Wild Zone

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Chapter 4 — The Distortion

सुबह Aarav ने खिड़की के सामने खड़े होकर काफी देर तक उस दीवार को देखा। वही दीवार। वही कमरा। लेकिन रात को जो हल्की नीली line उसे दिखाई दी थी, अब वहाँ कुछ नहीं था। उसने हाथ से दीवार छुई। साधारण। ठंडी। उसने knuckle से दो बार tap किया। ठक। ठक। कोई आवाज़ अलग नहीं थी। उसने फिर tap किया। कुछ नहीं।

Aarav ने धीरे से हाथ नीचे कर लिया। “मैं overthink कर रहा हूँ।” वह यह बात पिछले तीन दिनों में शायद दसवीं बार बोल चुका था। लेकिन इस बार उसे खुद भी भरोसा नहीं था। उसने school bag उठाया और नीचे चला गया।

Breakfast table पर उसका छोटा भाई बैठा था। “आज wall से बात कर रहे थे?”

Aarav लगभग रुक गया। “तूने देखा?”

“सुबह देखा।” “और क्या देखा?”

“कुछ नहीं।” छोटे भाई ने पराठे का टुकड़ा तोड़ा। “तुम बहुत अजीब behave कर रहे हो।”

Aarav ने उसे घूरा। “तू दस साल का है।” “और तुम सोलह के।” “तो?”

“फिर भी मैं ज्यादा normal हूँ।”

Aarav हँस पड़ा। “खाना खा।” कुछ देर तक दोनों चुप रहे। फिर छोटे भाई ने अचानक पूछा— “कल रात बाहर कोई था?”

Aarav का हाथ रुक गया। “क्यों?”

“मुझे लगा कोई चल रहा था।” “कहाँ?”

“खिड़की के बाहर।” “तूने देखा?”

“नहीं।” “तो फिर?”

छोटे भाई ने कंधे उचकाए। “आवाज़ आई थी।”

Aarav ने कुछ नहीं कहा। उसे एक पल के लिए लगा कि उसे माँ या पिता को सब कुछ बता देना चाहिए। लेकिन वह क्या बताता?

एक strange plant?

Animals का behaviour?

Phones का time गलत होना?

पुराने tree marks?

और अब घर की दीवार?

इन सबको जोड़ने वाला उसके पास कोई proof नहीं था। सिर्फ observations थे। उसने तय किया कि पहले वह खुद समझेगा। फिर बताएगा। ***

School जाते समय सड़क पर unusually ज्यादा traffic था। दो police vehicles school के पीछे वाली road की तरफ खड़ी थीं।

Aarav ने cycle धीमी की। एक officer किसी guard से बात कर रहा था।

Park की तरफ जाने वाली छोटी road पर temporary barricade लगा था।

Aarav ने Kabir को call किया। “कहाँ है?”

“Gate पर।” “पीछे वाली road देख।” कुछ सेकंड बाद Kabir ने कहा—

“Police?”

“हाँ।” “अब क्या?”

“पता नहीं।”

Meera भी gate पर पहुँच गई। तीनों ने दूर से barricade देखा।

Meera ने कहा, “अब ये school level की बात नहीं रही।”

Kabir ने धीरे से कहा, “Maybe कोई accident हुआ।”

Aarav ने सिर हिलाया। “हो सकता है।” लेकिन उसे पता था कि यह वही answer था जो लोग तब देते हैं जब उनके पास असली answer नहीं होता। ***

Assembly के बाद principal ने announcement किया।

“Students को school के rear section में जाने की अनुमति नहीं है। सभी निर्धारित routes का ही उपयोग करें।” बस इतना। कोई explanation नहीं।

Aarav ने Kabir की तरफ देखा।

Kabir ने आँखों से ही कहा—“Told you.”

Physics class में भी Aarav का ध्यान नहीं लगा।

Teacher board पर equations लिख रहे थे।

Aarav notebook खोलकर लिखने की कोशिश करता रहा। लेकिन उसकी नजर बार-बार window की तरफ जाती।

Park दिखाई नहीं दे रहा था। आज वहाँ temporary white sheets लगा दी गई थीं। कुछ लोग अंदर जा रहे थे। उनमें वही dark jacket वाला आदमी भी था।

Aarav ने उसे तुरंत पहचान लिया। उस आदमी के हाथ में वही छोटा scanning device था। इस बार उसके साथ तीन और लोग थे। एक woman.

