Wild Zone
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Wild Zone Chapter 1 — Five More Minutes
Aarav अभी भी सो रहा था। उसका alarm पिछले बारह मिनट से लगातार बज रहा था। ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन...
एक हाथ blanket के बाहर निकला। हाथ ने हवा में दो-तीन बार phone ढूँढने की कोशिश की।
Phone नहीं मिला। हाथ वापस blanket के अंदर चला गया। अगले ही पल कमरे का दरवाज़ा खुला।
“Aarav!”
कोई जवाब नहीं। “उठ जा। सात बजने वाले हैं।”
Blanket के अंदर से आवाज़ आई। “बस five minutes…”
दरवाज़े के पास खड़ा छोटा लड़का हँस पड़ा। “भैया, आप रोज़ यही बोलते हो।”
Aarav ने आँखें खोले बिना कहा,
“Tu school नहीं जाता क्या?”
“जाता हूँ। इसलिए तो उठ गया।” “तो मुझे भी उठने दे।” “मैं तो उठने के लिए ही आया हूँ।”
Aarav ने blanket थोड़ा नीचे किया और अपने छोटे भाई को देखा। “तू बहुत बोलने लगा है।” “मम्मी ने बोला है आपको उठाने के लिए।” “मम्मी को बोल मैं उठ गया।” “झूठ बोलूँ?”
“हाँ।” लड़का दो सेकंड चुप रहा। फिर बाहर जाते हुए बोला, “ठीक है। मैं बोल दूँगा कि भैया उठ गए हैं।”
Aarav ने आँखें बंद कर लीं।
“Good.”
तीन सेकंड बाद बाहर से आवाज़ आई— “मम्मी! भैया उठ गए!”
Aarav की आँखें तुरंत खुल गईं। “अबे!”
बाहर से हँसी सुनाई दी।
“Bhai!”
“रुक तू…”
Aarav bed से उठा और दरवाज़े की तरफ भागा। लेकिन उसका भाई तब तक corridor में गायब हो चुका था। “बहुत बड़ा आदमी बन गया है…”
Aarav ने बड़बड़ाते हुए अपना phone उठाया।
6:45 AM.
उसने alarm बंद किया और कुछ सेकंड phone की screen को घूरता रहा। फिर उसे याद आया—
School.
“Shit.”
नीचे kitchen में माँ पहले से नाश्ता तैयार कर रही थीं। “उठ गए?”
Aarav ने bag उठाते हुए कहा, “हाँ।” “नहाए?”
“हाँ।” माँ ने उसकी तरफ देखा। “झूठ मत बोल।”
Aarav रुक गया। “अभी जा रहा हूँ।” “और breakfast?”
“School में कर लूँगा।”
“School में क्या मिलेगा?”
“कुछ ना कुछ।” “कुछ ना कुछ नहीं मिलेगा। बैठ।”
Aarav ने घड़ी देखी।
“Late हो रहा है।” “पाँच मिनट बैठने से school बंद नहीं हो जाएगा।” उसका छोटा भाई सामने बैठा दूध पी रहा था। उसने धीरे से कहा, “भैया आज फिर late आएँगे।”
Aarav ने उसे घूरा। “तुझे बहुत खुशी मिलती है मेरी बेइज़्ज़ती करके?”
“हाँ।” माँ हँस पड़ीं।
Aarav ने प्लेट उठा ली। “देख लेना, एक दिन मैं घर से भाग जाऊँगा।” माँ ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “पहले अपना कमरा साफ कर लेना। फिर भागना।”
Aarav चुप हो गया। उसका छोटा भाई हँसते-हँसते दूध खाँसने लगा। घर से निकलते समय Aarav ने shoes पहने और gate के बाहर आया। सुबह की सड़क हमेशा की तरह व्यस्त थी।
School buses।
Bikes।
Auto। दूध वाले। दुकानें खोलते लोग। पास की चाय की दुकान से आती आवाज़ें। सब कुछ बिल्कुल normal था।
Aarav ने bag shoulder पर डाला और चल पड़ा। कुछ दूर जाने के बाद उसे Kabir दिखाई दिया।
Kabir सड़क किनारे खड़ा phone में कुछ देख रहा था।
Aarav ने पीछे से जाकर उसके कंधे पर हाथ मारा। “चल।”
Kabir लगभग phone गिरा देता है। “अबे! मार क्यों रहा है?”
“सुबह से phone में क्या देख रहा है?”
“Important चीज़ है।”
Aarav ने phone छीनने की कोशिश की।
Kabir ने तुरंत पीछे कर लिया। “हाथ मत लगा।”
“Porn देख रहा है क्या?”
“चुप।”
Aarav हँस पड़ा। “तो क्या है?”
Kabir ने screen दिखाई। एक short video चल रहा था। एक आदमी किसी खाली सड़क पर camera लेकर खड़ा था। वीडियो में दूर एक कुत्ता खड़ा दिखाई दे रहा था। कुत्ता सड़क की तरफ नहीं देख रहा था। वह एक खाली मैदान की तरफ देख रहा था।
Kabir बोला, “देख। ये कल रात का है।”
Aarav ने कुछ सेकंड video देखा। “तो?”
“तो कुछ नहीं। बस weird है।” “कुत्ता है। कुत्ते weird होते हैं।” “तू भी weird है।”
“Thanks.”
दोनों आगे बढ़ गए।
School gate के पास Meera पहले से खड़ी थी। उसके हाथ में notebook थी। “तुम दोनों फिर late।”
Kabir ने कहा, “हम late नहीं हैं। School जल्दी खुल गया।”
Meera ने घड़ी दिखाई।
“Assembly में चार मिनट हैं।”
Aarav ने घड़ी देखी। “चल भाग।” तीनों school के अंदर चले गए।
School की सुबह हमेशा जैसी थी।
Students की भीड़।
Teachers की आवाज़ें। कुछ बच्चे homework पूरा कर रहे थे। कुछ last-minute answers देख रहे थे।
Raghav मैदान के किनारे दौड़ रहा था।
Aarav ने उसे देखा। “ये सुबह-सुबह क्यों दौड़ता रहता है?”
Kabir बोला, “क्योंकि उसके पास life है।” “मेरे पास भी है।” “तेरे पास five-minute वाली life है।”
Aarav ने उसे धक्का दिया।
Assembly के बाद classes शुरू हुईं। पहला period Physics था।
Aarav notebook खोलकर बैठा।
Teacher board पर कुछ लिख रहे थे।
Aarav लिख रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार window की तरफ जा रहा था।
School के पीछे एक छोटा-सा park था।
Normally वहाँ सुबह birds बहुत होते थे। गौरैया। कौवे। कभी-कभी तोते भी। आज— कुछ नहीं था।
Aarav ने बाहर देखा। पेड़ वही थे। घास वही थी। लेकिन पूरा park असामान्य रूप से शांत था। उसने Meera को धीरे से कहा,
“Park देखा?”
“क्या?”
“कुछ नहीं।” वह फिर board की तरफ देखने लगा। कुछ मिनट बाद उसने दोबारा बाहर देखा। एक भी bird नहीं।
Aarav ने भौंहें सिकोड़ लीं। शायद कोई reason होगा।
Construction?
Noise?
कोई chemical spray?
उसने बात छोड़ दी।
Lunch break में Kabir ने अपना tiffin खोला। “आज क्या है?”
Aarav ने पूछा। “जो भी है, तेरा नहीं है।” “थोड़ा दे।” “नहीं।” “एक bite।” “नहीं।”
Aarav ने उसका tiffin खींच लिया। “अब?”
Kabir ने कहा, “अब तू मरेगा।” दोनों लड़ने लगे।
Meera ने सिर हिलाया। “तुम दोनों पाँच साल के हो।”
Aarav ने हँसते हुए कहा, “हम emotionally five हैं।” तभी बाहर से कुछ students भागते हुए आए। “अरे, park में कुत्ते भी नहीं हैं।” एक लड़के ने कहा। “सुबह से कोई नहीं देखा।”
Kabir ने Aarav की तरफ देखा। “देखा?”
Aarav ने सिर हिलाया। उसने फिर window से बाहर देखा। इस बार उसने कुछ और notice किया।
Park के किनारे लगे छोटे पौधों में से एक बाकी पौधों से बहुत बड़ा था। इतना बड़ा कि पिछले हफ्ते तक वह वहाँ था ही नहीं।
Aarav कुछ सेकंड उसे देखता रहा। “ये पौधा पहले था?”
Meera ने बाहर देखा। “पता नहीं।”
Kabir ने कहा, “अब तू पौधों की भी investigation करेगा?”
Aarav ने जवाब नहीं दिया।
School खत्म होने के बाद तीनों बाहर निकले।
Kabir ने पूछा, “चल park चलते हैं?”
Aarav ने तुरंत उसकी तरफ देखा। “क्यों?”
“तू ही तो देख रहा था।”
Meera ने कहा, “अगर जाना है तो पाँच मिनट के लिए चलते हैं। फिर घर।”
Aarav ने आसपास देखा। दोपहर की धूप तेज़ थी।
Park लगभग खाली था। तीनों gate के पास पहुँचे। अंदर जाते ही Aarav को कुछ अजीब लगा। आवाज़ कम थी। बहुत कम। सड़क की आवाज़ बाहर से साफ़ सुनाई दे रही थी। लेकिन park के अंदर— जैसे हवा ने volume कम कर दिया हो।
Kabir ने धीरे से कहा, “यहाँ इतना शांत क्यों है?”
Aarav ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने नीचे देखा। मिट्टी पर कई छोटे footprints थे। कुत्तों के। लेकिन सभी footprints park के अंदर आने की बजाय— बाहर जा रहे थे।
Aarav नीचे बैठ गया।
Meera ने पूछा, “क्या हुआ?”
Aarav ने footprints की तरफ इशारा किया। “ये देख।”
Kabir ने देखा। “तो?”
Aarav ने सिर उठाया। “सारे बाहर जा रहे हैं।” कुछ सेकंड तक तीनों चुप रहे। फिर अचानक— झाड़ियों के अंदर कुछ हिला। सर्र...
तीनों ने एक साथ उस तरफ देखा।
Kabir पीछे हट गया। “कुछ है।”
Aarav खड़ा हो गया। झाड़ियों में फिर movement हुई। इस बार थोड़ी तेज़।
Aarav एक कदम आगे बढ़ा।
Meera ने उसका हाथ पकड़ लिया। “मत जा।”
Aarav रुक गया। झाड़ियों के पीछे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कुछ सेकंड बाद एक छोटी-सी छिपकली बाहर निकली।
Kabir ने राहत की साँस ली। “भाई, मेरी तो जान निकल गई थी।”
Aarav हँस दिया। “तू डरपोक है।” “हाँ, और तू idiot है।” तीनों वापस मुड़ गए।
Aarav ने एक बार फिर park की तरफ देखा। उसे पता नहीं क्यों— लेकिन उसे लग रहा था कि वहाँ कुछ गलत था। बहुत छोटा। इतना छोटा कि कोई और शायद notice भी न करे। लेकिन कुछ था। शाम को Aarav घर लौट रहा था। सड़क के मोड़ पर उसे एक stray dog दिखाई दिया। कुत्ता सड़क के बीच नहीं था। वह एक तरफ खड़ा था। पूरी तरह स्थिर।
Aarav आगे बढ़ा। कुत्ते ने उसे नहीं देखा। उसकी नजरें सड़क की दूसरी तरफ खाली पड़े मैदान पर थीं।
Aarav रुक गया। “क्या देख रहा है?”
