइड नाक एवं गले में जलन पैदा करते हैं। इनकी उच्च सांद्रता से सरदर्द, छाती में दर्द, गले का शुष्क होना, खाँसी एवं श्वास अवरोध हो सकता हैं।

338

उत्कर्ष प्रकाशन

प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरा रबड़ में दरार उत्पन्न करता है एवं पौधों पर हानिकारक प्रभाव डालता है। यह धातुओं, भवन निर्माण के प्रदाय एवं रंगी हुई सतहों (Painted surface) का क्षय भी करता है। रासायनिक धूम्र कोहरे के प्राथमिक पूर्वगामी (Primary precedent), जैसे- NO एवं हाइड्रोकार्बन को नियंत्रित कर लें, तो द्वितीय पूर्वगामी (Secondary precedent) जैसे ओजोन एवं PAN रासायनिक धूम्र कोहरा स्वतः ही कम हो जाएगा।

सामान्यतया स्वचालित वाहनों में उत्प्रेरित परिवर्तक ( Inspired converter) उपयोग में लाए जाते हैं, जो वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं हाइड्रॉकार्बन के उत्सर्जन को रोकते हैं। कुछ पौधे (जैसे- पाईनस, जूनीपेरस, क्वेरकस, पायरस तथा विटिस), जो नाइट्रोजन ऑक्साइड का उपापचय (Metabolism) कर सकते हैं।

भोपाल गैस त्रासदी 3 दिसंबर, 1984 की मध्य रात्रि में भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड लि. के कारखाने से दुर्घटनावश निकली मिथाइल आयसो सायनेट 2 (Methyl isocyanate) जिसका उपयोग कीटनाशक उत्पाद बनाने में किया जाता था। इसके रिसाव से लगभग 3200 व्यक्तियों की जान गई।

जल प्रदूषण :-

· जल का प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों से प्रारंभ होता है। विभिन्न प्रक्रमों के माध्यम से प्रदूषण सतह या भीम जल तक आता है। स्रोत के आधार पर जलीय प्रदूषकों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है- बिंदु स्रोत (Point source) किसी एक स्रोत से निकलने वाले प्रदूषकों को बिंदु स्रोत कहते हैं।

बिंदुहीन स्रोत (Non-point source) ये प्रदूषक जल में बड़े स्रोतों से मिलते हैं।

जल के एक नमूने के निश्चित आयतन में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ को विखंडित करने के लिए जीवाणु द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन को 'जैवरासायनिक ऑक्सीजन माँग' (Biochemical Oxygen Demand BOD) कहा जाता है।

अतः जल में BOD की मात्रा कार्बनिक पदार्थ को जैवीय रूप में विखंडित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा होगी स्वच्छ जल की BOD का मान 5 ppm से कम होता है, जबकि अत्यधिक प्रदूषित जल में यह 17 ppm या इससे अधिक होता है।

रासायनिक प्रदूषक, जल एक अच्छा विलायक है। जल में विलेय अकार्बनिक रसायन, जिनमें भारी धातु जैसे- कैडमियम, मर्करी, निकेल आदि शामिल हैं, महत्त्वपूर्ण प्रदूषकों में आते हैं। ये सभी धातुएँ हमारे लिए हानिकारक हैं, क्योंकि हमारा शरीर इन्हें विसर्जित नहीं कर सकता है।

समय के साथ इनकी मात्रा स्वीकार्य सीमा से ऊपर चली जाती है। तब ये प्रदूषक धातुओं, वृक्कों, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, लीवर आदि को नुकसान पहुँचाते हैं।

खदानों के सीवेज से प्राप्त अम्ल जैसे- सल्फ्यूरिक अम्ल एवं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त लवण, जिनमें ठंडे मौसम में हिम एवं बर्फ को पिघलाने वाले लवण सोडियम एवं कैल्सियम क्लोराइड शामिल हैं, जल में विलेय प्रदूषक हैं।

प्रदूषित जल में पाए जाने वाले अन्य समूह कार्बनिक रसायन हैं। पेट्रोलियम उत्पाद; जैसे समुद्रों में बड़े तेल बहाव जल के कई स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। दूसरे गंभीर प्रभाव वाले कार्बनिक यौगिकों में कीटनाशक हैं, जो स्प्रे द्वारा बहकर भूमि के नीचे आते हैं।

विभिन्न प्रकार के औद्योगिक रसायन; जैसे-पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनायल जो विलायक के रूप में प्रयुक्त होते हैं, अपमार्जक एवं उर्वरक भी जल प्रदूषकों की श्रेणी में सम्मिलित हैं। PCBS संभावित कैंसरजन्य हैं।

जल में फॉस्फेट का योग शैवाल की बढ़ोतरी में सहयोग करता है। किसी जलाशय (झील) के जल की जैविक समृद्धता के कारण होने वाली झील का प्राकृतिक कालप्रभावन (Ageing) सुपोषण कहलाता है।

तेल जेर:-

यह TERI (The Energy and Resource Institute) द्वारा बनाई गई एक नई तकनीक है, जिसमें जीवाणु के उपयोग द्वारा बिखरे तेल को साफ किया जाता है। यह एक जीवोपचारण क्रिया है। यह मुंबई में प्रयोग की गई तकनीक है (अगस्त, 2010 में कार्गो व मर्चेंट जहाज की टक्कर से 400 टन तेल समुद्र में बिखरा था।

) महाराष्ट्र प्रदूषण बोर्ड ने TERI की सेवाओं द्वारा यह तेल साफ करवाया था पाँच विभिन्न जीवाणुओं को अचलनशील करके वाहक अणुओं के साथ मक्का के भुट्टे के पाउडर में मिलया गया, इसे तेल जैपर कहते हैं। यह तेल व तेलीय कीचड़ (Oil and Natural Gas Corporation, ONGC या भारत पेट्रोलियम द्वारा निकला हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ) में पाए जाने वाले हाइड्रॉकार्बन से क्रिया करके हानिहीन CO व परिवर्तित कर देता है।

हरित रसायन :-

हरित रसायन उत्पादन का वह प्रक्रम है, जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या खराबी लाए। एक प्रक्रम में उत्पन्न होने वाले सह उत्पादों को यदि तरीके से उपयोग नहीं किया जाए, तो वे पर्यावरण प्रदूषण सहायक होते हैं। ऐसे प्रक्रम न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से हानिकारक हैं, बल्कि महँगें भी हैं। हरित रसायन के अनुप्रयोग :-

दैनिक जीवन में हरित रसायन के उदाहरण निम्नलिखित हैं-

339:

पेपर का विरंजन (In filtration of paper) पूर्व में पेपर के विरंजन के लिए क्लोरीन गैस उपयोग में आती थी। आजकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन परॉक्साइड, जो विरंजन क्रिया की दर को बढ़ाता है, उपयोग में लाया जाता है।

कपड़ों की निर्जल धुलाई (In dry washing of clothes) इसमें टेट्राक्लोरोएथीन [Ci♭C=CCI2] का उपयोग प्रारंभ में निर्जल धुलाई के लिए विलायक के रूप में किया जाता था। यह यौगिक भू-जल को प्रदूषित कर देता है। यह एक संभावित कैंसरजन्य भी है।

धुलाई की प्रक्रिया में यौगिक का द्रव कार्बन डाइऑक्साइड एवं उपयुक्त अपमार्जक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। हैलोजनीकृत विलायक का द्रवित CO से प्रतिस्थापन भू-जल के लिए कम हानिकारक है। आजकल हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग लॉण्ड्री में कपड़ों के विरंजन के लिए लिया जाता है, जिससे परिणाम तो अच्छे निकलते ही हैं, जल का कम उपयोग भी होता है।

रसायनों का संश्लेषण (In synthesis of chemicals) औद्योगिक स्तर पर एथीन का ऑक्सीकरण आयनिक उत्प्रेरकों एवं जलीय माध्यम की उपस्थिति में करवाया जाए, तो लगभग 90% एथेनॉल प्राप्त होता है। संक्षेप में, हरित रसायन एक कम लागत उपागम है, जो कम पदार्थ, ऊर्जा उपभोग एवं अपशिष्ट जनन से संबंधित है।

गंदे जल को स्वच्छ करने के हरित उपाय (In cleaning polluted water) उद्योगों के अपशिष्ट जल को स्वच्छ करने के लिए इमली के बीजों का चूर्ण एक प्रभावी सामग्री पाई गई है। यह सस्ता होता है, विषैला नहीं होता और जैव निम्नीकृत हो सकता है। यह चूर्ण सामान्यतः कृषि अपशिष्ट की तरह फेंक दिया जाता है।

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

उत्कर्ष प्रकाशन

ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली पदार्थ की

1.

अवस्था है-

(a) ठोस

2.

3.

(c) द्रव

(b) गैस (d) प्लाज्मा

किसी गैस को परम शून्य ताप, अति उच्च दाब पर गर्म करने तथा उच्च वोल्टता प्रदान करने पर पदार्थ की कौन-सी अवस्था प्राप्त होती है?

(a) द्रव (b) गैस

(c) बोस-आइन्स्टीन-कन्डन्सेट (B.E.C.)

(d) प्लाज्मा

किसी ठोस पदार्थ के द्रव में परिवर्तित हुए बिना ही सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाने की प्रक्रिया निम्नलिखित में से

क्या कहलाती है?

(a) वाष्पीकरण

11.

12.

किसी भी कक्षक में इलेक्ट्रॉन का युग्मन नहीं होता, जब तक उपकोश के प्रत्येक कक्षक में समान चक्रण वाला एक एक

इलेक्ट्रॉन न आ जाए, यह कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने का कौन- सा नियम है?

(a) पाउली का अपवर्जन का नियम

(b) हुण्ड का अधिकतम बहुलकता का नियम

(c) आफबाऊ का सिद्धान्त

(d) बोर-बेरी का नियम

रदरफोर्ड द्वारा एल्फा कणों के रूप में कौन-से पदार्थ का उपयोग किया गया?

(a) ब्रोमीन का नाभिक

(c) हीलियम का नाभिक

(b) निऑन का नाभिक

(d) सोडियम धातु का नाभिक

केवल उन्हीं कक्षाओं में चक्कर

13. बोहर के अनुसार इलेक्ट्रॉन लगाता है, जिनका कोणीय संवेग- (a) 2 का पूर्ण गुणज हो

(b) ऊर्ध्वपातन

(c) विसरण

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

4.

निम्नलिखित में से कौन-सा एक क्रिस्टलीय ठोस है?

(a) कोयला

(b) काँच

(c) रबड़

(d) नमक

14.

5.

यदि मिश्रण के घटक पदार्थों का अधिशोषण अलग-अलग हो तो

उन्हें किस विधि के द्वारा मिश्रण से पृथक् किया जाता है?

(a) प्रभाजी आसवन

(b) आसवन

(c) वर्णलेखिकी

(d) निस्पंदन

15.

6.

ऐसीटोन एवं मेथिल एल्कोहॉल के मिश्रण को

पृथक्करण

की

किस विधि से पृथक् किया जाता है?

(b)

h

h

का पूर्ण गुणज हो

(c) का पूर्ण गुणज हो

(d) h का पूर्ण गुणज हो

ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डल जो प्रकाश की चाल से गति करते हैं, विराम द्रव्यमान शून्य होता है, कहलाते हैं-

(a) न्यूट्रिनो

(c) पाई मेसॉन

(b) फोटॉन

(d) पॉजीट्रॉन

आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर आने पर आयनन

विभव का मान क्रमश:-

(b) बढ़ता है।

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(a) क्रिस्टलीकरण / रवाकरण

निम्नलिखित में से विषमांगी मिश्रण का उदाहरण नहीं है

(b) भाप आसवन

(c) आसवन

(d) निस्पंदन

7.

(a) जल तथा मिट्टी का मिश्रण

(b) जल तथा एल्कोहॉल

(c) तेल तथा जल का मिश्रण

(d) रेत तथा लोहे के बुरादे का मिश्रण

8.

बताया ?

(a) बोहर

(c) उलहेनबैक

(b) सोमरफील्ड (d) गाउटश्मिट

9.

निम्नलिखित में से पॉजिट्रॉन है-

(a) ऋणावेशित कण

(b) धनावेशित कण

(c) उदासीन प्रकृति का कण

निम्नलिखित में से द्विगंशी क्वाण्टम संख्या के बारे में किसने

(a) घटता है।

(c) स्थिर रहता है।

16.

निम्नलिखित में से किस ब्लॉक में क्षारीय मृदा धातुएँ उपस्थित

होती हैं?

(a) f ब्लॉक

(c) d ब्लॉक

(b) p ब्लॉक

(d) s ब्लॉक

17. आधुनिक आवर्त सारणी किसके द्वारा प्रस्तुत की गई ?

(a) मोजले

(c) डॉबेराइनर

(b) मेंडलीफ

(d) न्यूलैण्ड्स

18. आधुनिक आवर्त सारणी में कुल कितने वर्ग थे?

(a) 18

(c) 8

19.

(b) 16

(d) 10

मेंडलीफ आवर्त नियम के अनुसार, आवर्त सारणी में तत्त्व किस क्रम में व्यवस्थित थे?

(a) परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में

(b) परमाणु क्रमांक के घटते क्रम में

(c) परमाणु भार के बढ़ते क्रम में

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

20.

10.

5 कक्षक के लिए कक्षक कोणीय संवेग का मान कितना होता है?

(d) परमाणु भार के घटते क्रम में

एक तत्त्व जो सभी कार्बनिक यौगिकों का आवश्यक अवयव है,

संबंधित है-

(a) शून्य

(b) एक

(c) दो

(d) तीन

(a) समूह 1 से

(b) समूह 14 से

(c) समूह 15 से

(d) समूह 16 से

340

उत्कर्ष प्रकाशन

निम्नलिखित में से कक्षकों की ऊर्जा का सही क्रम बताइए-

34.

21.

(a) 25=2P 1s3s3P3d=4s

(b) 3d=4s 3P 352P=2s15

(c) 1s2s=2P3s3P3d=4s

(d) 3s 3P3d=4s2s=2P1s

35.

22.

निम्नलिखित में से कोन से ब्लॉक के तत्त्व आंतरिक संक्रमण

तत्त्व कहलाते हैं?

(a)s ब्लॉक

(b) p ब्लॉक

(c) d ब्लॉक

(d) f ब्लॉक

23.

22

सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) का सामान्य नाम है-

(a) कास्टिक सोडा

(c) इण्डियन साल्ट पीटर

(b) कास्टिक पोटाश

(d) लूनर कास्टिक

24. पृथ्वी पर सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली धातु कौन सी है?

(a) लोहा

(c) ताँबा

(b) एल्युमिनियम

(d) टाइटेनियम

25. इलेक्ट्रिक हीटर तथा इलेक्ट्रिक आयरन का तार बनाने में निम्नलिखित में से किस मिश्रधातु का उपयोग किया जाता है?

(a) जर्मन सिल्वर

(c) नाइक्रोम

26.

(a) सोडियम

277

27.

(b) टाँका (d) टंगस्टन स्टील

क्लोरोफिल नामक वर्णक में कौन-सा धातु उपस्थित होता है?

(c) कैल्सियम

(b) एल्युमिनियम

(d) मैग्नीशियम

फोटोग्राफी में उपयोग किया गया प्रकाश संवेदी यौगिक है-

(a) सिल्वर क्लोराइड

(b) सिल्वर सल्फाइड

(d) सिल्वर ऑक्साइड

मानव द्वारा निर्मित प्रथम मिश्र धातु कौन सी है?

(c) सिल्वर ब्रोमाइड

28.

(a) गन मेटल

(c) क्रोम स्टील

29.

གླ

(b) कांस्य

(d) नाइक्रोम

निम्नलिखित धातु-युग्मों में से किस एक में क्रमशः सबसे हल्की

धातु तथा सबसे भारी धातु हैं?

(a) लिथियम एवं पारा

(b) लिथियम एवं ऑस्मियम

(c) एल्युमिनियम एवं ऑस्मियम

(d) एल्युमिनियम एवं पारा

आतिशबाजी में किस तत्त्व की उपस्थिति के कारण हरा रंग

30.

उत्पन्न होता है?

(a) बेरियम

(b) स्ट्रॉन्शियम

(c) सीसा

(d) जस्ता

31.

क्षार वह पदार्थ है जो-

(a) इलेक्ट्रॉन देता है।

(b) प्रोटॉन ग्रहण करता है।

(d) इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है।

(c) प्रोटॉन देता है।

32.

सभी अम्ल जल में घुलकर प्रदान करते हैं-

(a) OH- आयन

(b) H आयन

(c) इलेक्ट्रॉन

(d) न्यूट्रॉन

33.

(a) एसीटिक अम्ल

(b) एस्कॉर्बिक अम्ल

(c) सीट्रिक अम्ल

(d) टार्टरिक अम्ल

सिरका का मुख्य घटक क्या है?

36.

37.

लिटमस विलयन जब न तो अम्लीय होता है न क्षारीय, तब वह

किस रंग का होता है?

(a) बैंगनी

(c) लाल

(b) पीला

(d) नीला

निम्नलिखित में से कौन-सा एक, उच्चतम मात्रा में हाइड्रोजन

आयन (H) देता है?

(a) सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन

(b) दूधिया मैग्नीशिया (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)

(c) नीबू रस (लेमन जूस)

(d) आमाशय रस

यदि मधुमक्खी आपको डंक मार दे, तो निम्नलिखित में से कौन-

सी सर्वोत्तम औषधि होगी?

(a) एंटीबायोटिक

(b) अम्लीय सिरका

(c) देवदार की ताज़ी सूइयाँ

(d) बेकिंग सोडा

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) क्षार में साबुन जैसी चिकनाहट होती है।

(b) क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं।

(c) क्षार विद्युत के सुचालक होते हैं।

(d) उपर्युक्त सभी

38. ऐसे धातु ऑक्साइड जो जल में विलेय होते हैं, वे जल में घुलकर

निर्माण करते हैं-

(a) अम्ल

(b) क्षार

(c) a व b दोनों

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

39. विकृत गंधिता कौन सी प्रक्रिया का उदाहरण है?

40.

41.

(a) ऑक्सीकरण

(b) अपचयन (c) रेडॉक्स

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

यदि किसी अभिक्रिया का वेग उसके साथ होने वाली दूसरी अभिक्रिया के प्रेरण से तीव्र हो जाता है तो उसे किस उत्प्रेरक के नाम से जाना जाता है?

(a) धनात्मक उत्प्रेरक

(b) स्वतः उत्प्रेरक

(c) प्रेरित उत्प्रेरक

(d) ऋणात्मक उत्प्रेरक

निम्नलिखित में से उत्क्रमणीय परिवर्तन नहीं है-

(a) लोहे का चुम्बक बनना

(b) नौसादर का ऊर्ध्वपातन

(c) कोयले का जलना

(d) शक्कर का पानी में विलय

42. इलेक्ट्रॉन का त्याग करने वाले पदार्थ कहलाते हैं-

(a) ऑक्सीकारक

(b) उत्प्रेरक

(c) अपचायक

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

341

43.

44.

उत्कर्ष प्रकाशन

किसी तत्त्व से ऑक्सीजन का निकलना या ऋणविद्युती तत्त्व

का निकलना क्या कहलाता है?

(a) अपचयन

(b) ऑक्सीकरण

(c) a व b दोनों

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है-

(a) हवा में चाँदी के आभूषणों का काला होना

(b) फलों का पकना

(a) केवल (i) (b) केवल (ii)

(c) (i) व (ii) दोनों

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

52. रेडियो सक्रियता की खोज का श्रेय दिया जाता है-

(a) चैडविक को (b) रदरफोर्ड को

(c) क्यूरी दंपती को

(c) दूध से दही बनना

53.

(d) जल में चीनी घुलना

45.

रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है।

(a) प्रिज्म से गुजरने पर श्वेत प्रकाश का सात रंगों में विभक्त होना।

(b) दुग्ध का आस्कंदन

(c) संघनन

54.

(d) हेनरी बेकुरल को

गामा विकिरण की प्रकृति होती है-

(a) तीव्रगामी इलेक्ट्रॉन के रूप में

(b) द्विआयनित हीलियम परमाणु के रूप में

(c) विद्युत चुम्बकीय तरंग के रूप में

(d) उपर्युक्त सभी

थायरॉइड कैन्सर के उपचार में उपयोगी समस्थानिक है-

(d) छानी हुई मिट्टी का सूखने पर भंगूर हो जाना।

(a) I-131

46.

निम्नलिखित में से भौतिक परिवर्तन कौन-सा है?

(c) Co-60

(b) P-31

(d) K-40

(a) लोहे में जंग लगना

55.

अंतरिक्ष पिण्डों की आयु ज्ञात करने में उपयोगी समस्थानिक है-

(b) मैग्नीशियम रिबन का दहन

(a) Agl

(c) मोमबत्ती का जलना

(c) K-40

(b) C-14

(d) O-16

(d) बर्फ का पिघलना

56.

47.

किसी परमाणु में उपस्थित नाभिक की प्रकृति होती है-

सूत्र है-

(a) धनावेशित

अत्यन्त विषैली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट का रासायनिक

(a) CH3-N=C=O

(b) ऋणावेशित

(c) उदासीन

(b) CH3-CH2-SH

(c) CCI3-CHO

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

परमाणु भट्टी अथवा परमाणु संयंत्र नाभिकीय विखण्डन किया

48.

जाता है-

49.

(a) नियंत्रित शृंखला अभिक्रिया द्वारा

(b) अनियंत्रित शृंखला अभिक्रिया द्वारा

(c) उपर्युक्त दोनों

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

परमाणु संयंत्र में भारी जल का प्रयोग किया जाता है-

(i) ईंधन के रूप में

(ii) मंदक के रूप में

(iii) शीतलक के रूप में

(a) (i) तथा (ii)

(d) CCI - NO 2

57. सम्पीड़ित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas-

CNG) का मुख्य अवयव होता है-

(a) मीथेन

(c) प्रोपेन

58. पेट्रोल में अपस्फोटनरोधी

क्या मिलाया जाता है?

(a) ट्रेटा एथिल लेड

(b) ट्रेटा मेथिल लेड

(c) एथिल लेड

(d) मेथिल लैड

59.

(b) ब्यूटेन (d) आइसो प्रोपेन (knocking agent) के रूप में

निम्नलिखित में से किस कार्बनिक यौगिक को ऑलिफिन्स के

नाम से जाना जाता है?

(b) (ii) तथा (iii)

(c) (i) तथा (iii)

(d) (i), (ii) तथा (iii)

50.

नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया में निर्मित भारी नाभिक का द्रव्यमान संलयित होने वाले छोटे नाभिकों के कुल द्रव्यमान की तुलना में

(a) अधिक होता है।

(b) कम होता है।

(c) बराबर होता है।

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

51. हाइड्रोजन बम किस प्रक्रिया पर आधारित है?

(i) नाभिकीय विखण्डन

(ii) नाभिकीय संलयन

(a) एल्केन

(c) एल्काइन

60.

कौन-सा है?

(b) एल्कीन

(d) बेंजीन

एन्थ्रासाइट के पश्चात्, सर्वाधिक दहन क्षमता वाला कोयला

(a) लिग्नाइट

(c) बिटुमिनस

(b) पीट (d) एन्थ्रासाइट

61. पेट्रोल शुद्धता का मापन किस संख्या द्वारा किया जाता है?

(a) सीटेन संख्या

(b) ऑक्टेन संख्या

(c) ब्यूटेन संख्या

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

342

गैसों के किस मिश्रण को भरा जाता है?

(a) मीथेन और एथेन

(b) एथेन और हेक्सेन

(c) प्रोपेन और ब्यूटेन

(d) हेक्सेन और ऑक्टेन

63.

TNT विस्फोटक के निर्माण में उपयोगी हाइड्रोकार्बन है-

(a) बेंजीन

(b) टॉलुईन

(c) साइक्लो प्रोपेन

(d) मेथेन

64.

कार्बन का कौन-सा अपररूप जियोडेसिक गुंबद जैसा स्वरूप

रखता है?

(a) ग्रेफाइट

(b) हीरा

उत्कर्ष प्रकाशन

62.

एल. पी. जी. सिलेण्डर में दाब के अंतर्गत द्रव्य रूप में मुख्यतः

73.

विरंजक चूर्ण का रासायनिक सूत्र है- (a) CaOC

(b) Ca(OCI) 2

(c) Ca (OH)2

(d) CaSO4. - H2O

74. खाने का सोडा (NaHCO3) का रासायनिक नाम है- (a) सोडियम बाई कार्बोनेट

75.

(b) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (c) डेका हाइड्रेट सोडियम कार्बोनेट (d) a व b दोनों

जिप्सम का रासायनिक सूत्र होता है-

(a) CaSO4. 3H2O

(c) फुलरीन

(b) CaSO4. 2H2O

(d) कार्बन नैनोट्यूब

(c) CaSO4. H2O

65.

त्वचा में नमी बनी रहे इसके लिए शेविंग क्रीम में मिलाया जाता हैं-

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(a) ग्लिसरीन

(c) एथेनॉल

(b) रोजिन (d) a व b दोनों

उत्तरमाला

66.

निम्नलिखित में से कौन-सा बहुलक हेक्सा मेथिलीन डाई एमीन

1. (d)

2. (c)

3. [b]

4. (d)

5. [c]

(H2N-(CH2)6-NH2) तथा एडिपिक अम्ल (HOOC (CH2)4-

6. [b]

7. [b]

8. [b]

9. [b]

10. [a]

11. [b]

COOH) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है?

12. (c)

13. [C]

14. [b]

15. [a]

16. [d)]

(a) बेकेलाइट

(b) नायलॉन 6, 6

17. (a)

18. [a]

19. [C]

20. [b]

(c) टेरीलीन

21. [b]

22. [d]

23. (d)

24. (b)

25. [c]

(d) मेलामाइन

26. [d)

27. [c)

28. [b]

29. [b]

30. (a)

67.

निम्नलिखित में से संश्लेषित

रबड़ है-

31. (b)]

32. (b)

33. (a)

34. [a]

35. [d)

(a) निओप्रीन रबड़

(b) ब्यूना-N

36. [d]

37. (d)

38. [b]

39. (a)

40. [C]

(c) थाईकॉल

(d) उपर्युक्त सभी

41. [c

42. (c)

43. [a]

44. (d)

45. (b)

68,

सीमेन्ट निर्मित होती है-

46. [d]

47. (a)

48. [a]

49. [b]

50. [b]

(a) कैल्सियम सिलिकेट द्वारा

51. [b]

52. [d]

53. [(c)

54. (a)

55. (c)

(b) कैल्सियम एल्युमिनेट द्वारा

56. (al

57. [a]

58. (a)

59. (b)]

60. [C]

(c) a b दोनों

61. [b]

62. (c)

63. [b]

64. [C]

65. [d]

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

66. [b]

67. (d)

68. [C]

69. [d]

70. [a]

69.

उद्योग में पॉलिथीन का निर्माण किसके बहुलीकरण

71. (a)

72. (d)

73. (a)

74. (d)

75. [b]

(पॉलिमेराइजेशन) द्वारा किया जाता है?

(a) मीथेन

(b) स्टाइरीन

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code स्कैन करें-

(d) एथिलीन

70.

(c) एसीटिलीन

सीमेंट का दृढ़ीकरण किसके कारण होता है?

(a) निर्जलीकरण

(b) जलयोजन और जल अपघटन

(c) जल अपघटन

मानव द्वारा निर्मित प्रथम रेशा कौन-सा है?

(d) बहुलकीकरण

71.

(a) नायलॉन

(c) कार्बन रेशे

72.

(b) पॉलिएस्टर

(d) ऑरलॉन

NaOH का उपयोग निम्नलिखित में से किसमें किया जाता

है/हैं?

(a) पेट्रोलियम के शोधन में

(b) वसा व तेलों के निर्माण में

(c) प्रयोगशाला अभिकर्मक में (d) उपर्युक्त सभी

343

·

जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1801 ई. में लैमार्क तथा ट्रेविरेनस द्वारा किया गया।

जीव विज्ञान को दो शाखाओं में विभाजित किया गया है-

1.

1.

वनस्पति विज्ञान इस शाखा में समस्त पादपों का अध्ययन किया

जाता है।

2.

2.

·

प्राणी विज्ञान इस शाखा में समस्त प्राणियों का अध्ययन किया जाता है। अरस्तू को जीव विज्ञान और प्राणी शास्त्र का जनक कहा जाता है। वनस्पति विज्ञान का जनक थियोफ्रेस्टस को माना जाता है।

जीव विज्ञान

बायोलॉजी शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों के संयोजन से बना है बायोस

अर्थात् जीवन तथा लोगोस अर्थात् अध्ययन।

महत्त्वपूर्ण शब्दावली

Lact:-- दूध (milk)

उदाहरण- लैक्टोज दूध में पाई जाने वाली शर्करा

Hydro पानी

उदाहरण- हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia):- पानी से डर लगना ।

उदा:- हाइड्रोफाइट्स (Hydrophytes ) Hydro Phytes (ऐसे पौधे जो पानी में उगते हैं)

शाखा

जेनेटिक्स

जीव विज्ञान की शाखाएँ

कंकाल विज्ञान (Osteology)

एन्जाइमोलोजी (Enzymology) उत्प्रेरकों का अध्ययन

हिस्टोलॉजी

ऊतकों का अध्ययन

कवकों का अध्ययन

3.

हाइग्रो (Hygro): हाइग्रो आर्द्रता (Humidity / नमी)

उदा: हाइग्रोमीटर आर्द्रता मापने के लिए उपकरण

अध्ययन

4.

ऑस्टियो (Osteo):- हड्डी (bone)

अस्थियों एवं कंकाल तंत्र का अध्ययन

आनुवंशिकी विभिन्नताओं का अध्ययन

कवक विज्ञान (Mycology)

कीटशास्त्र (Entomology) Cytology

सौरोलॉजी (Saurology)

उद् विकास (Evolution)

आकारिकी (Morphology)

इकोलॉजी

न्यूरोलॉजी

त्वचा विज्ञान (Dermatology) ओडोन्टोलॉजी (Odontology) पक्षी विज्ञान

हेरिडिटी फल विज्ञान

Gerontology एपिकल्चर हिमेटोलॉजी सेरीकल्चर

विष विज्ञान

सिल्वीकल्चर शारीरिकी

मोरी कल्चर

शैवाल विज्ञान फ्लोरीकल्चर सब्जियों की कृषि

कीट पतंगों का अध्ययन

कोशिका का अध्ययन छिपकलियों का अध्ययन

जीवों का उद्भव एवं विभेदीकरण का

अध्ययन

जीवों की आकृति एवं संरचना का

अध्ययन

जैविक एवं अजैविक जीवों के संबंधों का

अध्ययन

तंत्रिका तंत्र का अध्ययन

त्वचा की संरचना एवं कार्यों का अध्ययन दन्त विज्ञान का अध्ययन पक्षियों का अध्ययन

पैतृक लक्षणों का संतति में पहुँचने का अध्ययन

फलों का अध्ययन बुढ़ापे का अध्ययन

मधुमक्खियों का अध्ययन

रुधिर एवं रुधिर सम्बन्धी रोगों का अध्ययन रेशम के कीड़ों के पालन का अध्ययन विषैले पदार्थों का अध्ययन वृक्षारोपण

शरीर की आंतरिक संरचना का अध्ययन शहतूत के पौधे पर रेशम के कीड़े का

पालन

शैवाल का अध्ययन

सजावटी पुष्पों का संवर्द्धन एवं अध्ययन सब्जियों का अध्ययन

344

उदा:- ऑस्टियोलॉजी (osteology):- इसके अन्तर्गत हड्डियों का अध्ययन किया जाता है।

ऑस्टियोमलेशिया: हड्डी का कमजोर होना।

5. Hepate ( हिपेट) : लीवर / यकृत

उदा: हिपेटोलॉजी (Haepatology): यकृत का अध्ययन उदा:- हेपेटाइटिस- लीवर / यकृत प्रभावित

6. कार्डियो ( Cardio):- हृदय (Heart)

उदा:- कार्डियोलॉजी (Cardiology) (हृदय का अध्ययन)

ECG:- इलेक्ट्रोकार्डियो ग्राफ / ग्राम हृदय के लिए इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम (ECG) हृदय पेशियों की उत्तेजना द्वारा उत्पन्न विद्युत धारा का ग्राफिक रिकॉर्ड होता है। परिवर्तनों को रिकॉर्ड करने के लिए प्रयुक्त किए गए उपकरण को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ कहा जाता है।

Note: EEG :- इलेक्ट्रोइन्सफेलो ग्राफ: मस्तिष्क (Brain) के लिए 7. जीरो (Xero ) :- Xero शुष्क / dry l

8.

उदा:- Xerophytes :- मरुस्थल में उगने वाले पौधे

उदा:- नागफनी केक्टस इत्यादि ।

उदा: जीरोफ्थलैमिया:- आँखों का शुष्क होना। Ornitho:- पक्षी

Ornithology:- पक्षियों का अध्ययन

नोट:- सलीम अली को Bird Man of India कहा जाता है।

9. ल्यूको (Leuco) :- (White) सफेद

उदा:- ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes) :- WBC

ल्यूकेमिया (Leukaemia):- WBC की अत्यधिक वृद्धि से रक्त कैंसर (Blood Cancer) होता है।

10. क्रायो (Cryo):- अति न्यून ताप (Very low Temp.)

उदा:- क्रायोजेनिक (Cryogenic):- वह इंजन जो अति न्यून ताप पर कार्य करे।

11. माइको (Myco):- कवक

उदा:- माइकोलॉजी (Mycology): कवक का अध्ययन माइकोराइजा:- जड़ & कवक का सहजीवन संबंध

नोट:- फाइको शैवाल (algae)

फाइकोलॉजी- शैवाल का अध्ययन

12. एन्ड्रो (Andro ) :- पुरुष / male / नर

उत्कर्ष प्रकाशन

उदा:- एन्ड्रोजन (Androgen):- नर में पाए जाने वाला लिंग हॉर्मोन (Sex harmone) टेस्टोस्टेरॉन को एन्ड्रोजन भी कहते हैं। एन्ड्रोसियम (Androcium):- फूल में नर जनन अंग (पुमंग ) गाइनोसियम (Gyanoecium):- फूल का मादा जनन अंग (जायांग) 13. ऑप्थेल्म (Opthalm):- आँख (Eye)

·

उदा:- ऑप्थेल्मोलॉजी (Ophthalmology):- आँखों का अध्ययन। 14. हेमेटो (Hemato) :- Blood

हिमेटोलॉजी: Study of blood

15. सिस्मो (Seismo ) :- कम्पन / Vibration

उदा:- सिस्मोग्राफ (Sismograph) : भूकम्प तीव्रता मापने का यंत्र

16. डर्मेटो (Darmeto):- त्वचा

त्वचा की सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस

17. हिस्टो (Heisto) :- ऊतक (Tissue)

ऊतकों का अध्ययन हिस्टोलॉजी

18. कैरियो (Karyo):- केन्द्रक (Nucleus)

उदा:- कैरियोलॉजी (Karyology):- केन्द्रक का अध्ययन प्रमुख शाखाएँ

1. एनाटॉमी (Anatomy):- शरीर की आन्तरिक संरचना का अध्ययन 2. एंजियोलॉजी (Angiology):- परिसंचरण तंत्र का अध्ययन

3.

4.

5.

8.

9.

एस्ट्रोनॉमी (Astronomy ) :- ब्रह्माण्ड का अध्ययन

डेन्ड्रोलॉजी (Dendrology):- वृक्षों व झाड़ियों का अध्ययन डेन्ड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology): वृक्षों की आयु का

अध्ययन

6. इकॉलॉजी (Ecology):- जीवों एवं पर्यावरण के मध्य अध्ययन 7. एन्टोमोलॉजी (Entomology):- कीटों का अध्ययन जेनेटिक्स (Genetics):- आनुवंशिकता का अध्ययन हेलमिन्थोलॉजी (Helminthology):- कृमियों का अध्ययन 10. इक्थियोलॉजी (Iqthiology):- मछलियों का अध्ययन 11. केलोलॉजी (Calology):- मानव सौन्दर्य का अध्ययन 12. नेफ्रोलॉजी (Nephrology ):- गुर्दे (Kidney) का अध्ययन 13. न्यूरोलॉजी (Neurology):- जंतुओं के तंत्रिका तंत्र का अध्ययन 14. ओडॉन्टोलॉजी (Odontology): दंत विज्ञान संबंधी अध्ययन 15. ओपटिक्स (Optics): प्रकाश का अध्ययन

16. पैलियेंटोलॉजी (Palaeontology):- जीवाश्म का अध्ययन 17. पैथोलॉजी (Pathology):- रोगों का अध्ययन 18. पॉमोलॉजी (Pomology): फलों का अध्ययन 19. पेडोलॉजी (Padology):- मृदा का अध्ययन 20. एपिग्राफी (Epigraphy):- शिलालेख का अध्ययन 21. न्यूमिसमेटिक्स (Numismatics) :- सिक्कों (मुद्राशास्त्र का अध्ययन)

कोशिका

1665 ई. में सर्वप्रथम 'रॉबर्ट हुक' ने कोशिका को देखा, हालाँकि रॉबर्ट हुक ने मृत कोशिकाओं (Dead Cells) को देखा, जिनमें उन्हें 'कोशिका भित्ति' (Cell Wall) दिखाई दी, फिर भी कोशिका की खोज का श्रेय रॉबर्ट हुक को ही जाता है।

रॉबर्ट

बताया।

हुक ने अपनी पुस्तक 'माइक्रोग्राफिया' में कोशिका के बारे में

वर्ष 1674 के दौरान 'ल्यूवॉन हॉक' ने सर्वप्रथम जीवित कोशिका (Living Cell) को देखा, इन्होंने RBC, जीवाणु, शुक्राणु को सर्वप्रथम देखा।

1831 ई. में 'रॉबर्ट ब्राउन ने सर्वप्रथम ऑर्किड पौधों की जड़ों (Roots) की कोशिकाओं (Cells) में केन्द्रक (Nucleus) की खोज की। 1838 ई. में श्लीडेन एवं श्वान ने कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) दिया, जिसके अनुसार-

सभी जीवों (Organisms) का निर्माण कोशिकाओं (Cells) से होता है।

ये कोशिकाएँ जीवों के शरीर की क्रियात्मक (Functional) एवं संरचनात्मक (Structural) इकाई (Unit) होती है।

1855 ई. में 'रुडोल्फ विच (Rudolph Virchow) ने सर्वप्रथम बताया कि नई कोशिकाओं का निर्माण पूर्ववर्ती कोशिकाओं (Existing Cells) से होता है।

रुडोल्फ विच का कथन Omnis Cellula-e-Cellula कोशिका की संरचना

जा

खुरदरी

तदोष

जातिका

कोशिकाद्रव्य

हाइलाइ प्रदर्शित करते हुए)

गॉल्जी उपकरण

केन्द्रीय हल्ली

प्लेमा हिल्ली

बय कोशिका

कोशिका मिति

रायग

हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट)

संगठन (Composition), संरचना (Structure) के आधार पर कोशिका दो प्रकार की होती है-

प्रोकैरियोटिक / असीमकेन्द्रकी | यूकेरियोटिक / समीमकेन्द्रकी इनमें केन्द्रक (Nucleus) अल्प- इनमें केन्द्रक सुविकसित (Well विकसित तथा केन्द्रक के चारों ओर | Developed) तथा केन्द्रक के केन्द्रक झिल्ली (Nucleus चारों ओर दोहरा (Double ) Membrane) अनुपस्थित होती है। केन्द्रक आवरण पाया जाता है। DNA आवरण युक्त (Nuclear DNA नग्न अवस्था में होता है।

Membrane) होता है। इसमें सर्पिलाकार (Spiral) तथा द्वि-रज्जुकी (Double Stranded DNA) केन्द्रक के अंदर पाया जाता है। (805 राइबोसोम)

इसमें वृत्ताकार DNA जिसे प्लाज्मिड (Plasmid) कहते हैं तथा ये केन्द्रकाभ (Nucleoid) के बाहर पाया जाता है (705 राइबोसोम)

345

कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) व | केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm) में कोई विभेदन (Differentiation) नहीं होता है।

इनमें विभिन्न प्रकार के कोशिकांग (Cell Organelles) नहीं पाए जाते हैं।

उत्कर्ष प्रकाशन

कोशिकाद्रव्य एवं केन्द्रकद्रव्य एक-दूसरे से स्पष्ट रूप से विभेदित होता है।

इनमें सुविकसित कोशिकांग जैसे- माइटोकॉण्ड्रिया लवक (Plastid), लाइसोसोम, राइबोसोम, अंत: प्रद्रव्यी जालिका (E.R.), सेंट्रोसोम, गॉल्जीकाय आदि पाए जाते हैं।

जन्तु कोशिका एवं पादप कोशिका में अन्तर- पादप कोशिका

.

इनमें कोशिका झिल्ली के चारों

जन्तु कोशिका

कोशिका भित्ति अनुपस्थित

ओर मुख्यतया सेल्यूलोज से बनी कोशिका भित्ति (Cell-Wall)

इनमें

(Absent) होती है।

होती है।

इनमें केन्द्रक तुलनात्मक रूप से

छोटा व परिधि (Periphery) की इनमें केन्द्रक बड़े आकार का व

ओर होता है।

इनमें रिक्तिकाएँ बड़े आकार की इनमें रिक्तिकाएँ छोटी-छोटी तथा होती हैं।

गॉल्जीकाय (Golgi bodies) अल्प विकसित व छोटे आकार के होते हैं, जिन्हें 'डिक्टियोसोम' कहते हैं।

केन्द्रीय भाग में स्थित होता है।

कोशिकाद्रव्य में बिखरी होती है।

इनमें गॉल्जीकाय सुविकसित व बड़े आकार के होते हैं।

इनमें तारककाय अनुपस्थित होता है। इनमें तारककाय उपस्थित होता है। कोशिका भित्ति (Cell Wall)

ये कोशिका का बाह्यतम आवरण जो पादप कोशिकाओं (Plant Cells), कवक (Fungi), बैक्टीरिया में पाया जाता है। कोशिका भित्ति जंतु कोशिका में अनुपस्थित होती है।

ये कोशिका द्वारा स्रावित तथा ये मृत / निर्जीव (Dead) लेकिन उपापचयी रूप से सक्रिय (Metabolically Active) होती है। औसत मोटाई 0.1 (माइक्रोमीटर) = 10 मीटर

कोशिका भित्ति के संस्तर:-

· मध्य संस्तर (Middle Lamella)

.

-

ये कैल्सियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) के पेक्टेट लवणों (Pectate Salt) से बना है जो दो कोशिका को आपस में जोड़े रखने का कार्य भी करता है। अत: इसे 'कोशिकीय सीमेंट' (Cellular Cement) भी कहते हैं।

-

सुबेरिन ये मोम (Wax) के समान चिकना पदार्थ होता है, जो जल की पारगम्यता (Permeability) का नियंत्रण करता है। क्यूटिन ये क्यूटिन पौधों में क्यूटिकल का निर्माण करता है जो वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की क्रिया का नियमन करता है। कोशिका झिल्ली (Cell Membrane)

यह सबसे बाहर की तरफ चारों ओर सबसे पतली मुलायम व लचीली झिल्ली होती है, उसे कोशिका झिल्ली, प्लाज्मा झिल्ली या प्लाज्मा मेम्ब्रेन कहते हैं।

कोशिका झिल्ली को 'प्लाज़्मा' (Plasma Membrane) नाम 'प्लोव' ने दिया।

'नगेली व क्रेमर' ने इसे 'कोशिका झिल्ली' कहा।

यह जल के लिए अर्द्धपारगम्य (semi permeable), विलेयों (Solutes) के लिए चयनात्मक पारगम्य (Selective Permeable) होती है।

कोशिका झिल्ली मुख्यतया वसा (फॉस्फोलिपिड्स) एवं प्रोटीन से बनी होती है।

नोट :-

कोशिका झिल्ली की संरचना को समझाने हेतु 'सिंगर एवं निकोल्सन' ने 'तरल-मोजेक मॉडल' (Fluid Mosaic Model) प्रस्तुत किया।

कोशिका भित्ति में कुछ छिद्र (Pores) पाए जाते हैं, इन छिद्रों से होकर दो समीपस्थ कोशिकाओं (Adjacent Cells) में पदार्थों का आदान- प्रदान होता है। इन संरचनाओं को प्लाज्मोडेस्मेटा कहते हैं।

कोशिका कला के कार्य :-

1. कोशिका को आकृति प्रदान करना 2. कोशिकाओं की सुरक्षा करना।

जीवद्रव्य (Protoplasm) :-

कोशिका में कोशिका कला के अन्दर पाया जाने वाला सम्पूर्ण पदार्थ जीवद्रव्य कहलाता है। इसमें अनेक अकार्बनिक पदार्थ (लवण, खनिज, जल) तथा कार्बनिक पदार्थ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा पाई जाती है। इसके दो भाग होते हैं- कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) तथा केन्द्रक (Nucleus)।

"जीवद्रव्य जीवन का भौतिक आधार है। " यह कथन हैक्सले का है। कोशिका द्रव्य (Cytoplasm ) :-

कोशिका कला तथा केन्द्रक कला के मध्य उपस्थित सम्पूर्ण पदार्थ कोशिका द्रव्य कहलाता है। इसमें उपस्थित सजीव रचनाओं को कोशिकांग कहते हैं तथा निर्जीव वस्तुओं को सम्पूर्ण रूप से मेटाप्लास्ट कहते हैं।

कोशिकांग (Cell Organelles) -

·

कोशिका द्रव में उपस्थित सजीव पदार्थ ।

कोशिका (Cell) के विभिन्न कार्य करने के लिए कोशिका में विभिन्न कोशिकांग पाए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं-

फलों (Fruits) के पकने के समय लवण (Salt) जल में घुलने 1. माइटोकॉण्ड्रिया (सूत्रकणिका) -

लगते हैं जिससे फल नरम (Soft) होने लगते हैं।

प्राथमिक संस्तर (Primary Lamella)

पौधों में ये संस्तर मुख्यतया सेल्युलोज से बना होता है।

बैक्टीरिया में इसका निर्माण 'पेप्टिडोग्लाइकेन' से होता है।

प्राथमिक संस्तर (Primary Lamella) में पेक्टिन पाया जाता है।

द्वितीयक संस्तर ( Secondary Lamella)

-

ये प्राथमिक भित्ति के अंदर की ओर परिपक्व कोशिकाओं (Mature Cells) में पाई जाती है।

द्वितीयक भित्ति में कुछ पदार्थों का जमाव पाया जाता है।

लिग्निन ये द्वितीयक भित्ति को कठोर (Hard) एवं मजबूत (Strong) बनाता है।

इसम

कण

परमाइटोकांडिय

Matrix

ATP

हल्ली

डीएनए आन्तरिक झिल्ली

माइटोकॉन्ड्रिया

346

.

·

·

उत्कर्ष प्रकाशन

सर्वप्रथम इसे 'कॉलिकर' ने कीटों (Insects) की रेखित पेशियों (Straited Muscles) में देखा तथा इसे 'सार्कोसोम' कहा। माइटोकॉण्ड्रिया नाम 'सी. बेण्डा' ने दिया।

माइटोकॉण्ड्रिया की खोज 'अल्टमान' ने की

सभी प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं तथा अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration) करने वाली कोशिकाओं में माइटोकॉण्ड्रिया नहीं पाया जाता है।

माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का शक्ति गृह (Power House of the Cell) भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर श्वसन (Respiration) के दौरान A.T. P. ( एडिनोसिन ट्राई फॉस्फेट) के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है (क्रेब्स चक्र के दौरान)

उपापचयी रूप से सक्रिय कोशिकाओं (Metabolically Active Cells) में माइटोकॉण्ड्रिया की संख्या भी अधिक होती हैं, जैसे पेशी कोशिकाओं (Muscle Cells) एवं यकृत (Liver) की कोशिकाओं में। माइटोकॉण्ड्रिया दोहरी झिल्ली युक्त कोशिकांग है।

माइटोकॉण्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Inner Membrane) में कई अंगुलीनुमा उभार पाए जाते हैं, जिन्हें 'क्रिस्टी' कहते हैं। इन क्रिस्टी पर 'ऑक्सीसोम कण' पाए जाते हैं।

ऑक्सीसोम कणों का गोलाकार शीर्ष- F-1 कण, जबकि आधारी भाग - F-0 कण

F कणों पर श्वसन (Respiration) के दौरान E.T.S. (इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट सिस्टम) चलता है।

माइटोकॉण्ड्रिया में स्वयं का वृत्ताकार DNA राइबोसोम तथा RNA भी पाया जाता है, अत: इसे अर्द्धस्वायत्त कोशिकांग (Semiautonomous Cell Organelle) भी कहते हैं।

स्तनियों (Mammals) के माइटोकॉण्ड्रिया में 555 राइबोसोम पाया जाता है।

2. लवक (Plastid)

·

ये केवल पादप कोशिका (Plant Cells) में पाए जाने वाले कोशिकांग हैं, ये भी माइटोकॉण्ड्रिया के समान अर्द्धस्वायत्त कोशिकांग हैं तथा ये भी दोहरी झिल्ली (Double Membrane) युक्त हैं।

लवक ऊर्जा संग्रहण (Energy Storage) से संबंधित है।

'हेकल' ने सर्वप्रथम लवकों का वर्णन किया तथा खोज का श्रेय भी हेकल को जाता है।

कार्य के आधार पर शिम्पर ने लवकों के तीन प्रकार बताए-

1. हरित लवक (Chloroplast )

.

ये हरे रंग के लवक होते हैं, इनमें हरित वर्णक (Pigment ) क्लोरोफिल पाया जाता है।

हरित लवक का मुख्य कार्य सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में CO2 व जल की सहायता से प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कर सरल भोज्य पदार्थों का निर्माण करना है। इस क्रिया में O2 भी मुक्त होती है। सूर्य का प्रकाश 6CO2 + 6H2O

हरे पौधे (हरित लवक) C6H12O + 602

3.

·

4.

हरित लवक में आंतरिक झिल्ली में वलन (Folds) बनने से थायलेकॉइड का निर्माण होता है। ये थायलेकॉइड एक के ऊपर एक सिक्कों के रूप में व्यवस्थित रहते हैं जिन्हें 'ग्रेना' कहते हैं। ग्रेना पर छोटे-छोटे कणों के समान 'क्वाण्टासोम्स' पाए जाते हैं। जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के दौरान ऊर्जा अवशोषित करते हैं।

दो ग्रेना आपस में इन्टर ग्रेना द्वारा जुड़े रहते हैं।

ग्रेना व इन्टर ग्रेना आंतरिक झिल्ली से घिरे मैट्रिक्स / स्ट्रोमा / अधात्री में धँसे रहते हैं।

ग्रेना पर प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया (light Reaction) होती है जबकि स्ट्रोमा में अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction) होती है।

भीतरी झिल्ली बाहरी झिल्ली

सुमेन थाइलेको स्ट्रोमा पटलिका आंतरिक झिल्ली

ग्रेना

स्ट्रोमा

II. वर्णी लवक (Chromoplast )

·

·

ये विभिन्न रंगों युक्त (वर्णक / Pigment के कारण) लवक हैं। फल, फूल एवं पत्तियों में हरे रंग के अलावा अन्य रंगों का पाया जाना इसी के कारण होता है।

जब फल पकने लगते हैं तो उनमें हरित लवक वर्णी लवक में बदलने लगते हैं, जिससे फल रंगीन दिखाई देते हैं।

III. अवर्णी लवक (Leucoplast)

.

ये रंगहीन लवक हैं, जिनका मुख्य कार्य भोजन संग्रहण करना होता है।

सामान्यतया जड़ों (Roots) में पाए जाते हैं।

उदाहरण-

वसा (Lipid) संग्रहण से संबंधित अवर्णीलवक इलियोप्लास्ट स्टार्च संग्रहण से संबंधित अवर्णीलवक एमायलोप्लास्ट प्रोटीन संग्रहण से संबंधित अवर्णीलवक प्रोटीयोप्लास्ट

अंतः प्रद्रव्यी जालिका (E.R. Endoplasmic Reticulum) पोर्टर ने इसका विस्तृत अध्ययन कर ER. नाम दिया। (खोजकर्ता) ये कोशिका (Cell) के आंतरिक कंकाल (Internal Skeleton) का निर्माण करती है।

E.R. कोशिका के अंदर पदार्थों के परिवहन में सहायक है। E.R. दो प्रकार की होती हैं-

i.

खुरदरी अंतः प्रद्रव्यी जालिका (Rough E.R.) - इस E.R. पर राइबोसोम पाए जाते हैं, अतः ये खुरदरी है। RE.R. प्रोटीन संश्लेषण से संबंधित है (इस पर पाए जाने वाले राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण करते हैं।)

ii. चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Smooth E. R.) -

·

इस E.R. पर राइबोसोम नहीं पाए जाते हैं अतः ये चिकनी होती है।

ये कोशिका में ग्लायकोजन संग्रहण तथा स्टीरॉइड के संश्लेषण से संबंधित है।

गॉल्जीकाय (Golgy Body)

'केमिलियो गॉल्जी' ने गॉल्जीकाय की खोज की तथा इसके बारे में विस्तार से बताया।

अन्य नाम डॉल्टन कॉम्प्लेक्स, बेकर्स बॉडी, लाइपोकॉण्ड्रिया । पौधों में अल्पविकसित, बिखरे हुए गॉल्जीकाय डिक्टियोसोम यह जंतुओं में सुविकसित होते हैं।

गॉल्जीकाय कोशिका में झिल्लियों (Membranes ) के रूपांतरण का कार्य करता है।

347

.

·

उत्कर्ष प्रकाशन

कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन युक्त पदार्थों के कोशिका से बाहर परिवहन रिक्तिका / रसधानी / Vacuoles (Transportation) में सहायक।

इसे कोशिका को 'ट्रैफिक पुलिस' (Transportation Manager of Cell) भी कहते हैं।

लाइसोसोम तथा शुक्राणु (Sperm) के एक्रोसोम (Acrosome ) का निर्माण करता है। (एक्रोसोम एंजाइम जो इसके Egg में प्रवेश करने में सहायक है।)

RBC, टेरिडोफायटा एवं ब्रायोफायटा के नर युग्मक (Male Gamets) परिपक्व चालनी नलिकाओं (Sieve Tubes) में गॉल्जीकाय नहीं होता है।

5. राइबोसोम (पैलाडे कण) -

·

खोजकर्ता पैलाडे (जंतु कोशिका में)

ये कोशिका में कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm), R.E.R. पर माइटोकॉण्ड्रिया व लवक में भी पाए जाते हैं।

इनका मुख्य कार्य कोशिका में 'प्रोटीन संश्लेषण' करना होता है।

इसे प्रोटीन की फैक्ट्री भी कहते हैं।

प्रोकैरियोटिक कोशिका में राइबोसोम 705 तथा यूकैरियोटिक कोशिका

में 805 पाया जाता है।

6. लाइसोसोम (Lysosome) -

खोज क्रिश्चियन डी डुवे ने की।

नाम नोविकॉफ़ ने दिया।

इसे 'कोशिका की आत्मघाती थैलियाँ (Suicidal Bags of Cell) कहते हैं।

इनमें कई जल अपघटनीय एंजाइम्स (Hydrolytic Enzymes ) पाए जाते हैं जो पाचन, अपशिष्ट पदार्थों के अपघटन में सहायक हैं तथा कोशिका का जीवनकाल पूरा होने पर ये लाइसोसोम फट जाते हैं तथा संपूर्ण कोशिका का पाचन कर देते हैं।

निर्माण गॉल्जीकाय

गति से संबंधित कोशिकांग -

i.

·

पक्ष्माभ (Cilia) -

श्वसन पथ की कोशिकाओं में, बैक्टीरिया की सतह पर पाया जाता है। इसका निर्माण 'ट्यूब्यूलिन प्रोटीन से बनी सूक्ष्मनलिकाओं (Microtubules) से होता है।

इसमें सूक्ष्मनलिकाओं का विन्यास (Arrangement) '9+2' के रूप में होता है।

ii. कशाभ (Flagella) -

·

·

यह शैवालों के युग्मकों में पाया जाता है।

इसका निर्माण 'ट्यूब्यूलिन प्रोटीन' से बनी सूक्ष्म नलिकाओं (Microtubules) से होता है।

इसमें सूक्ष्म नलिकाओं का विन्यास (Arrangement ) '9+2' के रूप में होता है।

तारककाय (Centrosome )

·

वर्णन एवं खोज का श्रेय बोवेरी को ।

ये उच्चतर पौधों (Higher Plants) में नहीं पाया जाता है।

ये जंतु कोशिकाओं व निम्न पादपों (Lower Plants) में पाया जाता है।

ये कोशिकांग अपनी स्वयं की प्रतिकृति (Copy) बना सकता है।

ये तारककाय कोशिका विभाजन (Cell-Division) के समय तर्क (Spindle) का निर्माण करता है।

इसमें सूक्ष्म नलिकाओं का विन्यास '9+0' के रूप में होता है।

ये कोशिका द्रव्यविहीन (Non Cytoplasmic) संरचनाएँ हैं, जो कोशिकाद्रव्य से एक झिल्लीनुमा संरचना 'टोनोप्लास्ट (Tonoplast) से घिरी हुई रहती है।

रिक्तिका पादप कोशिकाओं व कवक (Fungus) में बड़े आकार की जबकि जंतु कोशिकाओं में छोटे आकार की होती है।

ये रिक्तिकाएँ भोजन एवं अन्य तरल पदार्थों का संग्रहण कर सकती हैं। यह कोशिका में जल की मात्रा का नियमन (Regulation) करने में सहायक है।

यह लाइसोसोम के साथ उत्सर्जी पदार्थों के कोशिका से बाहर उत्सर्जन में भी सहायक है।

केन्द्रक (Nucleus )

केन्द्रिका (Nucleolus))

कोशिका छिद्र (Nuclear Pores)

Chromatin

केन्द्रक झिल्ली (Nuclear Membrane)

condensed Granules Karyoplasm

• Fibrils

• क्रोमैटिक धागे (Chromatin diffuse )

केन्द्रक की खोज 'रॉबर्ट ब्राउन' ने ऑर्किड पौधे की जड़ों (Roots) की कोशिकाओं में की।

सामान्यतया प्रत्येक कोशिका में 1 केन्द्रक जो लगभग गोलाकार (Spherical) होता है।

पादप व जन्तु कोशिकाओं में अस्थि मज्जा (Bone Marrow) तथा रेखित पेशियों में बहुकेन्द्रकी अवस्था होती है।

i.

.

.

केन्द्रक (Nucleus) में चार प्रमुख संरचनाएँ-

केन्द्रक आवरण (Nuclear Membrane) वसा + प्रोटीन

केन्द्रक के चारों ओर दोहरी झिल्ली पाई जाती है (यूकैरियोटिक कोशिकाओं में)

प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में अनुपस्थित |

इस आवरण में छोटे-छोटे छिद्र (Pores) पाए जाते हैं, जिनसे केन्द्रक व कोशिकाद्रव्य के बीच पदार्थों का परिवहन होता है। ii. केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm ) केन्द्रक में गाड़ा, जैलीनुमा, अर्द्धठोस (Semi-Solid) पदार्थ केन्द्रकद्रव्य कहलाता है। इसमें क्रोमेटिन, केन्द्रिका के अलावा विभिन्न एंज़ाइम पाए जाते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण व अन्य उपापचयी क्रियाओं से संबंधित हैं।

·

iii. क्रोमेटिन ये DNA व प्रोटीन से मिलकर बने तथा इनके बारे में सर्वप्रथम 'फ़्लेमिंग' ने बताया।

जब कोशिका विभाजित होती है तो इन क्रोमेटिन तंतुओं (Fibres) में संघनन (Condensation) की क्रिया होती है तथा ये गुणसूत्रों (Chromosomes) के रूप में दिखाई देते हैं। iv. केन्द्रिका (Nucleolus)

खोज फोण्टाना

झिल्ली रहित संरचना (Membrane-Less )

यह क्रोमेटिन तंतुओं से जुड़ी हुई रहती है।

यह प्रोटीन संश्लेषण व RNA निर्माण से संबंधित हैं।

348:

केन्द्रक के कार्य-

·

उत्कर्ष प्रकाश

यह अन्य कोशिकांगों तथा संपूर्ण कोशिका का नियंत्रण करता है। प्रोटीन संश्लेषण, कोशिका विभाजन (Cell Division) जैसी क्रियाएँ इसी के नियंत्रण में होती है।

आनुवंशिक सूचनाएँ (Genetic Information's) भी केन्द्रक में

होती है।

Note-

-

दोहरी झिल्लीयुक्त संरचनाएँ माइटोकॉण्ड्रिया, लवक, केन्द्रक झिल्ली रहित संरचनाएँ तारककाय, राइबोसोम, केन्द्रिका

एकल झिल्ली युक्त संरचनाएँ

सूक्ष्मकाय (Microbodies)

गुणसूत्र (Chromosomes )

·

·

·

·

·

·

·

·

.

गॉल्जीकाय, E.R., लाइसोसोम,

मनुष्य का शरीर कोशिकाओं (Cells) से मिलकर बना होता है तथा प्रत्येक कोशिका के केंद्र में एक केंद्रक (Nucleus) होता है।

केंद्र में गुणसूत्र विद्यमान होते हैं जिन पर जीन (Genes) उपस्थित होते हैं।

जीन द्वारा ही जीवों में विभिन्न लक्षणों जैसे आँखों का रंग, रक्त समूह तथा लिंग का निर्धारण किया जाता है।

मानव की किसी भी कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं जिनमें एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र होते हैं, जिन्हें 'X' एवं 'Y' गुणसूत्र कहा जाता है। लिंग निर्धारण में इन्हीं गुणसूत्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

लिंग गुणसूत्रों के रूप में महिलाओं में एक जोड़ी XX' गुणसूत्र पाए जाते हैं जबकि पुरुषों में एक 'X' तथा एक 'Y' गुणसूत्र पाया जाता है। गुणसूत्र का विस्तृत अध्ययन स्ट्रॉसबर्गर ने किया।

गुणसूत्र नाम 'वॉल्डेयर' ने दिया।

वंशागति (Inheritance) का गुणसूत्री सिद्धांत वॉल्टर सट्टन एवं थियोडोर बोवेरी ने दिया।

गुणसूत्र (Chromosomes) केवल कोशिका विभाजन के समय दिखाई देते हैं।

यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केन्द्रक में हिस्टोन प्रोटीन के आठ अणु आपस में मिलकर हिस्टोन अष्टक बनाते हैं, जिससे DNA जुड़ा रहता है। [DNA+ हिस्टोन अष्टक न्यूक्लियोसोम

ये न्यूक्लियोसोम क्रोमेटिन धागों पर व्यवस्थित रहते हैं, जब इन धागों में कोशिका विभाजन के समय संघनन (Condensation) होता है तो ये गुणसूत्र के रूप में दिखाई देते हैं।

गुणसूत्र का बाहरी पारदर्शी आवरण पेलिकल

गुणसूत्र में गाढ़ा जैलीनुमा पदार्थ मेट्रिक्स

गुणसूत्रों का अभिरंजन (Staining) करने के लिए 'एसीटोकार्मिन' का प्रयोग करते हैं।

न्यूक्लिक अम्ल -

जीवों (जंतु एवं पौधे) में दो प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल पाए जाते हैं-

(i) DNA

(ii) RNA

(i) DNA (डी ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) -

· 1869 ई. में फ्रेडरिक मिश्वर ने सर्वप्रथम DNA को मवाद कोशिकाओं (Pus Cells) में देखा तथा न्यूक्लिन नाम दिया।

·

DNA मुख्यत: कोशिका के केन्द्रक में पाया जाता है लेकिन माइटोकॉण्ड्रिया व लवक में स्वयं का DNA भी पाया जाता है।

केन्द्रक में उपस्थित मुख्य DNA द्विकुण्डलित, सर्पिलाकार होता है।

लेकिन प्रोकैरियोट्स कोशिका में इस मुख्य DNA के अलावा एक

वृत्ताकार DNA भी पाया जाता है, जिसे 'प्लाज्मिड' कहते हैं।

DNA की रासायनिक संरचना-

DNA न्यूक्लियोटाइड्स का बहुलक है।

विदेशी पूँजी निवेश

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)

लाभांश ब्याज का उद्देश्य

शेयर

ब्रांड ऋण पत्र

लाभ का उद्देश्य Multinational Corporations (MNC)

Note-

शर्करा (Sugar) नाइट्रोजनी क्षार फॉस्फेट समूह न्यूक्लियोटाइड । शर्करा नाइट्रोजनी क्षार न्यूक्लियोसाइड

+

एडीनिन (A) + ग्वानिन (G) प्यूरीन क्षार

थायमिन (T) + सायटोसिन (C) = पिरामिडीन क्षार

DNA की भौतिक संरचना-

·

DNA में दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ी रहती है। वर्ष 1953 में जेम्स वॉटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने DNA की द्विकुण्डलित संरचना का 3-D मॉडल प्रस्तुत किया।

इनके अनुसार DNA में दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से H-बंधों द्वारा आपस में जुड़ी रहती है।

फ्रेन्कलिन एवं विलकिन्सन ने X-Ray क्रिस्टेलोग्राफी की सहायता से DNA की संरचना का अध्ययन किया।

फॉस्फोर्ट

वर्ष 1962 में वॉटसन, क्रिक तथा विलकिन्सन को संयुक्त रूप से DNA की संरचना बताने के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।

दोनों पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं में प्यूरीन एवं पिरॉमिडीन्स (N2- क्षार) आपस में H-बंध बनाते हैं।

शर्मना

DNA की संरचना

एडिनिन-

साइटोसिन -

1000

- क्षार पुष्प

-- भाइमिन

गुन

कोशिकाद्रव्यी DNA तथा प्रोकैरियोटिक DNA में G C क्षार युग्म (Base-Pair) ज्यादा होते हैं अतः इनका गलनांक (Melting Point) ज्यादा होता है।

349

.

.

उत्कर्ष प्रकाशन

DNA विकृतीकरण (Denaturation of DNA) जब तापमान 90°C या इससे अधिक हो तो DNA की दोनों श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से अलग हो जाती है। (H-बंध टूटने से )

पुन: प्राकृतीकरण DNA (DNA Annealing ) पुन: तापमान करने पर ये श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ जाती है।

DNA में न्यूक्लियोटाइड्स एवं क्षारों का क्रम भिन्न-भिन्न होता है। इसी आधार पर सभी मनुष्यों का DNA एक-दूसरे से अलग होता है। (एक समान जुड़वाँ बच्चों को छोड़कर)

DNA के क्षार युग्मों / B.P. में एक निश्चित अंतराल के बाद क्षार-युग्मों के कुछ विशेष भागों की पुनरावृत्ति होती हैं ऐसे पुनरावृत्त (Repeat) होने वाले क्षार-युग्मों को 'VNTR' (Variable Number of Tandem Repeats) कहते हैं, इसी के कारण DNA में बहुरूपता (Polymorphism) पाई जाती है जो कि DNA फिंगर प्रिंटिंग का आधार है।

Note-

·

·

.

DNA सामान्यतया द्विकुण्डलित (Double Helical) संरचना दर्शाता है कई वायरस जैसे फेज़ वायरस, जीवाणुभोजी / बैक्टीरिया वायरस S.S. DNA (एकल तंतु युक्त DNA) पाया जाता है।

DNA क्रियाशीलता RNA की तुलना में कम जबकि स्थायित्व अधिक होता है।

DNA के छोटे-छोटे भाग जो हमारे लक्षणों का निर्धारण करते हैं जीन कहलाते हैं।

(ii) RNA राइबोन्यूक्लिक अम्ल

·

·

·

कुछ वायरस को छोड़कर सभी जीवों (जंतु+पौधे) में RNA पाया जाता है। RNA मुख्यतया कोशिका के कोशिकाद्रव्य में तथा बहुत कम मात्रा में केन्द्रक में भी पाया जाता है।

माइटोकॉण्ड्रिया व लवक (Plastid) में भी RNA पाया जाता है।

RNA का मुख्य कार्य कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) करना है।

RNA का कोशिका में निर्माण किस प्रकार होता है, ये सर्वप्रथम एस. ओकोआ तथा कॉर्नबर्ग ने दर्शाया।

RNA, DNA की तुलना में ज्यादा सक्रिय होता है तथा ये कोशिका में प्रोटीन के अलावा भी अन्य पदार्थों के संश्लेषण में सहायक हैं।

· RNA ऐसे समूह जिनमें एंज़ाइम के समान उत्प्रेरकीय सक्रियता (Catalytic Activity) पाई जाती है, 'राइबोज़ाइम' कहलाते हैं। DNA के विपरीत RNA द्विकुण्डलित संरचना नहीं दर्शाते हैं बल्कि एकल तंतु के रूप में ही पाए जाते हैं।

·

RNA की रासायनिक संरचना -

RNA भी एक पॉलिन्यूक्लियोटाइड अणु है।

शर्करा (Sugar)

राइबोज शर्करा

RNA में न्यूक्लियोटाइड

N2 क्षार (Nitrogenous Bases)

·

1.

·

RNA मुख्यतया दो प्रकार के होते हैं- जेनेटिक RNA

ये RNA वंशानुगति में भी सहायक हैं।

RNA वायरस / रेट्रोवायरस में पाए जाते हैं।

ii. नॉन-जेनेटिक RNA

RNA वायरस के अलावा सभी जीवों में पाए जाते हैं।

यह प्रोटीन संश्लेषण से

संबंधित है। इनके तीन प्रकार हैं-

(a) m-RNA ( मेसेंजर RNA ) संदेशवाहक 5% (b) r-RNA ( राइबोसोमल RNA ) 80% (c) t-RNA (ट्रांसफर RNA ) 10-15%

a.

b.

C.

m-RNA केन्द्रक (Nucleus) से प्रोटीन संश्लेषण की सूचना लेकर कोशिकाद्रव्य में आता है।

r-RNA - कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में राइबोसोम से संबंधित तथा ये प्रोटीन संश्लेषण करवाता है।

tRNA ये प्रोटीन संश्लेषण के अमीनो अम्ल से संबंधित सूचनाओं का स्थानांतरण करता है।

प्रोटीन संश्लेषण का केन्द्रीय सिद्धांत (Central Dogma) प्रोटीन संश्लेषण के केन्द्रीय सिद्धांत (Central Dogma) के बारे में 'फ्रांसिस क्रिक' ने बताया।

.

सेंट्रल डोमा सिद्धांत के अंतर्गत DNA से m- RNA के निर्माण की प्रक्रिया अनुलेखन (Transcription) कहलाती है।

सेंट्रल डोमा सिद्धांत के अंतर्गत m-RNA से प्रोटीन के निर्माण की प्रक्रिया अनुवादन (Translation) कहलाती है।

DNA

अनुलेखन Transcription

→m-RNA

अनुवादन Translation प्रोटीन 'रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन' के बारे में सर्वप्रथम 'टेमिन व बाल्टीमोर' ने बताया।

goo

कोशिका विभाजन

कोशिका विभाजन (Cell Divison) :-

हमारे शरीर में दो प्रकार की कोशिकाएँ पाई जाती हैं- कोशिका के प्रकार

Somatic Cells (कायिक/दैहिक कोशिकाएँ)

सतत रूप से विभाजन

Reproductive Cells (जनन कोशिकाएँ / युग्मक)

विभेदित (Differentiated)

नर (Male)

ЯICT (Female)

फॉस्फेट समूह (PO)

↓ शुक्राणु (Sperm)

अण्डाणु (Egg)

Bone Marrow (अस्थि-मज्जा में

प्यूरीन

एडेनिन (A) ग्वानिन (G)

पिरिमिडीन यूरेसिल (U)

गुणसूत्र (Chromosome) 23

कोशिका चक्र (Cell Cycle ) :-

सायटोसिन (C)

हॉवर्ड एवं पेल्क ने सबसे पहले (कोशिका चक्र) के बारे में बताया।

350

(5 C युक्त / पेण्टोज)

गुणसूत्र (Chromosome) 23

विभाजन की तैयारियाँ

इन्टरफेस

कोशिका चक्र (Cell Cycle)

उत्कर्ष प्रकाश

(ii) मेटाफेज़-

कोशिका विभाजन

Mitosis

G] अवस्था

S-अवस्था

G- अवस्था

केंद्रक विभाजन

कोशिका द्रव्य विभाजन

·

प्रोफेज़ मेटाफेज़ एनाफेज़ टीलाफेज़

कोशिकाओं में सामान्यतया विभाजन अवस्था (M-Phase) के

आधार पर तीन प्रकार के विभाजन देखे जाते हैं-

1.

2.

.

.

(i) प्रोफेज-

असूत्री विभाजन (Amitosis)

इसके बारे में सर्वप्रथम 'रॉबर्ट रेमेक' ने बताया।

ये सबसे सरल कोशिका विभाजन है जिसमें केन्द्रक (Nucleus) तथा कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) दोनों का विभाजन साथ-साथ होता है।

ये विभाजन प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं, भ्रूणीय झिल्लियों में (Embryonic Membranes ) कुछ अल्पविकसित पौधों एवं जंतुओं में होता है।

समसूत्री विभाजन (Mitosis)

बोवेरी एवं फ़्लेमिंग ने इसका अध्ययन किया।

Mitosis शब्द फ़्लेमिंग ने दिया।

समसूत्री विभाजन कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में होता है।

इस विभाजन में कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या (Chromosome) एक समान बनी रहती है।

A.

केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis )

समसूत्री विभाजन (Mitosis) में केन्द्रक विभाजन चार चरणों में पूरा होता है-

ococco

- कोशिका भित्ति

• कोशिका झिल्ली

• कोशिकाद्रव्य

केन्द्रक

केन्द्रकीय झिल्ली

• क्रोमोसोम (गुणसूत्र)

मेटाफेज

कोशिका भित्ति

• कोशिका झिल्ली

• कोशिकाद्रव्य

'मेटाफेज प्लेट

सेन्ट्रोमिअर

तर्क तंतु

• ध्रुव

गुणसूत्र कोशिका के बीच स्थित तथा तर्क तंतुओं (Spindle Fibres) से जुड़े होते हैं। (मेटाफेजिक प्लेट)

गुणसूत्री आकारिकी (Morphology) का अध्ययन इसी अवस्था में किया जाता है।

इस अवस्था में तर्क (Spindle) का निर्माण पूरा हो जाता है, तर्क में 97% प्रोटीन तथा 3% RNA पाया जाता है।

(iii) एनाफेज़-

ऐनाफेज

- कोशिका भित्ति

• कोशिका झिल्ली

• पृथक होते हुए क्रोमोसोम

• तर्क तंतु

ध्रुव

तर्क तंतुओं में संकुचन (Contraction) होने से गुणसूत्रों की भुजाएँ (Chromatids ) एक-दूसरे से अलग होकर ध्रुवों (Poles) पर पहुँचने लगती हैं। (एनाफेज़िक गति)

इस अवस्था में गुणसूत्रों की आकृति का अध्ययन किया जाता है। (iv) टीलोफेज़-

K

• कोशिका भित्ति

• कोशिका झिल्ली

-पुत्री केन्द्रक

प्रोफेज

क्रोमेटिन धागों के संघनन (Condensation) होने से इस अवस्था

के अंत में गुणसूत्र (Chromosome) दिखाई देने लगते हैं।

केन्द्रक झिल्ली, केन्द्रिका विलुप्त / गायब हो जाते हैं।

तर्क निर्माण लगभग पूरा हो जाता है।

टीलोफेज

इसे 'रिवर्स प्रोफेज़' भी कहते हैं।

केन्द्रक आवरण, केन्द्रिका पुनः प्रकट

केन्द्रिका में दो स्पष्ट केन्द्रक दिखते हैं।

गुणसूत्र पुनः विकुण्डलित होकर क्रोमेटिन में परिवर्तित |

351

B.

·

·

·

3.

·

·

·

·

कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis)

उत्कर्ष प्रकाशन

केन्द्रक विभाजन पूरा होने के बाद कोशिकाद्रव्य (Cytokinesis) विभाजन होता है।

जंतु कोशिकाओं में केवल लचीली झिल्ली (Flaxible Membrane) होने से इनमें कोशिकाद्रव्य विभाजन 'खाँच निर्माण' (Furrow Formation) द्वारा होता है जिसमें बाहर से अंदर की ओर खाँच (Furrow) बनने लगती है।

पादप कोशिकाओं (Plants Cells) में Cytokinesis की क्रिया 'कोशिका पट्टी निर्माण' (Cell Plate Formation) द्वारा होता है। इस कोशिका पट्टी का निर्माण केन्द्र से परिधि की ओर गॉल्जीकाय से उत्पन्न फ्रेम्मोप्लास्ट के द्वारा होता है।

अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

इसका अध्ययन 'विनिवार्टर, वॉन बेण्डन, स्ट्रॉसबर्गर तथा फ़्लेमिंग' ने किया।

मियोसिस शब्द 'फॉर्मर एवं मूरे' ने दिया।

मियोसिस के दौरान दो बार विभाजन होता है।

मियोसिस IST के बाद दो नई कोशिकाओं का निर्माण होता है जिनमें आधे गुणसूत्र होते हैं।

मियोसिस IInd के अंत में चार नई कोशिका बनती हैं जिनमें जनक कोशिका की तुलना में आधे गुणसूत्र ही पाए जाते हैं।

Meiosis-I की प्रोफेज (प्रोफेज़ Ist) अर्द्धसूत्री विभाजन की सबसे लंबी अवस्था है।

यह लैंगिक जनन कोशिकाओं में पाया जाता है।

यह विभाजन जनन कोशिकाओं में युग्मक निर्माण के समय देखा जाता है। (शुक्राणु व अण्डाणु के निर्माण हेतु)

इस विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है। इस कारण इसे अर्द्धसूत्रीविभाजन कहते हैं।

विभाजन के द्वारा निर्मित युग्मक आनुवंशिक रूप से भिन्न होते हैं, इसका कारण जीन विनिमय होता हैं।

अर्द्धसूत्री विभाजन का महत्त्व:-

1.

2.

3.

इस विभाजन के कारण ही पीढ़ी दर पीढ़ी जीवों की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या समान बनी रहती है।

इस विभाजन के द्वारा जीवों में नए गुण पैदा होने की संभावना होती है। यह विभाजन जैव विकास में सहायता करता है।

समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) एवं अर्द्धसूत्री विभाजन (मिओसिस)

में अन्तर:-

समसूत्री विभाजन (माइटोसिस)

अर्द्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)

यह शरीर की कायिक कोशिकाओं यह लैंगिक कोशिका में होता है।

में ही होता है।

संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या पैतृक (जनक) कोशिका के समान रहती है।

इसमें संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका से आधी रह जाती है।

गुणसूत्रों के मध्य आनुवंशिक जीन विनिमय की क्रिया होती है। पदार्थों का आदान प्रदान नहीं जिससे संतति कोशिका के गुणसूत्र होता है। नकों के गुणसूत्र से भिन्न होते हैं।

आनुवंशिक विविधता नहीं आती है। संतति में आनुवंशिक विविधता

आती है।

एक जनक से दो संतति एक जनक से चार संतति कोशिकाएँ कोशिकाएँ बनती हैं।

बनती हैं।

रक्त (Blood)

.

रुधिर परिसंचरण तंत्र

यह एक तरल संयोजी ऊतक [Liquid Connective Tissue] है । इसका pH 7.4 (हल्का क्षारीय) होता है। वयस्क मनुष्य में लगभग 5.5 लीटर रक्त की मात्रा होती है।

रुधिर एक विशिष्ट प्रकार का ऊतक है, जिसमें आधात्री (Matrix ), प्लाज्मा (Plasma) तथा अन्य संगठित संरचनाएँ पाई जाती है। LIGHT (Plasma)

.

रक्त

रक्त का तरल भाग या प्लाज्मा में लगभग 92% जल तथा 8% अन्य भाग होता है यह हल्के पीले रंग का होता है। इसमें पोषक पदार्थ (Nutrients), उत्सर्जी पदार्थ (यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रिएटिन), गैसें (CO2 O2), हॉर्मोन्स, एंजाइम तथा रक्त स्कंदन कारक (Blood Clotting Factor) पाए जाते हैं यदि प्लाज्मा स्कंदन कारक को निकाल दिया जाए तो सीरम प्राप्त होता है।

प्लाज्मा में उपस्थित मुख्य प्रोटीन फाइब्रिनोजन, ग्लोब्युलिन तथा एल्बुमिन है। फाइब्रिनाजेन की आवश्यकता रक्त का थक्का बनाने या रक्त स्कंदन में, ग्लोब्युलिन का उपयोग मनुष्य शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र तथा एल्बुमिन का उपयोग परासरणी संतुलन के लिए होता है। कणिकाएँ

रक्त के ठोस भाग (कणिकीय भाग) में लाल रक्त कणिकाएँ [Red Blood Cells], श्वेत रक्त कणिकाएँ (White Blood cells) तथा प्लेटलेट्स (Platelets] उपस्थित होती है।

1. लाल रक्त कणिकाएँ [Red Blood Cells]

.

लाल रक्त कणिकाओं को इरिथ्रोसाइट भी कहते हैं यह वयस्क अवस्था में लाल अस्थिमज्जा में बनती है इनकी औसत आयु 120 दिन होती है तथा इनका विनाश प्लीहा में होता है इसलिए प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं का कब्रिस्तान भी कहते हैं।

यह आकार में द्विअवतलाकार होती है व इसका आकार 7 p होता है।

इसका लाल रंग एक जटिल प्रोटीन हीमोग्लोबिन की उपस्थिति से होता है। हीमोग्लोबिन की श्वसन गैसों के परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

. लाल रक्त कणिका की सामान्य संख्या लगभग 50-55 लाख प्रति घन मिमी. रक्त होती है।

लाल रक्त कणिका की संख्या में असामान्य कमी को एनीमिया कहते हैं जो अत्यधिक रक्तस्रवण, मलेरिया, Vitamin B की कमी या लोहतत्त्व की कमी से हो सकता है।

लाल रक्त कणिका की असामान्य वृद्धि को पॉलिसाइथेमिया कहते हैं यह ऊँचाई वाले स्थानों में जाने पर या अत्यधिक श्रम करने पर भी हो सकता है।

इसमें केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया अन्तः प्रद्रव्यी जालिका, गॉल्जीकाय जैसे कोशिकांग नहीं पाए जाते हैं परन्तु अपवादस्वरूप स्तनधारियों [Mammals] में ऊँट तथा लामा की लाल रक्त कणिका केन्द्रक युक्त होती है।

352

.

उत्कर्ष प्रकाशन

2. श्वेत रक्त कणिकाएँ [White Blood Cells] ल्यूकोसाइट में हीमोग्लोबिन के अभाव के कारण यह रंगहीन होती है इसलिए इसे श्वेत रक्त कणिकाएँ कहते हैं। WBC की असामान्य वृद्धि से ल्यूकोसाइटोसिस या ल्यूकेमिया होता है। यह लक्षण जीवाणु संक्रमण, एलर्जी तथा रक्त कैंसर में होता है।

.

.

.

WBC में असामान्य कमी से ल्यूकोसाइटोपीनिया होता है जिसके लक्षण वायरस संक्रमण व AIDS (Acquired immuno deficiency syndrome) में होते हैं। WBC के उत्पादन को ल्यूकोपोएसिस कहते हैं।

यह कम समय तक जीवित रहती है। इसे दो भागों में विभक्त किया है-

1. कणिकाणु (ग्रेन्यूलोसाइट ) - न्यूट्रोफिल, इओसिनोफिल

व बेसोफिल |

II. अकणिकाणु कोशिका (एप्रेन्यूलोसाइट) लिम्फोसाइट व मोनोसाइट

. इनकी संख्या लाल रक्त कणिकाओं की अपेक्षा कम होती है। एक स्वस्थ मनुष्य में ये कणिकाएँ औसतन 6000-8000 प्रति घन मिमी. होती है।

WBC में न्यूट्रोफिल

संख्या में सबसे अधिक तथा बेसोफिल

संख्या में सबसे कम होते हैं।

3. बिम्बाणु (Platelets ]

. इसे थ्रोम्बोसाइट भी कहते हैं यह अस्थिमज्जा की विशेष कोशिका के टुकड़ों (मैगाकेरियो साइट) के विखण्डन से बनती है। थ्रोम्बोसाइट की संख्या में असामान्य वृद्धि से थ्रोम्बोसाइटोसिस होता है जिससे शरीर में रक्त नलिकाओं में थक्का निर्माण होता है।

.

.

थ्रोम्बोसाइट की संख्या में असामान्य कमी से थ्रोम्बोसाइटोपीनिया होता है यह लक्षण अधिकांशत: डेंगू में दिखाई देता है।

रक्त में इनकी संख्या लगभग 1.5 से 3.5 लाख प्रति घन मिमी. होती है।

प्लेटलेट्स कई प्रकार के पदार्थ स्रावित करता है जिसमें अधिकांश रुधिर स्कंदन में सहायक है। यदि इनकी संख्या में कमी हो जाए तो स्कंदन में विकृति होती है तथा फलस्वरूप शरीर से अधिक रक्त स्राव होता है।

रक्त समूह [Blood Group]

.

.

·

.

रक्त समूह (Blood Group) A, B व O की खोज कार्ल लेण्डस्टीनर नामक वैज्ञानिक ने की थी।

AB रक्त समूह की खोज डी-कॉस्टेलो व स्टल ने की थी।

रक्त समूह 0 सार्वत्रिक दाता (Universal donor) कहलाता है क्योंकि यह रक्त समूह A, B, AB व O सभी को रक्त दे सकता है।

रक्त समूह AB सार्वत्रिकग्राही (Universal Receiver) होता है। क्योंकि यह रक्त समूह A, B, AB व O सभी से रक्त ले सकता है। रक्त समूह का निर्धारण RBC की सतह पर उपस्थित एंटीजन के द्वारा होता है।

यह एंटीजन A और B है जो प्रतिरक्षा (Antibody) अनुक्रिया को प्रेरित करते हैं। इसी प्रकार विभिन्न व्यक्तियों में दो प्रकार के प्राकृतिक प्रतिरक्षी [Natural Antibody] मिलते हैं। प्रतिरक्षी एक प्रोटीन पदार्थ है जो प्रतिजन (Antigen) के विरुद्ध पैदा होते हैं।

रक्त समूह A, B, AB व O में प्रतिजन तथा प्रतिरक्षी निम्नलिखित प्रकार से होते हैं-

रक्त

लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) समूह | में प्रतिजन (Antigen )

A

B

AB

O

A

B

AB

अनुपस्थित

Rh कारक [Rh-Factor]-

.

