"रात के ठीक बारह बज चुके हैं..."
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"रात के ठीक बारह बज चुके हैं..."
"अगर आप इस वक्त जाग रहे हैं..."
"तो शायद आपकी नींद आपसे रूठ चुकी है..."
"या फिर..."
"कोई और है..."
"जो नहीं चाहता कि आप सो जाएँ।"
"मैं हूँ आपका होस्ट..."
"और आप सुन रहे हैं..."
THE MIDNIGHT FREQUENCY
"यहाँ हम आपको सिर्फ डरावनी कहानियाँ नहीं सुनाते..."
"हम उन घटनाओं की परतें खोलते हैं..."
"जिनके बारे में लोग आज भी फुसफुसाकर बात करते हैं..."
"कुछ घटनाएँ इतिहास में दर्ज हैं..."
"कुछ लोककथाओं में..."
"और कुछ..."
"इतनी अजीब हैं..."
"कि आज तक कोई तय नहीं कर पाया..."
"कि वे सच थीं..."
"या किसी ऐसी चीज़ की मौजूदगी..."
"जिसे इंसान कभी समझ ही नहीं पाया।"
"तो..."
"कमरे की लाइट बंद कर दीजिए..."
"हेडफोन लगा लीजिए..."
"और अगर आपके कमरे का दरवाज़ा खुला है..."
"तो उसे बंद मत कीजिए..."
"क्या पता..."
"जो बाहर खड़ा हो..."
"वो अंदर आने का इंतज़ार कर रहा हो..."
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आज की कहानी हमें ले जाती है...
दक्षिण कोरिया।
एक ऐसा देश...
जहाँ आधुनिक शहरों की चमक के पीछे...
सदियों पुरानी लोककथाएँ आज भी ज़िंदा हैं।
कोरिया के बुज़ुर्ग आज भी अपने बच्चों को एक बात ज़रूर कहते हैं...
"सूरज ढलने के बाद..."
"अगर जंगल में कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए..."
"तो पीछे मुड़कर मत देखना।"
क्योंकि...
हो सकता है...
वो इंसान न हो।
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दक्षिण कोरिया के दामयांग (Damyang) नाम के इलाके में...
दुनिया के सबसे प्रसिद्ध बाँस के जंगलों में से एक है।
दिन में...
यह जगह बेहद खूबसूरत लगती है।
लेकिन...
स्थानीय लोगों का मानना है...
कि रात होने के बाद...
इन बाँसों के बीच...
कुछ और भी चलता है।
एक ऐसी औरत...
जो सफेद कपड़े पहनती है...
जिसका चेहरा...
कभी दिखाई नहीं देता।
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यह सिर्फ एक कहानी नहीं है।
साल 2019 में...
बुसान का एक युवा फ़ोटोग्राफ़र...
रात के समय इसी जंगल में तस्वीरें लेने गया।
उसने अपने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें पोस्ट कीं।
शुरुआत की सभी तस्वीरें...
बिल्कुल सामान्य थीं।
लेकिन...
आख़िरी तस्वीर...
कुछ अलग थी।
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तस्वीर में...
बाँसों के बीच...
बहुत दूर...
एक सफेद आकृति खड़ी दिखाई दे रही थी।
लंबे काले बाल...
सफेद कपड़े...
और चेहरा...
पूरी तरह छिपा हुआ।
फ़ोटोग्राफ़र ने कहा...
"जब मैंने यह तस्वीर ली..."
"वहाँ कोई नहीं था।"
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अगली सुबह...
वह उसी जगह वापस गया।
न कोई पैरों के निशान...
न किसी इंसान के होने का सबूत।
लेकिन...
जब उसने वह तस्वीर गाँव के लोगों को दिखाई...
तो वहाँ मौजूद एक बुज़ुर्ग महिला...
कुछ पल तक तस्वीर देखती रही...
फिर धीरे से बोली...
"तुम्हें यह तस्वीर सूरज निकलने से पहले मिटा देनी चाहिए थी।"
फ़ोटोग्राफ़र हँस पड़ा।
उसने पूछा...
"क्यों?"
महिला ने उसकी आँखों में देखा...
और कहा...
"क्योंकि..."
"अब उसे पता चल गया है..."
"कि तुमने उसे देख लिया है।"
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गाँव वाले उसे...
"चोन्यो ग्विशिन" (Cheonyeo Gwishin) कहते हैं।
दक्षिण कोरिया की लोककथाओं के अनुसार...
यह उन युवतियों की बेचैन आत्मा होती है...
जो अपनी अधूरी इच्छाओं के साथ...
इस दुनिया से चली गईं।
उन्हें हमेशा...
सफेद अंतिम संस्कार वाले वस्त्रों में...
लंबे खुले बालों के साथ...
