Muhavare
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अतिरिक्त संदर्भ
यह दस्तावेज़ हिंदी भाषा विज्ञान में मुहावरों के कार्यात्मक और अर्थगत स्वरूप को रेखांकित करता है, जो संरचनात्मक भाषाविज्ञान की नींव पर आधारित है। यह शोध उन भाषाई सिद्धांतों का विस्तार करता है जो वाक्यांशों के लाक्षणिक अर्थों के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों को समझने पर बल देते हैं। भाषाविज्ञानी लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि मुहावरे केवल शब्द-समूह नहीं, बल्कि वे सांस्कृतिक प्रतीक हैं जो भाषा की ग्रहणशीलता को बढ़ाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह कार्य कोशिकीय विज्ञान और अर्थविज्ञान की उन परंपराओं से जुड़ा है, जहाँ मुहावरों का प्रयोग भाषा की व्यंजना शक्ति को पुष्ट करने के लिए किया जाता है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में, यह दस्तावेज़ साहित्यिक विमर्श और व्यावहारिक व्याकरण के बीच के सेतु को मजबूत करता है, जिससे भाषा की स्वाभाविक प्रवाहशीलता सुनिश्चित होती है।
मुहावे
❖वाक्य में जिस शब्द समूह का साधारण अर्थ न होकर विशेष अर्थ होता है,उसे मुहावरा कहते है। 'मुहावरा' पूरा वाक्य नहीं बल्कि वाक्यांश होता है। 'मुहावरा' अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ का बोध करता है। मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार होता है।
◆ मुहावरे का प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं किया जाता, बल्कि यह वाक्य के बीच में प्रयुक्त होता है और वाक्य का अंग बन जाता है।
◆ मुहावरे का जब वाक्य में प्रयोग किया जाता है, तो उसकी क्रिया,लिंग,वचन,कारक आदि प्रसंग के अनुसार बदल जाते हैं।
1. कबीर-साँबी
पద-भगा
आपा खोना (अहंकार नह करना) - भक्ति और अहंकार साथ-साथ नहीं चल सकते। इधर को पाने के लिए आपा खोना ही पड़ता है। ऑधियारा मिटना (अज्ञान समास होना) - महतमा जी के अमृत वचन सुनकर मेरे सामने छाया सब ऑधियारा मिट गया। मंत्र लगना (उपाय काम आना) - पिता ने विवेकानंद को सांसारिक मार्ग पर चलाने के सारे उपाय किए, किंतु कोई भी मंत्र न लग सका। घर जलाना (स्वयं को खत्म करना) - देशभिके के मार्ग पर चलने वाले क्रांतिकारियों को पहले अपना घर जलाना पड़ता है।
2.मीरा-पद
लाज रखना (सम्मान की रक्षा करना) - इस बार ओलंपिक में एक स्वर्ण जीतकर हमारे निशानेबाज ने भारत की लाज रख ली।
3. ब�हारी-दोहे
ट्यर्थ नाचना (बेकार की भागदौड़) - असान में पड़ा हुआ मनुष्य जीवन-भर टयर्थ नाचते-नाचते उम्र खो देता है।
4. मेयिलिशरण गुस-मनुष्यता