कुत्ते ने कोई reaction नहीं दिया। उसकी आँखें उसी दिशा में थीं।
Aarav ने भी मैदान की तरफ देखा। कुछ नहीं था। सिर्फ सूखी घास। कुछ पुराने पेड़। और दूर एक टूटी हुई boundary wall। फिर— कुत्ते ने धीरे से एक कदम पीछे लिया। उसकी गर्दन के बाल खड़े हो गए।
Aarav की मुस्कान गायब हो गई। कुत्ता अचानक पलटा और बिना किसी आवाज़ के वहाँ से भाग गया।
Aarav कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा। फिर उसने मैदान की तरफ देखा। हवा चल रही थी। पेड़ हिल रहे थे। सब कुछ normal था। लेकिन Aarav को पहली बार लगा— शायद problem park में नहीं थी। शायद problem उस जगह के अंदर आने वाली थी।
Wild Zone
Chapter 2 — The Empty Park
Audiobook Draft — ~2,431 words
— — — अगली सुबह Aarav की आँख alarm से पहले खुल गई। उसे खुद इस बात पर भरोसा नहीं हुआ। कुछ सेकंड तक वह छत को देखता रहा। फिर उसे पिछली शाम याद आई—खाली field, डरता हुआ dog, phones का एक साथ signal खोना और वह plant जो एक दिन में noticeably बड़ा हो गया था। उसने करवट बदली। “आज नहीं,” उसने खुद से कहा। उसका मतलब था कि आज वह park के बारे में नहीं सोचेगा। लेकिन जैसे ही वह bathroom की तरफ गया, उसने खिड़की से बाहर देखा।
Field वहीं था। सुबह की धूप में वह बिल्कुल सामान्य दिख रहा था। घास पर हल्की नमी थी। दो बच्चे दूर सड़क पर school bus का इंतज़ार कर रहे थे। एक आदमी newspaper लेकर जा रहा था। और बिजली के तार पर तीन birds बैठे थे।
Aarav कुछ सेकंड उन्हें देखता रहा।
“Normal.”
उसने खिड़की बंद कर दी। नीचे breakfast table पर उसका छोटा भाई पहले से बैठा था। “आज जल्दी उठ गए?”
“हाँ.”
“बीमार हो?”
“नहीं.”
“फिर?”
“बस.”
छोटे भाई ने उसे ध्यान से देखा। “तुम कल रात खिड़की से बाहर देख रहे थे.”
Aarav रुक गया। “तुझे कैसे पता?”
“मैं पानी लेने उठा था.”
“तू इतनी रात को पानी पीने क्यों उठता है?”
“क्योंकि प्यास लगती है.”
“सो जाया कर.”
“तुम भी.”
Aarav ने कुछ नहीं कहा। माँ ने उसके सामने नाश्ता रखा। “आज park मत जाना.”
Aarav ने चौंककर देखा। “मैंने कब कहा कि जा रहा हूँ?”
“मैंने पूछा भी नहीं.”
माँ ने बस इतना कहा और वापस kitchen में चली गईं।
Aarav ने पराठे का टुकड़ा तोड़ा। उसे लगा कि शायद घर में उससे ज्यादा लोग चीज़ें notice कर रहे थे जितना वह सोच रहा था। ***
School जाते समय Aarav ने जानबूझकर उस खाली field की तरफ नहीं देखा। लेकिन उसकी नजर खुद ही चली गई।
Field के किनारे कल वाला dog नहीं था। एक दूसरा dog सड़क के पास सो रहा था।
Aarav कुछ सेकंड उसे देखता रहा। फिर आगे बढ़ गया।
School gate पर Kabir पहले से खड़ा था। “आज time पर!”
“हाँ.”
“कल की investigation complete?”
Aarav ने उसे घूरा। “तू मज़ाक कर रहा है?”
“Obviously.”
Meera भी वहीं आ गई। “क्या हुआ?”
Kabir ने कहा, “Scientist साहब आज park case solve करने वाले हैं.”
Aarav ने कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.”
Meera ने दोनों को देखा। “तुम दोनों पाँच मिनट में annoying हो जाते हो.”
“Thank you,” Kabir ने कहा।
Assembly शुरू हो गई।
Routine फिर वही था। लेकिन Aarav के लिए चीज़ें थोड़ी बदल चुकी थीं। अब वह school को सिर्फ school की तरह नहीं देख रहा था। वह आसपास की छोटी चीज़ें भी notice कर रहा था।
Gate के पास पड़े leaves.
Fence के पास मिट्टी.
Birds की संख्या.
Dogs.
Plants.
यहाँ तक कि street lights भी। उसे खुद पर थोड़ी हँसी आई। कल तक उसे इनमें से किसी चीज़ की परवाह नहीं थी। अब हर चीज़ किसी clue जैसी लग रही थी। ***
Physics class में teacher ने एक experiment समझाया।
Observation.
Measurement.
Repeated readings.
Aarav ने notebook में लिखा:
“एक observation से conclusion नहीं.”
उसने कल वाली line के नीचे दूसरी line लिखी:
“Repeat.”
उसे नहीं पता था कि यह आदत आगे उसके लिए कितनी important होने वाली थी।
Lunch में Kabir ने पूछा, “आज park चल रहे?”
“नहीं.”
Kabir ने राहत की साँस ली।
“Good.”
Meera ने कहा, “मैं जाऊँगी.”
Aarav ने उसकी तरफ देखा। “क्यों?”
“कल plant.”
Kabir ने सिर पकड़ लिया। “तुम दोनों मुझे मारोगे.”
Meera ने कहा, “तुम घर जा सकते हो.”
“मैं तुम्हारा friend हूँ.”
“तो साथ चल.”
“ठीक है.”
Aarav मुस्कुराया। ***
Lunch के बाद वे तीनों पीछे की तरफ गए। लेकिन इस बार park पहले जैसा नहीं था।
Gate के बाहर से ही Aarav ने notice कर लिया। एक भी dog नहीं।
Birds भी कम थे। “कल तो birds वापस आ गए थे,” Meera ने कहा।
Aarav ने सिर हिलाया। “हाँ.”
“आज फिर कम हैं.”
Kabir ने कहा, “शायद ये तुम्हें देखकर भागते हैं.”
Aarav ने उसे ignore किया। उन्होंने fence के टूटे हिस्से से अंदर जाने के बजाय बाहर से park को देखने का फैसला किया।
Plant वहीं था। और बड़ा।
Meera ने phone निकाला।
“Photo ले.”
Aarav ने कल की photo खोली और आज की photo के साथ रख दी।
Difference अब ज्यादा साफ था। कल जो पौधा घुटने तक भी नहीं था, आज लगभग कमर तक पहुँच रहा था।
Kabir की हँसी गायब हो गई।
“Okay.”
Aarav ने कहा, “अब तू भी मान रहा है?”
“मैं बस कह रहा हूँ कि ये थोड़ा weird है.”
Meera ने plant की तरफ देखा। “बहुत weird.”
अचानक एक crow पेड़ से उड़कर दूसरी तरफ चला गया। दूसरा crow उसके पीछे नहीं गया। कुछ सेकंड बाद पहला भी वापस नहीं आया।
Aarav ने park के अंदर देखा। “किसी को कुछ smell आ रही है?”
Kabir ने हवा सूँघी। “नहीं.”
Meera ने सिर हिलाया। “कुछ नहीं.”
Aarav ने ध्यान दिया कि हवा park के अंदर जाते हुए एक जगह पर जैसे बदल रही थी। बहुत हल्का। जैसे किसी invisible boundary के पास temperature थोड़ा कम हो। उसने हाथ आगे बढ़ाया। “क्या कर रहे हो?” Meera ने पूछा। “कुछ नहीं.”
उसने हाथ वापस कर लिया।
“Temperature difference?”
Meera ने अपनी wrist पर skin को छुआ। “मुझे नहीं लगा.”
Kabir ने कहा, “तुम दोनों seriously weather station खोल लो.”
Aarav ने हँसने की कोशिश की। तभी एक sound आया। बहुत हल्का। टिक। फिर silence। टिक। तीनों ने एक-दूसरे को देखा। “क्या था?” Kabir ने पूछा।
Aarav ने park की तरफ देखा।
Sound तीसरी बार आया। टिक। लेकिन इस बार ऐसा लगा जैसे आवाज़ जमीन के नीचे से आई हो।
Aarav के चेहरे पर curiosity और डर दोनों आ गए। “चलो.”
Kabir ने कहा, “कहाँ?”
“अंदर.”
“नहीं.”
Meera ने कुछ सेकंड सोचा। “सिर्फ दो मिनट.”
Kabir ने आँखें बंद कर लीं। “मैंने गलत friends चुने.”
*** वे fence पार करके अंदर गए। इस बार park और भी शांत था।
Aarav ने phone camera चालू किया।
Recording.
उसने धीरे से कहा, “Time—1:17 PM.”
Kabir ने पूछा, “तू documentary बना रहा है?”
“बस record कर रहा हूँ.”
“अगर कुछ हुआ तो?”
“Video useful होगा.”
“और अगर कुछ बहुत बड़ा हुआ?”
Aarav ने उसे देखा। “तब शायद video useful नहीं होगा.”
Kabir ने जवाब नहीं दिया। वे धीरे-धीरे plant की तरफ बढ़े। हर कदम पर Aarav आसपास देख रहा था। कोई bird नहीं। कोई dog नहीं। कोई squirrel नहीं। यहाँ तक कि insects भी बहुत कम थे। उसे अचानक याद आया कि गर्मियों में यह park insects से भरा रहता था। आज grass पर एक भी butterfly नहीं थी। एक भी dragonfly नहीं। एक भी buzzing sound नहीं। कुछ नहीं। बस हवा। और वह हल्की ticking sound। टिक। टिक। टिक। वे plant से लगभग दस मीटर दूर थे।
Meera ने कहा, “रुको.”
Aarav रुक गया। “क्या?”
“वहाँ.”
उसने जमीन की तरफ इशारा किया।
Grass के बीच एक छोटी-सी line थी। जैसे किसी ने जमीन पर कुछ घसीटा हो।
Aarav नीचे बैठ गया।
Line plant से शुरू होकर पीछे की तरफ जा रही थी। “यह animal trail हो सकता है,” Meera ने कहा।
Aarav ने मिट्टी को देखा। “नहीं.”
“क्यों?”
“देख.”
उसने उंगली से मिट्टी हटाई। नीचे मिट्टी थोड़ी गहरी और काली थी। “यहाँ कुछ गरम था.”
Meera ने उसे देखा। “तुम sure हो?”
“नहीं.”
Aarav ने ईमानदारी से कहा। उसी समय हवा फिर बदली।
Plant की पत्तियाँ एक साथ हिलीं। बाकी grass स्थिर रही।
Kabir पीछे हट गया। “अब क्या?”
Aarav ने plant को देखा। एक पत्ती के किनारे पर बहुत छोटा-सा चमकीला residue था। जैसे पानी की बूंद हो। लेकिन sunlight में उसका रंग हल्का नीला दिख रहा था। उसने phone camera zoom किया।
Screen पर image साफ नहीं आ रही थी।
Autofocus बार-बार fail हो रहा था। फिर phone अचानक restart हो गया।
Aarav चौंक गया।
“Battery?”
“78%,” Meera ने कहा। उसका phone भी screen पर error दिखा रहा था।
Kabir का phone पूरी तरह बंद था। तीनों चुप। कुछ सेकंड बाद Aarav का phone वापस on हुआ। लेकिन time बदल गया था।
1:17.
वह time पाँच मिनट से वहीं था।
Aarav ने घड़ी देखी। असल में 1:23 हो चुके थे। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा।
“Time…”
Meera ने अपनी watch देखी। “हाँ.”