प्लाज्मा में प्रतिरक्षी (Antibody) एंटी B

एंटी A अनुपस्थित एंटी A, B

Rh एक प्रतिजन (Antigen ) है जो लगभग 80% मनुष्यों में पाया जाता है यह रीसेस बंदर में पाए जाने वाले एंटीजन के समान है। वह व्यक्ति जिसमें Rh उपस्थित हो उसे Rh सहित (Rh) कहते हैं तथा वह व्यक्ति जिसमें Rh अनुपस्थित हो उसे Rh हीन (Rh) कहते हैं। इसकी खोज लेण्डस्टीनर एवं वीनर ने रीसस मकाका बंदर में की थी। रक्तदान के दौरान सामान्यतः रक्त देने वाले (दाता) का एंटीजन तथा रक्तग्राही की एंटीबॉडी की जाँ��� करना आवश्यक होता है क्योंकि यदि एंटीजन (A) व एंटीबॉडी (a) समान नहीं होने चाहिए।

यदि Rh कारक (Rh-Factor ) में Rh एंटीजन उपस्थित हो तो रक्त समूह धनात्मक होता है तथा Rh एंटीजन अनुपस्थित हो तो रक्त समूह ऋणात्मक होता है।

एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस [Erythroblastosis Fetalis] - यह एक विशेष प्रकार की Rh अयोग्यता है जिसमें एक गर्भवती माता (Rh-ve) एवं उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण (Rh+ve) के बीच होती है। भ्रूण का अपरा से अलग रहने के कारण सगर्भता में माता के Rh ve को प्रभावित नहीं करता, परन्तु पहले प्रसव के समय माता के Rh-ve रक्त से शिशु के Rh + ve रक्त के संपर्क में आने की संभावना रहती है। इस कारण माता के रक्त में Rh प्रतिरक्षी (Antibody) बनना शुरू होती है।

यदि परवर्ती गर्भावस्था हो तो रक्त से (Rh ve) भ्रूण के रक्त (Rh+ve) में Rh प्रतिरक्षी का रिसाव हो सकता है जिसके कारण भ्रूण की लाल रक्त कणिकाएँ नष्ट हो जाती है जिससे रक्ताल्पता (खून की कमी) और पीलिया हो सकता है। इसे एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस (गर्भ रक्ताणु कोरकता) कहते हैं।

इस स्थिति से बचने के लिए माता को प्रसव के तुरंत बाद Rh प्रतिरक्षी (Antibody) का उपयोग करना चाहिए।

रक्त स्कंदन

रक्त के किसी चोट की प्रतिक्रिया स्वरूप रक्त स्कंदन (रक्त का जमाव ) होता है। यह रक्त का स्कंदन जो मुख्यतः फाइब्रिन धागे के जाल से बनता है यह फाइब्रिन, रक्त प्लाज्मा में उपस्थित एंजाइम थ्रोम्बिन की सहायता से फाइब्रिनोजन द्वारा बनती है। इस प्रतिक्रिया में कैल्सियम, आयन महत्त्वपूर्ण कारक है यह क्रिया शरीर से बाहर अत्यधिक रक्त को बहने से रोकती है।

लसिका [Lymph]

यह एक रंगहीन द्रव है जिसमें विशिष्ट लिम्फोसाइट मिलते हैं। यह लिंफोसाइट शरीर की प्रतिरक्षा अनुक्रिया में सहायक है।

रक्त जब ऊतक की कोशिकाओं से प्रवाहित होता है, तब बड़े प्रोटीन अणु एवं संगठित पदार्थों को छोड़कर रक्त से जल एवं जल में घुलनशील पदार्थ तरल के रूप में बाहर निकल आते हैं जिसे लसिका या ऊतक द्रव कहते हैं।

लसिका के कार्य

-

लिम्फोसाइट रोगाणुओं का भक्षण करता है जिससे संक्रमण नहीं होता है।

पोषक पदार्थों का परिवहन

353

रुधिर परिसंचरण तंत्र [Blood Circulatory System]

उत्कर्ष प्रकाशन

मनुष्य तथा उच्च जन्तुओं में शरीर के भीतर रुधिर के माध्यम से पदार्थों के परिवहन या परिसंचरण, (Circulation) हेतु एक तंत्र सुविकसित होता है। जिसे रुधिर परिसंचरण कहते हैं।

. इसमें एक केन्द्रीय पम्प अंग हृदय (Heart) उपस्थित होता है और रुधिर वाहिनियाँ जिसके भीतर रुधिर निरंतर प्रवाहित होता रहता है। रुधिर परिसंचरण तंत्र के प्रकार

खुला परिसंचरण तंत्र ( Open Circulatory System) . इस तंत्र में रुधिर कुछ समय के लिए रूधिर नलिकाओं में उपस्थित रहता है और अंत में रुधिर नलिकाओं से खुले स्थान में आ जाता है। इसमें कम दाब व कम गति से बहता है। इसमें परिसंचरण कम समय में पूर्ण हो जाता है।

यह तिलचट्टा, प्रॉन, कीट, मकड़ी आदि में पाया जाता है।

बंद परिसंचरण तंत्र [Closed Circulatory System]

·

इस तंत्र में रुधिर बंद नलिकाओं में बहता है। इसमें रुधिर अधिक दाब एवं अधिक गति से बहता है।

इसमें ऊतक द्रव द्वारा पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।

यह सभी कशेरुकियों (Vertebrate ) में पाया जाता है।

मनुष्य में विकसित बन्द तथा दोहरा परिसंचरण तंत्र पाया जाता है। मनुष्य में रुचिर परिसंचरण तंत्र की खोज विलियम हार्वे ने की थी। मनुष्य का रुधिर परिसंचरण तंत्र दो भागों से निर्मित हैं।

रुधिर दोहरा परिसंचरण तंत्र इस तंत्र में निम्न को सम्मिलित किया जाता है-

1. रुधिर [Blood]

-

यह तरल संयोजी ऊतक (Connective Tissue) है जिसमें रुधिर कणिकाएँ, प्लाज्मा, प्लाज्मा प्रोटीन आदि उपस्थित होते हैं।

2. हृदय एक पेशीय अंग ( A Muscular organ)

.

.

मनुष्य का हृदय लम्बा व शंक्वाकार होता है यह पसलियों के नीचे और दोनों फेफड़ों के मध्य परन्तु थोड़ा बायीं (left) ओर स्थित होता है।

हृदय चार कोष्ठों का बना होता है। इसके ऊपर की ओर बायाँ तथा दायाँ आलिंद (Left & Right Auricle) और नीचे की ओर बायाँ तथा दायाँ निलय (Left and Right Ventricle) होता है।

फुफ्फुस शिराएँ वाय

महाधमनी

शरीर के

- धमनियाँ

ऊपरी भाग से

महाशिरा

अलिंद

शरीर के निचले

भाग से महाशिरा

दाय निलम

विभाजका

मानव हृदय का काट दृश्य

निलय

ऑक्सीजन युक्त रुधिर फुफ्फुस (Pulmonary ) से हृदय में बायीं ओर स्थित कोष्ठ बायाँ आलिन्द व निलय (Left Auricle

में

and Ventricle) में लाया जाता है।

• आलिन्द की अपेक्षा निलय (Ventricle) की पेशीय भित्ति (Muscular wall) मोटी होती है क्योंकि निलय से पूरे शरीर में रुधिर जाता है।

आलिन्द या निलय में संकुचन हो तो वॉल्व उल्टी दिशा में रुधिर प्रवाह को रोकते हैं।

• दोनों आलिन्द (Auricles) के मध्य का एक पट या भित्ति होती है जिसे अन्तः आलिन्दीय (Inter auricular septum) कहते हैं उसी प्रकार दोनों निलय के मध्य पट या भित्ति होती है जिसे अन्तर्निलयी पट (Inter Ventricular Septum) कहते हैं। हृदय की क्रियाविधि [Mechanism of Heart]

.

फुफ्फुस के लिए- फुफ्फुसीय धमनी

फुफ्फुस केशिकाएँ

-फुफ्फुस से फुफ्फुसीय

शिरा

शरीर से महा

के शरीर के अर्थ में केशिकाएँ

-शरीर को महाधमनी

हृदय के संकुचन तथा शिथिलन द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में रुधिर पम्प करता है।

हृदय के बाएँ आलिन्द (Left Auricle) में ऑक्सीजन युक्त रक्त शिराओं (Pulmonary Veins) द्वारा आता है।

दाना आलिन्द सिकुड़ जाते हैं फिर आलिन्द से ऑक्सीजन युक्त रुधिर बाऍ निलय में तथा दाएँ अलिन्द से ऑक्सीजन रहित रुधिर दाएँ निलय में जाता है।

• इसके पश्चात् दोनों निलय में सिकुड़न होती है जिससे रुधिर में दाब पड़ता है तथा आलिन्द व निलय के बीच कपाट (वॉल्व) बन्द हो जाते हैं जिससे रुधिर पुनः आलिन्द में नहीं जा सके।

.

रुधिर पर दाब के कारण निलय (Ventricle) से जुड़ी महाधमनी (Aorta ) का महाधमनी कपाट (Aorta Valve) खुलता है तथा रुधिर महाधमनी में आ जाता है तथा ऐसे धमनियों द्वारा यह शरीर के सभी भागों में पहुँच जाता है।

• दाएँ निलय (Right Ventricle ) के सिकुड़न से रुधिर फुफ्फुसीय धमनियों (Pulmonary Arteries) द्वारा फुफ्फुस में जाता है और कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) को मुक्त कर ऑक्सीजनित होकर पुन: बायी आलिंद में प्रवेश करता है और इसी प्रकार रुधिर हृदय में दो चक्र पूर्ण करता है। अत: इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

3. रुधिर वाहिनियाँ [Blood Vessels ]

1. धमनियाँ [ Arteries] वे वाहिनियाँ जो रुधिर (Blood) को हृदय से शरीर के विभिन्न अंग (Organs) तक ले जाती है।

इसमें शुद्ध या ऑक्सीजनित रुधिर प्रवाहित होता है परन्तु फुफ्फुसीय धमनियों (Pulmonary Arteries) में अशुद्ध रक्त प्रवाहित होता है।

354

उत्कर्ष प्रकाशन

II. शिराएँ [Veins] वे वाहिनियाँ जो रुधिर (Blood) को शरीर के सभी अंगों से एकत्रित करके हृदय में लाती है।

3. मिश्रित ग्रन्थियाँ [ Mixed Glands ] - वे ग्रंथियाँ, जो बहिःस्रावी तथा अन्तःस्रावी (Exocrine and Endorcine) दोनों ही प्रकार की होती है, उन्हें मिश्रित ग्रंथियों कहते हैं। उदाहरण- अग्न्याशय (Pancreas) ग्रंथि, अण्डाशय, वृषण । अन्तःस्रावी तंत्र [Endocrine system]

• इसमें अशुद्ध या ऑक्सीजन रहित रुधिर प्रवाहित होता है। परन्तु फुफ्फुसीय शिराओं में शुद्ध या ऑक्सीजनित रक्त प्रवाहित होता है।

III. केशिकाएँ (Capillaries] - वे वाहिनियाँ जो धमनी और शिरा (Arteries and Vein) को जोड़ने का कार्य करती है। . एक स्वस्थ मनुष्य का हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है परन्तु कड़ी मेहनत के पश्चात् यह 1 मिनट में 180 बार भी धड़क सकता है।

हृदय एक बार में लगभग 70 मिमी. रुधिर पम्प करता है।

हृदय की धड़कन दाहिने आलिन्द में स्थित ऊतकों (Tissue) के समूह से शुरू होती है जिसे शिरा आलिन्द नोड (Sin auricular node) या पेसमेकर (Pacemaker) भी कहते हैं।

• इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी द्वारा हृदय की धड़कन की जाँच की जाती है यह एक ग्राफीय विधि है जिसे ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) कहते हैं।

रुधिर दाब (Blood Pressure)

रुधिर वाहिकाओं की भित्ति के विरुद्ध लगा दाब, रक्त दाब कहलाता है। • प्रकुंचन ( Systole ) निलय के सिकुड़ने पर उसमें भरे रुधिर को महाधमनी ( Aorta ) में पम्प करना, रुधिर का दाब, प्रकुंचन दाब (Systolic pressure) कहलाता है।

• अनुशिथिलन (Diastole ) निलय सकुंचन के पश्चात् आलिंद से रुधिर प्राप्त करते समय रुधिर का दाब, अनुशिथिलन दाब (Diastolic pressure) कहलाता है।

·

सामान्य मनुष्य के रक्त का प्रकुंचन दाब 120 mm तथा अनुशिथिलन दाब लगभग 80mm होता है।

रुधिर दाब को मापने का उपकरण स्फिग्मोमेनोमीटर कहलाता है। लसिका तंत्र [Lymph System]

.

इस तंत्र में लसिका द्रव अन्तर कोशिकीय स्थलों में परिसंचरण करता है। शरीर में लसिका कोशिकाएँ व दो बड़ी लसिकाएँ पाई जाती है।

goo

अन्त: स्रावी तंत्र

कशेरूकी जन्तुओं में तीन प्रकार की ग्रंथियाँ पाई जाती है- 1. बहि: स्रावी ग्रंथियाँ [Exocrine Glands] वे ग्रंथियाँ जिनके

द्वारा स्रावित स्राव को विभिन्न अंगों तक पहुँचाने के लिए नलिकाएँ होती हैं, बहिःस्रावी ग्रंथियाँ कहलाती है। इन्हें नलिकायुक्त ग्रंथियाँ (Duct Glands) भी कहा जाता है। इन ग्रंथियों के स्राव को एन्जाइम कहा जाता है।

उदाहरण लार ग्रंथि अश्रु ग्रंथि, श्लेष्म ग्रंथि, दुग्ध ग्रंथि आदि। 2. अन्त: स्रावी ग्रन्थियाँ [Endocrine Glands] वे ग्रंथियाँ जो नलिका के अभाव में स्राव (हॉर्मोन) को सीधे रुधिर परिसंचरण में स्रावित करती है। इसे नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ (Ductless Glands) भी कहते हैं।

उदाहरण पीयूष ग्रंथि, थाइमस ग्रंथि आदि।

-

हाइपोथेलमस

पिनिय

धाधि

चि

पैराथाइराइड ग्रंथि-

पीयूष ग्रंथ अधिवृक्क

·

·

A.

- अग्न्याशय

अंडाशय

मनुष्य की अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (a) नर, (b) मादा मानव में नलिका -विहीन ग्रंथियाँ (Ductless Glands) सीधा रुधिर वाहिनियों में स्रवण करती है ऐसी ग्रंथियों, अंत: स्रावी ग्रंथियाँ कहलाती है। अन्तःस्रावी ग्रंथियों से स्रावी पदार्थ को हॉर्मोन (Hormone) कहा जाता है।

यह शरीर में रुधिर द्वारा परिवहन करता है।

हॉर्मोन शरीर में होने वाली क्रियाओं (परिसंचरण, पाचन आदि) का संचालन व नियमन करता है।

यह कम मात्रा में स्रावित होते हैं तथा इनका प्रभाव भी मंदगति से होता है। अन्त: स्रावी तंत्र में पाई जाने वाली ग्रंथियाँ (Glands) - पीयूष ग्रंथि [Pitutary galnd]

यह ग्रंथि वृद्धि हॉर्मोन [ Growth Hormone] का स्रवण करती है। इस ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर के कई अंतःस्रावी ग्रंथियों का नियंत्रण करती है। यह सबसे छोटी अन्त: स्रावी ग्रंथि है।

हाइपोथैलेमस ( अध:श्चेतक) पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करता है इस कारण हाइपोथैलेमस को 'मास्टर ऑफ मास्टर ग्रंथि' कहा जाता है। वृद्धि हॉर्मोन असंतुलन से व्यक्ति या तो बहुत लम्बा या तो बौना (Dwarf) हो जाता है।

पीयूष ग्रंथि से स्रावित होने वाले हॉर्मोन-

1. वृद्धि हॉर्मोन या सोमेटोट्रॉपिक हॉर्मोन

2.

[Growth Hormone or Somatotropic] -

यह शरीर की वृद्धि मुख्यतः हड्डियों की वृद्धि का नियंत्रण करता है।

इसकी अधिकता से भीमकायता (Gigantism) अथवा एक्रोमिगेली (Acromegaly) रोग उत्पन्न हो जाते हैं। थायरोट्रॉपिक या थायरॉइड प्रेरक हॉर्मोन [Thyrotropic or thyroid Stimulating Hormone STH)- यह हॉर्मोन थायरॉइड ग्रंथि के कार्यों को प्रभावित करता है।

3. एड्रिनोकॉर्टिको ट्रॉपिक हॉर्मोन [Adrenocortico tropic hormone ACTH] यह हॉर्मोन अधिवृक्क ग्रंथि (Adernal Gland) के कार्टेक्स को प्रेरित करता है।

355

उत्कर्ष प्रकाशन

4. गोनेडोट्रॉपिक हॉर्मोन [Gonadotropic Hormone] - यह हॉर्मोन जनन ग्रंथियों की क्रियाशीलता को प्रभावित करता है। इसके दो प्रकार हैं-

a.

फॉल���कल उत्तेजन हॉर्मोन

[Follicle Stimulating Hormone-FSH]- यह हॉर्मोन पुरुषों में शुक्रजनन तथा स्त्रियों में अण्डाशय से अण्डोत्सर्ग (Ovulation) फॉलिकल की वृद्धि में सहायक है।

b. ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन

[Lutenizing Hormone LH] यह हॉर्मोन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन तथा स्त्रियों में एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्राव को प्रेरित (Stimulate) करता है।

5. दुग्धजनक हॉर्मोन [Lactogenic Hormone-LTH]- इस हॉर्मोन का मुख्य कार्य शिशु के लिए स्तनों में दुग्ध स्राव उत्पन्न करता है। यह कार्पसल्युटियम (Corpus luteum) का स्रावण भी शुरू करता है। मिलेनोसाइट प्रेरक हॉर्मोन [Melanocyte Stimulating Hormone ]- यह हॉर्मोन मनुष्य में चकते पड़ने (Pigmentation) को प्रेरित करता है तथा कई जन्तुओं व पक्षियों में यह मिलेनिन (Melanin) से त्वचा के रंग को प्रभावित करता है।

6.

7. वेसोप्रेसिन हॉर्मोन (Vasopressin Hormone] - यह हॉर्मोन वृक्क (Kidney) की मूत्रवाहिनियों को जल पुनरावशोषण (Reabsorption ) के लिए प्रेरित करता है।

8 ऑक्सीटॉसिन [Oxytocin) या पिटोसिन [Pitocin ] - यह हॉर्मोन गर्भाशय की अरेखित पेशियों में सिकुड़न पैदा करता है जिससे प्रसव पीड़ा (Labour Pain) उत्पन्न होती है तथा बच्चों के जन्म में सहायता करता है यह स्तन से दुग्ध स्राव में सहायक है।

B. अवटु या थायरॉइड ग्रंथि [Thyroid Gland]

·

यह ग्रंथि थायरॉक्सिन हॉर्मोन स्रावित करती है।

.

यह ग्रंथि श्वासनली के अधर पार्श्व तल (Base Side ) पर स्वर यंत्र (Larynx) के समीप स्थित होता है।

थायरॉक्सिन हॉर्मोन शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि का उपापचय (Metabolism) करता है।

थायरॉक्सिन हॉर्मोन के लिए आयोडीन आवश्यक है, आयोडीन की कमी से शरीर में थायरॉक्सिन हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाने के कारण गलगण्ड रोग (Goiter, ग्वॉइटर) हो जाता है।

C. परावटु ग्रंथि (Parathyroid Glands ]

यह मटर आकृति की पालियुक्त ग्रंथि है जो थायरॉइड ग्रंथि के पीछे स्थित रहती है।

इसमें दो हॉर्मोनों का स्राव होता है-

1. पैराथाइरॉइड हॉर्मोन (Parathyroid Hormone]

2. कैल्सिटॉनिन हॉर्मोन [Calcitonin Hormone]

यह दोनों हॉर्मोन रक्त में कैल्सियम और फॉस्फोरस की मात्रा का नियत्रंण करते हैं।

D. पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland]

·

यह मस्तिष्क के एपिथेलेमस भाग से जुड़ी होती है। यह सामान्यतः दो हॉर्मोन स्रावित करती हैं-

356

E.

.

F.

G.

1. मेलाटोनिन [Melatonin] यह हॉर्मोन जैविक सक्रियता से

.

संबंधित है तथा प्रकाश संवेदी हॉर्मोन (Light Sensitive Hormone) भी है।

-

कुछ उभयचर प्राणियों में यह त्वचा के रंग का निर्धारण करता है। 2. सिरेटॉनिन [Serotonin] यह हॉर्मोन मस्तिष्क व अन्य अंगों में न्यूरोट्रांसमीटर (सूचनाओं की गति बढ़ाने वाले पदार्थ) के रूप में कार्य करते हैं।

थाइमस ग्रंथि [Thymus Gland]

यह थाइमोसिन हॉर्मोन स्राव करती है यह ग्रंथि वक्ष में पाई जाती है। इस ग्रंथि से थाइमोसिन हॉर्मोन के अलावा थाइमीन 1 (Thymin 1 ) व थाइमीन- II हॉर्मोन स्रावित होते हैं।

यह हॉर्मोन शरीर में लिंफोसाइट कोशिकाएँ बनाने में सहायक होती है। यह हॉर्मोन लिम्फोसाइट को जीवाणुओं एवं एंटीजन्स को नष्ट करने में प्रेरित करती है, जिससे शरीर में एंटीबॉडी बनती है तथा शरीर का सुरक्षा तंत्र स्थापित होता है।

यह हॉर्मोन प्रतिरक्षा तंत्र को सुविकसित करता है जिससे शरीर रोगाणुओं (Pathogens) से लड़ने में सक्षम होता है।

इस ग्रंथि के अधिक सक्रिय होने से टॉन्सिलाइटिस रोग हो जाता है फलस्वरूप टॉन्सिल बढ़ जाते हैं।

अग्न्याशय (Pancreas ]

यह ग्रंथि इन्सुलिन हॉर्मोन स्रावित करती है।

यह छोटी आँत के अग्र भाग ग्रहणी (Duodenum) के पास स्थित होता है।

ये हॉर्मोन रक्त शर्करा (Blood Sugar) का नियंत्रण करता है। यदि इन्सुलिन हॉर्मोन की मात्रा असंतुलित होती है तो मधुमेह (Diabetes ) नामक रोग हो जाता है।

एड्रीनल ग्रंथि [Adrenal Gland]

यह अधिवृक्क ग्रंथि है जिससे एड्रिनलीन हॉर्मोन स्रावित होता है। यह वृक्क (Kidney) के ऊपर स्थित होता है।

हॉर्मोन का स्रवण रुधिर में होता है जिससे यह लक्ष्य अंग (Organs) तक पहुँचता है जिसके कारण यदि हम संकट में हो तो हृदय धड़कन तेज हो जाती है व शरीर की पेशियों (Muscles) में ऑक्सीजन की पूर्ति होती है।

एड्रीनल मेडुला से दो हॉर्मोन का स्राव होता है-

1. एड्रीनेलीन- यह हॉर्मोन सकंटकालीन परिस्थितियों में उचित कदम उठाने का निर्णय ले सकता है यह हृदय स्पंदन की दर को बढ़ाता है तथा रोंगटे खड़े होने में व आँखों की पुतलियों को फैलाना आदि कार्यों को प्रेरित करता है। इस हॉर्मोन को लड़ो या उड़ो हॉर्मोन कहा जाता है।

2. नॉर एड्रीनेलीन

-

ये समान रूप से हृदय पेशियों की उत्तेजनशीलता एवं संकुचनशीलता को तेज करते हैं।

H. नर जनन ग्रंथि [Male Reproductive Gland]

I.

यह ग्रंथि बालक में यौवनारम्भ (Puberty) के समय टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्रवण करती है जो बालक के किशोरावस्था के लक्षण व जनन अंगों का विकास करते हैं।

मादा जनन ग्रंथि [Female reproductive gland] यह अण्डाशय के उदर गुहा में स्थित होता है। इससे स्रावित हॉर्मोन है- एस्ट्रोजन (Estrogen) - यह एस्टेरॉयड (Steroid) है जो यौवनारंभ के यौन लक्षणों जैसे गर्भाशय ( Uterus), योनि व स्तनों के विकास को प्रेरित करता है।

1.

उत्कर्ष प्रकाशन

2. प्रोजेस्टेरॉन (Progesterone) यह एस्ट्रोजन से सहयोजित होकर स्तन के विकास व दुग्धग्रंथियों को सक्रिय करता है तथा यह गर्भावस्था एवं प्रसव में होने वाले परिवर्तनों से संबंधित होता है।

3. रिलैक्सिन [Relaxin] यह हॉर्मोन बच्चे के जन्म में सहायक है। यह हॉर्मोन प्यूबिक सिम्फाइसिस (Pubic Symphysis) को मुलायम करता है तथा गर्भाशय को सिकुड़ने से रोकता है एवं गर्भाशय ग्रीवा (Uterine cervix) को चौड़ा करता है।

ann

तंत्रिका तंत्र

मानव शरीर में सोचने समझने तथा किसी चीज को याद रखने के साथ शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों में सामंजस्य तथा संतुलन स्थापित करना ही तंत्रिका तंत्र कहलाता है।

तंत्रिका तंत्र कई तंत्रिका कोशिकाएँ (Neurons), मस्तिष्क (Brain, मेरुरज्जु (Spinal Cord), संवेदी अंगों से बना होता है। तंत्रिका तंत्र के कार्य-

1. शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं का संचालन व नियंत्रण करना। 2. सभी मानसिक कार्यों का नियंत्रण करना ।

3. जन्तु को वातावरण के अनुरूप सामान्य स्थिति में रहने का प्रयत्न करना तथा आकस्मिक स्थिति (Accidental Situation) में जैसे कील का चुभना आदि परिस्थितियों में अपनी

गर्म वस्तु को छूना,

प्रतिक्रिया देना।

4. तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय बनाकर शरीर के आन्तरिक पर्यावरण

का नियमन करना।

तंत्रिका कोशिका [Neuron].

-

इस कोशिका के तीन भाग होते हैं-

1. कोशिका काय [Cell Body] तंत्रिका कोशिका में कोशिका द्रव्य भरा होता है तथा केन्द्रक, अन्य कोशिकांग, निस्सल कण पाए जाते हैं।

-

2. तंत्रिकाक्ष [ Axon] कोशिका काय के एक तरफ लम्बी, बेलनाकार संरचना होती है, जिसके अंतिम सिरे पर कई शाखाएँ निकलती हैं। इसके भीतर कोशिका द्रव्य पाया जाता है। तंत्रिकाक्ष पर वसा की परत होती है जिसे माइलिन आच्छाद कहते हैं।

.

यह विद्युतरोधी (Insulator) की तरह कार्य करता है।

-

3. दुमाक्ष [Dendrite] यह तंत्रिकाक्ष के अंतिम सिरे पर सभी दिशाओं में फैले रहते हैं।

जब सूचनाएँ तंत्रिका कोशिका के द्रुमाक्ष के सिरे पर प्राप्त होती है तब रासायनिक क्रिया द्वारा विद्युत आवेग उत्पन्न होता है। यह आवेग द्रुमाक्ष से कोशिका काय तक तथा तंत्रिकाक्ष से अंतिम सिरे तक पहुँचता है।

तंत्रिकाक्ष के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करती है यह रसायन सिनेप्स (रिक्त स्थान) को पार कर अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमाक्ष में विद्युत आवेग प्रारम्भ करती है। यह क्रिया निरन्तर चलती है।

केंद्रक

कोशिका काय

* दुमिका

तंत्रिका का

तंत्रिकाक्ष

अंतिम सिरा

मानव में तंत्रिका तंत्र को तीन भागों में विभक्त किया जाता है- A. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System] तंत्रिका तंत्र का वह भाग है, जिसमें सम्पूर्ण शरीर तथा तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण होता है। इसमें मस्तिष्क व मेरुरज्जु नियंत्रण केंद्र होते हैं।

1. मस्तिष्क [Brain] - शरीर का सबसे कोमल व महत्त्वपूर्ण अंग है। मानव का मस्तिष्क, मस्तिष्क कोष (Cranium) से सुरक्षित रहता है।

इसके चारों और मेनिन्जेज ( Meninges) का एक आवरण पाया जाता है। यह आवरण तीन स्तरों का बना होता है। इस आवरण की बाहरी परत को ड्यूरामेटर (Duramater), मध्य परत को एरेकनॉइड (Arachnoid ) तथा भीतरी परत को पायामेटर (Piamater) कहते हैं।

मेनिन्जेज तथा मस्तिष्क के मध्य सेरीब्रोस्पाइनल द्रव (Cerebrospinal Fluid) भरा होता है, जो मस्तिष्क को नम बनाए रखता है तथा बाहरी चोटों से सुरक्षा करता है।

सामान्य मनुष्य के मस्तिष्क का भार 1350 ग्राम होता है तथा इसका आयतन 1300 cc होता है।

लमस पीयूष ग्रंथि पश्चमस्तिष्क

पॉन्स मेडुला

I.

होता है-

i.

प्रमस्तिष्क

कपाल (खोपड़ी)

-

मध्यमस्तिष्क

अनुमस्तिष्क

मेर

मानव मस्तिष्क

अग्रमस्तिष्क [Forebrain] - यह दो भागों में विभाजित

प्रमस्तिष्क [Cerebrum] यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह बुद्धि व चतुराई का केन्द्र है। इस मस्तिष्क भाग में सोचने, पहचानने, स्मृति, चिंतन, इच्छाशक्ति आदि के क्षेत्र होते हैं, जो इन क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। इसमें गाइरस (Gyrus) एवं सल्कस (Sulcus) जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं।

357

ii.

उत्कर्ष प्रकाशन

यह

डाइएनसेफलॉन [Diencephalan] प्रमस्तिष्क के गोलार्द्ध से ढका रहता है। यह भाग अधिक या कम ताप का आभास तथा दर्द व रोने जैसी क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

II मध्यमस्तिष्क [Midbrain) यह मस्तिष्क के मध्य भाग में स्थित होता है। इसमें सभी अनैच्छिक क्रियाओं (प्रतिवर्ती क्रिया) के केन्द्र पाए जाते हैं। जैसे खाने को देखते ही मुँह में पानी आना आदि। यह दो भागों का बना होता है-

कॉर्पोराक्वाड्रीजेमीन

1.

होते हैं।

इसमें दृष्टि व श्रवण केन्द्र

ii. सेरिब्रल पेडन्कल यह तन्तुओं का बंडल होता है, जो सेरिब्रल कॉर्टेक्स को अन्य भागों से जोड़ता है।

III. पश्चमस्तिष्क [Hind Brain]

भाग है। यह दो भाग से बना है-

i.

यह मस्तिष्क का पिछला

अनुमस्तिष्क [Cerebellum] - इसका मुख्य कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना है। यह मुद्रा (Posture), संतुलन, ऐच्छिक पेशियों का नियंत्रण करता है।

ii. मस्तिष्क स्टेम [Brain Stem ] इसमें उपस्थित पॉन्स वेरोलाई (Pons Varolii) श्वसन को नियंत्रित करता है।

मेडुला ऑब्लांगेटा- यह बेलनाकार रचना जो मेरुरज्जु के रूप में पायी जाती है। इसमें अनेक तंत्रिका केन्द्र होते हैं जो हृदय की धड़कन, रक्तचाप, श्वास गति की दर का नियंत्रण करता है।

शराब का सबसे अधिक असर पश्चमस्तिष्क पर होता है, जिसके कारण शरीर लड़खड़ा के चलता है।

2. मेरुरज्जु [Spinal Cord] यह लम्बा बेलनाकार भाग है, जो मेडुला ऑब्लांगेटा के पिछले भाग में स्थित होता है।

• इसमें 31 जोड़ी तंत्रिकाएँ निकलती है, जिसे मेरु तंत्रिकाएँ कहते हैं।

.

इसका प्रमुख कार्य प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण व समन्वय करना है।

B. परिधीय तंत्रिका तंत्र [Peripheral Nervous System]- केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के विभिन्न भागों से निकलने वाली तंत्रिकाओं को इस तंत्र में शामिल किया जाता हैं।

.

C.

मस्तिष्क से 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ (Skull Neurons) निकलती है, जो आँख, कान, नाक आदि अंगों में जाकर नियमन करती है। स्वायत्त तंत्रिका तंत्र [Autonomic nervous System] यह कुछ मस्तिष्क तथा कुछ मेरुरज्जु तंत्रिकाओं का बना होता है। यह शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय का धड़कना, पाचन आदि का नियंत्रण करता है।

इस तंत्र के दो भाग होते हैं-

1. अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र

प्रतिवर्ती क्रियाएँ [Reflex Actions]-

2. परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र

यह अनैच्छिक क्रियाएँ होती है। इन क्रियाओं का नियंत्रण मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा होता है।

मेरुरज्जु में प्रत्येक मेरु तंत्रिका के दो मूल (Two Roots) होते हैं- 1. पृष्ठ मूल [Dorsal Root)

2.

अधर मूल [Ventrical root)

.

.

.

.

पृष्ठ मूल संवेदी तंत्रिका तंतुओं का बना होता है। अधर मूल चालक तंत्रिका तंतुओं का बना होता है।

पैर की त्वचा पर काँटा चुभने पर संवेदी कोशिकाओं से आवेग के रूप में (संवेदना) पृष्ठ मूल (Dorsal Root) पर पहुँचती है। पृष्ठ मूल से यह संवेदना आवेग मेरुरज्जु के द्रव ( धूसर द्रव) में पहुँचता है। मेरुरज्जु में इस सूचना का विश्लेषण होता है। आवश्यक निर्देश चालक तंतुओं द्वारा अधर मूल (Ventrical root) में जाता है।

यह निर्देश चालक तंत्रिका से संबंधित अंग तक जाता है जिसके परिणामस्वरूप पेशियों (Muscle) को तुरन्त गति देकर वहाँ से हटाती है।

प्रतिवर्ती क्रियाओं की गति तीव्र होती है तथा इन क्रियाओं का नियंत्रण मेरुरज्जु करता है।

इस क्रिया में संवेदी कोशिका से लेकर संबंधित अंग की पेशियों तक की क्रिया को प्रतिवर्ती चाप (Reflex arch) कहते हैं।

मानव श्वसन तंत्र

·

यह मस्तिष्क से प्राप्त संदेशों व निर्देशों को विभिन्न अंगों

तक भेजती हैं।

मस्तिष्क के लिए संदेश

संवेदक को

डाही अमदर्द त्वचा में

प्रेरक का कोशिका

तरका कोशिका

कार्यकदेशी

चित्र- प्रतिवर्ती वाप

कृि

-

नमद्वार

कंड

-

इम

इसी भ्रमनिक कृपिका

उपग्राम

358

- पतियों

श्वसन तंत्र [Respiratory System]

उत्कर्ष प्रकाश

सजीव पोषक तत्त्वों जैसे- ग्लूकोज के लिए ऑक्सीजन (O2) का परोक्ष रूप में उपयोग करते हैं, जिससे विभिन्न क्रियाओं को संपादित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है।

वायुमण्डलीय O2 और कोशिकाओं में उत्पन्न CO2 के आदान-प्रदान (विनिमय) की इस प्रक्रिया को संवातन (Breathing) सामान्यतया श्वसन (Respiration) कहते हैं। विभिन्न जीवों के श्वसन अंग श्वसन अंग

शरीर की सतह

आई क्यूटिकल (त्वचा)

श्वसन नलिकाएँ

गिल्स

फेफड़े

उदाहरण

| स्पंज, सीलेन्टरेट, चपटे कृमि केंचुएं, मेंढक कीट

जलीय आर्थोपोड, मोलस्क, मछली सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी

ग्रसनी / Pharynx भोजन एवं श्वसन पथ का संगम बिंदु है। ग्रसनी के अगले भाग पर लेरिंक्स / Larynx उपस्थित, जिसमें कई उपास्थियाँ एवं स्वर यंत्र पाए जाते हैं, जो ध्वनि उत्पन्न करती है। पक्षियों में ध्वनि उत्पादन सिरिंक्स / Syrinx से होता है। श्वासनली / Trachea में 'C' आकार के उपास्थि से बने वलय / Rings पाए जाते हैं, जो कि इस श्वासनली को पिचकने से बचाते हैं।

श्वासनली फेफड़ों में प्रवेश कर प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक श्वसनी में बँट जाती है।

नोट:- भोजन को निगलते समय elastic उपास्थि से निर्मित epiglottis ट्रेकिया को बंद कर देता है जिस कारण भोजन वायु मार्ग में नहीं आ पाता है।

फेफड़े द्विस्तरीय फुफ्फुसावरण (pleure) से ढके रहते हैं और जिनके बीच फुफ्फुसावरणी द्रव भरा होता है, जो फेफड़े की सतह पर घर्षण कम करता है।

श्वसनलिकाओं/Bronchioles के अंतिम सिरों पर कूपिकाएँ (Alveoli) होती हैं, जो हमारे फेफड़ों (Lungs) की क्रियात्मक व संरचनात्मक इकाई हैं।

नोट:- श्वसनी श्वसनिकाओं और कूपिकाओं का शाखित जाल फेफड़े की रचना करते हैं।

वयस्क मानव में श्वसन की सामान्य दर 12-16 बार / मिनट होती हैं। इन कूपिकाओं की सतह से रक्त के साथ O2 व CO2 का गैसीय विनिमय होता है तथा परिवहन रक्त द्वारा होता है। लगभग 30 करोड़ कूपिकाएँ हमारे फेफड़ों में पाई जाती हैं।

दोनों फेफड़ों में लगभग 300 मिलियन Alveoli उपस्थित होते हैं, जिनका आंतरिक क्षेत्रफल लगभग 100 मीटर होता है। इनकी भित्ति की बाहरी परत पीत तंतुमय संयोजी ऊतक की बनी होती है। श्वसन आयतन और क्षमताओं का मापन स्पाइरोमीटर से करते हैं।

Alveolus

Air In and Out

नासाद्वार नासा कक्षग्रसनी कंठश्वासनाल प्राथमिक श्वसनी → द्वितीयक श्वसनी तृतीयक श्वसनी श्वसनिका कूपिकाएँ

नोट:- ऑक्सीजन (O2) हीमोग्लोबिन से क्रिया करके ऑक्सी- हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है।

O2

Нь हीमोग्लोबिन

HbO 2

यह एक लौहयुक्त प्रोटीन है, जिसका निर्माण लोहयुक्त वर्णक (Pigment) हीम तथा ग्लोबिन (Globin) प्रोटीन के द्वारा होता है। एक स्वस्थ मनुष्य के रक्त में हीमोग्लोबिन (Hb) की औसत मात्रा 15 ग्राम प्रति से 100 मिली. होती है।

हीमोग्लोबिन (Hb) का रंग बैंगनी (Violet) होता है।

श्वसन तन्त्र में वायु का प्रवाह

[Movement of air through respiratory system] नासामार्ग ग्रसनी (गला) कण्ठश्वासनाल श्वसनी वायुकोष्ठक रुधिर केशनलिका

-

ऊतक

श्वसन की क्रिया [Mechanism of Respiration]

श्वसन तीन मुख्य चरणों में होता है श्वास क्रिया, गैसों का विनिमय तथा गैसों का परिवहन।

श्वास क्रिया में O2 का अंतःकरण तथा CO2 का बहिःकरण होता है। गैसीय विनिमय से वायुकोष्ठों विनिमय का प्राथमिक स्थान तथा रुधिर के बीच आंशिक दाब के कारण गैस का आदान-प्रदान होता है।

गैसीय विनिमय के दाब O2 तथा CO2 विभिन्न अवस्थाओं में अपने तय स्थान तक जाती है। O2 3% घुली अवस्था में तथा 97% ऑक्सीहीमोग्लोबिन अवस्था में विभिन्न ऊतकों तक जाती हैं CO2 7% घुली अवस्था से 70% बाइकार्बोनेट तथा 23% कार्बोमिनोहीमोग्लोबिन की अवस्था में फेफड़ों तक जाती है। कोशिकीय श्वसन [ Cellular Respiration]

.

कोशिकीय ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को कोशिकीय श्वसन कहते हैं। इसमें ग्लूकोज का रासायनिक ऑक्सीकरण होता है जिससे ऊर्जा, CO2 जल प्राप्त होते हैं। यह विधि एन्जाइमों, हॉर्मोन्स एवं सहएन्जाइमों आदि द्वारा नियंत्रित अनेक रासायनिक अभिक्रियाओं की एक जटिल श्रृंखला होती है। कोशिका श्वसन

ग्लूकोज (6C) का पाइवेट (3C) में ऑक्सीकरण कोशिका के कोशिकाद्रव्य में होती है।

एसीटाइल CO-A का ऑक्सीकरण

तथा वायवीय प्रक्रिया

कोशिका के माइट्रोकॉण्ड्रिया में होती है।

सह एन्जाइमों व कोशिका रंजकों की

श्रृंखला द्वारा इलेक्ट्रॉन का अंतिम ग्राही तक परिवहन

कोशिका के माइट्रोकॉण्ड्रिया या हरितलवक में होती है।

Blood vessel (capillaries)

श्वसन पथ का मार्ग

359

goo

A.

·

पाचन तंत्र

उत्कर्ष प्रकाश

भोजन में उपस्थित जटिल पोषक पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन) का विभिन्न एन्जाइमों की सहायता से तथा रासायनिक क्रियाओं से छोटे-छोटे घुलनशील अणुओं में निम्नीकरण (degradation) को पाचन (Digestion) कहते हैं।

यकृत

पित्ताशय-

मुख गुहा

.

.

.

मुख

- कर्णपूर्व ग्रंथि -ग्रसनी

अधोजंभ और

अधोजिह्वा ग्रंथियाँ-

- ग्रसिका

आमाशय

इन स्वाद कलियों द्वारा मनुष्य को भोजन के विभिन्न स्वाद का ज्ञान होता है; जैसे खट्टा मीठा आदि।

मुखगुहा के ऊपरी तथा निचले दोनों जबड़ों में 16-16 दाँत एक साँचे में स्थित होते हैं। यह साँचा मसूड़ा कहलाता है।

मसूड़ों तथा दाँतों की इस स्थिति को गर्तदंती (Thecodont) कहते हैं।

मनुष्य में द्विबारदंती दंत (Diphyodont) व्यवस्था पाई जाती है, जिसमें जीवनकाल में दो प्रकार के दाँत अस्थायी (दूध के दाँत) तथा स्थायी दाँत पाए जाते हैं।

यह विषमदन्ती (Heterodont) अर्थात् एक से अधिक प्रकार के दाँत पाए जाते हैं।

दाँत चार प्रकार के होते हैं-

1.

ii.

कृंतक (Incisors) ये सबसे आगे के दाँत होते हैं, जो भोजन को कुतरने तथा काटने का कार्य करते हैं। रदनक (Canines) ये दाँत भोजन को चीरने फाड़ने

का कार्य करते हैं। प्रत्येक जबड़े में 2-2 होते हैं। iii. अग्रचवर्णक (Premolars) ये दाँत भोजन को चबाने का कार्य करते हैं तथा ये प्रत्येक जबड़े में 4-4 पाए जाते हैं।

iv. चवर्णक (Molars)- ये दाँत भी भोजन को चबाने का व पीसने का कार्य करते हैं तथा ये प्रत्येक जबड़े में 6-6 पाए जाते हैं। दंत सूत्र -

-अग्न्याशय

ग्रहणी

अनुप्रस्थ बृहदांत्र

• अग्र क्षुद्रांत्र

आरोही

बृहदांत्र क्षुद्रांत्र

-अवरोही बृहदांत्र

·

अंधनाल

कृमिरूप परिशेषिका

मलाशय

गुदा

मानव पाचन तंत्र

मनुष्य

के पाचन तंत्र को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

A. आहारनाल (Alimentary Canal)

B. पाचन ग्रन्थियाँ (Digestive Glands)

आहारनाल [Alimentary Canal]

यह एक लम्बी, कुण्डलित नलिका होती है, जो मुख (Mouth) से प्रारंभ होकर पश्च भाग में स्थित गुदा द्वारा बाहर की ओर खुलती है। यह 6-9 मीटर तक लम्बी होती है।

आहारनाल के विभिन्न अंग निम्नलिखित हैं- 1. मुखगुहा, 2. ग्रासनली 3. आमाशय, 4. आँत

1.

·

मुखगुहा [Buccal Cavity]

आहारनाल का अग्र भाग मुख से प्रारम्भ होकर दोनों जबड़ों के बीच एक गुहा में खुलता है, जिसे मुखगुहा कहते हैं।

इसके ऊपर कठोर तथा नीचे कोमल तालु पाए जाते हैं। इसमें पेशी निर्मित जिह्वा तथा दाँत होते हैं।

जिह्वा का अगला सिरा स्वतंत्र तथा पिछला सिरा फ्रेनुलम द्वारा जुड़ा रहता है।

जिह्वा के ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे उभार के रूप में पिप्पल (पेपिला) होते हैं, जिसे स्वादकलियाँ (Taste buds) कहते हैं।

360

1=2, C=4, PM = 2,

वयस्क मानव का दंत सूत्र-

2123 8x2 16

=

2123 8

=

16

, M -

32

मनुष्य का प्राथमिक दंत सूत्र-

2102 5 10 Ex2 = =20

2102 5

10

3

लाल

दाँत का अधिकतम भाग डेटांइन (दंतास्थि) से बना होता है

जो हड्डी से अधिक कठोर व पीले रंग का होता है।

दाँत के ऊपरी स्तर पर इनेमल (Enamel) का स्तर पाया जाता है जो दाँत को सुरक्षा प्रदान करता है।

मानव शरीर का कठोरतम भाग इनेमल है।

ग्रसनी [Pharynx] - मुखगुहा का पिछला भाग है। इसमें दो छिद्र होते हैं निगल द्वार जो ग्रासनली में तथा कण्ठद्वार श्वासनली में खुलता है।

कण्ठद्वार से आगे एक छोटी पत्ती जैसी रचना होती है जो भोजन के दौरान कण्ठद्वार को ढक देती है जिससे भोजन श्वासनली में नहीं जाता है। इसे एपिग्लोटिस (Epiglottis) कहा जाता है।

2. ग्रासनली [Oesophagus ]

.

यह एक लम्बी नली होती है जो भोजन को आमाशय में पहुँचाती है।

इसमें किसी प्रकार की पाचन क्रिया नहीं होती है।

ग्रासनली या ग्रसिका का आमाशय में खुलना एक पेशीय अवरोधिनी द्वारा नियंत्रित होता है।

इसकी दीवार पेशीय व सकुंचनशील होती है जो भोजन के पहुँचते ही तरंग की तरह सकुंचन शुरू करती है जिसे क्रमाकुंचन (Peristolsis) कहते हैं जिसकी गति के कारण भोजन आसानी से आमाशय की ओर खिसकता है।

3.

.

.

.

आमाशय [Stomach ]

उत्कर्ष प्रकाश

यह उदरगुहा में बायीं ओर स्थित द्विपालिका थैली जैसी रचना होती है जिसकी लम्बाई 30cm होती है।

इसका अग्र भाग कार्डियक (Cardiac ) व पिछला भाग पाइलोरिक (Pyloric) कहलाता है तथा इनके मध्य का भाग फण्डिक (Fundic) कहलाता है।

इसकी भीतरी दीवार पर कोशिकाओं का स्तर होता है जिसे स्तंभाकार एपिथिलियम (Columnar Epithelium) कहते हैं। यह कोशिकाएँ जठर ग्रंथि का निर्माण करती है जो जठर रस के स्रवण में सहायक है।

जठर ग्रंथि की कोशिकाएँ हैं-

(a) श्लेष्मा कोशिकाएँ [Mucous Cells)

(b) अम्लजन कोशिकाएँ [Oxyntic cells]

(c) जाइमोजन कोशिकाएँ [Zymogen cells]

यह कोशिकाओं के स्राव का संयोजित रूप जठर रस (Gastric Juice) है।

जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) जिसका स्रवण अम्लजन कोशिकाओं से होता है, श्लेष्मा जिसका स्रवण श्लेष्मा कोशिकाओं से होता है तथा निष्क्रिय पेप्सिनोजेन होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन के साथ आने वाले जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा निष्क्रिय पेप्सिनोजन को सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित करता है यह सक्रिय पेप्सिन भोजन में उपस्थित प्रोटीन को पेप्टॉन में परिवर्तित करता है।

आमाशय में भोजन के पाचन के पश्चात् यह भोजन 'काइम' कहलाता है।

'काइम' आमाशय के पाइलोरिक छिद्र द्वारा छोटी आँत में पहुँचाता है।

4.

आँत [Intestine]

मनुष्य की आँत को दो भागों में विभक्त किया गया हैं-

(a) छोटी आँत

a.

.

(b) बड़ी आँत

छोटी आँत (small Intestine)

यह आहारनाल का सबसे लम्बा भाग है जिसकी लम्बाई लगभग 6 मीटर तथा चौड़ाई 2.5 मीटर होती है। यह तीन भागों में विभाजित होती है।

इसका अग्र भाग 'U' आकार की तरह मुड़ा होता है जिसे ग्रहणी कहते हैं। मध्य भाग जेजूनम (Jejunum) जिसकी लम्बाई 2.4 मीटर होती है तथा पश्च भाग इलियम 3.6 मीटर लम्बा होता है। इलियम की दीवार के भीतर आंत्र रंसाकुर पाए जाते हैं जो आँत की अवशोषण सतह को बढ़ाते हैं।

पित्त वाहिनी (Bile duct) तथा अग्न्याशय वाहिनी (Pancreatic duct) संयोजित होकर एक सामान्य वाहिनी (Common duct) बनाती है। यह सामान्य वाहिनी ग्रहणी से छोटी आँत के पीछे की ओर बड़ी आँत में खुलती है।

छोटी आँत भोजन का पाचन पूर्ण करती है तथा पचे हुए भोजन का अवशोषण करती है।

b. बड़ी आँत (large Intestine)

बड़ी आँत को दो भाग में विभक्त किया गया है-

(i) कॉलोन (Colon)

(ii) मलाशय (Rectum)

छोटी आँत व बड़ी आँत के मध्य एक छोटी-सी नली होती है जिसे सीकम (Cecum) कहते हैं।

B.

1.

.

.

.

.

अपेन्डिक्स सीकम के शीर्ष पर अंगुली जैसे संरचना होती है। इसका आहारनाल में कोई कार्य नहीं होता है यह एक अवशेषी अंग है।

कॉलोन तीन भागों में विभक्त है।

-

उपरिगामी कोलोन (Ascending colon), अनुप्रस्थ कोलोन (Transverse colon) तथा अधोगामी कोलोन (Descending colon ) । इलियम व कोलोन के जोड़ पर इलियोसीकल वॉल्व पाया जाता

है जो भोजन को फिर से छोटी आँत में जाने से रोकता है।

अधोगामी कोलोन मलाशय (Rectum) से होते हुए अंत में मलद्वार

(Anus) के द्वारा शरीर के बाहर खुलता है।

कॉलोन में जल, लवण तथा विटामिन्स का अवशोषण होता है। तथा मल का निर्माण होता है।

पाचक ग्रंथियाँ [Digestive Glands ]

वे ग्रन्थियाँ जो आहारनाल में भोजन के पाचन में सहायक हो पाचक ग्रंथियाँ कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है-

आन्तरिक पाचक ग्रन्थियाँ [ Internal Digestive Glands ] यह आहारनाल की दीवार में उपस्थित ग्रंथियाँ होती है।

जैसे- श्लेष्म ग्रन्थियाँ, जठर ग्रंथियाँ, आँत दीवार में उपस्थित ब्रूनर्स ग्रंथियाँ हैं।

2. बाह्य पाचक ग्रन्थियाँ (External Digestive Glands ] यह आहार नाल के अलावा शरीर के अन्य भागों में पाई जाने वाली ग्रन्थियाँ है ।

मानव में तीन बाह्य पाचक ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं-

a.

लार ग्रन्थियाँ [Salivary Glands] इसमें तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ पाई जाती है-

-

i. अधोजिह्वा ग्रन्थि (sublingual Gland) जिह्वा के दोनों ओर एक -एक संख्या में उपस्थित होती है। ii. अधोजंभ ग्रन्थि (Submaxillary Gland) यह निचले जबड़े के मध्य में मैक्सिला अस्थि के दोनों ओर एक- एक की संख्या में उपस्थित होती है।

-

iii. कर्णपूर्व ग्रन्थि (Parotid Gland) यह कानों के नीचे एक-एक की संख्या में उपस्थित होती है।

-

इन ग्रन्थियों से लार मुखगुहा में पहुँचती है।

लार में लगभग 99% जल तथा शेष 1% एंजाइम होता है। लार में दो एंजाइम पाए जाते हैं- टायलिन (लार एमाइलेज )

व लाइसोजाइम यह पाचन में सहायता करते हैं।

लार का pH मान 6.36.8 होता है।

b. यकृत [Liver ]

·

.

यह उदरगुहा के ऊपरी भाग में दायीं ओर स्थित होता है जिसका वजन 1.2 से 1.5 किग्रा के बीच होता है यह गहरे धूसर रंग का होता है।

यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है।

यकृत के निचले भाग में नाशपत्ती के आकार की छोटी-सी थैली

होती है जिसे पित्ताशय कहते हैं।

यकृत में पित्त का स्रावण होता है जो पित्ताशय में संचित हो जाता है।

यकृत के कार्य

-

1. कार्बोहाइड्रेट उपापचय में ग्लाइकोजन का निर्माण व संचय

2.

361

करना।

भोजन में वसा की कमी होने पर कार्बोहाइड्रेड को वसा में परिवर्तित करना।

उत्कर्ष प्रकाशन

3.

4.

यह प्रोटीन उपापचय (Protein Metabolism) में सहायक होता है तथा शरीर में प्रोटीन विघटन (Protein Decomposition) द्वारा अन्य वस्तुओं के साथ जल, CO2 और अन्य नाइट्रोजनीय पदार्थ जैसे अमोनिया, यूरिक अम्ल, यूरिया आदि उत्पन्न होता है।

यह विषैले पदार्थों को अविषैले पदार्थों में परिवर्तित कर प्रभावहीन कर देता है जो मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

पित्त [Bile]

C.

.

यह पीले रंग का क्षारीय द्रव है जिसका pH मान 7.7 होता है। पित्त में 85% जल, 12% पित्त वर्णक, 0.7% पित्त लवण, 0.28% कोलेस्ट्रॉल, 0.3% मध्यम वसाएँ तथा 0.15% लेसिथिन होता है तथा इसमें एंजाइम पाया जाता है।

मनुष्य में प्रतिदिन 500-1000 मिली लीटर पित्त बनता है। पित्त के कार्य

1.

2.

3.

4.

काइम की वसा को जल द्वारा इमल्शन बनाने में सहायक। भोजन के साथ आए हानिकारक जीवाणु को नष्ट करना। यह विटामिन K तथा वसाओं में अन्य विटामिनों के अवशोषण (Absorption) में सहायक है।

अनेक उत्सर्जी व विषैले पदार्थों तथा धातुओं का उत्सर्जन

करना।

5. वसा के अवशोषण में सहायक।

अग्न्याशय [Pancreas]

यह मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है जो अंत: स्रावी और बहिःस्रावी दोनों प्रकार की ग्रंथि है।

यह छोटी आँत के ग्रहणी भाग में उपस्थित होती है।

अनेक नलिकाएँ संयोजित होकर अग्न्याशय वाहिनी बनाती है यह मूल पित्तवाहिनी से मिलकर एक बड़ी नलिका बनाते हैं। यह नलिका एक छिद्र से ग्रहणी में खुलती है।

अग्न्याशय रस (Pancreatic juice)- यह अग्न्याशयी कोशिकाओं से स्रावित होता है इसमें तीनों प्रकार के भोज्य पदार्थों को पचाने के एन्जाइम होते हैं इसलिए इसे पूर्ण पाचक रस कहते हैं।

-

इसमें पाँच एंजाइम ट्रिप्सिन (प्रोटीन का पाचन), माल्टोज व एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट का पाचन), लाइपेज (वसा का पाचन) व कार्बोक्सिपेप्टिडेस पाए जाते हैं।

यह क्षारीय द्रव होता है जिसमें 98% जल तथा शेष 2%

भाग में लवण व एंजाइम होते हैं। इसका pH मान 7.5- 8.3 होता है।

अग्न्याशय के एक भाग लेंगरहेन्स की द्वीपिकाएँ के 3- कोशिका से इन्सुलिन, a कोशिका से ग्लूकेगॉन, तथा y - कोशिका से सोमेटोस्टेटिन हॉर्मोन स्रावित होता है। 1. इन्सुलिन (Insuline)

यह अग्न्याशय के एक भाग लैंगरहेन्स की द्वीपिका के 3 कोशिका द्वारा स्रावित होता है।

इंसुलिन ग्लूकोज से ग्लाइकोजन बनने की क्रिया का नियंत्रण करता है। यदि इंसुलिन का अल्प स्रवण हो तो मधुमेह नामक रोग हो जाता है तथा इंसुलिन के अतिस्रवण से हाइपोग्लाइसीमिया नामक रोग हो जाता है जिसके कारण जनन क्षमता तथा दृष्टि ज्ञान कम हो जाता है। 2. ग्लूकेगॉन [Glucagon]

यह ग्लाइकोजन को पुनः ग्लूकोज में परिवर्तित करता है। 3. सोमेटोस्टेटिन [Somatostatin ]

यह एक पॉलीपेप्टाइड हॉर्मोन है जो भोजन के स्वांगीकरण (Assimilation) की अवधि को बढ़ाता है।

मानव में पाचन क्रिया

.

भोजन का पाचन मुख से प्रारम्भ होकर छोटी आँत तक होता है। भोजन के अन्तर्ग्रहण के बाद उसे दाँतों के द्वारा अच्छी तरह पीसा व चबाकर लार ग्रंथि से स्रावित लार की मदद से महीन कणों में विभक्त किया जाता है।

लार में उपस्थित एंजाइम के कार्य टायलिन भोजन में उपस्थित मंड (स्टार्च) को माल्टोज शर्करा में अपघटित करता है वही माल्टोज शर्करा माल्टेज एंजाइम द्वारा ग्लूकोज में परिवर्तित होता है।

लाइसोजाइम एंजाइम हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने का काम करता है।

भोजन जिह्वा से ग्रसिका द्वारा फिर आमाशय में पहुँच जाता है। आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल टायलिन को निष्क्रिय (Inactive) तथा भोजन को अम्लीय बना देता है। जठर रस से मिलकर भोजन अर्द्धतरल लुगदी में परिवर्तित हो जाता है। जठर रस में उपस्थित एंजाइम है-

2.

1. पेप्सिन :- भोजन में उपस्थित प्रोटीन को पेप्टोन में बदलता है। रेनिन - दूध में उपस्थित प्रोटीन केसीन को कैल्सियम पैराकैसिनेट में परिवर्तित करता है अर्थात् दूध को दही में बदल देता है।

3. म्यूसिन: जठर रस के अम्लीय प्रभाव को कम करता है जिससे इसका प्रभाव आहारनाल पर नहीं पड़ता है। आमाशय के पश्चात् भोजन 'काइम' (chyme) कहलाता है। यह काइम ग्रहणी में पहुँचकर यकृत से स्रावित पित्त रस से मिलता है जो काइम की चर्बी (वसा) को जल द्वारा इमल्शन बनाने में सहायता करता है।

अग्न्याशयी रस भी काइम में मिलता है। इसमें उपस्थित एंजाइमों की क्रिया काइम पर होने से यह तरल हो जाता है फिर यह आँत के इलियम भाग में पहुँचता है। यहाँ काइम की आंत्ररस से क्रिया होती है।

आंत्ररस यह क्षारीय द्रव है जिसका pH मान 8 होता है। यह स्वस्थ्य मनुष्य में प्रतिदिन 2 लीटर स्रावित होता है। आंत्ररस में उपस्थित एंजाइम व उनके कार्य हैं-

2. माल्टेस

1. इरेप्सिन प्रोटीन एवं पेप्टोन का एमीनो अम्ल में परिवर्तन । माल्टोज का ग्लूकोज शर्करा में परिवर्तन | सुक्रोज का ग्लूकोज व फ्रक्टोज में परिवर्तन ।

3. सुक्रेस

4. लेक्टेस लेक्टोज का ग्लूकोज व ग्लेक्टोज में परिवर्तन ।

-

5. लाइपेज - इमल्सीकृत वसाओं का ग्लिसरीन व फैटी एसिड में परिवर्तन |

वर्ष 1921 में फ्रेडेरिक बैटिंग एवं चार्ल्स बेस्ट ने इंसुलिन अवशोषण [ Absorption] की खोज की।

छोटी आँत में ही काइम के अवशोषण की मुख्य क्रिया होती है।

362

उत्कर्ष प्रकाशन

छोटी आँत तक भोजन का पूर्ण पाचन हो जाता है और वह इस रूप में परिवर्तित हो जाता है कि आहारनाल की दीवार आसानी से अवशोषण कर सकती है। यह बिना पचा काइम छोटी आँत से बड़ी आँत में पहुँचता है जो काइम से जल का अवशोषण कर लेती है। बचा हुआ काइम मल के रूप में मलाशय में एकत्रित होकर शरीर से गुदा द्वारा त्याग दिया जाता है।

goo

उत्सर्जन तंत्र

उत्सर्जन के आधार पर मनुष्य यूरियोटेलिक है अर्थात् मनुष्य का मुख्य

उत्सर्जी पदार्थ पूरिया है।

मनुष्य में मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क है।

यकृत, फेफड़े, त्वचा, आँतें आदि अन्य उत्सर्जी अंग हैं।

मनुष्य के उत्सर्जन तंत्र में मुख्यतः निम्नलिखित अंग होते हैं-

वृक्क सेम के बीज के समान होते हैं।

III. मूत्र (Urine) :-

·

.

स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 1.5 लीटर मूत्र उत्सर्जित करता है। मूत्र की मात्रा पर नियंत्रण पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित ADH तथा एड्रीनल द्वारा स्रावित एल्डेस्टेरोन हार्मोन द्वारा किया जाता है। यूरोक्रोम वर्णक के कारण मूत्र का रंग हल्का पीला होता है, जो RBC के विघटन से बनता है।

मानव मूत्र का pH लगभग 6 होता है अर्थात् यह हल्का अम्लीय प्रकृति का होता है।

मानव मूत्र में यूरिया की मात्रा लगभग 2-2.5 % होती है।

अन्य घटकों में प्रोटीन, य���रिक अम्ल आदि 13% होते हैं। व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 25-30 ग्राम यूरिया का उत्सर्जन करता है। यूरीनॉइड्स के कारण मूत्र में प्राकृतिक गंध / हल्की गंध होती है।

मूत्र संबंधी विकार:-

I.

वृक्क (Kidney):-

·

वृक्क उदरगुहा में डायफ्रॉम के नीचे मेरुदण्ड के दोनों ओर स्थित

होते हैं।

प्रत्येक वृक्क की लम्बाई लगभग 10-12 सेमी. चौड़ाई लगभग

5-7 सेमी. जबकि मोटाई लगभग 2-3 सेमी. होती है।

वृक्क का रंग भूरा-पीला होता है।

प्रत्येक वृक्क का वज़न लगभग 140-150 ग्राम होता है।

मनुष्य के शरीर में वृक्क 1 जोड़ी होते हैं। 'के'

वृक्क का बाहरी आवरण 'पेरिटोनियम' कहलाता है।

वृक्क में पाई जाने वाली खाँच 'हाइलम' कहलाती है, जहाँ से मूत्रवाहिनियाँ, तंत्रिकाएँ, धमनियाँ, शिराएँ आदि वृक्क में प्रवेश करती हैं।

मूत्रवाहिनी का वह भाग जो वृक्क के हाइलम से जुड़ा रहता है, कीप की आकृति का होता है, जिसे 'मूत्रवाहिनी की श्रोणि (Pelvis of Urethra) कहा जाता है।

वृक्क का बाहरी भाग कॉर्टेक्स (Cortex) जबकि भीतरी भाग मैड्यूला (Medulla) / मध्यांश होता है। वृक्क के कार्य-

i.

वृक्क, रक्त का शुद्धीकरण करती है।

ii. वृक्क को शरीर का मुख्य उत्सर्जी अंग माना गया है क्योंकि शरीर के तरल उत्सर्जी पदार्थों का लगभग 70-80% उत्सर्जन केवल वृक्कों द्वारा किया जाता है।

iii. वृक्क को रक्त के रासायनिक संघटन का नियंत्रणकर्ता भी माना गया है।

II. मूत्रवाहिनी (Urethra) :-

प्रत्येक वृक्क से एक मूत्रवाहिनी निकलती है, जिसके द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को वृक्क से मूत्राशय तक पहुँचाया जाता है। प्रत्येक मूत्रवाहिनी की लम्बाई लगभग 25-30 सेमी. होती है। · मूत्राशय एक थैलीनुमा संरचना होती है, जहाँ अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा किया जाता है।

मूत्राशय में लगभग 700-800 ml तरल अपशिष्ट पदार्थों का संग्रहण किया जाता है।

मूत्राशय से अपशिष्ट पदार्थों को मूत्रद्वार ( Urethra) के माध्यम से शरीर से बाहर उत्सर्जित किया जाता है।

.

·

-

हीमेटयूरिया मूत्र के साथ रक्त का आना।

एनयूरिया मूत्र का उत्पादन लगभग बंद हो जाना।

-

ओलिगोयूरिया मूत्र की मात्रा का सामान्य से कम हो जाना।

प्रोटीन यूरिया मूत्र में प्रोटीन की मात्रा का बढ़ जाना।

-

डिसयूरिया दर्दयुक्त मूत्र का उत्सर्जन अर्थात् मूत्र उत्सर्जन के समय जलन / दर्द होना है।

ग्लाईकायूरिया मूत्र में शर्करा की मात्रा बढ़ जाना। पॉलियूरिया -

- बार-बार मूत्र लगना (डायबिटीज इनसिपीड्स), इस विकार में मूत्र की मात्रा सामान्य से कई गुना बढ़ जाती है। डाईयूरेसिस मूत्र की मात्रा बढ़ जाना।

-

कीटोनयूरिया मूत्र में कीटोन बॉडी का उत्सर्जन होना। वृक्क की क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन कहलाती है।

नेफ्रॉन का अग्र भाग प्यालेनुमा होता है, जिसे 'बॉमन-सम्पुट' (बॉमन- कैप्सूल) कहा जाता है।

अभिवाही धमनिका अपेक्षाकृत चौड़ी होती है जबकि अपवाही धमनिका अपेक्षाकृत पतली होती है।

बॉमन सम्पुट में अभिवाही धमनिका का गुच्छा पाया जाता है, जिसे ग्लोमेरूलस कहा जाता है।

ग्लोमेरूलस में लगने वाला दाब 'ग्लोमेरूलस हाइड्रोलिक दाब' (GHP) कहलाता है, जिसका मान 60-70 mmHg होता है।

बोमन सम्पुट एवं ग्लोमेरूलस को संयुक्त रूप से 'मेल्पीधी-संरचना' कहा जाता है।

GHP के रक्त के शुद्धीकरण को परानिस्यंदन कहा जाता है। Note-

शरीर से बाहर मशीनों की सहायता से रक्त का शुद्धीकरण 'डायलाइसिस' कहलाता है।

डायलाइसिस का संबंध वृक्क से है।

वृक्क प्रति मिनट लगभग 1000-1200 ml रक्त का शुद्धीकरण करते हैं जो हृदय द्वारा 1 मिनट में पम्प किए गए रक्त का लगभग भाग होता है।

5

अपवाही धमनियों में शुद्ध रक्त आ जाता है।

हेनले लूप का आकार अंग्रेजी के अक्षर 'U' के समान होता है, जो मूत्र

में पानी की अतिरिक्त मात्रा का अवशोषण करता है।

मूत्र संग्राहक नलिका अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र वाहिनी में छोड़ती है।

363

उत्कर्ष प्रकाशन

व्यक्ति यदि लम्बे समय तक भूखा रहता है, तो वृक्क का कार्य बढ़ जाता है।

Note -

नेफ्राइटिस (वृक्कशोध) नेफ्रॉन में होने वाला संक्रमण है। अमीबा, हाइड्रा आदि में कोई उत्सर्जी अंग नहीं होता है। इनमें विसरण (Diffusion) द्वारा उत्सर्जन की क्रिया होती है।

OOO

कंकाल तंत्र

ऑस्टियोलॉजी में हड्डियों का अध्ययन किया जाता है।

हड्डियाँ कंकाल संयोजी ऊतक (Skeleton Connective Tissue) है। हड्डियाँ मुख्यतः कैल्सियम एवं फॉस्फोरस की बनी होती हैं।

हड्डियों की वृद्धि एवं विकास हेतु विटामिन D (कैल्सिफेरॉल) आवश्यक होता है।

वयस्क में 206 हड्डियाँ होती हैं।

क्लेविकल हड्डी (कॉलर-बॉन) को सुन्दरता की हड्डी कहा जाता है।

-

शरीर की सबसे लम्बी हड्डी शरीर की सबसे छोटी हड्डी शरीर की सबसे मजबूत हड्डी

फीमर (जाँघ ) स्टेपीज (कान)

मैण्डीबल ( निचले जबड़े में)

-

सर्वाधिक वज़न सहन करने वाली हड्डी टीबिया

मायोलॉजी में मांसपेशियों का अध्ययन किया जाता है।

शरीर में 639 मांसपेशियाँ होती हैं।

मायोग्लोबिन के कारण मांसपेशियों का रंग लाल होता है। सबसे बड़ी मांसपेशी - ग्लूटियस मैक्सीमस

मांसपेशियों में एक्टिन एवं मायोसीन नामक प्रोटीन पाए जाते हैं। शरीर की सबसे लम्बी मांसपेशी सार्टोरियस (जाँघ

शरीर की सबसे छोटी मांसपेशी

स्टेपेडियस (कान)

शरीर की सबसे मजबूत मांसपेशीमैसेटर (जबड़े) आँखों की मांसपेशियाँ सबसे सक्रिय मांसपेशियाँ हैं। हृदय की मांसपेशियाँ सबसे व्यस्त मांसपेशियाँ हैं।

अस्थिमज्जा (Bone Marrow)-

)

बड़ी एवं लम्बी हड्डियों में पाई जाने वाली गुहा (Cavity), अस्थि गुहा (Bone Cavity) कहलाती है तथा अस्थिगुहा में पाया जाने वाला अर्द्धतरल पदार्थ अस्थि मज्जा कहलाता है।

अस्थिमज्जा मुख्यत: दो प्रकार का होता है-

I.

·

लाल अस्थि मज्जा (Red Bone Marrow) -

लाल अस्थिमज्जा बड़ी हड्डियों के किनारों वाले भागों में पाया जाता है, जहाँ मुख्यत: RBC, बिम्बाणुओं आदि का निर्माण

होता है।

II. पीला अस्थिमज्जा (Yellow-Bone Marrow) -

· यह बड़ी हड्डियों के बीच में पाया जाता है, जहाँ मुख्यत: WBC बनती है।

हड्डियों से संबंधित रोग -

i.

·

गठिया (Gout).

इसमें हड्डियों के जोड़ों में सूजन आ जाती है तथा दर्द होता है।

रक्त में यूरिक अम्ल की मात्रा बढ़ने से गठिया होता है।

गठिया रोग को 'अमीरों का रोग कहा जाता है।

364

ii. फ्लोरोसिस -

भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से यह रोग हो जाता है। तथा ऐसे जल का सेवन करने से दाँत एवं हड्डियाँ प्रभावित हो जाती हैं। दाँतों पर भूरे-पीले रंग के धब्बे बन जाते हैं तथा रीढ़ की हड्डी कमजोर होकर झुकने लग जाती है।

iii. ऑस्टियो-ऑर्थराइटिस-

हड्डियों के जोड़ों में दर्द होता है एवं सूजन आ जाती है, जिससे चलना- फिरना भी मुश्किल हो जाता है।

iv. रिकेट्स (Rickets) / सूखा रोग -

V.

.

बच्चों में विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर होकर मुड़ने लग जाती हैं।

ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalasia) -

वयस्क में विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर होकर मुड़ने लग जाती हैं।

vi. ऑस्टियोमाइलाइटिस-

.

यह दर्द युक्त हड्डियों का संक्रमण है।

vii. ऑस्टियोपोरोसिस -

इसमें हड्डियाँ छिद्रित होकर मुड़ने लग जाती हैं।

viii. प्राथमिक आस्टियोपोरोसिस -

ये दो प्रकार का होता है-

a. स्टेप-I ऑस्टियोपोरोसिस -

यह मुख्यतः महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद होता है तथा महिलाओं में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी या कैल्सियम की कमी को दर्शाता है।

b. स्टेप-II ऑस्टियोपोरोसिस -

· यह 75 वर्ष की आयु से अधिक पुरुषों एवं महिलाओं में होता है। ix. द्वितीय ऑस्टियोपोरोसिस -

यह किसी भी उम्र के पुरुषों एवं महिलाओं में कैल्सियम की कमी से हो सकता है।

हड्डियों की संधियाँ -

चल / पूर्ण संधि-

· ये संधियाँ उन हड्डियों में पाई जाती हैं, जिनमें गति होती है।

चल / पूर्ण संधियाँ-

I.

कन्दूक खल्लिका संधि (बॉल एण्ड सॉकेट) -

इस प्रकार की संधि में हड्डियाँ इस प्रकार जुड़ी रहती हैं कि उन्हें सभी दिशाओं में आसानी से घुमाया जा सकता है।

II.

जैसे कंधे, कूल्हे आदि में यह संधि पाई जाती है।

सैंडिल संधि-

यह संधि बॉल एण्ड सॉकेट संधि का ही छोटा रूप होती है, जो मुख्यतः अंगूठे में पाई जाती है।

III. हिंज / कब्जा संधि-

.

यह संधि खिड़की या दरवाजों में लगे कब्जों की तरह होती है, जिससे अंगों को केवल एक ही दिशा में घुमाया जा सकता है।

जैसे - कोहनी, घुटने, अँगुलियों के पोरों में संधि पाई जाती है। IV. विसर्पी / ग्लाइडिंग संधि-

इस प्रकार की संधि में हड्डियाँ एक-दूसरे पर फिसलते हुए गति करती हैं। जैसे कलाई में यह संधि होती हैं।

i.

कंकाल तंत्र को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

अक्षीय कंकाल -

अक्षीय कंकाल में कुल 80 हड्डियाँ होती हैं। अक्षीय कंकाल

खोपड़ी कशेरूक दण्ड उरोस्थि

पसलियाँ

(29 हड्डियाँ) (26 हड्डियाँ)

(1 हड्डी)

(24 हड्डियाँ)

12 जोड़ी

जन्म के समय

(33 हड्डियाँ)

कशेरुक दण्ड में जन्म के समय 33 हड्डियाँ होती हैं।

उत्कर्ष प्रकाश

प्रथम कशेरुक को एटलस कहा जाता है, जिससे सिर जुड़ा रहता है।

ii. उपांगीय कंकाल

उपांगीय कंकाल में कुल 126 हड्डियाँ होती हैं।

उपगीय

अंश मेखला श्रोणि मेखला अग्रपाद पक्ष पाद

(4 हड्डियाँ) (2 हड्डियाँ) (60 हड्डियाँ) (60 हड्डियाँ)

स्केपुला क्लेविकल सक्रम कोकिक्स

(2) (2) (1) (1)

दोनों वृषणों में 1-3 नलिकाएँ पाई जाती हैं, उन्हें शुक्र जनन नलिकाएँ कहते हैं। इन नलिकाओं में निम्नलिखित कोशिकाएँ पाई जाती हैं- (i) नर जर्म कोशिकाये शुक्राणुओं का निर्माण करती है। (ii) सर्टोली कोशिकाएँ ये कोशिकाएँ शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।

इन कोशिकाओं के मध्य 'अन्तराली कोशिकाएँ (Interstitial Cells) / लीडिंग कोशिकाएँ पाई जाती हैं, जो नर हॉर्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) स्रावित करती है।

वृषण का तापमान शरीर के तापमान से लगभग 2 से 3°C कम होता है, जो शुक्राणुओं के लिए आवश्यक होता है।

पीयूष ग्रंथि (पिट्यूटरी) से बनने वाला LH (ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन) वृषण की अन्तराली / लीडिंग कोशिकाओं को हॉर्मोन बनाने हेतु प्रेरित

करता है।

Note-

· पुरुष नसबंदी को वैसेक्टॉमी, जबकि महिला नसबंदी को ट्यूबेक्टॉमी कहते हैं।

वृषण में शुक्राणुओं के निर्माण को 'शुक्र-जनन' (Spermatogenesis) कहते हैं।

शुक्राणुओं का जीवनकाल लगभग 75 घंटे होता है।

मूत्राशय (मूत्र संग्रहण)

• मूत्रवाहिनी

| दोनों हाथों / अग्र पाद की हड्डियाँ

पैरों की हड्डियाँ

नाम

संख्या

नाम

संख्या

हामरस

2

फीमर

2

रेडियस अलना

4

पटेला

2

कॉर्पल्स (कलाई)

16

टीबिया- फिंबुला

4

मेटाकॉर्पल्स (हथेली)

10

टोर्सल्स

14

फेलेनजिस (उंगलियाँ)

28

मेटाटार्सल्स

10

फेलेनजिस

28

कुल हड्डियाँ

60

कुल हड़ियाँ

60

पसलियाँ (Ribs) |-

• हमारे शरीर में कुल 24 (12 जोड़ी) पसलियाँ होती हैं।

·

1 से 7वीं जोड़ी की पसलियाँ 'वास्तविक पसलियाँ' कहलाती हैं। 8वीं जोड़ी से 10वीं जोड़ी की पसलियाँ 'छद्म पसलियाँ' कहलाती

हैं अर्थात् ये पसलियाँ दूसरी पसलियों से आपस में जुड़ी रहती हैं। 11 वीं एवं 12वीं जोड़ी की पसलियाँ 'तैरती हुई पसलियाँ' कहलाती हैं।

नर प्रजनन तंत्र -

·

प्रजनन तंत्र

लड़कों में यौवन अवस्था 13-15 वर्ष की आयु में प्रारंभ होती है तथा 18-19 वर्ष की आयु में लड़कों में लैंगिक परिपक्वता आ जाती है।

नर में वृषण (Testis) को प्राथमिक जनन अंग माना गया है, जिन्हें नर जननांग (Gonads) कहा जाता है।

Note:

मनुष्य में लैंगिक जनन होता है।

क्लोनिंग अलैंगिक (Asexual) जनन है।

वृषण (Testis) -

वृषण, वृषणकोष में स्थित होते हैं।

• क्रिप्टो ऑगोडिज्म की स्थिति में वृषण उदर में रह जाते हैं।

* शिश्न

→ शुक्राशय

स्खलन वाहिनी

• प्रोस्टेट ग्रंथि बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि

• शुक्रवाहक मूत्रमार्ग

• अधिवृषण → वृषण

शिश्नमुण्ड

मूत्रजनन छिद्र

द्वितीयक अंग

वृषण कोष

यह वृषण को स्थिर बनाए रखने तथा वृषण के ताप को बनाए रखने में सहायक होता है।

अधिवृषण-

यह एक तरफ ���ुक्रवाहिनी तथा दूसरी तरफ वृषण से जुड़ा भाग है जो शुक्राणुओं के विकास में सहायक होता है।

शुक्रवाहिनी

• यह नलीनुमा संरचना होती है, जो वृषण से शुक्राणुओं को शुक्राशय तक पहुँचाती है। पुरुष नसबंदी (वैसेक्टॉमी) के दौरान शुक्रवाहिनी को अवरुद्ध / काट दिया जाता है।

365

शुक्राशय

उत्कर्ष प्रकाश

यह थैलीनुमा संरचना होती है, जहाँ शुक्राणुओं का संग्रहण किया जाता है। शुक्राशय द्वारा बनाया गया विशेष द्रव 'शुक्र द्रव' कहलाता है। शुक्र द्रव में फ्रक्टोज पाया जाता है, जो शुक्राणुओं को पोषण एवं ऊर्जा प्रदान करता है।

शुक्राशय से बना द्रव वीर्य के निर्माण में सहायक होता है।

प्रोस्टेट ग्रंथि -

प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार अखरोट के समान होता है।

प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाया गया द्रव भी वीर्य के निर्माण में सहायक होता है। कॉऊपर्स ग्रंथि -

• यह ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रंथि के ठीक नीचे स्थित होती है तथा इससे बना तरल पदार्थ मूत्र मार्ग को चिकनाहट प्रदान करता है।

farer (Penis)-

गर्भाशय का भीतरी आवरण एण्डोमेट्रियम कहलाता है, जबकि बाहरी आवरण मायोमैट्रियम कहलाता है।

| Note महिलाओं में मासिक चक्र के समय रक्तस्राव एण्डोमेट्रियम के टूटने से होता है।

भ्रूण, अपरा (Placenta) के द्वारा एण्डोमेट्रियम से जुड़ता है, जिसे रोपण कहा जाता है।

alfa (Vagina) -

योनि में लैक्टोबेसीलस जीवाणु पाए जाते हैं अर्थात् योनि का माध्यम अम्लीय होता है।

फैलोपियन नलिका

इंपन्डीबुलम एम्पुला

पेरिमेट्रियम

(कीपक)

소 इस्थमस

अंडाशय

गर्भाशय

इसी से मूत्रमार्ग द्वारा मूत्र, वीर्य, प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा स्रावित तरल पदार्थों का मूत्रद्वार के द्वारा उत्सर्जन किया जाता है।

मादा प्रजनन तंत्र

फ्रिम्ब्री

·

प्राथमिक अंग - अण्डाशय (Ovary) महिलाओं में प्राथमिक जनन अंग होते हैं।

• एण्डोमेट्रियम

.

द्वितीयक अंग - गर्भाशय ( Uterus ), अण्डवाहिनियाँ, योनि (Vagina) आदि द्वितीयक अंग होते हैं।

मीसोवेरियम

अण्डाशय (Ovary) -

मादा में अण्डाशय दोनों वृक्कों के नीचे उदरगुहा में गर्भाशय के दोनों ओर स्थित होते हैं।

'अण्डाशय' एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन एवं अण्डाणुओं का निर्माण करते हैं।

अण्डाशय में स्थित कॉर्पस ल्यूटियम कोशिकाएँ एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन स्रावित करती हैं।

Note:

·

एस्ट्रोजन हॉर्मोन महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास में

सहायक होता है, जिसे महिला वृद्धि का हॉर्मोन भी कहा जाता है। प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन गर्भधारण का हॉर्मोन कहलाता है।

अण्डाशय में स्थित 'अण्डाशयी पुट्टिकाएँ (Ovarian Vesicles) अण्डाणुओं का निर्माण करती हैं।

Note:

रजोदर्शन लड़कियों में मासिक चक्र का प्रारंभ होना

रजोनिवृत्ति महिलाओं में लगभग 45 वर्ष की आयु के पश्चात् मासिक चक्र का बंद हो जाना।

प्रत्येक मासिक चक्र में 1 अण्डाणु बनता है।

अण्डाशय द्वारा मासिक चक्र के 14वें दिन अण्डाणु बनता है तथा 14वें दिन ही अण्डोत्सर्जन / Ovulation (अण्डाणु का अण्डाशय से अण्डवाहिनी में पहुँचना) होता है।

अण्डोत्सर्जन - LH (ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन) - पीयूष ग्रंथि से

अण्डवाहिनी-

·

अण्डवाहिनी का मध्य भाग अपेक्षाकृत चौड़ा होता है, जिसे एम्पुला कहते हैं जबकि गर्भाशय से जुड़ा भाग इस्थमस कहलाता है।

अण्डवाहिनी के एम्पुला में निषेचन संपन्न होता है।

गर्भाशय ( Uterus) -

गर्भाशय थैलीनुमा संरचना होती है।

366

मायोमेट्रियम

पोषण [Nutrition]

योनि

पोषक तत्त्व

जीवों के वृद्धि, विकास एवं सभी जैव प्रक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक सभी पोषक पदार्थों से युक्त भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया पोषण कहलाती है।

पोषक पदार्थ [Nutirents ]

वे सभी भोज्य पदार्थ जिनसे सजीव ऊर्जा प्राप्त करते हैं तथा नए कोशिकीय पदार्थों का संश्लेषण करते हैं, पोषक पदार्थ कहलाते हैं। पोषण के आधार पर जीवों को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है- 1. स्वपोषी [Autotrops]

2.

हरे पौधों में क्लोरोफिल नामक पदार्थ वातावरण से कार्बन-डाई- ऑक्साइड (CO2), जल, सौर ऊर्जा आदि ग्रहण करके स्वयं अपना भोजन बनाते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं।

कुछ जीवा��ु जैसे सल्फर जीवाणु, नाइट्रीकारी जीवाणु तथा लौह जीवाणु भी स्वपोषी हैं।

विषमपोषी [Heterotrops]

वे प्राणी जो स्वयं अपना भोजन नहीं बना सकते तथा दूसरे जीवों पर

अपने भोजन के लिए निर्भर रहते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं। यह निम्न प्रकार के हैं-

उत्कर्ष प्रकाशन

वे

A. प्राणीसमभोजी पोषण [Halozoic Nutrition] प्राणी जो अन्य प्राणी या उनके द्वारा निर्मित कार्बनिक पदार्थों को ग्रहण करते हैं। यह चार प्रकार के होते हैं-

i.