बाहु बढ़ाना (सहायता करना)-परमात्मा हर दुष्टी को उबारने के लिए बाहु बढ़ाता है। विपतित ढकेलना (संकटों को दूर करना)-जुड़ाफ़ लोग अपने सामने आई हर विपतित को ढकेलकर आगे बढ़ जाते हैं।
5.वीरन डंगवाल-तोप
मुह बंद होना (चुप होना, शांत होना)-जिस दिन से वह चोरी करता पकड़ा गया है, उसका मुह बंद हो गया ।
8. कैफ़ी आजमी-कर चले हम फिदा
सिर झुकना (परास्त होना)-पाकिस्तान-भारत के बीच चार युद्ध हुए हैं। सभी में पाकिस्तान का सिर झुका है। मौत से गले मिलना (सहर्ष बलिदान देना)-इस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा ने आतंकवादियों के ठिकाने पर सीधे आक्रमण किया और मौत से गले मिल गया। सिर पर कफन बाँधना (बलिदान के लिए तैयार होना)-जो बहादुर कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे सिर पर कफन बाँधकर कर्म किया करते हैं। हाथ तोड़ना (करारा जवाब देना, युद्ध का जवाब करारे युद्ध से देना) - जो भी तुम्हारे विरुद्ध हाथ उठाए, तुम उसके हाथ तोड़ दो। हाथ उठना (आक्रमण होना)-इससे पहले कि शेष का हाथ तुम्हारी ओर उठे, तुम उसे करारा जवाब दो।
1. प्रेमचంద-बड़े भाई साहब
गदा-भाग
Definition
आँख फोड़ना: अत्यधिक ध्यान से पढ़ना, प्रायः रात में देर तक।
प्राण सूखना (डर लगना)-सामने शेर को दहाड़ता देखकर मेरे प्राण सूख गए। पहाड़ होना ( बड़ी मुसीबत होना)-मंच पर खड़ होकर दो घंटे बोलना मेरे लिए पहाड़ था। हँसी-खेल होना (छोटी-मोटी बातें)-पूरे बोड़ में प्रथम आना कोई हँसी-खेल नहीं है। आँख फोड़ना (बड़े ध्यान से पढ़ना)-में रात भर पढ़ पढ़कर आँखे फोड़ता रहा और इधर परीक्षा स्थगित हो गई। खून जलाना (कह उठाना)-माता पिता अपनी संतान को सुख-सुविधा देने के लिए दिन-रात खून जलाते हैं। पास फटकना (नजदीक जाना)-प्रचार्य महोदय का रौबदாब इतना था कि कोई उनके पास तक नहीं फटक पाता था। गாदी कमाई (मेहनत की कमाई)-कोई भी मनुष्य अपनी गாदी कमाई को यू ही नहीं उड़ा सकता। लगती बात (चुभती हुई बात)-बड़े भाई साहब ऐसी-ऐसी लगती बात कहते थे कि मन विचलित हो उठता था। जिगर के टुकड़-टुकड़ होना (दिल पर भारी आघात लगना)-बम धमाकों में अपने पुत्र की मौत देखकर माँ का जिगर टुकड़-टुकड़ हो गया। हिम्मत ट्रटना (साहस समास होना)-बच्चे की मृत्यु का समाचार सुनकर पिता की हिम्मत ट्रट गई। जान तोड़ महनत करना (खूब परिश्रम करना)-खेलों में प्रथम आने के लिए लड़के जान तोड़ महनत करते हैं। हाथ डालना (काम शुरू करना)-वह बेचारा जिस भी काम में हाथ डालता है, उसी में घाटा होता है। नरशा बनाना (योजना बनाना)-मैने रात भर कल के कार्यक्रम के नरशे बनाए। पर तुमने पल-भर में कार्यक्रम समास कर दिया। उड़ जाना (समास होना)-भाई भोजन के सामान में से खीर कहांड गई ?