सुनसान जगहों पर भटकते हुए बताया जाता है।
इतिहास...
इस बात की पुष्टि नहीं करता...
कि वे सचमुच मौजूद हैं।
लेकिन...
सैकड़ों वर्षों से...
कोरिया के अलग-अलग इलाकों में...
लोग...
एक जैसी बातें बताते आए हैं।
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फ़ोटोग्राफ़र ने...
इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया।
वह वापस बुसान लौट गया।
लेकिन...
उसके लौटने के तीसरे दिन...
उसकी पोस्ट बदलने लगीं।
पहले...
उसने लिखा...
"कोई हर रात मेरे अपार्टमेंट के बाहर चलता है।"
फिर...
"सीसीटीवी में कोई नहीं दिखता..."
"लेकिन कदमों की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है।"
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हर रात...
ठीक 12 बजकर 17 मिनट पर...
धीरे-धीरे...
कदमों की आवाज़...
उसके दरवाज़े तक आती।
और...
दरवाज़े के ठीक बाहर...
रुक जाती।
न दस्तक।
न आवाज़।
सिर्फ...
खामोशी।
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उसने सिक्योरिटी कैमरे लगाए।
सुबह...
रिकॉर्डिंग देखी।
गलियारा...
पूरी तरह खाली था।
लेकिन...
ऑडियो में...
धीरे-धीरे...
किसी के पैरों की आवाज़ रिकॉर्ड हुई थी।
एक...
दो...
तीन...
चार...
और फिर...
दरवाज़े के ठीक सामने...
आवाज़ बंद हो जाती।
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कुछ दिनों बाद...
उसने अपना सोशल मीडिया अकाउंट...
हमेशा के लिए डिलीट कर दिया।
उसके बाद...
उसके बारे में...
कोई आधिकारिक जानकारी...
कभी सामने नहीं आई।
आज भी...
कोरियाई इंटरनेट फ़ोरम्स पर...
इस घटना की चर्चा होती है।
कुछ लोग कहते हैं...
यह कैमरे का भ्रम था।
कुछ कहते हैं...
यह किसी इंसान की शरारत थी।
और कुछ...
आज भी मानते हैं...
कि उसने...
वाकई...
उसे देख लिया था।
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लेकिन...
दामयांग के गाँवों में...
आज भी...
रात होने के बाद...
कोई भी अकेले...
बाँस के जंगल में नहीं जाता।
क्योंकि...
वहाँ के लोग कहते हैं...
अगर...
रात के सन्नाटे में...
बाँसों के बीच...
आपको कोई सफेद कपड़ों में...
पीठ किए खड़ा दिखाई दे...
तो...
उसे आवाज़ मत देना।
उसके पास मत जाना।
और...
सबसे ज़रूरी बात...
अगर...
वह धीरे-धीरे...
आपकी तरफ़ मुड़ने लगे...
तो...
भागना भी मत।
क्योंकि...
लोककथा कहती है...
जिस पल...
आप भागने की कोशिश करेंगे...
उसी पल...
वह...
आपके ठीक पीछे होगी।
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"आज की कहानी..."
"एक दर्ज घटना..."
"और दक्षिण कोरिया की सदियों पुरानी लोककथाओं..."
"दोनों से प्रेरित थी।"
"क्या उस तस्वीर में सचमुच कोई था?"
"या इंसानी दिमाग़..."
"अँधेरे में वही देखता है..."
"जिससे वह सबसे ज़्यादा डरता है?"
"इस सवाल का जवाब..."
"शायद..."
"आज भी किसी के पास नहीं है।"
"मैं हूँ आपका होस्ट..."
"और आप सुन रहे थे..."
THE MIDNIGHT FREQUENCY
"लेकिन..."
"हमारी अगली फ़्रीक्वेंसी..."
"आपको दक्षिण कोरिया के एक ऐसे द्वीप पर ले जाएगी..."
"जहाँ मछुआरे आज भी समुद्र में..."
"एक ऐसे जहाज़ को देखने का दावा करते हैं..."
"जो आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार..."
"कभी अस्तित्व में था ही नहीं।"
"और जो भी..."
"उस जहाज़ की रोशनी का पीछा करता है..."
"वह..."
"सुबह तक वापस नहीं लौटता।"
"तब तक..."
"अगर आज रात..."
"आपको अपने घर के बाहर..."
"धीरे-धीरे चलते कदमों की आवाज़ सुनाई दे..."
"तो..."
"खिड़की से झाँकने की गलती मत कीजिएगा..."
"क्योंकि..."
"हो सकता है..."
"वो..."
"आपके देखने का इंतज़ार कर रहा हो।"
(रेडियो स्टैटिक बढ़ती है... अचानक पूरी ख़ामोशी...)