Kabir ने कहा, “क्या?”
Aarav ने phone दिखाया। “इसमें time गलत है.”
Kabir ने कहा, “तो?”
“Six minutes.”
Meera ने तुरंत समझ लिया। “हमारे phones में भी.”
अचानक park के बाहर school bell बजी। तीनों चौंक गए।
Aarav ने बाहर देखा।
Students वापस classes की तरफ जा रहे थे। दुनिया चल रही थी। लेकिन park के अंदर कुछ ऐसा था जो उनके phones को confuse कर रहा था। “चलो,” Meera ने कहा। इस बार Aarav ने विरोध नहीं किया। *** वे fence के बाहर आ गए।
Kabir ने phone check किया। “अब सही time.”
Aarav ने कहा, “किसी को बताना चाहिए.”
Meera ने सिर हिलाया। “किसे?”
“Teacher.”
“और क्या बोलोगे?”
Aarav चुप रहा। “कि एक plant बढ़ रहा है, phones छह मिनट पीछे हो गए और park में birds नहीं हैं?”
Kabir ने कहा, “Teacher हमें counselor के पास भेज देंगे.”
Aarav ने हँसने की कोशिश की। लेकिन वह हँसी ज्यादा देर नहीं रही। उसने पीछे देखा।
Plant अब भी वहीं था। और इस बार उसे लगा कि उसकी एक पत्ती उनकी तरफ मुड़ी हुई थी। जैसे plant उन्हें देख रहा हो। उसने आँखें झपकाईं। पत्ती हवा के साथ हिल गई। बस। कुछ नहीं। *** उस दिन घर लौटते समय Aarav ने किसी से बात नहीं की। घर पहुँचकर उसने bag रखा और सीधे अपने कमरे में गया। उसने laptop खोला। उसने notes बनाए।
Park observations.
Temperature.
Animals.
Plant.
Signal.
Phone time.
उसने search करना शुरू किया। “sudden animal avoidance area” फिर:
“plants rapid growth environmental anomaly” फिर:
“electromagnetic interference mobile phone park”
Results आए। लेकिन कोई भी exact match नहीं। कुछ articles pollution के बारे में थे। कुछ magnetic fields के बारे में। कुछ animal behavior के बारे में। एक जगह उसने पढ़ा कि animals इंसानों से पहले environmental changes detect कर सकते हैं।
Aarav रुक गया। उसने article पढ़ा। फिर dog याद आया। फिर birds.
फिर lizard.
उसने notebook में लिखा:
“Animals may notice something before humans.”
नीचे उसने लिखा:
“अगर ऐसा है, तो वे किस चीज़ से भाग रहे हैं?”
वह कुछ देर उस सवाल को देखता रहा। फिर उसके phone पर notification आया।
Kabir का message था।
“Bhai.”
फिर दूसरा।
“Park ke baare mein kisi ko mat bolna.”
Aarav ने reply किया।
“Why?”
कुछ सेकंड बाद Kabir ने एक photo भेजी।
Aarav ने photo खोली। यह school park की photo थी। लेकिन यह आज की नहीं थी।
Photo में plant दिखाई दे रहा था। और उसके पीछे एक पेड़ के तने पर कुछ dark marks थे। तीन vertical lines.
Aarav ने zoom किया।
Marks natural नहीं लग रहे थे। “कहाँ से मिली?”
Kabir का reply आया:
“Google maps old image.”
Aarav ने तुरंत browser खोला। लेकिन old image में park साफ नहीं दिख रहा था। फिर उसने photo दोबारा खोली। तीन lines.
एकदम बराबर दूरी पर। उसने अपनी notebook में वही shape बना दी। तीन vertical lines.
उसके नीचे उसने लिखा:
“क्या ये पहले से था?”
*** शाम के करीब छह बजे Aarav ने वही field देखा। इस बार dog वहाँ नहीं था। लेकिन grass के बीच एक छोटा हिस्सा दबा हुआ था। जैसे कोई भारी चीज़ वहाँ खड़ी रही हो।
Aarav खिड़की के पास गया। उसने phone camera उठाया।
Zoom.
कुछ नहीं। फिर उसने देखा— field के दूर वाले किनारे पर एक पेड़ की branch धीरे-धीरे हिली। हवा नहीं चल रही थी।
Aarav कुछ सेकंड स्थिर रहा।
Branch फिर हिली। इस बार उसके नीचे की grass भी हिली। कुछ field के अंदर से आगे बढ़ रहा था। धीरे। बहुत धीरे।
Aarav ने camera focus किया।
Screen पर image grainy थी। एक dark shape। चार पैर?
शायद। फिर shape grass के पीछे गायब हो गई।
Aarav ने camera नीचे किया। उसके हाथ ठंडे हो गए थे। वह पीछे हट गया। उसे अचानक एक बात समझ आई। कल dog field के अंदर किसी चीज़ को देख रहा था। आज वही चीज़ शायद field से बाहर निकल रही थी। *** रात को dinner पर Aarav सामान्य बनने की कोशिश करता रहा। माँ ने पूछा, “आज school कैसा था?”
“Normal.”
छोटे भाई ने पूछा, “Park गए?”
“नहीं.”
वह सच बोल रहा था। कम से कम आधा। पिता ने पूछा, “Physics की तैयारी?”
“कर रहा हूँ.”
“अच्छे से करना.”
“हाँ.”
सब कुछ सामान्य। फिर अचानक बाहर से एक तेज़ आवाज़ आई। धड़ाम!
सब रुक गए। छोटा भाई chair से उठ गया। माँ ने कहा, “क्या हुआ?”
Aarav तुरंत खिड़की की तरफ गया। बाहर गली में एक streetlight blink कर रही थी। एक बार। दो बार। फिर बंद। उसके बाद दूसरी light बंद हुई। फिर तीसरी।
Lights एक direction में बंद होती चली गईं।
Aarav ने field की तरफ देखा। उसके दूर किनारे पर darkness थी। और darkness के बीच एक बहुत हल्की, almost invisible नीली चमक दिखाई दी। सिर्फ एक पल के लिए। फिर गायब।
Aarav ने साँस रोक ली। उसे लगा जैसे उसके कानों में एक बहुत धीमी आवाज़ आई। टिक। फिर— टिक। फिर सब शांत। उस रात उसने notebook में आखिरी line लिखी:
“Park is not the only place.”
उसने pen बंद किया। लेकिन इस बार उसने notebook नहीं बंद की। वह खुली रही। जैसे उसे पता हो कि अगले दिन उसमें कुछ और लिखना पड़ेगा। और अगले दिन तक— शायद वह सिर्फ observe करने वाला student नहीं रहेगा। शायद उसे पहली बार समझ आएगा कि कुछ घटनाएँ सिर्फ clues नहीं होतीं। वे warnings भी हो सकती हैं। उसने रात में एक बार फिर अपना phone खोला।
Kabir की भेजी हुई photo screen पर थी। तीन lines.
Aarav ने उंगली से screen पर उन्हें trace किया। एक। दो। तीन। उसने photo को और zoom किया।
Lines के बीच faint scratches थे, जैसे किसी ने किसी hard surface से bark को काटा हो। उसने सोचा कि शायद किसी बच्चे ने ऐसा किया होगा। लेकिन marks बहुत ऊँचे थे। लगभग Aarav के कंधे की ऊँचाई पर। अगर वे किसी इंसान ने बनाए थे, तो कोई ladder या कुछ और चाहिए होता। उसने phone lock किया। फिर unlock किया।
Photo गायब थी।
Aarav का चेहरा बदल गया।
Gallery खोली।
Photo वहाँ थी। उसने दोबारा खोली। अब lines दिखाई नहीं दे रही थीं। सिर्फ tree trunk.
वह कुछ सेकंड screen को देखता रहा। फिर उसने screenshot लिया।
Screenshot में lines फिर दिखाई दे रही थीं।
Aarav ने phone नीचे रख दिया। उस रात पहली बार उसे सच में डर लगा। क्योंकि अब समस्या सिर्फ यह नहीं थी कि park में कुछ अजीब हो रहा था। समस्या यह थी कि वह चीज़ शायद उसकी समझ से बाहर थी। और अगर वह उसे समझ नहीं सकता था— तो वह यह भी नहीं जानता था कि उससे बचना कैसे है।
Wild Zone
Chapter 3 — Something Is Wrong
Audiobook Draft — ~2,684 words
— — — सुबह Aarav ने सबसे पहले खिड़की नहीं खोली। कल रात की आखिरी तस्वीर अभी भी उसके दिमाग में थी—field के अंधेरे में हल्की नीली चमक, बंद होती streetlights, और वह आवाज़। टिक। टिक। उसने phone उठाया। समय 6:31 AM था। उसने कुछ सेकंड screen देखी और फिर gallery खोली। कल की सारी photos वहीं थीं।
Park.
Plant.
Tree.
तीन lines.
और field की आखिरी blurry photo। उसने field वाली photo खोली।
Zoom किया। फिर zoom। कुछ साफ नहीं था। बस grass, darkness और एक अस्पष्ट shape। उसने brightness बढ़ाई।
Shape थोड़ी दिखाई दी। चार पैर जैसे। लेकिन जानवर की body साफ नहीं थी। उसने photo बंद कर दी। “आज नहीं,” उसने खुद से कहा। नीचे से माँ की आवाज़ आई।
“Aarav! उठ गए?”
“हाँ!”
“तो नीचे आओ!”
“आ रहा हूँ!”
वह जल्दी से तैयार हुआ।
Breakfast table पर छोटा भाई बैठा था। उसने Aarav को देखते ही पूछा, “कल रात बाहर क्या था?”
Aarav रुक गया। “क्या?”
“Field में.”
“तुझे कैसे पता कि field में कुछ था?”
छोटे भाई ने दूध का glass रखा।
“Streetlight बंद हुई थी.”
Aarav ने उसकी तरफ देखा। “तूने देखा?”
“हाँ.”
“फिर?”
“कुछ नहीं.”
“कुछ देखा था?”
छोटा भाई थोड़ी देर चुप रहा। “नहीं.”
उसने नज़रें झुका लीं।
Aarav को लगा कि वह कुछ छुपा रहा है। लेकिन वह पूछने ही वाला था कि माँ ने आवाज़ दी।
“School के लिए देर हो जाएगी।”
Conversation वहीं खत्म हो गई। ***
School जाते समय Aarav ने जानबूझकर field की तरफ नहीं देखा। लेकिन सड़क का मोड़ आते ही उसकी नजर खुद चली गई। दिन की रोशनी में field बिल्कुल normal था।
Streetlights बंद थीं।
Grass स्थिर थी। पेड़ वैसे ही थे। कोई blue glow नहीं। कोई strange shape नहीं। एक dog दूर पड़ा था।
Aarav ने राहत की साँस ली। फिर उसने देखा— dog field के अंदर नहीं जा रहा था। वह सड़क के किनारे बैठा था और field को देख रहा था। बस देख रहा था।
Aarav रुक गया।
Dog ने उसकी तरफ देखा। फिर field की तरफ। फिर वापस Aarav की तरफ।
Aarav ने आगे बढ़ना बेहतर समझा। ***
School gate पर Kabir मिला। “आज तू बहुत serious लग रहा है.”
“कुछ नहीं.”
“कल वाली चीज़?”
Aarav ने उसे देखा। “कौन-सी?”
Kabir थोड़ा पास आया।
“Park.”
Aarav ने धीमे से पूछा, “तूने किसी को बताया?”
“नहीं.”
“Meera?”
“उसने भी नहीं.”
“Sure?”
“हाँ.”
Aarav ने सिर हिलाया। तीनों assembly के लिए चले गए। लेकिन Aarav के दिमाग में एक ही सवाल था— अगर उन्होंने किसी को नहीं बताया, तो क्या कोई और भी park के बारे में जानता था?
*** पहले दो periods सामान्य रहे। तीसरे period में class teacher ने announcement किया। “आज school के पीछे वाला park students के लिए बंद रहेगा। Maintenance work होगा।”
Aarav ने तुरंत सिर उठाया।
Kabir ने उसकी तरफ देखा।
Meera ने भी।
Teacher ने आगे कहा, “कोई भी student वहाँ जाने की कोशिश नहीं करेगा।”
Aarav का दिल थोड़ा तेज़ धड़कने लगा।
“Maintenance?” उसने धीरे से कहा।
Kabir ने फुसफुसाकर पूछा, “तुझे क्या लगता है?”
“पता नहीं.”
Meera ने कहा, “कल तो कोई maintenance नहीं था।”
Aarav ने उसकी तरफ देखा।
“Exactly.”
Lunch तक तीनों इस बारे में कई बार बात कर चुके थे।
Kabir ने कहा, “हो सकता है principal ने plant देख लिया हो।”
Meera ने जवाब दिया, “और phones?”
“कौन से phones?”
“कल.”
Kabir चुप हो गया।
Aarav ने कहा, “आज देखते हैं.”
Kabir ने तुरंत कहा, “हम park में नहीं जाएँगे.”
Aarav ने उसे देखा।
“Teacher ने मना किया है.”
“हाँ.”
“तो?”
“तो बाहर से देखेंगे.”
Meera ने कहा, “ठीक है।” ***
Lunch के बाद park के आसपास unusual activity थी। एक school guard gate के पास खड़ा था। दूसरा व्यक्ति अंदर कुछ देख रहा था। वह school staff जैसा नहीं लग रहा था। उसने dark jacket पहन रखी थी और हाथ में एक छोटा device था।
Aarav ने उसे पहली बार देखा। उस आदमी ने जमीन के पास device रखा। कुछ सेकंड बाद device से हल्की beep आई। उसने आसपास देखा। फिर notebook में कुछ लिखा।
Aarav ने Kabir को धीरे से कहा, “देख.”
Kabir ने देखा। “कौन है?”
“पता नहीं.”
Meera ने कहा, “Maybe electrician.”
“Electrician ऐसा device use करता है?”
“Maybe.”
Aarav ने उस आदमी को ध्यान से देखा। वह plant के पास नहीं जा रहा था। वह park के अलग-अलग हिस्सों में device रखकर readings ले रहा था। फिर उसने पेड़ के trunk पर लगे तीन marks को देखा। वह अचानक रुक गया।
Aarav के शरीर में ठंड-सी दौड़ गई। आदमी ने उन marks पर हाथ नहीं लगाया। बस उन्हें कुछ सेकंड देखा। फिर उसने अपने device से एक photo ली। और तुरंत किसी को phone किया।
Aarav ने दूर से देखा। उसकी body language बदल गई थी। अब वह casual नहीं था। वह परेशान था। *** “चलो,” Aarav ने कहा। “कहाँ?”
“उस आदमी के पीछे नहीं.”
Kabir ने राहत की साँस ली।
“Thank God.”
“हम बस पता करेंगे कि वह कौन है।”
Meera ने कहा, “यह भी वही काम है.”
Aarav ने कहा, “हाँ.”
वे school building के पीछे से दूसरी तरफ घूमकर उस area के पास पहुँचे जहाँ से park साफ दिखाई देता था। वहाँ एक छोटी window थी।
Aarav ने glass से बाहर देखा। वह आदमी अभी भी readings ले रहा था। अब उसके साथ एक और व्यक्ति था। इस बार उसने school staff जैसा ID card पहना था। दोनों कुछ बात कर रहे थे।
Aarav सुन नहीं सकता था। फिर dark jacket वाला व्यक्ति नीचे झुका। उसने grass से कुछ उठाया। शायद मिट्टी का sample। उसने उसे transparent container में रखा। फिर container बंद कर दिया।
Meera ने धीरे से कहा, “ये maintenance नहीं है।”
Aarav ने सिर हिलाया। “हाँ.”
Kabir ने पूछा, “फिर क्या है?”
Aarav के पास जवाब नहीं था। ***
School खत्म होने के बाद तीनों घर नहीं गए। वे थोड़ी दूरी पर चाय की दुकान के पास खड़े रहे।
Park के बाहर guard अब भी था। कुछ देर बाद dark jacket वाला व्यक्ति बाहर आया। उसने एक black bag उठाया। वह सड़क की तरफ बढ़ा।
Aarav ने कहा, “चलो.”
Kabir ने उसे पकड़ा। “कहाँ?”
“बस देखेंगे.”
“अगर उसने देख लिया?”
“तो वापस आ जाएँगे.”
Meera ने कहा, “दूर से.”
तीनों उसके पीछे चलने लगे। करीब सौ मीटर बाद वह व्यक्ति एक white SUV के पास पहुँचा। उसने bag पीछे रखा। एक दूसरा आदमी पहले से driver seat में था। दोनों कुछ बात करते रहे। फिर SUV चल पड़ी।
Aarav ने number plate याद करने की कोशिश की। वह पूरा नहीं पढ़ पाया। बस आखिरी दो characters। “7K.”
Kabir ने कहा, “तू police बनने वाला है?”
“नहीं.”
“फिर?”
Aarav ने कोई जवाब नहीं दिया। उसे सिर्फ यह समझ आया था कि park को लेकर कोई और भी गंभीरता से investigation कर रहा था। और शायद वे लोग उससे बहुत पहले से जानते थे कि कुछ गलत है। *** अगले दिन school में park पूरी तरह बंद था।
Gate पर नया notice लगा था:
AREA UNDER INSPECTION.
Aarav ने notice की photo ले ली।
Meera ने पूछा, “अब?”
“अब हम wait करेंगे.”
Kabir ने हँसते हुए कहा, “ये पहली बार है जब तूने सही बात कही।” लेकिन उसी दोपहर कुछ और हुआ।
Physics lab में lights अचानक flicker करने लगीं। एक बार। दो बार। फिर सारे instruments बंद हो गए।
Teacher ने power supply check की।
“Main line ठीक है।” एक student ने कहा, “Sir, बाहर भी lights flicker कर रही हैं।”
Aarav ने window से देखा।
School के पीछे वाली direction में streetlights एक-एक करके बंद हो रही थीं। ठीक उसी तरह जैसे कल शाम field के पास।
Aarav की आँखें संकरी हो गईं। उसने phone निकाला।
Signal कमजोर था। फिर गायब। उसने Kabir की तरफ देखा।
Kabir ने भी phone उठाया।
“No network.”
Meera ने कहा, “फिर वही।” अचानक lab के बाहर corridor में किसी ने दौड़ते हुए आवाज़ लगाई।
“Park के पास मत जाना!”
पूरी class शांत हो गई।
Teacher ने बाहर जाकर पूछा, “क्यों?”
लेकिन आवाज़ देने वाला student जा चुका था।
Aarav ने window से park की तरफ देखा। बंद gate के पीछे पेड़ खड़े थे।
Plant दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन एक पेड़ के ऊपर birds बैठे थे। अचानक सारे birds एक साथ उड़ गए। बिना किसी आवाज़ के।
Aarav ने उस दिशा को देखा जहाँ वे उड़कर गए थे। उसी समय उसे कुछ सुनाई दिया। बहुत हल्का। टिक। *** उस शाम Aarav ने Kabir और Meera को अपने घर बुलाया। तीनों उसके कमरे में बैठे थे।
Aarav ने notebook खोली। “हमारे पास अब क्या है?”
Kabir ने कहा, “एक weird park.”
Meera ने कहा, “Rapid plant growth.”
Aarav ने लिखा।
“Animal avoidance.”
एक और line।
“Signal interference.”
फिर।
“Time error.”
फिर।
“Unknown investigators.”
Kabir ने पूछा, “तीन lines?”
Aarav ने notebook के दूसरे page पर वही symbol बनाया। “ये.”
Meera ने कहा, “और?”
“इन लोगों ने इसे देखा.”
“तू sure है?”
“हाँ.”
Kabir ने कहा, “हो सकता है वो सिर्फ tree damage हो।” “हो सकता है.”
Aarav ने पहली बार यह शब्द जानबूझकर इस्तेमाल किया। “लेकिन हमें पता नहीं.”
Meera ने कहा, “तो पता करो।”
Aarav ने उसे देखा। “कैसे?”
“पुरानी photos.”
“क्या?”
“School की old photos. Google Maps. Local posts. जो भी मिल सकता है।”
Kabir ने phone निकाला। “मैं school के पुराने social media posts देखता हूँ।”
Meera ने कहा, “मैं map images।”
Aarav ने notebook खोली। “और मैं…”
वह रुक गया।
“Park का पुराना layout ढूँढूँगा।” *** अगले दो घंटे वे तीनों अलग-अलग चीज़ें खोजते रहे।
Kabir को school के annual function की दो साल पुरानी photo मिली।
Background में park था। उसमें trees थे।
Benches थीं। और एक छोटा plant भी।
Meera ने zoom किया। “ये वही जगह है।”
Aarav ने photo देखी।
“Plant नहीं.”
“क्या?”
“वहाँ कोई plant नहीं था.”
Meera ने photo फिर देखी। जिस जगह अब वह strange plant था, वहाँ सिर्फ खाली grass थी।
Kabir ने कहा, “तो plant नया है।”
Aarav ने सिर हिलाया।
Meera ने दूसरा photo खोला। एक साल पुरानी sports day photo। फिर वही जगह। खाली। तीसरी photo। खाली। चौथी। खाली।
Aarav ने अपनी वर्तमान photo उसके सामने रखी।
Plant।
Dark leaves। असामान्य growth.
“तो यह पिछले कुछ महीनों में आया है।”
Meera ने कहा, “हाँ.”
Kabir अचानक चुप हो गया। “एक बात।” “क्या?”
“ये देख.”
उसने पहली photo पर zoom किया।
Park के पीछे tree trunk पर कुछ dark marks थे। बहुत faint। तीन vertical lines.
Aarav ने कुछ नहीं कहा। तीनों कुछ सेकंड photo देखते रहे।
Meera ने धीरे से पूछा, “क्या ये वही marks हैं?”
“हाँ।”
Kabir ने कहा, “तो ये कम से कम दो साल पुराने हैं।” कमरे में silence हो गया।
Aarav ने notebook में लिखा:
“Marks existed before the plant.”
फिर उसने नीचे लिखा:
“Then what came first?”
*** उस रात Aarav ने internet पर उन तीन lines का pattern search किया। कुछ नहीं मिला। फिर उसने उन्हें अलग-अलग symbols से compare किया।
Ancient markings.
Survey marks.
Construction marks.
Tree markings.
कुछ भी exact नहीं। आखिर उसने search बंद कर दिया। लेकिन जाने से पहले एक result ने उसका ध्यान खींचा। एक पुराने local forum post में किसी ने उसी area के बारे में लिखा था।
Post पाँच साल पुराना था।
Title था:
“Why are there no birds near the old field?”
Aarav की उंगलियाँ keyboard पर रुक गईं। उसने post खोला।
Text छोटा था। किसी ने लिखा था कि कुछ दिनों तक field के आसपास birds और dogs कम हो गए थे। लोगों ने मज़ाक में comments किए थे। किसी ने कहा था construction की वजह से। किसी ने कहा था मौसम। फिर एक comment था:
“Don't go there after sunset.”
Aarav ने comment दोबारा पढ़ा। उस account का नाम random था।
Profile unavailable.