-

शाकाहारी [Herbivores] वे जन्तु जो भोजन के लिए पौधों पर निर्भर रहते हैं।

उदाहरण बकरी, गाय, हिरण आदि।

-

ii. मांसाहारी (carnivores] वे जन्तु जो दूसरे जन्तुओं का भक्षण कर भोजन प्राप्त करते हैं।

उदाहरण शेर, चीता आदि।

-

iii. सर्वाहारी [Omnivoros] वे जन्तु जो पौधों व प्राणी दोनों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं सर्वाहारी कहलाते

-

-

हैं; उदाहरण चूहे, सुअर, मनुष्य आदि । iv. अपमार्जक [Scavengers] वे जन्तु जो मृत जन्तुओं को अपने भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं मरे हुए जन्तुओं को खाने की प्रक्रिया को अपमार्जन (Scavenging) कहते हैं; जैसे सियार, लकड़बग्घा, गिद्ध, चील आदि । B. परजीवी [Parasitic ] वे प्राणी जो अन्य प्राणियों और पादपों के शरीर के बाहर या भीतर रहकर उनसे आहार प्राप्त करते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं-

i.

-

-

बाह्य परजीवी [Ectoparasite] यह परजीवी अपना पोषण, परपोषी की त्वचा से चिपक कर प्राप्त करते हैं, बाह्य परजीवी कहलाते हैं उदाहरण जूँ मच्छर, खटमल तथा पादपों में अमरबेल ।

ii. अंतः परजीवी [Endoparasite]

-

-

यह परजीवी

अपना पोषण परपोषी के दैहिक अंगों में जैसे आँत, देहगुहा, यकृत, रुधिर आदि में प्रवेश कर प्राप्त करते हैं। उदाहरण- • एस्केरिस |

-

C. सहजीवी [ Symbiosis ] इस पोषण में विभिन्न प्रकार की जातियाँ साथ रहती है तथा दोनों ही जातियों को लाभ होता है तथा किसी जाति को हानि नहीं पहुँचती है। यह सहजीविता कहलाती है। उदाहरण शैवाल तथा कवक द्वारा निर्मित लाइकेन ।

D. मृतोपजीवी पोषण [Saprophytic Nutrition] - वे प्राणी जो पौधों या जन्तुओं के सड़ते-गलते ऊतकों से आहार प्राप्त करते हैं, मृतोपजीवी कहलाते हैं। अनेक जीवाणु (Bacteria), कवक (Fungi) तथा प्रोटोजोआ में यह पोषण विधि द्वारा होता है।

जन्तुओं में पोषण [Nutritions in Animals]

·

प्राणियों में पोषण के कुछ महत्त्वपूर्ण चरण-

1. अन्तर्ग्रहण [ Ingestion] भोजन को शरीर के आहारनाल में पहुँचाने की क्रिया को अन्तर्ग्रहण कहते हैं।

2.

पाचन [Digestion ] इस क्रिया में बड़े व जटिल अघुलनशील भोजन अणुओं का विभिन्न एंजाइमों की मदद से तथा रासायनिक क्रि���ाओं द्वारा तरल व छोटे घुलनशील अणुओं के निम्नीकरण को पाचन कहते हैं।

3. अवशोषण [Absorption]

इस क्रिया में पाचित भोजन को कोशिका द्वारा अवशोषित किया जाता है, अवशोषण कहलाते हैं।

367

4.

·

स्वांगीकरण [Assimilation]

जिस क्रिया के अंतर्गत कोशिकाओं में पाचित भोजन से विटामिन, खनिज लवण व अन्य रासायनिक भोज्य पदार्थों का अवशोषण होता है, स्वांगीकरण कहलाता है।

5. बहिष्करण [Ejection]

मल को गुदा द्वारा शरीर से बाहर त्याग करने की प्रक्रिया, बहिष्करण कहलाती है।

भोजन और उसके पोषक तत्त्व

.

.

1.

भोजन में उपस्थित जटिल रासायनिक पदार्थ जो शरीर में होने वाली विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को सम्पन्न करने के लिए एवं स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं, पोषक तत्त्व (Nutrients) कहलाते हैं।

भोजन को मुख्यत: तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

A. ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ

B. शरीर निर्माण करने वाले खाद्य पदार्थ

C. रोधी क्षमता वाले खाद्य पदार्थ

-

भोजन में उपस्थित पोषक तत्त्व को 6 वर्गों में विभाजित किया जाता है- कार्बोहाइड्रेट [Carbohydrate] कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। ये रासायनिक यौगिक होते हैं जिसमें उपस्थित कार्बन, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन 1:2:1 के अनुपात में होते हैं। इनका आधारभूत सूत्र (CH2O) होता है। कार्बोहाइड्रेट कार्बनिक यौगिक होते है, जो कि पाचन के बाद ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाते हैं तथा यही ग्लूकोज ऑक्सीजन के द्वारा ऑक्सीकृत होकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते है।

नोट :- 1 ग्राम ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

ग्लूकोज (1ग्राम) → ऊर्जा (4.2 किलो कैलोरी ) जो शरीर की कुल ऊर्जा का 50-799% मात्रा की पूर्ति कार्बोहाइड्रेट द्वारा होती है।

-

कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, जी, शक्कर, दूध, सूखे फल, रसीले फल आदि ।

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार यह मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं-

-

A. मोनोसेकेराइड्स [ Monosaccarides] यह सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट है।

आधारभूत सूत्र (CH2O) है।

उदाहरण-

1. ट्रायोस [Triose] - जैसे ग्लिसरैल्डिहाइड

2. टेट्रॉस [Tetrose] जैसे इरेथ्रोस [Erthrose]

-

3. हेक्सोज [Hexose] जैसे ग्लूकोज [Glucose], फ्रक्टोज [Fructose ], गैलेक्टोज [Galactose ]

B. डाइसेकेराइड [Disaccharides] - यह मोनोसेकेराइड के दो अणुओं से बना होता है।

आधारभूत सूत्र [C12H22 H11]

उदाहरण- सुक्रोज, माल्टोज, लैक्टोज आदि। C. पॉलीसेकेराइड [Polysaccharides]

यह अनेक

मोनोसेकेराइड्स के अणुओं से बना होता है। यह जल में अघुलनशील होते हैं। यह मुख्यतः पौधों में पाए जाते हैं जो आवश्यकता के दौरान जल अपघटन द्वारा ग्लूकोज में विघटित हो जाता है तथा ऊर्जा उत्पादन के लिए यह संगृहीत ईंधन का कार्य करते हैं। उदाहरण स्टार्च (मण्ड), ग्लाइकोजन, सेल्यूलोज, काइटिन (Chitin) आदि ।

कार्बोहाइड्रेट के कार्य

1.

234

3.

4.

उत्कर्ष प्रकाश

यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले मुख्य स्रोत हैं जो स्टार्च के रूप में 'संचित ईंधन' का कार्य करते हैं तथा शर्कराओं के रूप में ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन का काम करते हैं।

DNA व RNA का घटक या तत्त्व है।

यह प्रोटीन को शरीर के निर्माण के कार्यों के लिए सुरक्षित रखते हैं। यह शरीर में वसा के उपयोग के लिए अति आवश्यक है, यह सामान्यतः वसा में बदलकर संचित भोजन का कार्य करते हैं।

कार्बोहाइड्रेट की कमी या अधिकता से होने वाले विकार

कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से शरीर के वजन में वृद्धि होती है तथा मोटापा सम्बन्धित रोग होने की संभावना अधिक होती है। कार्बोहाइड्रेट की कमी से शरीर का वजन कम हो जाता है, जिसके कारण कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है तथा शरीर ऊर्जा के लिए प्रोटीन का उपयोग करता है जिससे शरीर के कई अंगों के कार्य में शिथिलता आ जाती है। 2. प्रोटीन [Protein ] - प्रोटीन शब्द सर्वप्रथम जे. बर्जीलियस ने प्रयोग किया था।

प्रोटीन एक जटिल नाइट्रोजन युक्त पदार्थ है जो लगभग 20 अमीनो अम्लों (Amino Acid) के विभिन्न संयोगों से बनता है।

हमारे शरीर का 15% भाग प्रोटीन से बना होता है। यह शारीरिक वृद्धि व शरीर के उचित पोषण के लिए अत्यन्त आवश्यक है।

प्रोटीन पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे वृहद् अणु होते हैं। प्रोटीन मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं-

A.

-

सरल प्रोटीन [ Simple Proteins] यह प्रोटीन, सिर्फ अमीनो अम्ल से बने होते हैं।

-

उदाहरण एल्ब्यूमिन, एल्ब्यूमिनाएड, ग्लोब्यूलिन आदि। B. संयुग्मी प्रोटीन [Conjugated Protein ] यह प्रोटीन, प्रोटीन के अतिरिक्त अन्य किसी अणु से संयोजित होते हैं। उदाहरण - ग्लाइकोप्रोटीन, न्यूक्लियोप्रोटीन, हीमोग्लोबिन आदि।

C. व्युत्पन्न प्रोटीन (Derived Protein ] - यह प्रोटीन, प्राकृतिक प्रोटीन के आंशिक जलीय अपघटन से प्राप्त होते हैं। उदाहरण पेप्टोन्स, पॉलीपेप्टाइड, अमीनो अम्ल आदि ।

प्रोटीन के कार्य

कोशिका में वृद्धि व मरम्मत करना।

हॉर्मोन के संश्लेषण में सहायक।

एन्टीबॉडीज के रूप में शरीर की सुरक्षा करना।

शरीर में गैसीय संवहन के लिए हीमोग्लोबिन के रूप में कार्य करना । प्रोटीन मेटाबॉलिक क्रियाओं में एंजाइम के रूप में कार्य करना।

प्रोटीन की कमी से बच्चों में क्वाशियोरकर रोग हो जाता है तथा प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट (कैलोरीज) की कमी से मैरास्मस रोग हो जाता है।

3. वसा [Fats]

यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है।

यह कार्बोहाइड्रेट के समान कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के यौगिक हैं परन्तु इसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है।

वसा के अणु ग्लिसरॉल तथा वसा अम्ल के बने होते हैं। यह जल में अघुलनशील परन्तु कार्बनिक तरल में घुलनशील होता है। वसा क्षार में पायसीकृत (Emulsified) हो सकती है।

• वसा के प्रकार दो भागों में विभक्त है-

A. जन्तु वसा यह दूध, पनीर, अण्डा तथा मछली में पायी जाती है।

B. वनस्पति वसा यह वनस्पति तेल जैसे- अखरोट, बादाम, सरसों तेल आदि से प्राप्त होते हैं।

सामान्यत: यह 20°C में ठोस अवस्था (Solid State) में पायी जाती है यदि द्रव अवस्था में हो तो उन्हें तेल कहते हैं।

वसा में उपस्थित वसा अम्ल दो प्रकार के होते हैं-

-

A. संतृप्त यह सामान्य तापमान पर जम जाती हैं। उदाहरण- मक्खन, घी, पनीर इत्यादि ।

·

मनुष्य के भोजन में संतृप्त वसा की मात्रा कम होनी चाहिए क्योंकि संतृप्त वसा आसानी से कॉलेस्ट्रॉल में परिवर्तित होती है जिससे उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) तथा हृदय संबंधी रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

B. असंतृप्त वसा अम्ल, मछली के तेल व वनस्पति तेलों (Unsaturated) में मिलते हैं। अधिकतर जन्तु वसा में होती

है । यह सामान्य ताप पर ठोस होती है; जैसे सरसों का तेल

नोट :- वसा सामान्यत: यह शरीर को 20-30% ऊर्जा प्रदान करती है। एक ग्राम वसा के पूर्ण ऑक्सीकरण से लगभग 9.3Kcal ऊर्जा मुक्त होती है।

वसा के कार्य:-

4.

.

यह त्वचा के भीतर जमा होकर शरीर के ताप को बाहर निकलने से रोकती है।

खाद्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाती है।

यह शरीर के विभिन्न अंगों को चोट से बचाती है।

प्रोटीन के स्थान पर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है।

वसा की कमी से त्वचा रूखी (dry), वजन में कमी तथा शरीर का विकास नहीं होता है।

विटामिन (Vitamin ] सन् 1911 में सर्वप्रथम सी. फंक ने विटामिन शब्द का प्रयोग किया था। विटामिन A, B, C, D, E, K होते हैं। मानव शरीर में इनकी आवश्यकता कम मात्रा में होती है परन्तु इनकी कमी से रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

विटामिन के प्रकार विटामिन को विलेयता (Solubility) के आधार पर दो वर्गों में विभक्त किया गया है-

1. जल में घुलनशील विटामिन

2. वसा में घुलनशील विटामिन

विटामिन B समूह (B-Complex)

विटामिन B तथा C विटामिन A, D, E तथा K

यह कई प्रकार के विटामिनों का समूह है जो जल में घुलनशील होते हैं। इस विटामिन में नाइट्रोजन उपस्थित होता है।

विटामिन B [Thymine ]

+

+

रासायनिक नाम थायमिन (Thymine)

स्रोत- हरी सब्जियाँ, गाजर, चावल, दूध, सोयाबीन, समुद्री भोजन (Sea Food) आदि।

इसकी कमी से बेरी-बेरी (Beri Beri) रोग हो जाता है।

विटामिन B2 [Riboflavin]

रासायनिक नाम राइबोफ्लेविन

+ स्रोत दूध, मटर, मांस, अण्डा, हरी पत्तेदार सब्जियाँ इत्यादि । यह कार्बोहाइड्रेड एवं अन्य पदार्थों के उपापचय (Metabolism) में सहायक है।

इसकी कमी से मनुष्य के वजन में कमी आती है तथा होंठ, जिह्वा तथा त्वचा में रूखापन आ जाता है।

368

विटामिन B [Niacin / Nicotinic Acid]

रासायनिक नाम नियासिन (Niacin)

उत्कर्ष प्रकाश

स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित गेहूँ, आलू, बादाम, टमाटर आदि।

इसकी कमी से पेलाग्रा (Pellagra) नामक रोग होता है तथा मानसिक विकास एवं पाचन क्रिया में खराबी हो जाती है।

विटामिन B [Pantothenic Acid]

रासायनिक नाम पैन्टॉथेनिक एसिड

यह एक महत्त्वपूर्ण प्रोटीन है जो शरीर में रक्त कोशिका बनाने में आवश्यक है। यह भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

विटामिन B [Pyridoxine]

+ स्रोत हरी सब्जियाँ, ताजे फल, यकृत (लीवर), दूध, अण्डा, यीस्ट सम्पूर्ण अनाज व दाल।

इसकी कमी से त्वचा शल्की, मांसपेशियों में थकान तथा रक्त की कमी होती है।

-

कार्य प्रोटीन उपापचय में सहायक तथा तंत्रिका तंत्र की क्रियाशीलता हेतु आवश्यक

विटामिन B (Biotin)

+

रासायनिक नाम बायोटिन ( Biotin)

स्रोत हरी सब्जियाँ, ताजे फल, यकृत (लीवर), दूध, अण्डा,

-

यीस्ट (Yeast) सम्पूर्ण अनाज व दाल।

इसकी कमी से त्वचा शल्की (Shalki ), मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, भूख में कमी तथा रक्त शून्यता होती है।

कार्य- यह पायवेट को ऑक्जेलो एसिटेट में रूपातंरित करता है।

विटामिन B [Folic Acid]

रासायनिक नाम फॉलिक अम्ल

-

स्रोत हरी पत्तेदार सब्जियाँ, केला, संतरा, लीवर, यीस्ट, अण्डा आदि।

इसकी कमी से रक्त अल्पता (Anaemia), पके हुए भोजन के अवशोषण में कमी RBC की परिपक्वता (Maturity of RBC) में कमी तथा मुँह में अल्सर जैसी बीमारियाँ होती हैं। विटामिन B12 [Cynacobalamin)

+

रासायनिक नाम साइनोकोबालामिन स्रोत मांस, दूध, कलेजी (Liver) आदि

RBC उत्पादन में सहायक, तंत्रिका तंत्र की वृद्धि।

इसकी कमी से अरक्तता ( Ischemia) और अधिकता से स्नायविक दोष (Neurological defects) आ जाता है।

विटामिन C [Ascorbic Acid ]

रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक एसिड

रासायनिक सूत्र CsHO

स्रोत- खट्टे रसदार फल, चीकू, आँवला, टमाटर, पत्तेदार सब्जियाँ आदि

इस विटामिन की कमी से स्कर्वी (Scurvy) रोग हो जाता है।

विटामिन A [Retinol]-

रासायनिक नाम रेटिनॉल [Retinol]

अणुसूत्र C20H20OH

स्रोत हरी पत्तीदार सब्जियाँ, गाजर, मछली यकृत तेल, कलेजी

(यकृत) दूध, पनीर आदि ।

यह विटामिन शरीर की वृद्धि में सहायक है तथा शरीर में उपकला ऊतकों को स्वस्थ बनाए रखता है। यह 13-15 वर्ष के बालक बालिकाओं में 60 mg आवश्यक है।

विटामिन A की कमी से रतौंधी (Night Blindness), आँखों का शुष्क होना, दृष्टि का समाप्त हो जाना आदि रोग हो जाते हैं। विटामिन D [Calciferol]

रासायनिक नाम कैल्सिफेरॉल, सनसाइन विटामिन स्रोत- मक्खन, घी, अण्डे, मछली का तेल आदि ।

सूर्य की किरणें (U.V. Rays) त्वचा में उपस्थित इर्गोस्टीरॉल (Ergosterol) को विटामिन D में परिवर्तित करती है।

इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स (Rickets) तथा बुजुर्गों में ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia) नामक रोग हो जाता है। विटामिन D के कार्य

हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक

गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक।

विटामिन E [Tocopherol]

रासायनिक नाम टोकोफेरॉल

स्रोत- हरी पत्तेदार सब्जियाँ, मांस, अंकुरित दानों जैसे गेहूँ, चना, मटर में। यह प्रजनन विटामिन भी कहलाता है इसकी कमी से मनुष्य नपुंसक हो जाता है।

विटामिन K [Piloquilone ] रासायनिक नाम फिलोक्विलॉन स्रोत टमाटर, पनीर, इत्यादि

यह रक्तस्रावरोधी (Anti Bleeding) विटामिन है जो यकृत (Liver) में प्रोग्रॉम्बिन के निर्माण में आवश्यक है।

इस विटामिन की कमी से रक्त का थक्का (Blood Clotting) नहीं बनता है और कटे स्थान पर रक्त का स्राव बहुत अधिक होता है। विटामिन के कार्य

1.

उपापचय क्रिया [Metabolic Reaction] में विटामिन आवश्यक सहकारी [Co-operative]

2. विभिन्न ऑक्सीकारी एन्जाइम के मानकों के रूप में विशिष्ट प्रोटीनों का संयोजन करना।

3. शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा के भंजन (Beaching) में

4.

सहायक।

ये उपापचय में अंतिम उत्पाद के रूप में ऊर्जा, कार्बनडाईऑक्साइड व जल का मोचन (Release) करते हैं।

5. खनिज लवण [Minerals Salts]

यह अकार्बनिक पदार्थ है तथा मानव शरीर में 29 तत्त्व पाए जाते हैं।

यह ऊर्जा प्रदान नहीं करता है परन्तु शरीर की विभिन्न अभिक्रियाओं

के लिए आवश्यक है।

मानव शरीर में आवश्यक खनिज-

I.

+

-

सोडियम [Na'] यह कोशिका के बाह्य द्रव में धनायन के रूप में होता है।

कार्य-

a. पेशियों का सकुंचन

b. तंत्रिका कोशिका के तंतु में तंत्रिका आवेग का संचरण

c. रक्त दाब (Blood Pressure) नियंत्रण

स्रोत- नमक, मछली, दूध, मांस आदि। यह प्रतिदिन 2.5g आवश्यक है।

369

6.

उत्कर्ष प्रकाशन

II. पोटेशियम [K] यह कोशिका द्रव्य में धनायन के रूप में पाया

+

जाता है। कार्य-

a. पेशीय संकुचन

b. तंत्रिका आवेग संचरण

c. विद्युत अपघट्य संतुलन को बनाए रखना।

स्रोत सभी खाद्य पदार्थ

III. कैल्सियम [Ca2] यह पनीर, दूध, अण्डा, हरी सब्जियाँ, चना

-

आदि में पाया जाता है।

कार्य-

a. विटामिन D के साथ हड्डियों व दाँतों को दृढ़ता प्रदान करना।

b. रुधिर के स्कंदन में सहायक।

मनुष्य में प्रतिदिन 1.2g कैल्सियम आवश्यक है।

IV. फॉस्फोरस [P]

+

कार्य-

a. हड्डियों व दाँतों को दृढ़ता प्रदान करना। में

b. वसा एवं कार्बोहाइड्रेट के पाचन में सहायक।

स्रोत- दूध, पनीर, हरी सब्जियाँ, बाजरा, कलेजी (Liver) आदि। यह मनुष्य के लिए प्रतिदिन 1.2 g आवश्यक है।

V. लौह [Fe]

कार्य-

a. लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन के बनने के लिए

आवश्यक ।

b. इसकी कमी से शरीर में थकान महसूस होती है।

C. मनुष्य के लिए प्रतिदिन 20mg लौह आवश्यक है। स्रोत- अण्डा, पालक, मेथी इत्यादि।

VI. आयोडीन [1]

स्रोत- मछली, सब्जियाँ, आयोडीन युक्त नमक। इसकी कमी से घेंघा या गलगण्ड रोग होता है।

इस रोग के बाद क्रेटिनिज्म (Cretinism) की अवस्था आती है जिससे व्यक्ति में शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होता है।

जल [Water]

मानव शरीर के वजन में लगभग 65-75% भाग जल है।

उल्टी व अतिसार ( Diarrhea) में जल की कमी हो जाती है, इस अवस्था को निर्जलीकरण (Dehydration) कहते हैं।

वयस्क व्यक्ति को औसतन 4-5 लीटर जल प्रतिदिन पीना चाहिए। 7. रूक्षांश [Roughage] या आहारी रेशे एक ऐसा पदार्थ है जिसका भोजन में होना आवश्यक है यह अधिकांशतः जन्तु के भोजन में अन अपचनीय पादप कोशिका भित्तियों का भाग है जो भोजन पचने के पश्चात् भित्तियों का भाग है जो भोजन पचने के पश्चात् बचे अपशिष्ट भाग को शरीर से बाहर निकालने में सहायक है।

जन्तु जगत

संघ प्रोटोजोआ (Protozoa):-

Protos प्रथम, Zoon जन्तु प्रथम जन्तु अर्थात् इस समुदाय के जन्तु सृष्टि के प्रथम जन्तु माने जाते हैं। ये रचना में सरल तथा एककोशिकीय होते हैं।

उदाहरण:- अमीबा, युग्लीना, पैरामिशियम, प्लाज्मोडियम ।

संघ पोरीफेरा (Porifera):-

इस समुदाय के जन्तुओं के शरीर में छोटे- छोटे अनेक छिद्र होते हैं। जिन्हें ऑस्ट्रिया कहते हैं इसलिए इस समुदाय का नाम पोरीफेरा रखा गया है। (छिद्रधारी )

(a) साइकन

(b) यूस्पॉन्जिया (बाथ स्पंज )

ये प्रायः झीलों एवं समुद्रों में पत्थरों से चिपके हुए मिलते हैं। इन्हें स्पंज कहते हैं। बहुकोशिकीय होते हुए भी इनके शरीर में ऊतकों तथा अंगों का निर्माण नहीं होता है, इन्हें स्पंजगुहा कहते हैं।

गुहा अग्र सिरे पर स्थित एक बड़े छिद्र द्वारा बाहर खुलती है, जिसे ऑसकुलम कहते हैं। शरीर में अंतः कंकाल के रूप में अनेक कंटिकाएँ पाई जाती हैं; जैसे साइकन, ल्यूकोसोलेनिया यूस्पॉजिन्या, स्पान्जिला, यूप्लैक्टेला आदि । बाथ स्पंज या यूस्पॉन्जिया अमेरिका तथा पश्चिमी भारत के समुद्री तट पर यह पाया जाता है। यह गहरे भूरे रंग के पटिलाकार या सपालिक आकार का स्पंज है।

इसके कंकाल को सूखाकर स्नान के कार्य में लाया जाता है इसलिए इसे बाथ स्पंज भी कहते हैं।

संघ : सीलेण्ट्रेटा (Coelenterala):-

इस संघ के प्राणियों में ऊतक बनने की प्रारंभिक अवस्था पाई जाती है। शरीर के अगले सिरे पर मुख होता है। इस पर स्पर्शक लगे होते हैं।

इनमें गुदा नहीं होती हैं। स्पर्शकों में डंक मारने वाली दंश कोशिकाएँ होती हैं। ये शिकार को मूर्द्धित करने व पकड़ने में मदद करती है और शत्रु से रक्षा करती है।

इनके शरीर में केवल एक गुहा होती है जो जठर- वाहिनी गुहा या सीलेण्ट्रेटा कहलाती है। इसी विशेषता के कारण यह संघ सीलेण्ट्रेटा कहलाता है।

इस संघ के कुछ जन्तु एकलिंगी होते हैं जैसे हाइड्रा, जेलीफिश, फाइसेलिया इत्यादि ।

संघ-टीनोफोरा ( Ctenophora):-

टीनोफोरा संघ एक छोटा संघ है, जिसमें सामान्यतया समुद्री जन्तु आते हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से समुद्री अखरोट (sea walnut) या कॉम्ब जेली (comb jelly) कहते हैं। इसमें सिर्फ 50 प्रजातियाँ पाई जाती है।

शरीर मुलायम, पारदर्शी व जिलेटिन जैसा होता है शरीर पर 8 कॉम्ब प्लेट होती है। उदाहरण- फ्लूरोब्रेकिया तथा टीनोप्लेना ।

संघ प्लेटीहेल्मिन्धीज (Platyhelminthes):-

इस संघ के जन्तुओं का शरीर फीते की तरह चपटा होता है। अधिकांश जीव परजीवी होते हैं। इनमें पोषक के शरीर से चिपकने के लिए मुख के चारों ओर चूषक एवं काँटे पाए जाते हैं।

उत्सर्जन के लिए विशेष प्रकार की ज्वाला कोशिकाएँ (Flame cells) होती हैं। ये जन्तु उभयलिंगी या द्विलिंगी होते हैं, अर्थात् नर एवं मादा अंग एक ही जन्तु के शरीर में पाए जाते हैं, जैसे नेरिया, लीवरफ्लूक (फैसिओला), फीता कृमि, सिस्टोसोमा आदि ।

370

उत्कर्ष प्रकाशन

फीताकृमि अर्थात् टीनिया सोलियम एक अंतः परजीवी जंतु है जो मुख्यतः सूअर, मनुष्य, भेड़, बकरी तथा बंदर आदि की आँतों में पाया जाता है। इसका शरीर लम्बा, पतला तथा फीते के समान होता है। इस���ा जीवन चक्र दो पोषकों में पूरा होता है; जैसे मनुष्य तथा सूअर में इसके प्रभाव से मनुष्य में रक्तहीनता, आँतों में दर्द, जी मिचलाना तथा कमजोरी आदि होती है।

केंचुए में 14, 15 तथा 16वाँ खण्ड मिलकर एक पट्टीयुक्त रचना बनाते हैं जिसे क्लाइटेलम कहते हैं। केंचुए के अधर तल के 14वें खण्ड पर मादा जनन छिद्र तथा 18वें खण्ड पर नर जनन छिद्र होता है। केंचुआ भूमि को सरंध्र बनाता है इसी कारण इसे 'किसानों का मित्र' कहा जाता है।

Mouth-Prostomium

Female genital opening

Peristomium

.

(a) फीता कृमि

संघ: एस्कहेल्मिन्धीज (Aschelminthes ):-

(b) लीवर फ्लूक

इस संघ को निमेटीहेल्मिन्थीज या निमेटोडा अथवा गोलकृमि की भी संज्ञा प्रदान की गई। इनका शरीर क्यूटिकल से आवरित, लम्बा, बेलनाकार, धागेनुमा व दोनों सिरों पर नुकीला होता है। अधिकांश जन्तु अंत: परजीवी होते हैं।

उदाहरण- एस्केरिस, निमेटोडा

16

Male

संघ एनेलिडा (Annelida):-

Female

एनेलिडा अर्थात् खण्डयुक्त कृमि ।

इनके शरीर की संरचना के रूप में 'नली के अंदर नली'

Male genital opening

B

Clitellum Genital papillae -Ring of setae Segments. - Anus

- Dorsal blood vessel

Prostomium

Peristomium

संघ ऑर्थोपोडा (Arthropoda):-

Ring of

setae

Mouth, Metameres

इन जन्तुओं का शरीर खण्डयुक्त तथा टाँगें जोड़दार होती है, इसलिए इस समुदाय का नाम ऑर्थ्रोपोडा है। शरीर प्रायः तीन भागों सिर, धड़ तथा उदर में विभक्त होता है। इस समुदाय के जन्तुओं का शरीर काइटिन नामक आवरण (कंकाल) से ढका होता है। श्वसन के लिए जलीय जन्तुओं के क्लोम तथा स्थलीय जन्तुओं में ट्रेकिया या बुकलंग पाए जाते हैं।

इनमें शरीर की सतह द्वारा भी श्वसन होता है। रुधिर परिवहन (त्वचा) तंत्र खुला होता है। देहगुहा रुधिर से भरी हीमोसील गुहा है। नेत्र संयुक्त होते हैं।

उदाहरण कॉकरोच, तितली, मक्खी, मच्छर, टिड्डा, बिच्छू सभी कीटों को सम्मिलित करते हैं।

आर्थोपोडा

·

होती है जो देहगुहा सीलोम कहलाती है।

·

इनमें पाचन, संवहन, उत्सर्जन, जनन व तंत्रिका तंत्र पाए

नोट:-

जाते हैं उत्सर्जी अंग नेफ्रीडिया कहलाते हैं जैसे- केंचुआ, जोंक, नेरीस

· केंचुआ पालन वर्मीकल्चर

खाद वर्मीकम्पोस्ट

अन्य नाम किस���नों का मित्र

वैज्ञानिक नाम Lunbrucus Terrestries

केंचुआ मिट्टी के अंदर सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों को खाता है। यह मिट्टी को खाकर अपनी सुरंग बनाता है उड़ने वाली मिट्टी आहारनाल से होती हुई गुदा द्वारा छोटी-छोटी गोलियों के रूप में बाहर निकलती रहती है, जिसे कॉस्टिंग कहते हैं।

संघ : मोलस्का (Mollusca):-

आर्थोपोडा के उदाहरण

इस समुदाय के जन्तु अधिकांश समुद्री, कुछ अलवणीय जल में और कुछ नम भूमि पर पाए जाते हैं। इन जन्तुओं का शरीर बहुत कोमल होता इसलिए इनका नाम मोलस्का पड़ा।

कुछ जन्तुओं में कवच का अभाव होता है। इनमें प्रचलन (ऑक्टोपस ) चौड़ा एवं पेशीयुक्त पाद होता है रुधिर प्रायः रंगहीन है, लेकिन कुछ जन्तुओं का खून नीला या हरा होता है।

श्वसन गिल्स या वायु कोषों द्वारा होता है।

371

उत्कर्ष प्रकाशन

यह अधिकांश एकलिंगी होते हैं, जैसे- घोंघा, सीपी, कौड़ी, शंख, ऑक्टोपस, पर्ल ओइस्टर, यूनियो, स्कविडस, डेण्डेलियम, मैमेलीडेंस, नॉटिलस, काइटन आदि ।

हृदय अधरतल की ओर आहारनाल के हृदय पृष्ठतल की ओर आहार नीचे स्थित होता है।

रुधिर परिसंचरण तंत्र बन्द होता है।

पृष्ठ रुधिर वाहिनी में रुधिर का बहाव आगे से पीछे की ओर होता है।

यकृत निवाहिका तंत्र पाया जाता है।

Octopus

Snail

पश्च गुदा पुच्छ पाई जाती है।

Slug

Unio

संघ इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata):-

प्राय: इस संघ के सभी जीव समुद्र में पाए जाते हैं।

इनके खुरदरी व दृढ़ देहभित्ति में कैल्सियम युक्त अस्थिकाओं या कण्टिकाओं का अंत कंकाल पाया जाता है।

इनमें पुनरुत्पादन की क्षमता अधिक होती है जैसे तारा मछली, समुद्री खीरा, ब्रिटिल स्टार, समुद्री आर्चिनस, कुकुमेरिया, थायोन, एण्टीडान होलोथूरिया आदि।

*

1.

नाल के ऊपर स्थित होता है। रुधिर परिसंचरण तंत्र बंद व खुला होता है।

पृष्ठ रुधिर वाहिनी में रुधिर का बहाव पीछे से आगे की ओर होता है।

यकृत निवाहिका तंत्र का अभाव होता है।

पश्च गुदा पुच्छ अनुपस्थित होती है।

पृष्ठरज्जु (Notochord ) :- उपास्थि (Cartilage) से निर्मित एक लचीली (Flexible) संरचना जो संघ के सभी सदस्यों में उपस्थित होती है। वयस्क अवस्था में पृष्ठरज्जु (Notochord) कशेरूक दण्ड (Vertebral Column) में परिवर्तित हो जाती है। इसका मुख्य कार्य तंत्रिका रज्जु (Nerve cord) को सहारा प्रदान करना है। पृष्ठ खोखली तंत्रिका रज्जु (Dorsal Hollow Nerve Cord):- शरीर की मध्य पृष्ठ रेखा पर तंत्रिका तन्तुओं का समूह जो मस्तिष्क को पेशियों व अन्य अंगों से जोड़ता है।

ग्रसनीय क्लोम छिद्र (Pharyngeal Gill Slits ):- जलीय कॉडेंट्स में श्वसन के लिए ग्रसनी की दीवार में उपस्थित । मत्स्य वर्ग (Class Pisces ):-

कांटेदार पृष्ठीय पंख

spiny dorsal fin

स्विम बोहर swim bladder

मस्तिष्क brain

spinal cord

किडनी kidney

पृतीयपंख soft dorsal fin

कॉडल पं caudal fin

Starfish

Sea urchin

Sea cucumber

संघ : कॉर्डेटा (Chordata):-

Sea lily

कॉर्बेटा एक विविध (Diverse) एवं विशिष्ट वर्ग समूह है क्योंकि इसमें पृथ्वी पर सबसे जटिल और उन्नत जीवों को सम्मिलित किया

गया है।

कॉर्बेटा और नॉन-कॉर्डेटा में अंतर-

कॉर्डेटा जन्तुओं में नोटोकार्ड जीवन की किसी-न- किसी अवस्था में अवश्य पाया जाता है। केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र नलिकाकार एवं पृष्ठतल की ओर रहता है। जीवन की किसी-न-किसी अवस्था में ग्रसनी गिल दरारें उपस्थित होती हैं।

नॉन-कॉर्डेटा

नोटोकार्ड का अभाव पाया जाता है। यह ठोस तथा अधरतल की ओर होता है।

इसमें इनका पूर्ण अभाव होता है।

gils

liver लीवर,

esophagus इस pelvic fin

gallbladder पित्ताशय

intestine आँत

anus गुदा

पेल्विक पंख

pancreas

अग्न्याशय

stomach

आमाशय

anal fin एनल पंख

reproductive organ

जनन अंग

लेबियो (Labeo)

इस वर्ग के जन्तु जलीय तथा असमतापी (Cold Blooded) होते हैं। श्वसन क्लोम (Gills) के द्वारा होता है अन्तः कंकाल उपास्थि एवं अस्थि का बना होता है।

बाह्य कंकाल शल्कों के रूप में होता है। हृदय में एक अलिन्द (Atrium) तथा एक निलय (Ventricle) होता है।

• उदाहरण (टॉरपिडो) विद्युत मछली, कुत्ता मछली (स्किलोडियोन), समुद्री घोड़ा (हिप्पोकैम्पस), फुफ्फुस मीन इत्यादि ।

372

नोट:-

उत्कर्ष प्रकाशन

गेम्बुसिया मछली:- मच्छरों के लार्वा को खाती है, अतः मलेरिया के जैविक नियंत्रण में काम आती है।

व्हेल शार्क विश्व की सबसे बड़ी समुद्री मछली (वजन 43 टन)।

2. उभयचर वर्ग (Class Amphibia):-

.

इस वर्ग के सदस्य जल और स्थल दोनों में पाए जाते हैं, इस कारण इन्हें उभयचर कहा जाता है।

इस वर्ग के अधिकांश सदस्य स्वच्छ जलीय होते हैं।

ये जन्तु असमतापी होते हैं।

श्वसन क्लोमों द्वारा, नम त्वचा द्वारा तथा फेफड़ों द्वारा होता है।

हृदय में दो आलिन्द तथा एक निलय पाया जाता है।

इनमें अधिकांशत: परिवर्द्धन के समय एक लार्वा बनता है, जिसे टेडपॉल लार्वा कहते हैं।

उदाहरण- नेक्ट्यूरस, सेलामैण्डर और मेंढक

आँख

टिम्पेनम

त्वचीप्लिका

मध्य पृष्ठीय रेखा

स्नाउट

नासा छिद्र

4. पक्षी वर्ग (Biref Class ) :-

ये नियततापी होते हैं।

ये हवा में उड़ते भी हैं और जमीन पर तेजी से भी चलते हैं। इनमें दाँत नहीं पाए जाते हैं, मुख चोंच द्वारा घिरा रहता है।

• इनका कंकाल सरंध्र तथा हल्का होता है।

इनके अग्रपाद पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं।

हृदय दो आलिन्द और दो निलय में बँटा होता है।

उदाहरण: कबूतर, गौरेया, मैना, मोर, तोता, ऑस्ट्रिच, ऐमू, कीवी, आर्किओर्निस, आर्किओप्टेरिक्स आदि ।

सफेद स्टॉर्क (सिकोनिया)

ऑस्ट्रिच

गुच्छेदार ब

(स्टूथियो कैमेलस) (आयथिया फ्युलिगुला)

अग्रपाद

कबूतर

गौरेया

सबसे बड़ा जीवित पक्षी शुतुरमुर्ग है।

कौआ

पश्चपाद

सबसे छोटा पक्षी हमिंग बर्ड है।

राना टिग्रिना (Frog)

कीवी (न्यूजीलैण्ड में) ऐसा पक्षी जो उड़ नहीं सकता है। (ऐमू)

3. सरीसृप वर्ग (Class Reptilia):-

तीव्रतम पक्षी अवावील (swift) है।

ये साधारणत: स्थलवासी होते हैं, लेकिन कुछ जलवासी भी होते हैं।

विलुप्त पक्षी डोडो जो कि मॉरीशस में पाया जाता है।

ये रेंग कर चलते हैं इसलिए इन्हें सरीसृप कहते हैं।

मोर (पावो क्रिस्टेटस ) हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।

ये असमतापी जन्तु हैं।

5.

स्तनधारी वर्ग (Class of Mammal):-

श्वसन फेफडों द्वारा करते हैं।

इस वर्ग के जन्तु उच्चतापी एवं समतापी होते हैं।

इनकी त्वचा बाल या रोम से ढकी रहती है।

·

इनमें स्वेद एवं तेल ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।

·

इनके हृदय में चार कोष्ठ होते हैं।

Desert Tortoise

Rattlesnake

Chameleon

American Alligator

Turtle

हृदय में दो अलिन्द एवं एक अर्द्ध विभाजित निलय होता है अर्थात् अपूर्ण चार कोष्ठीय हृदय होता है, परन्तु मगरमच्छ एवं घड़ियाल में पूर्ण रूप से चार कोष्ठकीय (दो अलिन्द, दो निलय) हृदय पाया जाता है।

• हाइड्रोफिश जिसे समुद्री, साँप कहते हैं संसार का सबसे जहरीला साँप है।

हिलोडर्मा (Heloderma) यह जहरीली छिपकली होती है। उदाहरण- छिपकली, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ, साँप इत्यादि ।

RBC केन्द्रकहीन होती है (केवल ऊँट व लामा को छोड़कर)

पोन्स वेरोलाई पश्चमस्तिष्क के अधरतल पर स्थित और अनुमस्तिष्क

दोनों पार्श्वों को जोड़ने वाली तंत्रिका रज्जुओं की एक अनुप्रस्थ पट्टी होती हैं।

• इनमें 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ होती हैं।

इनमें वृक्क सेम के बीज की आकृति का होता है। इनमें हमेशा अंत: निषेचन होता है।

नोट:-

अनियततापी जन्तु (cold-blooded animals):-

. अपने ताप को वातावरण से लेते हैं। अतः ये वातावरण के तापमान के अनुसार अपना ताप बदलते हैं। वातावरणीय ताप अधिक व कम होने पर इनके शरीर का ताप भी अधिक व कम होता जाता है। उदाहरण- मत्स्य, उभयचर एवं सरीसृप ।

नियततापी जन्तु (warm-blooded animal):-

अपने शरीर का ताप एक नियत स्थान पर रखते हैं, जो वातावरण के ताप के अनुसार नहीं बदलते हैं। उदाहरण स्तनधारी एवं पक्षी ।

373

उत्कर्ष प्रकाश

जन्तुओं एवं पादपों का आर्थिक महत्त्व

रेशम कीट पालन :-

रेशम कीट पालन को 'से���ीकल्चर' कहा जाता है।

·

.

·

रेशम कीट ऑर्थोपोडा संघ का जन्तु है। वर्ग इन्सेक्टा है एवं इसका गण लेपीडोप्टेरा है।

रेशम कीट पालन की प्रक्रिया सर्वप्रथम चीन से आई है।

भारत में सर्वाधिक रेशम कीट पालन का केन्द्र मैसूर (कर्नाटक) है।

रेशम कीट पालन से चार प्रकार का रेशम प्राप्त होता है-

एपिस फ्लोरिया / भुंगा मक्खी:-

यह शान्त प्रकृति की होती है यह एक छते से औसतन 250gm शहद प्राप्त होता है, अतः व्यापारिक दृष्टि कम उपयोगी है।

एपिस मेलीफेरा:-

1.

1. मलबरी रेशम कीट बॉम्विकस मोराई यह रेशम कीट मलबेरी 2. शहतूत पर पाया जाता है। यह उत्तम प्रकार का रेशम है।

.

2. टसर रेशम कीट इसके द्वारा टसर रेशम प्राप्त होता है। इसका भोजन ऑक होता है।

3. एरी या अरण्ड रेशम कीट इससे अरण्ड रेशम प्राप्त किया जाता है। इसका भोजन अरण्डी होता है।

4. मूँगा रेशम कीट एन्थरिया असामा- इसके द्वारा मूँगा रेशम प्राप्त होता है। इसका भोजन मूँगा होता है।

रेशम कीट का निर्माण रेशम कीट की रेशम ग्रन्थियों का रूपान्तरण लार ग्रन्थियों में हो जाता है।

लार ग्रन्थियाँ केटर पिलर में रूपान्तरित हो जाती है।

3.

इसे यूरोपियन मक्खी कहते हैं ये शान्त होती है। यह व्यापारिक दृष्टि से सर्वाधिक उपयोगी है। इसकी इटालियन किस्म अधिक महत्त्वपूर्ण है।

एक छत्ते में तीन प्रकार की मधुमक्खियाँ पाई जाती है-

रानी यह निषेचित अण्डों से उत्पन्न होती है।

एक छत्ते में केवल एक रानी मक्खी पाई जाती है।

इसका कार्य ड्रोन के साथ सम्भोग करना तथा छत्ते पर अपना प्रभुत्व रखना। यह प्रतिदिन लगभग 1500-2000 अंडे देती हैं।

ड्रोन (नर) ये अनिषेचित अण्डों से उत्पन्न होती है। इनकी संख्या 100 होती है।

इनका कार्य रानी के साथ सम्भोग करना होता है।

श्रमिक इनकी संख्या 60000 होती है।

यह निषेचित अण्डों से उत्पन्न होती है।

इनके निम्नलिखित कार्य होते हैं

(i) यह छत्ते की देखभाल करती है।

(ii) यह शहद को इकट्ठा करती है।

(iii) रानी के लिए रॉयल जेली इकट्ठा करती है।

प्रोपालिश :-

केटर पिलर के चारों तरफ धागेनुमा संरचना का निर्माण होता है जिसे शहद :- कोकून कहते हैं।

कोकून में प्यूपा का निर्माण होता है प्यूपा से मोध बनता है जिससे रेशम कीट का निर्माण होता है।

मोम :-

कोकून से रेशम प्राप्त करने की प्रक्रिया को रिलिंग कहते हैं।

रेशम कोकून अवस्था में प्राप्त किया जाता है।

रेशम का एक धागा 1000 से 1200 मीटर लम्बा होता है। कोकून से 4-5 धागों को बुनकर एक धागा प्राप्त किया जाता है। इसे अब कच्चा रेशम कहते हैं।

कोकून से प्राप्त अन्य वेस्ट धागों को काटकर प्राप्त सिल्क को स्पन सिल्क (Spun Silk) कहते हैं।

रेशम सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशा है।

रेशम में फाइब्रिन तथा सेरीन नामक प्रोटीन उपस्थित होती है। मधुमक्खी पालन:-

मधुमक्खी पालन 'एपीकल्चर' कहलाता है।

मधुमक्खी एक सामाजिक कीट है।

मधुमक्खियों की चार प्रजातियाँ होती हैं:-

एपिस डीसेंटा / रॉक मधुमक्खी:-

·

यह सबसे बड़े आकार की होती है तथा सर्वाधिक मात्रा में शहद उत्पन्न करती है। गुस्सैल एवं प्रवासी प्रकृति के कारण इन्हें पाला नहीं जा सकता, इसे सारंग मक्खी कहते हैं।

एपिस इण्डिका / भारतीय मोना मक्खी:-

यह पूर्ण भारत में मिलने वाली तथा शान्त स्वभाव की होती है। इसके प्रति छत्ते से 3-4 Kg शहद प्राप्त कर सकते हैं तथा इसे आसानी से पाल सकते हैं।

छत्तों की पुनः मरम्मत करने की प्रक्रिया प्रोपालिश कहलाती है।

शहद फूलों के रस से तथा मकरंद के पराग कणों से प्राप्त होता है। इसमें ग्लूकोज, फ्रक्टोज, गैलेक्टोज, एन्जाइम, वर्णक, विटामिन B C, D पाए जाते हैं।

इसे मधुमक्खी से प्राप्त किया जाता है।

इसका उपयोग मोम तथा पॉलिश उद्योग में किया जाता है। मत्स्य पालन

मछलियों की उपयोगी तथा उच्च उत्पादक क्षमता से युक्त प्रजातियों का नियन्त्रित परिस्थितियों में संवर्द्धन करना मत्स्यपालन कहलाता है। प्रोटीन्स के अतिरिक्त इनमें खनिज लवण, विटामिन (A एवं D) तथा स्वास्थ्यप्रद वसाएँ भी अधिक मात्रा में पाई जाती हैं।

इन मछलियों से खाद्य पूर्ति के अलावा प्राप्त उत्पाद एवं उप-उत्पाद, मवेशियों व पालतू जन्तुओं के आहार व कई मानव उपयोगी सामग्री निर्माण के उपयोग में लिए जाते हैं।

संवर्धनशील मछलियाँ निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-

मिरर कार्य (Mirror carp), चीनी कार्प (Chinese carp), क्रूसियन कार्प (Crucian carp) विदेशी मछलियाँ हैं।

चानोस (Chanos), मुलेट्स ( Mullets) लवण जलीय मछलियाँ हैं। मेजर कार्प (Major carp) एक देशज प्रजाति की मछली है। मुर्गी पालन (Poultry Farming)

मुर्गी पालन कुटीर उद्योग है। मुर्गी अपने अंडे तथा मांस दोनों ही रूपों में पौष्टिक भोजन प्रदान करती है।

मुर्गी पालन उद्योग की सफल व्यवस्था के लिए मुर्गी पालन के स्थान, मुर्गों के स्वभाव, प्रजाति (Breed) तथा इनके प्रजनन व पालन पोषण का उचित ज्ञान होना चाहिए।

374

मुर्गी पालन में प्रयुक्त किए जाने वाले पक्षी

• मुर्गी पालन में प्रयुक्त प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं-

.

उत्कर्ष प्रकाश

मुर्गी प्रजातियाँ (Breeds of fowl) - भारत में गैलस डोमेस्टिकस (Gallus domesticus) को अधिकतर पाला जाता है। दो प्रकार की मुर्गियों को कुक्कुट पालन हेतु उपयोग में लाया जाता है।

Zaft zeer left gfiful (Indigenous or Desi Breeds) - असील (Aseel), कड़कनाथ (Kadaknath), ब्रह्मा (Brahma), आदि नस्लों को शामिल करते हैं।

विदेशी नस्ल वाली मुर्गियाँ (Exotic Breeds) विदेशी नस्लों में सफेद लेगहॉर्न, प्लाइमाउथ रॉक (Plymouth rock), न्यू हैम्पशायर (New hampshire) को शामिल किया जाता है।

मुर्गीपालन में प्रयुक्त मुर्गी की कुछ नस्लें मांस उत्पादन के लिए अधिक उपयुक्त होती हैं जिन्हें ब्रॉयलर्स (Broilers) कहा जाता है, जैसे- प्लाइमाउथ रॉक।

पादपों के आर्थिक महत्त्व -

1. भोज्य पदार्थों के रूप में 2. पेय पदार्थ

3. फल एवं सब्जियाँ 3. अनाज 5. दालें 4. खाद्य तेल 7. मसाले

औषधीय रूप में

1. इमारती काष्ठ व रेशों के रूप में 2. सागवान

3. शीशम

4. रोहिड़ा

5. अश्वगंधा

अण्डे उत्पादन हेतु पालन की जाने वाली मुर्गियाँ लेयर्स (Layers) 6. सर्पगंधा कहलाती हैं।

लाख उत्पादन

·

लाख उत्पादन लाख कीट द्वारा होता है, जो संघ ऑर्थ्रोपोडा का जन्तु है।

इसमें भेदने व चूसने वाले मुखांग उपस्थित होते हैं।

टाँगे व शृंगिकाएँ नहीं पायी जाती है।

लाख उत्पादन करने वाला कीट बेर जिजिफस मॉरीटियाना, पीपल- फाइकस रिलिजिओसा, अंजीर फाइकस केरिका आदि पादपों पर पाया जाता है।

भारत में सबसे ज्यादा लाख का उत्पादन बिहार करता है।

पलास व बेर के पादप से प्राप्त लाख को कुसुमी लाख कहते हैं। पोषी पादप से लाख के संग्रहण करना हार्वेस्टिंग कहलाता है। स्वार्मिंग के पहले प्राप्त होने वाली लाख अपरिपक्व होती है परन्तु स्वार्मिंग के बाद परिपक्व लाख प्राप्त होती है।

संगृहीत लाख को सीड लाख कहते हैं। इसे पानी में धोकर सुखाया जाता है बाद में कपड़े के थैले में बंद कर दिया जाता है, जब लाख पिघल जाती है।

अशुद्धियुक्त लाख को किरी लाख कहते हैं जबकि शुद्ध लाख बटन लाख कहलाती है। शुद्ध द्वारा चपटी शीट बनाते हैं, जो शीट लाख कहलाती है जिसे उपयोग में लेते समय आर्सेनिक मिलाते हैं। लाख में उपस्थित रसायनों का संगठन

रेजीन-68-90%

एल्बुमिन - 5-10%

पानी-3%

लाख जल में अघुलनशील होती है, परन्तु एल्कोहॉल में घुल जाती है। यह ऊष्मा की कुचालक होती है। लाख गर्म करने पर पिघल जाती है।

पादपों का आर्थिक महत्त्व

·

जैव-मण्डल में पौधे उत्पादक (Producer) के रूप में पारिस्थितिकी

सेवाएँ देते हैं। प्रत्येक जन्तु अपने भोजन एवं ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहता है।

पौधों का उपयोग मनुष्य के द्वारा आर्थिक महत्त्व की क्रियाओं में भ��� किया जाता है, जो कि इस प्रकार है:-

7. गुगल

8. खेजड़ी

9. कपास

भोज्य पदार्थों के रूप में

अनाज-

दालें-

·

गेहूँ:- (ट्रिटिकम एस्टीवम) रबी की फसल है। शरबती सोना, सोनालिका, कल्याण सोना इसकी महत्त्वपूर्ण किस्में हैं। चावल:- (ओराइज़ा सटाइवा), खरीफ की फसल है। जया, बासमती, रत्ना, स्वर्णदाना इसकी महत्त्वपूर्ण किस्में हैं।

मक्का:- (जिया मेज), खरीफ की फसल विजय, शक्ति, रतन आदि । बाजरा (पेनिसिटम टाइफाइडिस), खरीफ की फसल है।

चना:- (साईसर एरांइटिनम), इन्हें दालों का राजा कहा जाता है। सोयाबीन :- (ग्लाइसीन मैक्स), इसमें सर्वाधिक प्रोटीन पाया जाता है।

मटर:- पाइसम सटाइवम

अरहर:- केज़ेनस कज़ान

मूँगफली:- एरेकिस हाइपोजिया

मसालों के रूप में :-

काली मिर्च, जीरा, अजवायन, लौंग, इलायची, दालचीनी आदि का प्रयोग भोजन में मसालों के रूप में।

पेय पदार्थ के रूप में :-

चाय (केमिलिया साइनेन्सिस) की पत्तियों से प्राप्त होती है। कॉफी (कॉफिया अरेबिका) बीजों से प्राप्त होती है।

फल एवं सब्जियों के रूप में :-

1.

जड़ों द्वारा :-

गाजर (डोकस केरोटा)

मूली (रेफेनस सटादूवम

• शलजम (ब्रेसिका रापा)

शकरकंद (आइपोमिया बटाटा)

375

उत्कर्ष प्रकाश

2.

रक्तक पटल (Choroid):-

2.

.

3.

·

4.

तने द्वारा:-

आलू (सोलेनम ट्यूबरोसम)

अरबी (कोलोकेसिया एस्कुलेण्टा )

पत्तियों द्वारा:-

पालक (स्पाइनेसिया ओलेरेसिम)

मेथी (टाइगोनेला फोइनग्रीकम)

बथुआ (चिनोपोडियम एल्बम)

फल द्वारा

टमाटर, भिण्डी, फली

फूल गोभी: संपूर्ण पुष्पक्रम खाने योग्य।

आम, पपीता, संतरा आदि फल हैं, फल का निर्माण निषेचित

अण्डाशय (Ovary) से।

औषधीय रूप में:-

1.

तने द्वारा

अदरक (जिंजिबर ऑफिसिनेल)

लहसुन (एलियम सटाइवम)

हल्दी (कुरकुमा लौंगा)

गुगल (कैमिफोरा वाइटाई)

जड़ द्वारा

रक्तक पटल आँख पर आपतित होने वाले प्रकाश का अवशोषण करता

है तथा आन्तरिक परावर्तन को रोकता है।

कॉर्निया (Cornea ):-

नेत्र में प्रकाश इसी भाग से होकर प्रवेश करता है।

आइरिस (Iris ) :-

कॉर्निया के पीछे एक रंगीन एवं अपारदर्शी झिल्ली का पर्दा होता है। यह पुतली के आकार को नियंत्रित रखता है।

पुतली (Pupil):-

कॉर्निया से आया प्रकाश पुतली से होकर ही लेन्स पर पड़ता है। पुतली की यह विशेषता होती है, कि अन्धकार में यह अपने आप बड़ी व अधिक प्रकाश में अपने आप छोटी हो जाती है। इस प्रकार नेत्र में सीमित प्रकाश ही जा पाता है। इस क्रिया को पुतली समायोजन कहते हैं।

नेत्र लेन्स (Eye Lens):-

आइरिस के ठीक पीछे पारदर्शी ऊतक का बना द्वि-उत्तल लेन्स होता है, जिसे नेत्र लेन्स कहते हैं। नेत्र लेन्स का अपवर्तनांक लगभग 1.44 होता नेत्र लेन्स अपने ही स्थान पर मांसपेशियों के बीच टिका रहता है।

ii.

·

सर्पगंधा (राऊल्फिया सपेंटीना)

.

अश्वगंधा (विधानिया सोमनीफेरा)

हींग या डेविल्स डंग (फेरुला आसाफोइटिडा )

Sclera

Cornea

Pupil

इफेड्रा (सामान्य नाम येलो हैम्प वानस्पतिक नाम इफेड्रा स्पीशीज )

गूगल (कॉमिफोरा विटाई)

ब्राह्मी (सेन्टेला एशियाटिका)

Iris

Lens

Vitreous

Retina (cones & rodi)

करेला (मोमोर्डिका चेरेशिया)

iii.

पर्ण द्वारा

तुलसी (ओसिमस सेन्कटम)

ग्वार पाठा (एलोय-वेरा)

iv.

फल द्वारा

अफीम (पेपेवर सेम्नीफ़ेरम)

आँवला (एम्बलिका ऑफ़िसिनेलिस)

मानव नेत्र:-

मानव नेत्र और कर्ण

दो नेत्र दर्शनेन्द्रियाँ होती है, जिनके अध्ययन की शाखा को नेत्रविज्ञान (ophthalmology) कहते हैं आँख लगभग 2.5 मी. व्यास के नेत्र गोलक के रूप में खोपड़ी में स्थित नेत्र कोटर (Eye orbits) में सामने की ओर हल्की सी उभरी होती है। मानव नेत्र का भार 07 ग्राम होता है। जिसका उभरा भाग पारदर्शी होता है। नेत्र गोलक की भित्ति में तीन उप परतें होती है-

1. दृढ़ पटल (Sclera):-

·

मनुष्य का नेत्र एक खोखले गोले के समान होता है। यह बाहर से एक दृढ़ व अपारदर्शी श्वेत परत से ढका रहता है। इस परत को दृढ़ पटल कहते हैं। यह नेत्र के भीतरी भागों की सुरक्षा तथा प्रकाश के अपवर्तन में सहायता करता है।

Ciliary muscles

जलीय द्रव

376

Optic Nerve

कॉर्निया तथा लेन्स के बीच के काँचाभ द्रव (Aqueous Humour ) भाग में जल के समान एक नमकीन पारदर्शी द्रव भरा रहता है, जिसे जलीय द्रव कहते हैं। इसका अपवर्तनांक 1.336 होता है। काँचाभ कक्ष तथा काँचाभ द्रव (Vitreous Humour ) :-

नेत्र लेन्स तथा रेटिना के बीच के भाग को काँचाभ कक्ष कहते हैं। इसमें गाढ़ा, पारदर्शी एवं उच्च अपवर्तनांक वाला द्रव भरा रहता है, इसे काँचाभ द्रव कहते हैं।

3. रेटिना (Retina):-

रक्तक पटल के नीचे तथा नेत्र के सबसे अन्दर की ओर एक पारदर्शी झिल्ली होती है, जिसे रेटिना कहते हैं, इसे दृष्टिपटल भी कहा जाता है। यह प्रकाश सुग्राही होती है तथा इस पर दृष्टि तन्त्रिकाओं (optic (nerves) का जाल फैला रहता है किसी भी वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है। रेटिना के अन्दर दो प्रकार की प्रकाश सुग्राही कोशिकाएँ पाई जाती हैं।

अन्ध बिन्दु (Blind Spot ) :-

रेटिना के जिस स्थान को छेदकर दृष्टि तन्त्रिकाएँ मस्तिष्क को जाती है, वहाँ पर प्रकाश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस स्थान पर प्रकाश सुग्राहिता शून्य होती है, इसे अंधबिंदु कहते हैं।

उत्कर्ष प्रकाश

सिलियरी मांसपेशियाँ (Ciliary Muscles) :-

• यह मस्तिष्क को रेटिना से दृश्य जानकारी पहुँचाता है।

ऑप्टिक तन्त्रिका (Optic Nerve ) :-

.

यह मस्तिष्क में वैद्युत संकेतों को पहुँचाता है।

आइरिस प्रकाश की मात्रा को आँखों तक पहुँचाता है जिसके द्वारा पुतली के आकार को व्यवस्थित किया जाता है।

पुतली का रंग काला होता है, क्योंकि यह किसी भी रंग को परावर्तित नहीं करती है।

समंजन क्षमता

अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसक��� कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है। लेंस की वक्रता पक्ष्माभी पेशियों द्वारा नियंत्रित की जाती है।

पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल हो जाती है लेंस पतला हो जाता है → फोकस दूरी बढ़ जाती है।

←.

पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती जाती है लेंस मोटा हो जाता है फोकस दूरी कम हो जाती है।

दृष्टि दोष तथा उनका संशोधन :-

निकट दृष्टि दोष (Myopia):-

इस दोष में व्यक्ति निकट रखी वस्तुओं को तो स्पष्ट देख सकता है। परन्तु दूर रखी वस्तुओं को वह सुस्पष्ट नहीं देख पाता ऐसे दोषयुक्त व्यक्ति का दूर बिन्दु अनन्त पर न होकर नेत्र के पास आ जाता है।

दोष उत्पन्न होने के कारण :-

·

1. अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्यधिक होना।

2. नेत्र गोलक का लंबा हो जाना।

निवारण :- इस दोष को किसी उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस के उपयोग द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

दूर दृष्टि दोष

(Hypermetropia):-

दूर दृष्टि दोषयुक्त कोई व्यक्ति दूर की वस्तुओं को तो स्पष्ट देख सकता है परन्तु निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाता है। ऐसे दोषयुक्त व्यक्ति का निकट बिन्दु सामान्य निकट बिन्दु (25cm) से दूर हट जाता है।

दोष उत्पन्न होने के कारण :-

·

अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का अत्यधिक हो जाना। नेत्र गोलक का छोटा हो जाना।

निवारण :- इस दोष को उपयुक्त क्षमता के उत्तल लेंस का इस्तेमाल करके संशोधित किया जा सकता है।

मोतियाबिन्द (Cataracts):-

अधिक उम्र के कुछ व्यक्तियों के नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस दूधिया तथा धुंधला हो जाता है। इस स्थिति को मोतियाबिन्द कहते हैं। इस कारण नेत्र की दृष्टि में कमी या पूर्ण रूप से दृष्टि क्षय हो जाती है। मोतियाबिन्द की शल्य चिकित्सा के बाद दृष्टि का वापस लौटना संभव है।

जरा दूरदृष्टिता (Presbyopia):-

·

·

आयु में वृद्धि होने के साथ-साथ मानव नेत्र में समंजन क्षमता घट जाती है क्योंकि मांसपेशियाँ शिथिल हो जाती है। अधिकांश व्यक्तियों का निकट बिन्दु दूर हट जाता है, इस दोष को जरा दूरदृष्टिता कहते हैं। कारण :- यह पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने तथा क्रिस्टलीय लेंस के लचीलेपन में कमी आने पर उत्पन्न होता है।

नेत्र में

निवारण :- उत्तल लेंस के प्रयोग से कभी-कभी किसी व्यक्ति के दोनों ही प्रकार के दोष निकट दृष्टि तथा दूर दृष्टिदोष होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रायः द्वि फोकसी लेंसों की आवश्यकता होती है। जिसमें ऊपरी भाग अवतल लेंस और निचला भाग उत्तल लेंस का होता है।

अबिन्दुकता या दृष्टि वैषम्य (Astigmatism)

ऐसा दृष्टि दोष, जिसमें व्यक्ति एक निश्चित दूरी पर स्थित परस्पर लम्बवत् रेखाओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है, आबिन्दुकता कहलाता है। इसमे क्षैतिज रेखा को देखने पर ऊर्ध्वाधर रेखा अस्पष्ट हो जाती है। इस दोष के निवारण के लिए बेलनाकार लेंस (Cylindrical Lens) का प्रयोग किया जाता है।

जरा दृष्टि दोष (Presbyopia)

व्यक्ति की उम्र बढ़ने के कारण (प्रौढ़ावस्था अथवा वृद्धावस्था में) नेत्र लेंस की लोचशीलता (Elasticity) कम हो जाती है, जिससे न तो पास की और न ही दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं। यह दृष्टिदोष जरा दृष्टि दोष कहलाता है।

इस दोष के उपचार के लिए द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens) का प्रयोग किया जाता है।

श्रवणसन्तुलन ज्ञानेन्द्री अथवा कर्ण

कान द्वारा दो कार्य

सुनना तथा शारीरिक सन्तुलन बनाना ।

Earlobe

Ear Canal

Outer Ear

Inner Ear

Temporal Muscle

Semicircular Canals

Cochlea

Cartilage

Баг Drum

Incus Stapes

Malleus

Middle Ear

LoVestibular Nerve

Auditory Nerve

Tensor

Tympani Muscle

Auditory

Tube

नोट : कान का मूलभूत कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है। इसलिए इन्हें श्रवण संतुलन अंग (Stato acoustic organ) कहते हैं। कान मुख्यतया तीन भागों में विभक्त होता है- बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण तथा आन्तरिक कर्ण ।

बाह्य कर्ण (External Ear) :-

: 377:

इनका बाहरी भाग कर्ण पिन्ना (ear pinna ) कहलाता है, जो अस्थि का बना होता है। इसका दूसरा भाग बाह्य कर्ण कुहर (external auditory meatus) होती है, जो टेम्पोरल हड्डी से घिरी 2.5 सेमी. लम्बी नलिका होती है। इसके भीतरी सिरे पर कर्णपटल झिल्ली ( tympanum) होती है, जिसे कान का पर्दा (eardrum) कहते हैं।

मध्य कर्ण (Middle Ear) :-

·

उत्कर्ष प्रकाशन

इसे कर्णगुहा ( tympanic cavity) कहते हैं, जिसमें तीन छोटी-छोटी कर्ण अस्थियाँ होती है जैसे मैलियस (malleus), इनकस (incus) तथा स्टेपीज (stapes)। ये ध्वनि को यान्त्रिक कम्पनों के रूप में अन्त कर्ण में पहुँचाते हैं। ये ध्वनि ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदलते हैं। अन्तः कर्ण (Internal Ear) :-

· यह अर्द्धपारदर्शक झिल्ली की बनी संरचना होती है, जिसे कलागहन

(membranous labyrinth) कहते हैं। कलागहन अस्थिय गहन (bony labyrinth) होता है अन्तः कर्ण में कोष्ठीय उपकरण (vestibular apparatus) होता है, जो सन्तुलन बनाए रखता है। तथा कॉक्लिय उपकरण (cochlear apparatus) होता है, सुनने का कार्य करने के लिए उत्तरदायी होती है।

श्रवण क्रिया की कार्यिकी (Physiology of Hearing):-

1. वायु की ध्वनि तरंगें हमारे कर्ण पल्लवों से टकराकर कर्ण मार्ग में जाती है, जहाँ कम्पन्न उत्पन्न होता है।

गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन :-

1.

अलिंग गुणसूत्रों (Autosomes) की संख्या में परिवर्तन- डाउन सिंड्रोम / मंगोलिज़्म-

(i)

इसमें रोगी व्यक्ति में 21 वें गुणसूत्र की अतिरिक्त प्रति (Extra Copy) पाई जाती है अर्थात् 21 वें गुणसूत्र की ट्राईसोमी (कुल 47 गुणसूत्र)

व्यक्ति का कद छोटा, आँखें चौड़ी, ऊपरी होंठ कटा हुआ,

कठोर तालु (Hard Palate) में दरार, मानसिक विकास अवरुद्ध | (मंगोल मूर्खता)

(ii)

पटाऊ सिंड्रोम 13वें गुणसूत्र की ट्राईसोमी

(iii)

एडवर्ड सिंड्रोम - 18वें गुणसूत्र की ट्राईसोमी

2. यह कम्पन्न कर्ण अस्थियों से होता हुआ अन्तः कर्ण में पहुँचता है।

3.

अन्तः कर्ण में कॉक्लिय उपकरण द्वारा यह प्रेरणा मस्तिष्क में श्रवण तन्त्रिका तक पहुँचती है।

4. मस्तिष्क से उपयुक्त अपवाहक अंगों (effector organs) को आवश्यक प्रतिक्रिया भेजी जाती है जिससे ध्वनि तरंगों को सुना जाता है।

000

मानव रोग

रोग एक विशिष्ट असामान्य स्थिति है जो जीव के भाग या पूरे जीव की कार्यप्रणाली को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जिसे विशिष्ट संकेतों या लक्षणों द्वारा चिह्नित किया जाता है। रोगों के अध्ययन को पैथोलॉजी (Pathology) के रूप में जाना जाता है।

रोग के प्रकार (Types of Diseases)

संक्रामक रोग (Infectious Diseases)

सूक्ष्म रोगाणु या परजीवी

के कारण जैसे जीवाणु,

कवक, प्रोटोजोअन, कृमि

आनुवंशिक रोग

(Genetic diseases)

आनुवंशिक पदार्थ (गुणसूत्र, जीन, DNA) में विकार या परिवर्तन से

जैसे डाउन सिण्ड्रोम, हीमोफीलिया, एडवर्ड सिण्ड्रोम आदि

असंक्रामक रोग (Non-infectious Diseases)

उन व्यक्तियों तक ही सीमित

रहते हैं जिनमें ये विकसित होते हैं।

जैसे मधुमेह, कैंसर, यकृत सिरोसिस

आनुवंशिक रोग

पर्यावरणीय कारकों के कारण रोग (Diseases due

to environment

factors)

माता-पिता के गुणसूत्र (Chromosomes), जीन, DNA आदि में विकार या परिवर्तन होने से बच्चों में वंशानुगत होने वाले रोग कहलाते हैं।

378

2.

दोनों ही रोगों में बच्चे के चेहरे (नाक, आँख, जबड़े तथा होंठों) का विकास नहीं हो पाता है।

ऐसे बच्चे या तो गर्भावस्था में ही मर जाते हैं अथवा जन्म के कुछ समय बाद मर जाते हैं।

लिंग गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन-

(i)

·

क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (44+XXY) -

'X' गुणसूत्र की ट्राईसोमी हो जाती है।

ऐसे पुरुष में मादा के लक्षण प्रतीत होते हैं।

ऐसे पुरुष बंध्य (Sterile) होते हैं।

(ii) टर्नर सिण्ड्रोम (44+XO) -

'X' गुणसूत्र की मोनोसोमी ।

मादा के लैंगिक लक्षणों का विकास नहीं हो पाता। ये मादा बंध्य होती हैं।

गुणसूत्रों की संरचना में परिवर्तन :-

लिंग गुणसूत्र की संरचना में परिवर्तन

1.

(i)

.

हीमोफिलिया / Bleeder's Disease / शाही रोग इस रोग में X गुणसूत्र पर विकृत जीन होने से रोगी व्यक्ति में रक्त का थक्का नहीं बन पाता है।

रोगी व्यक्ति में कुछ स्कंदन कारक (Blood Clotting Factors) का निर्माण नहीं हो पाता है।

44+XY सामान्य नर

44+XY रोगी नर

44+XX सामान्य मादा

.

44+ XX - वाहक मादा

44+XX रोगी मादा

(ii) वर्णान्धता ( Color Blindness) -

इसमें भी X गुणसूत्र पर विकृत जीन होने से व्यक्ति वर्णाध होता है, ऐसे व्यक्ति रंगों में विभेदन नहीं कर पाते हैं। (मुख्यतया लाल व हरे में रंगों में)

अलिंग गुणसूत्रों की संरचना में परिवर्तन

2.

(i)

-

थैलेसीमिया तथा सिकल सेल एनीमिया दोनों रोगों में RBC में विकृत Hb का निर्माण, जिसमें O2 परिवहन की क्षमता घट जाती है।

(ii) क्राई-डू-कैट / Cat Cry बच्चा रोते समय बिल्ली के जैसी

आवाज़ उत्पन्न करता है।

रोग टी.बी. / ट्यूबरक्यूलो सिस / तपेदिक

रोगकारक मायकोबेक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस

टायफाइड / ऑत्र- anter/Slow-Fever

साल्मोनेला टाइफी

/ मियादी बुखार

हैजा / कॉलेरा

विब्रियो कॉले

/ विसूचिका

डिफ्थीरिया / गलघोंटू

कोर्निबैक्टीरियम डिफ्थीरियाई

बेसिलस एंथेसिस

उत्कर्ष प्रकाशन

बैक्टीरिया जनित रोग

लक्षण

सामान्यतया फेफड़े (Lungs) प्रभावित, अन्य अंगों में भी | DOTS संक्रमण हो सकता है। लम्बे समय तक खाँसी (Cough) वजन में कमी, हल्का बुखार, भूख न लगना।

सर्वप्रथम आँतों (Intestines) में संक्रमण, उल्टी-दस्त बुखार, अल्सर (Ulcer) होना, मल के साथ रक्त।

उल्टी-दस्त एवं तेज बुखार ।

इसमें गले व श्वसन पथ में संक्रमण से श्वासनली (Trachea ) अवरुद्ध हो जाती है जिससे श्वास लेने में कठिनाई होती है।

उपचार / परीक्षण / वैक्सीन

(Direct Observation Treatment Short Course ) टीका / वैक्सीन | काल्मेट गुऐरिन)

-

टेस्ट विडाल टेस्ट |

B.C.G. (बैसिलस

ORS घोल (Oral Rehydration Solution)

वैक्सीन D. P. T. वैक्सीन

तेज एवं लम्बे समय तक चलने वाली खाँसी जिसमें खाँसते वैक्सीन D. P. T. | समय बच्चे के गले से कुत्ते के पिल्ले जैसी आवाज उत्पन्न होती है।

ये बैक्टीरिया मांसपेशियों (Muscles) की गतियों को प्रभावित करता है। पूरे शरीर में सेप्सिस (Sepsis संक्रमण पूरे शरीर में) का खतरा, जबड़े की पेशियाँ प्रभावित होने से मुँह खुल नहीं पाता है।

त्वचा पर फफोले (Blisters), श्वसन पथ में संक्रमण, तेज बुखार |

वैक्सीन D. P. T., ATS (एंटी टिटनेस सीरम )

परट्यूसिस / काली

हीमोफिलस

या

खाँसी /100 Days

बोर्डेटला परट्यूसिस

Cough / कुकर

खाँसी

टिटेनस (Tetanus)

/ Lock Jaw

क्लोस्ट्रीडियम टिटेनाई

एक्स

प्लेग / काली मोत (Black Death) कुष्ठ रोग (Leprosy)

पाथुरेला पेस्टिस

मायकोबैक्टीरियम लैप्री

निमोनिया

(Pneumonia)

डिप्लोकोकस / स्ट्रेप्टो कोकस न्यूमोनियाई

गोनेरिया

नेस्सिरिया गोनोराई

(Gonorrhea) / सुजाक

जननांगों (Genital Organs) के पास घाव होना, तेज उपचार एंटीबायोटिक दवाएँ खुजली (Itching), जनन क्षमता में कमी।

सिफलिस (Syphilis)

ट्रपोनेमा पैलिडम

तेज बुखार, शरीर के दूरस्थ हिस्सों में गेंग्रीन, जिससे ये भाग काले पड़ने लगते हैं।

शरीर के दूरस्थ अंग पर सफेद दाग बनते हैं तथा यहाँ की कोशिकाएँ नष्ट होती रहती है, जिसमें अंग गलने लगते हैं।

BCG वैक्सीन इसमें भी उपयोगी एंटीबायोटिक दवाएँ (MDR थैरेपी) परीक्षण लेप्रोमिन टेस्ट

-

सामान्यतया बच्चों में तेज बुखार तथा फेफड़ों (Lungs) में उपचार एंटी बायोटिक दवाएँ संक्रमण जिससे श्वास लेने में कठिनाई होती है। टीका P.C.V.

रोग

रोगकारक

पोलियो मायलाइटिस

पोलियो वायरस

स्मॉल पॉक्स / चेचक/ बड़ी माता चिकन पॉक्स / छोटी माता

बेरियोला वायरस

वेरीसेला वायरस

गोनेरिया के समान ही लेकिन इसमें व्यक्ति की याद्दाश्त उपचार एंटीबायोटिक दवाएँ (Memory) भी कमजोर होने लगती है।

वायरस जनित रोग

लक्षण

सर्वप्रथम आँतों में संक्रमण, तंत्रिकाओं (Nerves) एवं पेशियों (Muscles) को प्रभावित करता है, अस्थि मज्जा को भी नष्ट कर देता है जिससे व्यक्ति को विकलांगता हो जाती है। तेज बुखार शरीर पर दाने (Blisters) जो ठीक हो जाने के बाद भी त्वचा पर गड्ढे के रूप में दिखाई देते थे। अत्यधिक तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर तरल से भरे दाने (Blisters)

उपचार / परीक्षण / वैक्सीन वैक्सीन IP. V. ( Inactivated Polio Vaccine), OPV (Oral Polio Vaccine)

379

डेंगू (Dengue)

हिपेटाइटिस / यकृत शोध

डेंगू वायरस, आरबो

वायरस

हिपेटाइटिस वायरस (A,B,C,DE)

रुबियोला वायरस

Measles / खसरा / मीजल्स

Mumps / गलसुआ

पेरामिक्सो वायरस

Rubella / रुबेला

रुबेला वायरस

जर्मन खसरा

एड्स

(AIDS-

Acquired

HIV

Immuno Deficiency

Syndrome)

रेबीज

(Hydrophobia)/

रैन्डो वायरस

जलभित्ति

इबोला वायरस रोग

इबोला वायरस

(EVD)

निपाह (Nipah) रोग

निपाह वायरस

स्वाइन फ्लू

फ़्लू वायरस (H- 1N1)

मर्स कोरोना

MERS (Middle East

Respiratory

Syndrome)

वायरस ।

COVID-19

SARS-COV-2 वायरस

Eye flu

मलेरिया

रोग

-

-

उत्कर्ष प्रकाश

तेज बुखार शरीर में दर्द (हड्डी तोड़ बुखार 3-4 दिन तक)

प्लेटलेट्स की संख्या में कमी।

रक्त स्रवण (Bleeding)

यकृत (Liver) में सूजन (Swelling) व संक्रमण, वजन में कमी, बुखार रहना, पाचन क्रिया प्रभावित, ज्यादा संक्रमण होने पर मृत्यु ।

गले में संक्रमण, खाँसी बुखार, शरीर पर लाल रंग के दाने (Blisters) उभरना ।

पेरोटिड लार ग्रंथि में सूजन, तेज बुखार, कभी-कभी जननांगों में सूजन जिससे व्यक्ति की जनन क्षमता समाप्त होती जाती है। सामान्य ख़सरे के समान लेकिन इसमें लक्षण ज्यादा समय तक, आँखों में सूजन।

वैक्सीन MMR वैक्सीन ।

टीका MMR वैक्सीन

टीका MMR वैक्सीन

व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में कमी। परीक्षणELISA (Enzyme Linked

(WBC की संख्या में कमी)

- वजन धीरे-धीरे कम होना।

द्वितीयक संक्रमण

Multiple Organ Failure - अंतत: मृत्यु । रोगी व्यक्ति को तेज बुखार, उल्टी-दस्त, गले की पेशियों (Muscles) में तीव्र संकुचन (Contractions) होने से तेज दर्द, जो जल पीते समय और बढ़ जाता है। रोगी जल देखकर डरने लगता है।

जिस जंतु ने काटा वह भी पागल हो जाता है तथा 2-3 सप्ताह में मृत्यु हो जाती है। तेज बुखार, खांसी-जुकाम, शरीर से रक्त स्रवण

तेज बुखार, उल्टी-दस्त, श्वसन में परेशानी।

श्वसन पथ में संक्रमण, तेज बुखार एवं जुकाम

श्वसन पथ में संक्रमण |

Immunosorbent Assay) टेस्ट, यह

परीक्षण PCR तकनीक पर आधारित है। - वेस्टर्न ब्लॉट परीक्षण |

उपचार बचाव ही उपचार है।

उपचार एंटी रेबीज़ दवाएँ, कुत्तों व अन्य जंतुओं का टीकाकरण

उपचार लक्षणात्मक उपचार।

उपचार लक्षणात्मक (मृत्युदर अधिक)

उपचार लक्षणात्मक उपचार।

| वैक्सीन स्वाइन फ़्लू वैक्सीन

उपचार लक्षणात्मक

तेज बुखार, श्वसन पथ एवं फेफड़ों में संक्रमण, रक्त में O2 का परीक्षण स्तर कम होना, खाँसी एवं जुकाम

एडिनो वायरस

आँखें लाल गुलाबी

प्रोटोजोआ जनित रोग

रोगकारक

लक्षण

वाइवेक्स,

अमीबीय पेचिश (Amoebic Dysentery)

लीश्मेनिएसिस / काला अजार / Black-fever ट्रिपेनोसोमिएसिस ( अफ्रीकन ) / निद्रा रोग पायरिया

प्लाज्मोडियम

फैल्सीपेरम (सबसे घातक) संक्रमित मच्छर के काटने से एण्ट अमीबा हिस्टोलाइटिका

लीश्मानिया डोनोवानी

ट्रिपेनोसोमा ब्रूसी गैम्बियेन्स

एन्टीअमीबा जिन्जिवेलिस

-

RT-PCR (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन)

वैक्सीन कोवेक्सिन, कोक्शिील्ड, स्पूतनिक-V, जॉनसन एंड जॉनसन, सिनोफार्म, सिनोवेक, नोवावैक्स, जायकोव-D, मॉडर्ना, फाइजर

रात्रि में तेज बुखार के साथ कंपकंपी (Shivering)

- लम्बे समय तक संक्रमण रहने पर एनीमिया । RBC की संख्या में कमी

उपचार / परीक्षण / वैक्सीन उपचार सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त कुनैन सल्फेट |

उल्टी-दस्त, तेज बुख़ार, ऑत्रीय अल्सर, मल के साथ रक्त परीक्षणमल परीक्षण

उपचार एंटीबायोटिक एवं ORS विलयन दवाएँ

बुखार, RBC नष्ट होने लगती है, शरीर पर काले रंग के दाने एंटीबायोटिक दवाएँ (Blisters)

व्यक्ति (रोगी) में जैविक घड़ी (Biological Clock) एंटीबायोटिक दवाएँ प्रभावित होती है जिससे रोगी को नींद ज्यादा आती है। दाँतों से खून, मुँह से बदबू तथा दाँतों का ढीला होकर गिरना

380

रोग

रोगकारक

फाइलेरिया / हाथी पाँव | वुचेरेरिया बेन्क्रोफ़्टाई

(Elephantiasis)/

श्लीपद / फील पाँव

एस्केरिएसिस

एस्केरिस

टीनिएसिस

टीनिया

सोलियम / फीतरकमि

नारू रोग

कृमि (Nematodes) जनित रोग

लक्षण

| ये लसिका ग्रंथियों (Lymph Nodes) में संक्रमण करते हैं तथा पैरों में लसिका का जमाव होने लगता है, जिससे पाँवों में सूजन आ जाती है।

आँतो में संक्रमण से पेट दर्द एवं वजन नहीं बढ़ता,

आँत संक्रमित हो जाती है, ज्वर, वजन में कमी

कनक्यूलस मेडी नेंसिस इसमें कृमि शरीर पर बने फफोलों से बाहर निकलते हैं।

उपचार / परीक्षण / वैक्सीन उपचार कृमिनाशक दवाएँ,

सर्जरी

-

उपचार कृमिनाशक दवाएँ उपचार- कृमिनाशक दवाएँ

उपचार कृमिनाशक दवाएँ

-

कवक जनित रोग

रोग

रोगकारक

लक्षण

म्यूकर, राइजोपस जैसे कवकों से यह फंगस / कवक ऐसे व्यक्तियों में जल्दी संक्रमण करता है, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो, ज्यादा समय से स्टीरॉइड का सेवन कर रहे हों या डायबिटीज से पीड़ित हो। इनमें श्वसन पथ में संक्रमण होता

म्यूकरमाइकोसिस

(Black Fungus)

एथलीट फुट गंजापन

एपिडर्मोफायटॉन कवक

यीस्ट

वनस्पति विज्ञान

पादप जगत

Plant Kingdom

है जिससे आँखें, जबड़े तथा फेफड़े नष्ट होने लगते हैं।

पैरों में संक्रमण। बाल अधिक झड़ना

थैलोफाइटा ब्रायोफाइटा टेरिडोफाइटा जिम्नोस्पर्म एंजियोस्पर्म

थैलोफाइटा:-

.