एक older man.

और एक person जिसने protective gloves पहने थे।

Aarav ने notebook के corner पर उनके rough sketches बना लिए। “क्या कर रहे हो?”

Teacher की आवाज़ आई।

Aarav सीधा बैठ गया।

“Nothing, sir.”

“Notes पर ध्यान दीजिए।”

“Yes, sir.”

वह फिर board की तरफ देखने लगा। लेकिन अब उसके दिमाग में एक नया सवाल था। अगर authorities park में कुछ investigate कर रही थीं, तो उन्होंने school को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी?

***

Lunch में Meera ने एक printed page table पर रखा। “मुझे कुछ मिला।”

Kabir ने पूछा, “क्या?”

“Old municipal map.”

Aarav ने page लिया।

Park और field दोनों उसमें marked थे। उनके बीच एक narrow underground drainage line थी।

Aarav ने map को ध्यान से देखा। “ये line?”

“पुरानी drainage.”

“कितनी पुरानी?”

“Map 18 years old है।”

Kabir ने कहा, “तो?”

Meera ने finger से line follow की। “ये school के पीछे से जाती है।” फिर आगे।

“Field के नीचे।” और फिर— “यहाँ खत्म नहीं होती।”

Aarav ने पूछा, “कहाँ जाती है?”

Meera ने page पलटा। दूसरे map में वही line आगे दिखाई दे रही थी। एक पुराने खाली plot तक। और वहाँ से एक abandoned water-treatment structure तक।

Kabir ने कहा, “वहाँ कोई जाता है?”

“शायद नहीं।”

Aarav ने map fold किया।

“School के बाद चलेंगे।”

Kabir ने तुरंत कहा, “नहीं।”

Meera ने उसकी तरफ देखा। “क्यों?”

“क्योंकि अभी police park में है।”

Aarav ने कहा, “हम park में नहीं जा रहे।”

Kabir ने माथा पकड़ा। “हर बार यही बोलता है।” ***

School खत्म होने के बाद वे तीनों main road से नहीं गए। उन्होंने पहले पुराने drainage line वाले area को देखने का फैसला किया। शुरुआत में कुछ खास नहीं मिला। एक टूटी boundary। कुछ weeds। पुराने concrete slabs। फिर एक जगह मिट्टी बाकी जगह से अलग दिखी।

Aarav नीचे बैठ गया। उसने हाथ से मिट्टी हटाई। नीचे concrete का edge था। “यह drainage line है।”

Meera ने कहा, “हाँ।”

Kabir ने चारों तरफ देखा। “यह जगह creepy है।” “तू हर जगह creepy बोलता है।” “क्योंकि हर जगह तुम मुझे ले आते हो।” वे concrete के साथ-साथ आगे बढ़े। कुछ जगह line जमीन के अंदर गायब हो जाती। कुछ जगह पुराने pipes दिखाई देते। फिर एक point पर Aarav रुक गया। एक pipe के पास तीन vertical scratches थे। वही pattern। उसने Meera को बुलाया। “ये देख।”

Meera झुक गई।

“Same marks.”

Kabir ने कहा, “Maybe construction marking.”

Aarav ने pipe के आसपास देखा। “लेकिन ये marks पुराने हैं।” “तो?”

“और park वाले tree पर भी।”

Meera ने पूछा, “क्या ये कोई route marker हो सकता है?”

Aarav ने पहली बार इस possibility को seriously सोचा। “शायद।” उसने notebook में दोनों locations लिखीं।

Park.

Drainage line.

उसने उनके बीच एक line खींची। फिर तीसरी location—

Field.

एक और line।

Pattern सीधा नहीं था। लेकिन तीनों points एक छोटे area के अंदर जुड़े हुए थे।

Aarav ने कहा— “ये random नहीं हो सकता।” *** तभी पीछे से आवाज़ आई। “तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो?”

तीनों एक साथ मुड़े। एक security guard खड़ा था।

Kabir ने तुरंत कहा, “बस घूम रहे थे।”

Guard ने Aarav की तरफ देखा। “यह restricted area है।”

“Sorry.”

“School वापस जाओ।”

Aarav ने सिर हिलाया। वे पीछे हटने लगे। तभी guard ने पूछा— “तुमने ये marks देखे?”