उसने comments नीचे scroll किए। कुछ और नहीं।
Post के नीचे date थी। पाँच साल पहले।
Aarav ने screenshot लिया। फिर उसने date notebook में लिखी। “5 years ago — same area.”
उसकी धड़कन तेज़ हो गई। अब यह सिर्फ पिछले दो दिनों की घटना नहीं थी। *** अगली सुबह Aarav ने Kabir और Meera को post दिखाया।
Kabir ने कहा, “Fake भी हो सकता है।” “हो सकता है.”
Meera ने कहा, “लेकिन अगर fake नहीं?”
Aarav ने जवाब नहीं दिया। तीनों ने एक साथ park की तरफ देखा।
Gate अब भी बंद था। लेकिन अंदर एक नया सफेद tent लगा था। और उसके पास तीन लोग खड़े थे। एक ने yellow protective suit पहना हुआ था। दूसरा device लेकर जमीन scan कर रहा था। तीसरा phone पर किसी से बात कर रहा था।
Kabir ने कहा, “अब तो definitely maintenance नहीं है।”
Aarav ने सिर हिलाया। फिर उसने देखा— tent के पीछे ground पर कुछ black marks थे। बहुत पतले। तीन नहीं। इस बार पाँच। और वे marks park से बाहर की तरफ जा रहे थे।
Aarav ने अपनी notebook बंद कर दी। “हमें पता लगाना होगा कि ये कहाँ तक जाते हैं।”
Meera ने पूछा, “और अगर बहुत दूर तक गए?”
Aarav ने park से बाहर सड़क की तरफ देखा। उसकी नजर धीरे-धीरे उस खाली field पर टिक गई। “तब शायद park problem नहीं है।”
Kabir ने उसकी तरफ देखा। “फिर?”
Aarav ने धीमे से कहा— “शायद park सिर्फ शुरुआत है।” *** उस शाम Aarav अकेला नहीं था। उसने अपनी cycle ली और field के दूसरे side जाने का फैसला किया। वह मुख्य सड़क से नहीं गया। पीछे की छोटी गली से घूमकर field के किनारे पहुँचा। सूरज डूब रहा था। आसमान नारंगी से गहरा नीला हो रहा था। उसने cycle एक पेड़ के पास छोड़ी। और grass के बीच चलने लगा। कुछ कदम बाद उसे वही dark marks दिखे। तीन नहीं। पाँच। वे मिट्टी पर बने थे। जैसे किसी भारी चीज़ ने grass को दबाते हुए रास्ता बनाया हो।
Aarav नीचे झुका। उसने मिट्टी को छुआ। ठंडी। फिर उसने दूसरी जगह छुई। वहाँ मिट्टी थोड़ी गर्म थी। उसने हाथ पीछे खींच लिया। “ये क्या…”
दूर से dog के भौंकने की आवाज़ आई।
Aarav ने सिर उठाया। एक dog field के बाहर खड़ा था। वह अंदर नहीं आ रहा था। उसकी नजर Aarav पर नहीं थी। वह Aarav के पीछे देख रहा था।
Aarav धीरे-धीरे मुड़ा। कुछ नहीं। सिर्फ grass। उसने फिर dog की तरफ देखा।
Dog ने एक कदम पीछे लिया। फिर दूसरा। फिर वह भाग गया।
Aarav के गले में कुछ अटक गया। उसने पीछे दोबारा देखा। अब भी कुछ नहीं। लेकिन उसे साफ महसूस हो रहा था— वह अकेला नहीं था। अचानक उसके phone में vibration हुआ। कोई message नहीं।
Screen पर सिर्फ एक notification आया:
NO SIGNAL.
फिर एक दूसरा:
LOCATION UNAVAILABLE.
Aarav ने screen बंद कर दी। दूर field के बीच कहीं से वही आवाज़ आई। टिक। वह आवाज़ इस बार जमीन के नीचे से नहीं आई थी। ऐसा लगा जैसे कोई चीज़ उसके पीछे, बहुत पास खड़ी होकर किसी hard surface पर हल्के से उंगली मार रही हो। टिक।
Aarav ने साँस रोक ली। तीसरी आवाज़ आने से पहले उसने दौड़ना शुरू कर दिया। *** घर पहुँचकर उसने दरवाज़ा बंद किया। माँ ने पूछा, “इतनी जल्दी क्यों आए?”
“कुछ नहीं.”
“चेहरा क्यों उतर गया?”
“कुछ नहीं.”
वह अपने कमरे में चला गया। उसने shoes उतारे। फिर देखा— जूते की sole पर मिट्टी लगी थी। वही काली मिट्टी। उसने tissue से थोड़ा हिस्सा उठाया। टेबल पर रखा। फिर उसे याद आया— park में भी वही मिट्टी थी। उसने दोनों samples को side by side रखा। रंग लगभग एक जैसा।
Texture भी। उसके हाथ काँपने लगे। अगर field और park की मिट्टी एक जैसी थी…
तो शायद दोनों जगहें अलग नहीं थीं। शायद उनके नीचे कुछ connected था। उसने notebook खोली। आज की आखिरी line लिखी:
“Park and field may be connected.”
फिर वह कुछ सेकंड सोचता रहा। और उसके नीचे एक और line:
“Find out what is under them.”
उसने pen रख दिया। बाहर रात पूरी तरह उतर चुकी थी।
Aarav ने खिड़की की तरफ देखा। इस बार उसने curtain नहीं खोला। क्योंकि कमरे की दीवार पर— बहुत हल्की नीली रोशनी की एक पतली line दिखाई दे रही थी। वह line window से नहीं आ रही थी। वह जमीन से ऊपर नहीं उठ रही थी। वह जैसे— दीवार के अंदर से आ रही थी।
Aarav धीरे-धीरे उसके पास गया। उसने हाथ आगे बढ़ाया। और पहली बार उसे लगा कि शायद वह सिर्फ किसी आने वाली चीज़ को देख नहीं रहा था। शायद कोई चीज़ भी उसे देख रही थी।
Wild Zone
Chapter 4 — The Distortion
Audiobook Draft — ~2,690 words
— — — सुबह Aarav ने खिड़की के सामने खड़े होकर काफी देर तक उस दीवार को देखा। वही दीवार। वही कमरा। लेकिन रात को जो हल्की नीली line उसे दिखाई दी थी, अब वहाँ कुछ नहीं था। उसने हाथ से दीवार छुई। साधारण। ठंडी। उसने knuckle से दो बार tap किया। ठक। ठक। कोई आवाज़ अलग नहीं थी। उसने फिर tap किया। कुछ नहीं।
Aarav ने धीरे से हाथ नीचे कर लिया। “मैं overthink कर रहा हूँ।” वह यह बात पिछले तीन दिनों में शायद दसवीं बार बोल चुका था। लेकिन इस बार उसे खुद भी भरोसा नहीं था। उसने school bag उठाया और नीचे चला गया।
Breakfast table पर उसका छोटा भाई बैठा था। “आज wall से बात कर रहे थे?”
Aarav लगभग रुक गया। “तूने देखा?”
“सुबह देखा।” “और क्या देखा?”
“कुछ नहीं।” छोटे भाई ने पराठे का टुकड़ा तोड़ा। “तुम बहुत अजीब behave कर रहे हो।”
Aarav ने उसे घूरा। “तू दस साल का है।” “और तुम सोलह के।” “तो?”
“फिर भी मैं ज्यादा normal हूँ।”
Aarav हँस पड़ा। “खाना खा।” कुछ देर तक दोनों चुप रहे। फिर छोटे भाई ने अचानक पूछा— “कल रात बाहर कोई था?”
Aarav का हाथ रुक गया। “क्यों?”
“मुझे लगा कोई चल रहा था।” “कहाँ?”
“खिड़की के बाहर।” “तूने देखा?”
“नहीं।” “तो फिर?”
छोटे भाई ने कंधे उचकाए। “आवाज़ आई थी।”
Aarav ने कुछ नहीं कहा। उसे एक पल के लिए लगा कि उसे माँ या पिता को सब कुछ बता देना चाहिए। लेकिन वह क्या बताता?
एक strange plant?
Animals का behaviour?
Phones का time गलत होना?
पुराने tree marks?
और अब घर की दीवार?
इन सबको जोड़ने वाला उसके पास कोई proof नहीं था। सिर्फ observations थे। उसने तय किया कि पहले वह खुद समझेगा। फिर बताएगा। ***
School जाते समय सड़क पर unusually ज्यादा traffic था। दो police vehicles school के पीछे वाली road की तरफ खड़ी थीं।
Aarav ने cycle धीमी की। एक officer किसी guard से बात कर रहा था।
Park की तरफ जाने वाली छोटी road पर temporary barricade लगा था।
Aarav ने Kabir को call किया। “कहाँ है?”
“Gate पर।” “पीछे वाली road देख।” कुछ सेकंड बाद Kabir ने कहा—
“Police?”
“हाँ।” “अब क्या?”
“पता नहीं।”
Meera भी gate पर पहुँच गई। तीनों ने दूर से barricade देखा।
Meera ने कहा, “अब ये school level की बात नहीं रही।”
Kabir ने धीरे से कहा, “Maybe कोई accident हुआ।”
Aarav ने सिर हिलाया। “हो सकता है।” लेकिन उसे पता था कि यह वही answer था जो लोग तब देते हैं जब उनके पास असली answer नहीं होता। ***
Assembly के बाद principal ने announcement किया।
“Students को school के rear section में जाने की अनुमति नहीं है। सभी निर्धारित routes का ही उपयोग करें।” बस इतना। कोई explanation नहीं।
Aarav ने Kabir की तरफ देखा।
Kabir ने आँखों से ही कहा—“Told you.”
Physics class में भी Aarav का ध्यान नहीं लगा।
Teacher board पर equations लिख रहे थे।
Aarav notebook खोलकर लिखने की कोशिश करता रहा। लेकिन उसकी नजर बार-बार window की तरफ जाती।
Park दिखाई नहीं दे रहा था। आज वहाँ temporary white sheets लगा दी गई थीं। कुछ लोग अंदर जा रहे थे। उनमें वही dark jacket वाला आदमी भी था।
Aarav ने उसे तुरंत पहचान लिया। उस आदमी के हाथ में वही छोटा scanning device था। इस बार उसके साथ तीन और लोग थे। एक woman.
एक older man.
और एक person जिसने protective gloves पहने थे।
Aarav ने notebook के corner पर उनके rough sketches बना लिए। “क्या कर रहे हो?”
Teacher की आवाज़ आई।
Aarav सीधा बैठ गया।
“Nothing, sir.”
“Notes पर ध्यान दीजिए।”
“Yes, sir.”
वह फिर board की तरफ देखने लगा। लेकिन अब उसके दिमाग में एक नया सवाल था। अगर authorities park में कुछ investigate कर रही थीं, तो उन्होंने school को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी?
***
Lunch में Meera ने एक printed page table पर रखा। “मुझे कुछ मिला।”
Kabir ने पूछा, “क्या?”
“Old municipal map.”
Aarav ने page लिया।
Park और field दोनों उसमें marked थे। उनके बीच एक narrow underground drainage line थी।
Aarav ने map को ध्यान से देखा। “ये line?”
“पुरानी drainage.”
“कितनी पुरानी?”
“Map 18 years old है।”
Kabir ने कहा, “तो?”
Meera ने finger से line follow की। “ये school के पीछे से जाती है।” फिर आगे।
“Field के नीचे।” और फिर— “यहाँ खत्म नहीं होती।”
Aarav ने पूछा, “कहाँ जाती है?”