·

·

क्रिप्टोगेम्स

फल व बीज का निर्माण नहीं

फल व बीज का निर्माण होता है। फेनेरोगेम्स

इन पादपों में जड़, तना, पत्ती अनुपस्थित तथा भ्रूण का निर्माण भी नहीं होता है। पादप की संरचना थैलस के समान होती है जैसे- शेवाल, कवक, जीवाणु इत्यादि ।

शैवाल (Algae)- यह पौधों का सबसे आध्य एवं विशाल समूह है। इनकी कोशिकाओं में पर्णहरित पाया जाता है ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कर सकते हैं।

पृथ्वी पर 90% प्रकाश संश्लेषण इन्हीं के द्वारा होता है। इन पादपों में जड़, तना तथा पत्ती का विभेदन नहीं होता है। इनमें संवहनी तंत्र (जाइलम, फ्लोएम) भी नहीं पाए जाते हैं।

जेलिडियम एवं ग्रैसिलेडिया नामक लाल शैवालों से अगर अगर का उत्पादन होता है। यह आइसक्रीम, कृत्रिम रेशे, ध्वनि रोधक एवं ताप रोधक पदार्थ बनाने, दवाइयों के सिरप बनाने के काम आता है। हरे शैवालों के जैसे क्लेमाइडोमोनास, क्लोरेला, यूलानिक्स, अलवा, स्याइरागायरा, एसिटाबुलेरिया, कारा, क्लेडोफोरा ।

क्लोरेला को अन्तरिक्ष यात्री O2 प्राप्त करने के लिए ले जाते हैं। एसिटाबुलेरिया सबसे लम्बी एक कोशिकीय पादप कोशिका हैं। अल्बा को समुद्री सलाद के रूप में भोजन के रूप में काम में लेते हैं।

उपचार / परीक्षण

हाइड्रा के साथ जूक्लोरेला नामक हरा शैवाल सहजीवी सम्बन्ध बनाता है।

शैवालों में-

क्लोरोफाइसी हरा वर्णक रोडोफाइसी लालवर्णक फीयोफाइसी भूरावर्णक

ब्रायोफाइटा:-

इन्हें पादप जगत के उभयचर (Amphibians of plant kingdom) भी कहते हैं क्योंकि ये पादप जनन क्रिया के लिए जल पर निर्भर तथा जीवन की अन्य अवस्थाएँ नम एवं छायादार स्थानों पर पूरी करते हैं तथा मृदा अपरदन को बचाते हैं। उदा:- लिवरवर्ट, हॉर्नवर्ट

संवहन तंत्र विकसित नहीं होता।

टेरिडोफाइटा:-

प्रथम पूर्णतः स्थलीय पादप ।

इनमें तने व पत्ती का निर्माण हो जाता है लेकिन पूर्ण विकसित जड़ों

का अभाव।

इन पादपों को निषेचन हेतु जल की आवश्यकता होती है। उदा.- फर्न

कुछ फर्न का बड़े व सुन्दर दिखने के कारण उद्यानों में इन्हें सजावट के रूप में उगाया जाता है।

जिम्नोस्पर्म / अनावृत्तबीजी पादप

जिम्नोस्पर्म पूर्ण रूप से सफल स्थलीय पादप है क्योंकि निषेचन हेतु जल की आवश्यकता नहीं होती है।

इन पादपों में जड़, तना, पत्ती पूर्ण रूप से विकसित लेकिन बीज फल से ढके नहीं होते हैं इसलिए ये नग्न बीजी पादप भी कहलाते हैं। इनका आवास ठण्डे, शीतोष्ण क्षेत्र (जिम्नोस्पर्म कम जल मात्रा एवं अधिक वायु वेग के लिए अनुकूलित) जिसे "Xerophytic" अनुकूलन कहते हैं। उदा: पाइनस, गिंको, इफेड्रा आदि।

आर्थिक महत्त्व

जूनिपेरस विर्जिनियाना का उपयोग पेन्सिल बनाने में कागज उद्योग में।

381

उत्कर्ष प्रकाशन

• इफेड्रा की स्पीशीज से प्राप्त एल्केलॉइड को इफेड्रिन कहते हैं, जिसका उपयोग खाँसी, अस्थमा तथा ब्रोंकाइटिस के उपचार के लिए औषधि तैयार करने में किया जाता है।

एंजियोस्पर्म / आवृत्तबीजी पादप

4. जड़ों के शीर्ष पर एककोशिकीय लम्बी पतली संरचनाएँ पाई जाती है, जिन्हें मूल रोम (root hairs) कहते हैं।

5. जड़ों पर पर्व (nodes) व पर्वसन्धियाँ (internodes) नहीं पाई जाती है।

ये पादप जगत के सबसे विकसित सदस्य जिनमें जड़, तना, पत्ती पूर्ण पादपों के जड़ तन्त्र (Root System of Plants ):- विकसित तथा बीज फल से ढके होते हैं।

ये पादप लगभग सभी आवासों में पाए जाते हैं।

पुष्पीय पौधों के विभिन्न भागों से मसाले प्राप्त किए जाते हैं। जैसे- धनिया, मिर्च, जीरा और सूप आदि।

एंजियोस्पर्म पादप बीजपत्रों (Seed Coat) की संख्या के आधार पर 2 प्रकार के होते हैं-

A. एकबीज पत्री पादप / Monocots:-

. इनमें बीज के चारों ओर केवल 1 आवरण उपस्थित।

.

उदा:- अनाज, गेहूँ, ज्वार आदि ।

.

इनमें बीज के चारों ओर आवरण उपस्थित |

B. द्विबीजपत्री पादप / Dicots:-

उदा:- चना, मटर, सेम फली आदि।

पादप आकारिकी (Plant Morphology)

'आकारिकी' (Morphology) जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें पादपों की बाह्य आकृति तथा उसके विभिन्न प्रकारों का अध्ययन किया जाता है। उदाहरण- जड़, तना, पत्ती, पुष्प एवं फल |

पादप के विभिन्न भाग (Different Parts of the Plant ):- • पुष्पीय पादपों में एक लम्बी बेलनाकार अक्ष होती है, जो भूमिगत जड़ तथा हवा में पाए जाने वाले तने में विभेदित होती है। जड़ तन्त्र में जड़ें तथा उनकी शाखाएँ होती है तथा तना तन्त्र में तने, शाखाएँ व पत्तियाँ होती है। जड़, तने तथा पत्तियाँ पादप के कायिक अंग (vegetative organs) होते हैं, जबकि पुष्पीय पादपों में वृद्धि के पश्चात् फूल, फल तथा बीज बनते हैं, जिन्हें प्रजनन अंग (reproductive organs) कहते हैं। जड़ (Root) :-

पौधे का वह भाग, जो भ्रूण के मूलांकुर (radicle) से विकसित होता है, जड़

कहलाता है। जड़ सामान्यतया भूमिगत होती है। इसका मुख्य कार्य पादपों को भूमि पर स्थिर रखना तथा भूमि से जल व खनिज लवणों का अवशोषण करना है। यह प्रकाश के विपरीत तथा भूमि की तरफ बढ़ती है।

कलिक

1.

पादपों के साधारणतया दो प्रकार के जड़ तन्त्र होते हैं जो निम्नलिखित है-

अपस्थानिक जड़ें (Adventitious Roots ):-

इस प्रकार की जड़ें एकबीजपत्री पादपों में पाई जाती है। इन पादपों में मूलांकुर अंकुरण के बाद शीघ्र नष्ट हो जाते हैं। इनमें प्राथमिक जड़ बहुत ही अकाल्पनिक होती है।

बाद में पादपों के किसी अन्य स्थान जैसे तने की निचली पर्वों से जड़ें उत्पन्न होती है। इस प्रकार की जड़ों के समूह को रेशेदार जड़ तन्त्र (fibrous root system) कहते हैं। अपस्थानिक जड़ों के रूपान्तरण

(Modifications of Adventitious Roots ) :-

2.

अपस्थानिक जड़ें भोजन संग्रह तथा यांत्रिक सहारा देने के लिए विभिन्न प्रकारों में रूपान्तरित होती है-

I.

II.

कन्दिल जड़ें (Tuberous Roots ):- उदाहरण- शकरकन्द (Ipomoea batatas )

कन्दगुच्छ या पुलिकित जड़ें (Fasciculate Roots ):- उदाहरण- डहेलिया (Dahlia), सतावर (Asparagus)। II तन्तुमय जड़ें (Fibrous Roots ):- उदाहरण- गेहूँ, मक्का, घास आदि।

मूसला जड़ तन्त्र (Tap Root System):-

इन जड़ों में मूलांकुर से विकसित प्राथमिक जड़ वृद्धि करके मुख्य जड़ के रूप में होती है। ये जड़ें प्रायः द्विबीजपत्री पादपों में पाई जाती है। मूसला जड़ों के रूपान्तरण (Modifications of Tap Roots ):- जड़ों द्वारा किए गए कार्य के आधार पर मूसला जड़ों को तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित किया गया है-

मूल

(i)

कलिका

तना

जड़

जड़ों के विशिष्ट लक्षण (Characteristics of Roots):- 1. जड़ प्रकाश से दूर (negatively phototrophic) तथा भूमि की आकर्षण शक्ति की ओर (positively geotropic) जाती है।

2. जड़ों में पर्णहरित नहीं पाया जाता है इसलिए इनका रंग भूरा होता है।

3. जड़ों के शीर्ष पर एक टोपीनुमा संरचना मूल गोप (root cap)

पाई जाती है।

: 382

संचित जड़ें (Storage Roots ) :-

कुछ पादपों में प्राथमिक जड़ें, भोजन संचित करने हेतु रूपान्तरित हो जाती है। ये जड़ें मुख्यतया फूली हुई मोटी होती है तथा निम्नलिखित प्रकार की होती है-

(a) तर्कुरूप (Fusiform ):-

इस प्रकार की जड़ें भोजन संचय के कारण बीज में मोटी तथा दोनों किनारों की ओर पतली होती है। इनसे द्वितीयक तथा तृतीयक जड़ें निकलती है; उदाहरण मूली (Raphanus sativa)।

(b) शंकुरूप (Conical):-

.

ये जड़ें भोजन संचय के कारण ऊपर से मोटी तथा नीचे की ओर क्रमश: पतली होती है; उदाहरण- गाजर।

(c) कन्दिल मूसला जड़ें (Tuberous Tap Roots ):- ये जड़ें किसी स्थान पर फूलकर मोटी हो जाती है तथा इनकी कोई निश्चित आकृति नहीं होती है। उदाहरण- मिराबिलिस । (ii) न्यूमेटोफोर (Pneumatophores or Respiratory Roots ):- ये जड़ें दलदली स्थानों पर उगने वाले पादपों में पाई जाती है। ये ऊपर वायु में निकल आती है तथा इन पर छोटे-छोटे छिद्र पाए जाते हैं, जिन्हें न्यूमेथोड्स कहते हैं उदाहरण राइजोफोरा ।

यांत्रिक सहारा प्रदान करने वाली रूपान्तरित जड़ें:-

उत्कर्ष प्रकाशन

(Modified Roots for Providing Mechanical Support):-

(i)

(!!)

स्तम्भ जड़ें:- उदाहरण- बरगद, रबड़।

अवस्तम्भ जड़ें:-:- उदाहरण मक्का, गन्ना, सौरगम, राइजोफोरा । (iii) आरोही जड़ें उदाहरण पान, प्लांट, पोथोस।

जड़ों के कार्य (Functions of Roots ) :-

1.

2.

3.

4.

ये पादप को यांत्रिक सहायता देती है ये पादपों की स्थिरता बनाए रखती है।

ये

मृदा से जल तथा खनिज लवणों का अवशोषण करती है।

ये जल तथा खनिज लवणों का परिवहन करती है।

कुछ जड़ें भोजन संचित करने का भी कार्य करती है।

तना (Stem ):-

• पौधे का वह भाग जो प्राकुंर (radicle) से विकसित होता है, तना कहलाता है, यह भूमि के ऊपर होता है, प्रकाश की ओर तथा भूमि के विपरीत वृद्धि करता है। यह पेड़ का यांत्रिक सहारा एवं दृढ़ता होता है। तनों के विशिष्ट लक्षण (Characteristics of Stems) :-

1.

3.

(iii) भूस्तारिका (Offsets) :- उदाहरण जलकुम्भी, पिस्टिया । (iv) चूषक ( Sucker ) :- उदाहरण गुलाब, लिली ।

वायवीय तनों के रूपान्तरण (Modifications of Aerial __Stems):-

ये तने पूर्ण रूप से पृथ्वी के ऊपर होते हैं, जिस पर पर्व, पर्व सन्धियों, कलिकाएँ, पुष्प, फल, पत्ती आदि होते हैं वायवीय तने निम्नलिखित प्रकार से रूपान्तरित होते हैं-

1. प्रतान (Tendrils ) :- उदाहरण कुकुरबिटा, लौकी, अंगूर । 2. कंटक (Thorn) :- उदाहरण- नीबू बोगेनविलिया, अनार (pomegranate)।

3. पर्णकाय (Phylloclade):-

(Opuntia), कैक्टस (cactus) ।

उदाहरण- नागफनी

4. पत्र प्रकलिका (Bulbils ) :- उदाहरण ग्वार ( Aloe), अगेव (Agave), रसकस (Ruscus) ।

तने के कार्य (Functions of Stems ) :-

1.

तने प्रकाश की ओर (positively phototrophic) तथा भूमि से | 2. दूर (negatively geotropic) जाते हैं।

तने पर कलिकाएँ (buds) पाई जाती है।

2.

3.

तने पर शाखाएँ तथा पत्तियाँ पाई जाती है।

4.

तनों पर पर्व व पर्वसन्धियाँ पाई जाती है।

तनों के प्रकार (Different Types of Stems):-

1.

2.

3.

तने मिट्टी में स्थान के आधार पर निम्नलिखित प्रकार के होते हैं- वायवीय तने (Aerial Stems):- ये तने मृदा के ऊपर उगते हैं। उदाहरण- नीबू, गुलाब।

उपवायवीय तने (Subaerial Stems ):- ये तने भूमि पर रेंगते हैं। उदाहरण जलीय पादप, घास।

भूमिगत तने (Underground Stems) :- ये तने भूमि के अन्दर पाए जाते हैं ये भोजन को संचित कर मोटे हो जाते हैं। उदाहरण- आलू, प्याज, लहसुन, हल्दी ।

तनों के रूपान्तरण (Modifications Stems ) :-

·

1.

·

2.

·

पादपों के तने विभिन्न कार्य, जैसे-पोषण, कायिक संवर्द्धन, संचय करने हेतु रूपान्तरित हो जाते हैं ये मुख्यतया तीन प्रकार के होते हैं- भूमिगत तनों के रूपान्तरण (Modifications of Stems ):- निम्नलिखित कार्यों को करने के लिए भूमिगत तने रूपान्तरित हो जाते हैं-

(i) चूषक ( Sucker ) :- उदाहरण केला

(ii) प्रकन्द ( Rhizome ) :- उदाहरण- अदरक (जिजिबर ऑफिसिनेल), हल्दी, केला ।

(iii) घनकन्द (Corm ) :- उदाहरण जिमीकन्द

(iv) स्तम्भ (Tuber):- उदाहरण आलू, गुलाब।

(v) शल्ककन्द ( Bulb ) :- उदाहरण प्याज, लहसुन। अर्द्धवायवीय तनों के रूपान्तरण (Modifications of Subaerial Stems) :-

इनका कुछ भाग भूमि के अन्दर तथा कुछ भूमि के ऊपर पाया जाता है। इनमें कायिक जनन भी होता है। ये तने निम्नलिखित प्रकार से रूपान्तरित होते हैं-

(i) उपरिभूस्तरी ( Runner ) :- उदाहरण दूब, घास। (ii) भूस्तरी (Stolon) :- उदाहरण- पौदीना, जैस्मीन, स्ट्रॉबेरी ।

383

3.

4.

ये पत्तियों तक जल व खनिज पहुँचाने में सहायता करते हैं।

इन पर पत्तियाँ, शाखाएँ तथा फल लगते हैं तथा उन्हें इस क्रम में रखता है जिससे उन्हें अधिकतम सूर्य का प्रकाश मिलता रहे।

ये पादपों को स्थिर रखता है तथा सहारा प्रदान करता है। ये फूलों को सही जगह पर लगाकर उनके परागण में सहायता करते हैं। पत्ती (Leaf):-

पत्ती तने तथा शाखाओं पर पर्व से निकलती है। ये हरी, चपटी तथा पतली होती है, जो अधिकतम प्रकाश संश्लेषण करती है। तने व शाखाओं पर पत्तियों के लगने के क्रम को फाइलोटेक्सी (phyllotaxy) कहते हैं। पत्तियों की पत्रफल पर शिराओं के क्रम को शिराविन्यास (venation) कहते हैं।

पत्ती के विशिष्ट लक्षण (Characteristics of Leaf):- पत्ती के अक्ष पर सहायक कलिका होती है।

1.

2.

3.

पत्ती की वृद्धि सीमित होती है।

यह वृद्धि करते हुए चोटी वाले भाग से विकसित होती है। पत्तियों के रूपान्तरण (Modifications of Leaves ):- ये निम्नलिखित रूप से रूपान्तरित हो जाती है-

1.

2.

3.

4.

5.

कंटकी (Spiny ) :- इसमें पर्णफलक काँटेदार होता है। उदाहरण- धींग्वार, बारबेरी, कटेली (Argemone ) एवं अनानास (pineapple)

घटपर्णी (Pitcher ):-

इसमें पर्णाधार चपटा तथा फलक घटक का आकार ले लेता है, जिसके ऊपर ढक्कन होता है। इनके अन्दर पाचक रस होते हैं, जो अन्दर आए कीट को पचा लेते हैं। उदाहरण नेपेन्थीस (Nepenthes) । ब्लेडर वॉर्ट (Bladder Wort ) :-

ये घटपर्णी जैसे होते हैं परन्तु जलीय पादपों में पाए जाते हैं। उदाहरण- यूट्रीकुलेरिया (Utricularia)।

चूषक पत्तियाँ ( Sucker Leaves ):-

ये पत्तियाँ गूदेदार व फूली हुई होती है, जो भोजन, जल आदि का संचय करती है। उदाहरण धींग्वार, अंगेव, ब्रायोफिलम। कंटक पत्तियाँ :-

ये विशिष्ट पत्तियाँ होती है, जो अपने फूल, कली या मुलायम भागों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए रूपान्तरित होती है। इनके ऊपर एक पारदर्शी परत पाई जाती है, जो कन्द बनाते हैं। उदाहरण- लहसुन,

प्याज।

रंगीन पत्तियाँ :-

उत्कर्ष प्रकाश

6.

·

ये पत्तियों, कीटों को परागण हेतु अपनी ओर आकर्षित करने के लिए

7.

रंगीन रूपान्तरण ले लेती है। उदाहरण पाइनसीटिया

पुष्पीय पत्तियाँ (Floral Leaves):-

ये विशिष्ट पत्तियाँ होती है। उदाहरण बाह्य बल, दल, पुंकेसर,

स्त्रीकेसर |

पत्तियों के कार्य

(Functions of Leaves) :-

1.

2.

3.

4.

5.

ये पादपों में प्रकाश संश्लेषण करने का मुख्य भाग है।

पत्तियों पर रन्ध्र पाए जाते हैं, जिनसे वाष्पोत्सर्जन तथा गैसों का आदान-प्रदान होता है।

वाष्पोत्सर्जन द्वारा पादप में तापमान अनुकूल बना रहता है। पत्तियाँ अक्षीय व सहायक कलिकाओं को सुरक्षा प्रदान करती है। कुछ पत्तियाँ भोजन संचय, प्याज में करती है। वर्धी प्रजनन (vegetative reproduction) एवं परागण (pollination) में भी सहायता करती है।

पादप ऊतक

·

.

जीवों में एक समान कार्य करने वाली तथा समान संरचना दर्शाने वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक (Tissue) कहलाता है।

कोशिकाओं के बीच पाया जाने वाला तरल पदार्थ ऊतक द्रव्य (Tissue Fluid) कहलाता है, इस ऊतक द्रव्य से कोशिकाएँ पोषक पदार्थ (Nutrients) ग्रहण करती हैं तथा उत्सर्जी पदार्थों को इस ऊतक द्रव्य में त्याग देती हैं।

ऊतकों का अध्ययन (Study of Tissues) :- 'औतिकी' (Histology), को 'सूक्ष्म शरीर रचना विज्ञान' (Microscopic Anatomy) भी कहते हैं।

'ऊतक' शब्द बिशेट ने तथा 'हिस्टोलॉजी' शब्द मेयर ने दिया। हिस्टोलॉजी की स्थापना मार्सेलो मेल्पीपी ने की।

ऊतक दो प्रकार के होते हैं-

1. पादप ऊतक

2. जन्तु ऊतक

1.

पादप ऊतक:-

.

A. विभज्योतक ऊतक

B.

(ii) अन्तर्वेशी विभज्योतक ऊतक:-

स्थायी ऊतकों के मध्य लगातार विभाजन दर्शाने वाली कोशिकाओं का समूह, अन्तर्वेशी विभज्योतक ऊतक कहलाता है। उदाहरण- पोएसी कुल (घास) पशुओं के घास खाने के पश्चात् घास का पुनः बढ़ जाने का कारण अन्तर्वेशी विभज्योतक ऊतक है।

(iii) पार्श्वीय ( कैंबियम) विभज्योतक ऊतक:-

मेरिस्टेम जो बहुत-से पौधों की मूल तथा प्ररोह के परिपक्व क्षेत्रों में होते हैं, विशेष रूप से ये काष्ठीय कक्ष बनाते हैं और प्राथमिक मेरिस्टेम के बाद उत्पन्न होते हैं, उन्हें द्वितीयक अथवा पार्श्वीय मेरिस्टेम कहते हैं। तने की वृद्धि या मूल में वृद्धि अर्थात् द्वितीयक वृद्धि पार्श्वीय विभज्योतक ऊतकों के कारण होती है।

स्थायी ऊतक:-

जब विभज्योतक ऊतकों में विभाजन की क्षमता समाप्त हो जाती है, तो उसे स्थायी ऊतक कहा जाता है।

स्थायी ऊतक को दो भागों में बाँटा जाता है-

1.

सरल स्थायी ऊतक:-

सरल स्थायी ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित होते

हैं तथा उनके कार्य एक समान होते हैं।

• उदाहरण पैरेनकाइमा, कोलेनकाइमा तथा स्केलेरेनकाइमा ।

a. मृदुतक (पैरेनकाइमा ):-

• इनकी कोशिकाओं के मध्य अन्तराकोशिकीय अवकाश पाए जाते हैं। इनकी भित्ति सेल्युलोज की बनी होती है। इनकी कोशिकाएँ गोल, अण्डाकार अथवा संकरी होती है। पैरेनकाइमा के निम्न कार्य हैं- प्रकाश संश्लेषण, संचय और स्रवण आदि।

b. स्थूलकोण ऊतक ( कोलेनकाइमा ):-

• यह द्विबीजपत्री पादपों की बाह्य त्वचा के नीचे पाए जाते हैं। इनकी कोशिकाएँ गोल, अण्डाकार तथा बहुकोणीय होती है। इसकी भित्ति पतली होती है परन्तु कोनों पर सेल्युलोज, पेक्टीन तथा हेमीसेल्युलोज पाया जाता है।

कोलेनकाइमा के कार्य:-

A.

·

पादप शरीर में कोशिकाओं के समूह को पादप ऊतक कहा जाता है। पादप ऊतक को दो भागों में बाँटा जाता है-

B. स्थायी ऊतक

विभज्���ोतक ऊतक (Meristematic Tissue) :-

कोशिकाओं का वह समूह जिसमें निरंतर विभाजन हो, उसे विभज्योतक ऊतक कहा जाता है।

पौधों में वृद्धि मुख्य रूप से सक्रिय कोशिका विभाजन वाले विशिष्ट

क्षेत्रों तक ही सीमित होती है। इस क्षेत्र को मेरिस्टम कहते हैं।

पादप ऊतक संवर्द्धन में विषाणु मुक्त पादप प्राप्त करने के लिए विभज्योतक ऊतक का उपयोग किया जाता है।

विभज्योतक ऊतक को तीन भागों में बाँटा जाता है-

(i)

·

शीर्षस्थ विभज्योतक ऊतक:-

पौधों की मूल तथा तने के शीर्ष भाग में लगातार विभाजन करने वाली कोशिकाओं के समूह को शीर्षस्थ विभज्योतक ऊतक कहा जाता है। पौधे की लम्बाई शीर्षस्थ विभज्योतक ऊतकों के कारण बढ़ती है।

यह स्वांगीकरण का कार्य करती है।

यह प्रारम्भिक अवस्था में पादप को यांत्रिक सामर्थ्य प्रदान करती है।

C.

दृढ़ोतक (स्केलेरेनकाइमा ):-

• इसकी कोशिकाएँ गोल, अण्डाकार तथा बेलनाकार होती है। इसकी भित्ति लिग्निन की बनी होती है। इसकी कोशिकाओं के मध्य गर्त पाए जाते हैं।

इसमें मृत प्रोटोप्लाज्म पाया जाता है। गूदेदार पादप की फल भित्ति स्केलेरेनकाइमा की बनी होती है। उदाहरण- अमरूद, नाशपती चीकू लेग्युमिनेसी कुल के बीजों का आवरण स्केलेरेनकाइमा से निर्मित होता है।

चाय की पत्तियाँ स्केलेरेनकाइमा से निर्मित होती है। यह पादप को प्रारम्भिक अवस्था में सहारा प्रदान करती है।

384

1.

2.

ii. जटिल स्थायी ऊतक :-

उत्कर्ष प्रकाश

• जटिल स्थायी ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं

(a) जाइलम

3.

·

से निर्मित होते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं-

(b) फ्लोएम

• जाइलम तथा फ्लोएम संवहन ऊतक है।

4.

a. जाइलम :-

• जाइलम जल तथा खनिज लवणों के परिवहन का कार्य करते हैं।

5.

• जाइलम धनात्मक प्रकाशानुवर्तन एवं ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन दर्शाते हैं।

• जाइलम चार प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित होते हैं-

1. वाहिनिकी (ट्रैकीड)

2.

वाहिका

3. जाइलम तन्तु

4. जाइलम पैरेनकाइमा

• जो जाइलम सबसे पहले बनता है वह प्रोटोजाइलम कहलाता है तथा प्रोटोजाइलम बनने के बाद जाइलम को मेटा जाइलम कहा जाता है।

में

• तने में जाइलम मध्य आदिदारुक (प्रोटोजाइलम केन्द्र की ओर तथा मेटा जाइलम परिधि की ओर) होता है।

6.

जिब्बरेलिन्स हॉर्मोन बीजों के अंकुरण में भाग लेते हैं। बीजों की सुषुप्तावस्था को भंग करके उन्हें अंकुरित होने के लिए प्रेरित करते हैं। साइटोकाइनिन

साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन के लिए एक आवश्यक हॉर्मोन है। यह ऊतकों एवं कोशिकाओं के विभेदन का कार्य करती है। एक्सिसिक एसिड

यह एसिड पौधों की वृद्धि को रोकता है।

यह पत्तियों के झड़ने की क्रिया को नियंत्रित करता है।

एथिलीन (Ethylene):

एथिलीन गैसीय रूप में पौधों में पाया जाने वाला हॉर्मोन है।

एथिलीन हॉर्मोन फलों के पकने (Ripening) में मुख्य भूमिका

निभाता है।

Note:- एथिलीन के द्वारा पौधों की चौड़ाई में वृद्धि होती है परन्तु पौधे की लम्बाई में वृद्धि को रोकता है।

फ्लोरिजिन्स (Florigenis ) :- फ्लोरिजिन्स का संश्लेषण पत्तियों में होता है परन्तु ये फूलों के खिलने (Blooming) में मदद करते हैं। इसलिए फ्लोरिजिन्स को फूल खिलाने वाला हॉर्मोन (Flowering hormone) भी कहते हैं।

प्रमुख तत्त्वों की कमी से होने वाले पादप रोग:-

1.

जिंक (Zn) धान में खेरा रोग

• मूल में जाइलम बाह्य आदिदारुक (प्रोटोजाइलम परिधि की तरफ तथा मेटा जाइलम केन्द्र की तरफ) होता है।

2.

जिंक (Zn) मक्का में सफेद कली रोग

3.

जिंक (Zn) लिटिल लीफ रोग

b. फ्लोएम :-

4.

बोरॉन (B)- फूल गोभी में ब्राउनिंग रोग

• फ्लोएम पौधे के विभिन्न भागों में भोज्य पदार्थों के परिवहन का कार्य करता है।

5.

बोरॉन (B)- चुकंदर का हार्ट रॉट

6.

बोरॉन (B)- सेब में आंतरिक काग

7.

कॉपर (Cu)- नीबू में डाइबेक रोग

• यह धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन एवं ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन

होता है।

• फ्लोएम चार प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित होता है- 1. सहचर कोशिका

2. चालनी नलिका

3. फ्लोएम तंतु

4. फ्लोएम पैरेनकाइमा

• चालनी नलिका में केन्द्रक नहीं पाया जाता।

पादप हॉर्मोन

8. मोलिब्डेनम (Mo)- पत्ता गोभी में व्हिपटेल रोग

पौधों में होने वाले प्रमुख जीवाणु जनित रोग:-

1. आलू का शैथिल रोग

2. बंद गोभी का काला गलन रोग

3. क्राउन गाल रोग

4. नीबू का कैंकर रोग

पौधों में होने वाले प्रमुख कवक जनित रोग:-

1. गेहूँ का काला किट रोग

2.

गेहूँ का श्लथ कंड (स्मट) रोग

3. आलू की अगेती अंगमारी रोग

4. आलू की पछेती अंगमारी रोग

5. आलू का वार्ट रोग

वृद्धि वर्धक

वृद्धि रोधक

- ऑक्सीन

- जिब्बरेलिन

• एब्सिसिक एसिड एथिलीन

6.

मूँगफली का टिक्का रोग 7. गन्ने का लाल गलन रोग

- साइटोकाइनिन

ऑक्सिन-

8.

धान का भूरी पूर्ण चिली

ऑक्सिन कोशिका दीर्घन द्वारा स्तम्भ या तने की वृद्धि में सहायक होते हैं।

जड़ की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।

गेहूँ एवं मक्का के खेतों में खर-पतवार नाशक का कार्य करते हैं। जिब्बरेलिन

जिब्बरेलिन्स कोशिका विभाजन तथा कोशिका दीर्घन द्वारा तने को बनाते हैं, जिसके कारण पौधे वृहत् आकार के हो जाते हैं।

Note:-

भिंडी का पीत वर्ण शिरा' रोग एक विषाणुजन्य रोग है, सफेद मक्खी इस विषाणु की वाहक है।

बुकनी रोग (powdery Mildew) से प्रभावित पौधों की पत्तियों पर सफेद चूर्ण सा जम जाता है यह रोग कवकों की कई प्रजातियों के द्वारा होता है इस रोग से गेहूँ- मटर, प्याज आदि प्रभावित होते हैं। हरित बाल रोग बाजरे में पाया जाता है।

385

उत्कर्ष प्रकाशन

पाइरिला एक छोटा-सा पतंगा है जो गन्ने की पत्तियों एवं तने का रस चूसता है यह कीट गन्ने के लिए अत्यंत ही हानिकारक होता है। सफेद किट्ट सरसों का एक महत्त्वपूर्ण कवक जनित रोग है। इस रोग में पौधे के तने, पत्ती तथा पुष्पक्रम पर गहरे सफेद रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं।

Note:-

.

यह रोग 'ब्रेसीकेसी कुल' के अधिकांश पौधों (सरसों भी शामिल) को प्रभ���वित करता है इसके उपचार हेतु कवकनाशी का प्रयोग करते हैं। कर्नाल बंट एक फफूँद जनित रोग है यह गेहूँ की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला प्रमुख रोग है जो 'टेलेशा इंडिका' नामक फफूँद से होता है। • गेहूँ का अरगट रोग एक कवक जनित रोग है यह रोग बाजरे को भी प्रभावित करता है।

1.

2.

3.

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित में से कौन-सा गैर- झिल्लीबद्ध कोशिकांग है? (a) लाइसोसोम

(b) राइबोसोम

(c) प्लास्टिड

(d) एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम

जीवाणुओं में श्वसन के लिए उत्तरदायी अंग कौन-सा है?

(a) केन्द्रकाभ

(b) राइबोसोम

(d) मीसोसोम

(b) रूडोल्फ विच

(d) श्लाइडेन और श्वान

कोशिका सिद्धान्त के संस्थापक थे-

(c) कोशिका भित्ति

(a) वॉन बेन्डेन

(c) फ्लेमिंग

4.

कोशिका झिल्ली का तरल मोजेक मॉडल किसके द्वारा दिया

गया था?

मानव शरीर से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य

सबसे व्यस्त अंग हृदय

(a) रॉबर्टसन

सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अण्डा

(b) डेनिएली और डेवसन

(c) पोर्टर

सबसे अधिक पुनरुद्भवन क्षमता यकृत कोशिका

(d) सिंगर और निकोलसन

सबसे बडी हड्डी

फीमर

सबसे छोटी पेशी ग्लूटियस मैक्सिमस

सबसे छोटी हड्डी

-

-

स्टेपिस

सबसे बड़ी ग्रन्थि यकृत

सबसे बड़ी धमनी महाधमनी

सबसे बड़ा अंग त्वचा

5.

(a) DNA प्रतिकृति

(c) लिपिड संश्लेषण

6.

कोशिका में राइबोसोम की क्या भूमिका है?

(b) प्रोटीन संश्लेषण

(d) ऊर्जा उत्पादन

चिकनी अन्त: प्रर्द्रव्यी जालिका किसके संश्लेषण में शामिल

होती है?

(a) प्रोटीन

सर्वदाता रक्त समूह'0' समूह

(c) कार्बोहाइड्रेट

(b) वसा

(d) न्यूक्लिक अम्ल

7.

कार्बोहाइड्रेट सामान्यतः किसमें संगृहीत रहता है?

-

सबसे बड़ी शिरा इनफेरियर वेनाकावा

(a) क्लोरोप्लास्ट

सबसे कम पुनरुद्भवन क्षमता मस्तिष्क कोशिका

(b) एमायलोप्लास्ट

सबसे पतली त्वचा कंजंक्टिवा

(c) क्रोमोप्लास्ट

मूत्र का pH

6.0

रक्त का PH 7.4

8.

सबसे लंबी तंत्रिका साइटिका

(a) 50s+30s

में

(c) 60s+40s

शरीर में कुल पेशियों की संख्या 639

9.

सबसे बड़ी अंत: स्रावी ग्रन्थि थायरॉयड ग्रन्थि

(d) ल्यूकोप्लास्ट

जीवाणु कोशिका में राइबोसोम की उपइकाइयाँ होती है-

(b) 55s +45s

(d) 40s+30s

कोशिका विभाजन की किस अवस्था में गुणसूत्रों को गिना जा

सकता है?

विज्ञान से सम्बन्धित अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

(a) पूर्वावस्था

·

कोशिका विज्ञान के जनक रॉबर्ट हुक

(c) एनाफेज

(b) मेटाफेज

(d) टेलीफेज

जीव विज्ञान के जनक अरस्तू

10.

वर्गिकी विज्ञान के जनक अरस्तू

चिकित्सा विज्ञान के जनक हिप्पोक्रेट्स

-

वनस्पति विज्ञान के जनक- थियोफ्रेस्ट्स

प्राणी विज्ञान के जनक अरस्तू

आनुवंशिकी के जनक- ग्रेगर जॉन मेण्डल आधुनिक आनुवंशिकी के जनक

टीकाकरण के जनक एडवर्ड जेनर

-

अर्द्धसूत्री विभाजन के बाद निर्मित चार संतति कोशिकाएँ होती है-

(a) आनुवंशिक रूप से समान

(b) आनुवंशिक रूप से असमान

(c) अकेन्द्रकीय

(d) बहुकेन्द्रकीय

शेवालों की कोशिका भित्ति निर्मित होती है-

11.

(a) सेल्युलोज, गैलेक्टेन तथा मेनन द्वारा

विलियम बैटसन

(b) हेमीसेल्युलोज, पेक्टिन तथा प्रोटीन द्वारा

शल्यक्रिया के जनक महर्षि सुश्रूत

-

आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक

रक्त समूह के जनक कार्ल लैण्डस्टीनर

goo

(c) पेक्टिन, सेल्युलोज तथा प्रोटीन द्वारा

(d) सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज तथा पेक्टिन द्वारा

माइटोसिस की किस अवस्था में गुणसूत्र स्पिन्डल के मध्य में

पंक्तिबद्ध होते है?

12.

(a) प्रोफेज

(c) एनाफेज

386

(b) मेटाफेज

(d) टीलोफेज

13.

उत्कर्ष प्रकाश

रक्त वाहिकाओं के अंदर खून का थक्का जमने से कौन रोकता है ? 25.

(a) हिपेरिन

(b) सिरेटॉनिन

मानव रक्ताधान के लिए कौन सा रक्त समूह सार्वभौमिक दाता (Universal Donor) होता है?

(a) B' समूह

(c) फाइब्रिनोजन

(b) O समूह

(d) फाइब्रिन

(c) AB समूह

14.

रक्त का थक्का जमने के लिए उत्तरदायी प्रोटीन है-

(d) A' समूह

(a) एल्ब्युमिन

(b) ग्लोब्युलिन

26.

रक्त का pH मान कितना होता है?

(c) फाइब्रिन

(d) फाइब्रिनोजन

(a) 7.4

15.

RBC का ग्रेवयार्ड किसे कहा जाता है?

(b) 6.7

(a) प्लीहा

(b) यकृत

(c) 5.7

(c) किडनी

(d) थायमस

(d) 4.2

16.

रक्त बिंबाणु का कार्य है-

27.

मानव शरीर में सबसे छोटी अन्तःस्रावी ग्रन्थि निम्नलिखित में से

(a) रक्त का थक्का बनाने में सहायता करना

कौन-सी है?

(a) अधिवृक्क

(b) प्रतिरक्षा

(c) हीमोग्लोबिन को धारण करना

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

28.

17.

मनुष्य के किस रुधिर वर्ग की प्रतिरक्षी नहीं है?

(a) A

(b) B

(c) AB

(c) पीयूष ग्रन्थि

(b) अवटु (d) अग्न्याशय

ग्रन्थि

कौन-सी ग्रंथि दुग्ध निष्कासन हॉर्मोन ऑक्सीटोसिन का स्रवण करती है?

(a) पीयूष ग्रंथि

(d) o

18.

एक वयस्क व्यक्ति में लाल रक्त कोशिकाओं की सामान्य संख्या

मिलियन/ mms होती है।

(b) थायरॉइड ग्रंथि

(c) पैराथायरॉइड ग्रंथि

(a) 2.5-4.5

(b) 6.5-9.5

29.

(c) 4.6-6.2

(d) 9.6- 12.2

19.

निम्नलिखित में से कौन-सी

(a) पीयूष ग्रन्थि

रक्त कोशिकाएँ एंटीबॉडी

(d) एड्रीनल ग्रंथि

प्रतिरक्षा ग्रन्थि किसे कहा जाता है?

(b) पीनियल ग्रन्थि

(प्रतिरक्षी) निर्माण करती है?

(a) इओसिनोफिल्स

(b) बेसोफिल्स

(c) थायमस ग्रन्थि

(c) लिम्फोसाइट

(d) मोनोसाइट

30.

20.

रखता है?

कौन-सा रक्त प्रोटीन प्लाज़्मा में परासरणी दाब (BCOP) बनाए

(a) एल्ब्युमिन (c) फिब्युलिन

(b) ग्लोब्युलिन

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

21. एलर्जी के दौरान किन श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि

22.

हो जाती है?

(a) न्यूट्रोफिल

(b) बेसोफिल

(c) मोनोसाइट

(d) इओसिनोफिल

यदि एक पिता का रक्त वर्ग A है और माता का O तो बताइए कि उनके पुत्र का निम्नलिखित में से कौन-सा रक्त वर्ग हो सकता है?

(d) पैराथायरॉइड ग्रन्थि

आधार उपापचयी दर किसके द्वारा नियंत्रित होती है?

(a) पिट्यूटरी ग्रंथि

(b) अग्न्याशय

(c) यकृत

(d) थायरॉइड ग्रंथि

31. निम्नलिखित में से कौन-सी एक मिश्रित ग्रंथि (Mix Gland) है?

(a) यकृत

(b) पैराथायरॉइड

(c) अग्न्याशय

(d) पीनियल काय

32. निम्नलिखित में से किस ग्रन्थि को 'जैविक घड़ी' कहा जाता है?

(a) पीनियल काय

(b) यकृत

(a) B

(b) AB

(c) थायरॉइड

(c ) 0

(d) B, AB अथवा O

(d) पैराथायरॉइड

23.

मानव हृदय का पेस मेकर अवस्थित होता है-

33.

(a) दायाँ अलिंद

(b) बायाँ अलिंद

(c) वेंट्रिकल

(d) वेना कावा

(c) थायरॉक्सिन

24.

गर्भ रुधिराणुकोरकता ( erythroblastosis foetalis) एक

34.

से

किस हॉर्मोन की कमी से वयस्कों में मिक्सिडीमा रोग हो जाता है? (a) ग्लूकागॉन

(b) इन्सुलिन

(d) एस्ट्रोजन

वृक्क से मूत्र की मात्रा का निस्तारण नियंत्रित होता है, हॉर्मोन-

बीमारी है, जिसमें

(a) TSH द्वारा

(b) ACTH द्वारा

(a) वयस्क में घातक अरक्तता तथा पीलिया होता है।

(c) FSH द्वारा

(b) भ्रूण लाल रुधिर कणिकाओं के फटने के कारण नहीं बच पाता है।

35.

आयोडीन युक्त हॉर्मोन है-

(c) भ्रूण रुधिर के कैंसर (cancer) से ग्रसित होता है।

(a) थायरॉक्सिन

(d) ADH द्वारा

(b) इन्सुलिन

(d) भ्रूण को घातक अरक्तता तथा पीलिया होता है।

(c) एड्रीनेलीन

(d) टेस्टोस्टेरॉन

387

36.

उत्कर्ष प्रकाशन

आपातकालीन परिस्थितियों में हृदय धड़कन को बढ़ाने वाला

(d) थायरोक्सिन

47.

निम्नलिखित में से किस कारण श्वासनली से वायु के निकल

जाने पर भी वह पिचकती नहीं है?

(a) एपिग्लॉटिस के कारण

(b) स्वरयंत्र के कारण

(c) उपास्थि वलय के कारण

(d) डायफ्राम के कारण

सुमेलित कीजिए-

हॉर्मोन कोन सा है?

(a) ग्लूकागॉन

(b) नॉर एड्रीनेलीन हॉर्मोन

(c)

एड्रीनेलीन हॉर्मोन

37.

शरीर में किस हॉर्मोन की असंतुलित मात्रा से मधुमेह रोग हो

जाता है?

48.

(a) इंसुलिन

(b) वैसोप्रेसीन

सूची-II

(c) थायरॉक्सिन

(d) मेलाटोनिन

1. फेफड़े

38.

मादा में कौन-सा हॉर्मोन दूध के स्रवण को प्रेरित करता है?

B. मछली

II. त्वचा

(a) ऑक्सीटोसिन

(b) प्रोजेस्टेरॉन

C. केंचुआ

III. गलफड़े (गिल्स)

(c) LH

(d) प्रोलेक्टिन

D. पक्षी

IV. श्वासनली

39. पिट्यूटरी ग्रन्थि का नियन्त्रण कौन करता है?

कूट:-

सूची-I A. कीट

(a) हाइपोथैलेमस

(b) एड्रीनल ग्रन्थि

(a) A-I, B-II, C-III, D-IV

(b) A- IV, B-III, C-II, D-I

(c) पीनियल काय

(c) A-II, B-I, C-III, D-IV

(d) थायरॉइड ग्रन्थि

(d) A-I, B-II, C-IV, D-III

40.

मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की मुद्रा तथा संतुलन का

49.

पक्षियों में ध्वनि उत्पादन अंग है-

अनुरक्षण करता है?

(a) प्रमस्तिष्क

(b) अनुमस्तिष्क

(a) स्वर रज्जु

(b) सिरिंक्स

(c) मेडुला ऑब्लॉगेटा

(d) हाइपोथैलेमस

41.

स्तनधारियों में मस्तिष्क का सबसे विकसित अंग जिससे

50.

(c) ग्रसनी

मानव शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन किसके माध्यम से

किया जाता है?

(d) नासापट्ट

43.

आदमी प्रजनन कर सकता है, मशीनों का आविष्कार कर

सकता है और भाषा और कला को भी प्रस्तुत कर सकता है-

(c) मज्जका (मेडुला ओब्लॉगेटा)

(a) प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम)

(b) अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम)

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

42.

करता है?

(a) अनुमस्तिष्क

मानव मस्तिष्क का कौन-सा अंग हृदय की धड़कनों का नियंत्रण

(c) मेडुला ऑब्लॉगेटा

(b) प्रमस्तिष्क (d) पोन्स

ताप नियंत्रण, नियमन व रक्त शर्करा नियमन किसका कार्य

होता है?

(a) हीमोग्लोबिन

(b) रुधिर प्लाज्मा

(c) a तथा b दोनों

(d) रुधिर प्लेटलेट्स

51.

वायु श्वसन मार्ग है-

(a) ट्रेकिया फेफड़े कण्ठ

ग्रसनी कूपिका →

(b) नाख कण्ठ ग्रसनी

-

ब्रोंकस कूपिका ब्रोकियोल्स

124

52.

(c) नासा छिद्र ग्रसनी

ब्रोकियोल्स कूपिका →

(d) नाखमुख फेफड़े

कण्ठ→ ट्रेकिया → ब्रोंकस

भोजन निकलते समय सांस मार्ग को बंद कोन कर देता है?

(a) मेरुरज्जु

(b) पीयूष ग्रंथि

(a) एपिग्लॉटिस

(c) हाइपोथैलेमस

(d) मेडुला ऑब्लॉगेटा

(c) श्वास नली

(b) कंठ

(d) श्वसनी

44.

मानव में कितने मेरु तंत्रिका युग्म पाए जाते हैं?

53.

(a) 31

(b) 12

(a) लैक्टोज

(c) 10

(d) 37

(c) सुक्रोज

45.

मानव शरीर में श्वसन कार्य का केन्द्रीय नियंत्रण कहाँ से होता है?

54.

(a) प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम)

निम्नलिखित में से कौन-सा एन्जाइम लार में पाया जाता है?

निम्नलिखित में से कौन-सा एन्जाइम प्रोटीन के पाचन को

प्रारम्भ करता है?

(b) डाएस्टेज

(d) टायलिन

(b) अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम)

(a) एमीनोपेप्टाइडेज

(c) मेडुला ऑब्लॉगेटा

(c) ट्रिप्सिन

(b) कार्बोक्सीपेप्टाइडेज

(d) पेप्सिन

(d) अधश्चेतक (हाइपोथैलेमस)

55.

दूध में पाया जाने वाला मुख्य प्रोटीन कौन-सा है?

46.

निम्नलिखित में से अग्र मस्तिष्क का भाग नहीं है-

(a) एल्ब्युमिन

(b) ग्लोब्युलिन

(a) अनुमस्तिष्क

(c) ग्लोबिन

(d) कैसीन

(b) प्रमस्तिष्क

56.

पूर्ण पाचक रस है-

(c) डाइसेफेलॉन

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(a) यकृत

(c) अग्न्याशयी

(b) जठर रस

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

388

(b) 12. C1, P2. Ma

(c) 13C1, P2, M2

उत्कर्ष प्रकाश

निम्नलिखित में से कौन-सा बसा पाचक एन्जाइम है?

57.

(a) रेनिन

(b) पेप्सिन

(c) लाइगेज

(d) लाइपेज

58.

मानव का दन्त सूत्र होता है-

(a) 12. C2. P1, Ma

69.

निम्नलिखित में से कौन-सा मानव में एक बॉल तथा सॉकेट ज्वॉइंट का एक उदाहरण है?

(a) कलाई का जोड़

(b) कमर का जोड़

(c) अँगुली का जोड़

(d) गर्दन का जोड़

70.

स्केपुला क्लेविकल अस्थि पाई जाती है-

(d) I2, C2, P3,M1

(a) कंधे में

(b) कलाई में

59.

पित्त (Bile) का प्रमुख कार्य क्या है?

(c) हथेली में

(d) अँगुली में

(a) वसा का वसा अम्ल और ग्लिसराल में परिवर्तन

71.

(b) वसा अम्ल और ग्लिसराल का वसा में परिवर्तन

(a) 12

(c) वसा का पायसीकरण

(c) 14

(d) उपर्युक्त सभी

72.

60.

मानव वृक्क की मौलिक कार्यात्मक इकाई है-

(a) नेफ्रीडिया

(b) हेनले का पाश

(c) नेफ्रॉन

(d) शंकु या पिरामिड

(c) योनि (vagina)

61.

---------

(a) 60

(c) 180

सामान्यतः एक स्वस्थ वयस्क में वृक्क में आरंभिक निस्पंद

लीटर / प्रतिदिन के लगभग होता है।

62. मूत्र में शर्करा की उपस्थिति व उत्सर्जन की स्थिति कहलाती है-

(b) 120

(d) 90

73.

(a) रिलेक्सिन

(c) प्रोजेस्टेरॉन

74.

मनुष्य के शरीर में पसलियों के कितने जोड़े होते हैं?

अण्डाशय से उत्पन्न अण्डाणु को कौन एकत्र करती हैं?

(a) फैलोपियन नलिका (Fallopian tube)

(b) गर्भाशय ( Uterus )

(d) गर्भाशय (Cervix)

स्तनधारियों में मादा के द्वितीयक सहायक लैंगिक लक्षण किस

हॉर्मोन द्वारा विकसित होते हैं?

(b) एस्ट्रोजन

(d) गोनेडोट्रॉपिन्स

नियासिन जिसे विटामिन B कहा जाता है, की कमी से होने

वाला रोग है-

(b) 10

(d) 11

(a) पॉलियूरिया

(b) डिसयूरिया

(c) यूरेमिया

(d) ग्लाइकोसूरिया

63.

उत्सर्जन प्रणाली में मूत्राशय का

मुख्य कार्य क्या है?

(a) स्कर्वी

(a) अपशिष्ट उत्पादों का निस्पंदन

(c) कीलोसिस

(b) पेलाग्रा

(d) बेरी-बेरी

(b) जल का पुनः अवशोषण

75.

(c) मूत्र का भण्डारण

निम्नलिखित में से कौन-सी वसा में घुलनशील विटामिन है?

(a) थायमिन

(d) मूत्र का उत्पादन

64. यूरिक अम्ल के क्रिस्टलों के संचित होने के कारण जोड़ों की

(b) फॉलिक अम्ल

सूजन को किस रूप में जाना जाता है?

(c) एस्कॉर्बिक अम्ल

(a) आर्थराईटिस (Arthritis)

(b) गाउट (Gout)

(c) पेशीय कुपोषण (Muscular dystrophy)

(d) अपतानिका (Tetany)

65. हिंज सन्धि (Hinge Joint) का उदाहरण है- (a) घुटने की सन्धियाँ

राइबोफ्लेविन की कमी से कौन सा रोग होता है?

77. कार्बोहाइड्रेट की कैलोरी में मात्रा है-

(d) टेकोफेरॉल

76.

(a) बेरी-बेरी

(b) कीलोसिस

(c) स्कर्वी

(d) पेलाग्रा

(a) 4Kcal/gm

(b) Kcal/gm

(b) फीमर व श्रोणिमेखला का जोड़

(c) 0.4Kcal/gm

(d) 0.24Kcal/gm

(c) करोटि की अस्थियों के मध्य सन्धि

78.

विटामिन C का रासायनिक नाम है-

(d) अँगूठे की अस्थियों की संधि

(a) फॉलिक अम्ल

(b) पैन्टाथॉनिक अम्ल

66.

अस्थि में कौन-सा लवण सबसे अधिक होता है?

(c) कैल्सिफेरॉल

(d) एस्कोर्बिक अम्ल

(a) मैग्नीशियम क्लोराइड

79.

रक्त का थक्का बनाने में सहायक विटामिन है-

(b) कैल्सियम कार्बोनेट

(a) विटामिन A

(b) विटामिन-C

(c) कैल्सियम फॉस्फेट

(c) विटामिन K

(d) विटामिन E

(d) सोडियम क्लोराइड

67.

(a) आँख में

(b) जाँघ में

(c) मध्य कर्ण में

(d) गले में

मानव शरीर की सबसे छोटी अस्थि उपस्थित होती है-

80. 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है?

(c) 9.5K Cal

81. रतौंधी एवं जीरोफ्थेलमिया रोग किस विटामिन की कमी से

(a) 9.4K Cal

(b) 9.1K Cal

(d) 9.2K Cal

68.

मानव शरीर की सबसे सक्रिय मांसपेशी है-

होता है?

(a) मेस्सेटर

(b) साटोरियस

(a) विटामिन A

(b) विटामिन D

(c) आइरिस

(d) स्टेपीडियस

(c) विटामिन E

(d) विटामिन K

389

82.

घातक एनीमिया होता है-

83.

(a) विटामिन B12 की कमी

(b) विटामिन Bs की कमी

(c) विटामिन B9 की कमी

(d) विटामिन B की कमी

उत्कर्ष प्रकाश

95. नेत्रदान के दौरान आँख के किस भाग का उपयोग प्रत्यारोपण

96.

पारिस्थितिकी शब्द दिया गया-

(a) O. P. ओडम द्वारा

(b) रिटर द्वारा

(c) प्रोफेसर रामदेव मिश्रा द्वारा

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

84.

एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में से सर्वाधिक संख्या

किसकी होती है?

97.

(a) उत्पादक

(b) प्राथमिक उपभोक्ता

(c) द्वितीयक उपभोक्ता

(d) अपघटक

98.

85.

'पारिस्थितिकी तंत्र' शब्द को सर्वप्रथम दिया है-

(a) ओडम

(b) आर. मिश्रा

(c) क्लीमेंट

(d) ए.जी. टेन्सले

86.

(a) राइजोबियम

(c) चींटी

(b) दीमक

(d) नमी

99.

के लिये किया जाता है?

(a) रेटिना

(b) पक्षमाभी पेशियाँ

(c) पुतली

(d) कॉर्निया

आँख को गोल बनाये रखने वाले द्रव का नाम है-

(a) जलोद द्रव

(b) काचाभ द्रव

(c) लाइसोजाइम युक्त अश्रु

(d) श्लेष्मा रस

आँखों में पतली झिल्ली जिसके माध्यम से प्रकाश का प्रवेश

होता है, उसको क्या कहा जाता है?

(a) आइरिस

(c) नेत्रपटल (कॉर्निया)

(b) पुतली

(d) नेत्रोद

ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करने का कार्य स्तनधारियों में कोन करता है?

(a) कर्णपल्लव / Ear pinna

(b) यूस्टेकीयन नलिका

(c) कॉक्लियाँ

(d) वेस्टीब्यूल

मानव आँख का कौन-सा भाग नेत्र लेंस की फोकल लंबाई को

समायोजित करने के लिए जिम्मेदार है?

(a) आईरिस

(b) छात्र

(d) सिलिअरी मांसपेशियाँ

ट्यूबरक्यूलोसिस के विरुद्ध मुख्यतया किस वैक्सीन का प्रयोग

(c) कॉर्निया

100

किया जाता है?

(a) BCG

(b) DPT

(c) HIB

(d) TAB

101 हाइड्रोफोबिया रोग है-

(a) रेबीज़ (c) पोलियो

(b) चिकन पॉक्स

(d) टी.बी.

87.

88.

निम्नलिखित में से कौन-सा जैविक घटक नहीं है?

निम्नलिखित में से एक सही खाद्य श्रृंखला है-

(a) मेंढक सर्प बाज टिड्डा घास

(b) बाज सर्प टिड्डा घास मेंढक

(c) टिड्डा घास सर्प मेंढक बाज

(d) घास टिड्डा मेंढक सर्प बाज

एक पोषी स्तर को अपने पूर्ववर्ती स्तर से लगभग कितनी मात्रा

में ऊर्जा उपलब्ध होती है?

(a) 1%

(c) 20%

(b) 10%

(d) 30%

89. अपूर्ण चार कोष्ठीय हृदय वाले असमतापी प्राणी किस समूह में

आते हैं?

(a) पक्षी (c) स्तनधारी

90.

ऑर्थ्रोपोड

(a) मैल्पीधियन नलिकाएँ

(c) नेफ्रिडिया

91.

(a) डॉल्फिन

(c) हेल

(b) उभयचर (d) सरीसृप

. के माध्यम से उत्सर्जन करते हैं।

(b) छिद्र (d) किडनी

निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्राणी असमतापी है?

92. केंचुआ निम्नलिखित में से कौन-से प्राणी संघ से संबंधित है?

(a) ऑथ्रोपोडा

(b) शार्क

(d) मनुष्य

(b) मोलस्का

(c) एनेलिडा

(d) प्रोटोजोआ

93.

ऑक्टोपस

संघ के अंतर्गत आते है।

(a) इकाइनोडर्मेटा

(b) मोलस्का

(c) एनेलिडा

(d) पीसीज

(a) अमीबा

(c) पैरामीशियम

94. निम्नलिखित में से कोन प्रोटोजोआ संघ के जीव है?

(b) युग्लीना (d) उपर्युक्त सभी

390

102. अमीबिएसिस (अमीबिक दस्त) किससे होती है?

(a) प्लाज्मोडियम वाइवेक्स

(b) एन्ट अमीबा जिन्जीवेलिस

(c) एन्टअमीबा हिस्टोलाइटिका

(d) ट्रिपेनोसोमा गेम्बिएन्स

103. एक X गुणसूत्र की हानि से नारियों में होने वाला विकार

है।

(a) डाउन सिंड्रोम (b) टर्नर सिंड्रोम (c) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम

(d) विल्सन सिंड्रोम

104. तपेदिक का कारण है-

(a) दुचेरेरिया ब्रेनक्रोफ्टी

(b) माइकोबैक्टीरियम क्यूलोसिस (c) स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी (d) साल्मोनेला टाइफी

उत्कर्ष प्रकाश

105. फाइलेरिएसिस रोग किसके कारण उत्पन्न होता है?

Answer Key

(a) एस्केरिस लुम्ब्रिकॉइडिस

1. [b]

2. [d]

3. [d]

4. (d)

5. [b]

(b) वुचेरेरिया बेनक्रॉफ्टी

6. [b]

7. [b]

8. [a]

9. [b]

10. [b]

(c) एन्ट अमीबा हिस्टोलिटिका

11. [a]

12. [b]

13. [a]

14. [d]

15. [a]

(d) प्लाज्मोडियम ओवेल

16. [a]

17. [C]

18. [C]

19. [C]

20. [a]

106. निम्नलिखित में से कौन-सा वायरस जनित रोग है?

21. [d]

22. [c]

23. [a]

24. [d]

25. [b]

(a) पीत ज्वर

(b) टायफॉइड

26. (a)

27. [c)]

28. (a)

29. [c]

30. [d]

(c) सिफलिस

(d) टिटेनस

31. [c)

32. [a]

33. (c)

34. [(d)]

35. (al

107. मनुष्य में प्लाज्मोडियम किसके द्वारा प्रवेश करता है?

36. [C]

37. [a]

38. [d]

39. [a]

40. [b]

(a) नर क्यूलेक्स

41. [a]

42. [C]

43. [C]

44. [a]

45. [C]

(b) नर एनॉफिलीज

46. [a]

47. [(c)

48. [b]

49. [b]

50. [C]

(c) मादा क्यूलेक्स

51. [C]

52. [a]

53. [d]

54. [d]

55. [d]

(d) मादा एनॉफिलीज

56. [C]

57. [d]

58. [b]

59. (c)

60. [C]

108. 'विडाल परीक्षण' द्वारा निम्नलिखित में से कौन-से रोग का

61. [C]

62. [d]

63. [C]

64. [b]

65. [a]

परीक्षण किया जाता है?

66. [c]

67. [C]

68. [C]

69. [b]

70. [a]

(a) ट्यूबरक्यूलोसिस

(b) टायफॉइड

71. [a]

72. [a]

73. (b)

74. [b]

75. [d]

(c) हैजा

(d) गलघोंटू

76. [b]

77. [a]

78. (d)

79. [C]

80. [b]

109. निम्नलिखित में से किसे "प्लांट किंगडम के उभयचर" के रूप

81. [a]

82. [a]

83. [b]

84. [d]

85. [d]

में जाना जाता है?

86. [d]

87. [d]

88. [b]

89. [d]

90. [a]

(a) टेरिडोफाइट्स

(b) जिम्नोस्पर्म

91. [b]

92. [C]

93. [b]

94. [d]

95. [d]

(c) एंजियोस्पर्म

(d) ब्रायोफाइट्स

96. [b]

97. [C]

98. (a)

99. [d]

100. [a]

110. नागफनी की पत्तियाँ रूपान्तरित होती है-

(a) कॉटों में

(b) बेल में

101. [a]

102. [c]

103. [b]

104. [b]

105. [b]

106. [a]

107. [d]

108. [b]

109. [b]

110. [a]

(c) पुष्प में

(d) जड़ों में

111. [c]

112. [d]

113. [b]

114. [d]

115. [b]

111. अदरक माना जाता है-

(a) शल्क कन्द (Bulb)

(b) कन्द (Tuber)

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code स्कैन

(c) प्रकन्द (Rhizome )

करें-

(d) घनकन्द (Corm)

112. बरगद के पेड़ से विकसित होने वाली जड़ें कहलाती है-

(a) श्वसन जड़ें

(b) आरोही जड़ें

(c) लटकने वाली जड़ें

(d) अवस्तम्भ जड़ें

113. किस पादप ऊतक में चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes) एवं

सह-कोशिकाएँ (Companion Cells) पाई जाती है-

(a) जाइलम में

(b) फ्लोएम में

(c) विभाज्य ऊतक में

(d) मृदु ऊतक में

114. निम्न में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?

(a) इंसुलिन

(b) थायरॉक्सिन

(c) एस्ट्रोजन

(d) साइटोकाइनिन

115. निम्नलिखित में से कौन-सी कोशिकाएँ फ्लोएम का निर्माण नहीं

करती है?

(a) चालनी नलिकाएँ

(c) सहकोशिका

(b) फ्लोएम वाहिका

(d) फ्लोएम तंतु

391

पर्यावरण की परिभाषा और अर्थ

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

पर्यावरण शब्द अंग्रेजी के शब्द Environment से लिया गया है, जो फ्रेंच भाषा के Environ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है "आसपास का आवरण" ।

• हिन्दी में पर्यावरण (परि+आवरण) का अर्थ है "चारों तरफ का घेरा"। पर्यावरण वह प्राकृतिक तत्त्व है जो हमें चारों ओर से घेरता है, जैसे वायु, जल, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जन्तु ।

पर्वत मैदान

मरुस्थल,

क्षोभमण्डल

• समतापमण्डल

(वायुमण्डल)

( स्थलमण्डल) - पर्यावरण जलमण्डल

जीवमण्डल

पौधे

जन्तु

हिमनद

झील

नदी

सागर

प्रत्येक जीव जिस वातावरण में रहता है, वही उसका पर्यावरण कहलाता है। इसमें जीवों के जीवन यापन के लिए आवश्यक सभी तत्व उपलब्ध होते हैं, जैसे कि ऑक्सीजन, भोजन, जल और आवास

पर्यावरण के घटक-

भौतिक या अजैविक

पर्यावरण के

संघटक

सांस्कृतिक

(स्थल, वायु, जल) (मानव निर्मित गतिविधियाँ)

जैविक (पादप, जन्तु तथा सूक्ष्मजीव)

निर्जीव, भौतिक घटक- इसमें वायु, जल, मिट्टी आदि आते हैं।

जैविक घटक इसमें सभी जीवित जीव जैसे पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और सूक्ष्म जीवाणु शामिल होते हैं।

पर्यावरण के मुख्य प्रकार-

भौतिक पर्यावरण (अजैविक पर्यावरण)- इसमें प्राकृतिक भौतिक घटक शामिल होते हैं, जैसे कि भूमि, जल, वायुमण्डल।

जैविक पर्यावरण- इसमें जीव-जंतु, पौधे और जैविक तंत्र शामिल होते हैं।

प्रदूषण के लिए उत्तरदायी तत्त्व (प्रदूषक)

वे तत्त्व जो पर्यावरण के किसी भी हिस्से में परिवर्तन कर उसे दूषित बनाते हैं, प्रदूषक कहलाते हैं।

392

प्रदूषक विभिन्न प्रकार के होते हैं और इनके स्रोत और प्रभाव के आधार पर इन्हें वर्गीकृत किया गया है-

प्रदूषकों का वर्गीकरण समाप्ति के आधार पर 1. जेव निम्नीकरण प्रदूषक-

ऐसे प्रदूषक जो सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित किए जा सकते हैं, जैसे- घरेलू कचरा, कागज, कपड़ा, मल।

2. अजेव निम्नीकरण प्रदूषक-

ऐसे प्रदूषक जो सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित नहीं किए जा सकते हैं, जैसे DDT, BHC प्लास्टिक

उत्पादन प्रक्रिया के आधार पर प्राथमिक प्रदूषक-

1.

ऐसे प्रदूषक जो सीधे अपने स्रोत से वातावरण में प्रवेश करते हैं, जैसे CO, CH, SOI

द्वितीयक प्रदूषक: प्राथमिक प्रदूषकों की आपस में अभिक्रिया से बने प्रदूषक, जैसे- NO, SO OPANI

मात्रा के आधार पर

1.

मात्रात्मक प्रदूषक-

ऐसे प्रदूषक जिनकी थोड़ी मात्रा हानिकारक नहीं होती, लेकिन अधिक मात्रा में ये प्रदूषण का कारण बनते हैं, जैसे CO21

2. गुणात्मक प्रदूषक-

ये प्रदूषक बहुत थोड़ी मात्रा में भी प्रदूषण फैलाते हैं, जैसे SO, SO,

COI

पर्यावरणीय प्रदूषण के प्रमुख कारण

1.

मानव जनसंख्या वृद्धि-

बढ़ती जनसंख्या के कारण भोजन, पानी, भूमि, ऊर्जा आदि की मांग बढ़ती जा रही है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। 2. औद्योगीकरण-

.

औद्योगिक स्तर पर होने वाली गतिविधियाँ जैसे निर्माण, खनन और कृषि से प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।

3. नगरों का विस्तार-

शहरीकरण के कारण भूमि का अधिक उपयोग और कचरा उत्पादन बढ़ा है।

4. वनों की कटाई-

वनों की अंधाधुंध कटाई से जैव विविधता का नुकसान और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है।

वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण वह स्थिति है जिसमें वायुमंडल में हानिकारक रासायनिक, जैविक और भौतिक पदार्थ शामिल हो जाते हैं, जिससे जीवन और पर्यावरण को हानि पहुँचती है। इसका असर सीधे मानव स्वास्थ्य, वनस्पतियों और जलवायु पर पड़ता है।

वायुमंडल की सामान्य संरचना-

पृथ्वी के वायुमंडल में विभिन्न गैसें एक संतुलित अनुपात में मौजूद होती हैं।

उत्कर्ष प्रकाश

नाइट्रोजन (Nitrogen) 78.08% ऑक्सीजन (Oxygen) 20.94%

आर्गन (Argon ) 0.93%

कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide ) 0.03% अन्य गैसें 0.02%

यह संतुलन पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसमें

बदलाव से जैवमंडल और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

वायु प्रदूषण के स्रोत (Sources of Air Pollution)

वायु प्रदूषण के स्रोत मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:

a. प्राकृतिक स्रोत

-

यह वायुमंडल में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होता है।

प्राकृतिक स्रोतों के उदाहरण-

.

ज्वालामुखी विस्फोट इसमें सल्फर डाइऑक्साइड, राख और गैसें निकलती हैं।

धूल भरी आँधियाँ हवा में धूलकणों को बढ़ाती हैं।

तूफान और जंगलों में आग हवा में कार्बन और धुएँ का स्तर बढ़ाते हैं।

भूस्खलन और कटाव भूमि का कटाव होता है और धूलकण हवा में फैलते हैं।

b. अप्राकृतिक स्रोत (मानव-निर्मित)

.

-

-

-

-

मनुष्य की गतिविधियों वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। अप्राकृतिक स्रोतों के उदाहरण-

वाहनों का धुआँ कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन प्रदूषक होते हैं।

उद्योगों का धुआँ सल्फर, कार्बन और हानिकारक रसायनों का उत्सर्जन होता है।

घरों में ईंधन का जलाना विशेष रूप से लकड़ी, कोयला और कचरा जलाने से

रासायनिक उपयोग कीटनाशकों, उर्वरकों और अन्य रसायनों का

प्रभाव।

परमाणु और रेडियोधर्मी उत्सर्जन ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं से।

प्रमुख प्रदूषक और उनके दुष्प्रभाव-

वायु प्रदूषण के कई प्रमुख घटक होते हैं जो वायुमंडल में विभिन्न प्रकार के प्रदूषण फैलाते हैं:

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव-

वायु प्रदूषण का प्रभाव संपूर्ण जैवमंडल पर होता है। इसके कुछ मुख्य दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव श्वसन संबंधी रोग जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय संबंधी रोग बढ़ते हैं।

वनस्पतियों पर प्रभाव पौधों की वृद्धि में बाधा उत्पन्न होती है और वे विषाक्त तत्त्वों के संपर्क में आकर मुरझा सकते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव और ओजोन परत का क्षरण होता है जिससे जलवायु परिवर्तन हो सकता है।

जैव विविधता पर खतरा कई प्रजातियाँ प्रदूषण के कारण लुप्तप्राय होती हैं।

शहरी क्षेत्रों में कोहरे का निर्माण शहरों में कोहरे की मोटी परत बनती है, जिससे दृश्यता और स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय-

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न नीतियाँ और उपाय अपनाए जा सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उपाय हैं:

1. वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र का विकास

2.

3.

4.

वृक्ष वायु को शुद्ध करने में सहायक होते हैं और प्रदूषण को कम करने में सहायता करते हैं।

शहरों के आस-पास हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) विकसित करने से प्रदूषण में कमी आती है।

स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग-

वाहनों और उद्योगों में सौर ऊर्जा, जल ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग किया जाना चाहिए।

पेट्रोल-डीजल की बजाय इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन ���ंधन के वाहनों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

रिसाइक्लिंग और पुनर्चक्रण-

रिसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन से कचरे को कम किया जा सकता

है जो वायु प्रदूषण में योगदान करता है।

शहरों से उद्योगों को दूर रखना-

प्रदूषणकारी उद्योगों को शहरों से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। ईंट भट्टे और बर्तन बनाने जैसे उद्योगों को शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

5. नई और स्वच्छ तकनीकों का उपयोग-

उद्योगों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए जिससे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम हो सके।

निधूम चूल्हों और स्वच्छ ऊर्जा यंत्रों का उपयोग करना चाहिए।

• कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) इसका बढ़ना ग्लोबल वार्मिंग और 6. वाहनों पर नियंत्रण- ग्रीनहाउस प्रभाव को बढ़ाता है।

वाहनों से निकलने वाले धुएँ को कम करने के लिए प्रदूषण मानकों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

.

सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) श्वसन तंत्र पर असर डालता है और अम्लीय वर्षा का कारण बनता है।

नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) वायुमंडल में ओजोन परत को प्रभावित करता है और अम्लीय वर्षा में योगदान करता है।

प्रदूषण की नियमित जाँच और प्रदूषण प्रमाण पत्र का प्रावधान होना चाहिए।

1.

.

कार्बन मोनो ऑक्साइड (CO) वाहनों से निकलने वाला यह गैस श्वास प्रक्रिया को प्रभावित करता है और विषाक्त होती है।

लेड (Lead) इसे ईंधन और कुछ उत्पादों में मिलाया जाता है, जो तंत्रिका तंत्र को हानि पहुँचाता है।

ओजोन (O) यह एक द्वितीयक प्रदूषक है जो मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

सरकार और संगठनात्मक प्रयास-

विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठन इस दिशा में जागरूकता अभियान चला सकते हैं ताकि लोगों को इसके प्रभाव और उपायों के बारे में बताया जा सके।

जल प्रदूषण

जल में ऐसे तत्त्वों का मिलना, जो इसके प्राकृतिक गुणों को बदलकर उसे हानिकारक बना देते हैं, जल प्रदूषण कहलाता है।

393

उत्कर्ष प्रकाशन

जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 की धारा 2 (डी) के अनुसार, जल का भौतिक, रासायनिक या जैविक गुण बदलने वाले तत्त्व जल प्रदूषण के कारक माने जाते हैं।

प्रदूषक (Pollutants) और उनके प्रभाव

वे तत्व जो जल की शुद्धता और गुणवत्ता को नष्ट करते हैं, उन्हें प्रदूषक कहते हैं।

कोलीफॉर्म बैक्टीरिया जल प्रदूषण के प्रमुख जैविक संकेतक हैं, जो बड़ी आँत को प्रभावित करते हैं।

प्रदूषक

बीमारी

मर्करी (Hg)

मिनीमाटा रोग

कैडमियम (Cd)

इटाई-इटाई रोग

नाइट्रेट (NO3)

ब्लू बेबी सिंड्रोम

फ्लोरिन (F)

फ्लोरोसिस (नीनोर्क- सिंड्रोम)

जल प्रदूषण के स्रोत (Sources of Water Pollution)

· जल प्रदूषण के कारणों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: 1. प्राकृतिक स्रोत

.

·

2.

i.

भूस्खलन के दौरान खनिज, पेड़-पौधों की पत्तियाँ आदि जल में मिल जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है।

झरनों, नदियों, कुओं या तालाबों का जल जिन स्थानों से बहकर आता है, वहाँ की भूमि में खनिज होते हैं तो वे जल में मिल सकते हैं।

कुछ धातुएँ जैसे सीसा, पारा, आर्सेनिक और कैडमियम जब अधिक मात्रा में होती हैं, तो यह जल को विषैला बना देती हैं। मानवीय स्रोत

मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषक भी जल प्रदूषण के मुख्य कारक होते हैं-

घरेलू बहिःस्राव (Domestic effluent ) घरों से निकलने वाले मल और अन्य अपशिष्ट ।

वाहित मल (Sweage) नालियों और सीवर का अवशेष

ii. कृषि बहिःस्राव (Agricultural effluent ) खेतों में उपयोग की गई कीटनाशक और उर्वरकों का बहाव

iii. औद्योगिक बहिःस्राव ( Industrial effluent ) उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक रसायन।

iv. तेल प्रदूषण (Oil Pollution) समुद्र और नदियों में तेल के रिसाव से जल प्रदूषण

V.

तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution) उष्मा के कारण जल के तापमान में वृद्धि।

vi. रेडियोधर्मी अपशिष्ट परमाणु कचरा ।

जल प्रदूषण का प्रभाव (Effects of Water Pollution)

·

जल प्रदूषण से न केवल मानव स्वास्थ्य पर, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी

तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जलीय जीव-जन्तुओं पर प्रभाव

विषाक्त जल के कारण मछलियों

और अन्य जलचर जीवों की मृत्यु। जलीय पादपों पर प्रभाव पौधों की वृद्धि में बाधा

पशु-पक्षियों पर प्रभाव पीने के लिए दूषित जल का उपयोग करने पर उनकी सेहत पर असर

मानव पर प्रभाव जल प्रदूषण से अनेक बीमारियाँ जैसे पेचिश, टायफॉइड, त्वचा रोग और कैंसर तक हो सकता है।

अन्य प्रभाव-

पेयजल की गुणवत्ता में कमी जल का दुर्गंधयुक्त और स्वाद में कटु होना।

.

समुद्री संपदा का ह्रास मछलियाँ और अन्य जलीय जीव प्रभावित होते हैं।

औद्योगिक गतिविधियों में बाधा जल का उपयोग कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह जाता।

जल प्रदूषण से बचाव के उपाय

(Measures to Control Water Pollution)

जल प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न उपाय अपनाए जा सकते हैं- 1. सीवर शोधन संयंत्रों की स्थापना सभी नगरों में मल जल का समुचित निस्तारण करने के लिए।

.

2. जैविक कृषि को बढ़ावा देना रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद का उपयोग करना।

3. औद्योगिक अपशिष्ट का पुन: उपयोग औद्योगिक अपशिष्ट युक्त जल को उपचारित कर पुनः उपयोग करना।

4. मृत पशुओं का सही निपटान नदियों में मृत पशुओं के शवों को न फेंकना और उनके लिए शव गृहों की स्थापना।

नमामि गंगे कार्यक्रम

| एक नदी के रूप में गंगा का राष्ट्रीय महत्त्व है, लेकिन प्रदूषण को नियंत्रित करके नदी के संपूर्ण मार्ग की सफाई की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ 'नमामि गंगे' कार्यक्रम आरंभ किया है

शहरों में सीवर ट्रीटमेंट की व्यवस्था कराना।

औद्योगिक प्रवाह की निगरानी ।

नदियों का विकास।

नदी के किनारों पर वनीकरण जिससे जैवविविधता में वृद्धि हो । नदियों के तल की सफाई।

उत्तराखंड, यू.पी., बिहार, झारखंड में 'गंगा ग्राम' का विकास

करना।

नदी में किसी भी प्रकार के पदार्थों को न डालना भले ही वे किसी अनुष्ठान से संबंधित हों, इससे प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है। इसके संबंध में लोगों में जागरूकता पैदा करना ।

ध्वनि प्रदूषण

.

ध्वनि प्रदूषण का तात्पर्य अत्यधिक शोर से है जो मानव जाति और अन्य जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक होता है। यह एक प्रकार का पर्यावरणीय प्रदूषण है, जिसका मुख्य स्रोत परिवहन, औद्योगिक गतिविधियाँ और अन्य कृत्रिम शोर होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण का अर्थ और परिभाषा

ध्वनि प्रदूषण तब होता है जब वातावरण में ऐसी तीव्र ध्वनि या शोर उत्पन्न होता है जो सुनने वाले के लिए अनुपयोगी और कष्टकारी हो। प्रमुख स्रोतों में मोटर वाहन हवाई जहाज, रेल परिवहन, औद्योगिक मशीनें आदि शामिल हैं।

ध्वनि स्तर का मापन और उसका प्रभाव

ध्वनि स्तर को डेसीबल (dB) में मापा जाता है, और यह मापन बताता है कि किसी ध्वनि की तीव्रता किस स्तर की है।

यहां विभिन्न ध्वनि स्तरों का विवरण और उनका मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रभाव निम्नलिखित है:

1 dB यह सबसे मन्द और लगभग श्रवण की सीमा पर मौजूद ध्वनि है, जिसे केवल शान्त वातावरण में ही सुना जा सकता है।

10 dB सामान्य मनुष्य द्वारा सांस लेने की ध्वनि या पत्तियों की सरसराहट खरखराहट यह अत्यंत धीमी और आरामदायक ध्वनि होती है।

394

उत्कर्ष प्रकाशन

20 dB यह अति शांत वातावरण की ध्वनि होती है, जैसे कि एक परिवहन नियंत्रण पुस्तकालय का माहौल या हल्की-हल्की बूँदों की आवाज़

30 dB मनुष्य की फुसफुसाहट का स्तर, यह धीमी आवाज़ होती है। 50-55 dB यह वह ध्वनि स्तर है, जो नींद में खलल डाल सकता है। इस स्तर पर ध्वनि असुविधाजनक होने लगती है, और लंबे समय तक संपर्क से आराम में बाधा आती है।

60 dB - सामान्य बातचीत का स्तर। यह ध्वनि हमें प्रतिदिन सुनने को मिलती है और मानव स्वास्थ्य पर कोई विशेष प्रभाव नहीं डालती है। 90-95 dB इस स्तर की ध्वनि न केवल ऊँची होती है, बल्कि इससे मनुष्य के शरीर की नाड़ी प्रणाली ( नर्वस सिस्टम) पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिससे स्थाई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

150 dB जब एक जेट विमान हवाई पट्टी से उड़ान भरता है, तो यह ध्वनि स्तर उत्पन्न होता है। यह अत्यंत ऊंची और कष्टदायक ध्वनि है जो श्रवण क्षमता को क्षति पहुँचा सकती है।

150-156 dB यह ध्वनि स्तर प्राणघातक होता है और इससे मनुष्य का शरीर और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा होता है। इससे स्थायी रूप से सुनने की क्षमता का ह्रास हो सकता है।

180-195 dB रॉकेट इंजन से उत्पन्न होने वाली ध्वनि का स्तर। यह असहनीय ध्वनि होती है और इसका प्रभाव केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि सुनने की क्षमता और मानसिक स्थिति पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत (Sources of Noise Pollution) परिवहन के साधन: वाहनों का शोर, हवाई जहाजों और ट्रेनों का शोर, जो सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण पैदा करते हैं।

.

.

उद्योग : उद्योगों में भारी मशीनों, निर्माण कार्य और उत्पादन प्रक्रिया में उत्पन्न ध्वनि।

सार्वजनिक स्थान: शादी समारोह, धार्मिक स्थल और सामाजिक उत्सवों में लाउडस्पीकर का उपयोग।

घरेलू उपकरण: घर में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे मिक्सर, कूलर, टी.वी. आदि भी ध्वनि का स्तर बढ़ाते हैं।

(Health Impacts of Noise Pollution)

ध्वनि प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव

1. शारीरिक प्रभाव

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), तनाव (स्ट्रेस), और सिरदर्द ।

.

श्रवण शक्ति में कमी (हियरिंग लॉस), जिससे व्यक्ति स्थायी रूप से बहरा हो सकता है।

2. मानसिक प्रभाव चिड़चिड़ापन (Irritability) और आक्रामकता

(Aggressiveness) का बढ़ना।

नींद में गड़बड़ी, जिससे नींद पूरी न होने के कारण थकान और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव ।

अत्यधिक शोर से मस्तिष्क में प्रतिकूल प्रभाव होता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन देखा जा सकता है।

ध्वनि प्रदूषण से बचाव के उपाय

(Preventive Measures for Noise Pollution) ग्रीन मफलर

ग्रीन मफलर ध्वनि प्रदूषण या अधिक आबादी वाले क्षेत्रों, जैसे- सड़कों के किनारे, रिहायशी इलाकों में स्थित राजमार्गों के आस-पास के क्षेत्रों में 4- 6 पंक्तियों में अशोक एवं नीम जैसे पौधों का वृक्षारोपण कर ध्वनि प्रदूषण कम करने हेतु एक युक्ति है।

395

यातायात के नियमों का सख्ती से पालन, हॉर्न का नियंत्रित उपयोग नए साइलेसिंग उपकरणों का उपयोग।

औद्योगिक उपाय-

उद्योगों में ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए साउंडप्रूफिंग तकनीकों का उपयोग |

औद्योगिक क्षेत्रों को रिहायशी इलाकों से दूर रखना।

नियंत्रण कानून और जागरूकता-

.

ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानूनी नियमों का

पालन।

लोगों में ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना। मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण भूमि की सतह का इस प्रकार से दूषित हो जाना कि उसकी गुणवत्ता और उर्वरता में कमी आ जाए, जिससे कृषि और वनस्पति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह प्रदूषण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों के कारण होता है।

मृदा प्रदूषण का अर्थ

.

जब भूमि में प्रदूषित जल, रासायनिक कीचड़, कूड़ा-कचरा, कीटनाशक और उर्वरकों की अत्यधिक मात्रा प्रवेश कर जाती है, तो मृदा की गुणवत्ता घट जाती है। यह मृदा प्रदूषण कहलाता है।

आधुनिक कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की अम्लीयता में वृद्धि होती है, जिसे संतुलित करने के लिए चूना (CaO) का उपयोग किया जाता है।

मृदा प्रदूषण के कारण (Causes of Soil Pollution )

मृदा प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

कीटनाशक और उर्वरक फसलों की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के लिए कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग होता है लेकिन ये रसायन भूमि में एकत्र होकर सूक्ष्म जीवों का विनाश कर देते हैं और मृदा के पोषक तत्त्वों के गुण समाप्त कर देते हैं।

घरेलू अवशिष्ट (Domestic Waste ) कचरा, गीली जूठन, लकड़ी के टुकड़े, टूटे हुए बर्तन, राख, सड़े-गले फल और सब्जियाँ, अंडों के छिलके आदि जब मृदा में मिलते हैं, तो उससे मृदा प्रदूषण बढ़ता है। औद्योगिक अवशिष्ट (Industrial Waste)- उद्योगों से निकला हुआ रासायनिक कचरा और विषैले तत्व भी मृदा प्रदूषण में योगदान करते हैं।

नगरीय अवशिष्ट (Urban Waste)- शहरों से उत्पन्न कचरा, जैसे कि कूड़ा-करकट, सड़े-गले फल, सब्जियों का कचरा, मानव मल सड़क और नालियों का कचरा, मरे हुए जानवर आदि भी मृदा को दूषित करते हैं।

मृदा प्रदूषण के दुष्प्रभाव (Effects of Soil Pollution)

·

.

मृदा प्रदूषण का प्रभाव पर्यावरण, जीव-जंतुओं और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक रूप में देखा जा सकता है मृदा ��ी उर्वरता घटती है, जिससे कृषि उत्पादन में कमी आती है।

सूक्ष्म जीवों का विनाश हो जाता है, जिससे भूमि में प्राकृतिक पुनरुत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होती है।

दूषित मृदा के कारण पौधों में विषैले पदार्थों का संचय होता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

मृदा प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

(Measures to Control Soil Pollution)

-

-

उत्कर्ष प्रकाश

मृदा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं-

व्यर्थ पदार्थों का समुचित निक्षेपण कचरे और अवशिष्ट पदार्थों को व्यवस्थित और सुरक्षित रूप से नष्ट या निपटान किया जाना चाहिए। रासायनिक कीटनाशकों पर नियंत्रण मृदा प्रदूषण रोकने के लिए डी. डी. टी., लिण्डेन, एल्ड्रिन जैसे हानिकारक कीटनाशकों के उपयोग पर रोक लगानी चाहिए।

नागरिकों में जागरूकता नागरिकों को कचरा इधर-उधर न फेंकने और सफाई के प्रति सचेत करने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए। स्वच्छ शौचालय का निर्माण अव्यवस्थित शौचालयों के स्थान पर साफ और स्वस्थ शौचालयों का निर्माण किया जाना चाहिए।

अवशिष्टों का पुनःचक्रण औद्योगिक और घरेलू अवशिष्टों का पुनः • उपयोग और पुनः चक्रण किया जाना चाहिए। मृदा क्षरण रोकने के उपाय-

वनस्पति कवर को बनाए रखना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और भूमि संरक्षण तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

1987 में किए गए इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत ओजोन क्षरण करने वाले रसायनों का उत्पादन और उपयोग कम करने पर सभी देशों ने सहमति जताई।

.

इसके अंतर्गत क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और हेलोन का उत्पादन और उपयोग सीमित किया गया।

1. ग्रीनहाउस गैसों का नियंत्रण-

2.

.

2016 में रवांडा की राजधानी में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में संशोधन कर ग्रीनहाउस गैसों (जैसे हाइड्रोक्लोरोकार्बन) के प्रयोग को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने का संकल्प लिया गया।

जागरूकता अभियान-

हर साल 16 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोग ओजोन परत के महत्त्व को समझ सकें और इसे बचाने के लिए जागरूक हो सकें।

अन्य प्रयास-

.

फ्रेऑन और अन्य CFCs जैसे रसायनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटर, ए.सी., फोम उत्पादन में होता है।

ऐसे उद्योगों में जहाँ ओजोन क्षरणकारी रसायनों का उपयोग होता है, उन्हें ऐसे रसायनों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है जो ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुँचाते।

भारत में पर्यावरणीय संबंधित प्रमुख अधिनियम

(Environmental Laws in India)

1.

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

2. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

3.

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम,

4.

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980

5.

6.

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972

जैव विविधता अधिनियम, 2002

7. पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) अधिनियम, 2006

8. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016

9. ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2016

10. अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016

UNEP (United Nations Environment Programme) "संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम" एक वैश्विक संगठन है, जो पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करता है।

.