Aarav रुक गया।

Guard ने pipe की तरफ देखा। “कौन से marks?”

Aarav ने झूठ बोलने से पहले एक सेकंड सोचा। “कुछ नहीं।”

Guard ने उसे ध्यान से देखा। फिर कहा— “जाओ।” तीनों वहाँ से निकल गए। कुछ दूर पहुँचने के बाद Kabir ने कहा— “उसने खुद marks के बारे में पूछा।”

Meera ने कहा, “हाँ।”

Aarav चुप था। उसे guard की आँखें याद थीं। वह surprised नहीं था। वह worried था। *** अगली सुबह Aarav ने school library में पुराने newspapers देखे। उसने last five years के local reports search किए। कई useless results।

Road accidents.

Construction.

Weather.

School events.

फिर उसे एक छोटा article मिला।

Headline:

“Local Area Reports Unusual Animal Movement.”

Date—चार साल पुरानी।

Article बहुत छोटा था। कुछ residents ने बताया था कि रात में dogs एक specific road से बच रहे थे।

Municipality ने इसे “temporary environmental disturbance” कहा था।

Aarav ने article की photo ले ली। उसने location पढ़ी। वही area। वही field। उसने दूसरा article search किया। तीन साल पुराना।

“Residents Notice Sudden Silence in Green Belt.”

फिर वही area। एक और। दो साल पुराना।

“Streetlight Failures Under Investigation.”

फिर वही area।

Aarav की उंगलियाँ keyboard पर रुक गईं। अब उसके पास coincidence से ज्यादा था। हर साल कुछ न कुछ।

Animal behavior.

Silence.

Electrical failures.

और इस बार—

Plant growth.

Signal loss.

Time error.

उसने notebook खोली। उसने चारों साल लिखे।

- 5 years ago — birds/dogs - 4 years ago — animal avoidance - 3 years ago — unusual silence - 2 years ago — electrical failures - now — multiple anomalies उसने नीचे लिखा:

“Pattern repeats.”

फिर उसने तारीखों के बीच अंतर देखा। लगभग एक साल। फिर लगभग एक साल। फिर एक साल। इस बार anomalies जल्दी शुरू हो गई थीं।

Aarav के अंदर एक ठंडी-सी feeling आई। “क्या ये हर साल बढ़ रहा है?”

***

Lunch में उसने सब कुछ Kabir और Meera को दिखाया।

Kabir ने पहले मज़ाक नहीं किया। “अगर ये सब real है…”

“तो?”

“तो किसी को पहले से पता होगा।”

Meera ने कहा, “Government?”

Aarav ने कहा, “Maybe.”

“Research institute?”

“Maybe.”

“Private company?”

“Maybe.”

Kabir ने पूछा, “और अगर कोई नहीं जानता?”

Aarav ने उसकी तरफ देखा। “तब problem बड़ी है।” कुछ सेकंड तक तीनों चुप रहे। फिर Meera ने कहा— “हमें park के अंदर क्या है, ये पता करना होगा।”

Aarav ने सिर हिलाया। “लेकिन अभी नहीं।”

Kabir ने राहत की साँस ली।

“Thank you.”

Aarav ने कहा— “रात में।”

Kabir की राहत तुरंत खत्म हो गई। “मैं वापस लेता हूँ।” *** उस शाम तीनों ने अपने घरों में अलग-अलग बहाने बनाए।

Aarav ने कहा कि वह Kabir के घर group study करने जा रहा है।

Meera ने कहा कि school project है।

Kabir ने कहा कि वह library जा रहा है। तीनों जानते थे कि वे झूठ बोल रहे हैं। लेकिन किसी ने किसी को रोकने की कोशिश नहीं की। रात 8:30 पर वे park से दो गलियाँ दूर मिले।

Aarav के पास flashlight थी।

Meera के पास power bank, notebook और छोटा first-aid kit।

Kabir के पास backpack और तीन पानी की bottles। “हम सिर्फ दस मिनट,” Kabir ने कहा।

Aarav ने कहा, “हाँ।” “और अगर कुछ मिला?”

“बाहर।” “और अगर कुछ बहुत weird मिला?”