Meera ने page पलटा। दूसरे map में वही line आगे दिखाई दे रही थी। एक पुराने खाली plot तक। और वहाँ से एक abandoned water-treatment structure तक।
Kabir ने कहा, “वहाँ कोई जाता है?”
“शायद नहीं।”
Aarav ने map fold किया।
“School के बाद चलेंगे।”
Kabir ने तुरंत कहा, “नहीं।”
Meera ने उसकी तरफ देखा। “क्यों?”
“क्योंकि अभी police park में है।”
Aarav ने कहा, “हम park में नहीं जा रहे।”
Kabir ने माथा पकड़ा। “हर बार यही बोलता है।” ***
School खत्म होने के बाद वे तीनों main road से नहीं गए। उन्होंने पहले पुराने drainage line वाले area को देखने का फैसला किया। शुरुआत में कुछ खास नहीं मिला। एक टूटी boundary। कुछ weeds। पुराने concrete slabs। फिर एक जगह मिट्टी बाकी जगह से अलग दिखी।
Aarav नीचे बैठ गया। उसने हाथ से मिट्टी हटाई। नीचे concrete का edge था। “यह drainage line है।”
Meera ने कहा, “हाँ।”
Kabir ने चारों तरफ देखा। “यह जगह creepy है।” “तू हर जगह creepy बोलता है।” “क्योंकि हर जगह तुम मुझे ले आते हो।” वे concrete के साथ-साथ आगे बढ़े। कुछ जगह line जमीन के अंदर गायब हो जाती। कुछ जगह पुराने pipes दिखाई देते। फिर एक point पर Aarav रुक गया। एक pipe के पास तीन vertical scratches थे। वही pattern। उसने Meera को बुलाया। “ये देख।”
Meera झुक गई।
“Same marks.”
Kabir ने कहा, “Maybe construction marking.”
Aarav ने pipe के आसपास देखा। “लेकिन ये marks पुराने हैं।” “तो?”
“और park वाले tree पर भी।”
Meera ने पूछा, “क्या ये कोई route marker हो सकता है?”
Aarav ने पहली बार इस possibility को seriously सोचा। “शायद।” उसने notebook में दोनों locations लिखीं।
Park.
Drainage line.
उसने उनके बीच एक line खींची। फिर तीसरी location—
Field.
एक और line।
Pattern सीधा नहीं था। लेकिन तीनों points एक छोटे area के अंदर जुड़े हुए थे।
Aarav ने कहा— “ये random नहीं हो सकता।” *** तभी पीछे से आवाज़ आई। “तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो?”
तीनों एक साथ मुड़े। एक security guard खड़ा था।
Kabir ने तुरंत कहा, “बस घूम रहे थे।”
Guard ने Aarav की तरफ देखा। “यह restricted area है।”
“Sorry.”
“School वापस जाओ।”
Aarav ने सिर हिलाया। वे पीछे हटने लगे। तभी guard ने पूछा— “तुमने ये marks देखे?”
Aarav रुक गया।
Guard ने pipe की तरफ देखा। “कौन से marks?”
Aarav ने झूठ बोलने से पहले एक सेकंड सोचा। “कुछ नहीं।”
Guard ने उसे ध्यान से देखा। फिर कहा— “जाओ।” तीनों वहाँ से निकल गए। कुछ दूर पहुँचने के बाद Kabir ने कहा— “उसने खुद marks के बारे में पूछा।”
Meera ने कहा, “हाँ।”
Aarav चुप था। उसे guard की आँखें याद थीं। वह surprised नहीं था। वह worried था। *** अगली सुबह Aarav ने school library में पुराने newspapers देखे। उसने last five years के local reports search किए। कई useless results।
Road accidents.
Construction.
Weather.
School events.
फिर उसे एक छोटा article मिला।
Headline:
“Local Area Reports Unusual Animal Movement.”
Date—चार साल पुरानी।
Article बहुत छोटा था। कुछ residents ने बताया था कि रात में dogs एक specific road से बच रहे थे।
Municipality ने इसे “temporary environmental disturbance” कहा था।
Aarav ने article की photo ले ली। उसने location पढ़ी। वही area। वही field। उसने दूसरा article search किया। तीन साल पुराना।
“Residents Notice Sudden Silence in Green Belt.”
फिर वही area। एक और। दो साल पुराना।
“Streetlight Failures Under Investigation.”
फिर वही area।
Aarav की उंगलियाँ keyboard पर रुक गईं। अब उसके पास coincidence से ज्यादा था। हर साल कुछ न कुछ।
Animal behavior.
Silence.
Electrical failures.
और इस बार—
Plant growth.
Signal loss.
Time error.
उसने notebook खोली। उसने चारों साल लिखे।
- 5 years ago — birds/dogs - 4 years ago — animal avoidance - 3 years ago — unusual silence - 2 years ago — electrical failures - now — multiple anomalies उसने नीचे लिखा:
“Pattern repeats.”
फिर उसने तारीखों के बीच अंतर देखा। लगभग एक साल। फिर लगभग एक साल। फिर एक साल। इस बार anomalies जल्दी शुरू हो गई थीं।
Aarav के अंदर एक ठंडी-सी feeling आई। “क्या ये हर साल बढ़ रहा है?”
***
Lunch में उसने सब कुछ Kabir और Meera को दिखाया।
Kabir ने पहले मज़ाक नहीं किया। “अगर ये सब real है…”
“तो?”
“तो किसी को पहले से पता होगा।”
Meera ने कहा, “Government?”
Aarav ने कहा, “Maybe.”
“Research institute?”
“Maybe.”
“Private company?”
“Maybe.”
Kabir ने पूछा, “और अगर कोई नहीं जानता?”
Aarav ने उसकी तरफ देखा। “तब problem बड़ी है।” कुछ सेकंड तक तीनों चुप रहे। फिर Meera ने कहा— “हमें park के अंदर क्या है, ये पता करना होगा।”
Aarav ने सिर हिलाया। “लेकिन अभी नहीं।”
Kabir ने राहत की साँस ली।
“Thank you.”
Aarav ने कहा— “रात में।”
Kabir की राहत तुरंत खत्म हो गई। “मैं वापस लेता हूँ।” *** उस शाम तीनों ने अपने घरों में अलग-अलग बहाने बनाए।
Aarav ने कहा कि वह Kabir के घर group study करने जा रहा है।
Meera ने कहा कि school project है।
Kabir ने कहा कि वह library जा रहा है। तीनों जानते थे कि वे झूठ बोल रहे हैं। लेकिन किसी ने किसी को रोकने की कोशिश नहीं की। रात 8:30 पर वे park से दो गलियाँ दूर मिले।
Aarav के पास flashlight थी।
Meera के पास power bank, notebook और छोटा first-aid kit।
Kabir के पास backpack और तीन पानी की bottles। “हम सिर्फ दस मिनट,” Kabir ने कहा।
Aarav ने कहा, “हाँ।” “और अगर कुछ मिला?”
“बाहर।” “और अगर कुछ बहुत weird मिला?”
“बाहर।” “और अगर—”
Meera ने कहा, “चल।” तीनों आगे बढ़े।
Park के आसपास रात में कोई street noise नहीं थी।
Main road की आवाज़ दूर से आ रही थी। लेकिन park के पास आते ही वह भी कम होती गई।
Aarav ने flashlight बंद कर दी। अंधेरे में आँखें adjust होने लगीं।
Temporary white sheets अब हवा में हल्की हिल रही थीं।
Gate बंद था। लेकिन fence का एक हिस्सा पहले की तरह टूटा हुआ था। वे अंदर गए। *** रात का park दिन के park से अलग था। बहुत अलग। पेड़ों की परछाइयाँ लंबी थीं।
Grass पर dew जमा था। और सबसे strange बात— कोई insect sound नहीं।
Aarav ने phone recording शुरू की। “8:47 PM.”
उसकी आवाज़ भी उसे अजीब लगी। बहुत धीमी। जैसे park आवाज़ को निगल रहा हो।
Kabir ने फुसफुसाकर कहा— “मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा।”
Meera ने कहा, “मुझे भी नहीं।” वे plant की तरफ बढ़े।
Plant अब इतना बड़ा था कि उसकी upper leaves Aarav की chest तक पहुँच रही थीं। उसने flashlight की हल्की रोशनी डाली।
Leaves पर वही faint blue residue था। लेकिन अब वह सिर्फ एक बूंद नहीं थी। कई पत्तियों के किनारे हल्की blue lines चमक रही थीं।
Aarav आगे बढ़ा। “मत छूना,” Meera ने कहा। “नहीं छू रहा।” उसने camera zoom किया।
Screen पर blue lines साफ दिखाई दीं। फिर camera glitch हुआ। एक पल के लिए screen पर plant नहीं था। उसकी जगह एक अलग image दिखाई दी।
Aarav ने phone नीचे कर दिया। “क्या हुआ?”
“कुछ नहीं।” “क्या देखा?”
“मुझे नहीं पता।” उसने फिर screen देखी। अब normal.
Kabir ने पूछा, “क्या?”
Aarav ने जवाब नहीं दिया। उसे लगा था कि screen पर park की जगह कोई दूसरी जगह दिखाई दी थी। घास। लेकिन grass अलग थी। आसमान का रंग भी अलग। और बहुत दूर— कुछ काला खड़ा था। उसने फिर camera देखा। कुछ नहीं। *** वे plant के पास पहुँचे।
Aarav ने जमीन देखी। तीन vertical marks नहीं थे। इस बार पाँच थे। और उनके बीच एक curved line थी।
Meera ने कहा, “ये नया है।” “हाँ।”
Kabir ने धीरे से पूछा, “किसने बनाया?”
किसी ने जवाब नहीं दिया। फिर— टिक।
Aarav ने सिर उठाया। टिक। आवाज़ plant के पीछे से आई। वह धीरे-धीरे घूमने लगा। कुछ नहीं। फिर तीसरी आवाज़। टिक। इस बार आवाज़ उनके सामने से आई।
Aarav ने flashlight घुमाई। पेड़ों के बीच कुछ हल्का-सा distort हुआ। जैसे हवा गरम surface के ऊपर काँपती है। लेकिन यहाँ हवा ठंडी थी।
Distortion धीरे-धीरे बड़ा हुआ। एक छोटी vertical line। फिर दूसरी। फिर बीच में अंधेरा।
Kabir पीछे हट गया। “ये क्या है?”
Meera की आवाज़ बहुत धीमी थी। “मुझे नहीं पता।”
Aarav ने एक कदम आगे बढ़ाया।
Distortion के पीछे कुछ दिखाई दिया। पहले सिर्फ रंग। फिर जमीन। फिर पेड़। लेकिन वे पेड़ इस park के नहीं थे। उनकी trunks बहुत मोटी थीं। उनकी leaves अजीब थीं। आसमान गहरा लाल-सा था। और दूर कोई चमकती हुई चीज़ दिखाई दे रही थी।
Aarav की साँस रुक गई। उसने समझने की कोशिश की कि वह क्या देख रहा है। “ये…”
उसकी आवाज़ नहीं निकली।
Kabir ने उसका कंधा पकड़ लिया। “पीछे।”
Distortion काँपा। एक पल के लिए पूरा दृश्य साफ हुआ। दूसरी तरफ— एक विशाल खुला landscape था। और वहाँ कुछ चल रहा था। चार पैरों पर। बहुत बड़ा। उसने सिर उठाया। सीधे उनकी तरफ।
Aarav ने महसूस किया कि उसकी आँखें दिखाई नहीं दे रही थीं। फिर भी उसे यकीन था— वह creature उन्हें देख रहा था।
Distortion अचानक सिकुड़ गया। एक तेज़ pressure wave जैसी sensation हुई। तीनों जमीन पर गिर पड़े।
Flashlight बंद।
Phone हाथ से गिरा। कुछ सेकंड तक सिर्फ ringing sound।
Aarav ने कान पकड़ लिए। फिर— सब शांत। उसने आँखें खोलीं।
Park वापस normal था। लेकिन हवा बदल चुकी थी। अब insects की आवाज़ें धीरे-धीरे लौट रही थीं। दूर कोई dog भौंका।
Kabir ने काँपते हुए पूछा— “वो क्या था?”