इसकी स्थापना वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। यह संगठन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों का नेतृत्व करता है।

UNEP का मुख्यालय और संचालन

मुख्यालय- नैरोबी, केन्या

वर्तमान कार्यकारी निदेशक- इंगर एंडरसन

स्थापना- 5 जून, 1972 (स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद)

संस्थापक- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)

UNEP के तहत कई वैश्विक पर्यावरणीय समझौतों को लागू किया जाता है और यह सरकारों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के साथ मिलकर कार्य करता है।

UNEP के मुख्य कार्य और उद्देश्य

A.

UNEP का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी और मानवता के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं- पर्यावरणीय नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन

देशों को पर्यावरणीय नियमों और नीतियों को विकसित करने में मदद करता है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधियों (Treaties) को लागू करने में सहायता करता है।

B. जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास

.

UNEP ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से जुड़े शोध और रिपोर्ट तैयार करता है।

पेरिस समझौता (Paris Agreement ) और क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) के कार्यान्वयन में सहयोग करता है।

C. जैव विविधता संरक्षण

UNEP "कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (CBD) जैसे समझौतों को लागू करने में मदद करता है।

वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण को बढ़ावा देता है।

D. प्रदूषण नियंत्रण और संसाधन प्रबंधन

E.

वायु, जल और भूमि प्रदूषण को कम करने के लिए विभिन्न परियोजनाएँ चलाता है।

समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन पर काम करता है। सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा 2030 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को लागू करने में मदद करता है। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) को बढ़ावा देता है।

UNFCCC (United Nations Framework Convention on Climate Change)

396:

"संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन" एक अंतरराष्ट्रीय संधि (treaty) है, जिसे जलवायु परिवर्तन से निपटने और इसके प्रभावों को कम करने के लिए बनाया गया था। यह संधि 1992 में हुई थी और 1994 से प्रभावी हुई। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions) को कम करना और वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करना है।

उत्कर्ष प्रकाश

UNFCCC का परिचय

क्र.स.

सम्मेलन वर्ष

स्थापना 9 मई 1992 (रियो डी जनेरियो में पृथ्वी शिखर सम्मेलन

1.

COP-1 1995

स्थान

बर्लिन, जर्मनी

Earth Summit)

2.

COP-2 1996

जिनेवा, स्विट्जरलैण्ड

प्रभावी हुआ 21 मार्च 1994

3.

COP-3 1997

मुख्यालय बॉन, जर्मनी

4.

COP-8 2002

क्योटो, जापान

नई दिल्ली (भारत)

वर्तमान कार्यकारी सचिव साइमन स्टील (Simon Stiell)

5.

COP-10

2004

ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना

UNFCCC का मुख्य उद्देश्य-

6.

COP-11 2005

मॉण्ट्रियल (कनाडा)

"वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को स्थिर करना और

7.

COP-24

2018

केटोवाइस, पॉलैण्ड

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना। "

UNFCCC के मुख्य कार्य

A. जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करना

8.

COP-25 2019

9.

COP-26 2021

मैड्रिड (स्पेन) ग्लास्गो (यू.के.)

10.

COP-27 2022

शर्म अल शेख (मिस्र)

11.

COP-28 2023

संयुक्त अरब अमीरात

देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

12.

COP-29

2024

बाकू, अज़रबैजान

·

औद्योगिक देशों (Developed Nations) को जलवायु परिवर्तन की ज़िम्मेदारी लेने और विकासशील देशों की मदद करने को कहता है। B. वार्षिक जलवायु सम्मेलन (COP Conference of Parties) आयोजित करना

·

हर साल "COP" बैठक आयोजित करता है, जिसमें सभी सदस्य देश जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक रणनीतियों पर चर्चा करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण COP

. COP 3 (1997) क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) अपनाया

.

गया।

COP 21 (2015) पेरिस समझौता (Paris Agreement) पर सहमति बनी।

पारिस्थितिकी

पारिस्थितिकी [Ecology]

जैविक तथा अजैविक वातावरण के साथ जीवधारियों के अन्तः सम्बन्धों का अध्ययन है।

पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले वैज्ञानिक रिटर ने किया था तथा इसका पूर्ण रूप से परिभाषित जीव वैज्ञानिक अर्नेस्ट हैकल ने किया।

वैज्ञानिक टायलर ने पारिस्थितिकी को कुछ इस प्रकार परिभाषित किया है, "जो सभी जीवों के सभी सम्बन्धों का एवं उनके वातावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन करता है।"

COP 26 (2021)- ग्लासगो जलवायु समझौता (Glasgow पारिस्थितिकी की शाखाएँ Climate Pact) अपनाया गया।

C. अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों को लागू करना

UNFCCC के तहत कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधियाँ बनी हैं।

क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)-1997

औद्योगिक देशों (Developed Nations) के लिए बाध्यकारी कार्बन कटौती लक्ष्य निर्धारित करता है।

2005 में प्रभावी हुआ, लेकिन अमेरिका इससे बाहर रहा।

पेरिस समझौता (Paris Agreement ) - 2015

-

1. स्वपारिस्थितिकी [Auto Ecology] किसी एक ही जाति (Species) के सभी जीवों का सामूहिक जीवन पर पर्यावरण के प्रभाव का अध्ययन, स्वपारिस्थितिकी कहलाता है।

2.

संपारिस्थितिकी [Syn Ecology] किसी जीव के विभिन्न समूहों और उनका पर्यावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन संपारिस्थितिकी कहलाता है। यह दो प्रकार के होते हैं-

A.

जलीय पारिस्थितिकी (Aquatic Ecology] जलीय जीवों के समूहों का अन्तः सम्बन्ध और उनका पर्यावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन, जलीय पारिस्थितिकी कहलाता है।

-

1.5°C 2°C तक ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने का लक्ष्य।

सभी देशों के लिए उत्सर्जन कम करने का अनिवार्य लक्ष्य | "नेट-ज़ीरो" (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य तय किया गया। ग्लासगो जलवायु समझौता (Glasgow Climate Pact ) - 2021 कोयले के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करने का संकल्प। जलवायु वित्त पोषण (Climate Finance) बढ़ाने पर सहमति | COP (CONFERENCE OF PARTIES)

· सन् 1992 के प्रथम पृथ्वी सम्मेलन (रियो डि जेनेरियो) में UNFCCC : "United Nations Frame Work Convention or Climate Change" संस्था का गठन किया गया।

B. स्थलीय पारिस्थितिकी [Terrrestial Ecology] स्थलीय जीवों के अन्तः संबंधों और उनके वातावरण का अध्ययन, स्थलीय पारिस्थितिकी कहलाता है।

3. प्राणी पारिस्थितिकी [Animal, Ecology]

4.

5.

यह संस्था प्रतिवर्ष सन् 1995 से जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर चर्चा 6. करने हेतु एक बैठक का आयोजन विश्व स्तर पर करती है। इस बैठक को COP='Conference of Parties' कहा जाता है।

इसमें विभिन्न

प्राणियों के अन्तः सम्बन्धों तथा वातावरण का अध्ययन होता है। पादप परिस्थितिकी [Plant Ecology] पादप समुदायों के वातावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन होता है।

-

-

आवास पारिस्थितिकी [Habitat Ecology] इसमें जेवमण्डल में उपस्थित जीवधारियों के प्राकृतिक आवासों और उनका वातावरण के साथ सम्बन्ध का अध्ययन होता है।

संरक्षण पारिस्थितिकी [ Conservation Ecology] इसमें 'विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्त्वता का अध्ययन होता है।

397

उत्कर्ष प्रकाशन

-

7. विकिरण पारिस्थितिकी (Radiation ecology) इसमें सभी प्रकार की विकिरण व रेडियो सक्रिय पदार्थों का पर्यावरण व जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन होता है।

8. मानव पारिस्थितिकी (Human ecology) इसमें मानव और उसको प्रभावित करने वाले सभी वातावरणों का अध्ययन होता है। पारस्परिक क्रियाएँ (Interactions)

1.

कई जीवधारी एक स्थान में रहकर सम्बन्ध स्थापित करते हैं जो निम्नलिखित है-

-

सह जीवन [Symbiosis] दो जीवों का परस्पर ला��कारी सम्बन्ध। उदाहरण लाइकेन (कवक व शैवाल), दीमक के आहारनाल में प्रोटोजोआ ट्राइकोनिम्फा

2. परजीविता [Parasitism] एक जीव का दूसरे जीव पर आश्रित होकर उसे हानि पहुँचाना। उदाहरण जूँ, आहारनाल परजीवी टीनिया । 3. सहजीविता [Commensalism] एक जीव को लाभ होता है।

तथा दूसरे जीव को ना लाभ होता है और ना ही हानि। उदाहरण- अधिपादप (Epiphytes), मानव के आँत में ई. कोलाई

4.

-

परभक्षण (Predation) इसमें एक जीव, दूसरे जीव का भक्षण करता है; उदाहरण जूफैगस, नेपेन्थीस कीटभक्षी पादप

-

5. मृतोपजीविता (Saprophytism) वह जीव जो सड़े-गले पदार्थों पर आश्रित होते हैं। उदाहरण कवक

पारिस्थितिकी अनुक्रमण (Ecological Succession )

अनुक्रमण शब्द हॉल्ट द्वारा गढ़ा गया तथा अनुक्रमण सिद्धांत वार्मिंग एवं क्लीमेंट्स द्वारा दिया गया था।

जैविक समुदाय का किसी क्षेत्र के वातावरण, समय और जैविक कारकों के प्रभाव से परिवर्तित होना, पारिस्थितिकी अनुक्रमण कहलाता है। यह दो प्रकार के होते हैं-

किसी

1. प्राथमिक अनुक्रमण (Primary Succession) पारिस्थितिकी समुदाय का विकास ऐसे क्षेत्र में होना जहाँ पहले कोई पारिस्थितिकी समुदाय उपस्थित नहीं हो, उसे प्राथमिक अनुक्रमण कहते हैं।

उदाहरण पथरीली चट्टानों का अनुक्रमण

2. द्वितीयक अनुक्रमण (Secondary Succession)

किसी

पारिस्थितिकी समुदाय का विकास ऐसे क्षेत्र में होना जहाँ पहले पारिस्थितिक समुदाय उपस्थित हो, परन्तु वह पूर्ण रूप से नष्ट हो उसे द्वितीयक अनुक्रमण कहते हैं।

उदाहरण - जंगल का आग से नष्ट होकर पुनः वन समुदाय का विकास होना ।

पारिस्थितिकी तंत्र

इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले टान्सले ने सन् 1935 में किया था। किसी क्षेत्र पर पाए जाने वाले किसी जीव समुदाय का वातावरण तथा अन्य जैविक समुदाय से परस्पर सम्बन्ध को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।

यह दो प्रकार के होते हैं-

1. प्राकृतिक (Natural) उदाहरण वन, तालाब इत्यादि । 2. कृत्रिम (Artificial) उदाहरण बगीचा, पार्क इत्यादि ।

पारिस्थितिकी तंत्र के घटक

·

दो

मुख्य घटक होते हैं-

1. जैविक घटक (Biotic Component) यह पादप व जन्तुओं को मिलाकर बनते हैं। इसे निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जाता है-

I.

उत्पादक (Producers) वे स्वपोषी होते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण के दौरान CO2 एवं H2O जैसे सरल अकार्बनिक पदार्थों से जटिल कार्बनिक पदार्थों का संश्लेषण करते हैं। उत्पादकों को रूपांतरक ( ट्रांसड्यूसर) भी कहा जाता है क्योंकि वे सौर विकिरणों को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। सूर्य प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।

सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। और इसे विभिन्न जटिल कार्बनिक पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि में संगृहीत किया जाता है।

II. उपभोक्ता (Consumers) वे परपोषी होते हैं, जो अपने स्वयं के भोजन को संश्लेषित करने में असमर्थ होते हैं। वे पादपों या उत्पादकों पर अपनी खाद्य आवश्यकता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहते हैं। परभक्षियों की व्यापक श्रेणी में परजीवी और रोगजनक भी शामिल हैं।

परभक्षी जीवित भक्षक होते हैं क्योंकि वे परजीवी रहने के लिए अन्य जीवित जीवों का प्रत्यक्ष भोजन करते हैं। उपभोक्ता विभिन्न प्रकार के होते हैं-

a.

b.

प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers) वे शाकाहारी जंतु होते हैं, जो पादप या पादप उत्पादों का भक्षण करते हैं। जैसे- खरगोश, हरिण, चूहें, गाय, हाथी, जंतुप्लवक आदि। इन्हें मुख्य उद्योगी पशु कहा जाता है, क्योंकि वे पादप पदार्थ को पशु पदार्थ में परिवर्तित करते हैं।

-

द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary Consumers) वे प्रत्यक्ष रूप से पादपों का भक्षण नहीं करते हैं। इसके स्थान पर वे शाकाहारियों का भक्षण करते हैं। इसलिए उन्हें प्राथमिक मांसाहारी कहा जाता हैं। जैसे लोमड़ी, सियार, मेंढ़क, मछली आदि।

III. तृतीयक उपभोक्ता (Tertiary Consumers)

-

वे बड़े

मांसाहारी जंतु होते हैं जो छोटे मांसाहारी जंतु का भक्षण करते हैं। जैसे -भेड़िये लोमड़ी को खाते हैं, साँप मेंढक को खाते हैं। ये मांसाहारी जंतु कभी भी बड़े मांसाहारी जंतु का शिकार हो सकते हैं।

बाद वाले को शीर्ष मांसाहारी कहा जाता है जैसे बाघ, शेर, शार्क, मगरमच्छ, चील आदि। IV. अपघटक (Decomposers) पारिस्थितिकी तंत्र के वो जैविक घटक जो अपना भोजन उत्पादक व उपभोक्ता के मृत शरीर से प्राप्त करते है अर्थात् यह मृतोपजीवी (Saprophytes) होते हैं। यह जीवाणु, विषाणु, कवक और प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्मजीव खाते हैं।

यह सूक्ष्मजीव अर्थात अपघटक भोजन बनाने के साथ जटिल कार्बनिक पदार्थों से बने शरीर को साधारण यौगिकों में अपघटित करते हैं। यही साधारण यौगिक पुनः उत्पादक द्वारा उपयोग किए जाते हैं। अपघटक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में आवश्यक है।

2. अजैविक घटक (Abiotic Component )

1.

2.

3.

वे कारक जो निर्जीव होते हैं।

-

प्रकाश (light) इसके द्वारा पौधों में प्रकाश सश्लेषण से भोजन निर्माण, पौधों में गति, बीज, अंकुरण, श्वसन, वाष्पोत्सर्जन आदि क्रिया होती हैं। जन्तु भोजन के लिए पौधों पर निर्भर रहता है। प्रकाश के गुण मात्रा व अवधि का प्रभाव पौधों पर पड़ता है।

-

ताप (Temperature) दैनिक क्रिया के लिए लगभग 10°C से 45 °C तक ताप आवश्यक होता है ताप के परिवर्तन से पौधों की दैनिक क्रिया प्रभावित होती है।

जैसे जीवों की रचना, क्रिया तथा प्रजनन ।

-

आर्द्रता (Humidity) आर्द्रता वाष्पोत्सर्जन की क्रिया से संबंधित है कम आर्द्रता होने पर वाष्पोत्सर्जन अधिक तथा अधिक आर्द्रता होने पर वाष्पोत्सर्जन क्रिया कम होती है।

398

उत्कर्ष प्रकाशन

4. वायु (Wind) वायु विशेष भूमि अपरदन, परागण एवं बीजों के प्रकीर्णन पर प्रभावित होती है।

5. भू-आकृतिक (Geomorphic )- इसमें स्थल की ऊँचाई, भूमि का ढलान तथा वनस्पति में हुए बदलाव पर अध्ययन होता है।

-

6. मृदा (Soil) सभी वनस्पतियाँ, मृदा, मृदा जल व मृदा संरचना से प्रभावित होती है।

पौधों का पारिस्थितिक वर्गीकरण

·

वैज्ञानिक ई. वार्मिंग ने पारिस्थितिकीय आधार पर पौधों को 5 वर्गों में विभाजित किया है-

1. जलोद्भिद (Hydrophytes )

2. समोद्भिद् (Mesophytes )

3. मरुदभिद् (Xerophytes )

4. मृदा

में उपस्थित भौतिक शुष्क पौधे

5. मृदा में उपस्थित क्रियात्मक शुष्क पौधे

कुछ विशेषीकृत पौधे (Specialised Plants)

एरिमोफाइट्स

रेगिस्तान पर उगने वाले पौधे

चट्टानों पर उगने वाले पौधे

लिथोफाइट्स

मोफाइट्स

बालू के उगने वाले पौधे

स्क्लेरोफाइट्स

| काष्ठीय झाड़ीदार पौधे

हैलोफाइट्स

ऑक्सीलोफाइट्स

अधिक सांद्रता वाली मृदा में उगने वाले पौधे अम्लीय मृदा में उगने वाले पौधे

फाइट्

दलदल में उगने वाले पौधे

खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

·

पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न जीव अर्थात् पौधे तथा जन्तु अपनी पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं के अनुसार एक-दूसरे पर आश्रित रहते हैं तथा एक आहार श्रृंखला बनाते हैं।

खाद्य जाल (Food Web)

·

विभिन्न जीव पोषण के आधार पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। कई खाद्य श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से सम्बन्धित अर्थात् जुड़ी रहती है तथा एक आहार जाल या खाद्य जाल बनाती है।

Snake

Fox

Hawk

Rabbit

Mouse

Owl

Frog

Grasshopper

Grasses

Bird

: 399

जैव विविधता

पृथ्वी पर उपस्थित समस्त जीवों की विभिन्नता, विषमता एवं पारिस्थितिकी जटिलता 'जैव-विविधता' कहलाती है। जैव-विविधता शब्द सर्वप्रथम 'रोजेन' ने दिया।

राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण चेन्नई में स्थित है।

भूमध्य रेखा के आस पास जैव-विविधता सर्वाधिक होती है, जबकि ध्रुवों पर जैव-विविधता न्यूनतम होती है।

सर्वाधिक जैव-विविधता वाला देश ब्राजील है।

भारत भी जैव-विविधता की दृष्टि से एक संपन्न देश है।

ध्रुवीय क्षेत्र, उपध्रुवीय क्षेत्र, मरुस्थलीय क्षेत्र, कम वर्षा वाले क्षेत्रों आदि की जैव-विविधता अपेक्षाकृत कम पायी जाती है।

जैव-विविधता का मापन-

1. एल्फा जैव-विविधता

किसी स्थान विशेष या क्षेत्र विशेष में उपस्थित जैव-विविधता, 'एल��फा जैव विविधता' होती है।

2. बीटा-जैव विविधता

·

'बीटा-जैव-विविधता' वृहद् स्तर पर पाई जाने वाली जैव-विविधता है। 3. गामा- जैव-विविधता

विश्व स्तर पर पाई जाने वाली जैव-विविधता 'गामा जैव-विविधता' होती है।

जैव-विविधता को हानि पहुँचाने वाले कारक-

1.

.

वनों का नष्ट होना

मनुष्य द्वारा वनों की कटाई से वन क्षेत्रों में लगातार कमी देखी जा सकती है। वन क्षेत्र कम होने से जीवों को भोजन, आवास एवं प्रजनन हेतु स्थान नहीं मिल पाने से जीवों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से जीवों में आपसी संघर्ष से भी संख्या कम हो रही है।

Note:- डाइक्लोफिनेक नामक दर्दनिवारक के कारण कैल्सियम उपापचय प्रभावित होता है, जिस कारण अण्डों का बाहरी आवरण, जो 'कैल्सियम कार्बोनेट' का बना होता है, कमजोर हो जाता है, जिससे अण्डे समय से पूर्व ही फूट जाते हैं। एवं नए गिद्ध नहीं पनप पाते हैं। यही कारण है कि राजस्थान में गिद्ध विलुप्त होते जा रहे हैं। यह जैव-विविधता के नष्ट होने का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है।

2. विदेशी प्रजातियाँ

जलकुंभी नामक सजावटी पौधा जो भारत लाया गया एक विदेशी प्रजाति है जो आज स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन चुकी है। लेटेना भी एक विदेशी प्रजाति है।

3. जीन उपचारित बीज

जीन उपचारित फसल भी जैव-विविधता नष्ट करने में एक बड़ा कारक है। Bt फसलों से कीटों की अनेक जातियाँ प्रभावित होती है। ये कीट रोधी फसलें होती हैं। जैसे Bt- कपास के कारण 'बॉलवॉर्म' जैसे कीट सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।

4. जीव-जन्तुओं का शिकार-

जिन प्रजातियों का शिकार अधिक किया जाता है, वे प्रजातियाँ जल्दी ही संकटग्रस्त हो जाती है।

उत्कर्ष प्रकाशन

इन जीवों को मात्र हाथी दाँत, खाल, सींग आदि के लिए ही मारा जाता है एवं बाद में इन अंगों की तस्करी की जाती है। इसका प्रमुख उदाहरण है- मॉरीशस में पाये जाने वाले डोडो पक्षी जो अब विलुप्त हो चुके हैं। 5. हानिकारक रसायन-

रसायनों के कीटनाशकों, दवाइयों आदि के रूप में बढ़ते प्रयोग से भी अनेक प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।

6. जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के कारण बहुत-सी जीवों की प्रजातियाँ नष्ट हो रही हैं। 7. प्रदूषण

· वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण के कारण जीवों की विभिन्न प्रजातियाँ प्रभावित हुई हैं।

जैव-विविधता मुख्यत: तीन प्रकार की होती है-

1. आनुवंशिक जैव-विविधता

·

आनुवंशिक स्तर पर पाई जाने वाली जैव-विविधता को आनुवंशिक जैव-विविधता कहते हैं।

जैसे धान की दो किस्मों के मध्य पाई जाने वाली विभिन्नता । 2. प्रजातीय- जैव-विविधता

·

भिन्न-भिन्न प्रजातियों के मध्य पाई जाने वाली विभिन्नता को प्रजातीय जैव-विविधता कहते हैं।

उदाहरण- पश्चिम घाट के उभयचर जन्तुओं एवं पूर्वी घाट के उभयचरों के बीच पाई जाने वाली कोशिकाओं में विविधता ।

3. पारिस्थितिकी जैव-विविधता

जीव-जन्तु जिस भौगोलिक क्षेत्र में रहते हैं, तो उस क्षेत्र में रहने हेतु उन जीव-जन्तुओं में अनेक विशेषताएँ पाई जाती हैं, जो उसे अन्य क्षेत्र की प्रजातियों से अलग बनाती है तथा उस क्षेत्र में जीवित रहने के लिए आवश्यक होती हैं।

विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों के मध्य पाई जाने वाली विभिन्नता, पारिस्थितिकी जैव-विविधता कहलाती है।

उदाहरण- घास के मैदानों में पाई जाने वाले जीव-जन्तु तथा मरुस्थल में पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं से भिन्न होते हैं।

22 मई को 'जैव-विविधता दिवस' मनाया जाता है। जैव विविधता दिवस मनाने का मुख्य कारण लोगों में पर्यावरण तथा जीव-जन्तुओं के प्रति जागरूकता लाना है।

जैव विविधता दिवस, 2024 अर्थात् 22 मई, 2024 के जैव विविधता दिवस की थीम "योजना का हिस्सा बने" Be part of the plan रखी गई।

मनाया गया।

·

·

वर्ष 2010 को 'अन्तर्राष्ट्रीय जैव-विविधता वर्ष' के रूप में मनाया गया। वर्ष 2011 से 2020 तक 'अन्तर्राष्ट्रीय जैव-विविधता-दशक' के रूप में

"रियो-1 सम्मेलन / पृथ्वी सम्मेलन' जो कि वर्ष 1992 में रियो-डी- जेनेरियो (ब्राजील) में हुआ था।

·

यह सम्मेलन जैव-विविधता संबंधी पहला सम्मेलन था।

·

जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है।

पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है।

जैव-विविधता संरक्षण के प्रकार

इसके अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, शिकार प्रतिबंधित क्षेत्र, जेव- आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फियर रिज़र्व), हॉट स्पॉट आदि को सम्मिलित किया गया है।

'राष्ट्रीय उद्यान' केन्द्र सरकार के नियंत्रण में होते हैं अतः यहाँ पर जैव- विविधता के संरक्षण का प्रयास केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या 100 से अधिक हैं।

अभयारण्य राज्य सरकार द्वारा ही घोषित किए जाते हैं एवं इन पर नियंत्रण राज्य सरकार रखती है।

हॉट स्पॉट (HotSpot)

'हॉट स्पॉट' को 'संवेदनशील क्षेत्र' तथा 'तप्त स्थल' भी कहा जाता है। इसकी अवधारणा नॉर्मन मेयर्स द्वारा दी गई।

हॉट स्पॉट वे स्थल होते हैं, जहाँ पर्याप्त जैव-विविधता पाई जाती है, लेकिन संरक्षण के प्रयास नहीं किए जाएँ तो यहाँ की जैव-विविधता नष्ट हो सकती है।

वर्तमान में विश्व में 36 हॉट स्पॉट घोषित किए गए हैं। इनमें से भारत में चार हॉट स्पॉट घोषित किए गए हैं-

1. पश्चिमी घाट

II. पूर्वी हिमालय III. इण्डो-म्यांमार

IV. सुण्डालेण्ड

पश्चिमी घाट में जैव-विविधता सबसे अधिक पायी जाती है, जो सम्पूर्ण देश की जैव-विविधता की लगभग 50-60% है।

भारत में सुण्डालैण्ड की जैव-विविधता सबसे कम है। जेव आरक्षित क्षेत्र तीन प्रकार के होते हैं-

1. कोर क्षेत्र

2. बफर क्षेत्र 3. ट्रांजिट क्षेत्र

I.

कोर क्षेत्र

कोर क्षेत्र जैव-आरक्षित क्षेत्र का सबसे भीतरी भाग होता है।

.

इसमें मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है, जिससे संकटग्रस्त प्रजातियों को प्राकृतिक आवास तथा सुरक्षा प्रदान की जा सके।

II. बफर क्षेत्र-

कोर-क्षेत्र के चारों तरफ का क्षेत्र बफर क्षेत्र कहलाता है।

इन क्षेत्रों में अनुमति लेकर मानवीय गतिविधियों की जा सकती

हैं।

जैसे अनुसंधान कार्य, शिक्षा संबंधी कार्य

III. ट्रांजिट क्षेत्र-

यह जैव- आरक्षित क्षेत्र का सबसे बाहरी भाग होता है।

इसके अंतर्गत पशु चराई, सूखी लकड़ियों की कटाई जैसी गतिविधियाँ की जा सकती हैं।

जेव आरक्षित क्षेत्र

भारत में कुल 18 जैव-आरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए हैं।

18 जैव आरक्षित क्षेत्रों में से 12 आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल हैं।

भारत के प्रमुख जैव आरक्षित क्षेत्र

नीलगिरि केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु

1. स्वस्थाने संरक्षण

1.

संकटग्रस्त प्रजातियों को उन्हीं के आवास स्थलों पर संरक्षण प्रदान

II.

मन्नार की खाड़ी तमिलनाडु

करना, 'स्वस्थाने संरक्षण' कहलाता है।

III. सुन्दरवन पश्चिम बंगाल

400

IV. नंदा देवी उत्तराखण्ड

V.

नोकरेक मेघालय

VI. पचमढ़ी मध्यप्रदेश

VII. अचानकमार अमरकंटक मध्यप्रदेश / छत्तीसगढ़

VIII. सिमलीपाल ओडिशा

IX. कंचनजंघा सिक्किम

X. अगस्त्यामलाई तमिलनाडु

XI. पन्ना मध्य प्रदेश

XII. ग्रेट निकोबार अण्डमान-निकोबार

2. परस्थाने संरक्षण

·

उत्कर्ष प्रकाश

यदि संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों में ही रहने दिया जाए तो उनके विलुप्त होने का संकट बना रहता है, इसलिए इन प्रजातियों के जीवों को अन्य स्थानों पर संरक्षण प्रदान किया जाता है। जो परस्थाने संरक्षण' कहलाता है। उदाहरण जीन बैंक, चिड़ियाघर, जन्तु उद्यान, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक आदि।

संकटग्रस्त प्रजातियों के जीनों का संग्रहण जीन बैंक में किया जाता है। जैव-विविधता के संरक्षण करने वाली संस्थाएँ-

· IUCN (International Union For Conservation of Nature)- IUCN की स्थापना वर्ष 1948 में की गई। इसका मुख्यालय ग्लैण्ड (स्विट्जरलैण्ड) में स्थित है।

· IUCN जैव-विविधता के संरक्षण हेतु कार्य करने वाला सबसे बड़ा तथा प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान है।

· IUCN 'रेड डाटा बुक' को प्रकाशित करता है जिसमें संकटग्रस्त प्रजातियों को दर्शाया जाता है।

.

·

·

विलुप्त, प्राकृतिक आवासों से विलुप्त सुभेद्य (Vulnerable) आदि

में IUCN के द्वारा प्रजातियों का वर्गीकरण किया जाता है।

ऐसी प्रजाति जो वर्तमान में तो पर्याप्त संख्या में है, लेकिन उनके संरक्षण के प्रयास नहीं किए जाएँ तो भविष्य में संकटग्रस्त हो सकती है। वे सुभेद्य प्रजाति कहलाती है।

WWF (World Wide Fund For Nature)- इसकी स्थापना वर्ष 1961 में की गई, इसका मुख्यालय ग्लैण्ड (स्विट्जरलैण्ड) में स्थित है। WWF का प्रतीक चिह्न लाल-पांडा है।

WWF अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रही जैव-विविधता संरक्षण योजनाओं हेतु फण्ड उपलब्ध करवाने वाला प्रमुख संस्थान है।

इसकी सहायता से ही भारत में लाल-पांडा परियोजना चलाई जा रही है। इसका मुख्य कार्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जानवरों, पादपों आदि के विभिन्न अंगों, उत्पादों जैसे हाथी दाँत, खाल, सींग आदि की तस्करी

पर निगरानी रखना है।

जैव-विविधता के संरक्षण हेतु भारत में चल रही प्रमुख योजनाएँ-

I.

बाघ परियोजना

II. हाथी परियोजना

III. लाल-पांडा परियोजना

IV. ऑलिव रिडले टर्टल परियोजना

बाघ परियोजना-

· प्रोजेक्ट टाइगर, 1973 में 9 बाघ रिज़वों के साथ प्रारंभ हुआ। वर्ष

2024 में बाघ रिज़वों की संख्या 55 हो गयी है।

.

यह परियोजना स्व. कैलाश साँखला के प्रयासों से प्रारंभ की गई।

401

स्व. कैलाश साँखला को 'टाइगर मैन' के नाम से जाना जाता है।

यह परियोजना 'जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान' (उत्तराखण्ड) से प्रारंभ की गई।

राजस्थान में 4 बाघ परियोजनाएँ हैं-

1. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर (1973)

2. सरिस्का अभयारण्य अलवर (1978)

3. मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान कोटा, झालावाड़ (2013) 4. रामगढ़ विषधारी अभयारण्य बूँदी- (2021-22)

वैश्विक रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की ला�� सूची में चीतों को सुभेद्य की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जबकि एशियाई चीता, जिसका अस्तित्व अब केवल ईरान में ही है, गंभीर रूप से संकटग्रस्त है। सितम्बर, 2022 में नामीबिया से 8 चीतों को भारत में पुनर्वास के लिए लाया गया। इन्हें मध्य प्रदेश के कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया है। इसी क्रम में 18 फरवरी, 2023 को दक्षिण अफ्रीका से भी 12 चीतों को लाया गया।

हाथी परियोजना (Elephant-Project)

हाथी परियोजना हाथियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष 1992 में प्रारंभ की गई।

यह परियोजना 'सिंहभूम जंतु उद्यान' (झारखंड) से प्रारंभ की गई। आमेर के कुंडा ग्राम (जयपुर, राजस्थान) में केन्द्र व राज्य सरकार की सहायता से एलीफैंट विलेज बनाया गया है।

हाथियों के अवैध शिकार को रोकने हेतु दक्षिण एशिया में MIKE (Monitoring the Illegal Killing of Elephants) नामक योजना चलाई गई।

लाल-पांडा परियोजना

लाल-पांडा परियोजना लाल-पांडा के संरक्षण हेतु वर्ष 1996 में पद्मजा नायडू हिमालयन जन्तु पार्क (दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल) से प्रारंभ की गई।

यह परियोजना WWF के सहयोग से चलाई जा रही है। ऑलिव रिडले टर्टल परियोजना

·

ऑलिव रिडले व अन्य कछुओं की संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एंव यूएनडीपी ने साझे तौर पर वर्ष 1999 में भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून में समुद्री कछुआ परियोजना की शुरुआत ओडिशा के तटीय क्षेत्रों से की। यह परियोजना कछुआ के प्रजनन क्षेत्रों को सुरक्षित करता है। इस कछुए का प्रजनन स्थल ओडिशा का गहिरमाथा समुद्र तट है जो तीन किलोमीटर लम्बा और लगभग 350 मीटर चौड़ा द्वीप है जो दो नदियों के मुहाने के बीच भीतरकनिका अभयारण्य में स्थित है। इस अभयारण्य में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।

गैंडा परियोजना

एक सींग वाले गैंडे केवल भारत में पाए जाते हैं। इनके सींग का उपयोग औषधि निर्माण में होता है इसलिए बड़े पैमाने पर इनका अवैध शिकार होता है। अवैध शिकार के कारण गैंडों की संख्या में लगातार कमी होती गई। इनकी कम होती संख्या के कारण इनके संरक्षण के लिए वर्ष 1987 में गैंडा परियोजना प्रारंभ की गई।

गैंडों के लिए असम के मानस अभयारण्य व काजीरंगा उद्यान तथा पश्चिम बंगाल का जल्दापारा अभयारण्य गैंडों की मुख्य शरणस्थली है।

गंगा नदी डॉल्फिन संरक्षण

·

उत्कर्ष प्रकाश

गंगा डॉल्फिन (सूस) को 5 अक्टूबर, 2009 राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। यह भारत में गहन संकट ग्रस्त प्रजातियों के अन्तर्गत वन्यजीव सरंक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है। · बिहार के भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगाँव के मध्य गंगा नदी क्षेत्र में विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य की स्थापना की गयी है। गंगा नदी डॉल्फिन दृष्टिहीन होती है, जो पराश्रव्य ध्वनियों का उत्सर्जन करके शिकार करती हैं यह केवल मीठे अथवा ताजे जल में रह सकती है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर को गंगा डॉल्फिन दिवस

के रूप में मनाया जाता है।

अमेजन वर्षा वनों की जैव-विविधता विश्व में सर्वाधिक है। अमेजन वर्षा वनों को 'पृथ्वी के फेफड़े' भी कहा जाता है।

goo

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

पर्यावरण के भौतिक घटक में कौन-कौन सा तत्त्व शामिल

1.

होते हैं?

(a) पेड़-पौधे

(c) जीव-जन्तु

2.

प्रदूष��� क्या होते हैं?

(b) वायु, जल, मिट्टी

(d) सूक्ष्म जीवाणु

7.

8.

9.

वायुमंडल में बढ़ते प्रदूषण के कारण कौन-सा संकट उत्पन्न हो सकता है?

(a) जलवायु परिवर्तन

(b) अधिक वर्षा (C) समुद्रों का ठंडा होना

(d) भूमि की अधिक उर्वरता

निम्नलिखित में से कौन-से प्राथमिक प्रदूषक हैं?

1. कार्बन और नाइट्रोजन के ऑक्साइड

2. सल्फर के ऑक्साइड

3.

ओज़ोन

4. पेरॉक्सी एसीटाइल नाइट्रेट

कूट-

(a) 1 और 2

(b) 2 और 3

(c) 2, 3 और 4

(d) उपर्युक्त सभी

'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम' का गठन किस वर्ष हुआ था?

(a) 1972

(c) 1990

10.

(b) 1986

(d) 2000

'ग्रीन मफलर ' तकनीक का उपयोग कहाँ किया जाता है?

(a) जल प्रदूषण नियंत्रण

3.

वनों की कटाई से क्या समस्या उत्पन्न होती है?

(a) जैव विविधता का नुकसान और पर्यावरणीय असंतुलन

(a) वे तत्त्व जो पर्यावरण के किसी भी हिस्से में बदलाव करके उसे दूषित करते हैं

(b) वे तत्त्व जो पर्यावरण को शुद्ध करते हैं।

(c) वे तत्त्व जो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हैं।

(d) वे तत्त्व जो प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करते हैं।

(b) ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण

(c) वायु प्रदूषण नियंत्रण

(d) मृदा प्रदूषण नियंत्रण

11. मृदा प्रदूषण से संबंधित समस्या का समाधान क्या हो सकता है?

(a) कीटनाशकों का कम प्रयोग

(b) कचरे का समुचित निपटान

(c) पुनर्चक्रण

(d) उपर्युक्त सभी

(b) जलवायु परिवर्तन में सुधार

12.

ध्वनि प्रदूषण का मापन किस इकाई में किया जाता है?

(c) प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

(a) वाट

(d) वनों की पुनः वृद्धि

4.

भारत में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कौन-सी प्रौद्योगिकियाँ

(c) हर्ज

प्रभावी हैं?

(a) वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए धूल कलेक्टर्स

13.

(b) जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए जल पुनर्चक्रण

(c) मिट्टी प्रदूषण नियंत्रण के लिए जैविक उर्वरकों का उपयोग (d) उपर्युक्त सभी

5.

वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत में कौन-सी घटना शामिल है?

(a) वाहनों का धुआँ

14.

(b) डेसिबल (dB)

(d) मीटर

'मिनीमाटा रोग' किस प्रदूषक के कारण होता है?

(a) पारा (Mercury)

(b) कैडमियम (Cadmium)

(c) नाइट्रेट (Nitrate)

(d) फ्लोरिन (Fluorine)

'कोलिफॉर्म बैक्टीरिया' जल प्रदूषण का क्या संकेतक हैं?

(b) ज्वालामुखी विस्फोट

(a) रासायनिक प्रदूषण

(c) उद्योगों का धुआँ

(b) जैविक प्रदूषण

(d) रासायनिक उपयोग

6.

कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का बढ़ना किस प्रभाव को

बढ़ाता है?

15.

(a) ओजोन परत का क्षरण

(b) ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग

(c) अम्लीय वर्षा

(d) श्वसन तंत्र की समस्याएँ

(c) भौतिक प्रदूषण

(d) तेल प्रदूषण

जल प्रदूषण का सबसे प्रमुख मानवजनित स्रोत कौन-सा है?

(a) भूस्खलन

(b) कृषि प्रदूषण

(c) औद्योगिक अपशिष्ट

(d) तापीय प्रदूषण

402

16.

"जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन" (UNFCCC) की स्थापना कब हुई थी ?

(a) 1985

(b) 1992

(c) 2000

(d) 2010

17.

UNFCCC का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(a) जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकना

(b) वैश्विक तापमान को बढ़ाना

(c) ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ाना

28.

(d) जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना

उत्कर्ष प्रकाशन

27.

पारिस्थितिकी विज्ञान की शाखा जो अलग-अलग जीव या अलग-अलग जाति का और उनके वातावरण के बीच के जेव सम्बन्ध पर विचार करती है?

(a) ऑटोइकोलॉजी / Autoecology (b) सायनेकॉलॉजी/ Synecology

(c) पादपभूगोल / Phytogeography

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं / None of the above

निम्नलिखित में से एक सही खाद्य श्रृंखला है-

(a) मेंढक सर्प बाज टिड्डा घास

18.

COP (Conference of Parties) की पहली बैठक कहाँ

(b) बाज सर्प टिड्डा घास मेंढक

(c) टिड्डा घास सर्प मेंढक बाज

हुई थी?

(d) घास टिड्डा मेंढक सर्प बाज

(a) पेरिस

(b) बर्लिन

29.

(c) नई दिल्ली

(d) क्योटो

एक पोषी स्तर को अपने पूर्ववर्ती स्तर से लगभग कितनी मात्रा में ऊर्जा उपलब्ध होती है?

19.

COP-8 का आयोजन किस

शहर में हुआ था?

(a) 1%

(b) 10%

(a) नई दिल्ली, भारत

(c) 20%

(d) 30%

(b) पेरिस, फ्रांस

30.

(c) ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना

वह परिघटना जिसमें एक प्रजाति को लाभ होता है तथा दूसरी प्रजाति को ना तो लाभ होता है और ना ही हानि है, कहलाती है-

(d) जेनेवा, स्विट्जरलैंड

(a) कमेनसेलिज़म

(b) एनसेल

20.

'रियो डी जेनेरियो' में संपन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था-

(a) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास सम्मेलन

(c) शिकार

(d) परजीवीवाद

(b) पर्यावरण एवं प्रदूषण सम्मेलन

Answer Key

(c) अंतर्राष्ट्रीय नई अर्थव्यवस्था

(d) इनमें से कोई नहीं

21. पारिस्थितिकी शब्द दिया गया-

(a) O. P. ओडम द्वारा

(b) रिटर द्वारा

1.[b]

2. (a)

3. [a]

4. [d]

5. [b]

6. [b]

7. [a]

8. [a]

9. [b]

10. [b]

11. [d]

12. [b]

13. [a]

14. [b]

15. [C]

16. [b]

17. [d]

18. [b]

19. [a]

20. [a]

21. [b]

22. [a]

23. [d]

24. [d]

25. [d]

(c) प्रोफेसर रामदेव मिश्रा द्वारा

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

26. [a]

27. (a)

28. [d]

29. [b]

30. [a]

22. प्रकृति के वे जीव जो अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code

हैं, कहलाते हैं-

(a) उत्पादक

(b) अपघटक

(c) उपभोक्ता

स्कैन करें-

23.

12

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में से सर्वाधिक संख्या

किसकी होती है?

(a) उत्पादक

(b) प्राथमिक उपभोक्ता

(d) अपघटक

24. 'पारिस्थितिकी तंत्र' शब्द को सर्वप्रथम दिया है-

(c) द्वितीयक उपभोक्ता

(a) ओडम

(c) क्लीमेंट

25.

(b) आर. मिश्रा

(d) ए. जी. टेन्सले

निम्नलिखित में से कौन-सा जैविक घटक नहीं है?

(a) राइजोबियम

(c) चींटी

26.

(b) दीमक

(d) नमी

लवणीय समुद्र तट नम स्थल के पादपों को कहते हैं-

(a) लवणमृदोद्भिद

(c) जलोद्भिद

(b) आतपोद्भिद

(d) मृतोपजीवी

403.

goo

कम्प्यूटर :-

कम्प्यूटर

कम्प्यूटर का सामान्य परिचय

कम्प्यूटर शब्द की उत्पति अंग्रेजी के कम्प्यूट compute शब्द से हुई है जिसका अर्थ है गणना या गिनती करना ।

Computer Word लेटिन भाषा के 'Computer = com + putare' Word से बना है, जिसका अर्थ Calculate अर्थात् गणना करने से है, इसी कारण कम्प्यूटर को संगणक भी कहा जाता है। कम्प्यूटर का इतिहास :-

+

विश्व के प्रथम गणकयंत्र अबेकस की खोज बेबीलोन (चीन) में हुई। इसे जापान में सारोबान के नाम से जाना जाता है।

मैकेनिकल कैलकुलेटर (एडिंग मशीन) का आविष्कार फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने 1642 से 1644 ई. के मध्य किया। इस कैलकुलेटर को पास्कलाइन या अंकगणित मशीन या एडिंग मशीन अथवा पास्कल का कैलकुलेटर कहा जाता है।

आधुनिक युग के कम्प्यूटर का जनक, कम्प्यूटर की बुनियादी संरचना का जनक, कम्प्यूटर का जनक ���ार्ल्स बैबेज

पहले मैकेनिकल कम्प्यूटर की खोज भी चार्ल्स बैबेज द्वारा ही की गई। विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस 02 दिसंबर

चार्ल्स बैबेज द्वारा निर्मित एनालिटिकल डिफरेंस इंजन की प्रोग्रामिंग उनकी सहयोगी लेडी ऐडा ऑगस्टा द्वारा की गई, इसलिए इन्हें विश्व की प्रथम प्रोग्रामर माना जाता है।

सैद्धांतिक कम्प्यूटर विज्ञान का जनक एलन ट्यूरिंग

प्रथम पूर्णत: इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर एनियक

प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर EDSAC

Computer की कार्य प्रणाली :-

INPUT➡ PROCESS➡OUTPUT

T➡STORAGE

इनपुट Computer को दिया गया डाटा इनपुट कहलाता है। प्रोसेस Computer पर Data को CPU के द्वारा गणना (Process) करना या प्रक्रिया करना प्रोसेस कहलाता है।

आउटपुट Computer के द्वारा प्राप्त परिणाम आउटपुट कहलाते हैं। संग्रहण (Storage) डाटा, निर्देश व परिणामों को संगृहीत करना । कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generation of Computers) :- Ist Generation (प्रथम पीढ़ी) (1942-1955) कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी में मुख्य रूप से processing करने के लिए वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था तथा डाटा को संगृहीत करने के लिए चुंबकीय ड्रम का प्रयोग किया गया।

-

प्रथम पीढ़ी में मशीनी व असेम्बली भाषा का प्रयोग किया गया। उदाहरण UNIVAC तथा ENIAC, IBM 701

IInd Generation (द्वितीय पीढ़ी) (1955-1964) द्वितीय पीढ़ी के Computers में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का उपयोग किया गया तथा डाटा को स्टोर करने के लिए मैग्नेटिक कोर डिवाइस का प्रयोग किया गया।

द्वितीय पीढ़ी में उच्च स्तरीय भाषाओं का विकास हुआ है। उदाहरण Honeywell 400, IBM 7030, CDC 1604

404

IIrd Generation (तृतीय पीढ़ी) (1964-1975) तृतीय पीढ़ी में Computer पर कार्य करने के लिए IC (Integrated Circuit) का प्रयोग किया गया।

तृतीय पीढ़ी में Data को Computer पर Input और Output करने के लिए Keyboard व मॉनिटर का उपयोग किया गया। उदाहरण IBM 360, IBM 370, CDC 6600, IVthGeneration (चतुर्थ पीढ़ी) (1975-1989)

इस पीढ़ी में IC के बढ़ते हुए रूप LSI और VLSI (Very Large Scale Integration) का प्रयोग किया गया।

इस पीढ़ी में नई उच्च स्तरीय भाषाओं, जैसे C C++ आदि का विकास हुआ। Vth Generation (पंचम पीढ़ी) (1989 वर्तमान)

-

पंचम पीढ़ी में Computer पर कार्य करने के लिए नई तकनीकी का प्रयोग किया गया जिसे ULSI (Ultra Large Scale Integration) कहा गया।

इस पीढ़ी में डाटा को स्टोर करने के लिए मैग्नेटिक डिवाइस, ऑप्टिकल डिवाइस इत्यादि का वृहत विकास हुआ।

उदाहरण IBM Notebook, i3, 7, 9, Pentium PC, PARAM 10000 etc.

आकार के आधार पर वर्गीकरण :-

1. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) सामान्यतः हमारे द्वारा उपयोग में लिए गए Desktop, Laptop, Tablet आदि माइक्रो कम्प्यूटर कहलाते हैं।

2.

Mini Computer यह Computer Micro Computer से अधिक शक्तिशाली होते हैं । यह मध्यम वर्ग की कंपनियों में उपयोग में लिए जाते हैं। 3. मैनफ्रेम Computer मैनफ्रेम Computer का प्रयोग बड़ी कंपनियों में किया जाता है।

इनका उपयोग अधिक डाटा को स्टोर करने व तेज गति से कार्य करने तथा सर्वर के साथ कार्य करने के लिए किया जाता है। 4. Super Computer सबसे तेज गति से चलने वाले शक्तिशाली Computer होते हैं। वैज्ञानिक कार्यों, मौसम की भविष्यवाणी, उपग्रह से संचार, भूकंप की जानकारी आदि के लिए सुपर कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है। जैसे PARAM, CRAY

-

-

अनुप्रयोग के आधार पर वर्गीकरण :-

1. Analog Computer वे कम्प्यूटर जो निरंतर चर; जैसे तरंगें, इनके आयाम आदि पर काम करते हैं।

2.

Digital Computer Binary Digit 0 व 1 पर आधारित Computer Digital Computer होते हैं।

सामान्यतः हमारे द्वारा उपयोग लिए जा रहे Computer, Digital Computer ही होते हैं।

3. Hybrid Computer यह Computer डिजिटल व एनालॉग Computer पर मिश्रित रूप से कार्य कर सकते हैं; जैसे- पेट्रोल पंप पर लगी हुई मशीन, अस्पतालों में उपयोग की जाने वाली मशीनें आदि। CPU के भाग-

1.

अर्थमेटिक लॉजिकल यूनिट (Arithmetic Logic Unit) - गणितीय गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है।

यह + */ % का कार्य करता है।

बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाएँ करने में सक्षम

उत्कर्ष प्रकाशन

अर्थमेटिक लॉजिकल यूनिट कंट्रोल यूनिट की निगरानी का कार्य करता है। यह मेमोरी में डाटा प्राप्त करता है उस पर गणनाएँ करता है और परिणाम पुनः मेमोरी को ही लौटा देता है।

2. कंट्रोल यूनिट (Control Unit) -

+

+

यह कम्प्यूटर सिस्टम को नियंत्रित करता है।

यह इनपुट / आउटपुट क्रियाओं को नियंत्रित करता है, साथ ही मेमोरी और ए.एल.यू. के मध्य डाटा के आदान-प्रदान को निर्देशित करता है। यह कम्प्यूटर की समस्त आंतरिक क्रियाओं का संचालन करती है। यह इनपुट आउटपुट क्रियाओं को नियंत्रित करती है।

यह मेमोरी प्रोग्राम पढ़ती है उनकी व्याख्या करती है तथा AIU व मेमोरी में वांछित क्रिया सम्पन्न करने के लिए तदानुसार निर्देश देती है। 3. मेमोरी (Memory) -

डाटा तथा प्रोग्राम को प्रोसेस करने से पहले उसे मेमोरी में Save किया जाता है।

मुख्यतः मेमोरी दो प्रकार की होती हैं-

1. की-बोर्ड (Key Board)-

+

आविष्कार : क्रिस्टोफर लेथम सोल्स (1868) ई.

कीबोर्ड को QWERTY बोर्ड कहते हैं।

की-बोर्ड में 104 बटन होते हैं।

+

की-बोर्ड में फंक्शन कीज 12 (F1 से F12) होती है।

2.

की-बोर्ड में 0-9 तक Key को Numeric Key कहते हैं।

माउस (Mouse) -

आविष्कार : डगलस सी इंजेल्वर्ट वर्ष (1964)

माउस एक प्रकार की प्वॉइंटिंग डिवाइस है।

3. ट्रैक बॉल (Track Ball) -

यह माउस की तरह होता है तथा प्वॉइंटिंग डिवाइस है।

4. जॉयस्टिक (Joystick ) कर्सर कंट्रोलिंग डिवाइस है, जो कम्प्यूटर में गेम व वीडियो गेम खेलने के लिए उपयोग क���या जाता है।

5. स्कैनर (Scanner) इसका प्रयोग टैक्स्ट या चित्र को डिजिटल रूप में परिवर्तित करने में होता है।

(i) प्राथमिक मेमोरी

(ii) द्वितीयक मेमोरी

प्रोसेसर (Processor) :-

6.

कम्प्यूटर के CPU के रूप में उपस्थित हार्डवेयर डिवाइस है जो कम्प्यूटर

पर सभी गणनाएँ एवं प्रक्रिया का कार्य करती है।

7.

वर्तमान में कम्प्यूटर पर माइक्रो प्रोसेसर या ULSI का प्रयोग किया जा

8.

रहा है।

जैसे:- P1, P2, Dual Core, 13, 15, 17, 19

माइक्रो प्रोसेसर मदरबोर्ड पर लगा होता है।

+

यह प्रोसेसर एक IC से बनी हुई चिप होती है।

भारत का पहला माइक्रो प्रोसेसर शक्ति है।

कम्प्यूटर की विशेषताएँ (characteristics of computer) :-

1. गति (speed)

2. सक्षमता ( Diligency)

3. शुद्धता (Accuracy)

4. स्मरण शक्ति (Power of Remembering)

5. व्यापक उपयोगिता (Versatility)

6. स्वचालन (Automation)

7. संग्रह क्षमता (Storage)

इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस

इनपुट एवं आउटपुट युक्तियाँ कम्प्यूटर तथा मानव के मध्य संपर्क बनाने

के साधन हैं जबकि संग्रहण युक्तियाँ डाटा सूचना आदि के भंडारण का कार्य करती है।

इनपुट डिवाइसेस (Input Devices) :-

• इनपुट युक्तियों की सहायता से उपयोगकर्ता द्वारा कम्प्यूटर में आँकड़े, सूचनाएँ तथा निर्देश डाले जाते हैं। ये युक्तियाँ मानवीय भाषा में दिए गए डाटा और निर्देशों को कम्प्यूटर के समझने योग्य संकेतों में परिवर्तित करती है। ये अक्षरों, संख्याओं और अन्य चिन्हों का कम्प्यूटर की भाषा (0 और 1) में अनुवाद भी करती है ताकि कम्प्यूटर उन्हें समझ सके। इसके बाद ही डाटा प्रक्रिया संभव हो पाती है।

Input Devices Computer व User के मध्य संपर्क की सुविधा प्रदान करते हैं। Input Device दिए गए Data Instruction और Programmes को कम्प्यूटर में इनपुट करता है। Input → Process → Output

9.

OCR (Optical Character Recognition) - इसका उपयोग लिखे गए या प्रिंटेड अक्षरों को कम्प्यूटर पर डिजिटल रूप में इनपुट करने के लिए किया जाता है।

OMR (Optical Mark Reader ) इसका उपयोग OMR शीट की जाँच करने के लिए किया जता है।

BCR (Bar Code Reader) - यह Point of Sales डाटा रिकॉर्डर है। इसका उपयोग सुपर मार्केट में मूल्यों तथा डाटा अपडेट करने के लिए किया जाता है।

MICR (Magnetic Ink Character Recognization) - इसका प्रयोग विशेष फॉर्मेट तथा चुंबकीय स्याही से लिखे हुए अक्षरों को पढ़ने के लिए किया जाता है।

10. Microphone

12. लाइट पैन

14. Web Camera/webcam

11. किमबॉल टैग रीडर 13. टच स्क्रीन

आउटपुट डिवाइस (Output Devices) :-

मशीनी भाषा (0 और 1) को अनुवादित कर मानव के समझने योग्य भाषा में परिवर्तित करने के लिए जिन युक्तियों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें आउटपुट डिवाइस कहते हैं।

1. मॉनिटर (Monitor ) -

यह आउटपुट युक्तियों में सर्वाधिक काम आने वाला उपकरण है। उपयोगकर्ता (User) मॉनिटर के द्वारा ही कम्प्यूटर से अंतर क्रिया (interact) करता है।

इसे विजुअल डिस्प्ले यूनिट (VDU) भी कहते हैं। मॉनीटर टीवी स्क्रीन के समान होता है।

मॉनीटर की गुणवत्ता की पहचान डॉट पिच, रिजॉल्यूशन और रिफ्रेश रेट से की जाती है।

रिजॉल्यूशन मॉनीटर पर बने तस्वीर, बिन्दुओं या पिक्सेल की शृंखला। इसे PPI (Pixels Per Inch) में मापा जाता है।

डॉट (पिक्सेल) पिच यह प्रत्येक पिक्सेल के बीच की दूरी होती है। डॉट पिच जितनी कम होती है, तस्वीर उतनी ही स्पष्ट दिखती है। मॉनीटर निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

1. CRT (Cathode Ray Tube)

2. LCD (Liquid Crystal Display)

3. LED (Light Emitting Diode) 4. TFT (Thin Film Transister)

405

2. प्रिंटर (Printer) -

उत्कर्ष प्रकाश

प्रिंटर द्वारा सॉफ्ट कॉपी को प्रिंटेड कॉपी या हार्ड कॉपी के रूप में प्राप्त किया जाता है। प्रिंटर्स को सामान्यतः दो प्रकारों में बाँटा जाता हैं- I. इंपेक्ट प्रिंटर्स इस प्रकार के प्रिंटर्स में धातु का एक छोटा हथोड़ा (hammer) या प्रिन्ट हेड स्याही के रिबन पर स्ट्राइक करता है । उदाहरण डॉट matrix प्रिंटर्स, डेज़ी व्हील प्रिंटर, चैन प्रिंटर ड्रम प्रिंटर आदि ।

II. नॉन इंपेक्ट प्रिंटर्स यह characters को रासायनिक, तापीय अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से स्वरूप प्रदान करते है। इन प्रिंटर्स में प्रिन्ट हेड और कागज के मध्य संपर्क नहीं होता है। इन प्रिंटर्स की छपाई की गुणवता बेहतर होती है, किन्तु इन प्रिंटर्स से एक बार में केवल एक ही प्रति प्रिन्ट हो सकती है तथा इनके लिए विशेष और महंगे कागज की आवश्यकता होती है। उदाहरण इंकजेट प्रिंटर लेजर प्रिंटर आदि ।

3. प्लॉटर (Plotter)-

प्लॉटर का उपयोग बड़े आकार के नक्शे, चार्ट, त्रिविमीय रेखा चित्र ग्राफ, डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट आदि प्रिन्ट करने के लिए किया जाता है। यह आउटपुट डिवाइस है जिसके द्वारा ग्राफिक्स प्रिन्ट किया जाता है। प्लॉटर्स प्राय: दो प्रकार के होते हैं ड्रम पेन प्लॉटर तथा फ्लेट बेड प्लॉटर

4. स्पीकर (Speaker) -

स्पीकर आउटपुट उपकरण है जो कम्प्यूटर से प्राप्त सूचनाओं को ध्वनि में परिवर्तित करते हैं। स्पीकर का उपयोग मल्टीमीडिया अनुप्रयोगों में बहुत होता है इसका उपयोग मुख्यतः सेमीनार, सभाओं में किया जाता है।

यह ध्वनि के रूप में आउटपुट देता है।

5. प्रोजेक्टर (Projector ) यह बड़ी सतह या पर्दे पर चित्रों को दर्शाता है। इसका उपयोग मुख्यतया बैठकों और प्रदर्शनों में किया जाता है। इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस (Input and Output Devices) :- 1. फैक्स मशीन यह टेलीफोन लाइन से प्राप्त सिग्नलों का उपयोग करके डॉक्यूमेंट प्रिंट अथवा मॉनीटर पर डॉक्यूमेंट को प्रदर्शित करती है।

-

2. मॉडेम (Modem) मॉड्यूलेशन डिजिटल सिग्नलों को एनालॉग सिग्नलों में और डिमॉड्यूलेशन एना��ॉग सिग्नलों को डिजिटल सिग्नलों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है।

इसकी गति को किलोबाइट्स प्रति सेकंड (kbps) में मापा जाता है।

-

कैश मेमोरी (Cache Memory) -

यह एक अर्द्धचालक चिप होती है जो सिलिकॉन तथा जर्मेनियम की बनी होती है।

यह मुख्य मेमोरी तथा सीपीयू के बीच स्थित होती है, जो डाटा ट्रांसफर दर तथा सीपीयू की अत्यधिक प्रोसेसिंग स्पीड के बीच संतुलन स्थापित करती है, इसे तात्कालिक मेमोरी भी कहते है।

कम्प्यूटर की मेमोरी का वर्गीकरण-

A.

+

1.

2.

+

यह मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं- प्राथमिक स्मृति (Primary memory )

यह कम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी होती है।

प्रोसेसिंग से पहले तक प्राइमरी मेमोरी में डाटा अस्थायी रूप से स्टोर होता है।

इस मेमोरी को आंतरिक स्मृति, मुख्य स्मृति, सहायक स्मृति आदि नाम से जाना जाता है।

प्राथमिक मेमोरी मुख्यतः दो प्रकार की होती है-

RAM (Random Access memory) (रेंडम एक्सेस मेमोरी) यह मेमोरी डाटा को अस्थायी (Temporary) रूप से स्टोर करती है इसलिए इसे वोलेटाइल मेमोरी (Volatile) भी कहते हैं। कम्प्यूटर के बंद हो जाने पर इसमें उपस्थित डाटा स्वतः ही डिलीट हो जाता है।

इस मेमोरी की क्षमता को कम्प्यूटर पर बढ़ाया भी जा सकता है। RAM मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-

(i) SRAM:- Static RAM (स्टेटिक रैम):- जब तक कम्प्यूटर चालू रहता है तब तक इसमें डाटा स्टोर रहता है तथा इसमें एक से अधिक ट्रांजिस्टर प्रयोग किए जाते हैं।

(ii) DRAM Dynamic RAM (डायनेमिक रेम):- यह मेमोरी SRAM की तुलना में धीमी व सस्ती होती है तथा इसको बार- बार रिफ्रेश करना पड़ता है।

ROM (Read only Memory) ( रीड ओनली मेमोरी)

यह प्राथमिक मेमोरी और स्थायी मेमोरी होती है।

इस मेमोरी में डाटा को कम्प्यूटर निर्माता कंपनी द्वारा स्टोर किया जाता है।

इस मेमोरी में यूजर द्वारा डाटा को स्टोर, डिलीट मोडिफाई अर्थात् किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

ROM मुख्यत: 3 प्रकार की होती हैं-

i.

ii.

इसमें सामान्यत: एक

3. हेडसेट्स (Headsets) इसमें स्पीकर आउटपुट डिवाइस और माइक्रोफोन इनपुट डिवाइस की तरह कार्य करता है।

4.

MFD (Multi Function Device)

-

स्कैनर, प्रिंटर, फैक्स और कॉपी मशीन की क्षमताएँ संयुक्त रूप से मौजूद रहती है।

मेमोरी

मेमोरी (स्मृति) कम्प्यूटर का वह स्थान होता है, जहाँ पर डाटा, प्रोग्राम, सॉफ्टवेयर आदि को संगृहीत / स्टोर किया जाता है।

मेमोरी का डाटा अस्थायी और स्थायी रूप से स्टोर होता है।

रजिस्टर (Register) -

PROM- (Programmable Read only memory) (प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी)

EPROM- (Erasable Programmable Read only memory) (इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी)

iii. EEPROM (Electrically Erasable Programmable Read only memory)

B. द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory):-

इस मेमोरी को External (बाहरी) मेमोरी भी कहते हैं।

+

इस मेमोरी में डाटा को स्थायी रूप से स्टोर किया जाता है।

+

यह मेमोरी CPU के बाहर स्थित होती है।

यह मेमोरी कम्प्यूटर बन्द हो जाने के बाद भी स्टोर करके रखती है। सेकेंडरी मेमोरी का वर्गीकरण (Classification of Secondary

memory):-

A.

मैग्नेटिक टेप

यह सबसे तेज तथा अस्थायी मेमोरी होती है। रजिस्टर डाटा संग्रहण व हस्तांतरण की सबसे छोटी मेमोरी होती है।

B.

मैग्नेटिक डिस्क-

हार्ड डिस्क

ii. फ्लॉपी डिस्क

406

C. ऑप्टिकल डिस्क-

i. CD (Compact Disk)

ii. DVD (Digital Versastile / Video Disk)

iii. BRD (Blue Ray Disk)

D. फ्लैश ड्राइव / रिमूवेबल डिस्क

1. पेन ड्राइव

ii. मेमोरी कार्ड

Memory Unit

1 bit

4 bit

8 bit

1024 Bytes 1024 Kilobyte 1024 Megabytes

0/1

1 nibble

1 byte

1 Kilobyte (KB)

1 Megabytes (MB)

1 Gigabyte (GB)

1024 Gigabytes

1 Terabyte (TB)

1024 Terabytes 1024 Petabytes 1024 Exabyte

1 Petabyte (PB)

1024 Zettabyte

-

1 Exabyte (EB)

1 Zettabyte (ZB) 1 Yottabyte (YB)

ऑपरेटिंग सिस्टम (हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर)

उत्कर्ष प्रकाश

ऑपरेटिंग सिस्टम हमारे तथा कम्प्यूटर के बीच में एक माध्यम का कार्य करते हैं। इनके अलावा यह हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर के मध्य सेतु का कार्य भी करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कम्प्यूटर का अपने आप में कोई अस्तित्व ही नहीं है।

किसी कम्प्यूटर को कार्य करने के लिए दो आवश्यक घटकों की जरूरत होती है-

1. हार्डवेयर

2. सॉफ्टवेयर

1. हार्डवेयर (Hardware) :-

कम्प्यूटर मशीनों और कलपूर्जी को हार्डवेयर कहा जाता है तथा कम्प्यूटर की भौतिक संरचना को हार्डवेयर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। वे भाग जिन्हें हम देख एवं छू सकते हैं, हार्डवेयर के अंतर्गत आते है। जैसे- सिस्टम यूनिट, मॉनीटर इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस

2. सॉफ्टवेयर (Software) :-

+

प्रोग्राम या प्रोग्राम के समूह को सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

सॉफ्टवेयर अमूर्त होते हैं ऐसे सॉफ्टवेयर जो निःशुल्क उपलब्ध होते हैं। उन्हें फ्रीवेयर कहा जाता है।

वह सॉफ्टवेयर जिनके साथ सोर्स कोड भी निःशुल्क उपलब्ध होते हैं। उन्हें ऑपन सोर्स सॉफ्टवेयर कहा जाता है। ऐसे सॉफ्टवेयर जो किसी समय के लिए ही निःशुल्क उपलब्ध होते हों तथा बाद में भुगतान करके प्रयोग किया जाता है, उसे शेयरवेयर सॉफ्टवेयर कहते हैं।

सॉफ्टवेयर का मुख्य कार्य डाटा को सूचना में परिवर्तित करना है। सॉफ्टवेयर के प्रकार-

I. सिस्टम सॉफ्टवेयर-

प्रोग्रामों का समूह जिन्हें कम्प्यूटर सिस्टम के मूलभूत कार्यों को सम्पन्न करने तथा उन्हें कार्य के लायक बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता है।

1.

+

1.

यह कम्प्यूटर तथा उपयोगकर्ता के बीच माध्यम की भूमिका निभाता है।

उदा. डॉस, विंडोज, यूनिक्स, मैकिंटोश आदि । सिस्टम सॉफ्टवेयर के मुख्यतः दो भाग हैं।

i. ऑपरेटिंग सिस्टम

-

ii. लैंग्वेज ट्रांसलेटर

ऑपरेटिंग सिस्टम (OPERATING SYSTEM) :-

OS कम्प्यूटर हार्डवेयर और यूजर के बीच मध्यस्थता का कार्य करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर पर एक आवश्यक सॉफ्टवेयर होता है। यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाता है। जैसे Microsoft Windows, Ms-Dos, Unix, Linux, Macos आदि

मोबाइल के OS :- Android, Windows, ios आदि। एंड्रॉइड - एंड्रॉइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला वर्जन Android 1.0 गूगल कंपनी के द्वारा वर्ष 2008 में लॉन्च किया

गया।

IOS- यह एप्पल कंपनी द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है। Win OS— यह माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। Blackberry सुरक्षा की दृष्टि से यह ऑपरेटिंग सिस्टम सबसे सुरक्षित माना जाता है।

Unix Ken Thompson, Dennis Ritche ने वर्ष 1969 में इसे बनाना शुरू किया तथा वर्ष 1973 में यह बनकर पूरा हुआ इसे 'C' Assembly भाषा में लिखा गया।

OS यूजर इंटरफेस :-

1. CUI - Character user interface 2. GUI - Graphical user interface

CUI Character user interface ( कैरेक्टर यूजर इन्टरफेस)-

.

इस इन्टरफेस में कैरेक्टर (अक्षर व शब्दों) के माध्यम से कमांड देकर कार्य किया जाता है उदा. Unix, Ms Dos 2. GUI Graphical user interface (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस):-

. इस OS में ग्राफिक्स का प्रयोग करके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जोड़ा जाता है। इस OS में कार्य करना बहुत आसान होता है जिसमें मल्टीमीडिया का भी प्रयोग किया जा सकता है।

.

Ex. windows, Linux, Mac Os आदि। Windows- Microsoft Company द्वारा इसे विकसित किया गया। इसे वर्ष 1985 में Release किया गया।

Mac os Apple कम्पनी ने वर्ष 1984 में इस GUI OS को बनाया जिसका नाम मैकिनटोश OS है।

ii. प्रोग्राम अनुवादक के प्रकार (Types of Language Translators) :- तीन प्रकार के होते हैं-

1.

असेंबलर (Assembler) : यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो असेम्बली भाषा में लिखे गए किसी प्रोग्राम को पढ़ता है और उसका अनुवाद मशीनी भाषा में कर देता है।

407

उत्कर्ष प्रकाशन

2. कंपाइलर :- एक कंपाइलर एक कम्प्यूटर प्रोग्राम है जो उच्च- स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन भाषा में अनुवाद करता है। कंपाइलर प्रोग्राम को चलाने से पूर्व संपूर्ण सोर्स कोड को भाषा संबंधी त्रुटियों जिन्हें सिंटेक्स एरर कहा जाता है, के लिए जाँचा जाता है। कंपाइलर द्वारा प्राप्त ऑब्जेक्ट कोड सामान्यतया EXE फाइल के रूप में होता है।

3. इंटरप्रेटर (Interpreter) : इंटरप्रेटर एक ऐसा प्रोग्राम है जो किसी उच्च स्तरीय भाषा में लिखे प्रोग्राम को मशीन कोड में अनुवाद करता है परंतु इंटरप्रेटर एक बार में प्रोग्राम की एक पंक्ति का अनुवाद करता है और इसे क्रियान्वित करता है।

II. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर-

+

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं।

यह मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

i.

सामान्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर Ms Word Ms Excel, Ms Power Point, Music, Web browser आदि । ii. विशेष उद्देश्य सॉफ्टवेयर रिजर्वेशन सिस्टम, बिलिंग सिस्टम, डाटा बेस मैनेजमेंट सिस्टम (DBMB) आदि ।

III. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर-

+ यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को उपयोगिता वाले सॉफ्टवेयर भी कहा जा सकता है।

+

+

+

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं, जो कम्प्यूटर पर कार्यों को आसान बनाते हैं।

बग किसी प्रोग्राम में आने वाली त्रुटि को बग कहा जाता है। डिबग प्रोग्राम में बग को हटाना डिबग कहलाता है। डिबगर यह प्रोग्राम में आने वाली बग की जाँच कर उसे हटाता है।

इस सॉफ्टवेयर को डिबगर सॉफ्टवेयर के नाम से जाना जाता है। पैच किसी प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर में आने वाली बग को हटाने के लिए सॉफ्टवेयर के द्वारा जो ऑब्जेक्ट कोड दिए जाते हैं, उन्हें पैच कहा जाता है।

डिस्क क्लीनअप कम्प्यूटर में स्टोर अनावश्यक फाइलों को हटाने का कार्य करता है।

-

डिस्क फॉर्मेटिंग कम्प्यूटर में मेमोरी स्टोरेज डिवाइस को व्यवस्थित करना ताकि डाटा मेमोरी में आसानी से स्टोर हो सके। डिस्क फ्रेगमेंट मेमोरी में अलग-अलग स्थानों पर बिखरी फाइलों को एक स्थान पर व्यवस्थित करने के लिए डिस्क फ्रेगमेन्ट का उपयोग किया जाता है।

-

जैसे- Antivirus, Disk Compression, Disk defragmenters, Backup, Recovery Software इत्यादि । प्रोग्राम निर्देशों के समूह या शृंखला को प्रोग्राम कहा जाता है। जिसे कम्प्यूटर की भाषा में लिखा जाता है।

निर्देश प्रोग्रामिंग भाषा में प्रोग्राम के लिए कोड लिखे जाते हैं, जिसे निर्देश भी कहा जा सकता है।

फ्रीवेयर नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने वाले सॉफ्टवेयर फ्रीवेयर कहलाते हैं।

फर्मवेयर यह हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संयोजन होता है। कम्प्यूटर की स्थायी मेमोरी रोम में कम्प्यूटर को निर्देश देने के लिए आवश्यक कमांड व निर्देश फर्मवेयर कहलाता है; जैसे - BIOS- ROM

+

एल्गोरिदम प्रोग्राम या निर्देशों को चरणबद्ध लिखने की प्रक्रिया एल्गोरिथ्म कहलाती है, जिसे डॉक्यूमेंट में लिखा जाता है। फ्लो चार्ट - एल्गोरिदम के चार्ट को फ्लोचार्ट कहते हैं, इससे Data के Flow को बताया जाता है।

कम्प्यूटर भाषा :-

1.

2.

कम्प्यूटर पर कई प्रकार की भाषाओं का प्रयोग किया जाता है, इन भाषाओं को मुख्यतः दो भाषाओं में वर्गीकृत किया गया है-

1. निम्न स्तरीय भाषा (Low level language) 2. उच्च स्तरीय भाषा (High level language)

निम्न स्तरीय भाषा (Low Level Language)

वे भाषाएँ जो अपने संकेतों को मशीन संकेतों में बदलने के लिए किसी भी अनुवादक को सम्मिलित नहीं करता, उसे निम्न स्तरीय भाषा कहते हैं, ये दो प्रकार की होती हैं-

L

मशीनी भाषा (Machine Language) : मशीनी भाषा (Machine language) वह भाषा होती है जिसमें केवल 0 और 1 दो ही अंकों का प्रयोग होता है। यह कम्प्यूटर की आधारभूत भाषा होती है, जिसे कम्प्यूटर सीधे-सीधे समझ लेता है, मशीनी भाषा बाइनरी कोड में लिखी जाती है जिसके केवल दो अंक होते हैं।

II. असेम्बली भाषा (Assembly Language) :- असेम्बली भाषा में निर्देश अंग्रेजी के शब्दों के रूप में दिए जाते हैं, जैसे की MOV, ADD SUB आदि, इसे "mnemonic code" (निमोनिक कोड) कहते हैं असेम्बली भाषा को मशीन भाषा में Translate करता है, उसे असेम्बलर कहते हैं। उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language) उच्च स्तरीय भाषा कम्प्यूटर में प्रयोग की जाने वाली वह भाषा है जिसमें अंग्रेजी अक्षरों, संख्याओं एवं चिह्नों का प्रयोग करके प्रोग्राम लिखा जाता है। उच्च स्तरीय भाषा किसी भी प्रकार के प्रोसेसर पर कार्य कर सकती है।

इसे आसानी से समझा जा सकता है यह सामान्य अंग्रेजी जैसी लगती है। इसे कंपाइलर द्वारा अनुवाद करके मशीनी भाषा में बदला जाता है।

नेटवर्क

इसके लिए एक Translator की आवश्यकता होती है, जो उच्च स्तरीय भाषा के Program को मशीन कोड में translate करता है। इसके उदाहरण हैं फॉरट्रेन (FORTRAN), बेसिक (BASIC), कोबोल (COBOL), पास्कल (PASCAL), सी (C) सी ++ (C++), जावा (JAVA), VISUAL BASIC, Visual Basic.net

इंटरनेट एवं संचार

दो या दो से अधिक कम्प्यूटर या डिवाइस को जोड़कर बनाया गया क्षेत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क कहलाता है।

कम्प्यूटर नेटवर्क के द्वारा डाटा व सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।

कम्प्यूटर नेटवर्क की शुरुआत अमेरिका में वर्ष 1969 में की गई।

कम्प्यूटर नेटवर्क के द्वारा एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में डाटा और हार्डवेयर को शेयर किया जाता है।

408

उत्कर्ष प्रकाशन

Computer printer आदि जैसे नेटवर्क पर data या information भेजने और प्राप्त करने के लिए node से जोड़ा जाता है, और Nodes को जोड़ने वाली link को communication channel कहा जाता है।

कम्प्यूटर नेटवर्क के प्रकार :-

भौगोलिक क्षेत्रों को आधार मानकर कम्प्यूटर नेटवर्क को कई भागों में विभाजित किया गया हैं, जैसे-

1. LAN

2. MAN

3. WAN

1. LAN (Local Area Network / लोकल एरिया नेटवर्क):- कम्प्यूटर नेटवर्क को भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर बाँटा गया है, जिसमें सबसे छोटा क्षेत्र LAN कहलाता है।

+

+

2.

एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र में जोड़े गए दो या दो से अधिक कम्प्यूटर नेटवर्क लोकल एरिया नेटवर्क कहलाते हैं।

इसका क्षेत्र लगभग 1 किलोमीटर हो सकता है। LAN सामान्य रूप से छोटे क्षेत्र में ही फेले होते हैं; जैसे किसी एक बड़े भवन या कैम्पस में। LAN में एक मास्टर कम्प्यूटर होता है जिसे सर्वर कहते है तथा शेष डम्ब कम्प्यूटर होते हैं जिन्हें टर्मिनल कहा जाता है। सर्वर सभी टर्मिनलों पर नियंत्रण रखता है।

LAN में सभी कम्प्यूटर ट्विस्टेड पेयर केबल अथवा कोएम्सियल केबल द्वारा जोड़े जाते है। साधारणतः एक लेन में 100 से अधिक कम्प्यूटरों को नहीं रखा जाता।

LAN में डाटा संचरण की गति तीव्र (10 से 100 मेगाबाइट प्रति सेकंड) होती है जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। LAN काफी लचीला नेटवर्क है।

उदाहरण- एक बिल्डिंग, एक ऑफिस, विश्वविद्यालय, घर, विद्यालय, हॉस्पिटल आदि में उपयोग किए जाने वाला छोटा नेटवर्क LAN होता है। MAN (Metropolitan Area Network / मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क):-

यह नेटवर्क अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में फैला होता है ।

एक शहरी भौगोलिक क्षेत्र में दो या दो से अधिक कम्प्यूटर अथवा दो या दो से अधिक नेटवर्क को जोड़ा जाए तो बनने वाला नेटवर्क मेट्रो एरिया नेटवर्क कहलाता है।

जैसे किसी एक संस्था के शहर में दो या अधिक स्थानों पर लगे कम्प्यूटर नेटवर्क को एक साथ जोड़ना MAN कहलाता है।

इस नेटवर्क की सीमा लगभग 200-300 किमी. तक हो सकती है। यह नेटवर्क पर तथा क्षेत्र पर आधारित होता है।

3. WAN (Wide Area Network / वाइड एरिया नेटवर्क):- WAN की भौगोलिक सीमा अधिक विस्तृत होती है। यह पूरे देश प्रायद्वीप अथवा समूचे विश्व में फैला हो सकता है।

+

WAN द्वारा कम्प्यूटर का डाटा आदान प्रदान एवं केंद्र नियंत्रित प्रसारण भी कर सकते है। यह बहुत ही विषम प्रकार का नेटवर्क होता है। इंटरनेट WAN का सबसे अच्छा उदाहरण है।

कम्प्यूटर नेटवर्क का सबसे बड़ा नेटवर्क WAN होता है।

इस नेटवर्क में अधिक दूरी के कारण संचार उपग्रह, संकेतों आदि का प्रयोग किया जाता है।

अन्य नेटवर्क-

पर्सनल एरिया नेटवर्क PAN (Personal Area Network) :- आजकल कम्प्यूटर के साथ अन्य डिवाइस में भी नेटवर्क का चलन बढ़ता जा रहा है, ऐसे नेटवर्क जो एक सीमित क्षेत्र में दो डिवाइस को निजी क्षेत्र के आधार पर जोड़ते हैं तो उसे पर्सनल एरिया नेटवर्क कहते हैं; जैसे वायरलेस संकेत, ब्लूटूथ, वाई-फाई आदि ।

कम्प्यूटर संचार : एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर तक डाटा और सूचना के आदान-प्रदान को डाटा संचार कहते हैं जैसे: रेलवे रिजर्वेशन, होटल रिजर्वेशन, हवाई यात्रा का टिकट हम आसानी से घर पर प्राप्त कर सकते हैं।

ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fiber Cable ) :- प्रकाशीय तंतु एक नई तकनीक है जिसमें धातु के तारों और केबल की जगह पर विशिष्ट प्रकार के ग्लास या प्लास्टिक के तंतु का उपयोग डाटा संचार के लिए किया जाता है। ये धातु की तुलना में काफी हल्की, आकार में कम तथा तीव्र गति से डाटा संचारित करने में सक्षम होती है। यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है।

|

रेडियो तरंग :- इस तरंग का उपयोग लंबी दूरी पर डाटा को पहुँचाने के लिए किया जाता है। यह ऊँची इमारतों या अन्य रुकावटों को भी आसानी से पार कर लेता है। यह संकेत सभी दिशाओं में विचरण कर सकते हैं। इसमें डाटा भेजने वाला एवं प्राप्त करने वाला का एक ही पंक्ति में रहना आवश्यक नहीं होता है।

सूक्ष्म तरंग प्रसारण (माइक्रो वेव सिग्नल) :- इसमें उच्च आवृत्ति की रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है। जिन स्थानों पर केबल का प्रयोग करना मुश्किल होता है वहाँ इस सिग्नल का प्रयोग आसानी से किया जा सकता है। माइक्रो वेव संचरण अधिकांशत: लंबी दूरी टेलीफोन, संचार, फोन, टी.वी आदि के प्रसारण में प्रयुक्त किए जाते हैं।

मौसम आदि के खराब होने पर यह सिग्नल कमजोर हो जाता है। उपग्रह संचरण (सैटेलाइट संकेत) :- सेटेलाइट संकेतों में सूक्ष्म तरंगों काही उपयोग किया जाता है लेकिन इसमें सीधी रेखा की समस्या नहीं रहती है। यह संचार उपग्रह भू-मध्य रेखा से 36 हजार किलोमीटर ऊँचाई पर एक कक्षा में स्थापित होता है।

इसमें संचार उपग्रह को ही एक माइक्रो वेव रिले स्टेशन माना जा सकता है। जिससे पृथ्वी पर प्रेषण एवं ग्राही स्टेशन संकेतों को किसी भी स्थान से प्राप्त कर सकते हैं। इन्फ्रारेड संकेत :- इसका उपयोग कम दूरी में डाटा के लेन-देन के लिए किया जाता है।

इसमें अवरक्त किरणों का उपयोग किया जाता है। ये किरणें तीव्र आवृत्ति पर कार्य करती हैं; जैसे टी.वी. को रिमोट के द्वारा संचालित करना।

ब्लूटूथ :- यह भी बिना तारों के विभिन्न उपकरणों को आपस में जोड़ने का आसान तरीका है। जिसमें ब्लूटूथ सिग्नल का प्रयोग किया जाता है; जैसे - कम्प्यूटर, मोबाइल, टेबल, लैपटॉप, प्रिंटर, डिजिटल कैमरा, वीडियो गेम आदि को जोड़ने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। वाईफाई:- इसका पूरा नाम वायरलेस फिडेलिटी है।

वाईफाई एलाइन्स कम्पनी का ट्रेड मार्क है। इसके द्वारा लोकल एरिया नेटवर्क को बिना केबल के आपस में जोड़ा जाता है। यह वायरलेस नेटवर्क बनाता है।

जो IEEE पर आधारित है। वाईफाई संचार के लिए इस्तेमाल रेडियो तरंगें सेल फोन और रेडियो के समान होती हैं। इनकी आवृत्ति 2.4 गीगा हर्ट्ज से 5 गीगा हर्ट्ज होती है।

जो सेल फोन की आवृत्ति से बहुत तेज होती है। वाईफाई संचार में 802.11 नेटवर्किंग मानक का उपयोग किया जाता है।

डाटा संचरण का रूप :- डाटा संचरण में विद्युत संकेत का प्रयोग किया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं-

1. एनालॉग : यह संकेत समय के सापेक्ष सतत रूप से परिवर्तित होते रहते हैं। यह संकेत निम्न से उच्च की ओर गति करते हैं। जैसे टेलीफोन सिस्टम एनालॉग डाटा संचरण का उदाहरण है।

2. डिजिटल : यह संकेत असतत होते हैं जिसमें ऑन व ऑफ की अवस्था में डाटा संचरित किया जाता है।

409

उत्कर्ष प्रकाश

सर्वर- क्लाइन्ट रूप :-

सर्वर:- नेटवर्क में मुख्य कम्प्यूटर सर्वर कहलाता है जिस पर डाटा को स्टोर किया जाता है और यह क्लाइन्ट से प्राप्त रिक्वेस्ट को रेस्पोन्स देता है।

क्लाइन्ट :- नेटवर्क के सभी कम्प्यूटर जिससे यूजर जुड़ा होता है,

क्लाइन्ट कहलाता है। जिस पर इनपुट आउटपुट का कार्य होता है। Internet International Network (इन्टरनेशनल नेटवर्क) इन्टरकनेक्टेड नेटवर्क में नेटवर्क का जाल भी इन्टरनेट कहलाता है। इन्टरनेट को 'सूचना का राजपथ' भी कहा जाता है।

भारत में इन्टरनेट को 15 अगस्त, 1995 को लागू किया गया। इन्टरनेट को 'नेटवर्क ऑफ़ नेटवर्क' भी कहा जाता है। इन्टरनेट में प्रयोग होने वाले दो मुख्य प्रोटोकॉल TCP (Transmission control protocol) और IP (Internet protocol) है। इन्टरनेट के अन्य क्षेत्रों के लिए मानक व दिशा निर्देश तय करने के लिए और अनुसंधान करने के लिए बनाए गए समूह को W3Cworld wide web consortium कहा जाता है।

इन्टरनेट एक्सेस करने के तरीके इन्टरनेट सेवा के उपयोग के लिए केबल टेलीविज़न, मॉडेम टेलीफोन लाइनों, ईथरनेट, वाई फाई, फाइबर ऑप्टिकल, DSL, ADSL ISDN आदि शामिल हैं। वेबसाइट :-

वेबसाइट किसी कम्प्यूटर पर वेब पेजों का समूह है जहाँ दस्तावेज होते हैं जिस पर इन्टरनेट के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। वेबसाइट को खोजने के लिए URL (यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) का इस्तेमाल किया जाता है जो वेबसाइट का एक यूनिक पता होता है। जैसे www.utkarsh.com

होम पेज :-

पेज

किसी भी वेबसाइट का प्रथम पेज होम पेज कहलाता है जिससे अन्य वेब पेज जुड़े होते हैं इसी पेज को मास्टर पेज, मुख्य पेज होम आदि नामों से जाना जाता है।

वेब ब्राउज़र:-

वेब ब्राउज़र एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जो वर्ल्ड वाइड वेब पर स्थित डाटा को क्लाइंट कम्प्यूटर पर लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें वेब पेज, चित्र, वीडियो और अन्य फाइलें शामिल हैं। पहला वेब ब्राउज़र टिम बर्नर्स ली द्वारा बनाया गया था।

यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता हैं जिस पर वेबसाइट और वेबसाइट के वेबपेज को देखा गया है। यह निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है। Text पर आधारित यह ब्राउजर टेक्स्ट आधारित सूचनाओं को प्रदर्शित करते हैं, जैसे Lynx आदि ।

Graphic पर आधारित

यह ब्राउजर ग्राफिक्स आधारित सूचनाओं को प्रदर्शित करते हैं, जैसे Mosaic, Netscape, Google Chrome, Mozilla firefox, Microsoft Edge, Safari, Opera आदि।

यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL Uniform Resource Locator) :- URL यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर का संक्षिप्त रूप है।

यह वर्ल्ड वाइड वेब पर दस्तावेज और अन्य संसाधनों का यूनिक पता होता है।

उदाहरण के लिए एक URL http://www.abc.com है। URL यूनिफॉर्म रिसोर्स आइडेंटिफायर (URI) का ही एक प्रकार है। उदाहरण http://www.abc.com

URL

Uniform Resource Locator

Subdomain

Top Level Domain пр

http://www.google.com

Transfer

सर्च इंजन (Search Engine) :-

domain namel

सर्च इंजन के नाम से ही हमें पता चलता है कि वेब पर इन्टरनेट के माध्यम से किसी भी सूचना या वेबसाइट को ढूँढने के लिए सर्च इंजन का प्रयोग किया जाता है। जैसे Google, Bing, Yahoo, Alta Vista, Hotbot, Lycos, Ask आदि।

वेब सर्वर :-

वेब सर्वर द्वारा वेब ब्राउजर पर वेब साइट और वेब पेज उपलब्ध करवाए जाते हैं।

सर्वर वह कम्प्यूटर होता है जो वेब पेज को निर्देशित करता है तथा फाइल के रूप में रखता है और पढ़ता है इस सर्वर पर एक विशेष सॉफ्टवेयर होता है, यह वेब सर्वर कहलाता है।

वेब सर्वर के मुख्य कार्य-

वेबसाइट को मैनेज करना ।

सूचना प्रदान के लिए क्लाइंट से अनुरोध प्राप्त करना। क्लाइंट को सूचना देना एवं आवश्यक पेज देना।

वेब प्रोटोकॉल :-

कम्प्यूटर नेटवर्क एवं इंटरनेट पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर डाटा लेन-देन के लिए नियमों का प्रयोग किया जाता है नियमों के समूह को ही प्रोटोकॉल कहा जाता है।

सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए और कम्यूनिकेशन के लिए- प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है; जैसे TCP/IP, PPP. HTTP, FTP, SMTP

1. TCP - Transmission Control Protocol -

2.