“बाहर।” “और अगर—”

Meera ने कहा, “चल।” तीनों आगे बढ़े।

Park के आसपास रात में कोई street noise नहीं थी।

Main road की आवाज़ दूर से आ रही थी। लेकिन park के पास आते ही वह भी कम होती गई।

Aarav ने flashlight बंद कर दी। अंधेरे में आँखें adjust होने लगीं।

Temporary white sheets अब हवा में हल्की हिल रही थीं।

Gate बंद था। लेकिन fence का एक हिस्सा पहले की तरह टूटा हुआ था। वे अंदर गए। *** रात का park दिन के park से अलग था। बहुत अलग। पेड़ों की परछाइयाँ लंबी थीं।

Grass पर dew जमा था। और सबसे strange बात— कोई insect sound नहीं।

Aarav ने phone recording शुरू की। “8:47 PM.”

उसकी आवाज़ भी उसे अजीब लगी। बहुत धीमी। जैसे park आवाज़ को निगल रहा हो।

Kabir ने फुसफुसाकर कहा— “मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा।”

Meera ने कहा, “मुझे भी नहीं।” वे plant की तरफ बढ़े।

Plant अब इतना बड़ा था कि उसकी upper leaves Aarav की chest तक पहुँच रही थीं। उसने flashlight की हल्की रोशनी डाली।

Leaves पर वही faint blue residue था। लेकिन अब वह सिर्फ एक बूंद नहीं थी। कई पत्तियों के किनारे हल्की blue lines चमक रही थीं।

Aarav आगे बढ़ा। “मत छूना,” Meera ने कहा। “नहीं छू रहा।” उसने camera zoom किया।

Screen पर blue lines साफ दिखाई दीं। फिर camera glitch हुआ। एक पल के लिए screen पर plant नहीं था। उसकी जगह एक अलग image दिखाई दी।

Aarav ने phone नीचे कर दिया। “क्या हुआ?”

“कुछ नहीं।” “क्या देखा?”

“मुझे नहीं पता।” उसने फिर screen देखी। अब normal.

Kabir ने पूछा, “क्या?”

Aarav ने जवाब नहीं दिया। उसे लगा था कि screen पर park की जगह कोई दूसरी जगह दिखाई दी थी। घास। लेकिन grass अलग थी। आसमान का रंग भी अलग। और बहुत दूर— कुछ काला खड़ा था। उसने फिर camera देखा। कुछ नहीं। *** वे plant के पास पहुँचे।

Aarav ने जमीन देखी। तीन vertical marks नहीं थे। इस बार पाँच थे। और उनके बीच एक curved line थी।

Meera ने कहा, “ये नया है।” “हाँ।”

Kabir ने धीरे से पूछा, “किसने बनाया?”

किसी ने जवाब नहीं दिया। फिर— टिक।

Aarav ने सिर उठाया। टिक। आवाज़ plant के पीछे से आई। वह धीरे-धीरे घूमने लगा। कुछ नहीं। फिर तीसरी आवाज़। टिक। इस बार आवाज़ उनके सामने से आई।

Aarav ने flashlight घुमाई। पेड़ों के बीच कुछ हल्का-सा distort हुआ। जैसे हवा गरम surface के ऊपर काँपती है। लेकिन यहाँ हवा ठंडी थी।

Distortion धीरे-धीरे बड़ा हुआ। एक छोटी vertical line। फिर दूसरी। फिर बीच में अंधेरा।

Kabir पीछे हट गया। “ये क्या है?”

Meera की आवाज़ बहुत धीमी थी। “मुझे नहीं पता।”

Aarav ने एक कदम आगे बढ़ाया।

Distortion के पीछे कुछ दिखाई दिया। पहले सिर्फ रंग। फिर जमीन। फिर पेड़। लेकिन वे पेड़ इस park के नहीं थे। उनकी trunks बहुत मोटी थीं। उनकी leaves अजीब थीं। आसमान गहरा लाल-सा था। और दूर कोई चमकती हुई चीज़ दिखाई दे रही थी।

Aarav की साँस रुक गई। उसने समझने की कोशिश की कि वह क्या देख रहा है। “ये…”

उसकी आवाज़ नहीं निकली।

Kabir ने उसका कंधा पकड़ लिया। “पीछे।”