दबे पाँव आना (चोरी-चोरी आना)-रात को बिलली ऐसे दबे पाँव आई कि मुझे उसके आने का पता ही नहीं चला। च्व्ब्च्व् खाना (भग में पड़ना)-उसकी ऊँटपट्टींग बातें सुनकर मैं च्व्ब्चर खा गया। बे-सिर-पैर की बातें (बेकार की ऊटपटांग बातें)-उसकी बे-सिर-पैर की बातें सुनते-सुनते मेरा माथा भल्ला गया। राह लेना (पीछा छोड़ना, चले जाना)-कोई काम हो तो रुको, वरना राह लो। पन्ले रंगना (बेकार में लिखना)-अच्छे विधाथी थोड़ा कित्त ठीक लिखते हैं। वे टयथें में पन्ले नहीं रंगते। पापड़ बेलना (कितन काम करना)-सफलता पानी है तो सब प्रकार के पापड़ बेलने को तैयार रहो। आट-दाल का भाव मालूम होना (किठनाई का सामना करना)-कभी नौकरी दूढ़ने निकला तो तभी तुम्हे आट-दाल का भाव मालूम होगा। जमीन पर पाँव न रखना ( बहुत खुश होना) -जिस दिन मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, उस दिन में पाँव जमीन पर नहीं रख पा रहा था। गिरह बाँधना (अच्छी तरह मन में बिठाना)-आज यह बात गिरह बाँध लो कि आतंकवाद को कुचले बिना देश में शांति नहीं हो सकती। प्रण ले लेना (मार डालना)-अब तक आतंकवादी बहुत बेकसूर लोगों के प्राण ले चुके हैं। हाथ से न जाना (चूकना)-यह सुनहरा मोका हाथ से न जाने देना। शब्द चाटना (अच्छी तरह पढ़ना)-मुझे प्रथम आने का शोक इतना था कि मैं पुस्तक का एक-एक शब्द चोट जाता था। मुठभेड़ होना (सामना होना, कलह होना)-यदि कभी मेरी उससे मुठभेड़ हुई तो मै उसे नाकों चने चबवा दूगा। हाथ-पाँव फूल जाना (परेशानी देखकर घबरा जाना)-गुड़ों के हाथों में बंदूके देखकर उसके हाथ-पाँव फूल गए। पैसे-पैसे को मुहताज होना (बहुत गरिब और मजबूर होना)-अजय की कंपनी डूब गई तो उसका परिवार पैसे-पैसे का मुहताज हो गया। मुँह चुराना (शर्म के मारे बचना)-उधार लेने के बाद प्राय: उधार लेने वाला अपने ऋणदाता से मुँह चुराने लगता है। हाथों में लेना (काम का जिम्मा लेना)-जब से मैने यह धंधा हाथों में लिया है, मेरी चाँदी हो गई है। बेराह चलना (गलत काम करना)-माता-पिता बच्चों पर इसलिए निगरानी रखते हैं कि कहीं वे बेराह न चले। जहर लगना (बहुत बुरा लगना)-डॉट खाने वाले बच्चे को डॉट का एक-एक शब्द जहर लगता है। नतमस्तक होना (सिर झुकाकर मानना)-लेखक बड़े भाई की एक-एक तरकीब के सामने नतमस्तक हो जाता था। जी ललचाना (मन में लालच आना)-क्या करू, इतनी सारी मिठाइयां देखकर मेरा जी ललचा उठता है।
: Table summary: हिंदी मुहावरों, उनके अर्थ और वाक्यों में प्रयोग की एक सूची। इसमें साये से भागना का अर्थ नाम से ही डरना और प्रान निकलना का अर्थ भयभीत होना बताया गया है। घुड़कियाँ खाना का अर्थ डपट सहना, आई हाथी लेना का अर्थ कठोर व्यवहार करना और घाव पर नमक छिड़कना का अर्थ दुख को और बढ़ाना है। खून जलाना का अर्थ बहुत मेहनत करना, तीर मारना का अर्थ बड़ी सफलता पाना और हेक्डी जताना का अर्थ घमंड दिखाना है। इसके अलावा तलवार खींचना का अर्थ लड़ाई के लिए तैयार रहना, ट्रूट पड़ना का अर्थ तेजी से झपटना, दिभाग होना और सिर फिरना दोनों का अर्थ घमंड होना है। नाम निशान मिटाना का अर्थ सब कुछ नष्ट करना, चुल्लू भर पानी देने वाला का अर्थ संकट में साथ देने वाला और दीन-दुनिया से जाना का अर्थ कहीं का न रहना है। अंधे के हाथ बेटे लगना का अर्थ अयोग्य को महत्वपूर्ण वस्तु मिलना, हाथ लगना का अर्थ प्राप्त होना, अंधा-चोट निशाना पड़ना का अर्थ अचानक कुछ मिल जाना, दाँतों पसीना आना का अर्थ बहुत अधिक परेशानी उठाना और लोहे के चने चबाना का अर्थ बहुत कठिनाई उठाना है।
2. डायरी का एक पन्ना-सोतारम सेकसरिया रंग दिखाना (प्रभाव या स्वरूप दिखाना)-तुम इसे इतना सीधा न समझो। ऐन मौक पर तुम्हे यह ऐसा रंग दिखाएगा कि इसे भूल नहीं पाओगे। ऐंडा पड़ना (डीला पड़ना)-पता नहीं, भारत सरकार आतंकवादियों को कुचलने के मामले में ஒंदी क्यां पड़ जाती है। ट्रूट जाना (बिखर जाना)-मृत्यु के साथ मनुष्य के सारे सपने ट्रूट जाते हैं। जुल्भ दाना (अत्याचार करना)-अंग्रेज़ी ने भारतीय जनता पर अनगिनत जुल्म दार।
3. तत्यां-वामीरो कथा-लीलाधर मंडलोंई सुध-बुध खोना (अपने वश में न रहना)-वामीरो की सुरदरता को देखकर ततारू सुध-बुध खो बैठा। बाट जोहना (प्रतीक्षा करना)-भारतवासी ऐसी सरकार की बाट जोह रहे हैं जो आतंकवाद को कुचल कर रख दे। आँखों में तैरना (मन में प्रकट होना)-एकात धनों में सारी बीती बातें आँखों में तैरने लगती हैं। खुशी का ठीकाना न रहना (बहुत अधिक खुशी होना)-20-20 क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीतने पर देशवासियों की खुशी का ठीकाना न रहा। आग-बबूला होना (बहुत क्रोध में आना)-बच्चों की नारேबाजी सुनकर प्राचाये महोदय आग बबूला हो गए। राह न सूडना (उपाय न मिलना)-चारों ओर आग से घिर जाने पर में ऐसा घबराया कि मुझे कोई राह न सूडी। सुराग न मिलना (पता न मिलना)-यह तो मोदी सरकार ही थी जिसने आतंकवादियों को कुछ ही दिनों में पकड़ लिया। वरना शेष सरकारों को तो बरसों तक आतंकवादियों के सुरग भी नहीं मिलते। आवाज 5ठाना (विरोध करना)-हमें अन्याय के खिलाफ आवाज 5ठानी चाहिए। एक-एक पल पहाड़ होना-(प्रतीक्षा का समय मुशिकल से बीतना)-विदेश से अपने पुत्र के आने की खबर सुनने के बाद माँ के लिए एक-एक पल पहाड़ हो रहा था। एकटक निहारना (देखते ही रह जाना)-विदेशी पर्ियटक ताजमहल को एकटक निहारते रहे। अपना राग अलापना (अपनी ही बात कहना)-अपने अहंकार में चूर रावण ने किसी की बात नहीं सुनी,वह अपना राग अलापता रहा।
4. अब कहां दूसरे के दुःख से दुःखी होने वाले-निदा फ्रांज़ली