.

इस प्रोटोकॉल के द्वारा data को कम्प्यूटर नेटवर्क में एक स्थान से दूसरे स्थान पर नियंत्रित करते हुए भेजा जाता है।

इस विधि में यह प्रोटोकॉल डाटा को कई भागों में विभाजित करता है। जिसे डाटा पैकेट्स कहा जाता है।

हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (HTTP) इस प्रोटोकॉल के द्वारा दो कम्प्यूटर्स के बीच हाइपर टेक्स्ट को ट्रांसफर किया जा सकता है। यह ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा हाइपर टेक्स्ट लिंक को सेलेक्ट किए गए डॉक्यूमेंट को ओपन करता है।

IP - Internet Protocol -

यह नेटवर्क से जुड़े हुए कम्प्यूटर का अद्वितीय पता होता है जो प्रत्येक कम्प्यूटर की पहचान बताता है कम्प्यूटर नेटवर्क में डाटा कहा जाता है। इसका पता IP Address के द्वारा लगाया जाता है।

इसके दो वर्जन प्रचलित हैं- IPv4 और IPv6

.

A

IPV4 इस वर्जन में IP पता चार भागों में (.) dot के द्वारा विभाजित किया जाता है जिसमें प्रत्येक भाग को 0 से 255 के मध्य दर्शाया जाता है। इस IP Address का प्रारूप 32 बिट का होता है; जैसे 193.167.13.01

B. IPv6 यह IP Address का नवीनतम वर्जन है जिसमें आठ भाग होते हैं जिसे (:) कॉलन के द्वारा विभाजित किया जाता है इस IP Address का प्रारूप 128 bit का होता है।

410

3. SMTP - Simple Mail Transfer Protocol -

+

इसका उपयोग Email के दौरान किया जाता है।

4.

FTP - File Transfer Protocol -

+

उत्कर्ष प्रकाश

इस प्रोटोकॉल के द्वारा फाइल को एक स्थान से अन्य स्थान पर भेजने के लिए प्रयोग किया जाता है।

5. HTTP/HTTPS-

Hyper Text Transfer Protocol Secure यह प्रोटोकॉल वेब ब्राउजर पर संदेशों को एक फॉर्मेट में संचरित करता है। इसमें प्रत्येक निर्देश स्वतंत्र होकर क्रियान्वित करते हैं।

6. Telnet protocol -

इस प्रोटोकॉल के द्वारा वर्चुअल कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के द्वारा यूजरनेम व पासवर्ड के माध्यम से रिमोट लॉगिन किया जा सकता है।

7.

WAP-Wireless Application Protocol

8.

VOIP - Voice Over Internet Protocol

9.

POP Post Office Protocol जैसे POP3

HTML (हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज) :-

HTML के द्वारा वेबसाइट के वेब पेज बनाए जाते हैं। यह लैंग्वेज ब्राउज़र के द्वारा आसानी से समझी जा सकती है।

10. PPP - Point to Point Protocol

HTML का आविष्कार टिम बर्नर्स ली द्वारा ही किया गया है। इसमें टेक्स्ट पुस्तक की तरह एक ही दिशा में नहीं होता है जिस टेक्स्ट को देखना चाहते हैं उसे लिंक के द्वारा देख सकते हैं।

डोमेन नाम :-

डोमेन नाम किसी वेबसाइट या कम्प्यूटर को इन्टरनेट पर नाम देने के लिए उपयोग में लिया गया था डोमेन नाम के दो या दो से अधिक भाग होते हैं जिसे डॉट के द्वारा अलग किया जाता है।

डोमेन नाम यूआरएल के या वेबसाइट के नाम के पीछे लिखा जाने वाला

शब्द होता है; जैसे edueducation .net - network, .org organization .govgovernment

नेटवर्क युक्तियाँ (Network Devices)

नेटवर्क युक्तियाँ वे उपकरण या इकाई होती हैं जो कम्प्यूटर नेटवर्क में डाटा का आदान-प्रदान करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।

1. मॉडेम (Modem)

· मॉडेम का मुख्य उद्देश्य ऐसे संकेत (Signals) उत्पन्न करना है जिन्हें एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक आसानी से तथा कम व्यय में भेजा जा सके। टेलीफोन लाइन पर केवल एनालॉग सिग्नल्स भेजे जा सकते हैं जबकि कंप्यूटर केवल डिजिटल सिग्नल्स समझता है और डिजिटल सिग्नल्स ही उत्पन्न करता है। अतः इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए मॉडेम की आवश्यकता होती है जो एनालॉग सिग्नल्स को डिजिटल में और डिजिटल सिग्नल्स को एनालॉग में रूपांतरित करता है। डिजिटल संकेतों को एनालॉग में बदलना मोड्युलेशन (Modulation) तथा एनालॉग संकेतों को डिजिटल में बदलना डिमोड्युलेशन (Demodulation) कहलाता है।

2. पुनरावर्तक (Repeater)

सभी संचरण माध्यमों में संकेत कुछ दूर चलने के पश्चात् कमजोर पड़ जाते हैं। अतः प्रत्येक माध्यम में संकेत एक निश्चित दूरी तक ही जा पाते हैं। अतः दो कंप्यूटरों की दूरी अधिक होने पर यह आवश्यक हो जाता है कि कमजोर संकेतों को परिवर्धित (Amplify) किया जाए। संकेतों (Signals) को परिवर्धित करने वाली युक्ति को ही रिपीटर कहते हैं।

एम्पलीफायर (Amplifier)

ये केवल सिग्नल्स को परिवर्धित करने का काम करते हैं। ये मुख्य संकेतों के साथ-साथ अवांच्छित संकेतों (Noise) को भी परिवर्धित कर देते हैं।

सिग्नल जनरेशन डिवाइस (Signal Generation Device )

3.

4.

इन रिपीटर्स में सिग्नल्स में से नॉइज (अवांच्छित संकेतों) को पृथक करने की क्षमता होती है। ये रिपीटर्स सिग्नल्स में से नॉइज को अलग कर उसे मूल रूप में पुन: सृजित ( Regenerate) करते हैं, उसे परिवर्धित करते हैं और फिर पुनः संचरित कर देते हैं। इन रिपीटर्स में जटिल तकनीक काम में आती है ये अपेक्षाकृत महंगे भी होते हैं। ब्रिज (Bridge)

ब्रिज एक ऐसी युक्ति है जो अलग-अलग संचार माध्यम (Transmission Media) प्रयुक्त करने वाले नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। ब्रिज एक सस्ती, आसान तकनीक पर आधारित तीव्र युक्ति है। ब्रिज के उपयोग से नेटवर्क का प्रभावी आकार बढ़ जाता है।

रिपीटर्स की तरह ब्रिज भी सिग्नल्स को एक भाग से दूसरे भाग में भेजने का कार्य करता है तथा सिग्नल्स को रीजनरेट करता है। राउटर (Router)

राउटर भी ब्रिज की भांति अलग-अलग नेटवर्कों को जोड़ने का कार्य करता है किन्तु राउटर ब्रिज की तुलना में अधिक दक्षता से कार्य करता है। ब्रिज संकेतों को केवल आगे मार्ग (Path) देता है जबकि राऊटर उन्हें परिष्कृत करके आगे भेजता है। राउटर इससे जुड़े सभी नेटवर्कों से डाटा प्राप्त करता है व पहुँचने के पते (Destination Address) के आधार पर उन्हें आगे प्रेषित कर देता है।

5. गेटवे (Gateway )

यह भी ब्रिज व राउटर की तरह अलग-अलग नेटवर्कों को परस्पर जोड़ने वाली युक्ति है। गेटवे की तकनीक राउटर से भी अधिक जटिल होती है। इसकी सहायता से दो एकदम भिन्न प्रकार के नेटवर्कों को जोड़ा जा सकता है।

यह कार्य रिपीटर ब्रिज अथवा राउटर द्वारा संभव नहीं है। इस प्रकार गेटवे राउटर की तुलना में अधिक परिष्कृत युक्ति है जो अनेक अतिरिक्त सुविधाएँ प्रदान करता है किन्तु यह तुलनात्मक रूप से अधिक महंगा है व इसकी स्थापना, रख-रखाव व प्रचालन भी अपेक्षाकृत जटिल है।

6. होस्ट (Host)

वाइड एरिया नेटवर्क में अनेक ऐसे कंप्यूटर होते हैं जिनका उद्देश्य उपयोक्ताओं के प्रोग्रामों का निष्पादन (Execution) करना होता है। इन कंप्यूटरों को होस्ट कहा जाता है। होस्ट एक संचार उप-जाल (Communicatin Subnet) द्वारा परस्पर जुड़े रहते है। किसी एक कंप्यूटर को होस्ट तभी कहा जा सकता है जब वह कुछ ऐसी सेवाएँ प्रदान करता हो जिनका उपयोग नेटवर्क से जुड़े दूसरे कंप्यूटर या उपकरण कर सकें।

7. आरजे 45 संयोजक (RJ-45 Connector )

आरजे-45 (Registered Jack 45 ) संयोजक एक भौतिक संयोजक युक्ति है जो दिखने में केबल जैसी होती है। इसका उपयोग स्थानीय या दूरस्थ स्थानों पर स्थित विभिन्न दूर संचार और डाटा उपकरणों को परस्पर जोड़ने के लिए किया जाता है। यह एक एकल लाइन संयोजक होता है जिसमें 8 पिनें होती है।

411

8. इथरनेट कार्ड (Ethernet Card)

उत्कर्ष प्रकाशन

इसे नेटवर्क इंटरफेस कार्ड (NIC) भी कहा जाता है। वास्तव में यह एक लेन अनुकूलक (LAN Adaptor) है। किसी कंप्यूटर को LAN से जोड़ने के लिए इसे मदरबोर्ड (Mother Board) के स्लॉट में लगाया जाता है। इस कार्ड से केबल को जोड़ने पर कंप्यूटर LAN से जुड़ जाता है।

9. नोड (Node)

.

LAN से जुड़ी कोई भी युक्ति या उपकरण जैसे कंप्यूटर, प्रिंटर, प्लॉटर मॉडेम आदि नोड कहलाता है। प्रत्येक नोड का एक विशिष्ट पता (Unique Address) होता है।

10. हब (Hub )

· यह LAN का एक महत्त्वपूर्ण घटक है जो LAN में एक केन्द्र बिंदु (Central Point) का कार्य करता है। LAN के सभी नोड्स केबल द्वारा हब से जुड़े होते हैं। एक LAN के किसी दो नोड्स के बीच होने वाले संचार में समस्त डाटा संकेत हब के माध्यम से ही होकर गुजरते हैं। हब मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं।

(1) डम्ब हब (Dumb hub)

(II) स्मार्ट हब ( Smart Hub )

(III) बुद्धिमान हब (Intelligent Hub )

11. बैकबोन (Backbone )

यह एक उच्च बैंड विद्ध संयोजक (High Band Width Link) है जिससे अनेक नोड व हब जोड़े जा सकते हैं। इसके माध्यम से बहुत- सा डाटा एक साथ गुजर सकता है। किसी संस्थान या बड़ी बिल्डिंग में स्थित विभिन्न LAN को बैकबोन के माध्यम से जोड़कर एक विस्तृत (Campus Wide) नेटवर्क बनाया जा सकता है दो नेटवर्कों के बीच का सारा डाटा यातायात बैकबोन के माध्यम से ही गुजरता है। 12. स्विच (Switch)

स्विच हब की तरह एक ऐसी कंप्यूटर नेटवर्क युक्ति है जो विभिन्न नोड्स (कंप्यूटर एवं अन्य युक्तिओं) को परस्पर जोड़ने का कार्य करती है किन्तु स्विच की कार्य प्रणाली साधारण हब की कार्य प्रणाली से अलग होती है। जहाँ हब में एक स्त्रोत से प्राप्त डाटा या सूचना हब से संबंधित सभी युक्तिओं को भेजी जाती है वहीं स्विच में स्त्रोत से प्राप्त डाटा या सूचना गंतव्य पते (Destination Address) के अनुसार केवल गंतव्य कंप्यूटर या गंतव्य युक्ति को ही प्रेषित की जाती है।

इन्टरनेट का इतिहास

·

इन्टरनेट का प्रारम्भ 1960 के दशक में हुआ जब अमेरिका के रक्षा विभाग ने मूलतः वैज्ञानिक प्रयोगों तथा अनुसंधान कार्यों के लिए इसका विकास किया। वर्ष 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने साथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय तथा स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान को नेटवर्क द्वारा जोड़कर इन्टरनेट की शुरुआत की। इस नेटवर्क को "ARPANET" नाम दिया गया।

प्रारंभ में इसका उपयोग केवल रक्षा सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिए किया गया किन्तु बाद में विभिन्न संस्थानों व विश्वविद्यालयों को भी इस नेटवर्क से जोड़ दिया गया। विंट सर्फ को इंटरनेट का पितामह कहा जाता है।

इसके बाद वर्ष 1979 में ब्रिटिश डाकघर ने पहला अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बनाकर इन्टरनेट की एक नयी प्रौद्योगिकी का आरम्भ किया। वर्ष 1986 में अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (National Science Foundation - NSF) ने "NSFNET" नाम का एक नेटवर्क विकसित किया। बाद में इसे भी ARPANET से जोड़ दिया गया। NSF आज भी इन्टरनेट में एक बैकबोन नेटवर्क का कार्य करता है।

वर्ष 1989 में ब्रिटिश वैज्ञानिक टिम बर्नर्स ली (Tim Berners Lee)

ने इंटरनेट पर संचार को सरल बनाने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web www) का आविष्कार किया। इन्टरनेट के इतिहास में यह एक क्रांतिकारी खोज थी। 20 दिसम्बर, 1990 को उन्होंने दुनिया की पहली वेबसाइट लाइव की 6 अगस्त, 1991 को इस वेबसाइट को दुनिया भर के लोगों ने देखा।

वर्ल्ड वाइड वेब

करीब 50 वर्षों से लोग एक ऐसे डाटाबेस का सपना देख रहे थे जो कि वैश्विक ज्ञान एवं सूचनाओं को रखता हो तथा जिसके माध्यम से विश्व के लोगों को आपस में जोड़ा जा सके। अब यह सपना पूरा हो चुका है। और इसके लिए आवश्यक तकनीक की खोज की जा चुकी है।

इस तकनीक का नाम है वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web )। वेब ब्राउजर (Web Browser)

.

जिस तरह आप किसी लाइब्रेरी में पुस्तकें ढूंढने अर्थात 'ब्राउज' करने

के लिए जाते हैं, उसी तरह इंटरनेट पर भी इंटरनेट ब्राउजर का उपयोग करते हुए आप पृष्ठों को ढूंढ या एक्सप्लोर कर सकते हैं। ब्राउजर आपके कम्प्यूटर पर एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है, जो आपको इंटरनेट तक पहुंचने देता है। ब्राउजर को वेब क्लाइंट या इंटरनेट नेविगेशन टूल के नाम से भी जाना जाता है।

वेब पर स्थित डॉक्यूमेंट को वेब पेज कहते हैं किसी भी साइट का पहला वेब पेज जिसके साथ आगे भी वेब पेजों की पूरी श्रृंखला (Series) हो, को उस वेबसाइट का होम पेज कहा जाता है। इन पेजों को किसी उपयोगकर्ता (User) को दिखाने का कार्य ब्राउजर का ही होता है। अतः ब्राउजर वह प्रोग्राम है, जिसे वेब तथा यूजर के बीच इंटरफेस के लिये काम में लिया जाता है।

यह वेब पेजों को प्रदर्शित (Display) करता है तथा विभिन्न वेब पेजों में आसानी से नेविगेट करने की सुविधा प्रदान करता है। हर प्रकार के कम्प्यूटर सिस्टम के लिए वेब ब्राउजर की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। वर्तमान में प्रचलित कुछ प्रमुख वेब ब्राउजर इन्टरनेट एक्स्प्लोरर (Internet Explorer), मोजिला फायरफॉक्स (Mozilla Fire fox), गूगल क्रोम (Google Chrome), नेटस्केप नेविगेटर (Netscape Navigator), सफारी (Safari) आदि हैं।

MS OFFICE/WORD

MS Microsoft इस कम्पनी की स्थापना अप्रैल, 1975 में वॉशिंगटन, अमेरिका में हुई। इसे बिलगेट्स एवं पॉलएलन द्वारा स्थापित किया गया।

MS Office - Office कार्य में उपयोग आने वाले एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का एक समूह है जिसे पैकेज और सूट भी कहा जा सकता है इसमें कई एप्लीकेशन्स उपस्थित होते हैं।

MS Office के निम्नलिखित प्रमुख सॉफ्टवेयर हैं-

MS word, Excel, Power Point, Access, Outlook, Publiser, Link, Onenote etc.

MS office सर्वप्रथम वर्ष 1989 में Macos के लिए उपयोग किया गया तथा बाद में इसका उपयोग windows OS के लिए वर्ष 1990 में शुरू किया गया।

: 412:

Office 2007-30 जनवरी, 2007 Office 2010 15 जून, 2010

·

Office 2013 29 जनवरी, 2013

उत्कर्ष प्रकाश

Office 2016-22 सितम्बर, 2015

Office 2019 - 24 सितम्बर, 2018

MS Word

Office Menu

StatusBar

Command Tabs

Command Group

Scroll Bars

Rulers

Document View

zoom

·

·

·

W

MS Word एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है जिसमें वर्ड, लाइन, पैराग्राफ, पेज, डॉक्यूमेन्ट बनाए जाते हैं।

MS word को वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

MS word को निम्नलिखित तरीके से शुरू किया जा सकता है- Start menu - All programme/all App - MS Office - MS Word

MS Word को रन मेनू Window+R से चलाने के लिए Winward.exe से चलाया जा सकता है।

MS Word के मुख्यवर्जन MS Word 1997, 2000, 2003, 2007, 2010, 2013, 2016, 2019 है। इसका नवीनतम वर्जन 2019 है। MS Word में बनाई गई फाइल को डॉक्यूमेन्ट कहा जाता है। इसमें By default फाइल का नाम Document 1 होता है।

MS Word 2003 और उससे पहले बनाई गई फाइल का एक्सटेंशन होता है।

MS Word 2007 और उसके बाद बनाई गई फाइल का एक्सटेंशन docx होता है।

MS Word में टेम्पलेट फाइल का एक्सटेंशन Dotx होता है। MS Word में मैक्रो फाइल का एक्सटेंशन Docm होता है।

Home F

C

·

.

B. Home Tab

फाइल टैब (File Tab)

The debi

Save (सेव) Ctrl+s फाइल को स्टोर करने के लिए

Save as (सेव एज) F12 सेव एज डायलॉग बॉक्स शॉर्ट कट के उपयोग द्वारा ओपन होता है।

Open (ओपन) Ctrl + O पहले से बनी हुई फाइल को देखने के लिए।

Close (क्लोज ) - वर्तमान डॉक्यूमेंट से बाहर आने के लिए। Recent हाल ही में उपयोग ली गई फाइल की लिस्ट को देखने के लिए। New Ctrl + N नई डॉक्यूमेंट फाइल बनाने के लिए। Print Ctrl + P डॉक्यूमेंट को प्रिन्ट करने के लिए।

Document - Micro Word Sale Mode Res

Review Wew

(1) Clipboard :-

·

.

-

Fort

Paragraph

User द्वारा Cut या Copy किया गया Data जब तक Paste नहीं किया जाता तब तक Clipboard में Save रहता है। Clipboard में 24 Objects Save रह सकते हैं।

Cut (Ctrl+X) :- Select किए गए Data को Cut करने के लिए।

Copy (Ctrl+C):- Select किए गए Data को Copy करने के लिए। Paste (Ctrl+V):- Cut Copy fag Data Paste करने के लिए।

Format Painter (Ctrl + Shift + C): Document में किसी Data पर Apply की गई Formatting को Copy कर दूसरे Data Apply fay Format Painter & Use किया जाता है। Format Painter पर Click करते ही माउस का प्वॉइंटर पेंट ब्रश में बदल जाता है।

Aatbox Autbox AaBbC Norming

(2) Font (Ctrl+D) :-

Change bating

MS-Word में फाइल का By Default Font Calibri होता है। जिसका by Default Font Size 11 होता है।

Font Size को Points में मापा जाता है।

MS-Word में Minimum Font Size 01 Point &

Maximum Font Size 1638 Point होता है।

Format Tool Bar Minimum Font Size 08 Point & Maximum Font Size 72 Point होता है।

Font Style -

Regular इससे Text Regular format में लिया जाता है। Bold :- इससे Text bold (गहरा ) लिखा जाता है।

MS Word में Font Style चार प्रकार के होते हैं :-

(i)

(ii)

(iii)

Italic :- इससे Text तिरछा लिखा जाता है।

413

उत्कर्ष प्रकाशन

(iv) Bold / Italic :- इससे Text तिरछा और गहरा एक साथ लिखा जाता है।

Font Effect -

1.

2.

3.

4.

निम्नलिखित होते हैं :-

Subscript (Ctrl+=) Selected Text a Bottom # लगाना Example: 504

Superscript (Ctrl + Shift + ) Selected Text को Top में लगाना। Example: 504

Strikethrough Text के बीच में से Single line में देने के लिए। जैसे- (Rajesh)

Double Strikethrough Text के बीच में से Double line में देने के लिए जैसे- (Rajesh+)

Letter Case :-

·

1.

2.

3.

4.

5.

MS-Word में Letter Case 5 प्रकार के होते हैं-

Sentence Case :- इससे पूरे Sentence का पहला Character Capital और अन्य सभी Small हो जाते हैं। Lower Case :- इससे सभी Character Small हो जाते हैं। UPPER CASE :- इससे सभी Character Capital हो जाते हैं। TOGGLE CASE :- इससे प्रत्येक Word का पहला Character Small और अन्य सभी Capital हो जाते हैं।

Capitalize Each Word: इससे प्रत्येक Word का पहला Character Capital और अन्य सभी Small होते हैं। Scaling : MS Word में पेज जैसा Softcopy में है वैसा ही Hardcopy में दिखाई दे इसके लिए स्केलिंग का प्रयोग किया जाता है। Scaling Hardcopy के लिए use की जाती है। MS-Word में By Default Scaling 100% होती है।

Kerning - MS-Word Text Visual Approach ( दृश्य दृष्टिकोण) के लिए Kerning का Use किया जाता है।

Character Spacing:- Character after Space को Character Spacing कहा जाता है।

.

Indent :- Paragraph को Indent करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं Left Indent और Right Indent

Sort :- डाटा को आरोही व अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने के लिए एवं Sort करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Sorting दो प्रकार की होती है A to Z और Z to A Alignment :-

MS-Word में Alignment 4 type के होते हैं Left, Center, Right, Justify

MS-Word में By Default Text Alignment Left होता है। By Default Text Horizontal Alignment Left होता है। Line Spacing :- प्रत्येक Line के बीच छोड़े जाने वाले Space को Line Spacing कहा जाता है। By default Line spacing 1.15 होती है।

Ctrl+1 single line Space

Ctrl+2 से Double line Space Ctrl+5 से 1.5 line Space

(4) Styles :-

Text के Style को Change करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

(5) Editing :-

·

.

Find (Ctrl+F):- Document में किसी Text को ढूँढने के लिए Find का उपयोग किया जाता है।

Replace (Ctrl+H ) Find किए गए Text को किसी अन्य में बदलने के लिए Replace का उपयोग किया जाता है। Go to (Ctrl+G / F5 ) :- MS Word के सीधे Page, Section Line, Bookmark, Heading आदि पर जाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Select :- MS Word में इसका उपयोग तीन तरह से किया जा सकता है-

·

(3) Paragraph:-

.

Bullet : Text के आगे गोला, तीर एवं निशान लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

1.

Select All (Ctrl+A)

·

Numbering : Text के आगे नम्बर या अक्षर लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जैसे :- 1, 2, a, b Multilevel list list के अंदर लिस्ट बनाने के लिए।

2.

Select Objects

3.

Select text with similar formatting

. Insert Tab

Document-Microsoft Word Sale Mode)

Cover Blank Page Table Picture Op Shape Smart Chat Bookmark Che-Header Footer Page Page Pages Fade & Foutar

1.

Pages

·

Cover Page - Fully Formatted Page Insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

3.

.

Blank Page :- Cursor

Blank page insert

करने के लिए।

.

Page Break :- Cursor के स्थान से Page को अलग

(Break) करने के लिए।

·

2.

Tables

.

Document में Table draw करने के लिए इसका उपयोग किया

जाता है।

414

Tet Quirk Wordp Bor Pat

Ca

एक Table में अधिकतम 32767 Row और 63 Column हो सकते हैं।

Illustrations

Picture : Document में Picture insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Clip art: Document में Picture, sound, movie आदि को insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Shapes :- Document में अलग-अलग प्रकार की आकृति insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

4.

.

उत्कर्ष प्रकाशन

Smart art :- Document में Hierarchy बनाने के लिए 6. इसका उपयोग किया जाता है।

Chart चार्ट बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Links

Hyperlink (Ctrl+K) Document ft Web Page, Mail, picture से link create करने के लिए इसका use किया जाता है।

जिस Text पर Link create होता है वह Blue color में दिखाई देता है।

Book Mark:- Document Specific Area (विशिष्ट क्षेत्र) को Soft Copy में Assign करने के लिए Bookmark का use किया जाता है। Bookmark के नाम को अधिकतम 40 Character तक लिख सकते हैं।

Header & Footer

5.

Header :- Document के ऊपर की ओर Text print करने के लिए Header का use किया जाता है। Header का By Default मार्जिन 0.5 inch होता है।

.

Footer : Page के Bottom में कोई टेक्स्ट print करने के लिए Footer का use किया जाता है। Footer का By Default Bottom Margin 0.5 inch होता है।

Page number :- Document में प्रत्येक पेज पर नम्बर लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

.

7.

Text

Text box - Document Preformatted Text box insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Word Art - Document Decorative Text insert लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Drop Cap :- MS-Word में किसी Paragraph के पहले Character को Special प्रदर्शित करने के लिए Drop cap का उपयोग किया जाता है Drop Cap by Default 3 lines का होता है। Drop Cap Minimum 1 Line से Maximum 10 Lines तक लगा सकते हैं।

Signature Line :- Document # Digital Signature insert किया जा सकता है।

Date & Time Document Cursor Current Location पर Date & Time insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Object:-MS-Word की फाइल में किसी अन्य प्रोग्राम को Use करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है; जैसे MS Word की file में MS Excel का उपयोग करना।

Symbols

Equation Document Mathematical equation insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Symbol - Document Special Character insert के लिए इसका उपयोग किया जाता है; जैसे Q, 3, k&

D. Page Layout Tab

Document Microsoft Word (ade Model

1.

2.

.

·

Themes

Home Page Layout Refer Mailing "Colars

Review Vi

B

Themes

Margins Orendain Sex Columns

Page Setup

Indent

Spating

Bhringarang

Send to BackGroup

Pestin

Calor Bright

Page Background

Document के design को बदलने के लिए इसका उपयोग किया

जाता है; जैसे- Font colour / effect / style etc. आदि को एक साथ बदलने के लिए।

Page Setup

Margin: MS Word में पेज के चारों ओर एक निश्चित स्थान (Space) छोड़ने के लिए Margin का उपयोग किया जाता है और

Test appoing Rotte Aange

Column :- Document के Text को दो या दो से अधिक Column में विभाजित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Breaks :- Cursor के स्थान से पेज को अलग करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Line Number:

MS-Word में पेज की प्रत्येक लाइन के आगे नम्बर लगाने के लिए Line number का उपयोग किया जाता है- Line Number का उपयोग निम्नलिखित पाँच तरह से किया जा सकता है-

ये चार प्रकार के होते हैं Left, Right, Top, Bottom Book Binding के लिए Gutter margin Use किया जाता है ये दो प्रकार के होते हैं Left or Top Gutter margin By default Left होता है और इसकी Position 0" (inch) होती है। Orientation -

(1)

None

( 2 )

Continuous

(3)

Restart each page

.

MS-Word By Default Page Orientation Portrait होता है।

MS-Word में Page Orientation दो प्रकार के होते हैं - Portrait af Landscape

(4) Restart each section

(5) Suppress for current Paragraph

.

.

3.

.

Size - MS-Word में बनाई गई फाइल का By Default Page Letter होता है, जिसका Size 8.5x11" होता है और इसको अलग-

अलग प्रकार के Page size में बदल सकते हैं; जैसे

-

legal, A4 etc

415

Hyphenation :- MS Word Hyphenation किसी भी Word को तोड़कर दूसरी Line में भेजने के लिए Hyphenation (-) का Use किया जाता है।

Page Background

Water mark :- Ms-word document में लिखे Text के पीछे transparent (पारदर्शी) Text देने के लिए watermark का Use किया जाता है।

.

उत्कर्ष प्रकाशन

Page Colour: Document Page Colour को बदलने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

.

Page Borders Page के चारों ओर Border लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

4.

Paragraph

Indent :- Paragraph को Indent करने के लिए इसका उपयोग किया जाता हैं ये दो प्रकार के होते हैं- Left Indent और Right Indent

.

5.

Spacing: दो Paragraph के बीच के Space को कम या ज्यादा करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है और ये दो प्रकार के होते हैं - Before और After

Arrange Position:-

• पेज पर चयनित object को position करने के लिए। Align :- मल्टीपल चयनित ऑब्जेक्ट के किनारों को Align करता है।

E. Reference

Document Microsoft Word Sale Mode

Home Page Lay Ref

Malling Re View Design Layout

AB

Sour

APA

Insertable of Figures paTale

Table of

upende

Table of

Comments

Table of Contents

Ction beingraphy

Fas

C

of Captions

Mark Entry

Mark Otation

Inde

1.

Table of contents

3.

·

Add Text:- इसके द्वारा सलेक्टेड टेक्स्ट को लेवल अनुसार हेडिंग और सब हैडिंग बनाते हैं।

·

2.

·

Table of contents:- इस ऑप्शन से हैडिंग और सब हेडिंग्स की इंडेक्स टेबल बनाई जाती हैं।

Update Table: इस ऑप्शन से इंडेक्स टेबल अपडेट करते हैं। Footnote:- Footnote

Use Page

Reference देने के लिए किया जाता है।

Bottom

End Note :- End Note का Use Document के अंत में Reference देने के लिए होता है।

4.

Citation And Bibliography

Insert Citations: इस ऑप्शन से फाइल बुक, मैगज़ीन, आर्टिकल, आर्ट आदि का साइटेशन लिखने के लिए किया जाता है। Bibliography:- इस ऑप्शन से साइटेशन की बिबलियोग्राफी फाइल देखने के लिए करते हैं।

Captions: Document में Insert या Add किए गए Picture को नाम देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

F. Mailings Tab

Document-Microsoft Word Cafe Mode)

Home Page Layout Malling V

Create

1.

Create :-

·

Ma Sente Highlight Add Greeting Merge Recipients Recipient List Merge Fields Book Line Start Mail Merge We

Previn

Field Update Labels Results

Auto Check for Preview Results

Envelops :- लिफाफा बनाने व प्रिंट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Labels:- लेबल बनाने व लेबल को लिफाफे पर प्रिंट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

2.

Fish & Merge

Th

Start Mail Merge :-

एक ही Mail को एक से अधिक लोगों को एक साथ भेजने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

1.

ABG

Spelling &

G. Review Tab

Document-Microft Word (Safe Made

Page Layout Mallings Review View

O

New Delhi Ne Comment

Change

Final Showing Mark ShowMaka Birving fare

Asset Rajed

Co

CompShow So Documents Conpore

Pred Dement htt

Proofing :-

Spelling & Grammar:- (F7) Document में लिखी गई Spelling & Grammar की अशुद्धि को जाँचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Red Line: MS Word में Spell Mistake ( वर्तनी अशुद्धि) Green Line :- MS-Word # Grammatical Mistake ( व्याकरण संबंधी अशुद्धि)

Blue Line MS-Word Contextual Mistake

(प्रासंगिक अशुद्धि)

Research Alt+click) : शब्दांश के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Thesaurus थिसॉरस (shift+F7 ) :- Document में लिखे शब्द के Synonyms and Antonyms (पर्यायवाची या समानार्थी और विलोम या विपरीत) शब्द के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Translate :- Document के Data को किसी अन्य भाषा में बदलने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Word Count (Ctrl+shift+G) इससे Document में मौजूद Page, Word, Character, Paragraph Line आदि की संख्या का पता लगाया जा सकता है।

416

2.

3.

.

·

4.

उत्कर्ष प्रकाशन

Comments New Comments, Delete, Previous एवं next comments के ऑप्शन हैं। Tracking:-

Track Change (ctrl+shift+E):- ffm ast yfæzdz करने के बाद फाइल में होने वाले बदलाव का पता चल जाता है। Balloons :- इससे Comment को अलग-अलग प्रकार से दर्शाया जा सकता है।

Changes:-

Accept Track change ऑप्शन Activate करने के बाद फाइल में किए गए बदलाव को फाइल परमानेंट रखने के लिए, Changes को Accept करते हैं।

.

5.

6.

H. View Tab

Reject : Track change ऑप्शन Activate करने के बाद फाइल से परमानेंट हटाने के लिए Changes को Reject करते हैं। Compare :- अलग-अलग Version के Document को Compare करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Protect :-

Protect Document:-

MS-Word की File को Protect (सुरक्षित) करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Docent-Microsoft Word

Home Insert Page Layout

References

Review View

Document Map

Gridlines Thumbnails

One Page Two Pages

New Window

View Side by Side

- Алатре А

Synchronous Scrolling

Print Full Screen Web Cuine Draft Layout Reading Layout

Zoom 100%

Page Width

Spit

Document View

Show/Hide

Zoom

Window

1.

Document View

Ctrl + C

dd Reset Window Position Windows"

Copy of selected text

Switch Macros

Macros

·

Print Layout:- Document Design af Document की Soft Copy के जैसे ही Hard Copy में देखने के लिए।

Ctrl + X

Cut selected text

Ctrl + V

Paste

Full screen view :- Document Reading & fag Text को कम्प्यूटर की Full screen पर देखने के लिए।

Ctrl + Z

Undo

Ctrl + Y

Redo

Ctrl+

Ctrl+[

·

Text at Bullet

Ctrl + F

Ctrl + H

Ctrl + G

Web layout:- Document Web Formatfagi Outline - Document &

Format में देखने के लिए।

Draft: Document at Header & Footer fa

Show/Hide:-

Document को प्रदर्शित या छिपाने के लिए किया जाता है।

Zoom :-

Alt + Ctrl + D

Alt + Ctrl + F

Enter

Shift + Enter

FS

Font size increase (point by point) Font size decrease (point by point) Find

Replace Go to

End note Footnote

Change paragraph Change line

·

के लिए।

2.

.

3.

4.

Zoom Minimum 10% af Maximum 500% Window :-

·

Split Window :- Cursor के स्थान से Window को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए

Ctrl + Shift + F

Ctrl + Shift + P

Font dialog Box

Ctrl + D

.

Shift + F3

Ctrl + Enter

Find/Replace/Go to Page Break

Font dialog Box

Open Saved Document

Save Document

Print Dialog Box

New Window:- Current Documenten it guar Document बनाने के लिए New Window का Use किया जाता है।

Macros :-

Use Shortcut Keys Recording

MS-WORD SHORTCUTS KEY

5.

Macro

लिए किया जाता है।

Ctrl + N

Ctrl + O

Ctrl + S

Ctrl + P

New Document

Alt +=

Ctrl + F2

Print Preview

Ctrl + R

Ctrl + 1

Single Line Space

Ctrl+J

Ctrl + 2

Double Line space

Ctrl + E

Ctrl + 5

1.5 line space

Ctrl + W

Ctrl + T

Ctrl + M

Ctrl + Shift + M

Alt + F8

Ctrl + K

F7

Shift + F7

Alt + Shift + D

Alt + Shift + T Ctrl + L

Font dialog box

Change letter case Equation

Hanging indent

Paragraph indent right Left indent

Macro

Hyperlink

Spelling & Grammar Treasures

Current Date

Current time

Left Align Right Align Justify Align Center Align

Close Active Window

Ctrl + B

Bold selected text

Ctrl + F4

Close Active Window

Ctrl + I

Italic selected text

417

Alt+F4 Ctrl + A

Ctrl + Shift + C Window + D

Ctrl + Shift + D

F12

Alt + Ctrl + C

Alt + Ctrl + T

Alt + Ctrl + R

Ctrl + Shift +

Ctrl+Shift+ Backspace Delete

End

Home

Ctrl + End

Ctrl + Home

Left arrow Right arrow

Up arrow

Down arrow

Ctrl + Shift + Enter

Ctrl + Shift + C

Ctrl + Alt + V

Ctrl + Space bar

Alt + Tab

MS-Excel

Exit program Select All Copy format

All task minimize Double underline

Save AS

Copy right symbol Trademark Symbol Registered Sign Symbol

Font size increase Font size decrease

उत्कर्ष प्रकाशन

Remove left character of cursor Remove right character of cursor End of line

Beginning of line

End of document Beginning of Document One character left

MS Excel Microsoft office में दिया गया एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है।

• MS Excel का उपयोग सांख्यिकी गणना करने के लिए, डाटा को व्यवस्थित करने अर्थात् अवरोही व आरोही क्रम में जमाने के लिए, डाटा का विश्लेषण करने तथा चार्ट बनाने के लिए किया जाता है। माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम में स्प्रेडशीट कार्य के लिए Lotus 123 का प्रयोग किया जाता है।

.

One character right One line up

One line down

Column Break

Copy special/Copy format

Past special

Remove formatting

Switch Next window

MS EXCEL

Electronic Spreadsheet Programme

है जिसका उपयोग विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में किया जाता है।

Lotus 123 IBM Company द्वारा बनाया गया है। VisicalcЯ Electronic Spreadsheet Programme माना जाता है। एम.एस. एक्सेल की तरह ही Libra Office, Google Sheets, Lotus Symphony आदि दिए गए हैं। MS-Excel at Windows & Run Menu EXCEL FI MS-Excel में बनाई गई फाइल का नाम By Default name Book1 होता है।

MS-Excel 2003, 2007, 2010, 2013 # By Default Sheet की संख्या तीन होती है- Sheet1, Sheet 2 and Sheet3

MS-Excel 2016, 2019 #By Default Sheet in yo होती है।

MS-Excel # By default Sheet Sheet1 lar MS-Excel 2007 # #-ft File at Extension Name .xlsx होता है।

MS-Excel 2003 # at File Extension Name .xls होता है।

MS-Excel File automatic 10 Minute Save जाती है।

MS-Excel में Data Cell में लिखा जाता है।

MS Excel की फाइल को Book कहा जाता है। MS-Excel की सबसे छोटी यूनिट Cell होती है।

Row और Column के Intersection से cell बनता है।

Worksheet

Su

SA

10

11

14

17

18

19

Active

Dialing Launcher

C

Help Don

A

Fors

ре

G

Calgary C

Formlar

P

418

THOR O

Cell Address

·

·

.

MS-Excel में Cell का एक Address होता है।

उत्कर्ष प्रकाश

Excel में Cell का Address Name Box में दिखाई देता है। MS Excel में Column का एक Label होता है। Column के Label की शुरुआत 'A' से होती है।

MS Excel में Row का एक Unique Number होता है। Row की शुरुआत 1 से होती है।

MS-Excel में किसी भी Cell के Address को लिखने के लिए पहले Column के Lable और बाद में Row Number लिखा जाता है। जैसे A1

MS Excel में Sheet के Group को Book कहा जाता है। MS-Excel # Column & Label Row

Cell Address बता सकते हैं।

MS-Excel 2000 a 2003 Column

No.

256 għatĝi

MS-Excel 2010, 2013, 2016, 2019 # Last Column T Label "XFD" glari

MS-Excel 2010, 2013, 2016, 2019 Column 16384 होती है।

MS-Excel 2010, 2013, 2016, 2019 # Last Row Number "1048576" glari

MS-Excel 2000 3 2003 Last Cell Address *IV65536" होता है।

MS-Excel 2010, 2013, 2016, 2019 First Cell Address A1 starĝi

MS-Excel 2010, 2013, 2016, 2019 # Last Cell Address XFD1048576" ari

Excel की पूरी Sheet, Row और Column में divided होती है। OFFICE BUTTON - Office Button MS-OFFICE 2007 में ही है और Office Button को नए Version (2010, 2013, 2016, 2019 में File Tab में बदल दिया गया है।

MS-Excel को अलग-अलग Tabs में और प्रत्येक Tab को अलग- अलग ग्रुप में विभाजित किया गया है-

Opd

Page Lay

Home Tab

Book1 - Microsoft Excel

Number

M

N

A

Iree Dee Fo

1.

Clipboard

·

Cut (Ctrl+X):- Select किए गए Data को Cut करने के लिए अर्थात् अपने स्थान से हटाने के लिए।

Copy (Ctrl+C):- Select fag Data Copy a लिए।

Paste (Ctrl+V):- Cut या Copy किए गए डाटा को पेस्ट करने के लिए।

Format Painter (Ctrl+shift+C):- Document #fat डाटा पर Apply की Formatting को painter पर Click करते ही माउस का प्वॉइंटर पेंट ब्रश में बदल जाता है।

2. Font

3.

.

.

a.

·

MS Excel की फाइल का By Default Font Calibri होता है। MS Excel की फाइल का by Default Font Size 11 होता है। Font Size को Points में मापा जाता है।

·

MS-Excel Minimum Font Size 01 Point &

b.

Maximum Font Size 409 Point Bar

C.

MS-Excel By Default Font Style Regular tari MS-Excel में Font Style चार होते हैं जो

(i) Regular

(iii) Italic

Font Effect

(ii) Bold

(iv) Bold/Italic

(a) Superscript (Text a Top) Exp. :- 20" (b) Subscript (TextBottom) Exp.:- 20s (c) Strikethrough : Text को बीच में Single line के लिए। (UTKARSH CLASSES)

Alignment

MS-Excel thise By Default Text Alignment Left+Bottom larĝi

MS Excel में बनाई गई फाइल का By Default Number Alignment Right + Bottom glari

MS-Excel Alignment 2 gà - Horizontal और Vertical.

Horizontal Alignment 4 - Left, Center, Right, Justify

Vertical Alignment 5 - Top, Center, Bottom, Justify, distributed

में

Wrap Text:- MS-Excel cell

Line Complete होते ही Text Automatic उसी cell की दूसरी Line में चला जाता है। Wrap Text का उपयोग Cell में data को Vertically लिखने के लिए किया जाता है।

Shrink to fit एक से ज्यादा Cell के Data को एक ही Cell

Fit करने के लिए Shrink to fit उपयोग का किया जाता है। Merge cell :- एक से ज्यादा चयनित Cell को एक Cell में बदलने के लिए Merge cell का उपयोग किया जाता है, Merge cell से cell की Gridline हट जाती है।

Wrap Text

Merge & Center

me Merge & Center

Merge Across

Merge Cells

Unmerge Cells

Genera

419

4.

Number

.

उत्कर्ष प्रकाश

MS-Excel # By Default Cell Format General होता है-

1. General - 50

2. Number - 60.00 3. Currency $80.00 4. Percentage - 70.00%

5. Time - 11:00:00 AM

5.

·

Editing

Auto Sum :- इसका उपयोग Selected Range का Total लगाने के लिए किया जाता है।

Fill :- इसका उपयोग Cell में लिखी गई Value को आगे के Cell में Fill करने के लिए किया जाता है।

Clear :- इसका उपयोग Cell में लिखे गए Data को Remove करने के लिए किया जाता है।

Insert Tab

Ca

Home Insert Page Layout Formula

Cata

Review View

Linki

Text

Ω

FotTable Table Picture Clip Shapes Smartt Column Line Pe Bar Area Scatter Other Hank Text Header Word Signature Object Spl Chatti Box & Foster Dnya 5 Surface : इसका उपयोग श्रेणियों एवं शृंखला के संख्यात्मक निरंतर वक्र में दो आयामों के मानों में रुझान दिखाने के लिए किया जाता है। Doughnut : एक पाई चार्ट की तरह कुल में प्रत्येक मूल्य के योगदान को प्रदर्शित किया जाता है लेकिन इसमें कई शृंखलाएँ हो सकती हैं। Area: यह चार्ट समय के साथ परिवर्तन एवं इन परिवर्तनों के योग दोनों को बताता है।

Tables

2

Bustrations

Charts

(1) Tables

7.

Pivot Table इसका use Cell के जटिल Data को आसानी से समझने के लिए किया जाता है।

8.

Table इसका उपयोग Sheet में Table insert बनाने के लिए किया जाता है।

9.

(2) Illustrations

Picture Sheet में Picture insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

10.

Clip art Sheet में Picture, Sound आदि को Insert करने के लिए किया जाता है।

.

Shapes Sheet में अलग-अलग प्रकार की आकृति के लिए इसका use किया जाता है।

Smart art स्मार्ट आर्ट एक विजुअल रिप्रजेंटेशन है जो आँकड़ों को समझने में मदद करता है।

(3) Chart

Numerical data को Graphical से तुलना करने के लिए Chart का उपयोग किया जाता है जिस area में चार्ट की Detail बताई जाती है, वह area Legend होता है।

Type of chart

11.

Bubble: एक बबल चार्ट स्कैनर चार्ट का एक प्रकार है। बुलबुले के आकार Third Variable के मूल्यों को इंगित करता है। Radar: केंद्र बिन्दु का सापेक्ष मान प्रदर्शित करता है, इसका उपयोग तब किया जाता है जब श्रेणियाँ सीधे तुलनात्मक न हो।

(4) Links

·

Hyperlink :- Excel File में Web Page, E-mail, Picture से Link Create करने के लिए इसका use किया जाता है। जिस Text पर Link create होता है वह Blue color में दिखाई देता है। (5) Text

a.

1.

Column : कॉलम चार्ट का उपयोग श्रेणियों में मूल्यों की तुलना करने के लिए किया जाता है।

b.

2.

Line: लाइन चार्ट का उपयोग उतार-चढ़ाव के आँकड़ों को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

3.

4.

5.

6.

Pie पाई चार्ट का उपयोग कुल में प्रत्येक मूल्य के योगदान को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है इसका उपयोग तब किया जाता है जब सभी मान सकारात्मक हो।

Bar: यह चार्ट कई मूल्यों की तुलना के लिए सर्वोत्तम है।

XY (Scatter): इसका उपयोग XY चार्ट के रूप में आँकड़ों के जोड़ों की तुलना करता है इसका उपयोग तब किया जाता है जब मान एक्स-अक्ष क्रम में न हो या जब वे अलग-अलग माप का प्रतिनिधित्व करते हो। Stock: इस चार्ट का उपयोग उच्च, निम्न और बंद क्रम (अक्सर शेयर कीमतों में मूल्यों की तीन श्रृंखलाओं में किया जाता है।

.

Text Box :- Text box insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Header & Footer :

Header : Sheet के प्रत्येक पेज के Top में कोई Text Print करने के लिए Header का Use किया जाता है।

Footer :- Sheet के प्रत्येक पेज के Bottom में कोई Text Print करने के लिए footer use किया जाता है। Footer का Bottom Margin 0.5 inch होता है।

Word Art :- Excel # Decorative Text insert & fag इसका उपयोग किया जाता है।

Signature Line :- Excel में किसी जगह पर Signature और Digital Signature insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Object

(6) Symbol

Document में symbol insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है; जैसे,

&

Page Layout Tab

Home Colora A Fants

Insert

Page Layout Formulas Data Review

View

Themes

[] effects:

Margins Orientation Size Page Se

Print Breaks Background Area

AL

420

With Automatic Height, Automatic Scale 100%

Scot

Gridines Headings

✓ View

✓ View

Print

Print Sheet Options

Bring to FrontAlagn- Send to Back

Selection Pane

Amange

Group

Themes

उत्कर्ष प्रकाश

1.

.

.

2.

Sheet के design को बदलने के लिए इसका use किया जाता है। Page setup

3.

Margin: MS Excel में पेज के चारों ओर स्थान छोड़ने के लिए Margin का उपयोग किया जाता है और ये 4 प्रकार के होते हैं - Left, Right, Top, Bottom.

4.

.

By Default Excel में Margin Top or Bottom 0.75 होता है और Left or Right 0.7 होता है।

MS-Excel By Default Page Orientation Portrait होता है। Page Order: Excel की Sheet का Print निकालने के लिए Page Order का उपयोग किया जाता है।

5.

Formulas tab

Breaks :- इसका उपयोग Page को Break और Unbreak करने के लिए किया जाता है।

Scale to fit

इसका उपयोग Height और Width Change करने के लिए किया जाता है।

Sheet Options

इसका उपयोग Grid lines और Headings को Show और Print करने के लिए जाता है।

Arrange

Graphics को Text के साथ Arrange करने के लिए किया जाता है।

fx

Insert

Z Autosum +

Home

Insert

Recently Used

Page Layout Logical A Text

Formulas

Data Review

View

Lookup & Reference Math & Trig

Name

Date & Time Function Library

More Functions

Manager

Function Financial

Formula bar

Function

·

Pre Defined Formula's को फंक्शन कहते हैं। फंक्शन के अंदर फंक्शन को Nested Funtion कहते हैं। फंक्शन की शुरुआत "=" से होती है और इसे फॉर्मूला बार में लिखा जाता है।

फंक्शन कैस सेंसिटिव नहीं होते हैं।

MS-Excel में फंक्शन की अलग-अलग category है और किसी भी फंक्शन का उपयोग करने के लिए कुछ Step का उपयोग किया जाता है जिसे फंक्शन का Syntax कहा जाता है जो कि निम्नलिखित है:

फंक्शन का सूत्र : 1. = (equal sign)

2. Name Of फंक्शन

3. bracket starting (

4. cell range 'A1:A9'

5. Bracket की ending )

6. Press Enter

Row Height & Width

Exp.:-=SUM(A1:A9)

Column

·

MS Excel 2003 में Column की by default width 8.43 character (64 Pixels) होती है और यह अधिकतम 0 से 255 Character हो सकती है।

MS Excel 2003 में Row की by default height 12.75 points (17 Pixels) होती है और यह अधिकतम 409 Points सकती है।

MS-Excel 2007, 2010, 2013, 2016, 2019 # Column की by default width 8.43 character होती है और यह अधिकतम 255 Charater हो सकती है।

MS Excel 2007, 2010, 2013, 2016, 2019 में Row की by default height 15 points होती है और यह अधिकतम 409 Points हो सकती है।

By default Row की height points में और Column की Width characters में मापी जाती है।

Define Name Use in Formula

Create from Selection Defined Names

Trace [Precedents पाई Trace Dependents

Remove Arrows

3 Pormula Auding

Watch Calculation Window Options

Calculation

MS Excel में Mouse से किसी Row की Height बदलने पर उसकी इकाई Point और Pixels दोनों होती है। MS-Excel में Mouse से किसी Column की Width बदलने पर उसकी इकाई Character और Pixels दोनों होती है। एक Cell में अधिकतम 32767 character लिखे जा सकते हैं। एक Cell की एक लाइन में अधिकतम 255 character लिखे जा सकते हैं।

Cell Reference

A.

B.

·

C.

MS-Excel cell & Address Cell Reference जाता है।

Cell Reference का उपयोग Cell के address को Fix करने के लिए किया जाता है।

Cell के Address को Fix करने के लिए Dollar ($) Sign का Use किया जाता है।

यह 3 प्रकार के होते हैं-

Relative Cell Reference

ऐसे Cell Reference जिनमें Row और Column Fix नहीं होते हैं Relative Cell Reference कहलाते है जैसे B1B10 Mixed Cell Reference

ऐसे Cell Reference जिनमें Row या Column दोनों में से किसी एक को Fix किया जाता हो, Mixed Cell Reference कहलाते है। जैसे $B1 $B10

Absolute Cell Reference

ऐसे Cell Reference जिनमें Row और Column दोनों Fix होते हैं, Absolute cell Reference कहलाते हैं। जैसे SB$1 $B$10

Operators

MS-Excel में सूत्र और फंक्शन्स में प्रयोग होने वाले symbol को " operator" कहते हैं जैसे C1 C2

MS-Excel में operator निम्नलिखित प्रकार के होते हैं- |

421

(a) Arithmetic operator. + (Plus Sign) -(minus Sign) * (Multiply Sign) / (Forward Sign) % (Percent Sign) ^ (Caret Sign)

(b) Comparison operator -

= (Equal Sign)

(greater than)

(Less than)

= (greater than equal)

= (Less than equal)

उत्कर्ष प्रकाश

(Not equal)

(c) Text operator & (Ampersand) इसका उपयोग दो Cell में लिखे गए टेक्स्ट को जोड़ने के लिए किया जाता है।

(d) Reference operator -Comma (,) इसे Union Operator भी कहा जाता है इसका उपयोग Multiple Cell range के लिए किया जाता है। जैसे C1, C2, C3

Cell Range

एक से ज्यादा Cell का चयन करना Cell Range कहलाता है। Cell Range Colon के द्वारा दर्शाया जाता है।

Function Library :-

1.

2.

·

Colon (:) इसका उपयोग Cell की रेंज देने के लिए किया जाता Bi đặt - C1 : C10

·

Error in M S excel - Excel #fat Function error '#' (hash sign) से शुरू होता है।

3.

1. #DIV/0! यह error किसी value को 0 से divide करने show होती है।

2. #Value! - Function में गलत वैल्यू होने पर।

3. #REF! यह error किसी Cell reference के गलत होने पर show होता है।

4. #NULL - error faft Cell reference # Comma या Colon की किसी गलती के कारण show होती है।

5. #NAME! function का Name गलत होने पर show होती है।

4.

6. #N / A यह Error Value नहीं मिलने पर show होती है। 7. #NUM! Negative Value का Square Root निकालने पर यह Error Show होती है।

8. ##### Cell में लिखा गया डाटा जब से Cell से बड़ा होता हो तो ### (Hash) sign बन जाते हैं।

5.

Name Box

Excel की सबसे छोटी इकाई Cell होती है।

·

Excel Cell, Row a

Column Intersection

·

(प्रतिच्छेदन) से बनता है।

Excel में Cell का एक Address होता है।

6.

Excel में Cell का Address Name Box में दिखाई देता है।

Name Box Ribbon Bar Left Side

Box

होता है।

7.

3

Insert Function : Shift + F3 के माध्यम से इंसर्ट फंक्शन बॉक्स को Open कर उसमें प्रदर्शित फंक्शन का प्रयोग किया जा सकता है। Auto Sum :- इसमें कुछ ऐसे Function होते हैं जिन्हें यूजर डायरेक्ट काम में ले सकता है।

Recently Used :- हाल ही में प्रयोग किए गए फंक्शन को प्रदर्शित करता है।

Function :- Function को अलग-अलग Category में Divide किया गया है, जो निम्नलिखित प्रकार से हैं-

Text Function :- ऐसे Function जो Text पर कार्य करते हैं, वे Text Function कहलाते हैं।

Char

यह function ASCII Code के आधार पर कार्य करता है। Ex: = char("68"). → D

(क्योंकि 68 का Character 'D' होता है।)

Code

इस function का उपयोग किसी भी Character का ASCII Code जानने के लिए किया जाता है। * Ex. Code("c") = 99 (क्योंकि 'c' का ASCII Code 99' होता है।)

Exact:

इस Function का उपयोग दो String को match करने के लिए किया जाता है।

Ex.:- = Exact("chetan" "chetan")

= TRUE

(String same & at output TRUE)

= Exact ("chetan" "Chetan ")

= FALSE

(दोनों String same नहीं है तो output FALSE है) Upper:

इस Function का उपयोग text को Capital letter में लिखने

के लिए किया जाता है।

Ex.:- = Upper ("chetan")

=CHETAN

Lower

इस Function का उपयोग Small letter में लिखने के लिए किया जाता है।

Exp.:= Lower(CHETAN)

Formula Bar

·

Excel में Data Cell में लिखा जाता है।

Formula Bar Name Box के Right Side में Show होती है। Cell में लिखे Content (Data) Formula Bar में show होते हैं।

= chetan

Left

इसका उपयोग लिखे गए Text के Left character को देखने के लिए किया जाता है।

Exp. :- = left (CHETAN) → C

Right:

इसका उपयोग लिखे गए Text के Right character को देखने के लिए किया जाता है।

Ex.:- = Right(CHETAN) → N

422:

उत्कर्ष प्रकाश

8.

MID

.

इस Function का उपयोग लिखे गए Text के middle character को देखने के लिए किया जाता है।

9.

Ex. :- '= MID(CHETAN,2,3)

Proper

HE

7.

.

इस Function से प्रत्येक word का पहला character capital 8. तथा बाकी अन्य small character हो जाते हैं।

10. Rept

.

Ex :- = Proper("chetan jain") = Chetan Jain

इस Function का उपयोग लिखे गए Text को Repeat करने के लिए किया जाता है।

9.

.

·

Ex.:- = Rept (Chetan, 2) Chetan Chetan

11. Concatenate

·

इस Function का उपयोग String को जोड़ने के लिए किया जाता है। Exp.:- = Concatenate ("Chetan","Jain")

= Chetan Jain

12. TRIM

·

इस Function का उपयोग Text String के बीच Space को Remove करने के लिए किया जाता है।

·

Exp. :- = TRIM (Chetan Jain) Chetanjain

13. LEN

·

इस Function का उपयोग Text String में character की संख्या जानने के लिए जाता है।

Exp. :- = LEN (Chetan ) 6

Weekday :

इस Function का उपयोग दी गई date में वार निकालने के लिए किया जाता है। इसका output Sunday के लिए 1 होता है और Saturday के लिए 7 होता है।

Exp. :- = WEEKDAY(05/01/2020) Thursday Weeknum :

इस Function का उपयोग दी गई date में साल का सप्ताह निकालने के लिए किया जाता है।

Exp.:-= WEEKNUM(05/01/2020 ) = 18

Second:

इस Function का उपयोग दिए गए Time में Seconds निकालने के लिए किया जाता है।

Exp. : = SECOND (04:33:50) = 50

10. Minute:

इस Function का उपयोग दिए गए Time में Minute निकालने के लिए किया जाता है।

Exp.:- = MINUTE(06:30:20) = 30

11. Hours:

इस Function का उपयोग दिए गए Time में Hours निकालने के लिए किया जाता है।

Exp.:- = HOURS(02:20:10) 02

Logical Function :-

1.

Date & Times:-

2.

1.

Today :

.

इस Function का उपयोग Cell में Current date insert करने के लिए किया जाता है।

Exp. : Today () 30/9/2020

3.

2.

Now :

.

इस Function का उपयोग Cell में Current date & Time insert करने के लिए किया जाता है।

Exp. : = Now ()

30/9/202005:30PM

4.

3.

Date:

.

इस Function का उपयोग date को date के default format में लिखने के लिए किया जाता है।

1.

Exp. :- = Date (2020,09,20)

20/09/20

4.

Year:

इस Function का उपयोग दी गई date में Year निकालने के लिए किया जाता है।

.

Exp. :-=YEAR(05/03/2020) → 2020

5.

Day:

2.

इस Function का उपयोग दी गई date में Day निकालने के लिए किया जाता है।

Exp. : = DAY ( 05/03/2020 ) 05

Month:

AND :- इस function का output true या false आता है। दी गई सभी condition true है तो output true होगा अगर एक भी condition गलत है तो output false होगा । OR:- इस function का output true या false आता है। दी गई condition में से एक भी condition के सही हो जाने पर इसका output true होगा और सभी condition के गलत होने पर output false आता है।

NOT :- इस function का output true और false में आता है। यह function output को बदल देता है। अगर सही condition है तो output false आएगा और condition गलत है तो output true आएगा।

IF: function output user RT condition पर depend करता है।

Mathematical & Trig no Function :-

=abs() :

इस Function का उपयोग Absolute value return करने के लिए किया जाता है।

Negative number at Positive value * convert कर देता है, परन्तु Positive value पर कोई effect नहीं डालता। Exp.: ABS (-7) → 7

= product ():

इस Function का उपयोग cell में लिखी गई value को Multiply करने के लिए किया है।

Exp. Product (2,4)

6.

3.

= Power() :

इस Function का उपयोग दी गई date में Month निकालने के लिए किया जाता है।

·

Exp. : = MONTH ( 05/03/2020 ) 03

08

इस Function का उपयोग दी गई संख्या की Power को बढ़ाने के

लिए किया जाता है। इस Function का Output निम्न प्रकार है, Exp. Power (2,5) = 32

423

4.

= SQRT () :

.

उत्कर्ष प्रकाश

इस function का use दी गई संख्या का वर्गमूल निकालने के लिए

किया जाता है।

Exp. : = SQRT (81) = 9

10

= MODE () :-

5.

=ODD() :

·

इस function का उपयोग दिए गए नंबर के निकटतम विषम पूर्णांक

use करने के लिए करते हैं।

Exp :- = ODD (12) = 13

1.

6.

= EVEN () :

·

इस function का उपयोग दिए गए नंबर के निकटतम सम पूर्णांक

लेने के लिए करते हैं।

·

Exp. : EVEN (11) = 12

2.

इस function का उपयोग शेषफल निकालने के लिए किया जाता है। Exp.:= MOD (3,2)=1

= MOD (-3,2) = 1

= MOD (-3,-2) = -1 = MOD (3,-2)=1 Statically Function :-

AVERAGE:

इस function का उपयोग दी गई संख्या का औसत निकालने के लिए किया जाता है।

Exp.:- =AVERAGE ( 20, 40, 30 ) 30

MAX:

.

7.

=Round() :

यह function किसी संख्या को दिए गए अंकों की संख्या में पूर्णांक

इस function का उपयोग दी गई संख्याओं में से सबसे बड़ी संख्या ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

देता है।

Round number 1-4 down at Round number 5-

9 up करके Output देता है।

.

Exp. - Round (220.244, 2)

= 220.24 (यहाँ Rule 1-4)

= Round (220.255,2)

= 220.26 (यहाँ Rule 5-9)

8.

= ROUNDUP() :

·

यह function दशमलव के बाद की संख्याओं (1 9) तक को ऊपर

कर देता है।

Exp. : = Roundup ( 220.299, 2)

= 220.30

= Roundup(220.211, 2)

= 220.22

=ROUNDDOWN() :

9.

यह function दशमलव के बाद की संख्याएँ नीचे कर देता है।

Exp. :- Rounddown (220.299, 2)

= 220.29 = Rounddown (220.211, 2)

= 220.21

5.

Exp.:- MAX (100, 200, 300 ) 300

MIN:

इस function का उपयोग दी गई संख्याओं में से सबसे छोटी संख्या ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

Exp. -=MIN ( 10, 20, 30, 0, 1) = -1

COUNT

इस function का उपयोग दी गई Cell range में कुल संख्या जानने के लिए किया जाता है। यह Function Text की गिनती नहीं

करता।

Exp. - =COUNT (10, 20, 30, 40 ) = 4

COUNTBLANK

इस function का उपयोग दी गई Cell range में Blank Cell की गिनती करने के लिए किया जाता है लेकिन यह Function Text वाले Cell को भी Count करता है।

V-Look up

Excel में Sheet के Data को आसानी से देखने के लिए V Look up Function का use किया जाता है।

V-Look up Function Wild Card Character aft Sport करता है।

Wild Card Character दो होते हैं ?

3.

.

Data Tab

Home From Access

met

Page Layout Formulas Data

Review

View

Connections

K. Clear

From Web

From Other Existing

From Text Sources

Connections

Properties Refresh AllEdit Links

Reapply

sort

Filter

Text to Remove

Get

External Data

Connections

Data Tools

1.

Get External data

From Access

From web

·

From text file

·

From other Source

2.

Data Tools

.

What-If Analysis

Vy Advanced Columns Duplicates What if Anaiss

Sort & Filter 3

Goal seeks

Group Ungroup Subtotal

• 5 cudline

आउटपुट के अनुसार इनपुट में परिवर्तन goal seek के द्वारा किया जाता है।

इसका उपयोग Value के पूर्वानुमान के लिए किया जाता है।

1. Set cell

2. By changing cell

Data Validation *

Consolidate

424

उत्कर्ष प्रकाशन

Review Tab

Protect and Share Workbook

Allow Users to Edit Ranges

Sheet Workbook Workbook Track Changes

Home Insert

Page Layout Formulas Duta

Review View

ABC

Spelling Research Thesaurus Translate

Proofing

2

New Delete Previous Next Comment Comments

Show/Hide Comment Show All Comments Show Ink

Protect Protect Share

1.

Proofing

.

·

Spelling & Grammar: Spelling & Grammar की अशुद्धि जानने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Research :- शब्दकोश के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Thesaurus : पर्यायवाची एवं विलोम शब्द के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

2.

3.

Changes

3

Translate :- कंटेंट को किसी अन्य भाषा में बदलने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Comments

Changes

Protect Sheet:- Sheet Protect करने के लिए किया जाता है। Protect Workbook: इसका उपयोग Book को Protect करने के लिए किया जाता है।

View Tab

Home Insert

Page Layout

Formulas Data Review

View

Page Break Preview

Custom Views

Ruler Gidines

Formula Bar

Headings

Normal Page

Layout

Full Screen

Workbook Views

Zoom 100% Zoon to

Message Bar

2

Show/Hide

3 zaone

Selection

New Window Split Arrange All Freeze Penes

B

Hide

Save Switch Macros

Unhide Workspace Windes Window

Macros

AI

1.

·

.

2.

·

3.

·

Workbook Views

Normal :- Excel में default Layout Normal होता है Page Layout :- इस View का उपयोग Printing के दौरान Page का beginning and ending point देखने के लिए किया जाता है, इससे Header और Footer भी लगा सकते हैं। Page Break Preview:- View Excel Sheet को Break करने के लिए किया जाता है। इससे Sheet Letter Page के अनुसार Dotted line में दिखाई देती है।

Custom view:- Excel Sheet & Selected Area देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Full Screen Reading:- इस View का दूसरा नाम toggle View भी होता है। इसका उपयोग Proof Reading के लिए किया जाता है। Show/Hide

worksheet को प्रदर्शित या छिपाने के लिए किया जाता है। Zoom

MS Excel में screen को Zoom minimum 10% और maximum 400% कर सकते हैं।

Freeze Panes :- Excel में इसका उपयोग Row और Column की heading को Freeze (रोकना) करने के लिए किया जाता है।

Window :-

5.

Macros

.

Macro:- Macro I use Shortcut key recording

के लिए किया जाता है, जो पहले से reserve होती है वो use नहीं

कर सकते हैं।

Alt or F10

Alt + =

एम.एस. एक्सेल की शॉर्टकट Keys

Alt + Down arrow Alt+Enter

Alt + Esc

Alt + F1

Alt + F11

Alt + F2 Alt+F4 Alt+F8

Alt + i + C Alt+i+r

Alt + Shift + F1

Alt + Shift + F2

मेन्यू को एक्टिवेट करने के लिए अपने आप जोड़ने के लिए (ऑटोसम)

ऑटो कम्पलीट लिस्ट देखने के लिए

| उसी सेल में नई लाइन शुरू करने के लिए

टास्कबार में पिछले दो एप्लीकेशन में आने जाने के लिए चार्ट शीट इन्सर्ट करने के लिए

विजुअल बेसिक एडिटर को खोलने के लिए

सेव एज के लिए

वर्कबुक से बाहर जाने के लिए

मैक्रो डायलॉग बॉक्स के लिए कॉलम इंसर्ट करने के लिए रॉ इन्सर्ट करने के लिए नई वर्कशीट के लिए वर्कबुक सेव करने के लिए वर्कबुक बंद करने के लिए अभी का समय डालने के लिए आज की डेट डालने के लिए

Ctrl + W

4.

Ctrl+:

Split Window :- Cursor के स्थान से Window को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है तथा जिससे Document के अलग-अलग Section को एक समय में देखा जा सकता है।

Ctrl + :

Ctrl + 0

कॉलम को छुपाने के लिए

Ctrl + 1

Ctrl + 2

फॉर्मेट सेल डायलॉग बॉक्स को फॉर्मेट करने के लिए बोल्ड के लिए

.

New Window :- Current Document जैसा ही दूसरा Document बनाने के लिए New Window का Use किया जाता है।

Ctrl + 3

इटैलिक के लिए

Ctrl + 4

अंडरलाइन के लिए

425

Ctrl + 5

Ctrl + 6

Ctrl + 7

काटने के लिए

ऑब्जेक्ट को दिखाने या छुपाने के लिए टूलबार को दिखाने या छुपाने के लिए आउटलाइन सिंबल देखने के लिए

Ctrl + 8

Ctrl + 9

रॉ (ROW) छुपाने के लिए

Ctrl + A

Ctrl + B

Ctrl + C Ctrl+D

उत्कर्ष प्रकाशन

रेंज के सभी सेल्स को सलेक्ट करने के लिए

बोल्ड करने के लिए

Ctrl + Shift + F6 Ctrl + Spacebar

Ctrl + Tab Ctrl + U Ctrl+V

Ctrl + X Ctrl+Y

Ctrl + Z

कॉपी करने के लिए

कॉलम भरने के लिए

Enter

Ctrl + End

वर्कशीट के आखिरी सेल में जाने के लिए

F1

Ctrl + Enter

एक सेल के सभी कॉलम में एक ही चीज भरना

F10

Ctrl + F

ढूँढने के लिए

F11

Ctrl + F10

मैक्सीमाइज या रिस्टोर करने के लिए

F12

Ctrl

+ F11

4.0 मैक्रो शीट डालने के लिए

F2

Ctrl + F12

फाइल खोलने के लिए

F3

Ctrl + F3

नाम डिफाइन करने के लिए

F4

Ctrl + F4

बंद करने के लिए

FS

Ctrl + F5

विंडो साइज रिस्टोर करने के लिए

F6

Ctrl + F6

अगली वर्कबुक विंडो में जाने के लिए

F7

F8

Ctrl + F7

विंडो को मूव करने के लिए

Ctrl + F8 Ctrl + F9 Ctrl + G Ctrl+H

विंडो रीसाइज़ करने के लिए

F9

Go to

वर्कबुक मिनीमाइज करने के लिए

रिप्लेस करने के लिए

पिछली विंडो में जाने के लिए

अभी के कॉलम को सलेक्ट करने के लिए अगली वर्कबुक को एक्टिवेट करने के लिए अंडरलाइन करने के लिए पेस्ट करने के लिए कट करने के लिए Redo के लिए Undo के लिए

कोई कमांड करने के लिए

मदद के लिए

मेन्यू बार को एक्टिवेट करने के लिए नए चार्ट के लिए

सेव एज के लिए

Ctrl + Home

Ctrl + 1 Ctrl+K Ctrl + N

Ctrl + O

Ctrl + P

Ctrl + Page Down

Ctrl + Page Up Ctrl + R

शीट के पहले cell में जाने के लिए

इटैलिक करने के लिए

हाइपरलिंक डालने के लिए

नई वर्कबुक के लिए खोलने के लिए प्रिंट करने के लिए

अगली वर्कशीट में जाने के लिए पिछली वर्कशीट में जाने के लिए दाएँ भाग को भरने के लिए

Ctrl + Right Arrow रेंज के दाई ओर जाने के लिए

Ctrl+S

सेव करने के लिए

Ctrl + Shift + #

डेट फॉर्मेट के लिए

Ctrl + Shift + $

Ctrl + Shift + %

Ctrl + Shift + (

Ctrl + Shift + ) Ctrl + Shift + @ Ctrl + Shift + ^ Ctrl + Shift +

Ctrl + Shift + - Ctrl + Shift + 1 Ctrl + Shift + 2 Ctrl + Shift + 3

Ctrl + Shift + 4 Ctrl + Shift + 5 Ctrl + Shift + A Ctrl + Shift + F12

Ctrl + Shift + F3

करेंसी फॉर्मेट के लिए परसेंट फॉर्मेट के लिए

रॉज (Rows) को दिखाने के लिए कॉलम दिखाने के लिए टाइम फॉर्मेट के लिए

एक्सपोटेनटिअल फॉर्मेट के लिए आउटलाइन बॉर्डर को हटाने के लिए जनरल फॉर्मेट के लिए

दो दशमलव चिह्नों में फॉर्मेट करने के लिए समय के हिसाब से फॉर्मेट करने के लिए तारीख के लिए

सेल को करेंसी में बदलने के लिए सेल को परसेंटेज में बदलने के लिए फॉर्मूला में आर्ग्युमेंट्स नाम डालने के लिए

प्रिंट करने के लिए

रॉ और कॉलम के नाम पर सूची बनाने के लिए

426

Shift + Ctrl + F

Shift + Ctrl + F6 Shift + Ctrl + Tab Shift + Ctrl + Tab Shift + Enter Shift + F10

एडिट करने के लिए

नाम पेस्ट करने के लिए

पिछला एक्शन रिपीट करने के लिए

नया पेज

अगली विंडो

स्पेलिंग जाँचने के लिए

एक्सटेंड मोड के लिए

सभी वर्कबुक्स को दुबारा कैलकुलेट करने के लिए | विभिन्न फॉन्ट की सूची खोलने के लिए पिछली एक्सेल विंडो पर जाने के लिए पिछले टूलबार को खोलने के लिए पिछली वर्कबुक को खोलने के लिए पिछले सेल में जाने के लिए

शॉर्टकट मेन्यू दिखाने के लिए

MS Power Point

Microsoft PowerPoint एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जिसके द्वारा मल्टीमीडिया का प्रयोग करते हुए प्रजेंटेशन बनाई जाती है।

पॉवरपॉइंट में दिखाई देने वाले पेज को स्लाइड कहा जाता है। स्लाइड के माध्यम से प्रस्तुतीकरण बनाई जाती है।

स्लाइड का ओरिएंटेशन Landscape होता है।

पॉवरपॉइंट में बनाई गई फाइल का By default नाम Presentation 1 होता है।

MS-PowerPoint Windows Run Menu चलाने के लिए powerpnt.exe लिखते हैं।

MS Powerpoint 2000 और 2003 में बनाई गई File का Extension Name ppt होता है।

MS PowerPoint 2007, 2010, 2013, 2016, 2019 में बनाई गई File का Extension Name.pptx होता है। MS PowerPoint 2000 और 2003 में Template File का Extension Name ppt होता है।

MS-PowerPoint 2007, 2010, 2013, 2016 और 2019 में Template File का Extension Name potx होता है। Power Point में Wav, MPEG, JPEG, JPG MP3 File Format को use कर सकते हैं।

.

.

उत्कर्ष प्रकाशन

पॉवरपॉइंट Presentation में एक स्लाइड से अन्य स्लाइड के मध्य होने वाले प्रभाव को स्लाइड ट्रांजिशन कहा जाता है।

स्लाइड को छोटे रूप में प्रदर्शित करने वाले स्थान को Thumbnail कहा जाता है।

पॉवरपॉइंट Presentation में एनीमेशन का प्रयोग किया जाता है। स्लाइड का वह स्थान जिस पर टेक्स्ट या चित्र इंसर्ट किए जाते हैं, उन्हें प्लेस होल्डर कहा जाता है।

पॉवरपॉइंट स्लाइड को 10% से 400% Zoom का प्रयोग किया जा सकता है।

Outline Slide Tab

Slide Tab

·

नई फाइल को बनाने के लिए Ctrl+N तथा नई स्लाइड को इंसर्ट करने के लिए Ctrl+M का प्रयोग किया जाता है।

Title Bar यह bar screen के सबसे ऊपर स्थित बार है। इस

bar Left side office button at Right side control switch होते हैं।

Quick Access Toolbar Save For save a document Undo

Redo

File Name

Quick Access Toolbar Title Bar Placeholder

Presentation Microsoft PowerPoint

Design

Animations

Slide Show

New

Slides

Font

Review

Click to add title

Click add subtitle

Click to add notes

Slide1 of 1 Office Theme English @ndia] ||

Slide Pane Slide View Notes Pane View Buttons

Home Tab

Home Insert

Design Calibri (Body) Babe

Presentationl - Microsoft PowerPoint Animations

Side Show

Review

View

Drawing To... Format

Paste

New Slide-

Clipboard

Sides

Font

Paragraph

Shapes Arrange Quick

Editing

Styles

Drawing

1.

·

.

Clipboard

Cut (Ctrl+X):- Select किए गए Data को Cut करने के लिए Copy(Ctrl+C):- Select किए गए Data को Copy करने के लिए। Paste (Ctrl+V):- Cut या Copy किए गए डाटा को पेस्ट करने asfagi

Format Painter (Ctrl+shift+C):-:- Presentation #fanf Text पर Apply की गई Formatting को Copy कर दूसरे Text पर Apply करने के लिए Format Painter का Use किया जाता है।

.

Format Painter पर Click करने पर

Pointer Print Brush में बदल जाता है।

2. Slider - New Slides, Layout a Delete

3.

Font

Mouse का

MS-PowerPoint # Add Title By Default Font Calibri (Headings) होता है, जिसका by Default Font Size 44 stat

.

MS-Power Point Add Notes By Default Font Calibri Body होता है, जिसका by Default Font Size 12 होता है। Font Size को Points में मापा जाता है। MS PowerPoint में बनाई गई फाइल का By Default Font Style Regular होता है।

MS-Powerpoint # Font Style 4 - Regular, Bold, Italic au Bold/Italic

Font Effect निम्नलिखित होते हैं -

1. Subscript:- 204

2. Superscript:- 204

3. Strikethrough :- (chetan jain)

4. Double Strikethrough :- (CHETAN JAIN)

5. All Caps (CHETAN)

6. Small Caps (chetan)

7. Equalize Character Height

427

.

.

.

उत्कर्ष प्रकाशन

Kerning MS-PowerPoint for Text Visual Approach (दृश्य दृष्टिकोण) के लिए Kerning का Use किया जाता है।

Character Spacing → Normal, Loose, Very Loose, Tight aч Very Tight

MS-Power में Letter Case 5 प्रकार के होते हैं :-

1. Sentence Case

3. UPPER CASE

5. Capitalize Each word

2. lower case

4. tOGGLE CASE

·

4.

Paragraph

Alignment:-

MS-PowerPoint

Alignment

5.

General (Horizontal) ai Vertical

i

·

General (Horizontal) Alignment 5 type (Left, Centered, Right, Justify, Distributed)

Vertical Alignment 7 type

(Top,

Middle, Bottom, Top Center, Middle Center, Bottom Center, Distributed)

·

·

6.

.

Ms-PowerPoint By Default Add Sub Title Text Alignment Centered+Top Bar &

Ms-PowerPoint By Default Add Sub Title Horizontal Text Alignment Centered होता है।

Ms-PowerPoint # By Default Add Sub Title Vertical Text Alignment Top होता है।

Text Direction - Power Point Text Direction 4 R की होती हैं-

1. Horizontal

3. Rotate all text 270°

Drawing

2. Rotate all Text 90°

4. Stacked

Shapes :- Side में अलग-अलग प्रकार की आकृति insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Arrange :- Slide # Insert fag Object at Order, Position, Rotation के आधार पर Change करने के लिए Arrange का उपयोग किया जाता है।

Quick Style :-se Line Shape & Visual Style बदला जा सकता है।

Editing

Find :- Slide में किसी Text को ढूँढने के लिए।

Replace Find किए गए Text को किसी अन्य Text में बदलने के लिए

Ms-PowerPoint # By Default Add Title Text Alignment Center + Middle tari

Ms-PowerPoint By Default Add Title Horizontal Text Alignment Centered glari Ms-PowerPoint By Default Add Title Vertical Text Alignment Middle होता है।

G) =

Insert Tab

Presentationl Microsoft PowerPoint Home Insert Design Animations Slide Show Review

Drawing Tools

View

Format

Table

Picture Clip Photo Shapes SmartArt Chart Hyperlink Action Art Album

Text Box

Header WordArt & Footer

Date

Tables

ustrations

Links

Slide Symbol Object & Time Number Text

Movie Sound

Media Clips

1.

Tables

2.

By Default Table 5 Columns और 2 Rows की बनती है Illustration

3.

.

Picture Slide # Picture Insert fa इसका उपयोग किया जाता है।

·

Clip art - Slide # Picture, sound, movie anfa insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

·

·

Photo Album : Slide में एक से अधिक Pictures Insert कर Photo Album बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Shapes :- Slide में अलग-अलग प्रकार aft Readymade Shape (आकृति) insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Smart Art :- Slide Hierarchy & fay such उपयोग किया जाता है।

Chart Numerical Data, Graphical data # compare करने के लिए Chart का उपयोग किया जाता है। Link

Hyperlink :- वर्ड फाइल में वेब पेज, ई-मेल, Picture से लिंक Create करने के लिए किया जाता है।

Action :- इसका उपयोग Hover Technique के लिए किया जाता है।

4.

Text

.

Header & Footer

1. Date & Time

3. Footer Text

2. Page Number

Word Art :- Slide # Decorative Text insert & fag इसका उपयोग किया जाता है।

Design Tab

Classic Menu for PowerPoint - Microsoft PowerPoint

Menus Home Insert

Design Animations

Slide Show

Review View Developer

Aa

Aa

Page Slide Setup Orientation

Page Setup

Themes

Colors A Fonts

Effects-

Background Styles-

✔Hide Background Graphics

Background

428:

1.

Design tab में निम्नलिखित समूह होते हैं-

उत्कर्ष प्रकाशन

1. Page Setup, 2. Themes, 3. Background Page Setup इस समूह में पेज सेटअप कमाण्ड के द्वारा स्लाइड साइज, स्लाइड नम्बर लम्बाई-चौड़ाई, स्लाइड ओरिएंटेशन, नोट्स, व्यू से सम्बन्धित कार्य किए जाते हैं।

स्लाइड हैंडआउट के अंतर्गत स्लाइड में नाम, दिनांक आदि हो सकते हैं जिसे छोटे-छोटे रूप में अर्थात् एक पेज पर 1,2,3,4,6, 9 की संख्या में प्रिंट किया जा सकता है।

1.

Preview -

·

2.

.

.

2.

3.

Animations Tab

स्लाइड ओरिएंटेशन दो प्रकार का होता हैं-

(i) Portrait

(ii) Landscape

Theme - इस समूह के माध्यम से स्लाइड की थीम को बदला जाता है, जिससे स्लाइड के फॉण्ट, कलर आदि बदल जाते हैं। Back ground स्लाइड के बैकग्राउण्ड में परिवर्तन के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

७) = Classic Menu for PowerPoint Microsoft PowerPoint

Menus Home Insert Design Animations Slide Show Review View Developer

FO 14 No Animation

No Sound

Pre

Preview

Custom Animation Animations

Transition Scheme Apply To A

पॉवरप्वॉइंट में बनाई गई स्लाइड के एनीमेशन और Transition

का View देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। एनीमेशन्स

एनीमेशन :- स्थिर चित्रों को गति देने के लिए एनीमेशन का उपयोग किया जाता है।

Custom एनीमेशन स्लाइड के प्रत्येक Object को अलग अलग Effect देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

3.

Advance Slide

✓ On Mouse Click

Automatically After 00:00: Transition to This Slide

Transition to this slide

Presentation के दौरान स्लाइड पर Visual Effect देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Presentation के दौरान एक स्लाइड से दूसरे स्लाइड में हो रहे परिवर्तन को स्लाइड Transition कहते है; जैसे No Transition, Fade Smoothly, Fade Through Through आदि।

Slide Show Tab

Presentationl Micros

Home Insert Design Animations Slide Show Review

Record Narration Rehears

From

Beginning Side Show Side Use Rehearsed wings

Start Side Show

Start is Show → MS-PowerPoint slide Show

Set Up

1.