Aarav ने जमीन पर पड़े phone को उठाया।
Screen cracked थी। लेकिन recording चल रही थी। उसने उसे देखा। फिर उसने वही एक बात कही— “हमने अभी कुछ देखा है।”
Meera ने पूछा— “क्या?”
Aarav ने park के उस खाली हिस्से की तरफ देखा जहाँ distortion था। “कुछ ऐसा… जो यहाँ होना नहीं चाहिए।” उसी समय phone screen पर recording अपने आप बंद हो गई। और screen पर सिर्फ एक frame बचा। दूसरी तरफ की दुनिया का। तीन पेड़। लाल आसमान। और दूर खड़ा एक विशाल silhouette।
Aarav ने frame save कर लिया। उसने phone बंद किया। “अब चलते हैं।” इस बार किसी ने विरोध नहीं किया। *** घर पहुँचने के बाद Aarav ने कमरे की light बंद कर दी। उसने phone laptop से connect किया।
Recording खोली। पहले कुछ मिनट normal थे।
Park.
उनकी आवाज़ें। टिक की आवाज़। फिर distortion। फिर image.
Aarav ने frame-by-frame video चलाया। एक frame। दूसरा। तीसरा। दूसरी दुनिया। उसने pause किया। फिर zoom। पेड़। घास। दूर silhouette। फिर उसने एक और चीज़ देखी।
Silhouette के पीछे जमीन पर कुछ बना था। तीन vertical lines.
और उनके नीचे— एक curved mark.
ठीक वही pattern जो park की जमीन पर था।
Aarav chair से पीछे हट गया। अब उसके पास एक ऐसा सवाल था जिसका जवाब वह किसी search engine से नहीं निकाल सकता था। अगर वह दूसरी जगह थी…
तो वह जगह कहाँ थी?
और अगर वह जगह किसी दूसरी दुनिया की थी— तो वह park के अंदर क्यों दिखाई दे रही थी?
उसने video दोबारा चलाया। इस बार distortion से ठीक पहले audio track पर एक faint sound था। टिक। फिर कुछ static। फिर— बहुत धीमी आवाज़।
Aarav ने volume बढ़ाया।
Noise के बीच शब्द जैसे उभर रहे थे। साफ नहीं। लेकिन एक syllable था। मानो कोई बहुत दूर से बोल रहा हो।
Aarav ने headphones उतार दिए। उसकी धड़कन तेज़ हो गई। वह आवाज़ इंसानी थी। शायद। या शायद उसके दिमाग ने ऐसा सुना था। उसने recording बंद कर दी। फिर उसने notebook खोली। पहली बार उसने आज की तारीख के नीचे कोई conclusion नहीं लिखा। उसने सिर्फ एक सवाल लिखा:
“अगर वह जगह दूसरी तरफ है…”
फिर कुछ सेकंड रुका। और लिखा— “तो दूसरी तरफ से यहाँ क्या आ रहा है?”
बाहर कहीं एक dog ने भौंकना शुरू किया। एक। दो। तीन बार। फिर अचानक सब शांत हो गया।
Aarav ने खिड़की की तरफ देखा। इस बार उसने curtain खोल दिया। खाली field के ऊपर आसमान साफ था। लेकिन दूर, बहुत दूर— एक पल के लिए नीली रोशनी चमकी। और फिर गायब हो गई।
Wild Zone
Chapter 5 — Nobody Believes You
Audiobook Draft — ~2,404 words
— — — सुबह Aarav ने recording किसी को नहीं भेजी। उसने रात में कई बार सोचा था कि Kabir और Meera को पूरी audio clip भेज दे। लेकिन हर बार वह रुक गया। उसे डर था कि अगर उसने voice वाला हिस्सा भेज दिया और वह सिर्फ noise निकला, तो वे दोनों उसे overthink करने वाला कहेंगे। और अगर आवाज़ सच में थी…
तो मामला और खराब था। उसने laptop बंद किया और school के लिए निकल गया। घर से बाहर आते ही उसने सबसे पहले field की तरफ देखा। नीली रोशनी नहीं थी। सिर्फ सुबह की धूप। सड़क पर लोग। एक चाय वाला। दो school buses। एक delivery bike।
Aarav ने धीरे से साँस छोड़ी।
“Normal.”
लेकिन अब यह शब्द उसे खुद भी भरोसा नहीं दिलाता था। ***
School gate पर Kabir उसका इंतज़ार कर रहा था। “कल रात जो देखा…”
Aarav ने तुरंत कहा, “School के बाद।”
Kabir ने उसकी आँखों में देखा। “तूने भी सुना था?”
“क्या?”
“वही आवाज़।”
Aarav कुछ सेकंड चुप रहा। फिर उसने सिर हिलाया। “हाँ।”
Kabir ने राहत की तरह साँस छोड़ी।
“Good.”
“Good?”
“मतलब मैं अकेला नहीं था।”
Meera भी वहीं आ गई। “क्या हुआ?”
Kabir ने कहा, “हम दोनों ने वही आवाज़ सुनी।”
Meera ने दोनों को देखा। “कौन-सी?”
Aarav ने कहा, “Recording में।” उसने phone निकाला। तीनों school के एक शांत corner में चले गए।
Aarav ने audio खोली। पहले normal sounds। हवा। उनके कदम। टिक।
Static। फिर faint आवाज़। बहुत धीमी। इतनी धीमी कि शब्द पहचानना मुश्किल था।
Meera ने volume बढ़ाया। “फिर से।”
Aarav ने replay किया। इस बार आवाज़ थोड़ी साफ लगी। जैसे कोई बहुत दूर से बोल रहा हो।
Meera ने headphones लगाए। उसने कुछ सेकंड सुना। फिर headphones निकाल दिए। “क्या कहा?”
“पता नहीं।”
Kabir ने कहा, “मुझे लगा 'आओ' जैसा कुछ था।”
Aarav ने कहा, “मुझे भी।”
Meera ने तुरंत जवाब नहीं दिया। “हो सकता है audio artifact हो।”
Kabir ने पूछा, “और distortion?”
“उसका क्या?”
“वो भी artifact?”
Meera ने कहा, “मैं ये नहीं कह रही कि सब fake है। मैं बस कह रही हूँ कि हमें conclusion पर jump नहीं करना चाहिए।”
Aarav ने सिर हिलाया।
“Exactly.”
लेकिन उसके अंदर कुछ और कह रहा था। जो उन्होंने देखा था, वह सिर्फ camera glitch नहीं था। ***
Physics class में Aarav ने teacher से permission लेकर एक सवाल पूछा।
“Sir, अगर किसी जगह पर mobile signals और electronic devices अचानक malfunction करने लगें, तो उसका कारण क्या हो सकता है?”
Teacher ने marker रखा। “कई कारण हो सकते हैं।” “जैसे?”
“Electromagnetic interference, equipment fault, power fluctuation, strong nearby transmitter…”
Aarav ने पूछा, “और अगर तीन अलग-अलग phones एक ही समय पर…”
Teacher ने उसे रोक दिया।
“Specific incident?”
Aarav रुक गया। “नहीं sir. General question.”
Teacher ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“General questions का answer भी general ही होगा। अगर कोई real incident है तो details के साथ बताइए।”
Class के कुछ students हँसने लगे।
Aarav चुप हो गया। उसे लगा कि शायद अभी बताना ठीक नहीं।
Teacher ने फिर कहा— “और याद रखिए, unusual observation का मतलब supernatural नहीं होता।” कुछ students फिर हँसे।
Aarav ने कुछ नहीं कहा। लेकिन वह line उसके दिमाग में रह गई।
Unusual observation का मतलब supernatural नहीं होता। सही। लेकिन दूसरी दुनिया?
वह किस category में आती थी?
***
Lunch में Kabir ने कहा, “हमें किसी adult को बताना चाहिए।”
Meera ने कहा, “किसे?”
“Teacher.”
“और क्या बताएँगे?”
Kabir ने Aarav की तरफ देखा। “पूरी बात।”
Aarav ने कहा, “नहीं।” “क्यों?”
“क्योंकि अभी हमारे पास proof नहीं है।”
Kabir ने phone उठाया।
“Video है।”
“Video में कुछ साफ नहीं।”
“Audio है।”
“Voice साफ नहीं।”
Meera ने कहा, “और अगर हम किसी authority को बताएँ और उन्होंने सब confiscate कर लिया तो?”
Kabir चुप हो गया।
Aarav ने उसकी तरफ देखा। “हमें पहले समझना होगा कि हमने क्या देखा।” “लेकिन अगर danger हुआ?”
Aarav कुछ सेकंड सोचता रहा। “तब बताएँगे।”
Kabir ने कहा, “और अगर danger अभी है?”
इस बार Aarav के पास तुरंत जवाब नहीं था। *** उसी शाम उन्होंने park से दूर एक café के पीछे बैठकर recording फिर सुनी।
Meera ने laptop पर waveform खोला। “यहाँ देखो।” उसने static वाले हिस्से को zoom किया।
“Voice इस हिस्से में है।”
Aarav ने पूछा, “तो?”
“Voice और distortion लगभग same timestamp पर हैं।”
Kabir ने कहा, “मतलब?”
“मतलब ये दोनों events connected हो सकते हैं।”
Aarav ने पूछा, “क्या तुम voice साफ कर सकती हो?”
“Try कर सकती हूँ।” लगभग बीस मिनट बाद audio का background noise कम हुआ। तीनों headphones के पास झुक गए। आवाज़ फिर आई। इस बार कुछ syllables साफ थे। “…इधर…”
फिर static। “…मत…”
फिर कुछ अस्पष्ट।
Kabir ने कहा, “किसी ने कहा 'इधर मत'।”
Aarav ने recording pause कर दी।
Meera ने सिर हिलाया। “हो सकता है।” “या?”
“या हम वही सुन रहे हैं जो सुनना चाहते हैं।”
Aarav ने laptop screen की तरफ देखा। “फिर distortion के अंदर जो landscape था?”
Meera चुप हो गई। *** रात में Aarav ने parents को बताने का फैसला किया।
Dinner के बाद उसने कहा—
“Papa, school के पीछे कुछ problem है।” पिता ने उसकी तरफ देखा। “क्या problem?”
“Park बंद कर दिया गया है।” “हाँ, सुना है।” “वहाँ कुछ investigation हो रही है।”
“School administration देख रही होगी।”
Aarav ने कहा, “लेकिन वहाँ police भी है।” पिता ने खाना रोक दिया। “तुम वहाँ गए थे?”
“नहीं।” यह आधा सच था। “अच्छा है। दूर रहो।”
Aarav ने पूछा, “लेकिन अगर कोई danger हो?”
पिता ने शांत आवाज़ में कहा— “अगर government या school ने area बंद किया है, तो उसका मतलब है कि वहाँ जाना नहीं है।” “लेकिन अगर हमें पता ही नहीं कि क्या हो रहा है?”
“हर चीज़ जानना जरूरी नहीं होता।”
Aarav चुप रहा। पिता ने उसकी तरफ देखा। “तुम्हारी पढ़ाई important है। अभी तुम्हें इन चीज़ों में पड़ने की जरूरत नहीं।”
Aarav ने कहा, “अगर कुछ serious हुआ तो?”