दीवार खड़ी करना ( बाधा उत्पन्न करना)-मित्र है या शनु? जहाँ भी जाता है, वहीं मेरे सामने दीवार खड़ी कर देता है। डेरा डालना (स्थायी रूप से रहना)-ये अपराधी ยুحरी पकड़ में नहीं आते। महीनों इनकी राह में डेरा डाले बैठना पड़ता है। मारे-मारे फिरना (परेशान रहना)-राम और उसका भाई कई सालों से नौकीं के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं,परंतु अभी तक उन्हें नौकीं नहीं मिली ।
5. पत्थर में ट्री पित्यां-खीन्द केलेकर
हवा में ऊड़ना (थोथी बातें करना, ऊपरी बातें करना,यथाथं से दूर होना)-उसकी बातों पर न जाना। उसे हवा में ऊड़ने की आदत है।
6. कारतूस-हबीब तनवीर आँखों में धूल डॉकना (धोखा देना)-इस बार पुलिस की आँखों में धूल डॉकने के लिए आतंकवादियों ने रुक्ली बैंग में बम रखवाए। हाथ न आना (पकड़ा न जाना)-पता नहीं, हमारी पुलिस क्या करती रहती है। आतंकवादी वारदार करके खिसक जाते हैं, वे कभी हाथ नहीं आते। मुट्ठों भर (थोड़-से)-आतंकवादी मुट्ठों भर भी हों तो भी जन-जीवन को थरं दोते हैं। कूट-कूटकर भरना (भावना का बहुत अधिक प्रबल होना)-आतंकवादियों के मन में द्रोष की भावना कूट-कूटकर भरी रहती है। काम तमाम करना (जान से मार डालना)-पुलिस इस्पेक्टर शर्मा ने एक ही गोली में गुडे का काम तमाम कर डाला। नजर रखना (निगरानी करना)-गुसचर विभाग का काम यही है कि वह हर गतिविधि पर नजर रखे। जान बखशी करना (जान छोड़ देना)-लो, इस बार में तुम्हे जान बखशी करता हूँ। फिर से मेरे रास्ते में न आना। हवका-बवका (हैरान) - सिंह धोनी की आतिशी पारी देखकर आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी हवके-बवके रह गए। बुरा-भला कहना (खरी-खोटी सुनाना)-वकिल ने वजीर अली को बुरा-भला कहा।
1. हरिहर काका-मिथिलेशर
'संचयन' में प्रयुक्त मुहावरे
फूटी आँख नहीं सुहाना (जरा भी अच्छा न लगना)-ये लाफ्दर चैनल पर आने वाले फूहड़ हँसोंड मुझे फूटी आँख नहीं सुहाना। आँख भर आना (आँसू आना)-इस्पेक्टर शर्मा की विधवा को बिलखते देखकर सबकी आँख भर आई। धमा-चौकड़ी मचाना (उपद्व करना) - आज ये लोग गाड़ की बजाय धमाचौकड़ी मचा रहे हैं-माजरा क्या है ?
दिल पसीजना (दया का भाव जागना)-अनाथ बालक को रोते देखकर वहाँ खड़े सभी लोगों का दिल पसीज गया। तू-तू, मैं-में (इरामाइना होना)-में तो तुम्हे अंतरंग मित्र समझता था। तुम तो अभी से तू-तू, मैं-में पर उतर आए। रंगे हाथ पकड़ना (गलती करते हुए पकड़ना)-पुलिस ने चोर को रंगे हाथ पकड़ा। फिर भी वह अगर-मगर करता रहा। खूल खौलना (क्रोध उपफनना)-चोर को सफेद झूठ बोलते देखकर मेरा खूल खौल उठा। दूध की मक्खी (बेकार वस्तु, अनुपयोगी)-आजकल की नालायक संताने अपने बूढे माता-पिता को दूध की मक्खी समझती हैं। गिद्व दिधि (बुरी नजर)-पाकिस्तान कश्मीर पर सदा-से गिद्व दिधि लगाए बैठा है। फरार होना (भोग जाना)-घर पुलस को दखत हो फरार हो गया। तूती बोलना (प्रभाव होना, दबदबा होना)-देश में आजकल नरैद मोदी की तूती बोल रही है। मुँह खोलना (रहस्य बताना)-अगर मैंने अध्यापक के सामने मुँह खोल दिया तो सबको सजा मिलेगी। गूगेपन