3 प्रकार से Start किया जा सकता है।

·

From Beginning

.

From Current स्लाइड

Custom स्लाइड Show

2.

Set up

Setup स्लाइड Show :- इससे Presentation के दौरान स्लाइड के नम्बर को Fix किया जा सकता है।

3.

Hide स्लाइड : Presentation से Current स्लाइड को Hide करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Monitor

Record Narration Record Narration Microphone का उपयोग Presentation में Recording के लिए किया जा सकता है और उसे Presentation के दौरान Show भी किया जा सकता है।

Rehearse Timings Presentation fill स्लाइड का Time Fix करने के लिए किया जाता है। Time Fix से स्लाइड उतने Time तक Screen पर रहेगी।

Monitors

Resolution :- स्लाइड इसका उपयोग किया जाता है।

का Resolution बदलने के लिए

Review Tab

Home Insert Design

Presentation - Microsoft PowerPoint Animations Slide Show Review View

Drawing Tools

Format

ABC

Spelling Research Thesaurus Translate Language Show New Edt Delete Previous Next Markup Comment Comment

Proofing

Comments

Protect Presentation Protect

1.

Proofing

Spelling :- स्लाइड में लिखी गई Spelling & Grammar

की त्रुटि जानने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

429:

Research :- शब्दकोश के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Thesaurus :- स्लाइड में लिखे शब्द के Synonyms and Antonyms (पर्यायवाची और विपरीत शब्द) के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

·

उत्कर्ष प्रकाशन

Translate :- स्लाइड के कंटेंट को किसी अन्य भाषा में बदलने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Language:- लिखे गए Text की भाषा देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Comments

.

·

2.

·

·

.

New Comment :- Select कंटेंट के बारे में Comment Insert करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। Edit Comment Comment में Edit करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

3.

View Tab

Delete :-Comment को Delete करने इसका उपयोग किया जाता है।

Next :- Next Comment पर जाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Previous :- Previous Comment पर जाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Protect

Presentation को Protect ( सुरक्षित) करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Presentation Moon FonePart

1.

·

.

Normal Side Notes Side Side Handout Nat Sorter Fage Show Master Master Mater Presentation Views

Presentation View

नॉर्मल :- Presentation को Normal View में देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

स्लाइड शोर्टर :- बनी हुई स्लाइड को एक साथ देखने के लिए तथा Rearrange करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

नोट्स पेज

Speaker Notes बनाने के लिए उपयोग किया

Home Imet Design Animations

Shree Show Rete Puer

View

Col

| Grees

Ge

Zoom Fit to

Avange A

New

Switch Macros

Window

Pure Black and White Window Move Split Windows

ShowHide

Color Grape

Ctrl+N

Ctrl+M

MS Powerpoint Short Cut

New Presentation

New Slide

Ctrl+D

Duplicate Slide

Ctrl+Shift+P

Font Dialog Box

Ctrl+Shift+F

जाता है।

Font Dialog Box

.

स्लाइड शो :- स्लाइड का Presentation Show करने के लिए स्लाइड Show का उपयोग किया जाता है।

F5

Slide Show

Shift+F5

Current Slide Show

.

·

स्लाइड मास्टर :- Master स्लाइड design व Layout को Change करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। हैंडआउट मास्टर :- Presentation की स्लाइड का Print लेने के लिए Hand out Master का उपयोग किया जाता है। हैंडआउट मास्टर By Default 1 Sheet पर 6 स्लाइड Print होती है। एक Sheet पर 1, 2, 3, 4, 6, 9 स्लाइड को ही Print किया जा सकता है।

ESC

Cancel Slide Show

Ctrl+Q

Close powerpoint

Ctrl+F4

Close Work Area

Alt+F4

Close Program

goo

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

.......... वह डाटा है, जिसे एक अर्थपूर्ण तरीके से व्यवस्थित

और प्रस्तुत किया जाता है।

(b) सॉफ्टवेयर

(d) इन्फॉर्मेशन

निम्नलिखित में से सही श्रृंखला को चुनिए-

(a) डाटा विजडम सूचना - नॉलेज

(b) विजडम

नॉलेज - सूचना - डाटा

(C) डाटा सूचना - नॉलेज - विजडम

(d) विजडम सूचना - नॉलेज - डाटा

निम्नलिखित में से पहली पीढ़ी का कम्प्यूटर कौन-सा है?

(a) माइक्रो कम्प्यूटर

·

2.

Notes Master: Notes Master का View देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसमें Pre Formatted Notes होते हैं। Show/Hide :- Document को प्रदर्शित या छिपाने के लिए किया जाता है।

1.

(a) प्रोसेस

(c) स्टोरेज

3.

Zoom :- Zoom Minimum 10% और Maximum 400% कर सकते हैं।

2.

4.

Window :-

Split Window :- Cursor के स्थान से Window को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है तथा जिससे Document के अलग-अलग Section को एक समय में देखा जा सकता है।

3.

New Window :- Current Document जैसा ही दूसरा Document बनाने के लिए New Window का Use किया

जाता है।

5.

·

Macros :-

Macro Use Shortcut Keys Recording लिए किया जाता है, जो पहले से Shortcut Reserve होती है, उनकी Recording नहीं की जा सकती है।

(b) सुपर कम्प्यूटर

(c) ENIAC

4.

(d) IBM-370

प्रोसेस्ड डाटा एवं इन्फॉर्मेशन में जो निष्कर्ष निकलते हैं, वह

...कहलाते हैं।

(a) इन्फॉर्मेशन सेट

(b) नोलेज

(c) रॉ डाटा

(d) स्टेटिकल डाटा

430

उत्कर्ष प्रकाशन

5.

कम्प्यूटर पाँच मुख्य कार्य (ऑपरेशन्स) क्रियान्वित करता है जो 15. इनपुट ...... आउटपुट स्टोरेज और कंट्रोल है।

(a) कम्प्यूटर (गणना)

(b) प्रोसेस (प्रक्रिया)

(c) कम्पाइल ( संकलन )

(d) एग्जीक्यूट (निष्पादन)

16.

6.

एक छोटे सिलिकॉन चिप पर ट्रांजिस्टरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक

उपकरणों के साथ पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को ....... कहते हैं।

(a) वर्कस्टेशन

(b) CPU

(c) मैग्नेटिक

(d) इंटिग्नेटिक

7.

चौथी पीढ़ी के Computer का मुख्य भाग है-

(a) Micro Processor

(b) Transistor

(c) Integrated Circuit

(d) Valve

17.

(a) ASCII कोड

(c) OCR स्कैनर

18.

8.

Computer के सभी Hardware की जाँच निम्नलिखित में

से कौन करता है?

(a) BIOS

(b) System

(c) Hard Disk

(d) Processor

(c) ब्राउजर कैप्स

9.

पंचकार्ड का प्रयोग किस कार्य हेतु किया जाता था?

19.

(a) Motherboard के निर्माण में

(a) स्कैनर, प्रिंटर, मॉनीटर

(b) Computer को निर्देश देने में

(c) माउस, प्रिंटर, मॉनीटर

(c) Hardware बनाने में

20.

कुंजी और

मिलकर शॉर्टकट या विशेष कार्य के लिए प्रयोग किया जा

सकता है।

(a) कंट्रोल, ऑल्ट

(c) डिलीट, इन्सर्ट

(b) फंक्शन, टॉगल

(d) कैप्स, लॉक, नम लॉक डिवाइसेज संभव बनाते हैं- (b) डाटा स्कैन करना

निम्नलिखित में से आउटपुट (a) डाटा देखना या प्रिंट करना

(d) डाटा भेजना

अलग-अलग लंबाई-चौड़ाई की

(c) डाटा इनपुट करना कम्प्यूटर से पढ़े जाने वाले लाइनों वाले कोड को क्या कहते हैं?

- एक प्रकार के सस्ते कैमरे होते हैं जो कम्प्यूटर के साथ लगे रहते हैं और उनका उपयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वीडियो चैटिंग और लाइव वेब ब्रॉडकास्ट के लिए होता है।

(a) वेब कैम

निम्नलिखित में से किस समूह

(b) वेब पिक्स

(d) ब्राउजर पिक्स

में केवल आउटपुट डिवाइस हैं?

(b) की-बोर्ड, प्रिंटर, मॉनीटर

(d) प्लॉटर, प्रिंटर, मॉनीटर

निम्नलिखित में से अस्थायी आउटपुट डिस्प्ले कौन-सा है?

कुंजी को दूसरी कुंजियों के साथ

(b) QR anta

(d) बार कोड

(d) RAM Chip के निर्माण में

(a) प्रिंटर

(b) प्रोजेक्टर

10.

Firmware से हमारा तात्पर्य है -

(c) स्कैनर

(d) वीडियो कैमरा

(a) Computer System में प्रयुक्त भौतिक उपकरण

21.

हार्ड डिस्क की गति मापी जाती है-

(b) Instructions का वह set जिससे कम्प्यूटर एक या एक से अधिक कार्य करता है।

(a) km

(b) MB

(c) RPM

(d) Bits

(c) Computing Process में शामिल लोग

22.

CD/DVD में डाटा कॉपी करने की प्रक्रिया कहलाती है-

(d) Programs का Set जो निर्माण के समय Computer की

(a) डिबगिंग

(b) कम्प्रेसिंग

ROM में Pre-Install किया जाता है।

(c) एडिंग

(d) बर्निंग

11.

वॉर्म एक प्रकार की ऑप्टिकल

मेमोरी है, इसका पूर्ण रूप क्या है?

12

जो कुछ कम्प्यूटर में टाइप, सबमिट या ट्रांसमिट किया जाता है | 23.

उसे कम्प्यूटर

(a) इनपुट

(c) डाटा

-----------

कहते हैं।

(b) आउटपुट (d) सर्किट

निम्नलिखित में से कौन-सा केवल इनपुट डिवाइसों का समूह है?

(a) माउस, टच पैड टच स्क्रीन

(b) की बोर्ड, प्लॉटर ओ. एम. आर.

24.

(a) राइट वंस रीड मेनी

(b) राइट वंस रीड मेमोरी

(c) राइट ऑप्टिकल रीड मेमोरी

(d) इनमें से कोई नहीं

वह कौन-सी मेमोरी है, जिसे प्रति सेकण्ड कई बार रिफ्रेश किया

जाना चाहिए?

(c) ओ. सी. आर., वेब कैम, लाइट पेन (d) मॉडेम, बार कोड रीडर, माइक्रोफ़ोन

कौन-सी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए जाँच करती है कि 25. कम्प्यूटर के कॉम्पोनेन्ट्स ऑपरेट हो रहे हैं तथा उचित ढंग से

13.

जुड़े हुए हैं?

(a) बुटिंग

(b) प्रोसेसिंग

(c) सेविंग

(d) एडिटिंग

14.

मोशन डाटा को कम्प्यूटर या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में प्रविष्ट

करने के लिए किस इनपुट डिवाइस का उपयोग किया जाता है?

(a) ट्रैकबॉल

(b) बारकोड रीडर

(c) पेन

(d) मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन

26.

(a) स्टेटिक रैम

(c) EPROM

(b) डायनेमिक रैम

(d) ROM

निम्नलिखित में से कौन-सी मेमोरी में रखे डाटा को पराबैंगनी किरणों के माध्यम से हटाया जाता है?

(a) PROM

(c) EEPROM

(b) EPROM

(d) इनमें से कोई नहीं

निम्नलिखित में से कौन-सा सॉफ्टवेयर का प्रकार है जो

कम्प्यूटर में होने वाली आंतरिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। एवं कम्प्यूटर के सभी भागों के कार्यों पर नियंत्रण करता है? (a) शेयरवेयर

(b) पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर

(c) एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

(d) ऑपरेटिंग सिस्टम

431

27

28.

डिवाइस ड्राइवर क्या है?

(a) बाहरी स्टोरेज डिवाइसों के लिए पावर कार्ड

उत्कर्ष प्रकाश

(b) विशेषज्ञ सॉफ्टवेयर जो डिवाइस एवं कम्प्यूटर के मध्य संपर्क स्थापित करता है।

(c) हार्डवेयर उपकरण

(d) ऑपरेटिंग सिस्टम के सबसे भीतर के पुर्जे

एक ऑपरेटिंग सिस्टम मल्टीटास्किंग कर सकता है, इसका अर्थ है- (a) ऑपरेटिंग सिस्टम काम को कई CPUs के बीच विभाजित कर सकता है।

(b) बहुत से प्रोग्राम साथ-साथ ऑपरेट किए जा सकते हैं।

(c) यूजर आसानी से दो कार्यों के मध्य स्विच कर सकता है। (d) उपर्युक्त सभी

29. पहले से ऑन कम्प्यूटर को रीस्टार्ट करना कहलाता है-

(a) कोल्ड बूटिंग

(c) शट डाउन

30. यूनिक्स का पूर्ण नाम है-

37.

भौगोलिक दृष्टि से दूर कम्प्यूटर और टर्मिनलों के एक नेटवर्क को कहा जाता है-

(a) WAN

(c) MAN

(b) LAN (d) ISDN

38. विभिन्न प्रोटोकॉल का उपयोग करके नेटवर्क को जोड़ने के लिए किस नेटवर्क उपकरण का उपयोग होता है?

39.

(a) राउटर

(c) हब

(b) स्विच

(d) गेटवे

सूचना शेयर करने के लिए, एक दूसरे से कनेक्टेड दो या अधिक कम्प्यूटर से (a) नेटवर्क (c) सर्वर

बनता है।

(b) राउटर (d) टनल

40. निम्नलिखित में से कौन-सा एक छोटा सिंगल-साइट नेटवर्क है?

(a) LAN

(b) DSL

(d) USB

MS Word को रन (Run) से शुरू किया जा सकता है-

(c) RAM

41.

(a) Word

(c) Wordms

42.

एम.एस. वर्ड में

किया जाता है-

(a) पेज कलर

(b) वार्म बूटिंग

(d) लॉगिंग ऑफ

(a) यूनियन इंफॉर्मेशन कम्प्यूटर सिस्टम

(b) यूनिप्लेक्स इण्टर कम्प्यूटर सर्किट

(c) यूनिप्लेक्सड इंफॉर्मेशन कम्प्यूटिंग सिस्टम

(d) यूनियन इन्फ्रो कैरेक्टर सिस्टम

31.

एक उपकरण जिसका उपयोग दो अलग- अलग ईथरनेट नेटवर्क

को जोड़कर एक विस्तृत ईथरनेट बनाने में किया जाता है, निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा है?

(a) ब्रिज

43.

(b) राउटर

(c) रिपीटर

(d) मॉडम

(b) Winword

(d) Ms Word

....... विकल्प पेज की सामग्री के पीछे

फीके पाठ (Ghosted Text) सम्मिलित करने लिए प्रयोग

32. निम्नलिखित में से कौन हाफ डुप्लेक्स कम्युनिकेशन डिवाइस

33.

का उदाहरण है?

(a) Walkie-Talkie

(b) Telivision

(c) Radio

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

कम्प्यूटर नेटवर्क में नोड्स क्या होते हैं?

(a) कम्प्यूटर से निकलता डाटा

(b) कम्प्यूटर के मार्गों पर चालित डाटा

(c) कम्प्यूटर जो कि डाटा को समाप्त करता है।

(d) उपर्युक्त सभी

(c) हायफनेशन

(b) मार्जिन

(d) वाटरमार्क

एम.एस. वर्ड में Ctrl+Enter का प्रयोग होता है-

(a) कॉपी पेस्ट करने हेतु

(b) पेज को डिलीट करने हेतु

(c) पेज ब्रेक करने हेतु

(d) कट पेस्ट करने हेतु

44. यदि Ms Word में 22 टाइप करना हो तो निम्नलिखित में से

45.

किस विकल्प का प्रयोग करेंगे?

(a) Superscript

(c) Bold

(b) Subscript

(d) Power

एम. एस. वर्ड के फॉण्ट साइज़ की ड्रॉप डाउन लिस्ट में न्यूनतम

....... व अधिकतम ......होता हैं।

(a) 10 pt to 78 pt

(b) 8 pt to 72 pt

(c) 12 pt to 75 pt

34. यदि आप सिग्नल में गिरावट के बिना नेटवर्क की लंबाई का

विस्तार करना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित में से किसका उपयोग करेंगे?

(a) राउटर

(c) गेटवे

(b) रिपीटर (d) ब्रिज

35. हमारे द्वारा मॉडेम का उपयोग किया जाता जब डाटा को

में सम्प्रेषित करते हैं।

(a) MAN (c) LAN

(b) WAN (d) उपर्युक्त सभी

36. IPv6 का साइज कितना होता है?

(a) 24 Bit

(c) 32 Bit

(b) 64 Bit

(d) 128 Bit

432

(d) 1 pt to 100 pt

46.

वर्ड में फुटनोट के लिए किस टैब का उपयोग किया जाता है?

47.

(a) Home Tab

(b) Reference Tab

(c) Insert Tab

(d) View Tab

एम. एस. वर्ड में लिफाफा बनाने व उसको प्रिंट करने के लिए

किस टैब का चयन किया जाता है?

(a) पेज लेआउट

(b) रेफ्रेंस

(c) मैलिंग्स

(d) होम

48.

एक प्री-डिजाइंड डॉक्यूमेंट है, जिसमें कोऑडिनेटिंग फॉन्ट, लेआउट और बैकग्राउण्ड होता है

58.

(a) गाइड

(b) टेम्प्लेट

(c) रूलर

उत्कर्ष प्रकाशन

एम. एस. एक्सेल में एक फॉर्मूला बनाने के लिए आवश्यकता होती है-

(a) केवल वैल्यू

(b) केवल सेल रेफ्रेंस

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

(c) वैल्यू और सेल रेफ्रेंस

59.

M.S. Excel में नंबर को

ड्रैग करके सेल्स में इन्सर्ट करने के

(d) डिजाइन पेज

49.

........... माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2010 के लिए एक दस्तावेज

फीचर को क्या कहते हैं?

(a) Auto Correct

में किए गए परिवर्तनों का ट्रैक रखने का तरीका है।

(b) Auto Fill

(a) मैक्रोज

(c) Auto Text

(b) बुलेट्स

(d) Auto Cell

(c) ट्रैक चेंजिज

60.

इनमें से कौन-सा एक वैध सेल एड्रेस नहीं है?

(d) टेम्पलेट

(a) UX25

(b) A1

50.

MS-Word में word Wrap का उपयोग किया जाता है-

(c) XFD1

(d) 1B

(a) लाइन कम्पलीट होते ही टेक्स्ट ऑटोमेटिक ही दूसरी लाइन में

उत्तरमाला

चला जाता है।

(b) डॉक्यूमेंट के निचले हिस्से में दिखाई देता है।

1.(d)

2. [c]

3. [c]

4. [b]

5. [b]

(c) टेक्स्ट पर टाइप करने में मदद करता है।

6. [b]

7. [a]

8. (al

9. [b]

10. [d]

(d) डॉक्यूमेंट के सारे वर्ड कैपिटल करने के लिए।

11. [a]

12. [c]

13. (a)

14. [a]

15. (al

51.

एक्सेल में करंट सेल का एड्रेस

में दिखाई देता है।

16. [a]

17. [d]

18. [a]

19. [d]

20. [b]

(a) Formula bar

21. [c]

22. [d]

23. [a]

24. [b]

25. [b]

(b) Status bar

26. [d]

27. [b]

28. [d]

29. [b]

30. [C]

(c) Name Box

31. [a]

32. [a]

33. (d)

34. [b]

35. [b]

(d) Title bar

36. [d]

37. [a]

38. [d]

39. [a]

40. [a]

52.

एक वर्कशीट से सलेक्टेड रेंज के डाटा को दूसरी वर्कशीट में ड्रैग

41. [b]

42. [d]

43. [C]

44. [a]

45. [b]

करने के लिए.

की का उपयोग करते है।

46. [b]

47. [C]

48. [b]

49. [C]

50. [a]

(a) Tab

(b) Alt

51. [C]

52. [d]

53. (a)

54. [a]

55. [b]

(c) Shift

(d) Ctrl

56. [b]

57. [a]

58. (cl

59. [b]

60. [d]

53.

कॉलम D व E के बीच में एक और कॉलम को इन्सर्ट करने के

लिए आप किस कॉलम को सलेक्ट करेंगे?

उपर्युक्त प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या देखने के लिए QR Code स्कैन

(a) select column E

करें-

(b) select column D

(c) select column E, F, G

(d) select column D, E, F

54.

(a) रिव्यू

(b) डाटा

(d) इन्सर्ट

निम्नलिखित में से किस टैब में प्रूफिंग टूल्स होते हैं?

(c) व्यू

55. एक्सेल वर्कशीट में लिखे जाने वाले नंबर / संख्याओं का

डिफ़ॉल्ट अलाइनमेंट होता है-

(a) लेफ्ट (c) सेंटर

56.

(b) राईट (d) इनमें से कोई नहीं

एक प्रकार के लेबल होते हैं, जो कि एक चार्ट में प्लॉट की जाने वाली विभिन्न सीरीज को चिह्नित करने के लिए उपयोग में लिए

जाते हैं-

(a) टेबल

(c) फॉर्मूला

57.

(b) लिजेंड्स (d) टेक्स्ट बॉक्स

किसी फंक्शन में अपेक्षित वैल्यू इन्सर्ट नहीं होने पर कौन-सी

एरर शो होती है?

(a) ###

(c) #VALUE!

(b) #NULL!

(d) None

433

000

शास्त्रीय नृत्य व भाषाएँ

विविध

नृत्य का सबसे पहला उल्लेख भरतमुनि की प्रसिद्ध पुस्तक 'नाट्य शास्त्र' में मिलता है तथा आचार्य नंदिकेश्वर के 'अभिनय दर्पण' व शारंगदेव के 'संगीत रत्नाकार' नामक ग्रन्थों में भी नृत्य का उल्लेख मिलता है।

संगीत नाटक अकादमी के अनुसार भारत में 8 पारम्परिक शास्त्रीय नृत्य हैं। भारत के शास्त्रीय नृत्य

1.

भरतनाट्यम

भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से जन्मी इस नृत्य शैली का विकास तमिलनाडु व उसके आस-पास के क्षेत्रों में हुआ था।

भरतनाट्यम को सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है।

इस नाट्य शैली के तंजौर, काँचीपुरम व पण्डलूर प्रसिद्ध घराने हैं। भरतनाट्यम को दाशीअट्टम व अग्निनृत्य भी कहा जाता हैं।

इस नृत्य को पुनर्जीवित करने का श्रेय ई. कृष्ण अय्यर और रूक्मणी देवी अंरुडेल को दिया जाता है।

भरतनाट्यम के प्रमुख नर्तक

पद्मा सुब्रह्मण्यम (पद्म विभूषण - 2024), वैजयंतीमाला बाली (पद्म | विभूषण - 2024 ) यामिनी कृष्णमूर्ति (पद्म विभूषण - 2016), सोनल मानसिंह (पद्म विभूषण - 2003), शोभना चन्द्रकुमार (पद्म भूषण 2025) टी. बाला सरस्वती (पद्म विभूषण 1977), लीला सैमसन, मालविका सरुक्कई, पद्मिनी रामचन्द्र ( प्रियदर्शिनी), मल्लिका साराभाई, मृणालिनी साराभाई।

2. कत्थक

कत्थक का नाम 'कथिका' अर्थात् 'कथा' शब्द से लिया गया है।

यह नाट्य शैली मध्य भारत के उत्तर प्रदेश तथा उसके आस-पास के क्षेत्रों में उभरी थी।

इस नाट्य शैली के लखनऊ, जयपुर, रामगढ़ व बनारस प्रसिद्ध घराने हैं। 20वीं सदी के प्रारंभ में इस नृत्य शैली को पुनर्जीवित करने का श्रेय कालका प्रसाद महाराज व लेडी लीला सोखे को दिया जाता है।

कत्थक के प्रमुख नर्तक

कुमुदिनी लाखिया (पद्म विभूषण - 2025) बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, शम्भू महाराज, सुखदेव महाराज, दयमंती जोशी, सितारा देवी, शोभना नारायण, गोपीकृष्णन, मालविका सरकार, चन्द्रलेखा, बिन्दादीन महाराज, कालिका प्रसाद, विद्या गौरी अड़कर, स्वप्न सुन्दरी ।

3. कुचिपुड़ी

यह नाट्यशैली आन्ध्र प्रदेश में विकसित हुई।

• कुचिपुड़ी नृत्य विधा का नाम आन्ध्र प्रदेश के एक गाँव कुरसेल्वापुरी या

कुचेलापुरम् से व्युत्पन्न हुआ है।

इस नाट्यशैली के आराध्य देव शिव हैं।

कुचिपुड़ी नृत्य को पुनर्जीवित करने का श्रेय बाला सरस्वती व रागिनी

देवी को दिया जाता है।

कुचिपुड़ी के प्रमुख नर्तक

यामिनी कृष्णमूर्ति (पद्म विभूषण-2016), अपर्णा सतीसन, लक्ष्मी नारायण शास्त्री, राधा रेड्डी, राजा रेड्डी, पद्मजा रेड्डी, शोभा नायडू, वेदान्तम सत्यनारायण, इन्द्राणी रहमान।

4. कथकली

यह नाट्य शैली केरल व उसके आस-पास के क्षेत्रों में विकसित हुई है। इस नृत्य विधा को 'पूर्व का गाथा गीत' कहा जाता है।

कथकली नाट्य शैली को पुनर्जीवित करने का श्रेय राजा मुकुंद के संरक्षण में प्रसिद्ध मलयाली कवि वल्लधोल नारायण मेनन को दिया जाता है।

कथकली के प्रमुख नर्तक

गुरुकुंजु कुरूप, शांता राव, कृष्णन कुट्टी गोपीनाथ, कृष्ण नायर, रीता गांगुली, मृणालिनी साराभाई, उदयशंकर, आनंद शिवरामन 5. मोहिनीअट्टम

+

केरल का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य मोहिनीअट्टम शब्द का अर्थ है 'मोहिनी' अर्थात् 'सुन्दर नारी' और 'अट्टम' अर्थात् 'नृत्य' यानी 'सुन्दर नारी का नृत्य' । यह नृत्य विधा विष्णु के मोहिनी अवतार और नृत्य की लास्य शैली से जुड़ी है।

मोहिनी अट्टम नाट्य शैली को पुनर्जीवित करने का श्रेय मलयाली कवि वल्लथोल नारायण मेनन व कल्याणी अम्मा को दिया जाता है।

मोहिनीअट्टम के प्रमुख नर्तक

सुनंदा नायर, माधुरी अम्मा, तारा निडीगाडी, जयप्रभा मेनन, श्रीदेवी, कलामंडलम क्षमवती, गीता गायक, भारती शिवाजी, रागिनी देवी, हेमामालिनी, डॉ. सुनंदा नायर ।

6. ओडिसी

+

इस नृत्य शैली का उद्भव ओडिशा व इसके आस-पास के क्षेत्र में हुआ था। इस नृत्य शैली के सबसे प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण ओडिशा की उदयगिरि गुफा से मिले हैं। ओडिसी नृत्य को इन्द्राणी रहमान को

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाने का श्रेय चार्ल्स फैब्री तथा जाता है।

ओडिसी के प्रमुख नर्तक

किरण सहगल, गुरु पंकज चरणदास, कालीचरण पटनायक, गुरु केल चरण महापात्रा, सोनल मानसिंह, माधवी मुदगल, शेरीन लोवेन (अमेरिका), इन्द्राणी रहमान।

7. मणिपुरी

यह नाट्य शैली मणिपुर व उसके आस-पास के क्षेत्रों में विकसित हुई है। यह पूर्णत: भक्ति आधारित नृत्य रूप है। (वैष्णववाद )

मणिपुरी नृत्य के शिक्षकों को शान्ति निकेतन में आमंत्रित करके रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस नृत्य को मणिपुर के बाहर लोकप्रिय बनाया। मणिपुरी के प्रमुख नर्तक

झावेरी बहनें (दर्शना, नयना, स्वर्णा, रंजना ), गुरु बिपिन सिंह, नल कुमार सिंह, गुरु अमली सिंह, सविता मेहता, बिम्बावती, निर्मला मेहता, राजकुमार सिंह, जीत सिंह, एल बिनो देवी, राजा भागचन्द्र । 8. सत्त्रिया

इस नृत्य शैली का उत्पत्ति असम व उसके आस-पास के क्षेत्रों में हुआ। इस नृत्य शैली की उत्पत्ति का श्रेय असम के भक्ति संत शंकरदेव को दिया जाता है।

434:

सत्त्रिया के प्रमुख नर्तक

उत्कर्ष प्रकाशन

जतिन गोस्वामी (पद्म भूषण - 2025 ), गहन चंद्रा गोस्वामी, इन्दिरा पी.पी. बोहरा, प्रदीप चालिहा, शारोदी सौकिया, परमान्दा बारबयान, गोस्वामी मणिक बारबयान, प्रभात शर्मा, भावानंद बारबयान।

छऊ नृत्य

• इस नृत्य शैली का उद्भव पश्चिम बंगाल, झारखण्ड व ओडिशा में हुआ था। यह तीन शैलियों में हैं-

अजंता की गुफाएँ

आगरा का किला

ताज महल

विश्व धरोहर

राज्य

मान्यता वर्ष

महाराष्ट्र

1983

उत्तर प्रदेश

1983

उत्तर प्रदेश

1983

एलोरा की गुफाएँ कोणार्क सूर्य मंदिर

महाराष्ट्र

1983

ओडिशा

1984

| महाबलीपुरम में स्मारकों का समूह

तमिलनाडु

1984

1.

पुरूलिया (पश्चिम बंगाल)

2. सरायकेला (झारखण्ड)

3. मयूरभंज (ओडिशा)

नोट:-संस्कृति मंत्रालय ने छऊ नृत्य को भी भारत का शास्त्रीय नृत्य माना है। छऊ नृत्य को वर्ष 2010 में यूनेस्कों की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया।

भारत की भाषाएँ

भाषा शब्द संस्कृत के 'भाष्' धातु से बना है जिसका अर्थ है- 'वाणी को व्यक्त करना'। भाषा के द्वारा मानव के भावों, विचारों तथा भावनाओं को व्यक्त किया जाता है।

प्राचीन भारत में आर्य भाषा बोली जाती थी। इसी भाषा से हमारे देश में अन्य भाषाओं का विकास हुआ।

संविधान में भाषा का उल्लेख-

भारतीय संविधान के भाग-17 में अनुच्छेद-343 से 351 तक राजभाषा संबंधी प्रावधान हैं।

नोट भारतीय संविधान के अधीन किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है। हिन्दी को केवल राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची भारत की भाषाओं से संबंधित है इस अनुसूची में 22 भाषाओं का उल्लेख है।

भारत की शास्त्रीय भाषाएँ-

भारत की शास्त्रीय भाषाओं का विचार सबसे पहले वर्ष 2004 में पेश किया गया था जो अब तक 11 भारतीय भाषाओं को शास्त्रीय भाषा

हुमायूँ का मकबरा कुतुब मीनार

भारत के पर्वतीय रेलवे- I. दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे II. नीलगिरि माउंटेन रेलवे III. कालका-शिमला रेलवे महाबोधि मंदिर परिसर

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1985

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

असम

1985

मानस वन्यजीव अभयारण्य

असम

1985

गोवा के चर्च और कॉन्वेंट

गोवा

1986

हम्पी में स्मारकों का समूह

कर्नाटक

1986

फतेहपुर सीकरी

उत्तर प्रदेश

1986

खजुराहो के स्मारकों का समूह

मध्य प्रदेश

1986

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1987

एलिफेंटा की गुफाएँ

महाराष्ट्र

1987

पत्तदकल के स्मारकों का समूह

कर्नाटक

1987

महान जीवित चोल मंदिर

तमिलनाडु

1987, 2004

नंदा देवी एवं फूलों की घाटी राष्ट्रीय

उत्तराखंड

1988, 2005

उद्यान

साँची का बौद्ध स्तूप

मध्य प्रदेश

1989

नई दिल्ली

1993

नई दिल्ली

1993

1. पश्चिम बंगाल

II. तमिलनाडु

1999, 2005,

III. हिमाचल

2008

प्रदेश

बिहार

2002

का दर्जा प्राप्त है।

भीमबेटका पाषाण आश्रय

मध्य प्रदेश

2003

शास्त्रीय भाषा

राज्य

मान्यता वर्ष

चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्त्व उद्यान

गुजरात

2004

तमिल

तमिलनाडु

2004

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस

महाराष्ट्र

2004

संस्कृत

कर्नाटक (शिवमोगा)

2005

लाल किला

नई दिल्ली

2007

तेलुग

आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना

2008

जयपुर

जंतर मंतर

कन्नड़

कर्नाटक

2008

2010

(राजस्थान )

मलयालम

केरल

2013

उड़िया

ओडिशा

2014

पश्चिमी घाट

गुजरात से केरल

2012

तक

मराठी

__महाराष्ट्र

2024

राजस्थान के पहाड़ी किले-

असमिया

असम

2024

1. चित्तौड़गढ़ किला

बंगाली

पश्चिम बंगाल

2024

II. कुम्भलगढ़ किला

पाली

2024

III. रणथंभौर किला

राजस्थान

2013

प्राकृत

2024

IV. आमेर किला

V. जैसलमेर किला

भारतीय विश्व धरोहर

भारत में अब कुल 43 विश्व धरोहर संपत्तियाँ हैं, जिनमें 35 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित संपत्ति शामिल हैं।

| VI. गागरोण किला

ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान

हिमाचल प्रदेश

2014

रानी की वाव

गुजरात

2014

नालंदा महाविहार

बिहार

2016

कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान

सिक्किम

2016

435

उत्कर्ष प्रकाशन

कार्बुजियर का वास्तुशिल्प कार्य

चंडीगढ़

2016

अहमदाबाद शहर

गुजरात

2017

मध्य प्रदेश

विक्टोरियन गोथिक और आर्ट

डेको एन्सेम्बल्स

मुंबई (महाराष्ट्र)

2018

तमिलनाडु

जयपुर शहर

राजस्थान

2019

रुद्रेश्वर (रामप्पा मंदिर

तेलंगाना

केरल

2021

धोलावीरा सभ्यता

गुजरात

2021

शांति निकेतन

पश्चिम बंगाल

2023

असम

होयसल मंदिर समूह -

1. बेलूर का चेन्नाकेशव मंदिर

आन्ध्र प्रदेश

कर्नाटक

II. हलेबिड का होयसलेश्वर मंदिर

2023

तेलगांना

III. सोमनाथपुरका केशव मंदिर

ओडिशा

चराईदेव मोईदाम

असम

2024

भारतीय मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत

उत्तर प्रदेश

विरासत

मान्यता वर्ष

वैदिक मंत्रोच्चारण की परंपरा

2008

छत्तीसगढ़

रामलीला, रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन

2008

कुटियाट्टम, संस्कृत रंगमंच केरल

2008

प्रदेश

रम्माण, भारत के गढ़वाल हिमालय का धार्मिक त्योहार

2009

त्रिपुरा

और अनुष्ठान रंगमंच उत्तराखण्ड

मुडिये, केरल का धार्मिक रंगमंच और नृत्य नाटिका

2010

कर्नाटक

राजस्थान के कालबेलिया लोक गीत और नृत्य

2010

छऊ नृत्य - पश्चिम बंगाल, झारखण्ड व ओडिशा

2010

हरियाणा

लद्दाख का बौद्ध जप भारत में पवित्र बौद्ध ग्रंथों का पाठ

2012

मणिपुर का संकीर्तन, अनुष्ठान गायन, ढोल बजाना और नृत्य

2013

गुजरात

जंडियाला गुरु, पंजाब के ठठेरों के बीच बर्तन बनाने का

2014

पारंपरिक पीतल और ताँबे का शिल्प

हिमाचल प्रदेश

योग

2016

मणिपुर

नवरोज़

2016

कुंभ मेला इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक

उत्तराखण्ड

2017

कोलकाता में दुर्गा पूजा

2021

जम्मू कश्मीर

गरबा नृत्य- गुजरात

2023

000

त्योहार, महोत्सव व मेले

महोत्सव / त्योहार / मेले

अरुणाचल

राजस्थान

पश्चिम बंगाल

बिहार

निमाड़ी मिर्ची महोत्सव, मांडू महोत्सव, खजुराहो महोत्सव, तानसेन महोत्सव, भगोरिया, घुड़ल्या, नीरजा, पीरबुधान

थाई सम

मक्कर विलक्कू, त्रिशूर पूरम, कलपथी रथ महोत्सव, अट्टूकल पोंगल, विशु, वल्लमकाली बोट रेस, धेय्यम, ओणम ।

वांचुआ, बिहु, मी दम-ना-फी, बेखो, अम्बूबाची मेला, जोनबील मेला, गज उत्सव

फ्लेमिंगो महोत्सव, कल्याणोत्सव, येल्लम्मा जतारा बथुम्बा, बोनालु, मेदराम जात्रा ।

धानुजात्रा, नुआखाई, रज पर्व, बालीयात्रा, कोणार्क महोत्सव

कजली महोत्सव, कालिंजर महोत्सव, ताज महोत्सव, गंगा महोत्सव, शाकम्भरी माता मेला, बटेश्वर मेला ।

हरेली, भोजली, छेर छेरा महोत्सव, मडई महोत्सव मोनपा उत्सव, ड्री उत्सव, चचिन चराई उत्सव, , सियांग उनिंग उत्सव, लोसर, सोलुंग महोत्सव ।

केर पूजा, खार्ची पूजा, गरिया / गडिया पूजा, होजागिरी महोत्सव, खम्पूई ।

कम्बाला, हम्पी महोत्सव, नाडा हब्बा, कैलपोध, उगादि महोत्सव

सूरजकुण्ड मेला, गीता महोत्सव, गुग्गानामी, सांग महोत्सव |

मोढेरा महोत्सव, पतंग महोत्सव, उत्तरायण, रण महोत्सव, खादी माटीकला उत्सव, माधवपुर मेला । मिंजर मेला, नलवाड़ी, गोची, हालदा, साजो

लाई हरोबा, शंगाई महोत्सव, याओशांग महोत्सव, चोंगवा महोत्सव, कांगजात्रो ।

फूलदेई, अंडूरी महोत्सव, हरेला महोत्सव।

बंगस बेली महोत्सव, हेराथ के चीथ, ट्यूलिप महोत्सव, सिंधन स्नो महोत्सव, खीर भवानी मेला ।

गणगौर, ऊँट महोत्सव, मरु महोत्सव, कपिल मुनि मेला, मारवाड़ महोत्सव, लक्खी मेला पुष्कर मेला, फूलडोल मेला |

पोइला वैशाख, गंगासागर मेला, पौष ��क्रांति, दुर्गा पूजा, जगधात्री पूजा, डोल यात्रा, छऊ पुरूलिया। छठ पूजा, बिहूला, करमा साम चकेवा, जीतिया, सोनपुर मेला

राज्य

झारखण्ड

सरहुल त्योहार, भगता परब, श्रावणी, फगुआ, सोहराय

मिजोरम

चाचा कूट, एन्थूरियम, मिम कूट ।

मेघालय

वांग्ला, नोंगक्रेम, बेहदीखलम, चेरी ब्लॉसम

पंजाब

बैसाखी, लोहड़ी, गुरु पर्व।

महाराष्ट्र

काला घोड़ा महोत्सव, विठोवा, गुड़ी पड़वा

लद्दाख

लोसर, हेमिस गोम्पा, मोनलम चैलेमो

नागालैण्ड

हॉर्नबिल महोत्सव, येमशे, मोआसू, सेनक्रेई

दिल्ली

सिक्किम लोसांग, भूमचू, सागा दावा, सकेवा, सोनम लोसर

ड्रोन उत्सव, बसंत महोत्सव, खुशहाली महोत्सव, हरियाली महोत्सव |

गोवा

शिग्मो महोत्सव, साओ जोजोआ, चिकल कालो महोत्सव

000

436)

नोबेल पुरस्कार

उत्कर्ष प्रकाश

पुरस्कार व सम्मान

• यह विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। अल्फ्रेड नोबेल (जन्म स्थान स्टॉकहोम, 1833 ) की स्मृति में प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को नोबेल फाउण्डेशन द्वारा दिया जाता है।

वर्ष 1901 से 6 क्षेत्रों भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, चिकित्सा, अर्थशास्त्र, साहित्य तथा शांति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

नोबेल पुरस्कार के विजेता को एक स्वर्ण पदक, डिप्लोमा, स्वीडन की नागरिकता में एक्सटेंशन तथा एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर की धनराशि प्रदान की जाती है।

नोट :-शांति का नोबेल पुरस्कार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता जबकि शेष पुरस्कार स्टॉकहोम (स्वीडन) में दिए जाते हैं।

भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता

मेनबुकर पुरस्कार प्राप्तकर्ता भारतीय

कृति

लेखक

वी. एस. नायपॉल सलमान रुश्दी

वर्ष

इन ए की स्टेट

1971

मिडनाइट चिल्ड्रन

1981

अरूंधती रॉय

गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स

1997

किरण देसाई

द इनहेरीटेंस ऑफ लॉस

2006

अरविन्द अडिगा

द व्हाइट टाइगर

2008

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार

यह पुरस्कार फिलिपींस के तृतीय राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की स्मृति में वर्ष 1958 से प्रदान किया जा रहा है।

यह पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार को एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। इस पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता आचार्य विनोबा भावे (1958) थे।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, 2023 के 65वें संस्करण में चार एशियाई लोगों को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया, जिनमें भारत से डॉ. रवि कन्नन हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार

भारत रत्न

नाम

वर्ष

क्षेत्र

रवीन्द्रनाथ टैगोर

1913

साहित्य

चन्द्रशेखर वेंकटरमन

1930

भौतिकी

हरगोविन्द खुराना

1968

चिकित्सा

मदर टेरेसा

1979

शांति

सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर

1983

भौतिकी

अमर्त्य सेन

1998

अर्थशास्त्र

वी. एस. नायपॉल

2001

साहित्य

आर. के. पचौरी

2007

शांति

वेंकटरमन रामकृष्णन

2009

रसायन

कैलाश सत्यार्थी

2014

शांति

अभिजीत बनर्जी

2019

अर्थशास्त्र

पुलित्जर पुरस्कार

यह पुरस्कार अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकारिता का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह पुरस्कार न्यूयॉर्क वर्ल्ड के प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की स्मृति में वर्ष 1917 से अमेरिका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

पुलित्जर पुरस्कार प्राप्तकर्ता भारतीय गोविन्द बिहारी लाल

1937

2000

2003

2011

भारत रत्न देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है जो कला, साहित्य, विज्ञान एवं सार्वजनिक सेवा या जीवन में असाधारण एवं अत्युत्तम कोटि की उपलब्धि हेतु दिया जाता है।

इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी।

यह अलंकरण कांस्य निर्मित पीपल के पत्ते के आकार का होता है। इस अलंकरण के मुख्य भाग पर सूर्य की आकृति अंकित है जिसके नीचे भारत रत्न शब्द चाँदी में खुदा होता है।

इसके पिछले भाग पर राष्ट्रीय चिह्न और इसके नीचे सत्यमेव जयते (जो मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है) लिखा होता है।

भारत रत्न विदेशी नागरिकों को भी प्रदान किया जाता है। जनता पार्टी सरकार द्वारा वर्ष 1977 में भारत रत्न तथा पद्म पुरस्कारों

को बन्द कर दिया गया था, किन्तु वर्ष 1980 में कांग्रेस सरकार ने पुनः शुरू किया। वर्ष 1980 में दोबारा शुरू होने पर इसे सर्वप्रथम मदर टेरेसा को दिया गया।

मूल प्रलेख में भारत रत्न को मरणोपरान्त देने का प्रावधान नहीं था। यह प्रावधान वर्ष 1966 के बाद जोड़ा गया।

नोट:-1992 में सुभाष चन्द्र बोस को भारत रत्न से मरणोपरान्त सम्मानित किया गया, लेकिन उनकी मृत्यु विवादित होने के कारण भारत सरकार ने यह पुरस्कार वापस ले लिया। यह पुरस्कार वापस लिए जाने का एक मात्र उदाहरण है।

भारतरत्न प्राप्तकर्ता

झुम्पा लाहिड़ी

गीता आनन्द

वर्ष

नाम

क्षेत्र

सिद्धार्थ मुखर्जी

1954

मेनबुकर अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

समाज सेवा

1954

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

समाज सेवा

• मैनबुकर अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार एक साहित्यिक पुरस्कार है।

1954

इसे अंग्रेजी में प्रकाशित या अनुवादित उपन्यास के लिए प्रत्येक दो वर्षों पर प्रदान किया जाता है।

डॉ. चन्द्रशेखर वेंकटरमन

विज्ञान एवं इंजीनियरिंग

1955

डॉ. भगवान दास

शिक्षा एवं साहित्य

इस पुरस्कार का प्रारम्भ वर्ष 1969 में हुआ इसकी पुरस्कार राशि

1955

पं. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया

समाज सेवा

60,000 पौण्ड है।

1955

पं. जवाहरलाल नेहरू

समाज सेवा

प्रथम पुरस्कार स्माइल कादरे (इंग्लैण्ड) को प्रदान किया गया था।

1957

पं. गोविन्द वल्लभ पंत

समाज सेवा

437

उत्कर्ष प्रकाशन

1958

डॉ. धोंधु केशव कर्वे

समाज सेवा

1961

डॉ. विद्यान चन्द्र रॉय

2019

चिकित्सा

भूपेन्द्र कुमार हजारिका (मरणोपरान्त)

कला

1961

समाज सेवा

2019

प्रणब मुखर्जी

समाज सेवा

1962

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

समाज सेवा

2024

कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

1963

डॉ. जाकिर हुसेन

समाज सेवा

1963

डॉ. पांडुरंग वामन काणे

2024

साहित्य सेवा

एम.एस. स्वामीनाथन (मरणोपरान्त)

विज्ञान एवं

इंजीनियरिंग

1966

लाल बहादुर

समाज सेवा

2024

पी. वी. नरसिम्हा राव (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

शास्त्री (मरणोपरान्त)

2024

लालकृष्ण आडवाणी

समाज सेवा

1971

इंदिरा गाँधी

समाज सेवा

2024 चौधरी चरण सिंह (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

1975

वराहगिरी वेंकटगिरी

समाज सेवा

पद्म पुरस्कार

1976

कुमारस्वामी कामराज

समाज सेवा

1980

मदर टेरेसा

समाज सेवा

1983

आचार्य विनोबा भावे

समाज सेवा

पद्म पुरस्कार वर्ष 1954 में प्रारम्भ किए गए थे। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है- 1. पद्म विभूषण

(मरणोपरान्त)

2. पद्म भूषण

1987

खान अब्दुल गफ्फार खान

समाज सेवा

1988

गोपालन रामचन्द्रन (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

डॉ. भीमराव अम्बेडकर

1990

(मरणोपरान्त)

समाज सेवा

1990

डॉ. नेल्सन मंडेला

समाज सेवा

1991

राजीव गाँधी (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

सरदार वल्लभभाई पटेल

1991

समाज सेवा

(मरणोपरान्त)

3. पद्म श्री

ये पुरस्कार सभी प्रकार की गतिविधियों जैसे कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल-कूद, चिकित्सा, सामाजिक कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, सार्वजनिक मामले, सिविल सेवा, व्यापार तथा उद्योग इत्यादि में विशिष्ट तथा असाधारण उपलब्धियों, सेवाओं के लिए प्रदान किए जाते हैं। वर्ष 2025 के लिए 25 जनवरी, 2025 को 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण एवं 113 पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की गई।

7 पद्म विभूषण

1991

मोरारजी रणछोड़जी देसाई

समाज सेवा

नाम

क्षेत्र

राज्य / देश

1992

मौलाना अबुल कलाम आजाद

दुव्वुर नागेश्वर रेड्डी

चिकित्सा

तेलंगाना

(मरणोपरान्त)

समाज सेवा

जगदीश सिंह खेहर

सार्वजनिक मामले

चंडीगढ़

1992

जे. आर. डी. टाटा

उद्योग एवं व्यापार

कुमुदिनी लाखिया

कला

गुजरात

1992

सत्यजीत रे

कला (सिनेमा)

लक्ष्मीनारायण

कला

कर्नाटक

1997

गुलजारी लाल नंदा (मरणोपरान्त)

समाज सेवा

सुब्रमण्यम

अरुणा आसफ अली

एम. टी. वासुदेवन नायर

1997

(मरणोपरान्त)

समाज सेवा

साहित्य व शिक्षा

केरल

(मरणोपरांत)

1997

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

विज्ञान एवं

ओसामु सुजुकी

इंजीनियरिंग

(मरणोपरांत)

व्यापार व उद्योग

जापान

1998

एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी

कला

1998

चिदम्बरम सुब्रह्मण्यम

समाज सेवा

शारदा सिन्हा (मरणोपरांत)

कला

बिहार

1999

1999

1999

जयप्रकाश नारायण (मरणोपरान्त)

गोपीनाथ बोरदोलोई

समाज सेवा

वीरता पुरस्कार

अमर्त्य सेन

शिक्षा एवं साहित्य

समाज सेवा

1999

रवि शंकर

कला

2001

लता मंगेशकर

कला

2001

बिस्मिल्लाह खान

कला

2008

भीमसेन जोशी

कला

2014

सी. एन. आर. राव

विज्ञान एवं

इंजिनियरिंग

2014

सचिन तेंदुलकर

+

खेल

2015

मदन मोहन मालवीय

समाज सेवा

2015

अटल बिहारी वाजपेयी

समाज सेवा

नानाजी देशमुख

2019

(मरणोपरान्त)

समाज सेवा

परमवीर चक्र परमवीर चक्र देश का सर्वोच्च सैन्य अलंकरण है। यह सम्मान युद्ध क्षेत्र में अदम्य साहस तथा परम शूरता का परिचय देने पर दिया जाता है। यह पुरस्कार तीनों सेनाओं के वीरों को समान रूप से दिया जाता है।

पहला परमवीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा को प्रदान किया गया। महावीर चक्र महावीर चक्र युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों तथा असैनिकों को असाधारण शौर्य तथा वीरता के लिए दिया जाता है। परमवीर चक्र के पश्चात् यह द्वितीय श्रेणी का वीरता पुरस्कार है।

-

वीर चक्र यह भी युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों को असाधारण वीरता या बलिदान हेतु दिया जाता है। अशोक चक्र यह शांतिकाल में दिया जाने वाला वीरता सम्मान है।

यह सम्मान सैनिकों और गैर-सैनिकों को दिया जाता है। इस सम्मान की स्थापना वर्ष 1952 में हुई।

438

उत्कर्ष प्रकाशन

कीर्ति चक्र यह शांतिकाल में दिया जाने वाला वीरता पदक है। यह सम्मान सैनिकों तथा गैर सैनिकों को दिया जाता है।

शौर्य चक्र यह भी शांति के समय दिए जाने वाला वीरता पदक है। यह पुरस्कार सैनिकों तथा गैर सैनिकों को असाधारण शौर्य एवं अदम्य साहस प्रदर्शित करने के लिए दिया जाता है।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

• दादा साहेब फाल्के पुरस्कार का प्रारम्भ उनके जन्म दिवस पर वर्ष 1969 से हुआ।

यह सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है।

यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है।

प्रथम दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देविका रानी को दिया गया था। 53वाँ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार वहीदा रहमान को दिया गया। 54वाँ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिथुन चक्रवर्ती को 8 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुए 70वें राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार समारोह में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वर्तमान में इस पुरस्कार के अन्तर्गत विजेता को 10 लाख रुपये नकद, स्वर्ण कमल व एक शॉल प्रदान की जाती है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।

संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा तथा अंग्रेजी के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है।

इस पुरस्कार में 11 लाख रुपये, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

नोट :- संविधान क��� 8वीं अनुसूची में अंग्रेजी भाषा के न होते हुए भी वर्ष 2018 में पहली बार अंग्रेजी साहित्य ( अमिताव घोष) को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया है।

प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में जी शंकर कुरूप को दिया गया। 57 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार दामोदर मौजो को उनकी कृति 'कर्मेलिन' के लिए दिया गया था।

58वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार जगतगुरु रामभद्राचार्य तथा गुलजार को दिया

गया।

सरस्वती पुरस्कार

के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला यह साहित्य पुरस्कार है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्य के लिए दिया जाता है। सरस्वती पुरस्कार का प्रारम्भ वर्ष 1991 में किया गया।

प्रथम सरस्वती पुरस्कार हिन्दी के साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन को दिया गया था।

33वाँ सरस्वती सम्मान प्रभा वर्मा (मलयालम भाषा के उपन्यास रौद्र सात्विकम के लिए)

व्यास पुरस्कार

+

के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला यह साहित्य पुरस्कार है। इस पुरस्कार में 4 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व पट्टिका देकर सम्मानित किया जाता है।

व्यास पुरस्कार देने की शुरुआत वर्ष 1991 में की गई थी।

प्रथम पुरस्कार हिन्दी के साहित्यकार डॉ. राम विलास शर्मा को दिया गया था।

34वाँ व्यास सम्मान सूर्यबाला ( कृति कौन देश को वासी: वेणु की डायरी)

प्रमुख खेल पुरस्कार

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार

यह पूर्व में राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाता था। यह पुरस्कार चार वर्ष की अवधि में एक खिलाड़ी द्वारा खेल के क्षेत्र में शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च खेल पुरस्कार है।

इस पुरस्कार में 25 लाख रुपये, एक पदक व प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1991-1992 में की गई थी।

यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले खिलाड़ी विश्वनाथन आनन्द (शतरंज) थे।

मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार 2024

1. मनु भाकर

निशानेबाजी

2. डी. गुकेश शतरंज

3. हरमनप्रीत सिंह- • हॉकी

4. प्रवीण कुमार पैरा एथलीट

अर्जुन पुरस्कार

• यह पुरस्कार वर्ष 1961 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल आयोजनों में उत्कृष्ट उपलब्धि की पहचान करने के लिए शुरू किया गया था।

यह पुरस्कार पिछले चार वर्षों की अवधि में अच्छा प्रदर्शन और नेतृत्व करने, खेल कौशल और अनुशासन की भावना को देखकर दिया जाता है। इस पुरस्कार में 15 लाख रुपये, अर्जुन की एक कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

• वर्ष 2024 में 34 व्यक्तियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। द्रोणाचार्य पुरस्कार

• यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा वर्ष 1985 से खेल संबंधी प्रशिक्षण में उत्कृष्टता प्रदान करने के लिए दिया जाता है।

यह पुरस्कार प्रशिक्षकों को निरन्तर समय पर उत्कृष्ट और मेधावी कार्य करने तथा खिलाड़ियों को अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सक्षम बनाने के लिए दिया जाता है।

इस पुरस्कार में 15 लाख रुपये, द्रोणाचार्य की एक कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

वर्ष 2024 में 5 व्यक्तियों को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया

गया।

ध्यानचनंद पुरस्कार

इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2002 में हुई।

यह पुरस्कार खिलाड़ियों द्वारा अपने प्रदर्शन से खेलों में योगदान देने और सेवानिवृत्ति के बाद खेल आयोजनों को प्रोत्साहित करने वालों को दिया जाता है।

इस पुरस्कार में 10 लाख रुपये, ध्यानचंद की प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र और समारोह पोशाक दी जाती है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी

इसकी शुरुआत वर्ष 1956-57 में की गई थी।

यह विश्वविद्यालय स्तर के खेल प्रदर्शन के लिए दी जाने वाली ट्रॉफी है। यह ट्रॉफी पिछले एक वर्ष की अवधि में "अंतर विश्वविद्यालय टूर्नामेंट" में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को दी जाती है।

वर्ष 2024 में चण्डीगढ़ विश्वविद्यालय को ओवरऑल विनर घोषित किया गया।

439

राज्य ओडिशा

पश्चिम बंगाल

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

छत्तीसगढ़ सिक्किम

अरुणाचल प्रदेश

नागालैण्ड

मणिपुर

मिजोरम

गोवा

कर्नाटक

आन्ध्र प्रदेश

लोक नृत्य

लोक नृत्य

घूमरा, दलखई, गोतिपुआ, डंडारी ।

उत्कर्ष प्रकाश

गम्भीरा, कीर्तन, धनुची, ब्रिता, बाउल, जात्रा, पुरलिया

छऊ।

सरायकेला छऊ, करमा, सरहुल, मुंडारी, मर्दाना झूमर, जानकी झूमर, दमकछ, छीटका।

जाट-जाटिन, बिदेशिया, झुमरी, झिझिया, धोबिया, बखो बखीनी।

जवारा, मटकी, फूल पत्ती, अहिराई, सेंटम

राउत, पिण्डवानी, पंथी, सुवा, गोर मारिया, नवारानी चू फाट, सिंगी छाम, याक छाम, रिचुनमा, मारूनी अजी लामी, पोन्गुस, रेखमा छलो, कोंगकी।

रंग्मा, छंग लो, खम्बालिम, जेलियांग, नुरलीम, चोंग, खवा ।

चापचार कूट, सरलमकाई, खुल्लम छेल्लम, जांग्टालम |

देखनी, फुगड़ी, शिग्मो, तंरग मेल, टोन्या मेल, माण्डी । यक्षगान, ढोलु कुनीथा, कर्गा, वीरगासे, बोलाक, सुग्गी कुनीथा ।

वीरनाट्यम, भामाकल्पम, छड़ी नृत्य, धमीशा, माधुरी, जंगमकथा / बुराकथा |

बुराकथा, धीमसा, बोनालु, माधुरी, लम्बाडी, पेरिनी तांडव, धोलू बोमलगा।

धेय्यम, मुडीयेट्ट, पदेयनी कोडियट्टम, कालीअट्टम, मदुल अट्टम, वेलाकली।

चरकूला, रासलीला, कजरी चाचरी, ख्याल, नटवरी, चौलर, नोटंकी ।

उत्तर प्रदेश

जम्मू कश्मीर

रउफ, हिकात, कूद, दमानी, मंदजाल ।

विश्व और भारत के प्रमुख संगठन

नाम

राष्ट्र संघ

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय संगठन

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम

खाद्य और कृषि संगठन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन

UNESCO

स्थापना

24 अक्टूबर, 1920

वर्ष 1965 5 जून, 1972 (पर्यावरण दिवस) 16 अक्टूबर, 1945

वर्ष 1919

मुख्यालय

जिनेवा (स्विट्जरलैंड) न्यूयॉर्क (USA) नैरोबी (केन्या)

रोम (इटली) जिनेवा (स्विट्जरलैंड) पेरिस (फ्रांस) जिनेवा (स्विट्जरलैंड)

16 नवम्बर, 1945

थांगटा, पुंगचोलम, संकीर्तन, शिमलम, लाई हरोबा, नटरास, रासलीला, महारास

विश्व स्वास्थ्य संगठन

7 अप्रैल, 1948

NATO

4 अप्रैल, 1949

ब्रुसेल्स

(बेल्जियम)

जकार्ता

आसियान

वर्ष 1967

(इंडोनेशिया)

मनीला

एशियाई विकास बैंक

वर्ष 1966

(फिलीपींस)

काठमांडू

दक्षेस

वर्ष 1985

(नेपाल)

जिनेवा

विश्व व्यापार संगठन

1 जनवरी, 1995

तेलंगाना

(स्विट्जरलैंड)

ओपेक

वर्ष 1960

केरल

शंघाई सहयोग संगठन

वर्ष 1996

तमिलनाडु

कोलाट्टम, बोमइअट्टम, काई सिलाम्बम कुम्बी, मदुल अट्टम ।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ

वर्ष 1948

उत्तराखण्ड

असम

गुजरात हरियाणा

महाराष्ट्र

पुडुचेरी

लद्दाख

हिमाचल प्रदेश

मेघालय

राजस्थान

त्रिपुरा

भोटिया, रम्माण, चांचरी, छोलिया, थारू नृत्य, पांडव नृत्य, भद्रनाटी ।

बिहु, बागुरुम्बा, अंकियानाट, देवधानी, कोनाई, खेल गोपाल |

गरबा डांडिया, तिप्पाणी, भवई, गुरियन।

फाग, धमाल, स्वांग, खेरिया ।

छम नृत्य, थोड़ा, धमान, नटी, छपेली, थाली, चम्बा, डांगी।

लावणी, लेजिम, तमाशा, बोहड़ा, गफ्फा, कोली।

गराडी नृत्य ।

शोंडोल, जबरो, तुतनमो ।

नोगंक्रेन, लाहो, वांग्ला, बेहदीखलम।

गैर, गीदड़, कालबेलिया, घूमर, लूर, पणिहारी, चकरी, नेजा, तेरहताली

होजागिरी, गेरिया, डेलो, संगराई, गोलामुचालो ।

विकास बैंक (NABARD) भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)

(IUCN) Redcross

वियना (ऑस्ट्रिया) बीजिंग (चीन) ग्लेण्ड (स्विट्जरलैण्ड)

वर्ष 1863

जिनेवा (स्विट्जरलैण्ड)

भारत के प्रमुख संगठन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण

15 अगस्त, 1969

बेंगलुरु (कर्नाटक)

1 जनवरी, 1958

1 अप्रैल, 1935 12 जुलाई, 1982

नई दिल्ली मुम्बई (महाराष्ट्र)

2 अप्रैल, 1990

बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण

वर्ष 1999

12 अप्रैल, 1988

मुम्बई (महाराष्ट्र)

लखनऊ

(उत्तर प्रदेश) हैदराबाद (तेलंगाना)

मुम्बई (महाराष्ट्र)

440

उत्कर्ष प्रकाशन

भारतीय दूरसंचार विनियामक

20 फरवरी, 1997

नई दिल्ली

प्राधिकरण (TRAI)

केन्द्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी (नीरी) अनुसंधान संस्थान

नागपुर

भारतीय क्रिकेट नियन्त्रण बोर्ड (BCCI)

दिसम्बर, 1928

| केन्द्रीय कपास अनुसन्धान संस्थान

नागपुर

मुम्बई (महाराष्ट्र)

इंडियन सिक्योरिटी प्रेस

नासिक

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं

भारतीय मौसम वेधशाला

5 सितम्बर, 2008

नई दिल्ली

पुणे

मानक प्राधिकरण (FSSAI) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)

केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान

बीकानेर

1 सितम्बर, 1956 मुम्बई (महाराष्ट्र)

रमण अनुसंधान संस्थान

बेंगलुरु

पारिस्थितिकी विज्ञान केन्द्र

बेंगलुरु

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (BARC)

जनवरी, 1954

ट्राम्बे (मुम्बई)

भारतीय खगोल संस्थान

बेंगलुरु

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संस्थान

बेंगलुरु

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और

वर्ष 1961

नई दिल्ली

प्रशिक्षण परिषद (NCERT)

संस्थान

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसन्धान केन्द्र

सरदार पटेल नवीकरणीय ऊर्जा अनुसन्धान संस्थान

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान

केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान

कटक

भारत के अनुसंधान केन्द्र

कपड़ा उद्योग अनुसंधान संस्थान

मुख्यालय अजमेर

अहमदाबाद

आणन्द (गुजरात)

इंदौर

केन्द्रीय जूट प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान

केन्द्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान

| केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान

| केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान भारतीय लौह अनुसंधान संस्थान

केन्द्रीय तम्बाकू अनुसंधान संस्थान

केन्द्रीय भवन निर्माण अनुसंधान संस्थान भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान

केन्द्रीय ओषधि अनुसंधान संस्थान केन्द्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र

बैरकपुर

भावनगर

भोपाल

मैसूर

राँची

राजमुंदरी

रुडकी

लखनऊ

लखनऊ

लखनऊ

शिमला

श्रीहरिकोटा

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान

करनाल

राष्ट्रीय सरसों अनुसन्धान केन्द्र

इन्दिरा गाँधी परमाणु अनुसन्धान संस्थान

कलपक्कम

भारतीय चीनी तकनीकी संस्थान

कानपुर

भारतीय दलहन शोध संस्थान

कानपुर

केन्द्रीय नारियल अनुसंधान संस्थान

कासरगोड

केन्द्रीय भैंस अनुसन्धान संस्थान

कोशिकीय तथा आण्विक जीव विज्ञान केन्द्र सेन्टर फॉर डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग एण्ड डायग्नोस्टिक्स

सेवर (भरतपुर)

भारतीय मसाला अनुसन्धान संस्थान

कोझिकोड

भारतीय तिलहन अनुसन्धान संस्थान

हिसार

हैदराबाद

हैदराबाद

हैदराबाद

भारतीय सांख्यिकी संस्थान

कोलकाता

000

प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान

गाँधीनगर

राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र

गुड़गाँव

जीवाणु प्रौद्योगिकी संस्थान

चंडीगढ़

केन्द्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान

चेन्नई

केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसन्धान संस्थान (काजरी)

जोधपुर

शुष्क वन अनुसन्धान संस्थान (आफरी)

जोधपुर

जोहड़बीड़

राष्ट्रीय ऊँट अनुसन्धान संस्थान

(बीकानेर)

केन्द्रीय भेड़ और ऊन अनुसन्धान संस्थान

टोंक (राजस्थान)

| विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र

तिरुवनंतपुर

केन्द्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान

दुर्गापुर

प्रमुख खेल-खिलाड़ी

विभिन्न देशों के राष्ट्रीय खेल

देश का नाम

भारत पाकिस्तान इंग्लेण्ड ऑस्ट्रेलिया

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान

देहरादून

अमेरिका

राष्ट्रीय दृष्टिहीन विकलांग संस्थान

देहरादून

स्पेन

राष्ट्रीय खेल का

हॉकी

हॉकी

क्रिकेट

क्रिकेट

बेसबॉल

साण्ड युद्ध

केन्द्रीय वन अनुसंधान संस्थान

कनाडा

आइस हॉकी

भारतीय सर्वेक्षण विभाग

देहरादून

जापान

केन्द्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान

धनबाद

चीन

जूडो टेबल टेनिस

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान

नई दिल्ली

न्यूजीलैण्ड

रग्बी

भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान

नई दिल्ली

भूटान

तीरंदाजी

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण

नई दिल्ली

श्रीलंका

वॉलीबॉल

| केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान

नई दिल्ली

इण्डोनेशिया

बैडमिंटन

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण

नई दिल्ली

ईरान

कुश्ती

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद

नई दिल्ली

441

प्रमुख खेलों में खिलाड़ियों की संख्या

रग्बी फुटबॉल

15

हॉकी

11

क्रिकेट

11

फुटबॉल

11

खो-खो

09

बेसबॉल

09

जिम्नास्टिक

08

कबड्डी

07

नेटबॉल

07

वाटर पोलो

07

वॉलीबॉल

06

बास्केटबॉल

05

पोलो

04

टेबल टेनिस

1 या 2

टेनिस

1 या 2

बैडमिंटन

1

या 2

स्नूकर

01

प्रमुख खिलाड़ियों के उपनाम

उपनाम

हॉकी का जादूगर

फ्लाइंग सिख

उड़नपरी / गोल्डन गर्ल

लिटिल मास्टर

मास्टर ब्लास्टर

बंगाल टाइगर / दादा

उत्कर्ष प्रकाश

बैडमिंटन

बैडमिंटन की प्रमुख ट्रॉफियाँ- | सुदीरमन कप, उबेर कप, थॉमस

कप, नारंग कप, अमृत दीवान ट्रॉफी, चड्ढा कप, योनेक्स कप ।

हॉकी

बैडमिंटन के प्रमुख खिलाड़ी- सात्विक साईराज, पी. वी. सिन्धु, चिराग चन्द्रशेखर शेट्टी, रंकी रेड्डी

साइना नेहवाल, लक्ष्य सेन, किदांबी श्रीकांत, एस. एस. प्रणय |

हॉकी की प्रमुख ट्रॉफियाँ आगा खाँ कप, बेटन कप, रंगास्वामी कप, इन्दिरा गाँधी स्वर्ण कप, ध्यानचंद ट्रॉफी, सुल्तान अजलान शाह कप, सिंधिया गोल्ड कप, बेगम रसूल कप, मुरुगप्पा गोल्ड कप, वेलिंगटन कप, लेडी रतन टाटा ट्रॉफी

टेनिस

टेनिस की प्रमुख ट्रॉफियाँ- ग्रैण्ड स्लैम (विम्बलडन, फ्रेंच ओपन, यू.एस. ओपन, ऑस्ट्रेलियन ओपन), डेविस कप हाफमैन कप ।

टेनिस के प्रमुख खिल���ड़ी- नोवाक जोकोविच, रोजर फेडरर, सानिया मिर्जा, सेरेना विलियम्स, कार्लोस अल्कारेज, डेनियल मेदवेदेव, राफेल नडाल लिएंडर पेस, महेश भूपति, रोहन बोपन्ना, आर्यना सबालेंका, कोको गॉफ । शतरंज

शतरंज के प्रमुख खिलाड़ी- विश्वनाथन आनन्द, वैशाली रमेशबाबू, आदित्य सामंत, मैग्नस कार्लसन, डोम्माराजू गुकेश, कोनेरू हम्पी, आर. प्रग्गनानंद |

खिलाडी मेजर ध्यानचंद

मिल्खा सिंह

पी.टी. उषा सुनील गावस्कर

शतरंज की प्रमुख ट्रॉफियाँ- खेतान ट्रॉफी, लिम्का ट्रॉफी।

सचिन तेंदुलकर

सौरव गांगुली

कबड्डी

राहुल द्रविड़

के

टर्बनेटर

डींग एक्सप्रेस हरियाणा हरिकेन आयरन लेडी

हरभजन सिंह हिमा दास

नरवाल ।

कपिल देव

कर्णम मल्लेश्वरी

हिटमैन सुपर मोम

जेमी / द वॉल / मिस्टर रिलायबल

रोहित शर्मा मैरी कॉम खेल से संबंधित ट्रॉफियाँ व खिलाड़ी क्रिकेट

क्रिकेट की प्रमुख ट्रॉफियाँ- रणजी ट्रॉफी, सी. के. नायडू ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी, गावस्कर बॉर्डर ट्रॉफी चैंपियंस ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, शारजाह कप, एशेज

कप

क्रिकेट के प्रमुख खिलाड़ी- सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रोहित शर्मा, मोहम्मद शमी, सूर्यकुमार यादव, जसप्रीत बुमराह, हरमनप्रीत कौर ।

फुटबॉल

फुटबॉल की प्रमुख ट्रॉफियाँ- फीफा वर्ल्ड कप, बी.सी. राय ट्रॉफी, कनफेडरेशन कप, बेगम हजरत महल कप, कोपा कप, यूरो कप, डूरण्ड कप, संतोष ट्रॉफी, रोवर्स कप, सुब्रतो कप

फुटबॉल के प्रमुख खिलाड़ी- बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनल मैसी, नेमार किलियन एम्बापे, डियेगो मेराडोना, डेविड बेकहम ।

कबड्डी के प्रमुख खिलाड़ी पवन कुमार सहरावत, रितु नेगी, प्रदीप

तीरंदाजी के प्रमुख खिलाड़ी

तीरंदाजी

ओजस प्रवीण देवताले, अदिति गोपीचंद स्वामी, पार्थ सालुंखे, दीपिका कुमारी, शीतल देवी (पैरा-तीरंदाज ) ।

कुश् कुश्ती के प्रमुख खिलाड़ी अमन सहरावत, सुनील कुमार, अंतिम पंघाल, बजरंग पुनिया, सुशील कुमार, रवि कुमार दहिया, बबीता फोगाट, साक्षी मलिक, दीपक पुनिया ।

मुक्केबाजी

मुक्केबाजी के प्रमुख खिलाड़ी निखत जरीन, लवलीना बोरगोहेन, स्वीटी बोहरा, शिव थापा, नीतू घनघास, मैरीकॉम, विजेंदर सिंह | अन्य महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी

खिलाड़ी

दीपा कर्माकर अदिति अशोक

भवानी देवी पंकज आडवाणी

नीरज चोपड़ा

मीराबाई चानू

संजीता चानू जे���ेमी लालरिनुंग

खेल जिम्नास्टिक

गोल्फ तलवार बाजी

बिलियर्ड्स भाला फेंक

भारोत्तोलन

भारोत्तोलन

भारोत्तोलन

442

कर्णम मल्लेश्वरी पारुल चौधरी मुरली श्रीशंकर

दीक्षा डागर

अनुष अग्रवाल

दिव्यकृति सिंह

ऐश्वर्य प्रताप सिंह ईशा सिंह

अयहिका मुखर्जी

इलूरी अजय कुमार रेड्डी सुमित अंतिल देवेन्द्र झाझडिया सुंदर सिंह गुर्जर जीव मिल्खा सिंह

भाविना बेन पटेल अवनि लेखरा अभिनव बिन्द्रा

मनु भाकर हिमा दास

अचंत शरत कमल

रानी रामपाल पी. आर श्रीजेश

आर. अश्विन स्वप्निल कुशाले

सरबजोत सिंह

खिलाड़ी

सानिया मिर्जा

युवराज सिंह

सौरभ गांगुली

खिलाड़ी एवं उनकी पुस्तकें

सचिन तेंदुलकर विराट कोहली एडम गिलक्रिस्ट

पी.टी. उषा मेजर ध्यानचंद विश्वनाथन आनंद मैरीकॉम सायना नेहवाल

मिल्खा सिंह शाहीद अफरीदी

कपिल देव

मुथैया मुरलीधरन

उत्कर्ष प्रकाशन

भारोत्तोलन

व्यायाम

व्यायाम

गोल्फ

घुड़सवार

घुड़सवार (ड्रेसेज ) शूटिंग

शूटिंग टेबल टेनिस

ब्लाइंड क्रिकेट

जेवलिन थ्रो जेवलिन थ्रो

जैवलिन थ्रो

गोल्फ

टेबल टेनिस

निशानेबाजी

निशानेबाजी

निशानेबाजी

एथेलेटिक्स

टेबल टेनिस

हॉकी

हॉकी

क्रिकेट निशानेबाजी

निशानेबाजी

पुस्तक एस अगेंस्ट ओड्स

द टेस्ट ऑफ माई लाइफ ए सेंचुरी इज नॉट इनफ प्लेइंग इट माई वे

टु कलर्स

गोल्डन गर्ल

गोल

माइंड मास्टर

अनब्रेकेबल एन ऑटोबायोग्राफी प्लेइंग टू विन

आधुनिक ओलम्पिक खेल की शुरुआत 1896 ई. में यूनान के एथेंस शहर से हुई। इसका आयोजन प्रत्येक 4 वर्ष के अन्तराल पर होता है। अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (IOC) की स्थापना 1894 ई. सखोन में हुई थी। इसका मुख्यालय लोसाने (स्विट्जरलैण्ड) में है।

इस समिति के प्रथम अध्यक्ष डिमिट्रियास विकेलास (यूनान) थे तथा वर्तमान 9वें अध्यक्ष थॉमस बाख (जर्मनी) है।

अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति की पहली भारतीय महिला सदस्य नीता अम्बानी हैं।

ओलम्पिक ध्वज का सर्वप्रथम प्रयोग वर्ष 1920 के एण्टवर्प ओलम्पिक खेलों में किया।

ओलम्पिक मशाल जलाने की शुरुआत वर्ष 1928 एम्स्टर्डम (नीदरलैण्ड) ओलम्पिक से हुई।

23 जून को ओलम्पिक दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1948 से हुई। TV पर ओलम्पिक खेलों का पहला प्रसारण वर्ष 1960 के रोम (इटली) ओलम्पिक खेलों का हुआ था।

ध्वज के मध्य में पाँच चक्र एक-दूसरे से मिले हुए दर्शाए गए हैं, जो विश्व के 6 महाद्वीपों को दर्शाता हैं-

नीला चक्र हरा चक्र पीला चक्र लाल चक्र

-

यूरोप

ऑस्ट्रेलिया

-

एशिया

काला चक्र -

उत्तरी व दक्षिण अमेरिका अफ्रीका

एक ही ओलम्पिक में सर्वाधिक स्वर्ण पदक जीतने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के तैराक खिलाड़ी माइकल फेल्प्स हैं। माइकल फेल्प्स (गोल्डन सार्क) ने 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में 8 स्वर्ण पदक जीते थे। भारतीय ओलम्पिक परिषद को मान्यता वर्ष 1924 में और स्थापना वर्ष 1927 में हुई।

सर दोराबजी जमशेदजी टाटा इसके प्रथम अध्यक्ष थे। वर्तमान अध्यक्ष पी. टी. उषा और प्रधान सचिव राजीव मेहता है। भारत की ओर से ओलम्पिक में भाग लेने वाले प्रथम खिलाड़ी नॉर्मन प्रीचार्ड (एग्लो-इण्डियन ) थे।

ओलम्पिक में भाग लेने वाली प्रथम भारतीय महिला खिलाड़ी मेरी लीला राव हैं।

ओलम्पिक खेल में पदक जीतने वाले स्वतंत्र भारत के पहले खिलाड़ी के. डी. जाधव (कुश्ती) थे जिन्होंने वर्ष 1952 में हेलसिंकी ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता।

कर्णम मलेश्वरी ओलम्पिक में पदक जीतने वाली पहली महिला थी, जिन्होंने सिडनी ओलम्पिक (वर्ष 2000) में पदक जीता।

भारत ने ओलम्पिक खेलों में अब तक 10 स्वर्ण पदक जी���े जिनमें 8 हॉकी टीम तथा इसके अलावा अभिनव बिन्द्रा (निशानेबाजी) व नीरज चोपड़ा (जेवलिन थ्रो) ने स्वर्ण पदक जीते हैं।

विभिन्न देशों में ओलम्पिक खेलों का आयोजन

स्थान

एथेंस

द रेस ऑफ माई लाइफ

गेम चेंजर

वर्ष

देश

स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट

1896

यूनान

1900

पेरिस

फ्रांस

800

शेन वॉर्न सुरेश रैना

नॉ स्पिन

1904

सेंट लुइस

संयुक्त राज्य अमेरिका

बिलीव

1908

लंदन

ब्रिटेन

ओलम्पिक खेल

1912

स्टॉकहोम

स्वीडन

प्राचीन ओलम्पिक खेल यूनान के ओलम्पिया शहर में 776 ईसा पूर्व में प्रारम्भ हुआ।

1916

बर्लिन

जर्मनी

1920

एंटवर्प

बेल्जियम

443

उत्कर्ष प्रकाशन

1924

पेरिस

फ्रांस

1934

लंदन

1928

एम्सटर्डम

नीदरलैण्ड

1938

सिडनी

इंग्लेण्ड ऑस्ट्रेलिया

1932

लॉस एंजिल्स

संयुक्त राज्य अमेरिका

1950

ऑकलैंड

1936

बर्लिन

जर्मनी

1954

वैंकूवर

कनाडा

1940

टोक्यो

जापान

1958

कार्डिफ

ब्रिटेन

1944

लंदन

ब्रिटेन

1962

पर्थ

ऑस्ट्रेलिया

1948

लंदन

ब्रिटेन

1966

किंगस्टन

जमैका

1952

हेलसिंकी

फिनलैंड

1970

एडिनबरा

स्कॉटलैंड

1956

मेलबर्न

आस्ट्रेलिया

1974

क्राइस्टचर्च

न्यूजीलैंड

1960

रोम

इटली

1978

एड्मन्टन

कनाडा

1964

टोक्यो

जापान

1982

ब्रिस्बेन

ऑस्ट्रेलिया

1968

मैक्सिको सिटी

मैक्सिको

1986

एडिनबरा

स्कॉटलैंड

1972

म्यूनिख

जर्मनी

1990

ऑकलैंड

न्यूजीलैंड

1976

मॉट्रियल

कनाडा

1994

विक्टोरिया,

कनाडा

1980

मॉस्को

रूस

ब्रिटिश कोलंबिया,

1984

लॉस एंजिल्स

संयुक्त राज्य अमेरिका

1998

क्वालालम्पुर

मलेशिया

1988

सियोल

द. कोरिया

2002

मैनचेस्टर

इंग्लैंड

1992

बार्सिलोना

स्पेन

2006

मेलबर्न

ऑस्ट्रेलिया

1996

अटलांटा

संयुक्त राज्य अमेरिका

2010

नई दिल्ली

भारत

2000

सिडनी

ऑस्ट्रेलिया

2014

ग्लास्गो

स्कॉटलैंड

2004

एथेंस

यूनान

2018

गोल्डकोस्ट

ऑस्ट्रेलिया

2008

बीजिंग

चीन

2022

बर्मिंघम

इंग्लैंड

2012

लंदन

ब्रिटेन

2026

ग्लासगो

स्कॉटलैंड

2016

रियो डि जेनेरियो

ब्राजील

(प्रस्तावित)

2020

2024

टोक्यो पेरिस

जापान

फ्रांस

2028

लॉस एंजिल्स (प्रस्तावित)

2032

ब्रिस्बेन (प्रस्तावित)

संयुक्त राज्य अमेरिका ऑस्ट्रेलिया

नोट: प्रथम विश्व युद्ध के कारण वर्ष 1916 व द्वितीय विश्व युद्ध के कारण वर्ष 1940, 1944 के ओलम्पिक खेलों का आयोजन नहीं हो सका।

राष्ट्रमण्डल खेल (Commonwealth games )

राष्ट्रमण्डल खेलों को प्रारम्भ में 'ब्रिटिश एंपायर गेम्स' कहा जाता था। यह ओलम्पिक के बाद में विश्व की सबसे बड़ी खेल स्पर्धा है। इन खेलों का आयोजन प्राय: दो ओलम्पिक खेलों के मध्य किया जाता है, जिसे ओलम्पिक वर्ष कहा जाता है।

राष्ट्रमण्डल खेलों का मुख्यालय लंदन (इंग्लैण्ड) में है।

नोट:

• दूसरे विश्व युद्ध के कारण वर्ष 1942 व वर्ष 1946 के राष्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन नहीं हो सका।

• भारत ने राष्ट्रमण्डल खेलों के चार संस्करणों (1930, 1950, 1962 व 1982) को छोड़कर सभी में भाग लिया था।

एशियाई खेल-

एशियाई खेलों का प्रारम्भ वर्ष 1951 को नई दिल्ली में हुआ था। वर्ष 1982 में पुन: इन खेलों की मेजबानी भारत ने की थी। चमकता हुआ सुरज एशियाई खेलों का प्रतीक चिह्न है।

वर्ष

देश

भारत

2.