“तो responsible लोग handle करेंगे।” यह sentence सुनकर Aarav को अजीब-सा लगा। क्योंकि उसके experience में responsible लोग शायद वही लोग थे जो park में scanners लेकर घूम रहे थे। और वे भी नहीं जानते थे कि वहाँ क्या था। या शायद जानते थे। लेकिन बता नहीं रहे थे। *** अगले दिन सुबह school पहुँचते ही एक नया notice लगा था।
“Rear Block temporarily closed.”
Aarav ने notice पढ़ा। नीचे कोई reason नहीं था। बस एक contact number। उसने number की photo ले ली।
Kabir ने कहा, “अब तो पूरा school suspicious लग रहा है।”
Meera ने पूछा, “तुझे पता है कल रात park में क्या हुआ?”
“नहीं।” “फिर?”
“बस vibe।”
Aarav हँसा।
“Vibe scientist।”
Kabir ने कहा, “हँस ले।” तीनों आगे बढ़ गए। लेकिन दोपहर तक school में rumors फैलने लगे। किसी ने कहा park में gas leak हुई थी। किसी ने कहा underground pipe burst हुआ। किसी ने कहा कोई animal मिला था। एक student ने कहा— “मेरे cousin ने बोला वहाँ dead birds मिले।” दूसरे ने कहा— “नहीं, government testing कर रही है।” तीसरे ने कहा—
“Aliens आए हैं।” पूरी class हँस पड़ी।
Aarav नहीं हँसा। क्योंकि उसके पास किसी answer का proof नहीं था। *** उस दिन Physics lab में फिर power flicker हुई। इस बार सिर्फ दो सेकंड के लिए। लेकिन Aarav ने तुरंत अपनी watch देखी।
12:43.
उसकी watch एक पल के लिए बंद हुई। फिर वापस चालू हुई।
Time था—
12:37.
छह मिनट पीछे। वही अंतर।
Aarav का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने watch को हाथ से थपथपाया।
Time फिर 12:43 हो गया। उसने किसी को नहीं बताया। लेकिन Meera ने देख लिया। “फिर?”
Aarav ने सिर हिलाया।
“Six minutes.”
Kabir ने पूछा, “क्या?”
Meera ने उसे चुप कराया।
Class खत्म होने के बाद वे तीनों washroom के पीछे वाले खाली corridor में मिले।
Aarav ने कहा— “यह coincidence नहीं है।”
Meera ने पूछा, “क्यों?”
“हर बार छह minutes.”
Kabir ने कहा, “लेकिन क्यों छह?”
Aarav ने जवाब नहीं दिया। उसने अपनी notebook में एक नया heading बनाया:
TIME ERROR.
नीचे तीन entries:
Park — 6 minutes.
Phones — 6 minutes.
Watch — 6 minutes.
फिर उसने लिखा:
“Only during anomaly?”
Meera ने कहा, “हमें test करना होगा।”
Kabir ने उसे देखा। “कैसे?”
“एक controlled test।”
Aarav ने कहा, “अगर हम park के पास गए…”
Kabir ने तुरंत कहा, “नहीं।” “सिर्फ बाहर।” “नहीं।”
Meera ने कहा, “अभी नहीं।”
Aarav ने पूछा, “क्यों?”
“क्योंकि हमें पहले ये पता करना होगा कि anomaly किस चीज़ से trigger होती है।” “और वो कैसे पता चलेगा?”
Meera ने कहा—
“Observation.”
Aarav मुस्कुराया।
“Physics class का असर।” *** उन्होंने अगले तीन दिन data collect किया। हर दिन एक ही समय पर park के बाहर से readings।
Temperature.
Phone signal.
Watch time.
Animal count.
Light status.
कुछ नहीं हुआ। पहले दिन normal। दूसरे दिन normal। तीसरे दिन भी normal।
Aarav परेशान हो गया। “तो फिर?”
Meera ने कहा, “शायद anomaly random है।”
Kabir ने कहा, “या हमारी presence से।”
Aarav ने उसकी तरफ देखा। “मतलब?”
“जब हम अंदर जाते हैं तभी।”
Aarav ने सोचा। यह possibility उसे पसंद नहीं आई। अगर सही थी, तो उनका खुद वहाँ जाना trigger हो सकता था। उसने notebook में लिखा:
“Human presence?”
फिर उसने काट दिया।
“Insufficient evidence.”
उसी शाम एक और घटना हुई।
School के बाहर एक stray dog मिला। वह घायल नहीं था। लेकिन उसकी आँखें एक direction पर fixed थीं।
Aarav ने उस direction में देखा।
School नहीं।
Park नहीं।
Field भी नहीं। बल्कि सड़क के उस पार एक पुरानी खाली building।
Dog धीरे-धीरे उस building की तरफ बढ़ा। फिर अचानक रुक गया। उसने जमीन सूँघी। और वापस भाग गया।
Aarav ने building की तरफ देखा। उसने पहले कभी उस building पर ध्यान नहीं दिया था।
Meera ने कहा— “हमारे pattern में एक और point जोड़ो।”
Aarav ने notebook खोली।
“Old building.”
उसने map पर उसका location mark किया। अब चार points थे।
Park.
Field.
Drainage line.
Old building.
उसने map पर चारों को जोड़ने की कोशिश की।
Lines random नहीं थीं। वे एक irregular shape बना रही थीं। बीच में एक छोटा खाली हिस्सा था।
Aarav ने पूछा— “यहाँ क्या है?”
Meera ने map zoom किया। “कुछ नहीं।” “कुछ तो होगा।”
“Map पर empty plot है।”
Kabir ने कहा— “तो कल वहाँ चलते हैं।”
Aarav ने उसे देखा। “तू खुद बोल रहा है?”
Kabir ने कहा, “मुझे भी curiosity है।” *** अगली दोपहर वे उस empty plot तक पहुँचे। वहाँ घास बहुत ऊँची थी। एक तरफ टूटी concrete wall। दूसरी तरफ abandoned building। बीच में मिट्टी।
Aarav ने चारों तरफ देखा। कुछ नहीं।
Meera ने जमीन पर कुछ notice किया। “यहाँ आओ।” मिट्टी में एक circular depression था। लगभग एक meter चौड़ा। उसके किनारे पर वही dark marks। लेकिन इस बार तीन lines नहीं थीं। एक पूरा pattern था। तीन vertical lines। उनके बीच curved line। और center में एक छोटा circle।
Aarav ने धीरे से कहा— “यह वही है।”
Kabir ने पूछा— “क्या?”
Aarav ने park वाली photo निकाली।
Pattern match कर रहा था। लेकिन पूरी तरह नहीं। यहाँ symbol ज्यादा complete था।
Meera ने कहा— “अगर ये markings route markers हैं…”
Aarav ने बात पूरी की। “…तो ये किसी चीज़ की तरफ जा रहे हैं।” उसने map निकाला। चार points के बीच imaginary lines draw कीं। फिर center mark किया। वह empty plot के ठीक आसपास था।
Kabir ने कहा— “तो नीचे क्या है?”
Aarav ने जमीन की तरफ देखा। “पता नहीं।” उसी समय नीचे से हल्की vibration महसूस हुई। इतनी हल्की कि शायद imagination हो। लेकिन तीनों ने एक-दूसरे को देखा। फिर— टिक। इस बार आवाज़ उनके पैरों के नीचे से आई।
Kabir पीछे हट गया। “चलो।”
Aarav ने जमीन पर हाथ रखा।
Meera ने कहा—
“Aarav, मत।” उसने हाथ नहीं हटाया। वibration दोबारा आई। टिक। फिर— एक बहुत हल्की नीली line मिट्टी के नीचे चमकी।
Aarav ने हाथ तुरंत पीछे खींच लिया। तीनों पीछे हटे। कुछ सेकंड तक जमीन स्थिर रही। फिर blue line गायब।
Aarav की धड़कन तेज़ थी। “हमने इसे activate किया?”
Meera ने कहा— “शायद।”
Kabir ने पूछा— “अब?”
Aarav ने आसपास देखा। “अब घर।” *** उस रात Aarav ने किसी को नहीं बताया। उसने सिर्फ data organize किया। उसने एक बड़ा map बनाया।
Park.
Field.
Drainage.
Old building.
Empty plot.
हर जगह वही pattern। फिर उसने center में एक circle बनाया। उसके अंदर लिखा:
UNKNOWN.
कुछ देर बाद उसने laptop बंद किया। तभी बाहर से आवाज़ आई। पहले हल्की। फिर तेज़। किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।
Aarav उठा। दरवाज़ा खोला। छोटा भाई सामने था। “क्या हुआ?”
“तुम्हारे कमरे की wall पर light क्यों है?”
Aarav का दिल रुक गया। “कौन-सी light?”
छोटा भाई उसे अंदर ले गया।
Aarav ने wall देखी। कुछ नहीं। “यहीं थी,” भाई ने कहा। “कहाँ?”
उसने wall के एक हिस्से की तरफ इशारा किया। ठीक उसी जगह जहाँ पिछली रात नीली line दिखाई दी थी।
Aarav ने हाथ लगाया। दीवार फिर ठंडी थी। लेकिन इस बार…
उसे अंदर से बहुत हल्की vibration महसूस हुई। टिक।
Aarav ने हाथ तुरंत हटा लिया। छोटे भाई ने पूछा— “क्या है?”
Aarav ने उसकी तरफ देखा। उसके चेहरे पर पहली बार वह expression था जिसमें मज़ाक बिल्कुल नहीं था। “तू अभी माँ के पास जा।” “क्यों?”
“बस।” छोटा भाई कुछ बोलने वाला था, लेकिन Aarav ने कहा—
“Please.”
वह चला गया।
Aarav अकेला रह गया। उसने दीवार को देखा। कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ। फिर नीली line धीरे-धीरे उभरी। बहुत पतली। बहुत faint। लेकिन साफ। इस बार line सिर्फ wall पर नहीं थी। उसके साथ एक दूसरी line जुड़ी। फिर तीसरी। फिर एक curved shape। कुछ ही सेकंड में दीवार पर वही symbol बन गया। वही symbol जो park में था। वही जो empty plot के नीचे चमका था।
Aarav पीछे हट गया।
Symbol के center में हल्की रोशनी जमा हुई। फिर— दीवार की सतह जैसे पानी की तरह काँपी।
Aarav ने आँखें नहीं झपकाईं। उस distortion के पीछे कोई landscape नहीं था। इस बार सिर्फ अंधेरा था। बहुत गहरा अंधेरा। और उस अंधेरे में— दो छोटी चमकती हुई चीज़ें। आँखें।
Aarav ने साँस रोक ली। वे आँखें कुछ सेकंड स्थिर रहीं। फिर अंधेरे के अंदर से एक आवाज़ आई। बहुत धीमी। बहुत दूर से। लेकिन इस बार शब्द साफ था। “आओ…”
Aarav पीछे हट गया।
Symbol बुझ गया। दीवार फिर normal हो गई। कमरे में सिर्फ उसकी धड़कन की आवाज़ थी। उसने तुरंत दरवाज़ा बंद किया। और पहली बार उसे समझ आया— कल रात park में जो distortion आया था, वह सिर्फ एक खिड़की नहीं थी। वह किसी दूसरी जगह की तरफ खुलता हुआ रास्ता था। और अगर वह आवाज़ सच में दूसरी तरफ से आई थी…
तो अब सवाल यह नहीं था कि वहाँ क्या है। सवाल यह था— वह यहाँ तक कैसे पहुँच गया?