का शिकार होना (भयवश बोल न पाना)-हरिहर काका की स्थिति अच्छी नहीं थी,वह गूगेपन का शिकार हो गए। खोज-खबर लेना (जानकारी प्रास करना)-कहने को तीन भाई थे,परंतु किसी ने उनकी खोज-खबर नहीं ली। तन-बदन में आग लगना (फोधित होना)-हरिहर काका पर अत्याचार होते देख लेखक के तन-बदन में आग लग गई। कान खड़े होना (सचेत होना)-रात को बर्तन गिरने की आवाजें सुनकर हम सब के कान खड़े हो गए। हाथ से निकलना (अवसर चूकना)-महत किसी भी सूरत में जमीन हाथ से निकलने नहीं देना चाहता था। भनक तक न लगना (आभास न होना)-चोरों की योजना की किसी को भनक तक न लगी। जी-जान से जुटना (सखता महत करना)-रमेश अपनी योजना को कार्य रूप देने के लिए जी-जान से जुट गया। पर्दफाश होना (भेद खलना)-एक-न-एक दिन अपराधियों का पर्दफाश हो ही जाता है।
2. सपनी के-से दिन-गुरुदयाल सिद तार-तार होना (बुरी तरह कट-फट जाना)-काँटों में उलझकर उसके कपड़े तार-तार हो गए। तरस खाना (दया करना)-तेरी छोटी उम्र पर तरस खाकर छोड़ रहा हूँ, वरना इट-से-ईट बजा देता। आँख बचाना (डिपाना)-मैने आँख बचाने की बहुत कोशिश की किंतु उसके हृदय घड़ हो गया। दाढ़स बँधाना (हैममत देना)-दिलर पुलिस अधिकारी मोहनचंद्र शर्मा की विधवा को दाढ़स बंधाने वालों का ताँता लगा हुआ था। हाय-हाय करना (अपने कहाँ का रोना रोना)-तुम तो थोड़ा-सा भी कह नहीं सहते। जरा-सी आँच लगते ही हाय-हाय करने लगते हो। दिन गिनना (अधीर होना)-दीवाली कव आएगी-हम तो बस दिन गिन रहे हैं। सस्ता सौदா (आसान उपाय)-एम.बी.बी.एस. के लिए दूसरी बार प्रवेश-परीक्षा देने की बजाय डेंटल कोलेज में दाखिला लेना सस्ता सौदा है। खाल खींचना (बुरी तरह पीड़ा पहुँचाना)-मास्टर जी ने धमकाते हुए कहा कि मै कम न करने वालों की खाला खींच लूगा। चमड़ी उधड़ना (बुरी तरह पेश आना)-अगर तुम गुडागेरी से बाज न आए तो चमड़ी उधड़ दूगा। छाती धक-धक करना (हेभयभीत होना)-गणित की परीक्षा के नाम से मेरी छाती धक-धक करने लगती है।
3. टोपी शुकला-राதி मास्क्ल रजा दिल फड़कना (बेचैन होना)-बेटी की शादी के दिन नजदीक आते ही माँ का दिल फड़कने लगा। दिल मसोसकर रहना (इच्छा को मन में दबा कर रहना)-में डा बनना चाहती थी,लेकिन पैसों की तंगी के कारण मन मसोसकर रह गई। बरस पड़ना (एकदम से क्रोधित हो जाना)-देर रात घर लौटे पुत्र को देखकर पिता उस पर बरस पड़। मुँह न लगाना (प्यार न करना)-बुजुंगों का अपमान करने वाले लोगों को कोई मुँह नहीं लगाता। जुल्म दाना (अत्याचार करना)-अंग्रेज़ी ने भारतीयों पर बहुत जुलम दार थे। आत्मा में उत्तरना (गहराई में उत्तरना)-लाल बहादुर शास्त्री जी की सादगी सभी की आत्मा में उत्तर गई थी। मार्च विशेषण (मार्च बेनो)-मार्च डी सर्प मार्च डिशन मार्च स्वर्ग सिधारना (मृत्यु होना)-राम की दादि स्वर्ग सिद्धार गई।
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