Distortion काँपा। एक पल के लिए पूरा दृश्य साफ हुआ। दूसरी तरफ— एक विशाल खुला landscape था। और वहाँ कुछ चल रहा था। चार पैरों पर। बहुत बड़ा। उसने सिर उठाया। सीधे उनकी तरफ।

Aarav ने महसूस किया कि उसकी आँखें दिखाई नहीं दे रही थीं। फिर भी उसे यकीन था— वह creature उन्हें देख रहा था।

Distortion अचानक सिकुड़ गया। एक तेज़ pressure wave जैसी sensation हुई। तीनों जमीन पर गिर पड़े।

Flashlight बंद।

Phone हाथ से गिरा। कुछ सेकंड तक सिर्फ ringing sound।

Aarav ने कान पकड़ लिए। फिर— सब शांत। उसने आँखें खोलीं।

Park वापस normal था। लेकिन हवा बदल चुकी थी। अब insects की आवाज़ें धीरे-धीरे लौट रही थीं। दूर कोई dog भौंका।

Kabir ने काँपते हुए पूछा— “वो क्या था?”

Aarav ने जमीन पर पड़े phone को उठाया।

Screen cracked थी। लेकिन recording चल रही थी। उसने उसे देखा। फिर उसने वही एक बात कही— “हमने अभी कुछ देखा है।”

Meera ने पूछा— “क्या?”

Aarav ने park के उस खाली हिस्से की तरफ देखा जहाँ distortion था। “कुछ ऐसा… जो यहाँ होना नहीं चाहिए।” उसी समय phone screen पर recording अपने आप बंद हो गई। और screen पर सिर्फ एक frame बचा। दूसरी तरफ की दुनिया का। तीन पेड़। लाल आसमान। और दूर खड़ा एक विशाल silhouette।

Aarav ने frame save कर लिया। उसने phone बंद किया। “अब चलते हैं।” इस बार किसी ने विरोध नहीं किया। *** घर पहुँचने के बाद Aarav ने कमरे की light बंद कर दी। उसने phone laptop से connect किया।

Recording खोली। पहले कुछ मिनट normal थे।

Park.

उनकी आवाज़ें। टिक की आवाज़। फिर distortion। फिर image.

Aarav ने frame-by-frame video चलाया। एक frame। दूसरा। तीसरा। दूसरी दुनिया। उसने pause किया। फिर zoom। पेड़। घास। दूर silhouette। फिर उसने एक और चीज़ देखी।

Silhouette के पीछे जमीन पर कुछ बना था। तीन vertical lines.

और उनके नीचे— एक curved mark.

ठीक वही pattern जो park की जमीन पर था।

Aarav chair से पीछे हट गया। अब उसके पास एक ऐसा सवाल था जिसका जवाब वह किसी search engine से नहीं निकाल सकता था। अगर वह दूसरी जगह थी…

तो वह जगह कहाँ थी?

और अगर वह जगह किसी दूसरी दुनिया की थी— तो वह park के अंदर क्यों दिखाई दे रही थी?

उसने video दोबारा चलाया। इस बार distortion से ठीक पहले audio track पर एक faint sound था। टिक। फिर कुछ static। फिर— बहुत धीमी आवाज़।

Aarav ने volume बढ़ाया।

Noise के बीच शब्द जैसे उभर रहे थे। साफ नहीं। लेकिन एक syllable था। मानो कोई बहुत दूर से बोल रहा हो।

Aarav ने headphones उतार दिए। उसकी धड़कन तेज़ हो गई। वह आवाज़ इंसानी थी। शायद। या शायद उसके दिमाग ने ऐसा सुना था। उसने recording बंद कर दी। फिर उसने notebook खोली। पहली बार उसने आज की तारीख के नीचे कोई conclusion नहीं लिखा। उसने सिर्फ एक सवाल लिखा:

“अगर वह जगह दूसरी तरफ है…”

फिर कुछ सेकंड रुका। और लिखा— “तो दूसरी तरफ से यहाँ क्या आ रहा है?”

बाहर कहीं एक dog ने भौंकना शुरू किया। एक। दो। तीन बार। फिर अचानक सब शांत हो गया।

Aarav ने खिड़की की तरफ देखा। इस बार उसने curtain खोल दिया। खाली field के ऊपर आसमान साफ था। लेकिन दूर, बहुत दूर— एक पल के लिए नीली रोशनी चमकी। और फिर गायब हो गई।