आयोजन स्थल

1951

नई दिल्ली

1954

मनीला

फिलीपींस

भारत ने सबसे पहले वर्ष 1934 के लंदन राष्ट्रमण्डल खेलों में भाग लिया था।

राष्ट्रमण्डल खेलों की शुरुआत वर्ष 1930 से हेमिल्टन (कनाडा) से हुई।

1958

टोकियो

जापान

1962

जकार्ता

इंडोनेशिया

1966

बैंकाक

थाइलैण्ड

राष्ट्रमण्डल खेल में भारत ने पहला स्वर्ण पदक वर्ष 1958 में महान्

1970

बैंकाक

थाइलेण्ड

फर्राटा धावक मिल्खा सिंह ने जीता था।

1974

तेहरान

ईरान

राष्ट्रमण्डल खेल में रूपा उन्नीकृष्णन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली

1978

बैंकाक

थाइलैण्ड

भारतीय महिला है जिन्होंने क्वालालम्पुर (1998) में 50 मीटर

1982

नई दिल्ली

भारत

राइफल में यह खिताब जीता।

1986

सिओल

दक्षिण कोरिया

विभिन्न देशों में राष्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन

1990

बीजिंग

चीन

वर्ष

1930

स्थान हेमिल्टन

देश

1994

हिरोशिमा

जापान

कनाडा

1998

बैंकाक

थाइलैण्ड

444:

2002

2006

बुसान दोहा

उत्कर्ष प्रकाशन

दक्षिण कोरिया

कतर

पुलवामा शहीद दिवस

14 फरवरी

विश्व सामाजिक न्याय दिवस

20 फरवरी

2010

ग्वांग्झू

चीन

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

21 फरवरी

2014

इचियोन

दक्षिण कोरिया

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस

24 फरवरी

2018

जकार्ता

इण्डोनेशिया

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

28 फरवरी

2022

हांगझू

चीन

मार्च

2026 आइची नगोया (प्रस्तावित)

जापान

विश्व वन्यजीव दिवस

3 मार्च

भारत के प्रमुख स्टेडियम

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस

4 मार्च

स्टेडियम का नाम

खेल

शहर

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

8 मार्च

बिरसा मुंडा स्टेडियम

एथलेटिक्स

राँची

CISF सुरक्षा बल का स्थापना दिवस

10 मार्च

वानखेड़े स्टेडियम

क्रिकेट

मुंबई

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस

15 मार्च

सवाई मान सिंह स्टेडियम

क्रिकेट

जयपुर

आयुध निर्माण दिवस

18 मार्च

चिदंबरम स्टेडियम

क्रिकेट

चेन्नई

विश्व खुशहाली दिवस एवं विश्व गौरैया दिवस

20 मार्च

नरेन्द्र मोदी स्टेडियम

क्रिकेट

अहमदाबाद

विश्व वानिकी दिवस

21 मार्च

भूपेन हजारिका स्टेडियम

क्रिकेट

गुवाहाटी

विश्व जल संरक्षण दिवस

22 मार्च

राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम

क्रिकेट

हैदराबाद

भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु का शहीद

23 मार्च

अरुण जेटली स्टेडियम

क्रिकेट

नई दिल्ली

दिवस (शहीदी दिवस)

लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम

क्रिकेट

हैदराबाद

विश्व मौसम विज्ञान दिवस

23 मार्च

ईडन गार्डन स्टेडियम

क्रिकेट

कोलकाता

विश्व टी. बी. दिवस

24 मार्च

ग्रीन पार्क स्टेडियम

क्रिकेट

कानपुर

राजस्थान स्थापना दिवस

30 मार्च

एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम

क्रिकेट

बेंगलुरु

अप्रैल

बरकतुल्लाह खान स्टेडियम

क्रिकेट

जोधपुर

विश्व ऑटिज्म चेतना दिवस

2 अप्रैल

हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन

क्रिकेट

धर्मशाला

विश्व स्वास्थ्य दिवस

7 अप्रैल

ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम

हॉकी

नई दिल्ली

जलियाँवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस

13 अप्रैल

बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम

हॉकी

राउरकेला

अम्बेडकर जयंती (समानता दिवस)

14 अप्रैल

इंदिरा गाँधी एथलेटिक्स स्टेडियम

फुटबॉल

गुवाहाटी

विश्व हीमोफीलिया दिवस

17 अप्रैल

विश्व विरासत दिवस

प्रमुख दिवस

18 अप्रैल

| सिविल सेवा दिवस

21 अप्रैल

विश्व पृथ्वी दिवस

22 अप्रैल

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस

23 अप्रैल

जनवरी

लुईस ब्रेल दिवस

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

24 अप्रैल

4

जनवरी

विश्व मलेरिया दिवस

25 अप्रैल

भारतीय प्रवासी दिवस

9 जनवरी

विश्व हिन्दी दिवस

मई

10 जनवरी

विश्व श्रमिक दिवस

राष्ट्रीय युवा दिवस

12 जनवरी

1 मई

राष्ट्रीय थल सेना दिवस

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

3 मई

15 जनवरी

विश्व रेडक्रॉस दिवस

पराक्रम दिवस

8 मई

23 जनवरी

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

राष्ट्रीय बालिका दिवस

11 मई

24 जनवरी

विश्व नर्स दिवस

भारतीय पर्यटन दिवस / राष्ट्रीय मतदाता दिवस

12 मई

25 जनवरी

विश्व परिवार दिवस

भारतीय गणतंत्र दिवस

26 जनवरी

15 मई

राष्ट्रीय शहीद दिवस

विश्व दूरसंचार दिवस

17 मई

30 जनवरी

कुष्ठ निवारण दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

22 मई

30 जनवरी

विश्व फुटबॉल दिवस

फरवरी

25 मई

विश्व आर्द्र भूमि दिवस

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

31 मई

2 फरवरी

वि��्व कैंसर दिवस

4 फरवरी

जून

समर्पण दिवस

विश्व दुग्ध दिवस

11 फरवरी

1 जून

राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस

12 फरवरी

5 जून

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस

राष्ट्रीय महिला दिवस / विश्व रेडियो दिवस

13 फरवरी

7 जून

445

उत्कर्ष प्रकाशन

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस

12 जून

| विश्व सांख्यिकी दिवस

20 अक्टूबर

विश्व रक्तदान दिवस

14 जून

संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थापना दिवस

24 अक्टूबर

विश्व शरणार्थी दिवस

20 जून

विश्व पोलियो दिवस

24 अक्टूबर

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

21 जून

विश्व एनिमेशन दिवस

28 अक्टूबर

अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस

23 जून

राष्ट्रीय एकता दिवस

संविधान हत्या दिवस

25 जून

नवम्बर

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस

29 जून

जुलाई

| राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस | राष्ट्रीय विधिक साक्षरता दिवस

31 अक्टूबर

7 नवम्बर

9 नवम्बर

भारतीय स्टेट बैंक का स्थापना दिवस

1 जुलाई

राष्ट्रीय बाल दिवस

14 नवम्बर

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

1 जुलाई

विश्व जनसंख्या दिवस

11 जुलाई

विश्व मधुमेह दिवस विश्व टेलीविजन दिवस

विश्व युवा कौशल दिवस बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस कारगिल विजय दिवस विश्व हैपेटाइटिस दिवस अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस

15 जुलाई

राष्ट्रीय विधि दिवस

19 जुलाई

संविधान दिवस

26 जुलाई

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस

28 जुलाई

29 जुलाई

विश्व एड्स दिवस

अगस्त

विश्व स्तनपान दिवस

1 अगस्त

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

7 अगस्त

विश्व आदिवासी दिवस

9 अगस्त

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस / विश्व हाथी दिवस

12 अगस्त

भारत का स्वतन्त्रता दिवस

15 अगस्त

विश्व मानवतावादी दिवस

19 अगस्त

विश्व फोटोग्राफी दिवस

19 अगस्त

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रक दिवस विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस

| भारतीय नौसेना दिवस अन्तर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस झंडा दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधी दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस

राष्ट्रीय खेल दिवस

29 अगस्त

विश्व बाल कोष दिवस

सितम्बर

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस

जीवन बीमा निगम (LIC) स्थापना दिवस

1 सितम्बर

विश्व मानव एकता दिवस

राष्ट्रीय शिक्षक दिवस

5 सितम्बर

राष्ट्रीय गणित दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

8 सितम्बर

राष्ट्रीय किसान दिवस

राष्ट्रीय हिन्दी दिवस

14 सितम्बर

राष्ट्रीय अभियन्ता दिवस

15 सितम्बर

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस सुशासन दिवस

14 नवम्बर

21 नवम्बर

26 नवम्बर

26 नवम्बर

26 नवम्बर

दिसम्बर

1 दिसम्बर

2 दिसम्बर

2 दिसम्बर

4 दिसम्बर

5 दिसम्बर

7 दिसम्बर

7 दिसम्बर

9 दिसम्बर

10 दिसम्बर

11 दिसम्बर

14 दिसम्बर

20 दिसम्बर

22 दिसम्बर

23 दिसम्बर

24 दिसम्बर

25 दिसम्बर

विश्व ओज़ोन परत संरक्षण दिवस

16 सितम्बर

विश्व शान्ति दिवस

21 सितम्बर

विश्व पर्यटन दिवस

27 सितम्बर

राष्ट्रीय उद्यान

विश्व रेबीज दिवस

28 सितम्बर

विश्व हृदय दिवस

29 सितम्बर

राष्ट्रीय उद्यान का नाम

राज्य का नाम

अधिसूचना का वर्ष

अक्टूबर

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

1 अक्टूबर

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1936

अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

2 अक्टूबर

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1989

विश्व शिक्षक दिवस

गोविंद राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1990

5 अक्टूबर

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1982

भारतीय वायु सेना दिवस

8 अक्टूबर

विश्व डाक दिवस

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1983

9 अक्टूबर

लोकनायक जयप्रकाश जयन्ती

11 अक्टूबर

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड

1982

अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस

पापिकोंडा राष्ट्रीय उद्यान

आंध्र प्रदेश

2008

11 अक्टूबर

विश्व विद्यार्थी दिवस

15 अक्टूबर

राजीव गाँधी राष्ट्रीय उद्यान

आंध्र प्रदेश

2005

विश्व खाद्य दिवस

16 अक्टूबर

श्री वेंकटेश्वर राष्ट्रीय उद्यान

आंध्र प्रदेश

1989

अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस

17 अक्टूबर

मोलिंग राष्ट्रीय उद्यान

अरुणाचल प्रदेश

1986

नामदफा राष्ट्रीय उद्यान

अरुणाचल प्रदेश

1983

446

उत्कर्ष प्रकाशन

नामेरी राष्ट्रीय उद्यान

असम

1998

संजय राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1981

डिब्रू-साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान

असम

1999

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1981

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

असम

1974

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1979

मानस राष्ट्रीय उद्यान

असम

1990

चांदोली राष्ट्रीय उद्यान

महाराष्ट्र

2004

देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान

असम

2021

गुगामल राष्ट्रीय उद्यान

महाराष्ट्र

1975

रायमोना राष्ट्रीय उद्यान

असम

2021

नवेगाव राष्ट्रीय उद्यान

महाराष्ट्र

1975

राजीव गाँधी (ओरांग) राष्ट्रीय

पेंच (जवाहरलाल नेहरू) राष्ट्रीय

असम

1999

महाराष्ट्र

1975

उद्यान

उद्यान

वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान

बिहार

1989

संजय गाँधी (बोरिवली) राष्ट्रीय

महाराष्ट्र

1983

गुरु घासीदास (संजय) राष्ट्रीय उद्यान

छत्तीसगढ़

1981

उद्यान

इंद्रावती (कुटरू) राष्ट्रीय उद्यान

छत्तीसगढ़

1982

तदोबा राष्ट्रीय उद्यान

महाराष्ट्र

1955

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

छत्तीसगढ़

1982

केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान

मणिपुर

1977

मोले राष्ट्रीय उद्यान

गोवा

1992

शिरोई राष्ट्रीय उद्यान

मणिपुर

1982

ब्लैकबक (वेलावदार) राष्ट्रीय उद्यान

बलफाक्रम राष्ट्रीय उद्यान

मेघालय

1986

गुजरात

1976

गिर राष्ट्रीय उद्यान

नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान

मेघालय

1997

गुजरात

1975

समुद्री ( कच्छ की खाड़ी) राष्ट्रीय

मुरलेन राष्ट्रीय उद्यान

मिजोरम

2003

गुजरात

1982

फांगपुई (नीला पर्वत) राष्ट्रीय उद्यान

मिजोरम

1997

उद्यान

वंसदा राष्ट्रीय उद्यान

इंटांकी राष्ट्रीय उद्यान

नागालैण्ड

1993

गुजरात

1979

कालेसर राष्ट्रीय उद्यान

हरियाणा

भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान

ओडिशा

1988

2003

सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान

सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान

ओडिशा

1980

हरियाणा

1989

ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान

हिमाचल प्रदेश

डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1992

1984

इंदरकिला राष्ट्रीय उद्यान

हिमाचल प्रदेश

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1981

2010

खीरगंगा राष्ट्रीय उद्यान

हिमाचल प्रदेश

2010

मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

2006

पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1980

हिमाचल प्रदेश

1987

सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान

1992

कर्नल शेरजंग सिंबल��ारा राष्ट्रीय

हिमाचल प्रदेश

2010

कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान

सिक्किम

1977

उद्यान

बेतला राष्ट्रीय उद्यान

गुइंडी राष्ट्रीय उद्य

तमिलनाडु

1976

झारखंड

1986

अंशी राष्ट्रीय उद्यान

कर्नाटक

मन्नार की खाड़ी समुद्री राष्ट्रीय

1987

तमिलनाडु

1980

उद्यान

बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान

कर्नाटक

1974

इंदिरा गाँधी (अन्नामलाई) राष्ट्रीय

बन्नेघड़ा राष्ट्रीय उद्यान

कर्नाटक

1974

तमिलनाडु

1989

उद्यान

कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान

कर्नाटक

1987

मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान

तमिलनाडु

1990

नागरहोल (राजीव गाँधी) राष्ट्रीय

कर्नाटक

1988

कुर्थी राष्ट्रीय

तमिलनाडु

1990

उद्यान

कासु ब्रह्मानंद रेड्डी राष्ट्रीय उद्यान

तेलंगाना

1994

अनामूडी शोला राष्ट्रीय उद्यान

केरल

2003

महावीर हरिना वनस्थली राष्ट्रीय

एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान

केरल

तेलंगाना

1994

1978

उद्यान

मधिकेन शोला राष्ट्रीय उद्यान

केरल

2003

मरुगवानी राष्ट्रीय उद्यान

तेलंगाना

1994

पंबदुम शोला राष्ट्रीय उद्यान

केरल

2003

धूमिल तेंदुए राष्ट्रीय उद्यान

त्रिपुरा

2007

पेरियार राष्ट्रीय उद्यान

केरल

1982

बाइसन (राजबारी) राष्ट्रीय उद्यान

त्रिपुरा

2007

साइलेंट वेली राष्ट्रीय उद्यान

केरल

1984

| दुधवा राष्ट्रीय उद्यान

उत्तर प्रदेश

1977

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1968

बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1992

डायनासोर फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

2011

गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1992

जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1983

जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

2014

पेंच राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1975

नियोरा घाटी राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1986

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1955

सिंगलिला राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1986

कुन राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

2018

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम बंगाल

1984

माधव राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1959

कैम्पबेल खाड़ी राष्ट्रीय उद्यान

अंडमान व

1992

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान

मध्य प्रदेश

1981

निकोबार

447

उत्कर्ष प्रकाशन

गैलाथिया खाड़ी राष्ट्रीय उद्यान

अंडमान व निकोबार

1992

महात्मा गाँधी मरीन (वंदूर) राष्ट्रीय

अंडमान व

1983

उद्यान

निकोबार

माउंट हैरियट राष्ट्रीय उद्यान

अंडमान व

1987

निकोबार

रानी झाँसी मरीन राष्ट्रीय उद्यान

अंडमान व निकोबार

1996

सैडल पीक राष्ट्रीय उद्यान

अंडमान व निकोबार

1987

सिटी फॉरेस्ट (सलीम अली) राष्ट्रीय

जम्मू और कश्मीर

1992

उद्यान

दाचीग्राम राष्ट्रीय उद्यान

जम्मू और कश्मीर

1981

काजीनाग राष्ट्रीय उद्यान

जम्मू और कश्मीर

2000

किश्तवाड़ उच्च ऊँचाई राष्ट्रीय उद्यान

जम्मू और कश्मीर

1981

हेमिस राष्ट्रीय उद्यान

लद्दाख

1981

(स्रोत MoEfCC & State forest Departments)

● भारत के राष्ट्रीय प्रतीक

किसी भी वस्तु, स्थान या चिह्न को राष्ट्रीय महत्त्व का दर्जा देने का अधिकार संसद के पास होता है।

राष्ट्रीय ध्वज-

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा 22 जुलाई, 1947 को अपनाया गया।

ध्वज में केसरिया रंग सबसे ऊपर साहस व शौर्य का प्रतीक है। बीच में सफेद रंग शांति का तथा नीचे हरा रंग खुशहाली का प्रतीक है।

• तिरंगे की रूपरेखा 'पिंगली वैंकेया' ने तैयार की थी।

+

तिरंगे के बीच में नीले रंग का अशोक चक्र है जिसमें 24 तीलियाँ हैं।

● राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है। ● राष्ट्रीय ध्वज संहिता, 2002 लाई गई थी।

राष्ट्रीय चिह्न-

• भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में 26 जनवरी, 1950 को सारनाथ स्थित अशोक स्तम्भ को अपनाया गया।

इस स्तम्भ में ऊपर चार शेर (सिंह) चार दिशाओं में मुँह करके बैठे हैं।

• नीचे आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' लिखा है जो मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है।

राष्ट्रीय गीत

● राष्ट्रीय 'गीत वंदेमातरम्' है जो बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित पुस्तक 'आनंद मठ' से लिया गया है।

• पहली बार यह गीत कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन 1896 ई. में गाया गया था।

• वंदेमातरम् गीत को राष्ट्रीय गीत 24 जनवरी, 1950 को घोषित किया गया।

राष्ट्रीय गान -

• राष्ट्रगान जन गण मन है जो रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा रचित हैं।

यह गीत पहली बार कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन वर्ष 1911 में

गाया गया था।

राष्ट्रगान को 24 जनवरी, 1950 को अपनाया गया।

+

इसे गाने का नियत समय 52 सेकण्ड है।

राष्ट्रीय दिवस

1. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 3. गाँधी जयंती 2 अक्टूबर 4. शहीद दिवस 30 जनवरी राष्ट्रीय नदी-

• नवम्बर, 2008 को 'गंगा नदी' को राष्ट्रीय नदी घोषित किया। राष्ट्रीय पेड़

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद (फाइकस बेंघालेंसिस) है।

राष्ट्रीय विरासत पशु-

• अक्टूबर, 2010 को हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित किया गया। राष्ट्रीय मुद्रा प्रतीक (१) -

● राष्ट्रीय प्रतीक 'र' को 15 जुलाई, 2010 को घोषित किया गया। यह चिह्न देवनागरी व रोमन लिपि को मिलाकर इंजीनियर उदय कुमार ने तैयार किया।

राजभाषा-

● संविधान के अनु. 343 के तहत हिन्दी भाषा भारत की प्रमुख राज भाषा है।

राष्ट्रीय पक्षी-

वर्ष 1963 में मोर (पावो क्रिस्टेटस) को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। राष्ट्रीय पशु (बाघ) -

• वर्ष 1972 में बाघ (पेंथरा टाइग्रिस लिन्नायस) को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया।

• इससे पहले सिंह भारत का राष्ट्रीय पशु था।

राष्ट्रीय फूल -

कमल (नेलुम्बो न्यूसिफेरा) को वर्ष 1950 में राष्ट्रीय फूल घोषित किया

गया।

राष्ट्रीय फल-

• आम (मेंजीफेरा इंडिका) को वर्ष 1950 में राष्ट्रीय फल घोषित किया। राष्ट्रीय जलीय जीव-

गंगा डॉल्फिन (प्लेटानिस्टा गंगेटिका) को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया।

राष्ट्रीय पंचांग :-

• 22 मार्च, 1957 को शक संवत् भारतीय राष्ट्रीय पंचांग घोषित किया गया।

प्रमुख वाद्य यंत्र

• संगीत वाद्यों को ध्वनि की उत्पत्ति के आधार पर चार मुख्य वर्गों में बाँटा गया है-

1. तत् वाद्य

3. अवनद्ध वाद्य

वाद्य यंत्र

सारंगी

2. सुषिर

4. घन वाद्य

प्रमुख वादक

पण्डित राम नारायण (पद्म विभूषण 2005) अब्दुल करीम खान, अब्दुल लतीफ खान, गुलाम सबीर खान, रमेश मिश्रा, सुल्तान खान, उस्ताद उस्तान बिन्दु खान, शकूर खान ।

448

सितार

वीणा

वायलिन

सरोद

संतूर

शहनाई

बाँसुरी

तबला

मृदंग

पखावज

उत्कर्ष प्रकाशन

पण्डित रविशंकर (भारत रत्न 1999), (पद्म विभूषण- 1981), उमाशंकर मिश्रा, शाहिद परवेज, निखिल बनर्जी, विलायत खान, बुधादित्य मुखर्जी, अब्दुल हालिम जफर खाँ, अन्नापूर्णा देवी।

बदरुद्दीन डागर, कृष्ण भागवतार, असद अली खान (रूद्र वीणा), विश्वमोहन भट्ट (मोहन वीणा ) जिया मोइनुद्दीन, अय्यागरी श्याम सुन्दर धनम्मल, इमानी शंकर शास्त्री लक्ष्मीनारायण सुब्रह्मण्यम् (पदम विभूषण - 2025), गणेश राजगोपालन (ग्रेमी पुरस्कार 2024) ललागुडी जयराम, बीजी जोग, एम. चन्द्रशेखरन, M. S. गोपालकृष्णन | अलाउद्दीन खाँ (पदम विभूषण- 1971), अली अकबर खाँ (पदमविभूषण 1989), बुद्ध देव दासगुप्ता, अमजद अली खाँ, बहादुर खान, सहारण रानी, हाफिज अली खाँ । शिवकुमार शर्मा (पदम विभूषण - 2001), भजन सोपारी, पण्डित तरुण भट्टाचार्य

बिस्मिल्ला खाँ (भारत रत्न 2001) (पद्म विभूषण- 1980), अली अहमद, हुसेन खाँ, दयाशंकर, जगन्नाथ, बागेश्वरी कमर, कृष्णा राम चौधरी, सबरी खाँ, सुल्तान खाँ। हरिप्रसाद चौरसिया (पद्म विभूषण - 2000), राकेश चौरसिया (ग्रेमी पुरस्कार- 2024 ), पन्नालाल घोष, वी. कुंजमणि, राजेन्द्र कुलकर्णी, राजेन्द्र प्रसन्ना । जाकिर हुसैन (ग्रेमी पुरस्कार 2024) किशन महाराज (पद्म विभूषण - 2002), पण्डित जसराज (पद्म विभूषण- 2000) पण्डित ज्ञान प्रकाश घोष, अल्लाह रक्खा खाँ, निखिल ज्योति घोष, लतीफ खान, अहमद जन थिरकवा | उमालयपुरम शिवरामन (पद्मविभूषण-2010), टी. वी. गोपालकृष्ण, केवी प्रसाद, एसवी राजाराव ठाकुर भीष्म सिंह, जगदीश सिंह, पी. मणिअय्यर, रंजना स्वामीनाथ । तोताराम शर्मा, गोपालदास, रामशंकर पागलदास, पण्डित अयोध्या प्रसाद, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, छत्रपति सिंह, रहमान खाँ

विश्व व भारत के प्रथम पुरुष व महिला व्यक्तित्व

विश्व में प्रथम व्यक्तित्व माउंट एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति (1953) उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति कागजी मुद्रा जारी करने वाला पहला देश सिविल सेवा प्रतियोगिता शुरू करने वाला पहला देश

संयुक्त राष्ट्रसंघ का प्रथम महासचिव शिक्षा को अनिवार्य करने वाला प्रथम देश प्रथम फुटबॉल विश्व कप जीतने वाला देश संविधान निर्माण करने वाला प्रथम देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रथम सम्मेलन का आयोजन स्थल

शेरपा तेंजिंग (भारत) व सर एडमंड हिलेरी ( न्यूजीलैंड) रॉबर्ट पियरी (USA) एमण्डसेन (नॉर्वे)

चीन

चीन

वायुयान से पहली उड़ान भरने वाला व्यक्ति विश्व के चारों ओर समुद्री यात्रा करने वाला प्रथम व्यक्ति

चन्द्रमा पर मानव भेजने वाला प्रथम देश कृत्रिम उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपण करने वाला प्रथम देश

राईट बन्धु फर्डीनेंड मैगलन

संयुक्त राज्य अमेरिका

रूस

प्रथम नगर जिस पर परमाणु बम गिराया गया हिरोशिमा (जापान) 6 अगस्त, 1945

विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय

तक्षशिला विश्वविद्यालय (800 B.C.)

आधुनिक ओलम्पिक खेलों का आयोजन यूनान, ग्रीस करने वाला प्रथम देश (1896)

चन्द्रमा पर उतरने वाला प्रथम व्यक्ति (1969) अंतरिक्ष में पहुँचने वाले प्रथम व्यक्ति (1961) अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला प्रथम अंतरिक्ष शटल

नील आर्मस्ट्रॉग (USA)

मेजर यूरी गागरीन (रूस) कोलम्बिया

किसी मुस्लिम देश की प्रथम महिला बेनजीर भुट्टो (पाकिस्तान) प्रधानमंत्री

विश्व में किसी देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री एस.

(श्रीलंका) अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला (1963) बेलेण्टिना

एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला (1975) संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रथम महिला सभापति

भण्डारनायके

तेरेश्कोवा

(रूस) जुंको तेबई (जापान) विजयालक्ष्मी पंडित

भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम सिकन्दर यूरोपवासी विश्व में किसी देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति मारिया एस्टेला रजाबेल (अर्जेंटीना)

पृथ्वी का मानचित्र बनाने वाला प्रथम व्यक्ति साहित्य के प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति (1901)

नोबेल पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिला (1903)

शांति के क्षेत्र में प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति

बैंक नोट जारी करने वाला पहला देश

भारत में प्रथम पुरुष

भारत का प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति

भारत का प्रथम राष्ट्रपति

भारत का प्रथम उप-राष्ट्रपति

ट्रिग्वेली (नॉवें)

भारत का प्रथम प्रधानमंत्री

संयुक्त राज्य अमेरिका बेलग्रेड

प्रशा

उरुग्वे

भारत का प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री

भारत का प्रथम गवर्नर जनरल

अनेग्जीमेंडर

सुली प्रुधोमे

मैडम क्यूरी

जीन हेनरी डुनेण्ट एवं फ्रेडरिक पासी

स्वीडन

व्यक्तित्व

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

डॉ. जाकिर हुसैन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

पं. जवाहरलाल नेहरू

सरदार वल्लभ भाई पटेल लॉर्ड विलियम बैंटिक

भारत का अंतिम गवर्नर जनरल एवं प्रथम लॉर्ड कैनिंग

वायसराय

स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल

लॉर्ड माउंटबेटन

449:

उत्कर्ष प्रकाशन

स्वतंत्र भारत का प्रथम तथा अंतिम (भारतीय) चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

गवर्नर जनरल

भारत का प्रथम शिक्षा मन्त्री

भारत की केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा देने वाला प्रथम मंत्री

भारत का प्रथम भारतीय वायु सेनाध्यक्ष (एयर मार्शल)

अबुल कलाम आजाद

श्यामा प्रसाद मुखर्जी

सुब्रतो मुखर्जी

भारत का प्रथम नौ सेनाध्यक्ष (वाइस आर. डी. कटारी एडमिरल )

प्रथम चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल

स्वतंत्र भारत का प्रथम कमांडर-इन-चीफ

लोकसभा का प्रथम अध्यक्ष

भारत का प्रथम चुनाव आयुक्त

भारत का प्रथम मुख्य न्यायाधीश

भारत में प्रथम महिला व्यक्तित्व

भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति

भारत की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री लोकसभा की प्रथम महिला महासचिव भारत की प्रथम महिला लोक सभा अध्यक्ष भारत की प्रथम महिला सांसद

भारत की प्रथम महिला केन्द्रीय मंत्री भारत की प्रथम महिला राज्यपाल

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

द्रौपदी मुर्मू

इन्दिरा गाँधी

स्नेहलता श्रीवास्तव

राधाबाई सुबारायन

राजकुमारी अमृत कौर

सरोजिनी

नायडू

(उत्तरप्रदेश)

मीरा कुमारी

संघ लोक सेवा आयोग की प्रथम महिला रोज मिलियन बैथ्यू

राजेन्द्र सिंह जडेजा

जनरल करिअप्पा

गणेश वासुदेव मावलंकर सुकुमार सेन

अध्यक्ष

हीरालाल जे. कानिया

भारत की प्रथम महिला शासिका

रजिया सुल्तान

भारत की प्रथम महिला आई.ए.एस. अधिकारी

अन्ना रजम मल्होत्रा

स्वतंत्र भारत में जन्में (29 सितम्बर 1947) सरोश होमी कपाड़िया

प्रथम न्यायमूर्ति

अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में प्रथम भारतीय डॉ. नागेन्द्र सिंह न्यायाधीश (अध्यक्ष)

भारत की प्रथम महिला आई.पी.एस. किरण बेदी अधिकारी

सुचेता (उत्तरप्रदेश)

(हरियाणा)

डॉ. एनी बेसेन्ट

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष

व्योमेशचन्द्र बनर्जी

भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री

| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम

बदरुद्दीन तैय्यबजी

अध्यक्ष

किसी राज्य विधानसभा की प्रथम महिला श्रीमती शन्नो

नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाला प्रथम

रवीन्द्रनाथ टैगोर

अध्यक्ष

भारतीय

वेंकटरमन

(भौतिकी)

आचार्य विनोबा भावे

प्रथम महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की प्रथम महिला न्यायाधीश उच्च न्यायालय की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश

सैफुद्दीन किचलू

प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय चन्द्रशेखर वैज्ञानिक

मैग्सेसे अवॉर्ड पाने वाला प्रथम भारतीय

स्टालिन पुरस्कार प्राप्त करने वाला प्रथम

भारतीय

गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड जीतने वाले प्रथम ए. आर. रहमान

भारतीय

भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाला डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय प्रथम

भारत रत्न से सम्मानित प्रथम विदेशी नागरिक ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रथम भारतीय आई.सी.एस. में चुने जाने वाला प्रथम भारतीय अंतरिक्ष में पहुँचने वाला प्रथम भारतीय इंग्लिश चैनल को पार करने वाला प्रथम भारतीय

खान अब्दुल गफ्फार खान

जीशंकर कुरूप

सत्येन्द्रनाथ टैगोर राकेश शर्मा

मिहिर सेन

बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट की चोटी पर शेरपा फू-दोरजी पहुँचने वाला प्रथम भारतीय

भारत का भ्रमण करने वाला प्रथम चीनी यात्री मुगल दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज प्रथम भारतीय पायलट (वर्ष 1951)

फाह्यान

हॉकिन्स

जहाँगीर रतनजी दादाभाई

टाटा

अभिनव बिन्द्रा

ओलम्पिक में व्यक्तिगत स्पर्द्धा में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाला खिलाड़ी ब्रिटिश संसद का सदस्य बनने वाला प्रथम भारतीय

दादाभाई नौरोजी

भारत में प्रथम समाचार-पत्र शुरू करने वाला जेम्स ऑगस्टस हिक्की व्यक्ति

भारत की प्रथम महिला सत्र न्यायाधीश

अशोक चक्र पाने वाली प्रथम महिला

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम महिला भारतीय अध्यक्ष

कृपलानी

देवी

मीरा साहिब फातिमा बीबी लीला सेठ (हिमाचल प्रदेश)

अन्नाचांडी (केरल) नीरजा भनोट विजयालक्ष्मी पंडित

इंग्लिश चैनल पार करने वाली प्रथम भारतीय आरती साहा 'गुप्ता' महिला

नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रथम मदर टेरेसा (शांति क्षेत्र में) भारतीय महिला

एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने वाली प्रथम बच्छेन्द्री पाल भारतीय महिला

मिस वर्ल्ड बनने वाली प्रथम भारतीय रीता फारिया महिला

'मिस यूनिवर्स' बनने वाली प्रथम महिला 'भारत रत्न' से सम्मानित प्रथम महिला 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' पाने वाली प्रथम

महिला 'अर्जुन पुरस्कार' पाने वाली प्रथम महिला ओलम्पिक में पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला

सुष्मिता सेन श्रीमती इन्दिरा गाँधी आशापूर्णा देवी

एन. लम्सडेन (हॉकी, 1961) कर्णम मल्लेश्वरी

अर्जुन एवं राजीव गाँधी खेल रत्न दोनों कुंजरानी देवी (ग्रांड ओल्ड

पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिला

प्रथम भारतीय महिला मेयर

प्रथम महिला स्नातक (प्रतिष्ठा)

450

लेडी)

तारा चेरियन

कामिनी रॉय (1886 ई.)

प्रथम महिला स्नातक

प्रथम महिला डॉक्टर (फिजिशियन)

भारतीय रेल की प्रथम महिला ड्राइवर भारतीय वायुसेना में प्रथम महिला पायलट प्रथम महिला एयरबेस पायलट प्रथम महिला लेफ्टिनेंट जनरल

अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला

ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रथम महिला

दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाली प्रथम महिला सात प्रमुख सागर तैरकर पार करने वाली प्रथम भारतीय महिला

राज्य सभा की प्रथम महिला महासचिव राज्य सभा के लिए नामांकित होने वाली प्रथम महिला फिल्म अभिनेत्री अंटार्कटिका पर पहुँचने वाली प्रथम महिला

साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतने वाली

प्रथम महिला

उत्कर्ष प्रकाशन

कादम्बिनी गांगुली एवं चन्द्रमुखी ब

आनंदी बाई गोपालराव

जोशी

सुरेखा शंकर यादव

डब्ल्यू. टी. ए. टेनिस टूर्नामेंट जीतने वाली सानिया मिर्जा प्रथम महिला

नॉर्मन बोरलॉग पुरस्कार से सम्मानित प्रथम डॉ. अमृता पटेल (1992) महिला

पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली अवनि लेखरा

goo

प्रमुख समितियाँ

संविधान से संबंधित समितियाँ

हरिता कौर दयाल

प्रथम महिला

दुर्बा बनर्जी

पुनीता अरोड़ा

कल्पना चावला (अमेरिकी

नागरिक)

भानु अथैया

कमलजीत संधू

समिति

अध्यक्ष

संविधान के मसौदे की जाँच के लिए

रीना कौशल धर्मशक्त बुला चौधरी

विशेष समिति

अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर

अल्पसंख्यक उपसमिति

एच.सी मुखर्जी

सर्वोच्च न्यायालय समिति

एस. वारदाचारियार

वी. एस. रमादेवी नरगिस दत्त

कार्य संचालन समिति

के. एम. मुंशी

जे. बी. कृपलानी

मेहर मूसा अमृता प्रीतम

ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली प्रथम मेरी लीला रॉव महिला

भारतीय सिनेमा की प्रथम अभिनेत्री

राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष

मूल अधिकार संबंधी उपसमिति प्रारूप समिति

संचालन समिति

नियम समिति

संघ संविधान समिति

संघ शक्ति समिति प्रांतीय संविधान समिति मूल अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति

डॉ. भीम राव अम्बेडकर

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पं. जवाहर लाल नेहरू

पं. जवाहर लाल नेहरू सरदार वल्लभ भाई पटेल सरदार वल्लभ भाई पटेल

पंचायती राज से संबंधित समितियाँ समिति

बलवंतराय मेहता समिति

देविका रानी

जयंती पटनायक

दूरदर्शन समाचार वाचक प्रथम महिला ओलंपिक बैडमिंटन (महिला) में रजत पदक जीतने वाली व विश्व बैडमिंटन

प्रतिमा पूरी

अशोक मेहता समिति

जी. वी. के. राव समिति

चैम्पियनशिप में महिला एकल का खिताब

पी. वी. सिंधु

डॉ. एल. एम. सिंघवी समिति

जीतने वाली प्रथम महिला

पी. के. थुंगन समिि

पदक जीतने वाली प्रथम महिला

ओलंपिक बैडमिंटन (महिला) में कांस्य साइना नेहवाल

ओलंपिक महिला कुश्ती में कांस्य पदक साक्षी मलिक (2016 रियो

जीतने वाली प्रथम महिला

समिति

भारत की प्रथम महिला विदेश सचिव

ओलंपिक)

चोकिला अय्यर

मिताली राज

नचिकेत मोर समिति

रघुराम राजन समिति

वर्ष

1957

1977-78

1985

1986

1988

कार्य

दोहरा शतक बनाने वाली प्रथम भारतीय

महिला

ओलंपिक की जिमनास्टिक्स प्रतिस्पर्द्धा के दीपा करमाकर लिए क्वालिफाई करने वाली प्रथम भारतीय

महिला

अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की सदस्य नीता अम्बानी

बनने वाली प्रथम भारतीय महिला

क्रिकेट में 100 विकेट लेने वाली प्रथम

डायना एडुल्जी

महिला

द्वितीय नरसिम्हन राव समिति (1998) स्वामीनाथन समिति

सरकारिया समिति

पी.सी.महालनोबिस

समिति

राजमन्नार समिति

अन्य महत्त्वपूर्ण समितियाँ

वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करने हेतु नए बैंकिंग ढाँचे से संबंधित।

वित्तीय क्षेत्र में सुधार से संबंधित

(पहली-1991) बैंकिंग क्षेत्र में सुधार से संबंधित

किसानों की समस्या से संबंधित

केन्द्र व राज्यों के बीच मौजूद व्यवस्थाओं से संबंधित।

राष्ट्रीय आय से संबंधित।

केन्द्र व राज्यों के बीच मौजूद व्यवस्थाओं से संबंधित

451

कर्वे समिति

शिवरमन समिति

राजा चेलैया समिति

ग्रामीण व लघु उद्योग से संबंधित

उत्कर्ष प्रकाशन

इस समिति की सिफारिश पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना की गई।

करो में सुधार के लिए इस समिति का गठन किया गया।

P.P.P. (सार्वजनिक निजी साझेदारी) का

विजय केलकर समिति मूल्यांकन के लिए इस समिति का गठन किया

गया।

बैंकिंग पर्यवेक्षण से संबंधित

संविधान में जोड़ा गया।

बेसल समिति

स्वर्ण सिंह समिति

इस समिति की सिफारिश पर मूल कर्तव्यों को

मल्होत्रा समिति

बलवंतराय मेहता

सत्यम समिति

समिति

सुन्दर राजन समिति

सुरेश तेन्दुलकर समिति | के. संथानम समिति एम. एन. गोइपोरिया समिति

तारापोर समिति

खुसरो समिति

बीमा क्षेत्र में सुधार से संबंधित

त्रिस्तरीय पंचायती राज से संबंधित

वस्त्र नीति से संबंधित

खनिज तेल में सुधार से संबंधित

गरीबी के आकलन से संबंधि

भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित

बैंकिंग सेवा सुधार से संबंधित

पूँजी खाते की परिवर्तनशीलता से संबंधि कृषि ऋण प्रणाली में सुधार से संबंधित

माधव गाडगिल समिति सी. रंगराजन समिति

पश्चिमी घाटों के संरक्षण से संबंधित

महाजन समिति

गरीबी मापने की पद्धति से संबंधित

चीनी उद्योग व गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं पर विचार से संबंधित

अरविन्द घोष सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' विशाखदत्त

पाणिनि

विज्ञानेश्वर

कल्हण चाणक्य

कालिदास

जयदेव

भवभूति

मलिक मोहम्मद जायसी

अबुल फजल अलबरूनी मोरारजी देसाई प्लिनी फिरदौसी

सुरदास

अबुल कलाम आजाद सरोजिनी नायडू विलियम शेक्सपीयर

बंकिम चंद्र चटर्जी महर्षि वाल्मीकि

राजशेखर बाणभट्ट अश्वघोष

तुलसीदास

रेखी समिति

अप्रत्यक्ष कर से संबंधित

जवाहर लाल नेहरू

सुखमय चक्रवर्ती

समिति

भारतीय मौद्रिक प्रणाली के कामकाज का आकलन करने से संबंधित

किरण बेदी

अरविन्द घोष

आबिद हुसैन समिति

लघु उद्योगों की विसंगतियों को दूर करने से

अमर्त्य सेन

संबंधित

नरेन्द्र मोदी

भगवती समिति

बेरोजगारी एवं लोक कल्याण से संबंधित

प्रियंका चोपड़ा

एक राष्ट्र एक चुनाव का सुझाव दिया

इंदिरा गाँधी

रामनाथ कोविन्द समिति

● प्रमुख लेखक एवं उनकी पुस्तकें

लेखक विष्णु शर्मा

शूद्रक वात्स्यायन

रवीन्द्र नाथ टैगोर

मैथिलीशरण गुप्त वेदव्यास इन्दिरा गाँधी

जयशंकर प्रसाद

पुस्तक

पंचतंत्र

मृच्छकटिकम् कामसूत्र चित्रांगदा, गीतांजलि भारत-भारती भगवद्गीता, महाभारत इंटरनल इंडिया

कामायनी

रंजन गोगोई

झुम्पा लाहिडी चेतन भगत सुभद्रा कुमारी चौहान

रसखान

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

अरुंधती राय

जयप्रकाश नारायण पं. रविशंकर

हरिषेण आर्यभट्ट महादेव गोविन्द रानाडे सुभाष चन्द्र बोस

द लाइफ डिवाइन अनामिका, परिमल

मुद्राराक्षस अष्टाध्यायी

मिताक्षरा राजतरंगिणी

अर्थशास्त्र

कुमार संभव, रघुवंशम, अभिज्ञान शाकुन्तलम, मेघदूत गीत गोविन्द मालतीमाधव

पद्मावत अकबरनामा किताब-उल-हिन्द नेचर क्योर नेचुरल हिस्ट्री

शाहनामा साहित्यलहरी, सूरसागर इंडिया विन्स फ्रीडम द सॉन्ग्स ऑफ इंडिया हेमलेट, जूलियस सीजर आनंदमठ, दुर्गेश नंदिनी रामायण

काव्य मीमांसा हर्ष चरित, कादंबरी बुद्धचरित

विनय पत्रिका, कवितावली

भारत की खोज फीयरलेस गवर्नेस एसेज ऑन गीता

द आइडिया ऑफ जस्टिस एग्जाम वॉरियर, ज्योति पुंज अनफिनिस्ड

इंदिरा गाँधी ऑन पीपल्स एंड प्रॉब्लम्स

कोर्ट्स ऑफ इंडिया

द इंटरप्रेटर ऑफ मैलॉडीज, द नेमसेक द गर्ल इन रूम 105, वन इंडियन गर्ल झाँसी की रानी

प्रेम वाटिका इंडियन फिलोसॉफी द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स प्रिज़न डायरी

माई म्यूजिक, माइ लाइफ प्रयाग प्रशस्ति

आर्य सिद्धांत राइज ऑफ द मराठा पॉवर

द इण्डियन स्ट्रगल

452

एस. ए. डागे सोनिया गाँधी सलमान रुश्दी

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल

कलाम रघुराम राजन

उर्जित पटेल

नेल्सन मंडेला

अरविन्द अडिगा

अमिताव घोष

अमृता प्रीतम

मनमोहन सिंह

रस्किन बॉण्ड अरुंधति रॉय

चार्ल्स डार्विन ज्योतिबा फूले लियो टॉल्स टॉय

कैलाश सत्यार्थी नेल्सन मण्डेला

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर बाबा रामदेव महात्मा गाँधी

जॉन मेनार्ड कीन्स

दीनबंधु मित्र

श्री अरबिंदो

दादा भाई नौरोजी

महात्मा गाँधी

मीरा कुमार

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर

भगत सिंह

प्रेमचंद

एंडी मैरिनो

गाँधी वर्सेस लेनिन

राजीव

मिड नाइट्स चिल्ड्रन

उत्कर्ष प्रकाशन

बिहार

छत्तीसगढ़

उत्तर प्रदेश कर्नाटक

द विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स

महाराष्ट्र

आई डू व्हाट आई डू ओवरड्राफ्ट सेविंग द इंडियन सेवर लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम

मणिपुर

मेघालय

द व्हाइट टाइगर

त्रिपुरा मिजोरम

द लिविंग माउंटेन

पिंजर चेंजिंग इंडिया

दिल्ली दूर नहीं

द एण्ड ऑफ इमेजिनेशन

द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज

गुलामगिरी वॉर एण्ड पीस एवरी चाइल्ड मैटर्स लॉन्ग ऑन टू फ्रीडम

असम

हिमाचल प्रदेश सिक्किम

पश्चिम बंगाल

राजस्थान

उत्तराखण्ड

जम्मू कश्मीर

अरुणाचल प्रदेश

गुजरात

थॉट्स ऑन पाकिस्तान

अंडमान और निकोबार

माय लाइफ, माय मिशन

जनजाति

हिन्द स्वराज

बुशमैन

द जनरल थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट,

नूबा

पुनन

नील दर्पण

इमरजेंसी इन इण्डिया

पाथवे टू गॉड

अरुंधति राय

बाल गंगाधर तिलक

कुलदीप नैयर

वी.वी.एस. लक्ष्मण

राज्य

झारखण्ड केरल

मध्य प्रदेश

ओडिशा

इंटरेस्ट एण्ड मनी

मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस

आर्कटिक होम

द जजमेंट इनसाइड स्टोरी ऑफ द

द लाइफ डिवाइन

पॉवर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया

इण्डियन पार्लियामेंट डिप्लोमेसी स्पीकर्स

पर्सपेक्टिव

वेटिंग फॉर एव

मैं नास्तिक क्यों हूँ

281 एण्ड बियॉण्ड

नरेन्द्र मोदी ए पॉलिटिकल बायोग्राफी

● भारत व विश्व की जनजातियाँ

जनजाति

मुण्डा, संथाल, हो, बिरहोर, उरांव, कोल

मोपला, कडार, मुधुवन, कुरुम्ब

भील, कोल, सहरिया ।

जुआंग, बैंगा।

मानसरोवर

मग्यार

सेमोयेड्स मसाई

इनुइट

जुलू बोअर

अफरीदी

यूपिक

सेमांग

एस्कीमो

वेद्दा

किरगिज

माओरी

पिग्मी

मायाज

बेंगा, बंजारा, मुण्डा, भुइया

गोंड, बैंगा, अबूझमारिया, कोरबा, बिरहोर ।

थारू, गौड़, राजी, शोक, खरगार

पिक्की, येरबा, इरूंगा, कोरमा ।

वर्ली, कोली, अगरिया, असुरा।

कुकी, मैइती, अंगामी।

गारो, खाँसी, जयंतिया, मिकी, निन्जा ।

लुसाई, रियांग, चकमा

लुसाई ।

अहोम, बोडो।

गद्दी, लाम्बा, पंगवाला।

भुटिया, लेप्चा

भूमिज, मुंडा, संथाल

मीणा, कालबेलिया, गरासिया, भील, सहरिया ।

थारू, भोटिया, जौनसारी ।

गुज्जर, बक्करवाल।

डफला, मिरी, अबोर, मिश्मी, नईशी ।

डाफर, टोडिया, पटेलिया, भील।

ग्रेट अंडमानी, निकोबारी, ओंगे, जारवा, शोम्पेन, सेंटेनली आदि।

देश

कालाहारी मरुस्थल (बोत्सवाना)

सुडान

बोर्नियो, मलेशिया एवं इंडोनेशिया रूमानिया, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया साइबेरिया का ठंडा प्रदेश (रूस) तंजानिया, केन्या व पूर्वी युगांडा

कनाडा

दक्षिण अफ्रीका पाकिस्तान

पश्चिमी अलास्का व पूर्वी रूस

मलेशिया

ग्रीनलैंड, कनाडा

श्रीलंका

मध्य एशिया

न्यूजीलैण्ड कॉन्गो बेसिन

ग्वाटेमाला मध्य अफ्रीका

अमेरिका, कनाडा ब्राजील, पेरू व कोलंबिया पूर्वी, मध्य एवं दक्षिणी अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया

नीग्रो

रेड इंडियन

बोरो

बंतू एबोरिजिन्स फेल्लाह

मंगोलियन

मिस्र मंगोलिया

कुबु

सुमात्रा

goo

453

लौंग का द्वीप ग्रेनाइट सिटी एम्पायर सिटी

ब्रॉडवे

विश्व एवं भारत के भौगोलिक क्षेत्रों के

उपनाम

आँसुओं का द्वार यूरोप का खेल का मैदान

मध्यरात्रि के सूर्य का देश

उपनाम

उत्कर्ष प्रकाशन

देश / स्थान जंजीबार एवरडीन (स्कॉटलैंड) न्यूयॉर्क

(महान श्वेत मार्ग) न्यूयॉर्क बाब-अल-मंडेव स्विट्जरलैण्ड नॉर्वे

डायमण्ड हार्बर कोयला नदी

विश्व का कहवा पात्र उत्तर प्रदेश का जावा

नवाबों का नगर

बिहार का शोक

पश्चिम का बेबीलोन

सात टापुओं का नगर जुड़वाँ नगर

भारत का पिट्सबर्ग कर्नाटक का रत्न

कोलकाता (भारत)

राइन नदी

ब्राजील गोरखपुर

लखनऊ

कोसी नदी

रोम

मुं���ई

हैदराबाद- सिकन्दराबाद

जमशेदपुर मैसूर ब्राजील

केरल

साँपों का देश

लिली का देश

कनाडा

दक्षिण का कश्मीर

पवित्र भूमि

येरूसलम / फिलिस्तीन

भारत का मैनचेस्टर

अहमदाबाद

लैण्ड ऑफ थण्डरवोल्ट, वज्रपात की

भूमि

भूटान

भारत का पेरिस

जयपुर

पवन चक्कियों की भूमि

हॉलैण्ड

बगीचों का शहर

बेंगलुरु

इस्पात नगरी

जमशेदपुर

प्यासी भूमि का देश

चारागाहों का स्वर्ग

स्वर्णिम पैगोडा का देश

ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड म्यांमार

उत्तर भारत का मैनचेस्टर

कानपुर

उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था का

गंगा नदी

संसार की छत

पामीर का पठार

मेरुदण्ड दक्षिण गंगा

गोदावरी

डूबते सूर्य का देश

ब्रिटेन

उगते सूर्य का देश

जापान

goo

दस लाख हाथियों की भूमि

लाओस

पोप का शहर

रोम

चीनी का कटोरा, एण्टीलीज का मोती

क्यूबा

बंगाल का शोक

दामोदर नदी (भारत)

चीन का शोक

ह्वांग हो या पीली नदी

गगनचुंबी इमारतों का नगर,

अट्टालिकाओं का शहर

हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका

भारत का प्रवेश द्वार

मुंबई

हजार गुफाओं का देश

फिनलैंड

हजारों झीलों वाला देश

सुनहरी ऊन की भूमि, कंगारू का देश

फिनलैंड

ऑस्ट्रेलिया

पूर्व का मैनचेस्टर

ओसाका (जापान)

गुलाबी नगरी

जयपुर (भारत)

स्वर्ण मंदिर का शहर

सबसे लंबी सुरंग (सड़क)

अमृतसर (भारत)

मोतियों का द्वीप

बहरीन

सुरंग

भूमध्य सागर की कुंजी या द्वार

जिब्राल्टर

अग्नि द्वीप

आइसलैंड

सबसे लंबी सुरंग (रेलवे)

पीरपंजाल (11.215 km), जम्मू-

अंधकार का महाद्वीप

अफ्रीका

सबसे बड़ा डेल्टा

नील का वरदान

मिस्र

सबसे बड़ा कोरीडोर

कम्बोडिया का शोक

मंदिरों व घाटों का शहर

संसार का रोटी-भंडार

मेकांग नदी वाराणसी प्रेयरीज (उत्तरी अमेरिका)

कश्मीर

सुंदरवन डेल्टा (पश्चिम बंगाल)

सबसे ऊँचा झरना (455 मी.) कुँचीकल (वराही नदी) कर्नाटक

रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु)

सबसे लंबी सड़क

ग्रैंड ट्रंक रोड

सबसे ऊँचा दरवाजा

भारत का मसालों का बगीचा

केरल

सबसे लंबी नदी

बुलन्द दरवाजा गंगा नदी

454

न्यूयॉर्क इरिट्रिया, जिबूती,

इथियोपिया और सोमालिया

भारत में सर्वाधिक लंबा, बड़ा एवं ऊँचा

सबसे बड़ा अजायबघर सबसे बड़ा गुम्बज

सर्वाधिक वर्षा का स्थान

सबसे बड़ा लीवरपुल सबसे बड़ा रेगिस्तान

सबसे बड़ा गुफा मंदिर समुद्र के ऊपर सबसे लंबा पुल

सबसे बड़ी मस्जिद सबसे ऊँची चोटी

कोलकाता अजायबघर गोल गुम्बज (बीजापुर) मॉसिनराम (मेघालय) हावड़ा ब्रिज (कोलकाता) थार (राजस्थान) कैलाश मंदिर (एलोरा) अटल सेतु (मुम्बई- नवी मुम्बई) जामा मस्जिद (दिल्ली)

गॉडविन ऑस्टिन (2)

चेनानी नाशरी सुरंग (9.28 km), जम्मू-कश्मीर

वर्तमान में नाम :- श्यामा प्रसाद मुखर्जी

उत्कर्ष प्रकाशन

सबसे बड़ा प्राकृतिक बन्दरगाह सबसे लंबी तटरेखा वाला राज्य खारे पानी की सबसे बड़ी तटीय झील

मुंबई (महाराष्ट्र) गुजरात

भारत

संसद

रूस

ड्यूमा

चिल्का झीला (ओडिशा)

स्पेन

कोर्टेस

जर्मनी

बुण्ड्सटेग

मीठे पानी की सबसे बड़ी झील सबसे लंबी नहर

सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म

वुलर झील (जम्मू-कश्मीर) इंदिरा गाँधी नहर (राजस्थान) श्री सिद्धारुद्धा स्वामीजी, हुबली (कर्नाटक)

मंगोलिया

खुरल

ईरान

मजलिस

ताइवान

यूआन

इजरायल

नेसेट

क्रिकेट का सबसे बड़ा स्टेडियम

नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, गुजरात

जापान

डायट

सबसे अधिक आबादी वाला

मुंबई (महाराष्ट्र)

मालदीव

मजलिस

शहर

स्वीडन

रिक्सडाग

सबसे लंबा रेल मार्ग

डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी

भारत की सबसे लंबी सहायक

नॉवें

स्टोटिंग

नदी

यमुना नदी

भूटान

सोंगडू

दक्षिण भारत की सबसे लंबी

पोलैण्ड

सोजिम

गोदावरी

नदी

पाकिस्तान

नेशनल असेम्बली

सबसे लंबा बाँध

हीराकुड बाँध (ओडिशा)

नेपाल

राष्ट्रीय पंचायत

सबसे ऊँचा बाँध

टिहरी बाँध (उत्तराखंड)

मिस्र

पीपुल्स असेम्बली

सबसे बड़ा गुरुद्वारा

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

फ्रांस

नेशनल असेम्बली

सबसे बड़ा गिरजाघर

सेंट कैथेड्रल (गोवा)

बांग्लादेश

जातीय संसद

भारत का सबसे बड़ा केबल

आयरलैंड

डेल आयरन

आधारित पुल

सुदर्शन ब्रिज (गुजरात)

मलेशिया

सबसे लंबी तटरेखा वाला

आंध्र प्रदेश

अफगानिस्तान

दक्षिण भारत का राज्य

स्विट्जरलैंड

दीवान निगारा

शोरा फेडरल असेम्बली

सबसे लंबा समुद्र तट सबसे बड़ी कृत्रिम झील

मरीन बीच (चेन्नई)

तुर्की

ग्रैंड नेशनल असेम्बली

गोविंद वल्लभ पंत सागर

ऑस्ट्रेलिया

पार्लियामेंट

सबसे गहरी नदी घाटी

भागीरथी व अलकनंदा

डेनमार्क

सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित

फोल्केटिंग

सियाचीन ग्लेशियर

पार्लियामेंट

युद्ध स्थल

सबसे बड़ा नदी द्वीप

सबसे बडा तारामंडल सबसे ऊँचा हवाई पत्तन सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल) सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल) सबसे तेज चलने वाली ट्रेन सबसे ऊँची मूर्ति सबसे लंबा सड़क पुल सबसे बड़ा पशु का मेला

सबसे ऊँची मीनार

सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध

माजुली (ब्रह्मपुत्र नदी) असम बिड़ला प्लैनेटोरियम (कोलकाता) लेह (लद्दाख)

राजस्थान

कच्छ (गुजरात)

वंदे भारत एक्सप्रेस

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी (गुजरात) भूपेन हजारिका सेतु सोनपुर (बिहार) कुतुबमीनार (दिल्ली) भाखड़ा बाँध (पंजाब)

● विभिन्न देशों में संसद

देश

संयुक्त राज्य अमेरिका चीन

ब्रिटेन

संसद का नाम कांग्रेस

नेशनल पीपुल्स कांग्रे पार्लियामेंट

1.

2.

3.

कनाडा

अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

मोहिनीअट्टम नामक शास्त्रीय नृत्य की उत्पत्ति किस राज्य से

हुई थी ?

(a) आन्ध्र प्रदेश

(b) केरल

(c) तमिलनाडु

(d) ओडिशा

वर्ष 2024 में पदम विभूषण से सम्मानित पद्मा सुब्रह्मण्यम का

संबंध किस शास्त्रीय नृत्य से है?

(a) ओडिशी

(b) कुचिपुड़ी

(c) मोहिनीअट्टम

(d) भरतनाट्यम

'झावेरी बहनों' का संबंध किस शास्त्रीय नृत्य से है?

(a) मणिपुरी

(b) सत्त्रिया

(c) कथकली

(d) कत्थक

455

4.

उत्कर्ष प्रकाशन

निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का 12.

चयन कीजिए-

सूची-I (शास्त्रीय नृत्य) A. कत्थक B. ओडिशी

सूची-II (नर्तक)

1. केलु चरण महापात्रा

2. मृणालिनी साराभाई

निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए- सूची-I (त्योहार) A. चापचार कूट

B. धानुजात्रा

C. मक्कर विलक्कू

सूची-II (राज्य)

1. ओडिशा 2. केरल

3. मिजोरम

C. मोहिनीअट्टम

3. बिरजू महाराज

D. कथकली

4. सुनंदा नायर

कूट:

A

(a) 2

(b) 4

(c) 3 (d) 1

B1213

C

3

1

5.

425

OmN

D

4

3

2

D. हरेली

4. छत्तीसगढ़

कूट:

A

B

C

D

(a) 2

3

1

4

(b) 4

2

3

1

(c) 1

4

2

3

(d) 3 1

2

4

4

(a) कुचिपुड़ी से

यामिनी कृष्णमूर्ति का संबंध है-

13. निम्नलिखित में से कौन-सा महोत्सव मध्य प्रदेश राज्य से

संबंधित नहीं है?

(a) निमाड़ी मिर्ची महोत्सव

(b) सत्त्रिया से

(c) भरतनाट्यम से

(d) मणिपुरी से

6.

7.

8.

निम्नलिखित में से किस शास्त्रीय नृत्य को दाशीअट्टम व

अग्निनृत्य भी कहा जाता है?

(a) भरतनाट्यम

(b) कुचिपुड़ी

(c) कथकली

(d) कत्थक

यूनेस्को के मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में छऊ नृत्य

को कब शामिल किया गया था?

(a) वर्ष 2006

(b) वर्ष 2008

(c) वर्ष 2010

(d) वर्ष 2012

निम्नलिखित में से कौन-सा सिन्धु घाटी सभ्यता का पुरातात्विक स्थल जो यूनेस्को विश्व विरासत में शामिल है?

(a) दैमाबाद

(b) धोलावीरा

(c) कालीबंगा

(d) लोधल

निम्नलिखित कथनों में से असत्य कथन का चयन कीजिए- यूनेस्को विश्व धरोहर

(b) खजुराहो महोत्सव

(c) फ्लेमिंगो महोत्सव

(d) मांडू महोत्सव

14.

(a) तेलंगाना

(c) बिहार

बथुकम्बा, बोनालू किस राज्य के प्रमुख त्योहार है?

(b) असम

(d) मणिपुर

15. ओणम किस राज्य में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है?

(a) महाराष्ट्र

(c) ओडिशा

(b) तमिलनाडु (d) केरल

16. अम्बूबाची मेले का संबंध किस राज्य से है?

(a) बिहार

(c) छत्तीसगढ़

(a) गोवा

(b) असम

(d) नागालैण्ड

17. शिग्मो महोत्सव कहाँ मनाया जाता है?

(c) झारखण्ड

(b) मिजोरम

(d) आन्ध्र प्रदेश

18. निम्नलिखित में से असुमेलित कथन का चयन कीजिए-

मेला

(a) गंगासागर मेला

(b) सूरजकुण्ड मेला

(c) पुष्कर मेला

(d) माधवपुर मेला

राज्य

-

पश्चिम बंगाल

-

हरियाणा उत्तर प्रदेश गुजरात

19. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से मिलान कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (महोत्सव)

A. कथपथी रथ महोत्सव

सूची-II ( राज्य )

1. ओडिशा

9.

(a) रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर

(b) नालंदा महाविहार

(c) रानी की वाव

(d) ली कार्बुजियर का वास्तुशिल्प

10.

(a) तमिलनाडु

(c) कर्नाटक

��हान जीवित चोल मंदिर किस राज्य में स्थित है?

(b) महाराष्ट्र

(d) बिहार

11. सरहुल त्योहार किस राज्य में मनाया जाता है?

(a) मेघालय

(c) गुजरात

राज्य

कर्नाटक

बिहार

B. काला घोड़ा महोत्सव

गुजरात

C. कोणार्क महोत्सव

2. केरल 3. छत्तीसगढ़

चण्डीगढ़

D. मडई महोत्सव

4. महाराष्ट्र

कूट:

A

(a) 3

(b) 1

(c) 2

(d) 4

3234m

B

3

UP NPN

C

1

2

1

2

D443-

1

456

(b) झारखण्ड

(d) महाराष्ट्र

20.

उत्कर्ष प्रकाशन

भारतीय फिल्म जगत में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान कौन-

सा है?

(a) ज्ञानपीठ पुरस्कार

29. जाट-जाटिन किस राज्य का लोक नृत्य है?

(b) दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

(c) पद्म विभूषण

(d) सरस्वती पुरस्कार

21.

तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी को भारत रत्न कब दिया

गया था?

(a) वर्ष 1966

(c) वर्ष 1975

(b) वर्ष 1980

(d) वर्ष 1971

22. वीरता पुरस्कारों में सर्वोच्च पुरस्कार कौन-सा है?

(a) अशोक चक्र

(c) परमवीर चक्र

(b) महावीर चक्र

(d) कीर्ति चक्र

23. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रथम साहित्यकार कौन थे ?

24.

24

(a) जी. शंकर कुरूप

(b) दामोदर मौजो

(c) उमाशंकर जोशी

(d) भीमसेन जोशी

निम्नलिखित में से भारत रत्न पाने वाला प्रथम खिलाड़ी कोन हैं?

(a) कपिल देव

(b) सुनील गावस्कर

(c) रवि शास्त्री

(d) सचिन तेन्दुलकर

निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य आन्ध्र प्रदेश राज्य से संबंधित

25.

नहीं है?

(a) वीरनाट्यम

(b) भामाकल्पम

(c) थांगटा

(d) धमीशा

26. लावणी लोक नृत्य किस राज्य में किया जाता है?

(a) महाराष्ट्र

(b) छत्तीसगढ़

(c) बिहार

(d) पश्चिम बंगाल

27.

(a) गोवा (b) ओडिशा (c) असम

(d) बिहार

30. निम्नलिखित में से असत्य कथन है?

लोक नृत्य

राज्य

(a) पुंगचोलम

(b) देखनी

(c) कोलाट्टम

नागालैण्ड

गोवा

तमिलनाडु

(d) चरकूला

उत्तर प्रदेश

31.

निम्नलिखित में से केरल राज्य का लोक नृत्य है-

(a) बोमइ अट्टम

(b) सरलमकाई

(c) मदुल अट्टम (d) सिंगी छाम

32. संकटग्रस्त प्राणियों के लिए 'रेट डाटा' बुक कोन जारी करता है?

(a) IUCN (b) WWF (c) AU

(d) UNFCC

33. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की स्थापना कब हुई थी?

34.

(a) 24 अक्टूबर, 1968

(b) 15 अगस्त, 1969 (c) 7 अक्टूबर, 1965

(d) 1 अप्रैल, 1963

भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान का मुख्यालय कहाँ स्थित है? (a) लखनऊ

(c) नई दिल्ली

(b) बेंगलुरु

(d) मुम्बई

35. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-11

रउफ किस केन्द्र शासित प्रदेश में किया जाने वाला लोक नृत्य है?

(a) लक्षद्वीप

(b) जम्मू कश्मीर

(d) पुडुच्चेरी

निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

(c) चण्डीगढ़

28.

चयन कीजिए-

सूची-I (लोकनृत्य)

A. थेय्यम

सूची-II ( राज्य )

1. मिज़ोरम

B. यक्षगान

C. चापचार कूट D. पिण्डवानी

2. छत्तीसगढ़

3. केरल

4. कर्नाटक

कूट:

A

(a) 3

(b) 2

(c) 3

1

(d) 1

B4I23

UPMFN

C D

1

3

1

2 4

P2444

36.

सूची-I संगठन

A. भारतीय रिज़र्व बैंक

B. बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण

C. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन

D. केन्द्रीय वन अनुसंधान संगठन

कूट:

A B

C

D

(a) 3

1

4

2

(b) 2

(c) 1

MNM

3

1

4

2 3

4

1

मुख्यालय 1. हैदराबाद

2. देहरादून

3. मुम्बई

4. नई दिल्ली

(d) 4 3 2

केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है?

(a) कोयम्बटूर

(b) कटक

457

(c) नागपुर (d) लखनऊ

उत्कर्ष प्रकाशन

45. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए-

37.

निम्नलिखित में से किस भारतीय ने ओलम्पिक खेलों में प्रथम

व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था?

(a) नीरज चोपड़ा

(b) सुशील कुमार

(c) विश्वनाथन आनन्द

(d) अभिनव बिन्द्रा

38.

(a) देवधर ट्रॉफी

(b) ध्यानचंद ट्रॉफी

निम्नलिखित में से कौन-सी ट्रॉफी क्रिकेट खेल से संबंधित नहीं है?

(c) गावस्कर बॉर्डर ट्रॉफी

(a) विश्व हिन्दी दिवस

-

10 जनवरी

(b) राष्ट्रीय बालिका दिवस

-

24 जनवरी

(c) विश्व आर्द्र भूमि दिवस

4 फरवरी

(d) राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

28 फरवरी

46.

भारत के चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस कब मनाया जाता है?

(a) 25 जनवरी

(b) 22 मई

(d) सी. के. नायडू ट्रॉफी

39. दिव्यकृति सिंह का संबंध किस खेल से है?

40.

41.

(a) घुड़सवारी

(b) गोल्फ

(c) टेनिस

(d) तलवारबाजी

अनब्रेकेबल एन ऑटोबायोग्राफी किसकी है?

(a) पी.टी. उषा

(b) सायना नेहवाल

(c) पी.वी. सिंधु

(d) मैरी कॉम

वर्ष 2028 का ओलम्पिक खेल किस देश में प्रस्तावित है?

(a) ऑस्ट्रेलिया

(b) फ्रांस

(c) संयुक्त राज्य अमेरिका

(d) जापान

भारत ने किस वर्ष राष्ट्रमण्डल खेलों की मेजबानी की थी?

42.

(a) 1982

(b) 2010

(c) 2002

(d) 2018

43. एशियाई खेलों का प्रथम आयोजन कब व कहाँ हुआ था?

44.

(a) वर्ष 1951 में टोकियो

(b) वर्ष 1951 में मनीला

(c) वर्ष 1951 में जकार्ता

(d) वर्ष 1951 में नई दिल्ली

निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से मिलान कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-II ( खिलाड़ियों की संख्या)

सूची-I खेल

A. खो-खो

(1)5

B. वाटर पोलो

(2) 8

C. बास्केटबॉल

(3)9

D. जिम्नास्टिक

(4) 7

कूट:

A B C D

D-3

(a) A-2 B-4 C-1 (b) A-3 B-4 C-1 D-2

(c) 21 जून

(d) 5 जून

47. भारतीय संविधान दिवस' कब मनाया जाता है?

(a) 26 नवम्बर

(b) 15 अगस्त (c) 26 जनवरी

(d) 24 अक्टूबर

48. निम्नलिखित में से असत्य युग्म का चयन कीजिए-

(a) विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस 2 दिसम्बर

(b) राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 4 सितम्बर

(c) विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई

(d) राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस

29 जून

49. अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है-

(a) 26 जुलाई को

(c) 10 दिसम्बर को

(b) 9 अगस्त को

(d) 16 सितम्बर को

50. राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है?

(a) 19 अगस्त

(c) 14 जून

(b) 8 मई (d) 24 दिसम्बर

51. गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है?

(a) बिहार

(c) उत्तराखण्ड

(b) छत्तीसगढ़

(d) कर्नाटक

52. निम्नलिखित में से असत्य युग्म का चयन कीजिए-

-

(a) राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

- उत्तर प्रदेश

(b) नामदफा राष्ट्रीय उद्यान

अरुणाचल प्रदेश

(c) नामेरी राष्ट्रीय उद्यान

-

असम

आन्ध्र प्रदेश

(d) पापिकोंडा राष्ट्रीय उद्यान

53. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से मिलान कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (राष्ट्रीय उद्यान)

A. जिम कार्बेट

B. नामेरी

C. कुनो D. सिमलीपाल

कूट:

A

B C D

(a) 4 2 (b) 4

(c) 4

B231-

3 1

WNNwn

NW0

OP-MN

(c) A-1 B-3 C-2 D-4

3

(d) A-4 B-1 C-3 D-2

(d) 4

3

2

458

सूची-II (राज्य)

1. असम

2. मध्य प्रदेश

3. ओडिशा

4. उत्तराखण्ड

उत्कर्ष प्रकाशन

62.

भारत का राष्ट्रीय गीत 'वन्देमातरम्' के रचयिता कौन हैं? (a) बंकिम चन्द्र चटर्जी

निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित

54.

नहीं है?

(a) मोलिंग राष्ट्रीय उद्यान

(b) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

(c) मानस राष्ट्रीय उद्यान

(d) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान

55. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है?

(a) कर्नाटक

(b) महाराष्ट्र

(c) पश्चिम बंगाल

(d) उत्तर प्रदेश

(b) रवीन्द्रनाथ टैगोर

(c) बाल गंगाधर तिल��

(d) लाला लाजपत राय

63.

भारत के राष्ट्रीय वृक्ष का नाम क्या है?

(a) खेजड़ी

(b) बरगद

(c) रोहिड़ा

(d) नीम

64. पण्डित रविशंकर किस वाद्य यंत्र से संबंधित है?

56.

भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान कौन-सा है?

(a) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

(b) जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान

(c) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान

(d) कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

57. पेरियार राष्ट्रीय उद्यान भारत के किस राज्य में स्थित है?

(a) केरल

(b) तमिलनाडु

(c) महाराष्ट्र

(a) सारंगी

(b) सितार

(c) वीणा

(d) सरोद

65. शहनाई के प्रसिद्ध वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को भारत रत्न पुरस्कार से कब नवाजा गया था?

(a) वर्ष 2001

1. राजस्थान

B. मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान

C. सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान D. नोक्रेक राष्ट्रीय उद्यान

2. पश्चिम बंगाल 3. मेघालय

(d) आन्ध्र प्रदेश

58. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से मिलान कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (राष्ट्रीय उद्यान)

A. बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान

सूची-II ( राज्य )

(b) वर्ष 2005

(c) वर्ष 1992

(d) वर्ष 1980

66. बदरुद्दीन डागर तथा विश्वमोहन भट्ट किस वाद्य यंत्र से संबंधित हैं?

(b) सरोद

(d) वीणा

निम्नलिखित में से कौन प्रसिद्ध संतूर वादक हैं?

(a) तबला

(c) शहनाई

67.

(a) गणेश राजगोपालन

4. तमिलनाडु

(b) शिवकुमार शर्मा

कूट:

(c) विलायत खान

A B

C

D

(a) 4 3

1

2

(b) 3

2

1

4

(c) 2 4

1

3

(d) 1 3

2

4

59.

(a) 22

(c) 25

(b) 24

(d) 23

60.

(a) कलकत्ता अधिवेशन 1896

(b) सूरत अधिवेशन 1907

(c) कलकत्ता अधिवेशन 1911

(a) केवल 1 व 3

(c) केवल 1 व 4

61.

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के चक्र में कुल कितनी तीलियाँ हैं?

राष्ट्रगान को सर्वप्रथम कांग्रेस के किस अधिवेशन में गाया गया था?

(d) लखनऊ अधिवेशन 1916

निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित है?

1. भारतीय राष्ट्रीय पंचांग शक संवत् 2. भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घड़ियाल

3. भारत का राष्ट्रीय फूल

4. भारत का राष्ट्रीय पशु

-

(d) किशन महाराज

कृत्रिम उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपण करने वाला प्रथम देश

कौन था?

(b) संयुक्त राज्य अमेरिका

(d) रूस

69. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I

A. भारत का प्रथम राष्ट्रपति B. भारत का प्रथम प्रधानमंत्री C. भारत का प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति D. भारत का प्रथम गृहमं���्री

कूट:

A

BT

D442M

UNF

C

गुलाब

(a) 3

1 2

बाघ

(b) 2

(b) केवल 2 व 4

(c) 4

(d) केवल 2 व 3

(d) 1

3-2

3 1

1

3

2 4

3

459

सूची-II

1. पण्डित जवाहरलाल नेहरू

2. सरदार वल्लभ भाई पटेल 3. डॉ. जाकिर हुसैन 4. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

68.

(a) जापान

(c) चीन

70.

71.

भारत की प्रथम महिला केन्द्रीय मंत्री कौन थी?

(a) सरोजिनी नायडू

(b) सुचेता कृपलानी

(c) शन्नो देवी

(d) राजकुमारी अमृत कौर

उत्कर्ष प्रकाश

निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म का चयन कीजिए- (a) भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री प्रतिभा पाटिल

(b) मिस वर्ल्ड बनने वाली प्रथम भारतीय महिला रीता फारिया

(c) उच्चतम न्यायालय की प्रथम महिला न्यायाधीश फातिमा बीबी (d) संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रथम महिला अध्यक्ष विजयालक्ष्मी पण्डित

72. अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की सदस्य बनने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन है? (a) स्मृति ईरानी

(b) निर्मला सीतारमण

(c) आनन्दीबेन पटेल

(d) नीता अम्बानी

73. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I

A. भारत रत्न से सम्मानित प्रथम महिला

B. ओलम्पिक में पदक जीतने वाली प्रथम

महिला

C. अशोक चक्र पाने वाली प्रथम महिला

76. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना किस समिति की सिफारिश पर की गई थी ?

(a) अशोक मेहता समिति

(b) राजमन्नार समिति

(c) रघुराम राजन समिति

(d) शिवरमन समिति

77. निम्नलिखित में से राष्ट्रीय आय से संबंधित समिति है-

(a) स्वर्ण सिंह समिति

(b) पी.सी. महालनोबिस समिति

(c) खुसरो समिति

(d) सी. रंगराजन समिति

78. संविधान से संबंधित मूल अधिकार उपसमिति का अध्यक्ष किसको बनाया गया था?

79.

सूची-II

1. कर्णम मल्लेश्वरी

2. नीरजा भनोट

3. लीला सेठ

D. उच्च न्यायालय की प्रथम महिला मुख्य 4. इन्दिरा गाँधी

न्यायाधीश

ब्रिटिश संसद का सदस्य बनने वाला प्रथम भारतीय कौन था?

(a) एस. वारदाचारियार

(b) अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर

(c) जे. बी. कृपलानी

(d) एच.सी. मुखर्जी

निम्नलिखित में से किस समिति ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' का

सुझाव दिया था?

(a) रामनाथ कोविंद समिति

(b) तारापोर समिति

(c) विजय केलकर समिति

(d) सत्यम समिति

80. निम्नलिखित में से ग्रामीण व लघु उद्योगों से संबंधित समिति

कौन-सी है?

(a) सुखमय चक्रवर्ती समिति

(b) कर्वे समिति

(c) महाजन समिति

(d) एम. एन. गोइपोरिया समिति

81. गरीबी आकलन से संबंधित समिति कोन सी है?

(a) सी. रंगराजन समिति

कूट:

A B

C

D

(a) 4

2

1

3

(b) 3

4

2

1

(c) 4 1

2

3

(d) 2 3

4

1

74.

(a) भीमराव अम्बेडकर

(b) दादा भाई नौरोजी

(c) महात्मा गाँधी

(d) जवाहर लाल नेहरू

75.

निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (समिति)

A. प्रारूप समिति

(b) भगवती समिति

(c) सुरेश तेन्दुलकर समिति

(d) उपर्युक्त समिति

82.

(a) चाणक्य

(c) शूद्रक

सूची -II (अध्यक्ष)

83.

मृच्छकटिकम् के लेखक कौन हैं?

निम्नलिखित में से असत्य युग्म है-

1. राजेन्द्र प्रसाद

पुस्तक

2. जवाहर लाल नेहरू

(a) काव्यमीमांसा

(b) बुधचरित

(b) विशाखदत्त

(d) कल्हण

B. संघ संविधान समिति

C. संचालन समिति

D. कार्य संचालन समिति

कूट:

A B C

D

(a) 3 (b) 3

4

1

2

1

4

(c) 3

1

4

1

NPN

(d) 3 2

UN724

०-

3. भीमराव अम्बेडकर

4. के. एम. मुंशी

460

(c) विनय पत्रिका

(d) गीत गोविन्द

लेखक

राजशेखर

बाणभट्ट

तुलसीदास

जयदेव

84. निम्नलिखित में से कालिदास द्वारा रचित ग्रन्थ नहीं है?

(a) मेघदूत

(b) रघुवंशम

(c) अभिज्ञान शाकुन्तलम

(d) मालतीमाधव

85. दुर्गेश नंदिनी व आनन्दमठ के रचयिता कौन हैं?

(a) महर्षि वाल्मीकि

(b) अरविन्द घोष

(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर

(d) बंकिम चन्द्र चटर्जी

उत्कर्ष प्रकाशन

अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह में कौन-सी जनजाति का निवास स्थल है?

92.

(a) जारवा

(b) शोम्पेन

86. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (लेखक)

A. विष्णु शर्मा

सूची-II (पुस्तक) 1. भारत-भारती

B. मैथिलीशरण गुप्त

2. मिताक्षरा

(c) सेंटेनली

(d) उपर्युक्त सभी

93. गारो, खासी, जयंतिया जनजातियाँ किस राज्य में निवास करती है?

(a) मेघालय

C. वात्सयायन

D. विज्ञानेश्वर

कूट:

A

B

C

D

(a) 4

1

3

2

(b) 1

3

2

4

(c) 3

4

1

2

1

(d) 2 3 4

3. कामसूत्र

4. पंचतंत्र

87. गुलामगिरी पुस्तक के लेखक कौन हैं?

(a) ज्योतिबा फूले

(b) मिजोरम

(c) नागालैण्ड

(d) मणिपुर

94. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का चयन कीजिए-

सूची-I (जनजाति)

A. गुज्जर, बक्करवाल

B. डाफला, मिरी, अबोर

C. कालबेलिया, भील, गरासिया D. येरवा, इरूंगा, पिक्की

सूची-II ( राज्य )

1. अरुणाचल प्रदेश 2. कर्नाटक

3. जम्मू कश्मीर

4. राजस्थान

(b) तुलसीदास

(c) सूरदास

(d) रसखान

88.

निम्नलिखित में से असुमेलित है-

लेखक

(a) फिरदौसी

(b) अलबरूनी

(c) अबुल फजल

(d) हरिषेण

पुस्तक

शाहनामा

किताबुल हिन्द

पद्मावत प्रयाग प्रशस्ति

89. निम्नलिखित में से कौन महाकाव्य कविता 'कामायनी' के

लेखक हैं, जिसे हिन्दी की महानतम साहित्यिक कृतियों में से

एक माना जाता है?

कूट:

A

B

C

D

(a) 1

3

4

2

(b) 2

4

1

3

(c) 3

1

4

2

(d) 1

2

3

4

95. अहोम जनजाति भारत के किस राज्य से संबंधित है?

96.

(a) त्रिपुरा

(b) उत्तराखण्ड

(c) नागालैण्ड

(d) असम

निम्नलिखित में से किस राज्य में कुकी व मेइती जनजातियाँ

मुख्य रूप से निवास करती है?

(a) सूर्यकांत त्रिपाठी

(b) जयशंकर प्रसाद

(c) रामधारी सिंह दिनकर

(a) मिजोरम

(d) मुंशी प्रेमचंद

(b) मणिपुर

90.

भारत के निम्नलिखित में से किन राज्यों में 'थारू जनजाति' का

(c) मेघालय

निवास स्थल है?

(d) त्रिपुरा

(a) पश्चिम बंगाल और असम

(b) झारखण्ड और छत्तीसगढ़

(c) उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश

(d) मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र

निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा सही नहीं है?

जनजाति

91.

(a) मोपला

-

मूल राज्य

(b) संथाल (c) भील (d) मेड़ती

केरल सिक्किम मध्य प्रदेश

मणिपुर

461

97. बुशमैन जनजाति का निवास स्थल है-

(a) सहारा मरुस्थल

(b) धार मरुस्थल

(c) कालाहारी मरुस्थल

(d) नूबियन मरुस्थल

98. संयुक्त राज्य अमेरिका के मूल निवासी क्या कहलाते हैं?

(a) फेल्लाह

(b) रेड इण्डियन

(c) यूपिक

(d) अफरीदी

99.

उत्कर्ष प्रकाशन

निम्नलिखित में से 'प्यासी भूमि का देश' किसे कहा जाता है?

(a) जापान

(b) ऑस्ट्रेलिया

(c) ब्राजील

(d) रूस

100. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

चयन कीजिए-

सूची-I (उपनाम)

सूची-II (देश)

A. मध्यरात्रि के सूर्य का देश

1. स्विट्जरलैण्ड

B. यूरोप का खेल मैदान

2. मिस्र

C. झीलों का देश

3. नॉर्वे

D. नील का वरदान

4. फिनलैण्ड

कूट:

A B C

D

(a) 3

1

4

2

(b) 4

2

1

3

(c) 1

4

2

3

(d) 2

3

1

4

WAN

ONM

101. असुमेलित कथन का चयन कीजिए-

उपनाम

(a) भारत का पिट्सबर्ग

(b) सात टापुओं का नगर

(c) नवाबों का नगर

(d) भारत का पेरिस

-

-

शहर

जमशेदपुर मुम्बई

लखनऊ

बेंगलुरु

102. भारत में मसालों का बगीचा किस राज्य को कहा जाता है?

(a) आन्ध्र प्रदेश

(b) तमिलनाडु (c) केरल

(d) महाराष्ट्र

103. भारत का प्रवेश द्वार किस शहर को कहा जाता है?

(a) कोलकाता

(b) कोच्चि

(c) चेन्नई

(d) मुम्बई

104. निम्नलिखित में से किसे 'डूबते सूर्य का देश' कहा जाता है?

(a) हॉलैण्ड

(b) ब्रिटेन

(c) लाओस

(d) म्यांमार

105. भारत के किस शहर को 'डायमण्ड हार्बर' कहा जाता है?

(a) कोलकाता

(b) गोरखपुर

(c) कानपुर (d) मैसूर

106. विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' भारत के किस राज्य में स्थित है?

(a) गुजरात (b) पश्चिम बंगाल

(c) तमिलनाडु

(d) महाराष्ट्र

107. निम्नलिखित में से कौन-सा झरना (जलप्रपात) भारत का सबसे ऊँचा झरना है?

(a) दूधसागर जलप्रपात

(b) शिवसमुद्रम जलप्रपात

(c) जोग / गरसोप्पा जलप्रपात

(d) कुंचिकल जलप्रपात

108 क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?

(a) राजस्थान

(b) उत्तर प्रदेश

(c) तमिलनाडु

(d) पश्चिम बंगाल

109. भारत में सबसे बड़ा पशुओं का मेला कहाँ लगता है?

(a) बाड़मेर, राजस्थान

(b) सोनपुर, बिहार

(c) जबलपुर, मध्य प्रदेश

(d) हिसार, हरियाणा

(a) सबसे बड़ी मस्जिद

110. निम्नलिखित में से असत्य युग्म का चयन कीजिए-

(b) सबसे बड़ा गुम्बज

(c) सबसे ऊँचा दरवाजा (d) सबसे लम्बा बाँध

जामा मस्जिद

गोल गुम्बज

बुलन्द दरवाजा

टिहरी

111. भारत में सबसे लम्बी सड़क सुरंग कौन-सी है ?

(a) पीर पंजाल सुरंग

(b) चेनानी नाशरी सुरंग

(c) जवाहर सुरंग

(d) रोहतांग सुरंग

112. भारत के सबसे बड़े गुफा मन्दिर का क्या नाम है?

(a) कैलाश मन्दिर

(b) सूर्य मन्दिर

(c) बृहदेश्वर मन्दिर

(d) जगन्नाथ मन्दिर

113. निम्नलिखित में से भारत की खारे पानी की सबसे बड़ी झील है-

(a) पुलिकट झील

(b) कोलेरू झील

(c) चिल्का झील

(d) डेगाना झील

114. निम्नलिखित में से असत्य युग्म का चयन कीजिए-

462:

(a) सबसे लम्बी तटरेखा वाला राज्य गुजरात

(b) सबसे अधिक आबादी वाला शहर मुम्बई (c) सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली

(d) सबसे बड़ा प्राकृतिक बन्दरगाह कांडला

उत्कर्ष प्रकाशन

115. निम्नलिखित में से किस देश की संसद को 'डायट' कहा जाता है?

41. [C]

42. [b]

43. [d]

44.[b]

45. [C]

(a) जापान

46.[a]

47.[a]

48. [b]

49.[C]

50. [d]

(b) इजरायल

51. [b]

52.[a]

53.[c]

54.[a]

55.[d]

(c) मालदीव

56. [b]

57. [a]

58. [C]

59. [b]

60. [C]

(d) स्पेन

61. [C]

62.[a]

63. [b]

64. [b]

65.[a]

116. रूस की संसद को किस नाम से जाना जाता है?

66.[d]

67. [b]

68. [d]

69. [C]

70. [d]

(a) खुरल

71.[a]

72.

[d]

73.[c]

74. [b]

75. (b)

(b) कांग्रेस

76.(d)

77. [b]

78.[c]

79. (al

80.[b]

(c)

ड्यूमा

81. [d]

82. [C]

83. [b]

84. [d]

85.[d]

(d) शोरा

86.[a]

87.[a]

88.[c]

89.[b]

90. [C]

117. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कर सही कूट का

91. [b]

चयन कीजिए-

92. [d]

93.[a]

94.[C]

95. [d]

96. [b]

97.[C]

98. [b]

99.[b]

100. [a]

सूची-I (देश)

सूची-II (संसद का नाम )

A. कनाडा

B. डेनमार्क

1. राष्ट्रीय पंचायत

101.[d]

102.[c]

103. [d]

104. [b]

105. [a]

2. पार्लियामेंट

106.[a]

107. [d)

108.[a]

109. [b]

110.[d]

3. संसद

4. फोल्केटिंग

111.[b]

112.[a]

113.[C]

114.[d]

115. [a]

116. [C]

117.[b]

118. [d]

119.[b] |

120. [C]

C. नेपाल

D. भारत

कूट:

A B

C

D

(a) 4 2

3

1

(b) 2

4

1

3

(c) 2

(d) 3

MN

3

1

4

2

1

4

118. निम्नलिखित में से किस देश की संसद का नाम 'नेशनल

असेम्बली' है?

(a) बांग्लादेश

(b) मलेशिया

(c) चीन

(d) पाकिस्तान

119. जातीय संसद किस देश की सर्वोच्च विधायी निकाय है?

(a) भूटान (b) बांग्लादेश

(c) तुर्कीये

(d) आयरलैण्ड

120. चीन की संसद का क्या नाम है?

(a) बुण्ड्सटेग

(b) सोजिम

(c) नेशनल पीपुल्स कांग्रेस

(d) पीपुल्स असेम्बली

उत्तरमाला

1.[b]

2.[d]

3. [a]

4. [c]

5.[a]

6.[a]

7.[C]

8. [b]

9.[a]

10. [a]

11. [b]

12.[d]

13. [C]

14.[a]

15. [d]

16.[b]

17.[a]

18. [C]

19.[C]

20.[b]

21.[d]

22.[c]

23.[a]

24. [d]

25. [C]

26.[a]

27. [b]

28.[a]

29. [d]

30. [a]

31. C

32.[a]

33.[b]

34. [C]

35. [a]

36.[b]

37. [d]

38.[b]

39.[a]

40. (d)

463.

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NOTE